मोबाइल गेमिंग की लत पड़ी भारी, यह पॉपुलर गेम खेलते-खेलते चली गई बच्चे की जान

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मोबाइल गेमिंग की लत को लेकर नई बहस शुरू कर दी है. यहां एक 13 वर्षीय बच्चे की कथित तौर पर फ्री फायर गेम खेलते हुए मौत हो गई. एक्सपर्ट्स इसे ‘सडन गेम डेथ’ का केस मान रहे हैं. यह ऐसा मामला होता है, जिसमें लगातार लंबे समय तक गेम खेलने के दौरान या उसके बाद अचानक लोगों की मौत हो जाती है. आइए पूरा मामला डिटेल में जानते हैं.

गेम-गेम खेलते हुई बच्चे की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेम खेलते हुए बच्चा बेड पर सो गया. परिजनों उसे पहले यह समझकर नहीं उठाया कि यह सो रहा है. कुछ देर बाद जब वह बार-बार जगाने पर भी नहीं जागा तो उन्हें पता चला कि बच्चे की मौत हो गई है. इससे इलाके में दहशत फैल गई. बता दें कि पिछले कुछ समय से टीनएजर्स के बीच मोबाइल गेमिंग खूब पॉपुलर हो रही है. इसके चलते नींद की कमी और मौत होने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. 

यह क्यों होता है?

मेडिकल रिसर्च में सामने आया है कि कई घंटों तक बिना रुके गेमिंग करने से स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं. लगातार एक ही पॉश्चर में बैठे रहने से फेफड़ों में खून के थक्के जमने लगते हैं. गेमिंग के दौरान दिमाग पर लगातार स्ट्रेस रहने से हार्टबीट का असामान्य होने और यहां तक की ब्रेन हेमरेज का भी खतरा रहता है.

क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सडन गेमर डेथ में किसी प्रकार की चोट नहीं लगती, लेकिन यह मानसिक सेहत पर प्रभाव डालती है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन और अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का कहना है कि यह कंडीशन इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर से जुड़ी हुई है, जिसमें गेमिंग की लत मानसिक स्वास्थ्य, पॉश्चर और हार्ट की एक्टिविटी को प्रभावित करती है. 1982 के बाद से लेकर अब तक दुनियाभर में सडन गेम डेथ के 24 केस रिपोर्ट हो चुके हैं. ऐसे मामलों में मरने वालों की उम्र 11 से 40 साल के बीच रही है. इनमें से अधिकतर मामले सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया से सामने आए हैं.

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उत्तर प्रदेश में होगी आंगनबाड़ी के 69,206 पदों पर भर्ती, यहां क्लिक कर जान लें डिटेल्स

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अगर आप महिला हैं और यूपी में रहती हैं तो आपके लिए बेहद ही अच्छी खबर है. जल्द ही उत्तर प्रदेश में हजारों पदों पर भर्ती होने जा रही है. जिसके लिए महिलाएं आवेदन कर सकेंगी. ये भर्ती बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में होगी. आइए जानते हैं डिटेल्स…

यूपी के बाल बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में बेहद जल्द आंगनबाड़ी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इस भर्ती के जरिए 7,952 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 61,254 आंगनबाड़ी सहायिका के पद शामिल हैं.  मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने विभागीय अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि भर्ती की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, निष्पक्षता और तय समय-सीमा में पूरी की जाए. उन्होंने कहा कि हर जिले में भर्ती का एक समान टाइमटेबल बनाया जाए ताकि चयन प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे और किसी भी चरण में देरी न हो.

ये हैं वैकेंसी से जुड़े डिटेल्स

अपर मुख्य सचिव महिला कल्याण लीना जौहरी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 7,952 पदों में 2,123 पद पूर्व चयन प्रक्रिया से जुड़े हैं, 306 पद नए आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए हैं, जबकि 5,523 पद मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मुख्य कार्यकर्ता में अपग्रेड किए जाने के बाद बनाए गए हैं. वहीं, 61,254 सहायिका पदों में से 38,994 पद सेवानिवृत्ति या मृत्यु जैसे कारणों से खाली हुए हैं, और 22,260 पद मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य केंद्रों में बदलने से सृजित हुए हैं. इस तरह कुल 69,206 पदों पर नई भर्ती होगी.

