हिंदुओं से जजिया टैक्स वसूल रही जमात-ए-इस्लामी…कभी भारत का दोस्त रहा बांग्लादेश बन जाएगा इस्ल

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बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं. सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी अब देश में शरिया कानून लागू करने की कोशिश कर रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से समर्थित यह संगठन हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों पर जजिया कर लगाना शुरू कर चुका है. यह फैसला बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को इस्लामिक शासन में बदलने का संकेत माना जा रहा है. खास बात यह है कि यूनुस सरकार इस पूरे मामले पर चुप है.

1 अगस्त से शुरू हुई जजिया वसूली
ब्लिट्ज के एडिटर सलाहुद्दीन शोएब चौधरी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अगस्त 2025 से जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं और गैर-मुसलमानों से जजिया वसूलना शुरू कर दिया है. इससे पहले 25 जुलाई को जमात प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि गैर-मुसलमानों को यह कर देना होगा, जैसे मुसलमान जकात देते हैं.

रहमान का विवादित बयान
एक सभा में डॉ. शफीकुर रहमान ने कहा कि अगर बांग्लादेश में सभी समुदायों को समान अधिकार चाहिए तो हिंदुओं और गैर-मुसलमानों को जजिया कर देना होगा. उन्होंने दावा किया कि शरिया कानून के अनुसार यही सही है. रहमान का कहना था कि जैसे मुसलमान अपनी संपत्ति का हिस्सा धार्मिक कार्यों के लिए जकात के रूप में देते हैं, वैसे ही गैर-मुसलमानों को जजिया देना चाहिए.

जजिया कर का मतलब क्या है?
जजिया एक इस्लामिक टैक्स है, जो गैर-मुसलमानों पर लगाया जाता है. यह मध्यकालीन इस्लामी शासन में आम था और आलोचक इसे हमेशा गैर-मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की नीति मानते रहे हैं. वर्तमान बांग्लादेश में इसकी शुरुआत देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों से दूर हटकर इस्लामी शासन लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

जमात-ए-इस्लामी का विवादित इतिहास
जमात-ए-इस्लामी का इतिहास बांग्लादेश में विवादों और क्रूरता से जुड़ा है. 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान इसने पाकिस्तान का साथ दिया था और पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर बंगाली नागरिकों के नरसंहार में शामिल रही थी. आज भी इस संगठन को पाकिस्तान आईएसआई और कई इस्लामी-जेहादी संगठनों का समर्थन हासिल है. यही वजह है कि मौजूदा हालात को लेकर बांग्लादेश में चिंता बढ़ गई है.



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चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास, किया भावुक पोस्ट

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भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा की. उन्होंने एक भावुक पोस्ट करते लिखा, “भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना, और हर बार मैदान पर कदम रखते ही अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करना, इन चीजों को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है. लेकिन जैसा कि कहते हैं, हर अच्छी चीज का अंत होना ही होता है. मैंने भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का फैसला किया है.”

चेतेश्वर पुजारा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “राजकोट के छोटे से कस्बे से एक छोटे से लड़के के रूप में, अपने माता-पिता के साथ, मैंने सितारों को निशाना बनाने का लक्ष्य रखा और भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना देखा. तब मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि यह खेल मुझे इतना कुछ देगा. अमूल्य अवसर, अनुभव, उद्देश्य, प्यार, और सबसे बढ़कर अपने राज्य और इस महान राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका.

चेतेश्वर पुजारा ने लिया संन्यास

पुजारा ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “मैं बीसीसीआई और सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन को अपने क्रिकेट करियर के दौरान मिले अवसर और समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. मैं उन सभी टीमों, फ्रैंचाइज़ियों और काउंटी टीमों का भी आभारी हूं जिनका मैंने इतने सालों तक प्रतिनिधित्व किया.” पुजारा ने अपने करियर में मिले सभी टीमों के कोचों का भी आभार व्यक्त किया.


