S-400 की 3 बटालियन लेकर समंदर में उतरा रूस का सबसे पावरफुल जंगी जहाज, जानें क्या है प्लान

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रूस ने किरोव श्रेणी के क्रूजर एडमिरल नखिमोव लड़ाकू विमान का 28 साल बाद व्हाइट सी में परीक्षण शुरू कर दिया है. ये दुनिया के सबसे बड़े और सबसे भारी हथियारों से लैस वॉरशिप में से एक है. रूस का ये युद्धपोत जुलाई के अंतिम सप्ताह में समंदर में उतरा है और अभी कई तरह के टेस्ट से गुजर रहा है.

28,000 टन के युद्धपोत की मारक क्षमता क्रूजर एडमिरल नखिमोव को खास बनाती है. इसके साथ ही एडमिरल नखिमोव रूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का इस्तेमाल करने वाला पहला युद्धपोत भी है. बता दें कि S-400 की तीन बटालियन इस जहाज पर तैनात हैं.

रूस के जहाज पर 80 क्रूज मिसाइलों का शस्त्रागार 
मिलिट्री वॉच मैगजीन के मुताबिक, रूस के इस जंगी जहाज पर 80 क्रूज मिसाइलों का शस्त्रागार है. इसमें 3M14T कलिब्र जैसी मिसाइलें हैं. इनका इस्तेमाल 2500 किलोमीटर दूर जमीन पर सटीक हमले करने के लिए किया जा सकता है. इसमें नई जिरकोन जैसी जहाज-रोधी मिसाइलें शामिल हैं. इनकी रफ्तार मैक 9 तक है. इसके प्रोजक्शन चैंबर का बड़ा हिस्सा (176 में से 96) S-400 लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली के नौसैनिक संस्करण को समायोजित करने के लिए है.

कितना पावरफुल है एडमिरल नखिमोव
एडमिरल नखिमोव S-400 का इस्तेमाल करने वाला पहला युद्धपोत है. इस सिस्टम को पुराने S-300F प्रणाली को बदलने के लिए नवीनीकरण के दौरान स्थापित किया गया था. किरोव श्रेणी का क्रूजर S-400 प्रणालियों की तीन बटालियन ले जा सकता है, जो कि ज्यादातर देशों की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के कुल शस्त्रागार से कहीं ज्यादा है. इसे जमीन आधारित प्रणालियों के रूप में निर्यात करने पर इसकी लागत 1.6 बिलियन डॉलर है.

क्रूजर एडमिरल नखिमोव लड़ाकू विमान मैक 8 तक की गति से उड़ान भरने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों को मार गिराने में भी सक्षम हैं, जबकि मिसाइल स्वयं मैक 14 से अधिक गति से उड़ती है. 40N6 और S-400 सिस्टम की अन्य मिसाइलों का रूस-यूक्रेन युद्ध में गहन युद्ध परीक्षण किया गया है.

रूस के अधिकारियों ने किरोव श्रेणी के आधुनिकीकरण की महत्वपूर्ण क्षमता पर जोर दिया है. अधिकारियों का अनुमान है कि भविष्य में इन युद्धपोतों की वायु रक्षा क्षमताएं S-500 और S-550 जैसे हाईटेक सिस्टम के लिए विकसित लंबी दूरी की मिसाइलों के एकीकरण से और भी बेहतर हो सकती हैं.

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अच्छा हुआ बेचारा पटवारी बच गया… नेपाल में मिली एमपी की अर्चना तिवारी, अब यूजर्स ले रहे मजे, ब

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पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के कटनी की रहने वाली अर्चना तिवारी की गुमशुदगी को लेकर खूब चर्चाएं हो रही थी. लोगों के मन में अनहोनी की आशंकाएं थीं. और यही कारण था कि पुलिस काफी जी जान से अर्चना तिवारी को ढूंढने में लगी थी. 7 अगस्त को गुमशुदा हुई अर्चना तिवारी 12 दिनों बाद यूपी के लखीमपुर खीरी में पुलिस को मिली. अनहोनी की आशंकाएं और सारे कयास धरे रह गए. अर्चना तिवारी ने बताया कि वह शादी के दबाव से बचने के लिए खुद ही ट्रेन से उतर के भाग गई थी. अब सोशल मीडिया पर लोग अर्चना तिवारी को इसी बात को लेकर ट्रोल कर रहे हैं. 