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जिलों में बनेगी भर्ती समिति

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि हर जिले में डीएम (जिलाधिकारी) की अध्यक्षता में एक भर्ती समिति बनाई जाएगी. यह समिति भर्ती प्रक्रिया की निगरानी करेगी और सुनिश्चित करेगी कि चयन पूरी तरह पारदर्शी हो. सभी जिलों को भर्ती की समय-सारिणी पहले से तय करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे सभी चरण समय पर पूरे किए जा सकें.

‘सक्षम आंगनबाड़ी’ योजना को मिलेगी रफ्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 23,697 आंगनबाड़ी केंद्रों को “सक्षम आंगनबाड़ी” के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस योजना के तहत हर केंद्र को पोषण वाटिका, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, आरओ मशीन, एलईडी स्क्रीन, ईसीसीई सामग्री, बाला पेंटिंग और छोटे सिविल वर्क्स जैसी सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा. मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना के तहत निर्माणाधीन भवनों का काम तेजी से पूरा किया जाए, ताकि गांव-गांव में बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों.
 
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काला रंग क्यों है धन और भाग्य के लिए खास? जानें शनि और राहु की कृपा पाने के रहस्य

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Shani Connection Black Colour: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार काला रंग काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के साथ अशुभ प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है.

काला रंग शनि देव का प्रिय रंग है. यह रंग बाधा, संघर्ष और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा, काले रंग के वस्त्र या रत्न को धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलने के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है.  

धन और भाग्य से जुड़ा काला रंग

हिंदू वैदिक ज्योतिष में, काला रंग मात्र एक रंग न होकर एक आवृत्ति है. इसमें शनि और राहु की ऊर्जा समाहित है, जिसका संबंध कर्म, भाग्य, अचानक धन और सुरक्षा से है. सही दिन को काले रंग का वस्त्र धारण करने से जीवन में धन और भाग्य में बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं. 

काला पहनने के लिए सर्वोत्तम दिन

  • काले रंग का वस्त्र या रत्न शनिवार को धारण करने से कर्ज और कर्म संबंधी रुकावटें दूर होती है.
  • बुधवार या शनिवार के दिन काला रंग धारण करने से राहु की अशुभ स्थिति बेहतर होती है. इसके अलावा, धन लाभ के साथ व्यापार भी बढ़ता है.
  • अमावस्या के दिन काला रंग आभामंडल और गुप्त धन उर्जा को मजबूत करने का काम करता है. 

काला रंग धन और भाग्य को क्यों करता है आकर्षित?

  • काला रंग शनि देव का प्रिय रंग है. यह रंग नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा दिलाने के साथ बुरी नजर को अपने अंदर समाहित करता है. 
  • इस रंग को धारण करने से करियर में स्थिरता आती है. 
  • यह राहु को मजबूत करने का काम करता है. 
  • यह आपकी आभा (Aura) को निखारने का काम करता है. 

धन लाभ से जुड़े उपाय

  • शनिवार को काले रंग का वस्त्र धारण करें, काले कपड़े दान करें और काले कुत्तों को खाना खिलाएं.
  • अमावस्या के दिन धन लाभ के लिए काले कपड़ों को पहनें और मंत्र का जाप करें. 
  • अपनी चंद्र और शुक्र ऊर्जा की रक्षा करने के लिए सोमवार और शुक्रवार को काला रंग पहनने से बचें. 
  • काले रंग को नेक इरादे से धारण करने पर धन और दैवीय सुरक्षा आपकी ओर आकर्षित होती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Video: बिजली के बोर्ड में लग गई आग, डॉगेश भाई ने किया कमाल, वीडियो देख मारेंगे सैल्यूट!

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Dog Video: सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प और हैरान करने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पालतू कुत्ते की समझदारी और फुर्ती देखकर लोग दंग रह गए. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक घर की फर्श पर एक पालतू कुत्ता शांति से बैठा हुआ था. उसके सामने ही दीवार पर एक स्विच बोर्ड में चार प्लग वाला एक्सटेंशन बोर्ड लगा हुआ था. अचानक उसमें से चिंगारी यानी स्पार्किंग होने लगी.