फैंस का किया शुक्रिया

चेतेश्वर पुजारा ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “खेल की वजह से मैं दुनियाभर में पहुंचा और इस दौरान प्रशंसकों का जोशीला समर्थन और ऊर्जा हमेशा मेरे साथ रही. जहाँ भी मैंने खेला है, वहां बहुत समर्थन मिला और हमेशा मैं इसका आभारी रहूंगा.” 

पुजारा ने अपने पोस्ट में परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके योगदान ने उनके सफर को सार्थक बनाया. उन्होंने लिखा, “यह सब मेरे परिवार, मेरे माता-पिता, पत्नी पूजा और बेटी अदिति, मेरे ससुराल वालों और मेरे बाकी परिवार के त्याग और सहयोग ने मेरे सफर को सार्थक बनाया. मैं अगले पड़ाव का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं.”

चेतेश्वर पुजारा अंतर्राष्ट्रीय करियर

37 वर्षीय पुजारा ने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर में 103 टेस्ट और 5 वनडे मैच खेले. 103 टेस्ट की 176 पारियों में पुजारा ने 7195 रन बनाए, इसमें 19 शतक और 35 अर्धशतकीय पारियां शामिल हैं. पुजारा का टेस्ट सफर शानदार रहा, हालांकि वह काफी समय से टीम में जगह नहीं बना पा रहे थे.



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Video: दिल्ली मेट्रो में बवाल, सीट को लेकर भिड़ी महिलाएं, एक दूसरे के खींचे बाल, वीडियो वायरल

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Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो जिसे देश की राजधानी की लाइफलाइन कहा जाता है, अब आए दिन विवादों और क्लेश की वजह से सुर्खियों में आ रही है. सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें दो महिलाएं मेट्रो में बुरी तरह झगड़ती दिखाई दे रही हैं. यह घटना यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है.

नजारा देख यात्रियों में मचा हड़कंप 

जानकारी के अनुसार, यह क्लिप सिर्फ 23 सेकंड की है. इसमें साफ नजर आता है कि मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन रुकती है और दरवाजे खुलते ही यात्री उतरने लगते हैं. इसी बीच डिब्बे में बैठी दो महिलाओं के बीच कहासुनी शुरू हो जाती है. देखते ही देखते मामला इतना बढ़ जाता है कि दोनों एक-दूसरे से हाथपाई हो जाती हैं.

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला ने कुर्ता-पायजामा पहन रखा है जबकि दूसरी जींस और शर्ट में है. झगड़े के दौरान दोनों एक-दूसरे के बाल खींचने लगती हैं. इतना ही नहीं, जींस पहने महिला ने दूसरी महिला को सीट पर लिटाकर उसके ऊपर चढ़कर मारपीट शुरू कर दी. यह नजारा देख यात्रियों में हड़कंप मच गया.


अमेरिका में ट्रक ड्राइवर को कितनी मिलती है सैलरी, बैन लगने के बाद कितने भारतीयों की छिनेगी जॉब?

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अमेरिका में ट्रक चलाना भारत के हजारों युवाओं के लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक सपने की तरह रहा है. खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्यों के युवा इस काम को तरक्की, इज्जत और बेहतर जीवन का रास्ता मानते हैं. अमेरिका में ट्रक ड्राइवर की नौकरी को अच्छी सैलरी, सेफे लाइफस्टाइल और ब्राइट फ्यूचर से जोड़ा जाता है. वहां की हाईवे लाइफ, बड़े ट्रक, और खुद की कमाई से एक बेहतर लाइफ की उम्मीद ने कई युवाओं को इस दिशा में बढ़ाया है. 

यही वजह है कि अमेरिका में हजारों भारतीय, खासकर सिख समुदाय से आने वाले लोग ट्रकिंग इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं. लेकिन अब यह सपना खतरे में है. हाल ही में अमेरिका सरकार ने विदेशी ट्रक ड्राइवरों को दिए जाने वाले वर्क वीजा और कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने का बड़ा फैसला लिया है. इसका सीधा असर उन भारतीयों पर पड़ेगा जो अमेरिका में ट्रक ड्राइविंग करके लाइफ चला रहे हैं या वहां जाकर यह काम करना चाहते थे. ऐसे में चलिए जानते हैं कि अमेरिका में ट्रक ड्राइवर को कितनी सैलरी मिलती है और बैन लगने के बाद कितने भारतीयों की जॉब छिनेगी.

