8वां वेतन आयोग लगते ही हो जाएगी जूनियर क्लर्क की चांदी, मिलेंगे इतने सारे पैसे

[ad_1]

सरकारी नौकरी करने वालों के लिए जल्द ही एक बड़ी खुशखबरी आ सकती है. खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो लेवल-4 के पद, जैसे कि जूनियर क्लर्क के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने के बाद इन कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.

अभी कितनी होती है सैलरी?

वर्तमान में जूनियर क्लर्क का बेसिक वेतन 25,500 प्रति माह है. इसके साथ उन्हें महंगाई भत्ता (DA), यात्रा भत्ता (TA), मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं. इन सबको जोड़कर एक जूनियर क्लर्क की इन-हैंड सैलरी 35,000 से 40,000 के आसपास होती है. लेकिन अगर नया वेतन आयोग लागू होता है, तो यह राशि काफी हद तक बढ़ सकती है.

ये भी पढ़ें: ग्रीस में पढ़ाई का सपना? वीजा इंटरव्यू में पूछे जाएंगे ये सवाल, अकाउंट में होनी चाहिए इतनी रकम!

कैसे तय होगी नई सैलरी?

सरकारी वेतन बढ़ोतरी का मुख्य आधार होता है फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor). 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था, जिसकी वजह से न्यूनतम वेतन 7,000 से बढ़कर 18,000 हो गया था. अब 8वें वेतन आयोग के लिए तीन संभावित फिटमेंट फैक्टर सामने आए हैं- 1.92, 2.08 और 2.86. अगर सरकार सबसे ऊंचे 2.86 फैक्टर को मंजूरी देती है, तो न्यूनतम वेतन 18,000 से सीधे 51,480 हो सकता है. इसका सीधा फायदा सभी ग्रुप-C कर्मचारियों को मिलेगा, जिसमें जूनियर क्लर्क भी शामिल हैं.

जूनियर क्लर्क को क्या होगा फायदा?

अगर यही फिटमेंट फैक्टर जूनियर क्लर्कों पर लागू होता है तो उनकी नई बेसिक सैलरी 72,930 प्रति माह तक पहुंच सकती है. यानी लगभग 47,000 की सीधी बढ़ोतरी. इसके अलावा, जब बेसिक बढ़ेगा तो उसके साथ DA, HRA और TA जैसे भत्तों में भी इजाफा होगा. यानी इन-हैंड सैलरी भी अच्छी-खासी हो जाएगी.

यह भी पढ़ें- सोनाली मिश्रा ने रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक का पदभार संभाला, 143 सालों में पहली महिला प्रमुख बनीं

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

[ad_2]

OnePlus Pad से लेकर Apple iPad तक! इस सेल में बेहद सस्ते मिल रहे टैबलेट, ऐसे उठाएं मौके का फायद

[ad_1]

Flipkart Freedom Sale 2025: Flipkart की Freedom Sale 2025 इस वक्त जोरों पर है और हर कैटेगरी में शानदार ऑफर्स और छूट मिल रही हैं. खास तौर पर टैबलेट्स पर मिल रही डील्स काफी आकर्षक हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है. चाहे आपको पढ़ाई, एंटरटेनमेंट, या वर्क फ्रॉम होम के लिए टैबलेट चाहिए, यहां हर बजट और ज़रूरत के मुताबिक कुछ न कुछ जरूर मिल जाएगा.

OnePlus Pad 2

OnePlus का यह प्रीमियम टैबलेट अब 44,999 रुपये की जगह सिर्फ 34,999 रुपये रुपये में मिल रहा है. बैंक ऑफर लागू करने पर इसकी कीमत घटकर 31,996 रुपये तक पहुंच जाती है जो इस रेंज में बेहतरीन डील है.

Apple iPad (2025)

Apple का नया iPad जो A16 चिप के साथ आता है, लॉन्च पर 34,900 रुपये का था. अब यह Flipkart पर सिर्फ 32,900 रुपये में उपलब्ध है. Apple फैंस के लिए ये एक शानदार मौका है.

Samsung Tab S9 FE+

अगर आप फ्लैगशिप लेवल का अनुभव चाहते हैं लेकिन बजट सीमित है तो Samsung Tab S9 FE+ एक परफेक्ट चॉइस हो सकता है. इसका दाम 55,999 से घटकर 39,499 रुपये कर दिया गया है.