कुत्ते की समझदारी से टला हादसा

जैसे ही कुत्ते ने उस आवाज और रोशनी को देखा, वह थोड़ा डर गया और भौंकने लगा. लेकिन डर के बावजूद उसने बेहद समझदारी दिखाई. वह तुरंत बोर्ड के पास पहुंचा और अपने मुंह से प्लग को खींचकर बाहर निकाल दिया. उसकी इस तेजी से बड़ी दुर्घटना टल गई. अगर वह प्लग वहीं लगा रहता, तो शायद कुछ ही सेकंड में वहां आग लग सकती थी.

वीडियो में साफ दिखाई देता है कि कुत्ते ने यह सब किसी के कहने पर नहीं, बल्कि अपनी खुद की समझदारी से किया. उसके बाद वह कुछ देर तक स्विच बोर्ड के पास बैठा रहा और यह देखने लगा कि अब वहां से कोई चिंगारी न निकले. इस वफादार और बुद्धिमान पालतू की हरकत देखकर लोग उसकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं.

वीडियो देखकर लोगों ने किए कमेंट

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने कमेंट सेक्शन में लिखा कि यह कुत्ता किसी इंसान से कम नहीं, वहीं किसी ने लिखा, इसने अपने घर को बड़ी मुसीबत से बचा लिया. कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि जानवरों में भी समझदारी इंसानों जैसी होती है, बस उसे पहचानने की जरूरत है.


माउंट एवरेस्ट पर पहली चढ़ाई करने वाली टीम के आखिरी सदस्य कांचा शेरपा का निधन

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नेपाल के नामचे गांव में जन्मे कांचा शेरपा का निधन हो गया. उन्होंने 1953 में सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे की माउंट एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. नेपाल पर्वतारोहण संघ ने पुष्टि की कि 92 वर्ष की आयु में कांचा शेरपा का कपन (काठमांडू) स्थित उनके घर में निधन हो गया.

साल 1953 इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहली बार किसी इंसान ने कदम रखा था, लेकिन इस जीत के पीछे सिर्फ दो नहीं, बल्कि सैकड़ों गुमनाम हाथों का योगदान था. इन्हीं में से एक थे कांचा शेरपा, जो टीम के अंतिम जीवित सदस्य थे. उनका जन्म 1933 में नेपाल के नामचे में हुआ था. वे अक्सर कहा करते थे कि उन्हें अपनी सही जन्मतिथि तक याद नहीं, क्योंकि उस दौर में गांवों में जन्म का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था.

हिलेरी और नोर्गे के ऐतिहासिक अभियान
युवावस्था में कांचा शेरपा को अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए काम की तलाश में 5 दिनों तक पैदल चलकर दार्जिलिंग (भारत) पहुंचना पड़ा था. इसी तलाश ने उन्हें पर्वतारोहण की दुनिया में ला दिया,  जिसकी एक यात्रा ने उनका नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज कर दिया. हिलेरी और नोर्गे के ऐतिहासिक अभियान में 35 पर्वतारोही और सैकड़ों कुली शामिल थे. कांचा शेरपा ने इस टीम में एक पोर्टर और गाइड के रूप में काम किया. उन्होंने लगभग 60 पाउंड वजन का सामान ढोया, रस्सियां बांधीं और खतरनाक रास्तों में टीम का मार्गदर्शन किया.

कांचा का पुराना इंटरव्यू
कांचा ने 2011 में एक इंटरव्यू में कहा था कि यह काम कठिन था, लेकिन मुझे अच्छा अनुभव मिला. मुझे अच्छे कपड़े मिले और सम्मान भी. हालांकि उनका काम शिखर तक पहुंचना नहीं था, लेकिन वे अंतिम बेस कैंप तक हिलेरी और नोर्गे के साथ रहे, जब 29 मई 1953 को दोनों ने एवरेस्ट की चोटी फतह की तो कांचा और बाकी टीम के सदस्यों ने खुशी में नाचकर और गले मिलकर इस सफलता का जश्न मनाया.