अमेरिका में ट्रक ड्राइवर को कितनी सैलरी मिलती है?

अमेरिका में ट्रक ड्राइवरों की सैलरी आमतौर पर प्रति मील के हिसाब से होती है. जिसमें औसतन 0.60 से 0.70 अमेरिकी डॉलर प्रति मील तक भुगतान होता है. एक ट्रक ड्राइवर जो रोज 500-600 मील तक चलता है, वह हर महीने लगभग लगभग 4.2 लाख से 6.7 लाख कमा सकता है. कुछ कंपनियां प्रति घंटे के हिसाब से भी सैलरी देती हैं. जिसमें प्रति घंटे औसतन 1,680 से 2,520 तक की कमाई हो सकती है. यह ड्राइवर के एक्सपीरियंस, कंपनी और राज्य पर निर्भर करता है. अमेरिका में ट्रक ड्राइवरों की औसत सालाना सैलरी करीब 40 लाख होती है. कुछ बड़ी कंपनियां जैसे वॉलमार्ट, अमेजन आदि एक्सपीरियंस ड्राइवरों को 95,000 से 110,000  अमेरिकी डॉलर यानी करीब 80 लाख से 92 लाख सालाना भी देती हैं. 

बैन लगने के बाद कितने भारतीयों की जॉब छिनेगी?

2021 तक, अमेरिका में 7,20,000 से ज्यादा विदेशी मूल के ट्रक ड्राइवर थे. इनमें से लगभग 18 प्रतिशत ट्रक ड्राइवर विदेशी मूल के हैं. ट्रकिंग इंडस्ट्री में भारत, मैक्सिको, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोपीय देशों (जैसे यूक्रेन) से आए लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. अमेरिका के कैलिफोर्निया में खासतौर पर हजारों भारतीय ट्रक चला रहे हैं. इनमें से ज्यादातर पंजाब और हरियाणा से हैं और अधिकतर सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया कि सिर्फ दो साल में 30,000 से ज्यादा भारतीय सिख ट्रकिंग इंडस्ट्री में शामिल हुए.

अमेरिकी सरकार के फैसले के अनुसार अब नए वीजा जारी नहीं होंगे, वर्क परमिट पर रोक और कमर्शियल लाइसेंस मिलना बंद होगा. इसका असर उन भारतीयों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा जो पहले से अमेरिका में हैं या वहां जाकर काम करना चाहते हैं. जो लोग पहले से वैध रूप से काम कर रहे हैं, उनकी स्थिति फिलहाल खतरे में नहीं है, लेकिन वीजा रिन्यू में दिक्कत आ सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह रोक लंबे समय तक जारी रही तो हजारों भारतीय ड्राइवरों की नौकरी छिन सकती है. 

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क्या जीएसटी रिफॉर्म्स से सोने की कम होंगी कीमतें? आम आदमी को मिलेगी राहत या गड़बड़ाएगा बजट?

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GST Reforms impact on Gold and Silver: जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक सितंबर महीने के पहले हफ्ते में होगी. इससे तरह-तरह की चीजों और सर्विसेज की कीमतें कम होने की उम्मीद है. पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की जनता को संबोधित करते हुए जीएसटी स्ट्रक्चर में रिफॉर्म्स का ऐलान किया था, जिससे आम आदमी को काफी राहत मिलने की उम्मीद है. नए प्रस्ताव के मुताबिक, नए जीएसटी स्ट्रक्चर में सिर्फ दो ही- 5 परसेंट और 18 परसेंट स्लैब होंगे.

सोने की बढ़ेगी या घटेगी कीमत? 