जानबूझ के भागने पर अर्चना की ट्रोलिंग

कटनी की अर्चना तिवारी 7 अगस्त को इंदौर से कटनी के लिए नर्मदा एक्सप्रेस में बैठी थीं. लेकिन वह इंदौर नहीं पहुंची और स्टेशन पर जब काफी देर तक अर्चना तिवारी नहीं मिलीं. तो घर वालों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. इसके बाद पुलिस एक्शन में आई और तफ़तीश शुरू कर दी. पुलिस ने हर एंगल से जांच करते हुए तकरीबन 12 दिन बाद अर्चना को नेपाल की सीमा के पास से लखीमपुर खीरी में बरामद किया. 

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मामले की हकीकत सामने आई तो सोशल मीडिया पर अर्चना तिवारी की सलामती की दुआ मांग रहे लोग भी हैरान रह गए. दरअसल अर्चना तिवारी ने बताया कि परिवार वाले उन पर पटवारी से शादी का दबाव डाल रहे थे. लेकिन  अर्चना को पढ़ाई करनी थी. वह इस दौरान अपने दोस्त के साथ थी. इसी बात को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अब अर्चना को ट्रोल कर रहे हैं.

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लोग दे रहे हैं अलग-अलग रिएक्शन

अर्चना तिवारी 12 दिन से लापता थी और अब जब वह मिल गई हैं. तो उसके बाद की कहानी जानने के बाद लोग उन्हें ट्रोल करने लगे हैं. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है ‘बहुत अच्छी बात है खबर यह भी है कि उनका किसी लड़के के साथ अफेयर है उसके साथ है वह.’ एक और यूजर ने लिखा है ‘कहानी अच्छा बना लेती है मैडम जी सच्चाई और कुछ है अच्छा हुआ बेचारा पटवारी बच गया, नहीं तो हनीमून पर मरवा देती.’  तो वहीं एक और यूजर ने कहा ‘यही उम्मीद थी देवी जी से माता पिता पढ़ने भेजते हैं यह गुल खिलाने में लग जाते हैं.’ एक और यूजर ने लिखा है ‘घर से बाहर एग्जाम देने जाती थी बॉयफ्रेंड के साथ.’

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Google Pixel 10 Series हुई लॉन्च, दमदार फीचर्स के साथ कीमत का भी ऐलान, जानें डिटेल्स

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लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गूगल की पिक्सल 10 सीरीज से पर्दा उठ ही गया है. कंपनी ने मेड बाय गूगल इवेंट में पिक्सल 10, पिक्सल 10 प्रो, पिक्सल 10 प्रो XL और पिक्सल 10 प्रो फोल्ड को भारत और ग्लोबल मार्केट के लिए लॉन्च कर दिया है. यह कंपनी की पहली सीरीज है, जिसके सभी मॉडल में ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है. इन स्मार्टफोन्स के साथ कंपनी ने पिक्सल वॉच 4 और पिक्सल बड्स 2a को भी लॉन्च किया है. ये सभी डिवाइस गूगल जेमिनी से पावर्ड AI फीचर्स के साथ लॉन्च हुए हैं.

इन स्पेसिफिकेशन के साथ लॉन्च हुए हैं पिक्सल स्मार्टफोन

गूगल पिक्सल 10 में 6.3 इंच की full-HD Actua OLED डिस्प्ले दी गई है, जो 60-120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. प्रोटेक्शन के लिए डिस्प्ले पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 दिया गया है. AI और मशीन लर्निंग जैसे टास्क को हैंडल करने के लिए इसमें गूगल टेंसर G5 चिपसेट मिलेगा. कैमरा की बात करें तो इसमें 48MP का प्राइमरी सेंसर, 13MP का अल्ट्रा वाइड लेंस और 10.8MP का टेलीफोटो लेंस दिया गया है. सेल्फी के लिए फ्रंट में 10.5MP कैमरा लगाया गया है.