Xiaomi Pad 7

Xiaomi Pad 7, 8GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ 34,999 रुपये में आता है लेकिन फिलहाल यह 25,999 रुपये में मिल रहा है. बैंक ऑफर्स लागू करने पर इसकी कीमत घटकर 22,746 रुपये तक हो जाती है.

Redmi Pad 2

बजट में टैबलेट लेने वालों के लिए Redmi Pad 2 एक शानदार विकल्प है. बैंक ऑफर्स के बाद यह टैबलेट सिर्फ 13,999 रुपये में मिल रहा है इस कीमत में इसकी परफॉर्मेंस काफी दमदार मानी जा रही है.

बैंक ऑफर्स से बढ़ेगी बचत

इस सेल में Flipkart Axis Bank क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने पर 5% कैशबैक मिल रहा है. वहीं Flipkart Plus मेंबर्स को चुनिंदा बैंक ट्रांजैक्शन्स पर 15% तक की अतिरिक्त छूट दी जा रही है. साथ ही, SuperCoins इस्तेमाल करके आप 10% तक और बचत कर सकते हैं.

ध्यान देने वाली बातें

कुछ डील्स सीधे कीमत में कटौती के कारण हैं जबकि कुछ में बैंक ऑफर शामिल हैं. Flipkart Plus मेंबर्स को एक्स्ट्रा डिस्काउंट भी मिल सकता है. हालांकि, ये सभी कीमतें लेख लिखे जाने के समय की हैं और समय के साथ इनमें बदलाव हो सकता है.

यह भी पढ़ें:

27 साल के यूट्यूबर ने कर दिया कमाल! मिला यूट्यूब का ये स्पेशल प्ले बटन, जानें कितने हैं सब्सक्राइबर्स

[ad_2]

भले हो रही देरी लेकिन जरूर मिलेगी नौकरी… जॉब ऑफर्स को लेकर TCS का श्रम मंत्रालय को आश्वासन

[ad_1]

Tata Consultancy Services: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने श्रम मंत्रालय को आश्वासन दिया है कि कंपनी तरफ से प्रोफेश्नल्स को भेजे गए जॉब ऑफर्स के बाद भले ही ऑनबोर्डिंग में देरी हो रही है, लेकिन उनकी हायरिंग के लिए कंपनी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. तकनीकी कर्मचारियों के यूनियन नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (NITES) की शिकायत के बाद श्रम मंत्रालय ने TCS से स्पष्टीकरण मांगा था और कंपनी ने चीफ लेबर कमीश्नर (CLC) को ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा है, जिसमें नए कर्मचारियों की नियुक्ति में देरी की वजह क्लाइंट प्रोजेक्ट्स के स्थगन को बताया गया है. 

ऑफर लेटर के बाद भी नहीं मिल रही नौकरी

दरअसल, हाल ही में कई आईटी प्रोफेश्नल्स की यह शिकायत रही कि उन्हें महीनों पहले कंपनी की तरफ से जॉब ऑफर मिला है, लेकिन अब तक हायरिंग नहीं हो पाई है. इनमें से कई ने अपनी पिछली कंपनी से इस्तीफा दे दिया है, कुछ ने नोटिस पीरियड भी पूरा कर लिया है. ऐसे में ऑनबोर्डिंग में देरी की वजह से उन्हें तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में कर्मचारियों के समूह ने इसमें केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप की मांग की थी. 

टीसीएस ने मंत्रालय को दी सफाई 

श्रम मंत्रालय को भेजी गई शिकायत में लगभग 600 लेटरल नियुक्तियों में देरी की बात कही गई थी और आने वाले महीनों में 12,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की कंपनी की योजना को लेकर चिंता भी जताई गई थी. अपने जवाब में टीसीएस ने देरी के लिए मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच बाजार की परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि आईटी इंडस्ट्री में खासकर तब हायरिंग में देरी होती है जब प्रोजेक्ट्स से रिलेटेड कामकाज प्रभावित होते हैं. कंपनी का कहना था कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से कमजोर मांग के चलते कंपनी के ऑर्डर्स में कमी आई है. 