मौजूदा समय में सोने पर 3 परसेंट की दर से जीएसटी वसूला जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने पर लगने वाली जीएसटी में 0.5 परसेंट से 1 परसेंट की कटौती की जा सकती है. हालांकि, कारोबारियों को इस बात की आशंका है कि कहीं इसे बढ़ाकर 5 परसेंट न कर दिया जाए. इससे आम आदमी का बजट गड़बड़ा सकता है इसलिए उनकी मांग सोने पर जीएसटी बढ़ाने के बजाय इसे कम करना है. अगर सरकार सोने पर जीएसटी कम करती है, तो इससे कीमतें सस्ती होंगी. ऐसे में फेस्टिव सीजन के दौरान मांग बढ़ने की संभावना है. 

क्या बढ़ती कीमतों के बीच जीएसटी में होगा इजाफा? 

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन  (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट और एस्पेक्ट ग्लोबल वेंचर्स की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन अक्षा कंबोज ने गुडरिटर्न्स से बात करते हुए कहा, चूंकि सोने के आभूषण निवेश के रूप में या किसी खास मौके पर खरीदे जाते हैं इसलिए जीएसटी में थोड़ी सी भी कटौती होने पर उपभोक्ताओं पर खर्च का बोझ कम होगा.  

सोने पर फिलहाल जीएसटी रेट 3 परसेंट है. इसमें केंद्र सरकार की 1.5 परसेंट और राज्य सरकार की 1.5 परसेंट की हिस्सेदारी है. जीएसटी सोने की ज्वेलरी से लेकर बार, सिक्के सभी में लगाई जाती है. 2016 में भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया. उस दौरान सोने पर 3 परसेंट जीएसटी लगाई गई. इससे पहले तक ज्वेलरी पर 1 परसेंट वैट लगता था. बीते छह महीने में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, इससे लोग पहले से ही परेशान है. ऊपर से अगर सोने पर जीएसटी कम होने के बजाय इसे बढ़ा दिया जाता है, तो आम आदमी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है. 

सोने पर 1 परसेंट जीएसटी से कितनी हो जाएगी कीमत? 

अगर सोने पर जीएसटी 1 परसेंट घटाई जाती है, तो यह 3 परसेंट से घटकर दो परसेंट हो जाएगी. ऐसे में अगर आप 1,00,000 रुपये का सोना खरीदते हैं, तो जीएसटी लगभग 2,000 रुपये बैठेगा. यानी कि इसमें 1000 रुपये की कमी आएगी.  

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iPhone यूजर्स को झटका: तुरंत अपडेट करें डिवाइस नहीं तो हो सकता है ये बड़ा नुकसान, जानें क्या है

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iOS 18.6.2: Apple ने iPhone यूज़र्स के लिए ताज़ा iOS 18.6.2 अपडेट जारी किया है. कंपनी ने साफ कहा है कि यह अपडेट तुरंत इंस्टॉल करना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इसमें गंभीर सुरक्षा खामियों को दूर किया गया है. दरअसल, Apple को ऐसे साइबर हमलों की जानकारी मिली है जो बेहद जटिल तरीके से चुनिंदा यूज़र्स को निशाना बना रहे थे.

बड़ी सुरक्षा कमजोरी का खुलासा

Apple के अनुसार यह खामी ख़ास तरह की इमेज फ़ाइलों से जुड़ी हुई है. इन फाइलों को प्रोसेस करते समय iPhone की मेमोरी करप्ट हो सकती है जिससे हैकर्स को डिवाइस तक पहुँचने का मौका मिल सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बग का इस्तेमाल पहले ही कुछ एडवांस्ड अटैक्स में किया जा चुका है. यही वजह है कि Apple ने इस अपडेट को तुरंत लागू करने की अपील की है.

किन iPhones के लिए उपलब्ध है iOS 18.6.2?

यह अपडेट iPhone Xs से लेकर नए iPhone 16 Pro Max तक लगभग सभी मॉडलों के लिए जारी किया गया है. यानी अगर आपका iPhone इन मॉडलों में आता है तो इसे तुरंत इंस्टॉल करना ही बेहतर है.