गूगल पिक्सल 10 प्रो

यह फोन भी 6.3 इंच के डिस्प्ले के साथ आता है. इसे भी गूगल टेंसर G5 चिपसेट से लैस किया गया है, जिसे टाइटन M2 सिक्योरिटी चिप के साथ पेयर किया गया है. इसके रियर में 50MP + 48MP + 48MP कैमरा सेटअप मिलता है. फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 42MP कैमरा दिया गया है.

गूगल पिक्सल 10 प्रो XL 

यह फोन 6.8 इंच के Super Actua डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ है. इसका चिपसेट और कैमरा सेटअप बिल्कुल 10 प्रो जैसा है. ये फोन IP68 रेटिंग के साथ लॉन्च हुए हैं, जिसका मतलब है कि ये धूल और पानी से बचाव में सक्षम है. इन सभी फोन्स को गूगल सात साल तक अपडेट देगी. इस सीरीज के सभी फोन्स को जेमिनी लाइव, सर्कल टू सर्च, लाइव ट्रांसलेशन और कॉल असिस्ट समेत कई AI फीचर्स से लैस किया गया है. 

पिक्सल 10 प्रो फोल्ड

गूगल इसे अब तक का अपने सबसे ड्यूरेबल फोल्ड फोन बता रही है. इसमें 8 इंच की मेन स्क्रीन के साथ 6.4 इंच का आउटर डिस्प्ले मिलता है. इस फोन को भी गूगल टेंसर G5 चिपसेट और टाइटन M2 चिप से लैस किया गया है. इसके रियर में 48MP + 10.5MP + 10.8MP का कैमरा सेटअप दिया है. इसके फ्रंट में 10MP के दो सेल्फी कैमरा मिलते हैं.

कितनी है इन स्मार्टफोन्स की कीमत?

भारत में पिक्सल 10 की कीमत 79,999 रुपये, पिक्सल 10 प्रो की 1,09,999 और पिक्सल 10 प्रो XL की कीमत 1,24,999 रुपये से शुरू होती है. ये सभी कीमतें 256GB वेरिएंट की है. फोल्ड फोन की बात करें तो इसके 256GB वेरिएंट को भारत में 1,72,999 रुपये में खरीदा जा सकेगा. 

 

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युजवेंद्र चहल ने धनाश्री को एलिमनी में कितने करोड़ दिए? पूरी सच्चाई जानें

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इंडियन क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा ने साल 2020 में लव मैरिज की थी. हालांकि अब ये कपल तलाक लेकर अलग हो चुका है. वहीं तलाक के बाद ये खबरें सामने आ रही थी कि धनश्री ने 60 करोड़ की एलिमनी ली है. इसपर उनके पेरेंट्स ने सफाई देते हुए खबरों को झूठा बताया था. लेकिन अब असली एलिमनी का राज खुल गया है. तो चलिए जानते हैं कि जानिए चहल ने तलाक के लिए धनश्री को कितने करोड़ दिए थे.

धनश्री वर्मा ने कितनी एलिमनी ली?

युजवेंद्र चहल और धनश्री वर्मा ने करीब 6 महीने अलग रहने के बाद इसी साल की शुरुआत में एक-दूसरे से तलाक ले लिया था. वहीं बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट की मानें तो युजवेंद्र चहल ने धनश्री वर्मा को एलिमनी के तौर पर 60 करोड़ रुपए नहीं बल्कि 4.75 करोड़ रुपए देने वाले हैं. रिपोर्ट के अनुसार इस रकम में से चहल 2.37 करोड़ पहले ही दे चुके हैं. बाकी रकम का भुगतान भी जल्द ही कर दिया जाएगा.


