लखनऊ यूनिवर्सिटी में इन कोर्स की खाली सीटों पर सीधे मिलेगा दाखिला, जानें कौन हैं पात्र

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लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों में बीएलएड, एमएड, बीपीएड और एमपीएड पाठ्यक्रमों के लिए सत्र 2025-26 में काउंसलिंग के बाद भी यदि सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन रिक्त सीटों पर सीधे प्रवेश की सुविधा दी जाएगी. यह जानकारी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा ने दी.

डॉ. मिश्रा ने बताया कि यह प्रवेश केवल उन्हीं अभ्यर्थियों के लिए मान्य होगा, जिन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय की केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा में भाग लिया हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया में सभी महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों और निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा.

क्यों दी जा रही सीधे प्रवेश की अनुमति?

कुलसचिव ने कहा कि काउंसलिंग के बाद कई महाविद्यालयों में कुछ सीटें खाली रह जाती हैं. छात्रों के शैक्षणिक नुकसान को रोकने और सत्र समय पर शुरू करने के लिए यह कदम उठाया गया है. विश्वविद्यालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर योग्य छात्र को पाठ्यक्रम में प्रवेश मिल सके.

किन छात्रों के लिए मान्य होगा प्रवेश?

केंद्रीयकृत प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए हों. निर्धारित योग्यता और पात्रता मापदंडों को पूरा करते हों. इस निर्णय से उन छात्रों को भी लाभ मिलेगा जो काउंसलिंग के दौरान किसी कारणवश सीट नहीं ले पाए थे, लेकिन प्रवेश परीक्षा में सफल रहे हैं.

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महाविद्यालयों की जिम्मेदारी

डॉ. मिश्रा ने सभी महाविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे प्रवेश प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के नियमों का सख्ती से पालन करें. प्रवेश में पारदर्शिता बनी रहे. छात्रों के चयन में किसी प्रकार का भेदभाव न हो. सभी जरूरी दस्तावेजों और योग्यता प्रमाणों की जांच सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा महाविद्यालयों को यह भी ध्यान रखना होगा कि सीधे प्रवेश लेने वाले छात्रों की सूची समय पर विश्वविद्यालय को भेजी जाए.

छात्रों के लिए आसान और पारदर्शी प्रक्रिया

विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि सीधे प्रवेश की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी. छात्रों को किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा. प्रवेश लेने वाले छात्रों की जानकारी विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो.

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ट्रंप को भारत ने दिखाया ठेंगा! हाई टैरिफ के बावजूद रूसी कच्चे तेल पर आई हैरान करने वाली रिपोर्ट

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Russian Crude Oil Purchase: रूस से भारत का कच्चा तेल आयात अक्टूबर के पहले पखवाड़े में मजबूत हुआ है, जिससे जुलाई से सितंबर तक जारी तीन महीने की गिरावट थम गई है. जहाजों की आवाजाही से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, जिसके चलते आयात में सुधार देखने को मिला है.

तीन महीने बाद बढ़ी आवक

रूस से भारत का कच्चा तेल आयात जून में 20 लाख बैरल प्रति दिन (BPD) से घटकर सितंबर में 16 लाख BPD रह गया था. हालांकि, अक्टूबर के शुरुआती आंकड़े सुधार का संकेत देते हैं. भारत को यूराल और अन्य रूसी ग्रेड के तेल की आपूर्ति में तेजी आई है, जिसे पश्चिमी बाजारों में मांग में कमी और नई छूट (discount) से समर्थन मिला है.

वैश्विक व्यापार विश्लेषण कंपनी ‘केप्लर’ के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में भारत का तेल आयात लगभग 18 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो पिछले महीने की तुलना में करीब 2.5 लाख BPD अधिक है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि चालू महीने के आंकड़े संशोधित हो सकते हैं.

ट्रंप के बयान पर भारत की सफाई

ये आंकड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 अक्टूबर के उस बयान से पहले के हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल आयात रोकने पर सहमति जताई है. हालांकि, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि रूसी तेल भारत की ऊर्जा प्रणाली का अहम हिस्सा है.