ऐसे करें iPhone अपडेट

  • अपने iPhone में Settings खोलें.
  • General विकल्प पर जाएं.
  • Software Update पर क्लिक करें.
  • यहां iOS 18.6.2 का नया अपडेट दिखेगा.
  • पासकोड डालकर डाउनलोड को ऑथेंटिकेट करें.
  • iPhone रीबूट होने के बाद अपडेट इंस्टॉल हो जाएगा.

आने वाले iOS वर्ज़न की झलक

जहां iOS 18.6.2 सुरक्षा पर केंद्रित है, वहीं Apple iOS 26 के बीटा वर्ज़न पर भी काम कर रहा है. इसका चौथा चरण जारी हो चुका है जिसमें Adaptive Power Mode और Liquid Design Intro Video जैसे नए फीचर्स शामिल हैं.

Adaptive Power Mode फीचर खासतौर पर AI-सपोर्टेड iPhones (iPhone 15 Pro और उससे नए मॉडल्स) के लिए है. Adaptive Power Mode बैटरी सेटिंग्स में छोटा-सा बदलाव करता है जिससे फोन की परफॉर्मेंस थोड़ी एडजस्ट होकर बैटरी बैकअप ज्यादा मिलता है.

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सिंपल लाइफस्टाइल लेकिन आलीशान पसंद, ये है कोकिलाबेन की पहचान

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भारत के सबसे बड़े और अमीर कारोबारी घराने अंबानी परिवार की मुखिया कोकिलाबेन अंबानी इन दिनों तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल में भर्ती है. 91 साल की उम्र में भी कोकिलाबेन परिवार की रीढ़ मान जाती है. वह रियलाइंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मां है. उनकी दो बेटियां भी हैं नीना कोठारी और दीप्ति सालंगावकर. 

बचपन से सादगी, शादी के बाद निखरी पर्सनालिटी 

कोकिलाबेन अंबानी का जन्म 24 फरवरी 1934 को गुजरात के जामनगर में हुआ था. 1955 में उनकी शादी धीरूभाई अंबानी से हुई. शादी के बाद धीरूभाई ने उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया उन्होंने अंग्रेजी सीखाने के लिए खास टीचर तक लगाया ताकि कोकिलाबेन बड़े अधिकारियों और विदेशी मेहमानों से सहज होकर बातचीत कर सके. धीरूभाई उन्हें विदेश यात्राओं पर भी ले जाते थे जिससे उनका आत्‍मविश्वास और पर्सनालिटी दोनों निखरते गए. 

शिक्षा और जीवनशैली 

कोकिलाबेन ने दसवीं तक पढ़ाई की थी. उस दौर में जब लड़कियों की पढ़ाई अक्सर सीमित रहती थी उन्होंने खुद को समय के साथ ढाला. आज वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती है. वह सख्त शाकाहारी है और गुजराती खाने जैसे दाल, ढोकली और रोटी उनकी फेवरेट डिश है. लग्जरी कारों का भी उन्हें शौक है और मर्सिडीज बेंज उनकी पसंदीदा ब्रांड है. 

आस्था और परंपराओं से जुड़ीं 

कोकिलाबेन अंबानी श्रीनाथजी की गहरी भक्त हैं. वह अक्‍सर द्वारिकाधीश मंदिर और नाथद्वारा जाकर दर्शन करती है. अपनी 90वीं सालगिरह पर उन्होंने श्रीनाथजी और लक्ष्मी जी की खूबसूरत कलाकृतियां बनवाई थी. 

आलीशान जिंदगी लेकिन सादगी कायम 

आज कोकिलाबेन अपने बड़े बेटे मुकेश अंबानी के साथ मुंबई के एंटीलिया में रहती है जो दुनिया की सबसे आलीशान इमारत में से एक है. आलीशान महल जैसे घर और लग्जरी कारों के बीच रहते हुए भी उनकी सादगी और पारिवारिक जुड़ा उन्हें अलग बनाता है. 