एक्ट्रेस की फैमिली ने दी थी सफाई

वहीं इससे पहले खबरें आ रही थी कि धनश्री ने 60 करोड़ की एलिमनी की डिमांड की है. इसपर उनके परिवार के एक सदस्य ने ‘बॉम्बे टाइम्स’ से बात की थी. उन्होंने कहा था कि, ‘एलिमनी को लेकर जो भी खबरें समाने आई है, वो बिल्कुल झूठी है, हम उनसे बहुत दुखी हैं. मैं बस ये साफ करना चाहता हूं, ना तो इतनी रकम कभी मांगी गई, ना डिमांड की गई और ना ही ऑफर की गई है. ये सिर्फ और सिर्फ अफवाहें हैं, जिनमें कोई सच्चाई नहीं है..’

तलाक के बाद टूट गई थी – धनश्री

धनश्री वर्मा ने हाल ही में अपने तलाक को लेकर ह्यूमन ऑफ बॉम्बे से बात की है. उन्होंने कहा कि, वो दौर बहुत बुरा था. उस वक्त सिर्फ मैं ही नहीं मेरी फैमिली भी टूट गई थी. मेरी मां ने लोगों के फोन उठाने बंद कर दिए थे. ऑनलाइन ट्रोलिंग से भी हम सभी पर बहुत बुरा असर पड़ा था.

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प्राइवेट इंस्टिट्यूशन में भी मांगा जा रहा रिजर्वेशन, जानें इंस्टिट्यूशन ऑफ इमीनेंस में कितना है

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आरक्षण सिर्फ सरकारी संस्थानों तक ही सीमित क्यों रहे? यही सवाल अब संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने उठाया है. दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली इस समिति ने संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की और साफ कहा कि प्राइवेट हायर एजुकेशन इंस्टीटूट्स में भी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए आरक्षण जरूरी होना चाहिए.

समिति ने सुझाव दिया है कि संसद एक ऐसा कानून बनाए, जिसके तहत निजी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC छात्रों के लिए 15%, ST छात्रों के लिए 7.5% और OBC छात्रों के लिए 27% आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके.

संविधान में है प्रावधान, लेकिन लागू नहीं हुआ

रिपोर्ट में साफ किया गया कि संविधान का अनुच्छेद 15(5), जिसे 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने 93वें संशोधन से जोड़ा था, सरकार को यह अधिकार देता है कि वह निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण जरूरी कर सके. 2014 में प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुच्छेद 15(5) को वैध ठहराया था. यानी कानूनी तौर पर प्राइवेट संस्थानों में आरक्षण लागू करने का रास्ता पहले से खुला हुआ है. इसके बावजूद अब तक संसद ने ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया है जो प्राइवेट हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन को SC, ST और OBC छात्रों के लिए आरक्षण देने के लिए बाध्य करे.

निजी संस्थानों में बेहद कम प्रतिनिधित्व

समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश के टॉप प्राइवेट कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में हाशिए पर खड़े समुदायों का प्रतिनिधित्व बेहद कम है. आंकड़ों के मुताबिक SC छात्रों की संख्या 1% से भी कम है. ST छात्रों की मौजूदगी आधे प्रतिशत के आसपास है. वहीं OBC छात्रों की हिस्सेदारी करीब 11% तक ही सीमित है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

विशेषज्ञों का कहना है कि आज प्राइवेट उच्च शिक्षा संस्थान रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल सहयोग के मामले में आगे हैं. यहां पढ़ाई से छात्रों को बेहतर अवसर मिलते हैं. लेकिन सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्र इन संस्थानों तक पहुंच नहीं पाते. इसकी बड़ी वजह ज्यादा फीस और आरक्षण का अभाव है. अगर प्राइवेट संस्थानों में आरक्षण लागू किया जाता है तो SC, ST और OBC छात्रों को न सिर्फ प्रवेश मिलेगा बल्कि उन्हें समान अवसर भी मिल सकेंगे.

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Bathroom Vastu Tips: बाथरूम से जुड़ी गलतियां ला सकती है घर में नकारात्मकता! जानें वास्तु के 7 स

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Bathroom Vastu Tips: हिंदू धर्म के अनुसार घर में हो रही परेशानियां, काम में नुकसान या रिश्तों में हो रहे टकराव का कई बार कारण वास्तु दोष होता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, बाथरूम को घर में सबसे अधिक नकारात्मक ऊर्जा वाला स्थान बताया गया है.