केप्लर के चीफ रिसर्च एनालिस्ट (रिफाइनिंग एवं मॉडलिंग) सुमित रिटोलिया का कहना कि ट्रंप का बयान किसी नीतिगत बदलाव की बजाय व्यापारिक दबाव रणनीति प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि आर्थिक, संविदात्मक और रणनीतिक कारणों से रूसी तेल का भारत की ऊर्जा प्रणाली में अहम स्थान है. भारतीय रिफाइनरियों ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से रूसी तेल आयात बंद करने का कोई निर्देश नहीं मिला है.

यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ा रूसी तेल का आयात

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद, भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की थी. पश्चिमी प्रतिबंधों और यूरोपीय मांग में गिरावट के कारण रूसी तेल भारी छूट पर उपलब्ध हो रहा है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को लाभ मिला है.

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सोशल मीडिया पर छाई रूसी महिला की कहानी, बेंगलुरु में अपनी मेड को देती हैं 45 हजार सैलरी

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बेंगलुरु में रहने वाली एक रूसी महिला इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में हैं. इसकी वजह यह है कि उन्होंने अपनी घरेलू सहायिका यानी मेड को हर महीने 45,000 से ज्यादा सैलरी देना शुरू किया है. यह खबर सामने आते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई. कुछ लोग उनके फैसले की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे मार्केट खराब करने वाला कदम बता रहे हैं. 

हालांकि, यह कहानी सिर्फ एक बड़ी सैलरी की नहीं है, यह सोच और इंसानियत की भी कहानी है. इस महिला का नाम यूलिया असलमोवा है, जो कि एक कंटेंट क्रिएटर और प्रोफेशनल हैं. उन्होंने न सिर्फ अपने घरेलू काम के लिए एक मेड को हायर किया, बल्कि उसे पूरी इज्जत, प्रोफेशनल ट्रेनिंग और करियर ग्रोथ का मौका भी दिया. 

यूलिया की सोच की हो रही तारीफ 

यूलिया का मानना है कि हर इंसान की नौकरी की इज्जत होनी चाहिए, चाहे वो किसी भी पोस्ट पर क्यों न हो. वह कहती हैं कि जैसे कंपनियों में कर्मचारियों के लिए KPI होते हैं, वैसे ही उन्होंने अपनी मेड के लिए भी एक प्रणाली बनाई ताकि उसे यह समझ में आए कि उसकी मेहनत और सुधार की वैल्यू है. जब उन्होंने अपनी बेटी एलिना के लिए एक मेड की तलाश शुरू की तो उन्होंने कोई जल्दबाजी नहीं की. यूलिया ने करीब 20 महिलाओं का इंटरव्यू लिया और एक चेक लिस्ट तैयार की, जिसमें उन्होंने देखा कि कौन मानसिक रूप से मजबूत, ईमानदार, और बच्चों के प्रति जिम्मेदार है. 


यूलिया की छोटी शुरुआत, मेड की बड़ी ग्रोथ 

शुरुआत में यूलिया को सिर्फ पार्ट टाइम मदद की जरूरत थी, लेकिन उन्होंने सोचा कि अगर कोई अच्छा इंसान मिल जाए तो उसे अच्छी सैलरी देनी चाहिए. पहले साल के बाद उन्होंने मेड की परफॉर्मेंस को देखकर 10 प्रतिशत की सैलरी बढ़ोतरी दी, इसके बाद दूसरे साल उन्होंने एक KPI सिस्टम शुरू किया, जिससे परफॉर्मेंस के आधार पर और ज्यादा कमाई का रास्ता खुला. वहीं तीसरे साल उन्होंने अपनी मेड को 1.7 गुना ज्यादा सैलरी, फुल-टाइम नौकरी, ट्रेनिंग और नई स्किल्स सीखने के मौके दिए. अब वह मेड को ड्राइविंग सीख रही हैं और जल्दी ही यूलिया की बेटी को स्कूल और क्लासेस ले जाने का काम भी करेगी. 