एवरेस्ट के बाद की जिंदगी
1970 तक कांचा ने पर्वतारोहण से जुड़ा काम जारी रखा, लेकिन एक भयानक हिमस्खलन के बाद उनकी पत्नी अंग लखपा शेरपा ने उनसे यह काम छोड़ने की गुजारिश की. इसके बाद उन्होंने एक ट्रेकिंग कंपनी में काम करना शुरू किया, जहां वे पर्यटकों को सुरक्षित और कम ऊंचाई वाले रास्तों पर ले जाते थे. वे अक्सर कहा करते थे कि अगर हम पर्वतों को बचाने के लिए पर्यटकों को रोक देंगे तो हमारे पास करने को कुछ नहीं बचेगा, बस आलू उगाएंगे और खाते रहेंगे.”

महान पर्वतारोहियों की याद
कांचा के साथ चोटी पर चढ़ने वाले तेनजिंग नोर्गे का निधन 1986 में और सर एडमंड हिलेरी का निधन 2008 में हुआ था. अब कांचा शेरपा भी इस ऐतिहासिक टीम के आखिरी सदस्य के रूप में विदा हो गए. एवरेस्ट क्रॉनिकल के अनुसार, उनके परिवार में पत्नी, चार बेटे, दो बेटियां, आठ पोते-पोतियां और एक परपोती हैं.

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ओटीटी पर रिलीज हुई ‘बागी 4’, जानें- कहां देख सकते हैं टाइगर श्रॉफ की एक्शन पैक्ड फिल्म

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टाइगर श्रॉफ की एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘बागी 4’ पिछले महीने ही सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी. हालांकि ये बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं दिखा पाई. हालांकि इस फिल्म की ओटीटी रिलीज का फैंस को बेसब्री से इंतजार था. फाइनली रिलीज के लगभग डेढ़ महीने बाद, ‘बागी 4’ ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर लिया है. जानते हैं इसे ओटीटी पर कब और कहां देख सकते हैं.

बागी 4′ओटीटी पर कहां हुई रिलीज?
‘बागी 4’ साल की मच अवेटेड फिल्म थी. इसने 5 सितंबर को बड़े पर्दे पर दस्तक दी थी. फिल्म के ट्रेलर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था जिसके बाद लग रहा था कि ये बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा देगी. हालांकि ऐसा नहीं हुआ और ‘बागी 4’ दर्शकों का दिल जीतने में नाकामयाब साबित हुई. हालांकि साजिद नाडियाडवाला की बागी फ्रैंचाइज़ी की पिछली तीन फ़िल्में सफल रही थीं और उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म किया था लेकिन ‘बागी 4’ दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतरी.

वहीं अब ये फिल्म ओटीटी पर रिलीज हो गई है. जिन लोगों ने इसे सिनेमाघरों में नहीं देखा है वे इसे 17 अक्टूबर 2025 यानी आज से ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं. हालांकि फिलहाल ये रेंट पर अवेलेबल है. प्राइम वीडियो यूजर्स 31 अक्टूबर से इसे इस प्लेटफॉर्म पर बिना रेंट के देख सकेंगे.

बागी 4 बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
बागी 4 को दर्शकों से खास रिस्पॉन्स नहीं मिला और इसी के साथ ये बॉक्स ऑफिस पर भी कमाई करने से चूक गई. बॉलीवुड हंगामा के अनुसार, 80 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘बागी 4’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर अनुमानित 47.40 करोड़ रुपये की कमाई की थी.वहीं इसने विदेशों में सिर्फ़ 9.96 करोड़ रुपये कमाए.कुल मिलाकर, दुनिया भर में इसकी कमाई सिर्फ़ 66.39 करोड़ रुपये रही.

बागी 4 स्टार कास्ट
‘बागी 4’ में टाइगर श्रॉफ के साथ हरनाज़ कौर संधू, सोनम बाजवा और संजय दत्त ने लीड रोल प्ले किया है. फिल्म में श्रेयस तलपड़े ने भी अहम भूमिका निभाई है. इसे ए. हर्ष द्वारा निर्देशित किया गया था.