 

 

ये भी पढ़ें: 

TCS layoffs: 12000 से ज्यादा कर्मचारियों की चली जाएगी नौकरी, आखिर क्यों अंधाधुंध की जा रही है छंटनी?

[ad_2]

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एक्शन, अब लेबर स्टेटिस्टिक्स चीफ को कर दिया बर्खास्त, जानें क्यों उठाया य

[ad_1]

Erica McEnterfer sacked: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) की कमिश्नर एरिका मैकएंटरफर को बर्खास्त कर दिया. ट्रंप ने उन पर बिना किसी सबूत के आरोप लगाया कि उन्होंने मासिक रोजगार रिपोर्ट में “राजनीतिक मकसद से” हेराफेरी की है. 

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने की BLS रिपोर्ट में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में केवल 73,000 नौकरियों की वृद्धि दिखाई गई, जो कि विश्लेषकों की उम्मीद से काफी कम थी.

मई-जून के आंकड़ों में 2.58 लाख की कटौती
रिपोर्ट में बताया गया कि मई और जून महीने के पहले घोषित आंकड़ों में कुल मिलाकर 2.58 लाख नौकरियों की कटौती की गई है. इन संशोधनों के बाद पिछले तीन महीनों की हायरिंग दर महामारी के बाद की सबसे धीमी गति पर पहुंच गई है. ट्रंप ने इसे एक साजिश बताते हुए कहा, ‘मेरे अनुसार आज के रोजगार आंकड़े हेराफेरी से तैयार किए गए ताकि रिपब्लिकन और मुझे नुकसान पहुंचे.’

‘BLS की प्रक्रिया में दो बार संशोधन होता है’
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार रोजगार आंकड़ों में संशोधन एक सामान्य प्रक्रिया है. BLS का प्रारंभिक मासिक अनुमान अधूरे आंकड़ों पर आधारित होता है, जिसे बाद में दो बार संशोधित किया जाता है और एक वार्षिक संशोधन फरवरी में किया जाता है. इसके बावजूद ट्रंप ने शुक्रवार को इन संशोधनों को “भयंकर गलती” करार दिया.

पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को फायदा पहुंचाने का आरोप
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘मैकएंटरफर ने कहा कि सिर्फ 73,000 नौकरियां जुड़ीं, लेकिन उससे भी बड़ी बात ये कि उन्होंने पिछले दो महीनों के आंकड़ों में 2.58 लाख की कटौती की. ऐसा पहले भी हुआ है, हमेशा नकारात्मक तरीके से.’ ट्रंप ने आरोप लगाया कि यह सब कुछ 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया.

‘नंबर फर्जी थे इसलिए मैंने उन्हें हटा दिया’
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘हम बहुत अच्छा कर रहे हैं. मुझे लगता है कि ये आंकड़े फर्जी थे, जैसे पहले भी चुनाव से पहले किए गए थे. इसलिए मैंने उन्हें (मैकएंटरफर को) हटा दिया और मैं समझता हूं कि मैंने सही फैसला लिया.’

[ad_2]

‘मैं पियक्कड़ था, 4 बजे तक चौपाटी पर पीता था शराब’, जॉनी लीवर का खुलासा

[ad_1]

जॉनी लीवर ने इंडस्ट्री में चालीस साल से ज़्यादा बिताए हैं और उन्होंने अपनी इस फिल्मी जर्नी में कई उतार-चढ़ाव भी देखे हैं. एक समय पर, वह बॉलीवुड के सबसे सक्सेफुल कॉमेडी कलाकारों में से एक थे. हाल ही में जॉनी लीवर ने एक बातचीत के दौरान खुलासा किया कि करियर के पीक पर उन्हें शराब की लत गई थी और  और मुंबई के चौपाटी पर सुबह 4 बजे तक शराब पीते रहते थे.