वहीं यूलिया ने अपने कैप्शन में एक जरूरी बात कही कि भारत में ज्यादा लोग अपनी मेड से पेशेवर या सम्मानजनक व्यवहार नहीं करते. उनका कहना है कि अगर आप किसी इंसान को सम्मान, मौका और इंसाफ देंगे तो वह भी आपको वफादारी देगा. उनका मैसेज है कि दूसरों की नौकरी के बारे में वैसा ही सोचिए, जैसा आप अपनी नौकरी के बारे में सोचते हैं. 

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग?

इस कहानी ने सोशल मीडिया पर काफी ध्यान खींचा. कई लोग यूलिया की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने एक नई मिसाल पेश की है, जहां घरेलू कामकाज करने वालों को भी करियर ग्रोथ, इज्जत और अच्छी सैलरी दी जा सकती है. एक यूजर ने लिखा यूलिया, आप शानदार हैं. आपने जो तरीका अपनाया, वो बाकी लोगों को भी सीखना चाहिए. वहीं कुछ लोग इससे असहमत भी है. कुछ का कहना है कि इतनी ज्यादा सैलरी देना बाकी लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है, क्योंकि अब घरेलू काम करने वाली महिलाएं तुलना करेंगी और हर जगह इतनी सैलरी मांगेंगी. कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा किये तो TCS या Infosys में मिलने वाली फ्रेशर सैलरी से भी ज्यादा है. हालांकि यूलिया का जवाब साफ है कि मैं रिश्तों और आपसी ग्रोथ में विश्वास रखती हूं,अगर आप लोगों से बुरा बर्ताव करेंगे, तो जिंदगी में कभी न कभी उसका नतीजा जरूर भुगतना पड़ेगा. 

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AI की रेस में ऐप्पल को एक और झटका, जिसको बनाया प्रोजेक्ट का लीडर, वही कंपनी छोड़ गया

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AI की रेस में पहले से ही पिछड़ रही ऐप्पल को एक और बड़ा झटका लगा है. ऐप्पल के AI सर्च प्रोजेक्ट के हेड के यांग (Ke Yang) ने कंपनी छोड़ दी है और अब वह मेटा के साथ जुड़ेंगे. यांग को कुछ हफ्ते पहले ही प्रमोशन देकर कंपनी के नए आंसर, नॉलेज और इंफोर्मेशन (AKI) ग्रुप का प्रमुख बनाया गया था. उनके जाने से कंपनी के सिरी को अपग्रेड करने के प्लान पर बड़ा असर पड़ेगा. बता दें कि पिछले एक साल के दौरान ऐप्पल के कई सीनियर एग्जीक्यूटिव कंपनी छोड़कर जा चुके हैं. 

सिरी के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे यांग

ऐप्पल ने कुछ समय पहले ही AKI ग्रुप बनाकर इसकी कमान यांग को सौंपी थी और कंपनी के मशीन लर्निंग और AI स्ट्रैटजी विभाग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को रिपोर्ट कर रहे थे. प्रमोशन से पहले यांग AKI के सर्च वाले हिस्से का नेतृत्व कर रहे थे. प्रमोशन के बाद यांग की टीम को सिरी को ChatGPT की तरह फंक्शनल बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी. बता दें कि पिछले काफी समय से ऐप्पल सिरी को अपग्रेड करने को लेकर संघर्ष कर रही है. कंपनी की प्लानिंग अगले साल मार्च तक सिरी के अपग्रेडेड वर्जन को लॉन्च करने की है.

मेटा कर रही है धुआंधार हायरिंग

एक तरफ जहां ऐप्पल के सीनियर अधिकारी जहां लगातार नौकरियां छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मेटा जमकर हायरिंग कर रही है. AI पर काम करने के लिए मेटा लगातार अपनी सुपरइंटेलीजेंस लैब्स डिवीजन को एक्सपैंड करने में लगी है. इसी कड़ी में कंपनी ने ओपनएआई, गूगल डीपमाइंड, एंथ्रोपिक और ऐप्पल जैसी बड़ी कंपनियों के टॉप टैलेंट को हायर किया है. खुद जुकरबर्ग हायरिंग प्रोसेस को मॉनिटर कर रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में मेटा 50 AI एक्सपर्ट्स को अपने साथ जोड़ चुकी है. इसी हफ्ते मेटा ने मीरा मूर्ति को बड़ा झटका देते हुए उनके स्टार्टअप थिंकिंग मशीन लैब के एक को-फाउंडर एंड्रयू टुलॉक को हायर किया था. 