बाथरूम अगर गलत स्थान, रखरखाव या डिजाइन से बना हो तो यह घर के वातावरण और सदस्यों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. इन दोषों को दूर करने के लिए आप अपने घर में छोटे- छोटे उपाय से पॉजिटिविटी बढ़ा सकते हैं और सुख-समृद्धि बनाए रख सकते हैं. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा से.

बाथरूम के दरवाजा को खोल कर न रखें
वास्तु के मुताबिक बाथरूम का दरवाजा खुला रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाती है. दरवाजे को खुला रखने से परिवारजनों की सेहत पर भी असर पड़ता है और घर का माहौल भी असंतुलित रहता है. अगर आपका बाथरूम बेडरूम के साथ ही है तब तो इसे बिल्कुल खुला न छोड़े.

बाथरूम और टॉयलेट के बीच लगाएं परदा
अगर घर में एक ही जगह बाथरूम और टॉयलेट बने हैं तो वास्तु के हिसाब से इनके बीच में परदा लगाना चाहिए. इससे वास्तु दोष तो कम होने के साथ स्वच्छता और प्राइवेसी दोनों ही बनी रहती है.

सही दिशा में बाथरूम
शास्त्रों में बाथरूम बनाने की सही दिशा उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा को माना गया है. अगर बाथरूम दक्षिण दिशा कि ओर हो तो वहां हरे पौधे रखें और किसी भी प्रकार की डिम लाइट या लाल रोशनी का इस्तेमाल न करें. इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

खिड़की को खुला रखें
बाथरूम की खिड़की खुली रखने से सूरज की रोशनी से पॉजिटिविटी आती है और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालती है. इससे वेंटिलेशन भी बना रहता है.

बाथरूम को गीला न रखें
बाथरूम को गीला रखने से वहां बदबू और नमी रह जाती है. जिससे वास्तु दोष होता है और नकारात्मक ऊर्जा का संचार घर में होता है.

नल को बंद करके रखें
कई बार बाथरूम में नल खराब हो जाने की वजह से नल में से पानी टपकता रहता है. जो धन हानि, आर्थिक नुकसान या नकारात्मकता का संकेत माना जाता है.

फिटकरी का इस्तेमाल
बाथरूम में फिटकरी को ऐसी जगह रखें जहां वे किसी को नजर न आए. मान्यताओं के मुताबिक यह नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है और घर में पॉजिटिविटी बनाए रखती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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सिर्फ ₹2,000 की SIP से बने 4 करोड़! ये है Long Term Investment का कमाल| Paisa Live

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अगर आप Share Market में अच्छा मुनाफा कमाने का सोच रहे हैं, तो Long Term Investment एक बेहतरीन विकल्प है। HDFC ELSS Tax Saver Fund ने 29 सालों में इसका बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। 31 मार्च 1996 को शुरू हुई इस स्कीम ने अब तक लम्पसम निवेश पर 22.27% सालाना का रिटर्न दिया है। यानी अगर आपने केवल ₹30,000 एक बार में निवेश किए होते, तो आज वो रकम बढ़कर ₹1 करोड़ से ज्यादा हो जाती। वहीं, अगर आपने ₹2,000 प्रति माह SIP शुरू की होती, तो आज वो वैल्यू लगभग ₹4 करोड़ तक पहुंच जाती। इस फंड में HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसी मजबूत कंपनियों में निवेश किया गया है। सेक्टर वाइज, इसमें 41% निवेश फाइनेंशियल सेक्टर और 12% ऑटो सेक्टर में है। ELSS फंड्स में निवेश करने पर आपको धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक टैक्स छूट भी मिलती है। AUM ₹16,579 करोड़ और एक्सपेंस रेशियो 1.70% है। लॉन्ग टर्म सोच और सही फंड का चुनाव आपको करोड़पति बना सकता है।

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Video: कोई तो रोक लो! उफान भरे नाले में चला दी बाइक, फिर मिला जिंदगी भर का सबक, देखें वीडियो

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Uttarakhand News: उत्तराखंड के कालाढूंगी थाना क्षेत्र के कोटाबाग चौकी इलाके में बुधवार 20 अगस्त को एक बड़ा हादसा टल गया. कालाढूंगी-कोटाबाग मार्ग पर गुरणी नाला उफान पर था और इसका तेज बहाव एक बाइक सवार को बहा ले गया, लेकिन ग्रीमाणों की तुरंत मदद से उसकी जान बच गई. यह घटना कल की बताई जा रही है और अब बाइक सवार सुरक्षित बताया जा रहा है.

