‘पाकिस्तान को रूस बेचेगा RD-93 इंजन तो होगा भारत का फायदा’, इस एक्सपर्ट ने किया बड़ा दावा

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रूस के रक्षा विशेषज्ञों ने रविवार (5 अक्टूबर, 2025) को कहा कि JF-17 में इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को RD-93 इंजन की कथित बिक्री से वास्तव में दिल्ली को फायदा होगा. विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से भारत सरकार की आलोचना को अनुचित बताते हुए खारिज किया.

मॉस्को स्थित प्रतिष्ठित प्रिमाकोव इंस्टीट्यूट में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में नई चुनौतियों पर अनुभाग के प्रमुख प्योत्र तोपीचकानोव ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यहां आलोचना उचित है. अगर रूस की ओर से जेएफ-17 फाइटर जेट के लिए इंजन उपलब्ध कराने की खबरें सही हैं, तो इससे भारत को वास्तव में दो तरह से लाभ होगा.’

उन्होंने कहा, ‘सबसे पहले यह दर्शाता कि चीन और पाकिस्तान अभी तक रूसी इंजन को बदलने में कामयाब नहीं हुए हैं. दूसरे, नया विमान भारत के लिए परिचित और अनुमानित होगा खासकर इसलिए क्योंकि दोनों एक ही इंजन साझा करते हैं और भारत ने मई 2025 के संकट (ऑपरेशन सिंदूर) के दौरान जेएफ-17 के परिचालन उपयोग को देखा है.’

तोपीचकानोव ने याद दिलाया कि चीन ने रूस से अपने FC-17 जेट के लिए अस्थायी उपाय के तौर पर आरडी-93 इंजन की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया था और इसके पाकिस्तान को हस्तांतरण की संभावना के मुद्दे को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की तत्कालीन सरकारों की ओर से उठाया गया था.

रूस ने भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ RD-33 इंजन का दिया था लाइसेंस

हालांकि, एक अन्य विशेषज्ञ ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर हुई बातचीत धुंधली-सी याद है. उन्होंने कहा, ‘मास्को ने नई दिल्ली को यह विश्वास दिलाया कि आरडी-93 सौदा बिना किसी तकनीकी हस्तांतरण (TOT) के पूरी तरह से व्यावसायिक है, जबकि भारत को तकनीकी हस्तांतरण (TOT) के तहत कहीं बेहतर आरडी-33 इंजन का लाइसेंस दिया गया है.’

क्लिमोव संयंत्र की ओर से उत्पादित आरडी-93, अपने मूल आरडी-33 की तुलना में, अधिक थ्रस्ट देता है, लेकिन इसकी सेवा अवधि कम है. आरडी-93 की सेवा अवधि 2,200 घंटे है, जबकि आरडी-33 की 4,000 घंटे है.

रूस-चीन-पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत, रूस 2000 के दशक की शुरुआत से पूरी तरह से असेंबल किए गए आरडी-93 इंजन की आपूर्ति कर रहा है. पाकिस्तान अब एक संशोधित संस्करण चाह रहा है, जो अभी तक विकसित नहीं हुआ है. बिक्री के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

कांग्रेस ने रूस को लेकर भारत सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमान JF-17 के लिए रूस की ओर से इंजन की आपूर्ति किए जाने संबंधी मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए शनिवार (4 अक्टूबर, 2025) को कहा था कि यह मोदी सरकार की कूटनीति की विफलता है और उसे देश को यह बताना चाहिए कि भारत का एक भरोसेमंद साथी रूस, पाकिस्तान को सैन्य सहयोग क्यों दे रहा है.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उन खबरों का हवाला दिया था, जिनमें कहा गया है कि रूस जेएफ-17 लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत आरडी-93 एमए इंजन की आपूर्ति कर रहा है.

भाजपा ने कांग्रेस पर किया पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पाकिस्तान को जेएफ-17 जेट इंजन की आपूर्ति पर रूस के आगे बढ़ने की खबरों को रविवार (5 अक्टूबर, 2025) को गैर-जिम्मेदाराना सूचना युद्ध करार दिया और इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने के लिए कांग्रेस की आलोचना की. भाजपा ने कांग्रेस पर भारत के बजाय दुश्मन का पक्ष लेने का आरोप लगाया.