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Diwali 2025 Special: इस त्योहारी सीजन में रिलीज होंगी फिल्में और वेब सीरीज दिवाली की शुभकामनाएं

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इस दिवाली 2025,Cinema and OTT दोनों Platforms पर Entertainment का पूरा तड़का देखने को मिलेगा। Festival के मौके पर Ayushmann Khurrana और Rashmika Mandanna की फिल्म Thamma audience को supernatural romance और  thriller का experience देने आ रही है। वहीं, Ek Deewane Ki Deewaniyat love  और realtion  की Complications को बड़े पर्दे पर पेश करेगी, जबकि Mahayoddha Ram रामायण की epic saga को जीवंत रूप में दिखाएगी। youth के लिए Dude एक fun-filled romantic comedy का मजा  लेकर आएगी। OTT Platforms पर भी दिवाली के मौके पर viewers को कई नई web series और फिल्में देखने को मिलेंगी। Bhagwat Chapter 1: Raakshas में Mystery और   thriller  का पूरा dose है, जबकि Kishkindhapuri एक Telugu horror-thriller experience देगी। feelings  से भरपूर Santosh और महाभारत पर based animated series Kurukshetra: The War of Mahabharata भी audience के festive mood को next level पर ले जाएंगी। इस दिवाली, Family और friends  के साथ बैठकर इन नई फिल्मों और web series का मजा लें और Festival को और भी यादगार बनाएं।

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सैन्य ताकत में चीन रह गया पीछे, दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना बनीं Indian Air Force, जान

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भारत की वायुसेना विश्व की तीसरी सबसे ताकतवर सेना हो गई है. वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट की ताजा रैंकिंग में भारतीय वायुसेना ने चीन को पीछे छोड़ दिया है. पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे नंबर पर रूस है और उसके बाद भारत का नंबर है. हालांकि चीन के पास भारत से अधिक सैन्य विमान हैं, लेकिन World Directory of Modern Military Aircraft (WDMMA) की ये रैंकिंग वायुसेना की मारक क्षमता के आधार पर तय की गई है.

कैसे तय होता है कौन कितना ताकतवर
WDMMA हर साल दुनिया भर के देशों की एयरफोर्स ताकत को आंकता है. बता दें कि ये रैंकिंग सिर्फ विमानों की संख्या से नहीं बनती, इसमें लड़ाकू ताकत, रक्षा क्षमता, लॉजिस्टिक सपोर्ट, ट्रेनिंग और तकनीकी आधुनिकता भी देखी जाती है. पाकिस्तान की एयरफोर्स चीन के बने हथियारों पर निर्भर है, लेकिन तकनीक और ट्रेनिंग के मामले में भारत आगे है.

भारत से चीन से आगे
चीन अपनी एयरफोर्स फ्लीट को अपग्रेड करने और एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलप करने में अरबों डॉलर खर्च कर रहा है, जबकि भारत सिर्फ मशीनों पर नहीं, पायलटों की ट्रेनिंग पर भी ध्यान देता है. भारत की वायुसेना की ताकत का असली कारण है तेज प्रतिक्रिया देने की क्षमता और सटीक हमला करने की ताकत. भारत की तीनों सेनाओं के बीच अच्छा तालमेल है. यही साझेदारी युद्ध के दौरान काम आती है. रूस के पास भले ही ज्यादा विमान हो, लेकिन फिर भी वो यूक्रेन पर हवाई कंट्रोल नहीं बना पाया. 

