पांचवें टेस्ट में भारत की जीत पक्की! केनिंग्टन ओवल में बना लिए इतने रन तो अंग्रेजों की हार तय

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भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पांचवें टेस्ट में टीम इंडिया का पलड़ा भारी हो गया है. केनिंग्टन ओवल में खेले जा रहे इस टेस्ट में तीसरे दिन लंच ब्रेक तक भारत ने 3 विकेट पर 189 रन बना लिए हैं. यशस्वी जायसवाल 85 और कप्तान शुभमन गिल 11 रनों पर नाबाद हैं. टीम इंडिया की बढ़त 166 रनों की है. यहां जानिए इस मैच में कितने रन बनाने पर टीम इंडिया की जीत पक्की हो जाएगी. 

सबसे पहले आपको बता दें कि केनिंग्टन ओवल में खेले जा रहे पांचवें टेस्ट में टीम इंडिया पहली पारी में 224 रन ही बना सकी थी. इसके बाद इंग्लैंड ने टी20 के अंदाज में बैटिंग की. बेन डकेट 38 गेंद में 43 और जैक क्रॉली 57 गेंद में 64 रन ने शानदार शुरुआत दिलाई, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने दमदाक वापसी की और इंग्लैंड को 247 रनों पर ढेर कर दिया. इस तरह इंग्लैंड को 23 रनों की लीड मिली. फिर भारत ने केएल राहुल 07 और साई सुदर्शन 11 के विकेट जल्द गंवा दिए. 

ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से भारत को हरा देगा, लेकिन यशस्वी जायसवाल और नाइटवाचमैन के रूप में आए आकाशदीप ने बाजी पलट दी. आकाशदीप ने 66 रनों की पारी खेली और तीसरे विकेट के लिए जायसवाल के साथ 107 रनों की साझेदारी की. अब टीम इंडिया के सात विकेट शेष हैं और 166 रनों की बढ़त हो चुकी है. 

अगर भारत ने बना लिए इतने रन तो… 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत कितने रन बनाए, जिससे इंग्लैंड की हार तय हो जाए. ऐसे में बता दें कि अगर भारतीय टीम ने इंग्लैंड के सामने 350 से ज्यादा का लक्ष्य रख दिया तो फिर टीम इंडिया की जीत पक्की हो जाएगी. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है ओवल की ओवरकास्ट कंडीशन और पिच. यहां आसमान पर काले बादल छाए रहेंगे. हल्की बारिश की संभावना है. ऐसे में तेज गेंदबाजों को मदद मिलना तय है. 

ओवल के आंकड़े 

यहां सबसे बड़ा सफल रन चेज़ करीब 123 साल पहले 1902 में हुआ था. जब इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 263 रनों के लक्ष्य का पीछा किया था. इसके बाद वेस्टइंडीज ने इस मैदान पर 1963 में 253 रन चेज़ किए थे. वहीं इस मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई टीम 85 रन के टारगेट को भी डिफेंड कर चुकी है. यह कारनामा कंगारुओं ने इंग्लैंड के खिलाफ 1882 में किया था. तब अंग्रेज महज 77 पर ढेर हो गए थे. 

भारत ने यहां जीता था पिछला टेस्ट 

आखिरी बार टीम इंडिया केनिंग्टन ओवल में 2021 में खेली थी. तब भारत ने इंग्लैंड को धूल चटाई थी. टीम इंडिया इस मैदान पर तब 157 रनों से जीती थी. उस टेस्ट की पहली पारी में भी इंग्लैंड ने बढ़त हासिल की थी. भारतीय टीम पहली पारी में सिर्फ 191 रन बना सकी थी. इसके बाद इंग्लैंड ने 99 रनों की बढ़त ले ली थी. फिर दूसरी पारी में भारत ने 466 रन बना दिए और अंग्रेजों को 368 रनों का लक्ष्य दिया था. इसके जवाब में इंग्लैंड की टीम सिर्फ 210 रन ही बना सकी थी.