 

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क्या सिर्फ 12 हजार रुपये में भारतीयों को परमानेंट ठिकाना दे रहा आइसलैंड? जान लें क्या है इसके प

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 Iceland permanent residency: अक्टूबर 2025 में कई भारतीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पेजों पर यह दावा किया गया कि आइसलैंड भारतीयों को स्थायी निवास का मौका दे रहा है और इसकी फीस सिर्फ 12,000 रुपये है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर यह खबर तेजी से वायरल हो गई. असल में खबर की जड़ में सच्चाई तो है लेकिन कई महत्वपूर्ण बातें छूट गईं. यह रकम सिर्फ आवेदन शुल्क है, न कि पूरे प्रोसेस का खर्च. इसी तरह कई दूसरी जरूरी बातें भी रह गईं.

आइसलैंडिक सरकार क्या कहती है?

आइसलैंड की इमिग्रेशन अथॉरिटी के अनुसार, विदेशी नागरिकों के लिए स्थायी निवास का विकल्प मौजूद जरूर है. लेकिन यह किसी को बुलाकर बसाने जैसा नहीं है. इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं, जैसे कि कम से कम 4 साल तक आइसलैंड में कानूनी रूप से रहना जरूरी अगर शादी आइसलैंडिक नागरिक से हुई है तो 3 साल. स्थायी और पर्याप्त इनकम का सबूत देना होगा. आइसलैंडिक भाषा का कोर्स या टेस्ट पास करना जरूरी है और इसके अलावा क्रिमिनल रिकॉर्ड साफ होना चाहिए, साथ में घर और हेल्थ इंश्योरेंस का प्रूफ दिखाना होगा. यानी यह रास्ता अस्थायी निवास से स्थायी निवास तक का है, न कि सीधे भारत से जाने वालों के लिए.

12,000 की फीस कहां से आई?

अब सवाल आता है कि 12 हजार रुपये की बात कहां से निकल कर सामने आई. इस वायरल दावे में बताई गई 12,000 रुपये दरअसल आवेदन शुल्क है. आइसलैंड की आधिकारिक फीस लिस्ट के अनुसार, ऑनलाइन एप्लिकेशन के लिए लगभग 16,000 ISK देना होता है, जो भारतीय रुपयों में करीब 11,500 से 12,000 रुपये के बीच में बैठता है. अगर पेपर के जरिए या किसी एजेंट के माध्यम से अप्लाई किया जाए, तो फीस थोड़ी ज्यादा 22,000 ISK यानी लगभग 16,000 रुपये के आसपास हो सकती है. लेकिन यह सिर्फ प्रोसेसिंग फीस है, असल में वहां बसने के खर्च इससे कहीं ज्यादा हैं.

कौन कर सकता है आवेदन?

यहीं पर यह वायरल खबर गुमराह करती है. असलियत यह है कि सिर्फ वही लोग अप्लाई कर सकते हैं जिनके पास पहले से आइसलैंड का वर्क परमिट, स्टूडेंट वीजा या फैमिली रेसिडेंस है. जिन्होंने वहां लगातार 4 साल तक कानूनी रूप से जीवन बिताया हो. जिनके पास स्थायी नौकरी और पर्याप्त आय हो. जिन्होंने भाषा और समाज में घुलने-मिलने की शर्तें पूरी की हों. इसका सीधा सा और साफ-साफ शब्दों में मतलब, भारत में बैठे किसी भी व्यक्ति के लिए सीधे PR का दरवाजा खुला नहीं है.

इतना आसान नहीं है रहना

हम अक्सर सोचते हैं कि यूरोप की लाइफ बेहतर होगी, लोग मजे कर रहे होंगे. लेकिन ऐसा नहीं है. जिन लोगों को वाकई वहां रहने का मौका मिलता है, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि महंगाई बहुत ज्यादा है खाना, घर और बिजली भारत से कई गुना महंगे हैं. भाषा की दिक्कत है, नौकरी और सोसायटी में फिट होने के लिए आइसलैंडिक सीखना जरूरी है. जॉब मार्केट छोटा है और ज्यादातर नौकरियां स्किल्ड या सीजनल हैं. मौसम सर्द और लंबी सर्दियों वाला है, जिससे एडजस्ट करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, वहां की खूबसूरती, सुरक्षा और सोशल वेलफेयर सिस्टम इसे दुनिया के बेहतरीन देशों में से एक बनाते हैं. अब बात करते हैं कि क्या आइसलैंड सच में भारतीयों को PR दे रहा है? इसका छोटा और सरल सा जवाब है नहीं. आइसलैंड सरकार ने भारतीयों के लिए कोई खास स्कीम शुरू नहीं की है. 12,000 की रकम सिर्फ प्रोसेसिंग फीस है, जो हर पात्र आवेदक पर लागू होती है. हां, जो भारतीय पहले से आइसलैंड में पढ़ाई या काम कर रहे हैं और वहां कई साल से कानूनी रूप से रह रहे हैं, वही इस फीस के साथ PR के लिए आवेदन कर सकते हैं.