पाकिस्तान से पावरफुल सऊदी की वायु सेना
इस रैंकिंग में चौथे नंबर पर चीन की एयरफोर्स है और 5 वें नंबर पर जापानी वायुसेना है, जबकि इजरायली एयरफोर्स को छठा नंबर मिला है. उसके बाद सातवें नंबर पर है फ्रांस की वायुसेना है. ब्रिटेन की वायुसेना फ्रांस के बाद आठवें नंबर पर है. पाकिस्तान की एयरफोर्स 18वें नंबर पर है, जबकि सऊदी अरब की एयरफोर्स को 17वां नंबर मिला है. वर्तमान WDMMA की लिस्ट में 103 देशों पर नजर रखी गई है और 129 हवाई सेवाओं को कवर किया गया है.

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इतनी भी क्या जल्दी थी… दीदी ने रॉकेट की तरह उड़ा दी स्कूटी, कार के ऊपर हुई लैंडिंग

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Social Media Viral Video: सोशल मीडिया पर रोज कुछ न कुछ ऐसा देखने को मिल जाता है जो या तो हैरान कर देता है या फिर हंसी का ठिकाना नहीं रहता. कभी कोई बाइक स्टंट करता है, कभी कोई डांस करता हुआ ट्रैफिक में नजर आता है. कभी कुछ ऐसा हो जाता है जिसे देखकर समझ नहीं आता कि हंसे या सोच में पड़ जाएं. ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है. 

इस वायरल वीडियो में एक महिला स्कूटी चलाते हुए कुछ इस स्पीड में निकलती हैं कि जैसे वह स्कूटी नहीं, कोई रॉकेट हो और फिर जो होता है, वो वाकई में चौंकाने वाला है. यह वीडियो एक्स पर @poojaofficial5 नाम के एक यूजर ने शेयर किया और कैप्शन ने लिखा कि इतनी भी क्या जल्दी थी दीदी और बस फिर क्या था, वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर छा गया. अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर हंस भी रहे हैं. 

वायरल वीडियो में क्या है खास?

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला तेजी से स्कूटी चलाते हुए सड़क पर आती है, लेकिन वह अपनी स्पीड और सामने की दूरी का अंदाजा नहीं लगा पाती. नतीजा ये होता है कि स्कूटी सीधे एक खड़ी हुई कार से टकराती है और हवा में उछलकर कार की छत से टकराकर सीधे सामने जा गिरती है. इस पूरे सीन को देखकर एक पल के लिए लगता है कि जैसे कोई एक्शन मूवी का सीन हो रहा हो, लेकिन नहीं, ये हकीकत है. 

लोगों ने किए मजेदार कमेंट्स 

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर इस पर कमेंट्स किए. एक यूजर ने कमेंट किया दीदी को तो ISRO भेजना चाहिए… इतनी तेजी से उड़ाई स्कूटी, दूसरे यूजर ने कहा लगता है दीदी को चांद पर जाना था, लेकिन रॉकेट की जगह स्कूटी मिल गई. वहीं एक यूजर ने खुद पर मजाक करते हुए कहा अगर मैं पीछे बैठा होता, तो जमीन नहीं, सीधे स्वर्ग पहुंच जाता. वहीं यूजर कर रहे हैं कि दीदी को Fast & Furious की अगली फिल्म में लेना चाहिए. साथ ही लोगों ने वीडियो को बार-बार देखा, शेयर किया और जमकर मिम्स भी बनाए. 

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‘रोहित-कोहली 2027 वर्ल्ड कप तक तो…’, ये क्या बोल गए ट्रेविस हेड, साथ खड़े अक्षर पटेल भी हंसे

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रविवार को होने वाले भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया मुकाबले से पहले ट्रेविस हेड और अक्षर पटेल प्रेस के सवालों का जवाब देने पहुंचे. इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के विस्फोटक बल्लेबाज से विराट कोहली और रोहित शर्मा के ओडीआई भविष्य पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसे सुनकर साथ खड़े अक्षर पटेल भी हंसने लगे.

विराट कोहली और रोहित शर्मा टी20 फॉर्मेट से पिछले साल ही रिटायरमेंट ले चुके हैं, दोनों ने एक हफ्ते के अंदर इस साल टेस्ट को भी अलविदा कहा. अब दोनों सिर्फ वनडे फॉर्मेट खेलते हैं, लेकिन सबसे बड़ा ये बना हुआ है कि क्या दोनों 2027 ओडीआई वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे? इस बीच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए रोहित को हटाकर शुभमन को कप्तान बनाने ने भी कई सवाल खड़े कर दिए. कई रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ये सीरीज दोनों की आखिरी सीरीज हो सकती है.