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BSNL के नए ऑफर ने उड़ा दी Airtel की नींद! मात्र 1 रुपये में मिलेगा अनलिमिटेड कॉलिंग और 2GB डेट

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BSNL Offer: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने एक बेहद किफायती और आकर्षक ऑफर लॉन्च किया है जो स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पेश किया गया है. इस ऑफर के तहत मात्र 1 रुपये में ग्राहकों को 28 दिनों की वैधता के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग, रोज़ाना 2GB हाई-स्पीड डेटा और हर दिन 100 SMS फ्री मिल रहे हैं. यह ऑफर खासतौर पर नए BSNL ग्राहकों के लिए है जिसका उद्देश्य कंपनी के अपग्रेड किए गए नेटवर्क को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है.

BSNL का नया ‘फ्रीडम ऑफर’

BSNL ने इस ऑफर की जानकारी अपने आधिकारिक X (पहले ट्विटर) अकाउंट पर दी जहां इसे ‘सच्ची डिजिटल आज़ादी’ का नाम दिया गया है. ग्राहक यदि 1 अगस्त से 31 अगस्त के बीच नई BSNL सिम लेते हैं तो सिर्फ 1 रुपये के रिचार्ज पर उन्हें पूरे 30 दिन के लिए यह सभी सुविधाएं मिलेंगी. इस योजना में राष्ट्रीय रोमिंग समेत पूरे देश में अनलिमिटेड कॉलिंग, रोज़ाना 2GB डेटा और 100 SMS शामिल हैं.

यह ऑफर सीमित समय के लिए उपलब्ध है और देश के सभी सर्कल में लागू किया गया है. ग्राहक BSNL के किसी भी अधिकृत केंद्र से सिर्फ 1 रुपये में नया सिम कार्ड लेकर इस प्लान का लाभ उठा सकते हैं.

कम होती यूजर संख्या के बीच ARPU बढ़ाने की कोशिश

TRAI की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बीते महीनों में BSNL और Vi से लाखों यूजर दूसरी कंपनियों में पोर्ट हो चुके हैं. गिरते यूजर बेस को देखते हुए BSNL ने यह आक्रामक रणनीति अपनाई है ताकि बाजार में अपनी हिस्सेदारी को फिर से मज़बूत किया जा सके.

सरकार ने BSNL को Average Revenue Per User (ARPU) बढ़ाने का लक्ष्य दिया है लेकिन साथ ही यह भी निर्देश दिए हैं कि इसके लिए टैरिफ की कीमतें नहीं बढ़ाई जाएं. अब हर महीने इस पर समीक्षा बैठकें की जाएंगी ताकि सुधार की निगरानी की जा सके.

Airtel का नया प्लान

एयरटेल ने हाल ही में अपना 399 रुपये का नया प्लान पेश किया है. इस प्लान की वैधता 28 दिनों की है और इसमें अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग, हाई-स्पीड डेटा और मुफ्त नैशनल रोमिंग (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) की सुविधा दी जा रही है. यूज़र्स को हर दिन 2.5GB डेटा और 100 एसएमएस मुफ्त मिलते हैं. साथ ही, इस प्लान में 28 दिनों के लिए JioHotstar का मुफ्त सब्सक्रिप्शन भी शामिल है जिससे ओटीटी कंटेंट के शौकीनों को भी फायदा होगा.

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कभी ‘नीला खजाना’ तो कभी तेल का शिगूफा, PAK में बार-बार क्यों उड़ती है ऐसी अफवाह? ट्रंप के बयान

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पाकिस्तान में तेल-गैस के विशाल भंडार होने का दावा लंबे समय से किया जाता रहा है, लेकिन हर बार ये दावे फुस्स हो जाते हैं, क्योंकि हकीकत इससे कोसो दूर है. 2019 में जब इमरान खान प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने भी ऐलान किया था कि कराची के समुद्री तट से करीब 230-280 किलोमीटर दूर ईरान की सीमा के पास समुद्र में तेल और गैस का बड़ा भंडार मिलने वाला है. 