यह भी पढ़ेंः ‘भारत की लक्ष्मण रेखाओं का होना चाहिए सम्मान’, US के साथ ट्रेड डील को लेकर बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर

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RBI की नई नीति: EMI मिस होने पर Smartphone और laptop हो सकते हैं lock!| Paisa Live

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क्या आप जानते हैं कि अगर आपने EMI समय पर नहीं चुकाई, तो बैंक आपके स्मार्टफोन, लैपटॉप या अन्य डिवाइस को रिमोटली लॉक कर सकते हैं? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि इस विषय पर कंज्यूमर और लेंडर्स के बीच बातचीत चल रही है। RBI अपने फेयर प्रैक्टिस कोड को अपडेट करने पर विचार कर रहा है, ताकि दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें। इस नई प्रक्रिया के तहत, EMI पर खरीदी गई डिवाइस में पहले से एक एप या सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल किया जाएगा। अगर ग्राहक किस्त नहीं चुकाते, तो वह डिवाइस रिमोटली लॉक हो जाएगी। हालांकि, इस प्रक्रिया से डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी उठ रही हैं। इसलिए, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ग्राहक की अनुमति ली जाए और उनका निजी डेटा सुरक्षित रहे। इसके अलावा, कार और बाइक जैसे बड़े उत्पादों को लॉक करने के लिए भी नियमों की आवश्यकता होगी। इस वीडियो में हम इस नई नीति के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

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Fast Charging है खतरनाक? जानिए आपके स्मार्टफोन पर क्या होता है असर

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फास्ट चार्जिंग का काम करने का तरीका सामान्य चार्जिंग से अलग होता है. साधारण चार्जर बैटरी को धीरे-धीरे पावर सप्लाई करता है जबकि फास्ट चार्जर हाई वोल्टेज और ज्यादा करंट बैटरी को भेजता है. इसका फायदा यह होता है कि कम समय में ज्यादा चार्ज बैटरी तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि आप देखते हैं कि नया फोन 10-15 मिनट में आधे से ज्यादा चार्ज हो जाता है. लेकिन इस तेज़ी की एक कीमत भी होती है और वह है बैटरी के अंदर अतिरिक्त गर्मी का पैदा होना.

फास्ट चार्जिंग का काम करने का तरीका सामान्य चार्जिंग से अलग होता है. साधारण चार्जर बैटरी को धीरे-धीरे पावर सप्लाई करता है जबकि फास्ट चार्जर हाई वोल्टेज और ज्यादा करंट बैटरी को भेजता है. इसका फायदा यह होता है कि कम समय में ज्यादा चार्ज बैटरी तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि आप देखते हैं कि नया फोन 10-15 मिनट में आधे से ज्यादा चार्ज हो जाता है. लेकिन इस तेज़ी की एक कीमत भी होती है और वह है बैटरी के अंदर अतिरिक्त गर्मी का पैदा होना.

बैटरी का सबसे बड़ा दुश्मन गर्मी होती है. जब बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है और वह लगातार ओवरहीट होती है तो उसकी लाइफ धीरे-धीरे कम होने लगती है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हर लिथियम-आयन बैटरी की चार्जिंग-साइकिल होती है यानी कितनी बार वह चार्ज और डिस्चार्ज हो सकती है. फास्ट चार्जिंग के कारण बैटरी ज्यादा गर्म होती है और यह चार्जिंग-साइकिल सामान्य से जल्दी पूरी हो जाती है. नतीजा यह निकलता है कि समय से पहले बैटरी की क्षमता घटने लगती है और फोन पहले जैसा बैकअप नहीं देता.

बैटरी का सबसे बड़ा दुश्मन गर्मी होती है. जब बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है और वह लगातार ओवरहीट होती है तो उसकी लाइफ धीरे-धीरे कम होने लगती है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हर लिथियम-आयन बैटरी की चार्जिंग-साइकिल होती है यानी कितनी बार वह चार्ज और डिस्चार्ज हो सकती है. फास्ट चार्जिंग के कारण बैटरी ज्यादा गर्म होती है और यह चार्जिंग-साइकिल सामान्य से जल्दी पूरी हो जाती है. नतीजा यह निकलता है कि समय से पहले बैटरी की क्षमता घटने लगती है और फोन पहले जैसा बैकअप नहीं देता.

हालांकि, यह कहना भी सही नहीं होगा कि फास्ट चार्जिंग पूरी तरह खतरनाक है. मोबाइल कंपनियां आजकल बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और थर्मल कंट्रोल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती हैं ताकि बैटरी पर कम से कम दबाव पड़े. यही कारण है कि आधुनिक स्मार्टफोन में फास्ट चार्जिंग के बावजूद बैटरी तुरंत खराब नहीं होती.