ट्रेविस हेड ने रोहित शर्मा और विराट कोहली को लेकर क्या कहा?

पर्थ में होने वाले भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया मैच से पहले शुक्रवार को ट्रेविस हेड और अक्षर पटेल एकसाथ पत्रकारों के सवालों का जवाब देने पहुंचे. शुरुआत में हेड से ही अधिक सवाल पूछे गए, इस दौरान उनसे विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “वे भारत के लिए शानदार रहे हैं, मुझे लगता है कि अक्षर उनके बारे में मुझसे ज़्यादा अच्छी तरह बता सकते हैं. लेकिन दो बेहतरीन खिलाड़ी, दो सर्वश्रेष्ठ वाइट बॉल क्रिकेट के खिलाड़ी. विराट शायद वाइट बॉल क्रिकेट के सबसे महान खिलाड़ी हैं, रोहित भी उनसे बहुत पीछे नहीं हैं.”

हेड ने आगे कहा, “बतौर ओपनर बल्लेबाज रोहित ने जो किया है, उसके लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है. कभी तो उनकी कमी खलेगी ही लेकिन मुझे लगता है कि वे दोनों 2027 तक तो खेलेंगे.” ये कहते हुए उन्होंने अक्षर पटेल की तरफ देखा, तो अक्षर भी हंस पड़े. उन्होंने कहा, “वे दोनों कोशिश कर रहे हैं कि विश्व कप तक खेलें. यह खेल के लिए बहुत अच्छी बात है कि वे अभी भी खेल रहे हैं.”

रोहित-विराट खेलने के लिए तैयार- अक्षर पटेल

भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल ने विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर कहा कि दोनों पेशवर खिलाड़ी हैं और जानते हैं क्या करना है. दोनों सीरीज के पहले मैच में खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

पटेल ने कहा, “वे पेशेवर हैं और उन्हें पता है कि क्या करना है. वे खेलने के लिए तैयार हैं. अगर आप उनके फॉर्म की बात करें, तो वे अच्छी तैयारी कर रहे हैं. सभी ने अपना फिटनेस टेस्ट दिया है, वे अब खेलने के लिए तैयार हैं.”

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Video: अब बिना फ्यूल उड़ेगा इंसान! पैडल मार हवा में घूमेगा प्लेन, जापानी छात्र का कमाल

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Japan News: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जापान के एक छात्र ने अद्भुत आविष्कार किया है. इस आविष्कारक का नाम फुशा साकाई है और उन्होंने एक उड़ने वाली साइकिल तैयार की है. यह साइकिल पूरी तरह से पैडल से चलती है और इसे उड़ाने के लिए किसी ईंधन या बैटरी की जरूरत नहीं होती. यह एक तरह का प्लेन है.

वायरल वीडियो देख हैरान हुए लोग

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक रनवे पर साइकिल पर बैठता है और पैडल चलाना शुरू करता है. जैसे-जैसे वह पैडल घुमाता है, साइकिल के पीछे लगा पंखा घूमने लगते हैं. पंखे की गति बढ़ने के साथ ही साइकिल धीरे-धीरे जमीन से उठकर हवा में उड़ने लगती है. यह दृश्य देखकर किसी को भी विश्वास करना मुश्किल लगता है कि यह केवल पैडल की शक्ति से हो रहा है.

वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि उड़ान के दौरान कुछ अन्य छात्र भी पास में बने रहते हैं. उनका काम यह देखते हैं कि उड़ने वाली साइकिल सुरक्षित तरीके से उड़ान भरे और कोई दुर्घटना न हो. छात्रों ने सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा है ताकि उड़ान के दौरान किसी तरह का हादसा न हो.

