एर्दोगन की चाल में फंसे ट्रंप! इस देश ने US को दिया झटका, कैंसिल कर दी F-35 फाइटर जेट की डील

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन के बुने गए गए जाल में फंस गए हैं. यूरोपीय देश स्पेन ने अमेरिका के 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35 को लेकर डील कैंसिल कर दी है, वहीं अब वो तुर्किए के फाइटर जेट KAAN में दिलचस्पी दिखा रहा है. स्पेन ने ये फैसला ऐसे समय पर लिया, जब कनाडा, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड समेत कई देश F-35 की डील पर फिर से विचार कर रहे हैं. 

जिन देशों ने F-35 के लिए अमेरिका से डील की थी, वो कीमत, सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन में देरी, हाल के महीनों में हुए हादसों की वजह से इस पर फिर से सोच रहे हैं. इन्हीं में से एक देश स्पेन है, जिसने स्टेल्थ फाइटर जेट F-35 को लेकर हुई डील को ही कैंसिल कर दिया है. इसके पीछे की वजहों में अमेरिका की ओर से लगाए टैरिफ, यूक्रेन पर यू-टर्न, यूरोप की डिफेंस को लेकर अमेरिका पर निर्भरता कम करना भी शामिल है. 
 
यूरोफाइटर पर थी स्पेन की नजर 

स्पेन ने साल 2023 में अपने बजट से नए फाइटर जेट खरीदने के लिए 6.25 बिलियन यूरो यानी करीब 7.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर निर्धारित किए थे. उस समय स्पेन ने यूरोप के यूरोफाइटर टाइफून और फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) के बीच चुनाव करने की बात कही थी. बता दें कि FCAS फ्रांस, जर्मनी और स्पेन का संयुक्त कार्यक्रम है, जो 6वीं पीढ़ी का फाइटर जेट है. स्पेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि स्पेन यूरोफाइटर और भविष्य में FCAS में शामिल है.  

5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर क्यों फोकस करने लगा स्पेन?

जो स्पेन छठी पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल है, वो अब 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर क्यों फोकस कर रहा है. दरअसल छठी पीढ़ी के फाइटर जेट FCAS का निर्माण साल 2040 तक शुरू हो पाएगा. इस प्रोग्राम में शामिल फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन विवाद पैदा कर रही है, जिसकी वजह से प्लान में देरी हो रही है. इसलिए स्पेन का फोकस फिलहाल 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर ही है. इसीलिए उसने पहले F-35 में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन अब वो तुर्किए के KAAN के लिए डील करने पर विचार कर रहा है. 

एर्दोगन खुद चाहते हैं F-35 फाइटर जेट

तुर्किए ने जिस फाइटर जेट F-35 को लेकर स्पेन को बरगलाया है और उस डील को कैंसिल कराने में अपनी भूमिका निभाई है, उसी F-35 के लिए एर्दोगन अमेरिका के चक्कर काट रहे हैं. दरअसल अमेरिका ने तुर्किए को F-35 से अलग कर दिया था क्योंकि उसने रूस के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था. ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आई थी कि तुर्किए ने रूस से S-400 वापस लेने की अपील भी की थी, ताकि वो अमेरिका से F-35 हासिल कर सके. 

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