इमरान खान ने तब कहा था कि ये भंडार इतना बड़ा होगा कि पाकिस्तान न सिर्फ अपनी तेल की जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि तेल निर्यात भी कर सकेगा. उस समय अमेरिकन कंपनी एक्सॉनमोबिल और इटेलियन कंपनी ईएनआई समुद्र में केकरा-1 नाम के ब्लॉक में ड्रिलिंग कर रही थी. 

इमरान खान के दावों ने कराई थी पाकिस्तान की फजीहत

तत्कालीनी पीएम के दावों ने उस वक्त पाकिस्तानियों में उम्मीद जगा दी थी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कर दिया कि ड्रिलिंग में कोई खास नतीजे नहीं मिले. बाद में पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड के महानिदेशक मोईन रजा खान ने बताया कि केकरा-1 में तेल या गैस के बजाय सिर्फ पानी मिला. इस परियोजना में 124 अरब डॉलर की लागत लग चुकी थी, लेकिन सफलता की संभावना महज 12 प्रतिशत थी.

इस वजह से इमरान खान की ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि दुनियाभर में अच्छी खासी फजीहत हुई, क्योंकि उनके बड़े-बड़े दावों को झूठा करार दिया गया. कई आलोचकों ने कहा कि ये दावे सिर्फ विदेशी निवेशकों को लुभाने और जनता का ध्यान आर्थिक संकट से हटाने के लिए किए गए.

2024 में पाकिस्तान ने ‘नीला खजाना’ का शिगूफा छोड़ा

सितंबर 2024 में एक बार फिर से पाकिस्तानी मीडिया में खबरें चलीं कि समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस का विशाल भंडार मिला है. दावा किया गया कि ये दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल गैस भंडार हो सकता है. यहां तक कि इसका नाम नीला खजाना रख दिया गया. और कहा गया कि ये खोज तीन साल के भौगोलिक सर्वे के बाद हुई है. विशेषज्ञों ने इस दावे पर सवाल उठाए. 

ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (Ogra) के पूर्व सदस्य मुहम्मद आरिफ ने कहा कि खोज तो आशाजनक है लेकिन भंडार का आकार और उससे कितना तेल-गैस निकाला जा सकता है ये अभी स्पष्ट नहीं है. तेल या गैस निकालने में 4-5 साल लग सकते हैं और इसके लिए 5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश चाहिए. 2024 की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ExxonMobil और अन्य कंपनियों ने 5500 मीटर तक खुदाई की, लेकिन कोई महत्वपूर्ण भंडार नहीं मिला.

ट्रंप के बयान का पाकिस्तानी ही बना रहे मजाक

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ मिलकर उसके ‘विशाल तेल भंडार’ को विकसित करेगा. ट्रंप ने तो ये तक कह दिया कि शायद एक दिन पाकिस्तान भारत को भी तेल बेचे, लेकिन इस बयान का पाकिस्तान में ही मजाक बन गया. सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे कॉमेडी शो करार दिया. एक यूजर ने लिखा कि पाकिस्तान को ट्रंप के ट्वीट से पता चला कि हमारे पास तेल है.

बार-बार क्यों उड़ती हैं ये ख़बरें?

कई पाकिस्तानियों ने ही कहा कि ये दावे पुराने हैं और पहले भी इमरान खान के समय ऐसे वादे किए गए थे, जो खोखले साबित हुए. कुछ ने तो मजाक में कहा कि शायद पाकिस्तान ईरानी तेल को अपना बताकर बेचने की कोशिश करेगा.

विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कर्ज और महंगाई के बोझ तले दबी है. ऐसे में तेल की खोज की खबरें जनता का ध्यान बटाने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने का जरिया बनती हैं. इमरान खान के समय भी ऐसा हुआ और अब ट्रंप के बयान ने फिर से इस चर्चा को हवा दी है.