17 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत करने वाले जॉनी ने तेज़ी से पॉपुलैरिटी हासिल की थी. छह साल के भीतर, वह घर-घर में मशहूर हो गए, और उनके अभिनय की सीडी अमेरिका में बिकने लगी थी. उन्होंने कई फ़िल्में साइन की थीं और दुनिया भर में कॉमेडी शो किए और अपने सपनों को जी रहे थे, लेकिन इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी।

खूब शराब पीते थे जॉनी लीवर
कॉमेडियन सपन वर्मा के यूट्यूब शो में अपनी बेटी जेमी के साथ पहुंचे जॉनी लीवर ने बताया कि कैसे सक्सेस ने उनकी हेल्थ और लाइफस्टाइल पर बुरा असर डालना शुरू कर दिया था. उन्होंने बताया, “मैं बहुत थका हुआ रहता था. दिन में फिल्मों की शूटिंग करता और रात में शो में परफॉर्म करता. इसके अलावा, मैं बहुत ज़्यादा शराब पीता था.  इससे मैं पूरी तरह थक जाता था. मैं बैकस्टेज ऐसे बैठा रहता जैसे शवासन में हूं.”

अपनी थकान के बावजूद, जॉनी ने कभी कोई कमिटमेंट मिस नहीं किया. उन्होंन कहा, “मैं हमेशा अपनी परफॉर्मेंस देता था, चाहे मैं कितना भी थका हुआ महसूस करूं लेकिन शो के बाद, मुझमें कुछ भी नहीं बचता था.”

 


चौपाटी पर बैठकर सुबह 4 बजे तक शराब पीते थे जॉनी
इसके बाद उन्होंने अपने ऑडियंस को एक गंभीर चेतावनी दी. उन्होंने कहा, “मैं लोगों से रिक्वेस्ट करता हूं  लिमिट में पियो. मैंने अपनी लिमिट पार कर ली है, और यह इसके लायक नहीं है. मैं शराबी था. मैं चौपाटी पर बैठकर सुबह 4 बजे तक पीता रहता था. कई बार पुलिस आती थी, लेकिन जब वे मुझे पहचान लेते थे, तो हंसते हुए कहते थे, ‘अरे, जॉनी भाई’ और मुझे अपनी कार में बैठने देते थे ताकि मैं सेफली ड्रिंक कर सकूं.”

24 साल से नहीं लगाया शराब को हाथ
उसी शो में उन्होंने कबूल किया, “सफलता आपके दिमाग को हिला सकती है, एक समय ऐसा भी था जब मेरे बिना कोई फिल्म नहीं बनती थी. मैं इंटरनेशनल शो भी कर रहा था और लगातार ट्रैवल कर रहा था. मैं इन सब में खोया रहता था. लेकिन आखिरकार, मैंने एक फैसला लिया, मैंने शराब पीना छोड़ दिया. अब 24 साल हो गए हैं, और मैंने शराब को हाथ भी नहीं लगाया है.”

जॉनी ने यह भी क्लियर किया कि चाहे वह किसी भी दौर से गुज़र रहे हों, उन्होंने प्रोफेशनल रवैया बनाए रखा. उन्होंने कहा, “एक बात मैं गर्व से कह सकता हूं, मैंने कभी नशे में परफॉर्म नहीं किया. मैंने कभी किसी शो से पहले शराब नहीं पी.”

जॉनी लीवर वर्क फ्रंट
हाल के सालों में, जॉनी लीवर अपनी भूमिकाओं को लेकर काफ़ी सेलेक्टिव हो गए हैं. इस साल, वह तीन फ़िल्मों में नज़र आ चुके हैं, ‘बैडएस रवि कुमार’, ‘बी हैप्पी’, और ‘हाउसफुल 5’, और उनकी एक और फ़िल्म, “वेलकम टू द जंगल”, रिलीज़ के लिए तैयार है. हालांकि इसकी ऑफिशिल रिलीज डेट अभी अनाउंस नहीं की गई है.

ये भी पढ़ें:-‘सन ऑफ सरदार 2’ के आगे कैसा रहा ‘धड़क 2’ का हाल? जानें- पहले दिन का कलेक्शन



[ad_2]

27 साल के यूट्यूबर ने कर दिया कमाल! मिला यूट्यूब का ये स्पेशल प्ले बटन, जानें कितने हैं सब्सक्र

[ad_1]

Youtube Diamond Button: YouTube के सबसे बड़े क्रिएटर Jimmy Donaldson, जिन्हें दुनिया MrBeast के नाम से जानती है, ने 1 जून 2025 को एक नया इतिहास रच दिया. उन्होंने अपने मुख्य चैनल पर 400 मिलियन सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया और इसी के साथ T-Series को भी पीछे छोड़ दिया जिसके लगभग 299 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं.