लोगों ने बाइक सवार की मदद की

बता दें कि बारिश के कारण गुरणी नाला इतना उफान पर था कि उसका पानी सड़क पर भी फैल गया था. एक बाइक सवार इस नाले को पार करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पानी की तेज धारा में वह बैलेंस खो बैठा और बहने लगा. ग्रामीणों ने तुरंत इसकी खबर सुनी और मौके पर पहुंचे. उन्होंने रस्सी और अन्य साधनों का इस्तेमाल कर बाइक सवार को पानी से बाहर निकाला. अगर वहां पर मौजूद लोग और ग्रामीण समय पर नहीं पहुंचते तो यह हादसा और भी खतरनाक हो सकता था.

युवक की जान बाल-बाल बची

यह घटना कालाढूंगी थाना क्षेत्र के कोटाबाग चौकी के तहत हुई. गुरणी नाला कालाढूंगी-कोटाबाग मार्ग पर स्थित है, जो इस इलाके का एक महत्वपूर्ण रास्ता है. बरसात के मौसम में यहां के नाले अक्सर उफान पर आ जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है. इस बार भी नाले का पानी इतना ज्यादा था कि बाइक सवार को खतरा हो गया. सूत्रों के मुताबिक, बाइक सवार को ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.

उसे मामूली चोटें आई है, लेकिन उसकी जान बाल-बाल बच गई. स्थानीय लोग और पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और अब वे इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं.


Video: लड़की को प्रपोज करते ही फट गया ज्वालामुखी, लोग बोले- अभी ये हाल, शादी के बाद क्या होगा

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Social Media Viral Video: सोशल मीडिया पर एक खूबसूरत प्रपोजल वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक अपनी गर्लफ्रेंड को ग्वाटेमाला के वोल्केनो अकाटेनैंगो में प्रपोज करता है. इस वीडियो को इंस्टाग्राम रील के रूप में पोस्ट किया गया है और इसे देखकर लोग हैरान भी हैं और खुश भी. वीडियो में बैकग्राउंड में वोल्केनो फ्यूगो फट रहा है, जो इस पल को और भी ज्यादा खास बना देता है. यूजर ने बताया कि उन्हें कई डीएम मिल रहे थे कि लोग उनके वीडियो इंटरनेट पर ढूंढ रहे हैं, इसलिए उन्होंने इसे खुद शेयर कर दिया.

देखिए खूबसूरत प्रपोजल का वायरल वीडियो

वायरल वीडियो में एक लड़की और लड़का पहाड़ की चोटी पर खड़े हैं, जहां पीछे ज्वालामुखी फट रहा है. लड़का घुटने पर बैठकर रिंग दिखाता है और प्रपोजल करता है. लड़की खुशी से हां कहती है और दोनों एक-दूसरे को गले लगाते है. वीडियो में ज्वालामुखी का विस्फोट साफ दिखाई दे रहा है, जो इस पल को और भी रोमांटिक बना देता है. यूजर ने बताया कि यह विस्फोट उस दिन का पहला दृश्यमान विस्फोट था, जिसे उन्होंने देखा. वीडियो में सुनाई देता है कि वहां पर मौजूद लोग इसे देखकर कितना खुश हो रहे है.


लोगों को वीडियो बहुत पंसद आई

बता दें कि ग्वाटेमाला में वोल्केनो फ्यूगो को आध्यात्मिक दुनिया से जोड़ने वाली पवित्र कड़ी माना जाता है. यहां के लोग विस्फोटों को अलौकिक शाक्तियों का अभिव्यक्ति मानते हैं और इसे अनुष्ठानों और अर्पण का अवसर समझते हैं. यूजर ने लिखा कि यह आई लव यू को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाता है. मतलब यह जगह प्यार के इजहार के लिए कितनी खास है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है. वीडियो को देखने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई है और लोग इस वीडियो को बहुत ज्यादा पसंद कर रहे हैं.