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नेता है या दुश्मन? युवाओं से बोले नेता जी, मेरे लिए जेल जाओ और कामयाब हो जाओ- वीडियो वायरल

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राजनीति में बड़े-बड़े बयान देना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई लोकसभा सांसद जनता को खुलेआम कहे कि “मेरे लिए जेल चले जाओगे तो तुम्हें कामयाब कर दूंगा”, तो वहां सिर्फ तालियां नहीं, सोशल मीडिया की घंटियां भी बजने लगती हैं. ऐसा ही एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें राजस्थान से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल लोगों के बीच खड़े होकर भाषण दे रहे हैं और उनके बोल ऐसे हैं जैसे राजनीति की पीएचडी वहीं पूरी हो रही हो. वीडियो में वो युवाओं को सीधे सीधे जेल जाने और कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाते दिखाई दे रहे हैं.

मेरे लिए जेल जाओगे तो कामयाब कर दूंगा, बोले नेता जी

दरअसल, एक सभा को संबोधित करते हुए हनुमान बेनीवाल भाषण में कहते हैं कि “तुम मेरे लिए जेल चले जाओगे तो मैं तुम्हें कामयाब कर दूंगा. थाने में दो-तीन घंटे बैठ भी गए तो क्या फर्क पड़ जाएगा? उल्टा जेल जाने से आदमी होशियार बनता है. हमने तो अब जेल का खाना भी सुधरवा दिया है.” इसके बाद वो यहीं नहीं रुके, आगे बोले… “इंदिरा गांधी के समय जो लोग जेल गए थे, वो आज एमपी-एमएलए बने बैठे हैं. उनका साफतौर पर कहना था कि एक बार जेल चले जाओ, फिर देखो जिंदगी कैसे बदलती है.” बेनीवाल की ये बात सुनकर वहां मौजूद भीड़ में तालियों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह बयान कई तरह की प्रतिक्रियाओं को जन्म दे रहा है. वीडियो में उनका अंदाज ऐसा है जैसे जेल जाना कोई कोचिंग क्लास हो और वापसी पर पॉलिटिक्स का सर्टिफिकेट हाथ में हो. उनके मुताबिक, जेल जाना अब न शर्म की बात है, न सजा का डर, बल्कि एक रणनीतिक निवेश है जो आपको राजनीति की ऊंचाई तक पहुंचा सकता है.

अपने भाषणों को लेकर चर्चा में रहते हैं हनुमान बेनीवाल

इस बयान ने एक बार फिर उस बहस को हवा दे दी है कि क्या राजनीति में सफलता पाने के लिए संघर्ष और सिद्धांत जरूरी हैं या फिर गिरफ्तारी और गहमागहमी ही टिकट की गारंटी है. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब बेनीवाल ने कुछ ऐसा बयान दिया हो जो चर्चा में आ गया हो, लेकिन इस बार उनके शब्दों ने जेल और राजनीति के रिश्ते को एक नया ही “लोकतांत्रिक” रंग दे दिया है. वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल है और लोग इसे लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.

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यूजर्स ले रहे मजे

वीडियो को रविन्द्र मीणा जहाजपुर नाम के फेसबुक अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…भाई ये नेता है या जनता का दुश्मन. एक और यूजर ने लिखा…नेता बनने के लिए जेल जाना जरूरी नहीं है सांसद महोदय. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…ये भाई साहब कुछ भी बोलने से पहले सोचते नहीं हैं.

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उधर ट्रंप ने लगाया टैरिफ, इधर टिम कुक ने कर दिया बड़ा ऐलान; भारत पर बढ़ रहा Apple का भरोसा

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Apple Growth in India: एप्पल के सीईओ टिम कुक कारोबारी साल 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे से खुश हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी ने भारत सहित दुनिया के दो दर्जन से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में जून तिमाही में रिकॉर्ड रेवेन्यू हासिल किया है. एनालिस्ट्स के साथ बातचीत के दौरान कुक ने कहा कि आईफोन, मैक और दूसरी सर्विसेज में डबल डिजिट में हुए ग्रोथ से यह नतीजा मिला. 