हालांकि, यह कहना भी सही नहीं होगा कि फास्ट चार्जिंग पूरी तरह खतरनाक है. मोबाइल कंपनियां आजकल बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और थर्मल कंट्रोल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती हैं ताकि बैटरी पर कम से कम दबाव पड़े. यही कारण है कि आधुनिक स्मार्टफोन में फास्ट चार्जिंग के बावजूद बैटरी तुरंत खराब नहीं होती.

लेकिन अगर आप रोज़ाना कई बार फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल करते हैं, फोन को चार्जिंग के दौरान ज्यादा गर्म होने देते हैं या हमेशा 0% से 100% तक फास्ट चार्ज करते हैं, तो बैटरी की उम्र निश्चित रूप से कम हो सकती है.

लेकिन अगर आप रोज़ाना कई बार फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल करते हैं, फोन को चार्जिंग के दौरान ज्यादा गर्म होने देते हैं या हमेशा 0% से 100% तक फास्ट चार्ज करते हैं, तो बैटरी की उम्र निश्चित रूप से कम हो सकती है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि बैटरी की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं. जैसे अगर आपके पास समय हो तो हमेशा नॉर्मल चार्जिंग का इस्तेमाल करें और फास्ट चार्जिंग केवल तब करें जब आपको जल्दी जरूरत हो. इसके अलावा, चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल न करें और उसे ठंडी जगह पर रखें ताकि अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो.

विशेषज्ञ मानते हैं कि बैटरी की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं. जैसे अगर आपके पास समय हो तो हमेशा नॉर्मल चार्जिंग का इस्तेमाल करें और फास्ट चार्जिंग केवल तब करें जब आपको जल्दी जरूरत हो. इसके अलावा, चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल न करें और उसे ठंडी जगह पर रखें ताकि अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो.

आसान भाषा में समझाए तो फास्ट चार्जिंग सुविधा जरूर है लेकिन इसका अधिक उपयोग बैटरी की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. स्मार्टफोन को लंबे समय तक अच्छे बैकअप के साथ चलाना है तो बैटरी को संतुलित तरीके से चार्ज करना ही सबसे बेहतर तरीका है.

आसान भाषा में समझाए तो फास्ट चार्जिंग सुविधा जरूर है लेकिन इसका अधिक उपयोग बैटरी की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. स्मार्टफोन को लंबे समय तक अच्छे बैकअप के साथ चलाना है तो बैटरी को संतुलित तरीके से चार्ज करना ही सबसे बेहतर तरीका है.

Published at : 05 Oct 2025 09:28 AM (IST)

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दूसरे की बीवी दीपिका को देखते ही रणबीर भूल बैठे सब कुछ, कर दी ऐसी हरकत कि वायरल हो गया वीडियो

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रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण बॉलीवुड के लवेबल कपल्स में से एक थे. लेकिन दोनों के ब्रेकअप के सालों बाद एक बार फिर उन्हें साथ में स्पॉट किया गया. एयरपोर्ट पर दोनों को साथ देख फैंस के दिल को भी राहत पहुंची है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर रणबीर कपूर का एक और क्यूट वीडियो भी वायरल हो रहा है. 

दीपिका पादुकोण को देख उनके पीछे-पीछे चल दिए रणबीर
बॉलीवुड के मशहूर कलाकर दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर को हाल ही में मुंबई एयरपोर्ट पर पैप्स ने स्पॉट किया. दोनों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं.

इसके साथ ही एक और वीडियो वायरल हुआ जहां दीपिका पादुकोण को देख रणबीर कपूर अपनी गाड़ी भूल गए और उनके पीछे-पीछे चल दिए. जैसे ही दीपिका पादुकोण अपने कार के पास पहुंचीं तो रणबीर कपूर को याद आया कि वो अपनी गाड़ी को छोड़ आगे बढ़ गए हैं. 

फैंस ने भी दिया एक से बढ़कर एक रिएक्शन
सोशल मीडिया पर दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर का ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इसके साथ ही फैंस भी भरभर के अपना लाइक्स और कॉमेंट्स शेयर कर रहे हैं.