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बिहार चुनाव में बिरयानी की लूट… AIMIM कैंडिडेट के नामांकन में बिरयानी के लिए भूखों की तरह टूट

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Bihar Election Biryani Viral Video: बिहार में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं और नामांकन का दौर जोर पकड़ चुका है. सभी पार्टियों के उम्मीदवार समर्थकों की भीड़ जुटाने में लगे हैं. जिससे शक्ति का प्रदर्शन किया जा सके. इसी बीच AIMIM उम्मीदवार के नामांकन कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.

दरअसल वहां मौजूद भीड़ के लिए बिरयानी का इंतजाम किया गया था. लेकिन जैसे ही बिरयानी आई लोग उस पर ऐसे टूट पड़े जैसे कई दिनों से खाना न मिला हो. भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग डिब्बे छीनते नजर आए. इस पूरे वाकये का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वीडियो. 

बिरयानी देखते ही टूट पड़े लोग 

बिहार में 6 और 11 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर फिलहाल नामांकन प्रक्रिया चल रही है. इसी बीच कई चौंकाने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं. ताजा मामला किशनगंज जिले की बहादुरगंज विधानसभा सीट का है, जहां AIMIM प्रत्याशी तौसीफ आलम के नामांकन कार्यक्रम में बिरयानी के लिए लूट मच गई. 

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कार्यक्रम में मौजूद लोग बिरयानी लेने के लिए एक-दूसरे पर टूट पड़े. कोई डिब्बा उठाकर भाग रहा था तो कोई धक्का-मुक्की में गिर पड़ा. देखते ही देखते माहौल अफरातफरी में बदल गया. वहां मौजूद लोगों ने इस पूरे वाकये को मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. 

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लोग कर रहे हैं कमेंट

वायरल हो रहा है इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर @MrTiwaria नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. इस वीडियो को अब तक 7000 के करीब बार देखा जा चुका है. इस पर बहुत से लोगों के कमेंट भी आ रहे हैं. कई लोग इस पूरे हालात का मजा लेते नजर आ रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है ‘उस पर ही पैर दिए जा रहे हैं और खाने के लिए भी उठाए जा रहे हैं.’ एक और यूजर ने लिखा है ‘यही सब इनको सिखाया गया है इसलिए यह सब हो रहा है.’ एक और यूजर ने लिखा है ‘ बिहार को क्या बना दिया है.’

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Honor लॉन्च करेगी रोबोट फोन, सबसे हटकर होगा, फोटो लेने के लिए गिंबल के साथ बाहर निकलेगा कैमरा

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आईफोन और स्मार्टफोन के बाद अब रोबोट फोन आने वाले हैं. दरअसल, Honor ने बुधवार को Magic 8 और Magic 8 Pro को लॉन्च किया था. इनकी लॉन्चिंग के बाद एक कॉन्सेप्ट फोन की झलक दिखाई, जिसे रोबोट फोन कहा जा रहा है. यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और रोबोटिक्स आदि को जोड़कर बनाया गया है. इस फोन में फोटोग्राफी के लिए रोटेट होने वाले एक पॉप-अप कैमरा और गिंबल भी मिलेगी. आज से पहले किसी भी फोन में इस तरह की कैपेबिलिटी नहीं देखी गई है. 

Honor ने कॉन्सेप्ट से चौंकाया

Honor ने कॉन्सेप्ट फोन की झलक के लिए एक वीडियो रिलीज किया है. इसकी शुरुआत में फोन, फिर आईफोन और बाद में Ai फोन लिखा आता है. पहली झलक में फोन कंपनी की Magic 8 सीरीज जैसा नजर आता है. रियर में देखने से यह आईफोन 17 प्रो की याद दिलाता है. इसके रियर में अल्फा लोगो लगा हुआ है, जो सोनी अल्फा कैमरा लाइन से प्रेरित दिखता है. 