कंपनी के ग्रोथ से खुश हुए कुक

कुक कहते हैं, दुनियाभर के जितने भी बाजारों में हमारी नजर रहती है वहां हमने गजब का ग्रोथ देखा है. हर जगह आईफोन का ग्रोथ सामने आया है. भारत, मिडिल ईस्ट, साउथ एशिया और ब्राजील जैसे उभरते बाजारों में दोहरे अंक में वृद्धि की है. मैक का भी नतीजा शानदार रहा है और रेवेन्यू में एक साल में 15 परसेंट का उछाल आया है. कंपनी ने हाल ही में सऊदी अरब में ऑनलाइन एप्पल स्टोर लॉन्च किया है और हम इस साल के आखिर तक संयुक्त अरब अमीरात और भारत में और नए स्टोर खोलने के लिए बहुत उत्साहित हैं.”

भारत में बढ़ रहा एप्पल का कारोबार 

काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक का कहना है कि एप्पल का भारत में कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है और जून तिमाही में डबल डिजिट ग्रोथ के साथ कंपनी ने एक और रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ हासिल किया है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस से हुई बातचीत में उन्होंने इसकी जानकारी दी. काउंटरपॉइंट के मुताबिक, इस तिमाही में iPhone ने 7 परसेंट की बिक्री के साथ 23 परसेंट का रेवेन्यू हासिल किया है और इस सेगमेंट में iPhone 16सबसे ज्यादा बिकने वाला मॉडल रहा, जो इस ग्रोथ की एक बड़ी वजह है.

भारत को लेकर यह है कंपनी का प्लान

कुक ने बताया कि अमेरिका में बिकने वाले ज्यादातर  iPhones अब भारत में बनाए जाते हैं. काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, अमेरिका में iPhone के टोटल शिपमेंट में भारत का योगदान दूसरी तिमाही में बढ़कर 71 परसेंट हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 31 परसेंट ज्यादा है. एप्पल का प्लान इस साल के आखिर तक नए रिटेल स्टोर खोलकर भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का है, जो देश में अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की उनकी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. 

टैरिफ के मोर्चे पर टिम का कहना है, अकेले जून तिमाही में कंपनी को लगभग 800 मिलियन डॉलर का खर्च उठाना पड़ा. रही बात सितंबर तिमाही की, तो अगर टैरिफ की दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाता है या कोई नया टैरिफ नहीं जोड़ा जाता है, तो हमारी लागत में लगभग 1.1 बिलियन डॉलर का इजाफा होने का अनुमान है. हालांकि, आने वाली तिमाहियों के लिए यही अनुमान लगाते हुए आगे नहीं बढ़ना चाहिए क्योंकि टैरिफ के अलावा भी कई दूसरी चीजों की वजह से हालात बदल सकते हैं. 

 

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चेहरा का पिंपल हटाने के लिए ये अजीबोगरीब ट्रिक अपनाती थी तमन्ना भाटिया

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तमन्ना भाटिया ने पिछले कुछ सालों में कई सुपरहिट आइटम सॉन्ग में काम किया है जिससे उन्हें काफी पॉपुलैरिटी हासिल हुई है.

तमन्ना भाटिया ने पिछले कुछ सालों में कई सुपरहिट आइटम सॉन्ग में काम किया है जिससे उन्हें काफी पॉपुलैरिटी हासिल हुई है.

अब तो ऐसा कहा जाने लगा है कि मेकर्स अपनी फिल्म को हिट करवाने के लिए तमन्ना भाटिया का एक गाना जरूर रखते हैं.

अब तो ऐसा कहा जाने लगा है कि मेकर्स अपनी फिल्म को हिट करवाने के लिए तमन्ना भाटिया का एक गाना जरूर रखते हैं.

हाल ही में तमन्ना ने एक इंटरव्यू में कहा कि कई छोटे बच्चे तो उनका गाना देखे बिना खाना नहीं खाया करते थे.

हाल ही में तमन्ना ने एक इंटरव्यू में कहा कि कई छोटे बच्चे तो उनका गाना देखे बिना खाना नहीं खाया करते थे.