संपत्ति और विरासत 

कोकिलाबेन के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के करीब 1.57 करोड़ शेयर है जो कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 0.24% है. उनकी नेटवर्थ करीब 18,000 करोड रुपये बताई जाती है. दिलचस्प बात यह है कि उनके पास मुकेश अंबानी से भी ज्यादा शेयर है. उनके नाम पर मुंबई का मशहूर कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल भी है जो उनकी विरासत का हिस्सा है. 

परिवार की असली ताकत 

धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद जब परिवार में बिजनेस को लेकर मतभेद हुए थे तब कोकिलाबेन ने ही आगे बढ़कर दोनों बेटों के बीच सही समझौता कराया. उनकी वजह से परिवार में शांति और एकजुटता बनी रही. आज भी बड़े फैसलों में उनकी राय अहम मानी जाती है.

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कैसे धर्राटे काट रही है ओफ्फो! तेज रफ्तार बाइक लिए दादी ने मचाया गदर, वीडियो देख यूजर्स हैरान

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में करीब 70 साल की एक बुजुर्ग दादी बाइक पर बैठकर ऐसी रफ्तार भरती हैं कि देखने वाले हैरान रह जाते हैं. गांव की कच्ची सड़क हो या पक्की. दादी का स्वैग हर किसी का ध्यान खींच लेता है. दादी ने देसी स्वैग से पूरे गांव वालों को हिलाकर रख दिया है. इतना ही नहीं दादी के इस अंदाज के चर्चे अब इंटरनेट के गलियारों में भी हो रहे हैं जिन्हें जानकर आपकी हंसी निकल जाएगी.

सड़क पर बाइक भगाकर दादी ने मचाया गदर

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दादी बिल्कुल स्टाइल में बाइक स्टार्ट करती हैं और फिर जोरदार एक्सीलेरेटर मारते हुए सड़क पर दौड़ पड़ती हैं. आसपास खड़े लोग और गुजरते राहगीर यह नजारा देखकर दंग रह जाते हैं. कोई मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगता है तो कोई ताली बजाकर दादी का हौसला बढ़ाता है. दादी का आत्मविश्वास इतना कमाल का है कि 20–25 साल के जवान लड़के भी उनकी इस कला को देखकर शरमा जाएं.

दादी ने सिर्फ बाइक चलाई ही नहीं बल्कि स्टाइल में हैंडल घुमाकर यो यो वाली पोज भी दी. वीडियो में दिख रहा है कि सामने से आते लौंडों की तरफ देखकर दादी एक हाथ से बाइक चलाते हुए इशारा करती हैं और मुस्कुराती हैं. यही अंदाज सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहा है.

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यूजर्स बोले, देखिए धर्राटे काट रही है ओम्फो

सोशल मीडिया पर यह वीडियो पोस्ट होते ही बवाल मच गया. इंस्टाग्राम. फेसबुक और ट्विटर पर दादी को लेकर हजारों मीम्स और कैप्शन बन चुके हैं. किसी ने लिखा. “यो यो दादी सिंह” तो किसी ने कहा. “गांव की रफ्तार क्वीन”. वहीं कई लोग मजाक में कह रहे हैं कि दादी की एंट्री से अब गांव के लौंडों की बाइकिंग क्लास बंद हो जाएगी. वीडियो को @rareindianclips नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. कुछ यूजर्स ने दादी को लेकर कहा…देखिए धर्राटे काट रही है ओम्फो.

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वायरल वीडियो में सामने आया दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह की बेटी का चेहरा, जानें किस पर गई है दुआ

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दीपिका पादुकोण इन दिनों मदरहुड एंजॉय कर रही हैं. वो बेटी दुआ की परवरिश पर पूरा ध्यान दे रही हैं. दीपिका और रणवीर ने अभी तक बेटी दुआ का चेहरा नहीं दिखाया. वो पब्लिक में बेटी का फेस कवर करके चलती हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें दुआ का चेहरा देखा जा सकता है. दीपिका और रणवीर के फैंस जिसने वीडियो अपलोड किया है, उस पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं.