एक यूजर ने कॉमेंट कर लिखा कि, ‘उन्हें क्या हो गया है दीपिका पादुकोण कितनी कूल नजर आ रही हैं और रणबीर खोए हुए लग रहे हैं’. तो वहीं दूसरे ने लिखा कि ‘दीपिका को देखते ही रणबीर ने अपना दिमाग स्विच ऑफ कर लिया’.

इसके साथ कई यूजर्स ने इस रियूनियन पर अपनी खुशी जाहिर की तो कई लोगों ने रणबीर कपूर को पूकी भी कहा.
दूसरे की बीवी दीपिका को देखते ही रणबीर कपूर भूल बैठे सब कुछ, कर दी ऐसी हरकत कि वायरल हो गया वीडियो

दीपिका-रणबीर का वर्कफ्रंट
दोनों ही स्टार्स अपनी-अपनी प्रोफेशनल लाइफ में काफी बीजी हो गए हैं और लगातार फैंस को एंटरटेन करने की कोशिश कर रहे हैं. वर्कफ्रंट पर गौर करें तो दीपिका पादुकोण इन दिनों अल्लू अर्जुन की साथ AA22xA6 को लेकर चर्चा में हैं. तो वहीं रणबीर कपूर नितेश तिवारी की रामायण को लेकर बिजी हैं.



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2025 में विदर्भ बनी चैंपियन, देखें ईरानी कप जीतने वाली और रनर-अप टीमों की फुल लिस्ट

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वर्ष 

विजेता 

उपविजेता 


1959–60

बॉम्बे 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1962–63

बॉम्बे 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1963–64

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1966–67

रेस्ट ऑफ इंडिया

बॉम्बे


1967–68

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1968–69

रेस्ट ऑफ इंडिया

बॉम्बे


1969–70

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1970–71

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1971–72

रेस्ट ऑफ इंडिया

बॉम्बे


1972–73

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1973–74

रेस्ट ऑफ इंडिया

बॉम्बे


1974–75

कर्नाटक 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1975–76

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1976–77

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1977–78

रेस्ट ऑफ इंडिया

बॉम्बे


1978–79

रेस्ट ऑफ इंडिया

कर्नाटक 


1979–80


1980–81

दिल्ली 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1981–82

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1982–83

रेस्ट ऑफ इंडिया

दिल्ली 


1983–84

कर्नाटक 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1984–85

रेस्ट ऑफ इंडिया

बॉम्बे


1985–86

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1986–87

रेस्ट ऑफ इंडिया

दिल्ली 


1987–88

हैदराबाद 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1988–89

तमिलनाडु 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1989–90

दिल्ली 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1990–91

रेस्ट ऑफ इंडिया

बंगाल 


1991–92

हरियाणा 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1992–93

रेस्ट ऑफ इंडिया

दिल्ली 


1993–94

रेस्ट ऑफ इंडिया

पंजाब 


1994–95

बॉम्बे

रेस्ट ऑफ इंडिया


1995–96

बॉम्बे 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1996–97

कर्नाटक 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1997–98

मुंबई 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1998–99

कर्नाटक 

रेस्ट ऑफ इंडिया


1999–2000

रेस्ट ऑफ इंडिया

कर्नाटक 


2000–01

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2001–02

रेस्ट ऑफ इंडिया

बड़ौदा 


2002–03

रेलवेज

रेस्ट ऑफ इंडिया


2003–04

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2004–05

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2005–06

रेलवेज 

रेस्ट ऑफ इंडिया


2006–07

रेस्ट ऑफ इंडिया

उत्तर प्रदेश 


2007–08

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2008–09

रेस्ट ऑफ इंडिया

दिल्ली 


2009–10

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2010–11

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई


2011–12

रेस्ट ऑफ इंडिया

राजस्थान 


2012–13

रेस्ट ऑफ इंडिया

राजस्थान 


2013

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2013–14

कर्नाटक 

रेस्ट ऑफ इंडिया


2014–15

कर्नाटक 

रेस्ट ऑफ इंडिया


2015–16

रेस्ट ऑफ इंडिया

मुंबई 


2016–17

रेस्ट ऑफ इंडिया

गुजरात 


2017–18

विदर्भ

रेस्ट ऑफ इंडिया


2018–19

विदर्भ 

रेस्ट ऑफ इंडिया


2019–20

रेस्ट ऑफ इंडिया

 सौराष्ट्र 


2022–23

रेस्ट ऑफ इंडिया

मध्य प्रदेश 


2023–24

रेस्ट ऑफ इंडिया

 सौराष्ट्र 


2024–25

मुंबई 

रेस्ट ऑफ इंडिया


2025–26

विदर्भ 

रेस्ट ऑफ इंडिया


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एसबीआई में नौकरी का सुनहरा मौका, स्पेशलिस्ट ऑफिसर भर्ती की आखिरी तारीख बढ़ी, 15 अक्टूबर तक करें आवेदन