फोन के रियर में मिलेगा गिंबल कैमरा

इस फोन का सबसे खास फीचर इसका छोटा गिंबल कैमरा है. टीजर में इस कैमरा को अपने आप मूव होते हुए दिखाया जा रहा है. यह यूजर की इनपुट के बिना भी फोटो और वीडियोज कैप्चर कर सकता है. इस फोन के टेक्निकल स्पेसिफिकेशन की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन यह साफ हो गया है कि फोटो-वीडियोग्राफी पर इसका पूरा फोकस होने वाला है. कंपनी का कहना है कि यह फोन उसके अल्फा प्लान का हिस्सा है. इस प्लान के तहत कंपनी AI को रेगुलर लाइफ का हिस्सा बनाने के तरीकों पर काम कर रही है.

MWC 2026 में पेश होगा रोबोट फोन

Honor का कहना है कि वह MWC 2026 में इस फोन को पेश करेगी. इसी दौरान इसकी टेक्निकल स्पेसिफिकेशन और बाकी जानकारी सामने आने की उम्मीद है. फिलहाल टीजर से यह साफ हो गया है कि Honor का यह फोन अब तक के सारे फोन से अलग होगा.

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5 खिलाड़ी जो 2020 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी थे टीम का हिस्सा, इस बार फिर मौका मिला

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IND vs AUS ODI Series: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज 19 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है. तीन मैचों की यह सीरीज पर्थ, एडिलेड और सिडनी में खेली जाएगी. हर बार की तरह इस बार भी मुकाबले रोमांच से भरपूर रहेंगे. दिलचस्प बात यह है कि 2020 में जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था, तब टीम में शामिल पांच खिलाड़ी इस बार भी स्क्वाड का हिस्सा हैं. ये खिलाड़ी तब भी टीम इंडिया के लिए अहम थे और अब फिर से अपने अनुभव के दम पर सीरीज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

विराट कोहली 

2020 में जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया गई थी, तब विराट कोहली कप्तान थे. उन्होंने उस सीरीज में 173 रन बनाए थे और उस सीरीज में उनका बेस्ट स्कोर 89 रन का था. अब जबकि विराट वनडे फॉर्मेट पर फोकस कर रहे हैं, उनकी फॉर्म और फिटनेस टीम के लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों पर उनका अनुभव भारत के लिए गेम चेंजर बन सकता है.

शुभमन गिल 

पांच साल पहले गिल को वनडे टीम में नया चेहरा माना जाता था. उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला था, जिसमें उन्होंने 33 रन बनाए थे. अब वही शुभमन गिल टीम इंडिया के वनडे कप्तान हैं और शानदार फॉर्म में भी हैं. गिल की कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों ही भारत के लिए सीरीज की कुंजी साबित हो सकती हैं.

 श्रेयस अय्यर 

2020 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अय्यर का प्रदर्शन कुछ खास नही रहा था. तीन मैचों में उन्होंने सिर्फ 59 रन बनाए थे. हालांकि अब वे ज्यादा परिपक्व और अनुभवशाली खिलाड़ी बन चुके हैं. हाल के मैचों में उन्होंने मिडिल ऑर्डर में अच्छी स्थिरता दिखाई है और इस बार उनसे बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी.

केएल राहुल

केएल राहुल ने पिछली सीरीज में विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी भी की थी. उन्होंने एक मैच में 76 रनों की शानदार पारी खेली थी. राहुल अब टीम में एक स्थायी विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में स्थापित हो चुके हैं और इस बार भी भारत के मध्यक्रम की रीढ़ होंगे.

कुलदीप यादव 

2020 में कुलदीप यादव संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे और उन्हें सिर्फ एक मैच में मौका मिला था, जिसमें उन्होंने एक विकेट लिया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने खेल में जबरदस्त सुधार किया है. अब कुलदीप भारत के प्रमुख स्पिन गेंदबाजों में से एक हैं और ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं. 

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