क्या है वीडियो में?
वीडियो में दीपिका को जब पता चलता है कि उनका और बेटी का वीडियो बनाया गया तो वो अनकम्फर्टेबल दिखीं. उन्होंने उस शख्स को वीडियो बनाने से मना किया और वीडियो में दुआ को दीपिका की गोद में बैठा देखा जा सकता है. वीडियो को फिर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया. इसमें दुआ को पहली बार देखा जा सकता है. लोग बता रहे हैं कि दुआ रणवीर सिंह की कार्बन कॉपी हैं. लेकिन जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फैंस वीडियो अपलोड करने वाले पर गुस्सा कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने किए ऐसे कमेंट्स

एक यूजर ने लिखा- आज दुआ का चेहरा पहली बार देखा. मैं उम्मीद करता हूं कि पैपराजी सिड और कियारा की बेटी का चेहरा उनकी परमिशन के बिना न दिखाएं. ये बहुत  खराब है. अपनी बेटी की प्राइवेसी की सुरक्षा करना उनकी च्वॉइस है. वहीं एक यूजर ने लिखा- इससे पहले अनुष्का और विराट के बच्चों के साथ ऐसा हुआ और अब दीपिका-रणवीर की बेटी के साथ. क्या आपके पास मोरल और एथिक्स नहीं है. दीपिका बिल्कुल भी कम्फर्टेबल नहीं लग रही हैं. आपक उनकी प्राइवेसी की इज्जत करनी चाहिए. 

इसी तरह के तमाम कमेंट्स सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं.

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भारत के बाद अब यूरोप ने भी ट्रंप को दिया झटका, इन दो देशों ने F-35 फाइटर जेट खरीदने से कर दिया

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भारत के बाद अब यूरोप से भी अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उम्मीदों को उस समय धक्का लगा, जब स्पेन और स्विट्जरलैंड ने अमेरिका के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 को खरीदने से साफ इनकार कर दिया. दोनों देशों ने इसके बजाय यूरोपीय विकल्पों पर भरोसा जताते हुए अपनी रक्षा रणनीति को नई दिशा दी है.

स्पेन और स्विट्जरलैंड के हालिया फैसलों ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान से दूरी बनाने की ओर यूरोप के रुख को और स्पष्ट कर दिया है. यह कदम सिर्फ कीमतों पर विवाद की वजह से नहीं है, बल्कि अमेरिका के “सस्टेनमेंट मोनोपोली” को लेकर चिंता भी है, जिसमें भविष्य के सभी अपग्रेड, सॉफ़्टवेयर और ऑपरेशनल डेटा पर अमेरिका का नियंत्रण होगा. यह स्थिति बदलते राजनीतिक हालात में रणनीतिक जोखिम पैदा करती है.

स्पेन का चौंकाने वाला फैसला
स्पेन ने अचानक अपने F-35 खरीदने की योजना को खत्म कर दिया. पहले यह माना जा रहा था कि मैड्रिड अपनी नौसेना के Juan Carlos I एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए F-35B खरीदेगा, लेकिन अब उसने यह योजना रद्द कर दी है. इसके बजाय स्पेन ने 25 नए यूरोफाइटर टाइफून खरीदने और फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) पर जोर देने का फैसला किया है.

यह निर्णय स्पेन की नौसैनिक ताकत को फिलहाल कमजोर करेगा क्योंकि अब अगले दस साल तक उसके पास असली पांचवीं पीढ़ी का विमान नहीं होगा. लेकिन इसका फायदा घरेलू उद्योग को होगा. यूरोपीय प्रोग्राम्स में अरबों यूरो निवेश करके स्पेन अपनी सप्लाई चेन, रोजगार और तकनीकी क्षमता को मजबूत करेगा और यह सब यूरोपीय स्वामित्व में रहेगा.