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एसबीआई की इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष और अधिकतम आयु 35 वर्ष तय की गई है. हालांकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी. एससी और एसटी वर्ग को 5 वर्ष, ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष और दिव्यांग उम्मीदवारों को अधिकतम 10 वर्ष तक की छूट दी जाएगी.

एसबीआई की इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष और अधिकतम आयु 35 वर्ष तय की गई है. हालांकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी. एससी और एसटी वर्ग को 5 वर्ष, ओबीसी वर्ग को 3 वर्ष और दिव्यांग उम्मीदवारों को अधिकतम 10 वर्ष तक की छूट दी जाएगी.

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आवेदक के पास स्नातक या स्नातकोत्तर की डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्हें बैलेंस शीट को समझने, अप्रेजल तैयार करने, क्रेडिट प्रपोजल का आकलन करने और क्रेडिट मॉनिटरिंग जैसी क्षमताओं में दक्ष होना जरूरी है.

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आवेदक के पास स्नातक या स्नातकोत्तर की डिग्री होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्हें बैलेंस शीट को समझने, अप्रेजल तैयार करने, क्रेडिट प्रपोजल का आकलन करने और क्रेडिट मॉनिटरिंग जैसी क्षमताओं में दक्ष होना जरूरी है.

वेतन संरचना इस भर्ती को और भी खास बनाती है. चयनित स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स को हर महीने 85,920 रुपये से लेकर 1,05,280 रुपये तक का वेतन मिलेगा. इसके अलावा, बैंक की ओर से अन्य भत्ते और सुविधाएं भी दी जाएंगी, जिससे पैकेज और ज्यादा आकर्षक हो जाएगा.

वेतन संरचना इस भर्ती को और भी खास बनाती है. चयनित स्पेशलिस्ट ऑफिसर्स को हर महीने 85,920 रुपये से लेकर 1,05,280 रुपये तक का वेतन मिलेगा. इसके अलावा, बैंक की ओर से अन्य भत्ते और सुविधाएं भी दी जाएंगी, जिससे पैकेज और ज्यादा आकर्षक हो जाएगा.

भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह इंटरव्यू के आधार पर होगी. एसबीआई की ओर से 100 अंकों का इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा और इन्हीं अंकों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. यानी इस बार कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी और केवल इंटरव्यू के प्रदर्शन से ही भविष्य तय होगा.

भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह इंटरव्यू के आधार पर होगी. एसबीआई की ओर से 100 अंकों का इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा और इन्हीं अंकों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. यानी इस बार कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी और केवल इंटरव्यू के प्रदर्शन से ही भविष्य तय होगा.

आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को फीस भी जमा करनी होगी. सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये रखा गया है, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों को फीस में पूरी छूट दी गई है. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और उम्मीदवारों को एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट sbi.co.in पर जाकर ही आवेदन करना होगा.

आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को फीस भी जमा करनी होगी. सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये रखा गया है, जबकि एससी, एसटी और दिव्यांग उम्मीदवारों को फीस में पूरी छूट दी गई है. आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और उम्मीदवारों को एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट sbi.co.in पर जाकर ही आवेदन करना होगा.

सबसे पहले वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, इसके बाद मांगी गई जानकारी दर्ज कर शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट करना होगा और अंत में उसका प्रिंट आउट लेना भी जरूरी होगा.

सबसे पहले वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, इसके बाद मांगी गई जानकारी दर्ज कर शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट करना होगा और अंत में उसका प्रिंट आउट लेना भी जरूरी होगा.

Published at : 05 Oct 2025 11:37 AM (IST)

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‘गाजा में अभी सिर्फ बमबारी रोकी है…’, हमास के साथ युद्धविराम को लेकर इजरायल का बड़ा बयान

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फिलिस्तीनी उग्रवादी संगठन हमास के साथ गाजा शांति समझौते को लेकर इजरायल ने रविवार (5 अक्टूबर, 2025) को बड़ा बयान दिया है. इजरायल की सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि गाजा में अभी तक कोई युद्धविराम लागू नहीं हुआ है, बल्कि अभी कुछ बमबारी पर अस्थायी रूप से विराम लगाया गया है.