MrBeast ने इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया पर लिखा, “400 मिलियन सब्सक्राइबर्स! एक दशक पहले जब मैंने शुरुआत की थी लोग कहते थे कि मैं बहुत ज़्यादा जुनूनी हूं और कभी सफल नहीं हो पाऊंगा. लेकिन मैंने 7 साल तक बिना रुके मेहनत की क्योंकि मुझे कंटेंट बनाना ही सबकुछ लगता था. मैं अपनी मां से भी कह चुका था कि बेघर रह लूंगा लेकिन कुछ और नहीं करूंगा. YouTube और आप सबकी बदौलत मुझे हर दिन जीने का मकसद मिला है.”

मिला पहला 400M सब्सक्राइबर प्ले बटन

MrBeast को हाल ही में YouTube CEO Neal Mohan ने एक खास 400 मिलियन सब्सक्राइबर प्ले बटन सौंपा. उन्होंने इंस्टाग्राम पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “400,000,000 Subscriber Play Button! Thank you YouTube”


यह अवॉर्ड खास तौर पर MrBeast के लिए बनाया गया है क्योंकि वे YouTube के इतिहास में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने 400M सब्सक्राइबर हासिल किए हैं. इस ट्रॉफी को पॉलिश्ड मेटल से बनाया गया है और इसके बीच में एक नीले रंग का कीमती पत्थर जड़ा गया है.

लेकिन इंटरनेट पर ट्रॉफी देख मच गया बवाल

जैसे ही MrBeast की ये प्ले बटन तस्वीर सामने आई, सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कई फैंस ने डिज़ाइन को निराशाजनक और पुराना बताया. एक यूज़र ने लिखा, “YouTube को अब एकदम नया डिज़ाइन लाना चाहिए.” Reddit पर भी चर्चा शुरू हुई, जहां एक पोस्ट में लिखा गया, “लगता है ये ट्रॉफी सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए बना दी गई है.” एक ने कहा, “ये तो 10 मिलियन वाली ट्रॉफी ही है बस बीच में नीला रंग भर दिया गया.” किसी ने तंज कसा, “AI जनरेटेड प्ले बटन लग रहा है.” एक अन्य ने कहा, “पहले गोल्डन बटन में सच में सुनहरा लोगो होता था, अब बस रंग भर दिया गया है.”

MrBeast और T-Series की पुरानी टक्कर भी चर्चा में

गौरतलब है कि MrBeast ने कुछ समय पहले T-Series के CEO भूषण कुमार को बॉक्सिंग मैच के लिए चैलेंज किया था. दोनों ने पिछले साल एक-दूसरे को सब्सक्राइब करने का मजेदार वीडियो भी शेयर किया था जो वायरल हुआ था.

दुनिया के सबसे कम उम्र के सेल्फ-मेड अरबपति

साल 2025 की शुरुआत में ही MrBeast ने $1 बिलियन नेट वर्थ के साथ अरबपतियों की सूची में एंट्री मारी. वे दुनिया के आठवें सबसे कम उम्र के अरबपति हैं और 30 साल से कम उम्र के इकलौते ऐसे शख्स हैं जिन्होंने अपनी दौलत खुद बनाई है ना कि विरासत में पाई. उनकी कंपनी Beast Industries ने 2024 में $473 मिलियन का रेवेन्यू कमाया था और 2025 में इसके दोगुना होने की संभावना जताई जा रही है.

यह भी पढ़ें:

छात्रों के लिए बड़ा तोहफा! ChatGPT में आया नया फीचर, अब पढ़ाई में मिलेगी मदद, जानें कैसे मिलेगा फायदा



[ad_2]

क्या आपकी ‘प्लेट’ में भी सज रहा ‘इंस्टाग्राम’? जानें फूड ट्रेंड्स का सेहत पर कितना असर

[ad_1]

आजकल हमारी प्लेट में क्या आता है, यह अक्सर सोशल मीडिया के ट्रेंड्स से काफी प्रभावित होता है. मटका चाय, चिया सीड्स, बटर बोर्ड्स, या डाल्गोना कॉफी जैसे हालिया उदाहरण बताते हैं कि कैसे सोशल मीडिया चुपचाप एक फूड गाइड, आलोचक और कई बार न्यूट्रीशिएंट एक्सपर्ट बन गया है. यदि कोई चीज इंस्टाग्राम पर अच्छी दिखती है, तो लोग उसे चखना चाहेंगे, भले ही वह उन्हें पसंद न आए.
बस, यहीं होती है चुक और आपकी सेहत पर मंडराने लगता है खतरा. 