दुनिया में किस धर्म के लोगों की कितनी जनसंख्या, जानें हिंदू से लेकर मुस्लिमों तक का पूरा आंकड़ा

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दुनिया की लगभग 85 फीसदी आबादी किसी न किसी धर्म से जुड़ी हुई है. इसका मतलब है कि धार्मिक विश्वास और परंपराएं आज भी मानव समाज के केंद्र में हैं. चाहे वह ईसाई धर्म हो, इस्लाम, हिंदू धर्म. सभी मिलकर पूरी दुनिया की संस्कृति और राजनीति को गहराई से प्रभावित करते हैं.

दुनिया की लगभग 85 फीसदी आबादी किसी न किसी धर्म से जुड़ी हुई है. इसका मतलब है कि धार्मिक विश्वास और परंपराएं आज भी मानव समाज के केंद्र में हैं. चाहे वह ईसाई धर्म हो, इस्लाम, हिंदू धर्म. सभी मिलकर पूरी दुनिया की संस्कृति और राजनीति को गहराई से प्रभावित करते हैं.

धर्म केवल विश्वास का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संरचना, जीवनशैली और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर डालता है. धर्मों की वैश्विक जनसंख्या का अध्ययन करना यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि आने वाले समय में दुनिया किस दिशा में जाएगी.

धर्म केवल विश्वास का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संरचना, जीवनशैली और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर डालता है. धर्मों की वैश्विक जनसंख्या का अध्ययन करना यह समझने के लिए महत्वपूर्ण है कि आने वाले समय में दुनिया किस दिशा में जाएगी.

worldpopulation review की रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है. 2020 में इसके अनुयायियों की संख्या लगभग 2.38 अरब थी. ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है. यह पूरी दुनिया की कुल आबादी का लगभग 31% हिस्सा है.

worldpopulation review की रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है. 2020 में इसके अनुयायियों की संख्या लगभग 2.38 अरब थी. ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है. यह पूरी दुनिया की कुल आबादी का लगभग 31% हिस्सा है.

ईसाई धर्म यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका में प्रमुख है. ईसाई धर्म में अलग-अलग आस्था से जुड़े लोग हैं, जिसमें कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स शामिल हैं. इनकी धार्मिक परंपराएं और उपासना पद्धतियां अलग-अलग होने के बावजूद सभी यीशु मसीह के संदेश पर आधारित हैं.

ईसाई धर्म यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका में प्रमुख है. ईसाई धर्म में अलग-अलग आस्था से जुड़े लोग हैं, जिसमें कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स शामिल हैं. इनकी धार्मिक परंपराएं और उपासना पद्धतियां अलग-अलग होने के बावजूद सभी यीशु मसीह के संदेश पर आधारित हैं.

दुनिया में इस्लाम दूसरा सबसे बड़ा धर्म. इस्लाम अनुयायियों की संख्या के हिसाब से दूसरे स्थान पर है. इसके अनुयायियों की संख्या 1.91 अरब है. यह दुनिया की कुल आबादी का लगभग 25% हिस्सा है.

दुनिया में इस्लाम दूसरा सबसे बड़ा धर्म. इस्लाम अनुयायियों की संख्या के हिसाब से दूसरे स्थान पर है. इसके अनुयायियों की संख्या 1.91 अरब है. यह दुनिया की कुल आबादी का लगभग 25% हिस्सा है.

इस्लाम के अनुयायी मुख्य रूप से मध्य एशिया, मध्य-पूर्व, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और अफ्रीका में पाए जाते हैं. जनसंख्या शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2050 तक इस्लाम ईसाई धर्म के बराबर पहुंच जाएगा. इसका कारण मुस्लिम बहुल देशों में उच्च जन्म दर को माना जा रहा है.