इजरायली प्रवक्ता के मुताबिक, इजरायल की सेना (IDF) जरूरत पड़ने पर अपनी आत्मरक्षा के लिए गाजा में अपने सैन्य अभियान को जारी रख सकती है.

इजरायली बंधकों को लेकर होगी बातचीत

इजरायली सरकार के प्रवक्ता ने कहा, ‘इजरायल के वार्ताकार आज रविवार (5 अक्टूबर, 2025) की रात को मिस्र के लिए रवाना होंगे, जहां कल सोमवार (6 अक्टूबर, 2025) से इजरायली बंधकों की रिहाई को लेकर बातचीत शुरू होने की संभावना है.

गाजा में अभी भी जारी हैं इजरायल के हमला

गाजा में शांति समझौते की शुरुआत की चर्चाओं के बीच अभी इजरायल की ओर से गाजा में लगातार बमबारी की जा रही है. गाजा के उत्तरी हिस्सों में लोगों के लिए हालात बेहद मुश्किल बने हुए हैं. बीच-बीच में बम विस्फोटों की आवाजें सुनाई दे रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्वी इलाकों में अभी भी विस्फोट जारी है, जो बेहद खतरनाक हो चुके हैं और वह इलाका बिल्कुल भी आने जाने के लायक नहीं रहा है.

फिलिस्तीनियों पर हमले के लिए इजरायल क्वाडकॉपटर का कर रहा इस्तेमाल

यह भी बताया जा रहा है कि इजरायली सेना फिलिस्तीनियों पर हमला करने के लिए क्वाडकॉपटर का इस्तेमाल कर रही है. इनमें वो लोग भी शामिल हैं, जो दक्षिण और मध्य गाजा से उत्तरी इलाके की ओर भागकर जाने की कोशिश में हैं.

लोगों को युद्धविराम लागू होने का इंतजार

इस बीच काफी लोग इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने घर वापस लौट सकें. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जो कुछ लोग कल शनिवार (4 अक्टूबर, 2025) को वापस लौटने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें इजरायली सेना (IDF) ने गोली मार दी.

घायलों से भरे हैं अस्पताल, इलाज के अभाव में तोड़ रहे दम

इस बीच गाजा के अस्पताल घायल लोगों से खचाखच भरे हुए हैं और उनमें कई फिलिस्तीनी इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं. इतना सब कुछ होने के बावजूद लोगों के मन में एक उम्मीद बनी हुई है. उन्हें उम्मीद है कि युद्धविराम समझौता जल्द से जल्द लागू होगा और ये कत्लेआम का सिलसिला थमेगा.

यह भी पढे़ेंः ‘हमास ने शांति प्रस्ताव नहीं माना तो होगा पूरी तरह से सफाया’, गाजा प्लान पर ट्रंप ने दी चेतावनी

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17 साल के किशोर ने आईफोन के लिए बेच दी किडनी, अब डायलिसिस को मजबूर- कांप उठे यूजर्स

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सोशल मीडिया की दुनिया में अक्सर अजीबोगरीब खबरें सामने आती हैं लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो इंसान को भीतर तक झकझोर देती हैं. ऐसा ही एक मामला चीन से सामने आया था जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. टेक्नोलॉजी के जुनून और महंगे गैजेट्स की चाहत इंसान को किस हद तक ले जा सकती है इसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक 17 साल के किशोर ने सिर्फ आईफोन और आईपैड खरीदने के लिए अपनी एक किडनी बेच दी थी. यह खबर जब सामने आई तो दुनिया भर के अखबारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी मच गई. आज यह घटना एक चेतावनी की तरह देखी जाती है कि शौक और दिखावे की चाह किस तरह जिंदगी को बर्बाद कर सकती है.

17 साल पहले आईफोन के लिए बेची किडनी, अब भुगत रहा अंजाम

चीन का रहने वाला यह किशोर, जिसका नाम मीडिया रिपोर्ट्स में वांग शांगकुन बताया गया है, साल 2011 में उस समय सुर्खियों में आया जब उसने ब्लैक मार्केट के जरिए अपनी किडनी बेच दी. उस वक्त उसकी उम्र महज 17 साल थी और उसे नवीनतम तकनीक की भूख थी. वह अपने दोस्तों की तरह आईफोन 4 और आईपैड 2 का मालिक बनना चाहता था. आर्थिक तंगी की वजह से उसके परिवार की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि ये महंगे गैजेट्स खरीद सके. ऐसे में किशोर ने गलत रास्ता अपनाया और अपनी किडनी बेचकर करीब 22,000 युआन (लगभग कुछ हजार डॉलर) हासिल किए.