इतना ही नहीं इस दौरान जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि वो पिम्पल ठीक करने के लिए क्या करती हैं तो एक्ट्रेस ने ऐसा जवाब दिया जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

इतना ही नहीं इस दौरान जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि वो पिम्पल ठीक करने के लिए क्या करती हैं तो एक्ट्रेस ने ऐसा जवाब दिया जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

दऱअसल, एक्ट्रेस ने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में कहा कि वो थूक लगाकर अपने पिम्पल को ठीक करती हैं, ये काफी असरदार होता है.

दऱअसल, एक्ट्रेस ने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में कहा कि वो थूक लगाकर अपने पिम्पल को ठीक करती हैं, ये काफी असरदार होता है.

ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि तमन्ना के इस पिम्पल ट्रीटमेंट ट्रिक को सुन फैंस जरूर हैरान हुए होंगे.

ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि तमन्ना के इस पिम्पल ट्रीटमेंट ट्रिक को सुन फैंस जरूर हैरान हुए होंगे.

इन सबके अलावा कुछ महीनों पहले ही तमन्ना का विजय वर्मा संग ब्रेकअप हुआ है, जिसकी वजह से वो काफी चर्चा में रही हैं.

इन सबके अलावा कुछ महीनों पहले ही तमन्ना का विजय वर्मा संग ब्रेकअप हुआ है, जिसकी वजह से वो काफी चर्चा में रही हैं.

Published at : 02 Aug 2025 04:20 PM (IST)

बॉलीवुड फोटो गैलरी

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अब मच्छर काटेंगे तो खुद मर जाएंगे! वैज्ञानिकों ने खोज निकाली ऐसी तकनीक जिससे गायब हो जाएंगे मच्

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Mosquito Killer: एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, एक ऐसी गोली जो इंसानों के खून को मच्छरों के लिए ज़हर बना देती है. अफ्रीका के केन्या और मोज़ाम्बिक जैसे देशों में बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि आईवरमेक्टिन (Ivermectin) नाम की दवा से मलेरिया के मामलों में 26% की कमी देखी गई. ये दवा इंसान को तो नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन जब मच्छर काटते हैं तो वो खुद मर जाते हैं.

मलेरिया रोकने में कारगर साबित हो रही है Ivermectin

BOHEMIA नाम की सबसे बड़ी स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब पूरे समुदाय को इस दवा की खुराक दी गई तो मलेरिया के नए मामलों में काफी गिरावट आई. यह स्टडी Barcelona Institute for Global Health (ISGlobal) के नेतृत्व में की गई जिसमें la Caixa Foundation, Manhiça Health Research Centre (CISM) और KEMRI-Wellcome Trust जैसे संगठनों ने सहयोग किया. स्टडी के नतीजे प्रतिष्ठित The New England Journal of Medicine में प्रकाशित हुए हैं.

क्यों ज़रूरी हो गई है नई रणनीति?

2023 में दुनिया भर में 263 मिलियन मलेरिया केस और लगभग 5.97 लाख मौतें दर्ज की गईं. पारंपरिक उपाय जैसे मच्छरदानी (LLIN) और इंडोर स्प्रे (IRS) अब उतने असरदार नहीं रह गए हैं क्योंकि मच्छरों में कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है और अब वे बाहर या अनजाने समय पर काटते हैं. ऐसे में मलेरिया को रोकने के लिए नई सोच और नए तरीके ज़रूरी हो गए हैं.

कैसे काम करती है ये गोली?

Ivermectin आमतौर पर रिवर ब्लाइंडनेस और एलीफैंटियासिस जैसी उपेक्षित बीमारियों के इलाज में दी जाती है. लेकिन अब यह सामने आया है कि जब यह दवा किसी व्यक्ति को दी जाती है और मच्छर उसे काटता है तो मच्छर की तुरंत मौत हो जाती है. इस दवा का एक मासिक डोज़ कई दिनों तक असरदार रहता है.