महीनों की मेहनत से तैयार हुई साइकिल

फुशा साकाई और उनकी टीम ने महीनों की मेहनत और प्रयोगों के बाद इस उड़ने वाली साइकिल को तैयार किया है. साइकिल का फ्रेम हल्का और मजबूत है, ताकि यह वजन उठाने में सक्षम हो और हवा में स्थिर रहे. पंखे और प्रोपेलर साइकिल को ऊंचाई और संतुलन देने में मदद करते हैं. इस वीडियो को देखकर लोग काफी हैरान हैं और इसकी तारीफ कर रहे हैं. यह दिखाता है कि विज्ञान और सोच के जरिए किसी भी कल्पना को वास्तविकता में बदला जा सकता है. 


अमेरिका में बढ़ी भारतीय आईटी कंपनियों की मुश्किलें! दर्ज हो रहे हैं मुकदमे

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Legal risks for Indian IT companies: भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में अपने काम में स्वरूप को बदलने के प्रयास किया है. आज की भारतीय आईटी कंपनियों केवल आउटसोर्सिंग सर्विस देने तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहती. आईटी कंपनियां नई टेक्नोलॉजी, खुद के सॉफ्टवेयर, प्लेटफॉर्म और खास कर एआई पर बेस्ड नए प्रोडक्ट बनाने पर जोर दे रही हैं.

एक ओर तो, इस खबर से भारत के आईटी कंपनियों के बदलते एजेंडे का पता चल रहा है. वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों पर कानूनी मुकदमे दायर किए जा रहे है. अमेरिका के सख्त कानून ने आईटी कंपनियों को परेशान किया है. आज हम बात करेंगे कि, आखिर अमेरिका के बाजार में भारतीय आईटी कंपनियों को क्यों नई दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है.   

अमेरिका है सबसे बड़ा बाजार

भारत की आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़े बाजारों में से एक है. देश की प्रमुख आईटी कंपनियां अपनी सर्विसेस अमेरिका को प्रोवाइड करवाती है. हालांकि, अमेरिका के सख्त कानून से कंपनियों पर कानूनी मुकदमे की तलवार लटकती रहती है. अमेरिका की कानून प्रणाली की बात करें तो, यह बहुत ही कठोर है.

अगर किसी भी कंपनी पर पेटेंट या सॉफ्टवेयर के गलत इस्तेमाल से संबंधित कोई मामला सामने आता है तो, कंपनियों पर कानून मुकदमें दर्ज किए जाते है. साथ ही उनसे फाइन के रुप में करोड़ों डॉलर का भुगतान लिया जाता है. ऐसे में भारत की आईटी कंपनियों के लिए भी नया खतरा उत्पन्न हो सकता हैं, क्योंकि कंपनियां अब नए नवाचार पर काम कर रही है. 

 हेक्सावेयर केस का मामला

अमेरिकी कंपनियां के दायर मुकदमे का सिर्फ एक पहलू नहीं है. मामला विवाद से ज्यादा लग रहा है. अमेरिकी आईटी कंपनियां भारत की आईटी कंपनियों के नए प्रयासों को खुद के लिए खतरा मान रही है. यही कारण है कि, मुकदमे दायर किए जा रहे है. इसे हाल में हुई एक घटना से जोड़ कर देखा जा रहा है.

पिछले दिनों भारत की हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज पर अमेरिकी की नैटसॉफ्ट और अपड्राफ्ट कंपनी ने 500 मिलियन डॉलर (भारतीय रुपए में लगभग 4,000 करोड़ रुपए) का मुकदमा दायर किया है. अमेरिकी कंपनी का आरोप है कि, हेक्सावेयर ने उनकी टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर का गलत इस्तेमाल किया है.  

क्या कहते है विशेषज्ञ?

आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि, भारतीय आईटी कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर, एआई  टेक्नोलॉजी इत्यादि पर काम करने के साथ- साथ कानून कोड लाइन को समझना भी जरूरी है. इसके लिए कंपनियों को उचित कदम उठाने चाहिए. नई प्रोजेक्ट को लेकर स्पष्ट कॉन्ट्रैक्ट बनवाने चाहिए और इनमें नई टेक्नोलॉजी से संबंधित सभी जानकारियों को लिखना चाहिए. ताकि भविष्य में कंपनियां को किसी भी तरह की परेशानी ना हो.

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