इस्लाम के अनुयायी मुख्य रूप से मध्य एशिया, मध्य-पूर्व, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और अफ्रीका में पाए जाते हैं. जनसंख्या शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2050 तक इस्लाम ईसाई धर्म के बराबर पहुंच जाएगा. इसका कारण मुस्लिम बहुल देशों में उच्च जन्म दर को माना जा रहा है.

हिंदू धर्म दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है. यहां हिंदू धर्म मानने वालों की संख्या 1.16 अरब है. विश्व में इसकी साझेदारी लगभग 15 फीसदी है. मुख्य रूप से भारत और नेपाल में हिंदू धर्म का पालन होता है.

हिंदू धर्म दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है. यहां हिंदू धर्म मानने वालों की संख्या 1.16 अरब है. विश्व में इसकी साझेदारी लगभग 15 फीसदी है. मुख्य रूप से भारत और नेपाल में हिंदू धर्म का पालन होता है.

हिंदू धर्म को सनातन धर्म भी कहा जाता है. यह वेद, उपनिषद, गीता और पुराण जैसी ग्रंथ परंपराओं पर आधारित है और इसका प्रभाव योग, ध्यान और संस्कृति के माध्यम से पूरी दुनिया में फैला है.

हिंदू धर्म को सनातन धर्म भी कहा जाता है. यह वेद, उपनिषद, गीता और पुराण जैसी ग्रंथ परंपराओं पर आधारित है और इसका प्रभाव योग, ध्यान और संस्कृति के माध्यम से पूरी दुनिया में फैला है.

दुनिया में चौथा सबसे बड़ धर्म बौद्ध है. इसकी स्थापना गौतम बुद्ध ने की थी और इसका मूल भारत में है. इसको मानने वालों की संख्या 50.7 करोड़ है. इस धर्म को मानने वाले लोग चीन, जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार और तिब्बत में रहते हैं.

दुनिया में चौथा सबसे बड़ धर्म बौद्ध है. इसकी स्थापना गौतम बुद्ध ने की थी और इसका मूल भारत में है. इसको मानने वालों की संख्या 50.7 करोड़ है. इस धर्म को मानने वाले लोग चीन, जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार और तिब्बत में रहते हैं.

बौद्ध धर्म अहिंसा, ध्यान और निर्वाण की अवधारणा पर केंद्रित है. यह विशेष रूप से पूर्वी एशिया की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है. इसके अलावा लोक धर्म  को मानने वाले लोगों की जनसंख्या अच्छी-खासी है,  जो खासकर समुदायों और जनजातियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं. इसकी संख्या 43 करोड़ है. इसमें अफ्रीकी पारंपरिक धर्म, चीनी लोक धर्म, मूल अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी आस्थाएं शामिल हैं.

बौद्ध धर्म अहिंसा, ध्यान और निर्वाण की अवधारणा पर केंद्रित है. यह विशेष रूप से पूर्वी एशिया की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है. इसके अलावा लोक धर्म को मानने वाले लोगों की जनसंख्या अच्छी-खासी है, जो खासकर समुदायों और जनजातियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं. इसकी संख्या 43 करोड़ है. इसमें अफ्रीकी पारंपरिक धर्म, चीनी लोक धर्म, मूल अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी आस्थाएं शामिल हैं.

दुनिया में दूसरे अन्य छोटे धर्म के लोग रहते हैं. ये वे हैं, जिनके अनुयायी संख्या में कम हैं, लेकिन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसमें शिंतो (जापान), ताओ धर्म (चीन), सिख धर्म (भारत) और जैन धर्म (भारत) हैं. इनकी जनसंख्या मिलाकर 6.1 करोड़ है.

दुनिया में दूसरे अन्य छोटे धर्म के लोग रहते हैं. ये वे हैं, जिनके अनुयायी संख्या में कम हैं, लेकिन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसमें शिंतो (जापान), ताओ धर्म (चीन), सिख धर्म (भारत) और जैन धर्म (भारत) हैं. इनकी जनसंख्या मिलाकर 6.1 करोड़ है.

Published at : 21 Aug 2025 02:48 PM (IST)

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