अफ्रीका में हुआ टेस्ट

यह प्रयोग दो देशों केन्या के क्वाले काउंटी और मोज़ाम्बिक के मोपिया ज़िले में किया गया. केन्या में 5 से 15 साल के बच्चों को और मोज़ाम्बिक में 5 साल से कम उम्र के बच्चों को 400 mcg/kg डोज़ तीन महीने तक दिया गया. केन्या में इस दवा ने शानदार परिणाम दिए आईवरमेक्टिन लेने वाले बच्चों में मलेरिया के मामलों में 26% की गिरावट दर्ज की गई. इस स्टडी में 20,000 से अधिक प्रतिभागी और 56,000 से ज्यादा डोज़ शामिल रहे.

WHO भी दिखा रहा है रुचि

यह स्टडी WHO की वेक्टर कंट्रोल एडवाइजरी टीम तक पहुंच चुकी है और उन्होंने आगे और अध्ययन की सिफारिश की है. कई देश इस दवा को अपने मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं. ISGlobal की मलेरिया इनिशिएटिव की निदेशक रेजिना रैबिनोविच कहती हैं, “यह रिसर्च मलेरिया के भविष्य को बदल सकती है. Ivermectin एक जाना-पहचाना, सुरक्षित विकल्प है जो मौजूदा उपायों के साथ मिलकर काम कर सकता है.”

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क्लासरूम का हीरो कौन? अजय देवगन या अक्षय कुमार कौन है ज्यादा पढ़ा लिखा?

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बॉलीवुड की दुनिया में एक से बढ़कर एक स्टार्स हैं, लेकिन जब बात पढ़ाई-लिखाई की हो, तो फैंस के मन में ये सवाल उठता है उनके फेवरेट हीरो की एजुकेशन कितनी है? खासकर जब बात दो बड़े सुपरस्टार्स – अजय देवगन और अक्षय कुमार की हो, तो तुलना और दिलचस्प हो जाती है. एक ओर जहां अजय देवगन अपने संजीदा किरदारों के लिए जाने जाते हैं, वहीं अक्षय कुमार फिटनेस और डिसिप्लिन के प्रतीक माने जाते हैं. चलिए जानते हैं, क्लासरूम में कौन निकला असली हीरो!

अजय देवगन की पढ़ाई

बॉलीवुड के ‘सिंघम’ कहे जाने वाले अजय देवगन ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई के सिल्वर बीच हाई स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने मीठीबाई कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. हालांकि, उन्होंने किस विषय में डिग्री ली, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि पढ़ाई के साथ-साथ उनका रुझान शुरू से ही फिल्मी दुनिया की ओर था. यही वजह रही कि कॉलेज के बाद ही उन्होंने एक्टिंग की राह पकड़ ली और जल्द ही फिल्म ‘फूल और कांटे’ से धमाकेदार डेब्यू किया.

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अक्षय कुमार की पढ़ाई

अक्षय कुमार ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के डॉन बॉस्को स्कूल से की. स्कूल के दिनों में ही वे स्पोर्ट्स और फिजिकल एक्टिविटीज में काफी आगे रहते थे. पढ़ाई में भी वे ठीक-ठाक थे लेकिन उनका असली फोकस था डिसिप्लिन और फिटनेस पर. स्कूल के बाद उन्होंने गुरु नानक खालसा कॉलेज, मुंबई से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया.

लेकिन अक्षय की पढ़ाई वहीं तक सीमित नहीं रही. उन्हें बचपन से ही मार्शल आर्ट्स का शौक था. इस पैशन को उन्होंने पढ़ाई के साथ भी जारी रखा और बाद में यही हुनर उनके फिल्मी करियर की ताकत बना. अक्षय ने बैंकॉक जाकर मार्शल आर्ट्स में ट्रेनिंग ली और शेफ का काम भी किया, जिससे उन्हें अनुशासन और मेहनत की असली सीख मिली.