इन चीजों पर पड़ रहा असर

एक्सपर्ट डायटीशियन  रुजुता दिवेकर कहती हैं कि सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम  हमारी खाने-पीने की आदतों को बहुत प्रभावित कर रहा है. अब खाने की चीजों का चुनाव सिर्फ स्वाद पर नहीं, बल्कि उनकी सुंदरता और कहानी पर भी होता है. फूडमो यानि खाने के ट्रेंड्स छूट जाने का डर एक सामाजिक दबाव बन गया है, जो लोगों को इन ट्रेंड्स को फॉलो करने पर मजबूर करता है.

इन ट्रेंड्स को अपनाने से जहां नए फूड आइडियाज और जागरूकता बढ़ी है, वहीं इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं. गलत जानकारी, खाने की खराबर आदतें, पोषण की कमी और अव्यवस्थित खान-पान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं में सीने में जलन, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ी हैं, जो पहले दुर्लभ थीं. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि कई प्रभावशाली लोगों को पोषण की सही जानकारी नहीं होतीं. एक अध्ययन से पता चला है कि लोग अपने फॉलो किए जाने वाले व्यक्ति की खाने की आदतों से प्रभावित होकर वही चीजें ज्यादा खाने लगते हैं.

कैलोरी से ज्यादा ‘कंटेंट’ है इम्पोर्टेंट

सोशल मीडिया पर खाने-पीने की चीजें अब केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उनकी एस्टेटिक्स और पहचान बनाने की कहानी के लिए भी महत्वपूर्ण हो गई हैं. इसमें फूडमो का फैक्टर भी जुड़ गया है, जो आपको सांस्कृतिक बातचीत का हिस्सा बनाता है. आईटी इंडस्ट्री से जुड़ी निहारिका वर्मा रमन कहती हैं कि उन्होंने काइली जेनर की वायरल एवो टोस्ट की रील देखकर एवोकाडो को पसंद करना शुरू कर दिया. वहीं, कार्पोरेट वर्क कल्चर से जुड़े  शोभित गोयल ने मटका चाय ट्राई की क्योंकि हर कोई कर रहा था उन्हें पसंद तो नहीं आई, लेकिन एक तस्वीर मिल गई.

वायरल फूड ट्रेंड्स की हिडन कॉस्ट और हेल्थ पर असर

सोशल मीडिया पर दिख रहे खाने के ट्रेंड्स ने फूड को सिर्फ पेट भरने से बदलकर ‘ पोषण देने’ और ‘सोशल मीडिया फीड को बढ़ाने’ के बीच की एक थिन लाइन पर ला दिया है. इन ट्रेंड्स ने न्यू आइडियाज और अवेयरनेस बढ़ाई है. वहीं इनके कुछ सीरियस नेगेटिव पॉइंट्स भी हैं. इनमें रॉन्ग इंफॉर्मेशन, अनस्टेबल ईटिंग हैबिट्स, न्यूट्रिशनल इम्बैलेंस और डिसऑर्डर्ड ईटिंग जैसी प्रॉब्लम्स शामिल हैं.

फूड या न्यूट्रिशन से रिलेटेड कोई नॉलेज नहीं मिलती

विशेषज्ञ बताते हैं कि वे आजकल यंग एडल्ट्स का ऐसी हेल्थ प्रॉब्लम्स के लिए ट्रीटमेंट कर रहे हैं, जो पहले उनकी एज में रेयर थीं, जैसे क्रोनिक चेस्ट बर्न, ब्लोटिंग, कॉन्स्टिपेशन, और अर्ली न्यूट्रिएंट डेफिशियेंसी. ये भी एक कंसर्न है कि कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, जिनके पास फूड या न्यूट्रिशन से रिलेटेड कोई एक्सपर्ट नॉलेज नहीं होती, वे भी ट्रेंड्स को प्रमोट करते हैं और उनके बताए गए फूड आइटम्स के रियल इफेक्ट्स को पूरी तरह से नहीं समझते.