स्विट्जरलैंड में बढ़ता असंतोष
स्विट्जरलैंड ने 2022 में जनमत संग्रह कराकर 36 F-35A विमानों की खरीद को मंजूरी दी थी, जिसकी कीमत लगभग 6 अरब स्विस फ़्रैंक थी. लेकिन 2023 के अंत तक हालात बदलने लगे. अमेरिका ने स्विस अधिकारियों को गुप्त ब्रीफिंग में बताया कि कॉन्ट्रैक्ट पूरी तरह फिक्स्ड नहीं है और महंगाई व सामग्री लागत बढ़ने पर कीमतें 650 मिलियन फ़्रैंक या उससे ज्यादा बढ़ सकती हैं. इसके बाद वाशिंगटन ने स्विस निर्यात पर नए टैरिफ भी लगा दिए. इससे डील पर विश्वास और कम हो गया और अब बर्न में कई नेता सौदे को कम करने या पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं.

यूरोप की चुनौती और मौका
स्पेन के पास FCAS को आगे बढ़ाने की औद्योगिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति है. वहीं स्विट्जरलैंड के पास न तो ऐसा उद्योग है और न ही रक्षा महत्वाकांक्षा, इसलिए उसके सामने फैसला कठिन है – सस्ता विकल्प या सुरक्षित सप्लाई चेन. लेकिन दोनों देशों की चिंता एक जैसी है – F-35 की तकनीकी श्रेष्ठता के बावजूद यह विमान लागत, सुरक्षा और नियंत्रण के लिहाज से भारी जोखिम लाता है.

F-35 बनाम यूरोफाइटर और FCAS
F-35 पर लंबे समय से आरोप है कि लॉकहीड मार्टिन ने एक तरह का “मोनोपोली” बना लिया है. सॉफ़्टवेयर अपग्रेड और बदलाव केवल अमेरिकी अनुमति से होते हैं और लाइफसाइकिल कॉस्ट लगातार बढ़ती जा रही है.

इसके उलट, यूरोफाइटर टाइफून अभी भी एक सक्षम और अपग्रेडेबल मल्टी-रोल विमान है, जो यूरोपीय स्वामित्व में है. वहीं FCAS अभी रिसर्च एंड डेवलपमेंट चरण में है, लेकिन इसमें छठी पीढ़ी के फीचर्स होंगे – जैसे स्टेल्थ, मानव-मानवरहित टीमिंग, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और क्लाउड-आधारित कमांड सिस्टम. यह पूरी तरह यूरोपीय नियंत्रण में रहेगा.

रणनीतिक संदेश
F-35 खरीदना मतलब अमेरिकी सिस्टम से पूरी तरह बंध जाना – जहां स्पेयर पार्ट्स, भविष्य के अपग्रेड और ऑपरेशनल डेटा तक पर अमेरिका का नियंत्रण होगा. यह तब तक स्वीकार्य हो सकता है जब तक अमेरिका और यूरोप के रिश्ते मजबूत हैं. लेकिन अगर राजनीतिक मतभेद या टैरिफ जैसी घटनाएं बढ़ीं तो यह यूरोप के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

स्पेन का फैसला सिर्फ कीमत या औद्योगिक हित पर आधारित नहीं है. यह एक तरह की “भविष्य की बीमा पॉलिसी” है – अभी कीमत चुकाना बेहतर है बजाय भविष्य में रणनीतिक आजादी खोने के. स्विट्जरलैंड के लिए स्थिति अलग है, लेकिन वह भी अब समझ रहा है कि उसका तथाकथित फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट उतना पक्का नहीं था जितना माना गया था.

भारत ने भी दिया अमेरिका को झटका
भारत भी अब स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए इंजन निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. फ्रांस की कंपनी Safran के साथ मिलकर भारत 120 KN का शक्तिशाली इंजन डेवलप करेगा, जो पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स को ताकत देगा. इस डील से भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी, जबकि अमेरिका को झटका लगा है क्योंकि ट्रंप प्रशासन उम्मीद कर रहा था कि भारत GE 414 इंजन खरीदेगा.

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