बिस्तर तक सीमित रह गई जिंदगी

किडनी बेचने के बाद उसने अपने मनपसंद गैजेट्स तो खरीद लिए लेकिन उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अवैध और अस्वच्छ माहौल में हुई इस सर्जरी ने उसकी बाकी की जिंदगी को दर्द और परेशानी से भर दिया. कहा जाता है कि अब उसकी दूसरी किडनी भी ठीक से काम नहीं कर रही और वह डायलिसिस पर निर्भर है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, उसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वह आजकल लगभग बिस्तर पर ही सीमित हो गया है.

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यह खबर सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा का विषय बनी और लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं.

एक यूजर ने लिखा, “iPhone हर साल नया आता है लेकिन जिंदगी एक बार ही मिलती है. ये सबसे बड़ी सीख है.”

दूसरे ने तंज कसा, “टेक्नोलॉजी की दौड़ ने इंसानों को पागल बना दिया है. अब iPhone सिर्फ फोन नहीं, लोगों के लिए स्टेटस सिंबल है.”

एक और यूज़र ने लिखा, “ये दुनिया का सबसे महंगा iPhone साबित हुआ. क्योंकि इसकी कीमत जिंदगी है.”

वहीं कई लोगों ने इस घटना को देखकर युवाओं को चेतावनी दी कि किसी भी गैजेट या शौक के लिए सेहत से समझौता कभी नहीं करना चाहिए.

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डाइट में शामिल इन आदतों से लग जाता है डायबिटीज होने का पता, आज ही दूर कर लें यह कमी

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Blood Sugar Management: हम जो डाइट लेते हैं, उसका हमारी सेहत पर काफी गहरा असर पड़ता है. यह न सिर्फ हमें एनर्जी देती है, इसके साथ ही हमारे शरीर में सीधे तौर पर ब्लड शुगर लेवल को भी प्रभावित करती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि किसी भी इंसान का डायटरी प्रोफाइल यानी वह दिन में अपनी डाइट में क्या-क्या शामिल करता है, कितना खाता है और डाइट में शामिल इन खानों की क्वालिटी कैसी है, इसका सीधे तौर पर हमारे शरीर में शुगर लेवल पर असर पड़ता है. यही कारण है कि डायबिटीज और ब्लड शुगर के मरीजों को खानपान मैनेजमेंट करने के लिए कहा जाता है. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं कि कैसे आपका खाना आपकी सेहत को प्रभावित करता है.

क्या होता है डायटरी प्रोफाइल का मतलब?

चलिए, सबसे पहले हम आपको डायटरी प्रोफाइल के बारे में विस्तार से बताते हैं. इसका मतलब होता है कि आपके डेली खाने-पीने की चीजों में क्या शामिल है. जैसे कि भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट का अनुपात, चीनी और मीठे पदार्थों की मात्रा, फाइबर, फल-सब्जियों का स्तर और भोजन का समय व उसको डेली खाने का पैटर्न. ये सभी चीजें मिलकर किसी भी इंसान के डायट, एनर्जी और ब्लड शुगर लेवल को अफेक्ट करती हैं.

डाइट और शुगर लेवल का रिलेशन

अब जानते हैं कि हमारी डायटरी प्रोफाइल और शुगर लेवल का क्या रिलेशन है. अगर आपकी डाइट में ज्यादा शुगर वाली चीजें शामिल हैं, तो इससे ब्लड शुगर लेवल तेजी से ऊपर जाता है. अगर आप अपनी डाइट में रिफाइंड कार्ब जैसे कि मैदा, सफेद ब्रेड को शामिल करते हैं, तो इससे यह होता है कि ग्लूकोज तुरंत बढ़ता है और इंसुलिन पर दबाव पड़ता है. इसके अलावा फाइबर और साबुत अनाज से ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होता है, जिससे शुगर लेवल स्थिर रहता है. अगर आप ज्यादा फैट और कैलोरी वाला आहार शामिल करते हैं, तो होता यह है कि इससे मोटापा बढ़ता है, जो इंसुलिन रेज़िस्टेंस और डायबिटीज का बड़ा कारण बनता है. यही कारण है कि आपको अपने डेली डाइट को संतुलित रखना चाहिए, ताकि शुगर लेवल को लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सके.