बता दें कि बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की एक स्टडी ने भी ये प्रूव किया है कि सोशल मीडिया यूजर्स जिस पर्सन को फॉलो करते हैं, अगर वे बिलीव करते हैं कि वो पर्सन कोई स्पेशल फूड रेगुलरली खाता है, तो वे भी उस फूड का कंजम्पशन बढ़ा देते हैं। वहीं, फूड ब्लॉगर्स के मुताबिक इन्फ्लुएंसर्स खाने के ट्रेंड्स सेट करने में अहम रोल प्ले करते हैं. अपनी क्लेवर ट्रिक्स से, हम ऑलमोस्ट किसी भी चीज को बहुत एक्जैजरेट कर सकते हैं.. चाहे वो वायरल समोसा हो या मोमो…

ये भी पढ़ें: तांबे की बोतल में पानी क्यों पिएं? फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

[ad_2]

जो रूट ने तोड़ा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड, घरेलू टेस्ट में बनाए सबसे ज्यादा रन, जानें किस नंबर

[ad_1]

IND vs ENG, 5th Test: इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट ने भारत के खिलाफ ओवल टेस्ट की पहली पारी में भले ही सिर्फ 29 रन बनाए हों, लेकिन इस छोटी सी पारी ने उन्हें टेस्ट इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि दिला दी है. जो रूट ने घरेलू टेस्ट में महान सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ते हुए नया मुकाम हासिल किया है. उन्होंने सचिन के घरेलू टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.

सचिन से आगे निकले रूट

जो रूट ने अपने करियर के 84वें घरेलू टेस्ट मैच में बल्लेबाजी करते हुए 7224 रन पूरे कर लिए हैं, जबकि सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में 94 घरेलू टेस्ट में 7216 रन बनाए थे. इस आंकड़े के साथ रूट अब होम टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. उनसे आगे अब सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग हैं, जिनके नाम 92 घरेलू टेस्ट में 7258 रन दर्ज हैं. अगर रूट ओवल टेस्ट की दूसरी पारी में 35 या उससे ज्यादा रन बनाते हैं, तो वह पोंटिंग को भी पीछे छोड़ देंगे और एक नया कीर्तिमान हासिल कर लेंगे.

होम टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप 5 बल्लेबाज

रिकी पोंटिंग – 92 मैच, 7258 रन

जो रूट – 84 मैच, 7224 रन*

सचिन तेंदुलकर – 94 मैच, 7216 रन

महेला जयवर्धने – 81 मैच, 7167 रन

जैक्स कैलिस – 88 मैच, 7035 रन

टीम इंडिया की शानदार वापसी

ओवल टेस्ट की बात करें तो भारत ने दूसरी पारी में जोरदार शुरुआत करते हुए दिन का खेल खत्म होने तक 2 विकेट पर 75 रन बना लिए थे और 52 रनों की बढ़त हासिल कर ली थी. यशस्वी जायसवाल 51 रन बनाकर नाबाद खेल रहे हैं, जबकि नाइटवॉचमैन आकाशदीप सिंह उनका साथ निभा रहे हैं.

इससे पहले इंग्लैंड की टीम ने पहली पारी में 247 रन बनाए थे, जबकि भारत की पहली पारी 224 रन पर सिमट गई थी. इंग्लैंड की पारी की शुरुआत अच्छी रही थी लेकिन भारतीय गेंदबाजों की वापसी ने मेजबान टीम को बैकफुट पर ला दिया.

क्या रूट तोड़ पाएंगे पोंटिंग का रिकॉर्ड?

ओवल की पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जा रही है, ऐसे में जो रूट के पास रिकी पोंटिंग के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का सुनहरा मौका है. अगर वह दूसरी पारी में भी बल्ले से कमाल करते हैं, तो टेस्ट इतिहास में एक और बड़ा रिकॉर्ड उनके नाम जुड़ जाएगा.

[ad_2]

​AI के दौर में कौन सी नौकरियां सुरक्षित हैं? जानिए कहां कम है खतरा

[ad_1]

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

[ad_2]