क्या कहता है रिसर्च?

Harvard Nutrition Source के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट का टाइप और उसकी मात्रा शुगर लेवल पर सीधा असर डालती है. American Diabetes Association के अनुसार, फाइबर युक्त और कम शुगर वाला डाइट ब्लड शुगर को कंट्रोल करने का एक बेहतरीन तरीका और फर्स्ट स्टेप है इसको कंट्रोल करने का. इनसे यह पता चलता है कि हमें अपनी डाइट पर कंट्रोल करना चाहिए, ताकि शुगर लेवल को ट्रिगर होने का मौका न मिल पाए.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. 

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बिना कोडिंग जाने भी बनाएं ऐप और फिर हर महीने कमाएं लाखों रुपए, जानिए AI से ऐसे होगा पूरा काम

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How to Develop App: आज के डिजिटल युग में मोबाइल ऐप्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. पहले जहां ऐप डेवलपमेंट के लिए कोडिंग स्किल और टेक्निकल नॉलेज ज़रूरी होती थी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कोई भी व्यक्ति बिना कोडिंग सीखे खुद का ऐप बना सकता है. यही वजह है कि अब कई लोग इस तकनीक का इस्तेमाल करके न सिर्फ अपने बिज़नेस को बढ़ा रहे हैं बल्कि हर महीने लाखों रुपये की कमाई भी कर रहे हैं.

अब कोडिंग नहीं, AI करेगा पूरा काम

पहले एक ऐप तैयार करने में महीनों लग जाते थे डेवलपर हायर करना पड़ता था कोडिंग, टेस्टिंग और डिज़ाइनिंग में काफी खर्च आता था. लेकिन अब AI टूल्स ने इस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है. आपको बस अपने ऐप का आइडिया बताना होता है जैसे कि फूड डिलीवरी ऐप, एजुकेशन ऐप, या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म. इसके बाद AI अपने आप कोड, लेआउट और फंक्शन्स तैयार कर देता है. कुछ ही मिनटों में आपका ऐप बनकर डाउनलोड या शेयर करने के लिए तैयार हो जाता है.

कौन-कौन से AI टूल्स से बन सकता है ऐप

आज कई ऐसे AI प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं जो “No Code App Builder” के नाम से जाने जाते हैं. जैसे Appy Pie, Glide, Adalo, Bubble, Thunkable, और Zoho Creator. इन टूल्स में यूज़र्स को बस Drag and Drop Interface मिलता है. मतलब आप बिना किसी प्रोग्रामिंग भाषा के सिर्फ माउस से एलिमेंट्स जोड़कर ऐप डिजाइन कर सकते हैं. इन टूल्स में AI आपके विचार को समझकर सबसे उपयुक्त डिजाइन और फंक्शनलिटी सुझाता है. जैसे अगर आप चाहते हैं कि आपका ऐप पेमेंट स्वीकार करे तो AI अपने आप पेमेंट गेटवे जोड़ देता है.

ऐसे करें कमाई लाखों की

एक बार जब आपका ऐप तैयार हो जाता है, तो कमाई के कई रास्ते खुल जाते हैं. आप अपने ऐप को Google Play Store या Apple App Store पर लॉन्च कर सकते हैं. इसके बाद आप इन-ऐप ऐड्स, प्रीमियम सब्सक्रिप्शन, या पेड डाउनलोड्स के ज़रिए पैसा कमा सकते हैं.

इसके अलावा, कई लोग अपने बनाए ऐप्स को क्लाइंट्स को बेचकर भी अच्छी कमाई कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी रेस्टोरेंट या स्कूल के लिए कस्टम ऐप बनाया तो आप इसके बदले 50,000 से 2 लाख रुपये तक चार्ज कर सकते हैं.

छोटे बिजनेस और स्टार्टअप्स के लिए वरदान

AI-आधारित ऐप बिल्डर्स छोटे व्यापारियों और स्टार्टअप्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. जिन लोगों के पास डेवलपर टीम या बजट नहीं होता वे अब खुद ऐप बनाकर अपने ब्रांड को डिजिटल बना सकते हैं. इससे न केवल उनका खर्च घटता है बल्कि मार्केट में पहुंच भी बढ़ती है.

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