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ना रहेगा टोल ना लगेगा टैक्स! ट्रक ने टक्कर मारकर उड़ा दिया पूरा का पूरा टोल बूथ- वीडियो वायरल

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अब तक आपने सुना होगा कि कुछ लोग टोल देने से बचने के लिए बहस करते हैं, झगड़ा करते हैं या फिर चुपचाप पीछे से निकल जाते हैं. लेकिन जनाब, अब नया ट्रेंड आ गया है, टोल बूथ को ही उड़ा दो और आगे बढ़ो. सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो आग की तरह फैल रहा है जिसमें एक विशालकाय ट्रक, जैसे कोई फिल्म का विलेन हो, टोल प्लाजा पार करते वक्त सीधा टोल बूथ में घुस जाता है. ट्रक की रफ्तार इतनी तेज और टक्कर इतनी जोरदार होती है कि बूथ लकड़ी के खिलौने की तरह उछलकर बिखर जाता है. मौके पर भगदड़ मच जाती है, गार्ड्स इधर-उधर भागते हैं और हवा में धूल का गुबार भर जाता है. 

ट्रक ने उड़ा दिया पूरा टोल बूथ

सीसीटीवी में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें ट्रक की एंट्री, टक्कर और फिर बिना रुके आगे बढ़ जाने का पूरा सीन मौजूद है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि टोल प्लाजा पर रोज की तरह रौनक है और गाड़ियां आ जा रही है. तभी वहां एंट्री होती है एक ट्रक की जो कि शायद टोल देने के मूड में था नहीं. ट्रक वाले ने रेस खींची और स्टियरिंग को घुमाकर सीधे टोल बूथ की ओर घुमा दिया. फिर क्या था, टोल बूथ ऐसे हवा में उड़ा जैसे कोई लकड़ी का खिलौना उड़ता है. उसमें बैठा शख्स भी घायल बताया जा रहा है. वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी दहशत में हैं.

टोल वालों की गुंडागर्दी से भरा पड़ा है इंटरनेट!

टोल पर इस तरह के नजारे आम हैं. कभी कोई कार वाला रफ्तार से टोल गेट तोड़ते हुए निकलता है तो कई बार ट्रक ड्राइवर टोल को किसी खिलौने की तरह कुचल देते हैं. हालांकि गुंडागर्दी दोनों तरफ से होती है. टोलकर्मी भी कई बार वाहन चालकों के साथ मारपीट कर देते हैं जिसके वीडियो से इंटरनेट भरा पड़ा है. बहरहाल ट्रक का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.

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यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट

वीडियो को @NazneenAkhtar23 नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…लोग परेशान हैं सरकार की इस लूट से. एक और यूजर ने लिखा…टोल टैक्स एक तरह का गुंडाराज है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…ट्रक वाला बेचारा परेशान हो गया होगा टोल दे देकर.

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अमेरिका या रूस, समंदर में किसकी चलेगी बादशाहत? जानें किसकी सबमरीन कितनी ताकतवर

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रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘डेड इकॉनॉमी’ वाली टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देने के बाद, अमेरिका ने अपनी दो परमाणु पनडुब्बियों को रणनीतिक स्थानों की ओर भेजने का आदेश दिया है. यह कदम शीत युद्ध काल में अपनाई जाने वाली पुरानी सैन्य रणनीति की याद दिलाता है.

ट्रंप ने यह फैसला तब लिया जब उनके टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकियों का रूस पर कोई विशेष असर नहीं पड़ा. अमेरिका और रूस के बीच अब जंग जमीन पर नहीं, समंदर की गहराइयों में दिख रही है. दोनों देशों ने अपनी-अपनी परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर दी हैं. सवाल ये उठता है, कौन है ज्यादा ताकतवर? आइए जानते हैं किस देश की सबमरीन है ज्यादा खतरनाक और आधुनिक.

‘डेड हैंड’ क्या है?
‘डेड हैंड’ प्रणाली एक स्वचालित या अर्ध-स्वचालित परमाणु हथियार नियंत्रण तंत्र है, जो शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ द्वारा विकसित किया गया था. यह प्रणाली इस तरह से डिजाइन की गई है कि यदि देश का पूरा नेतृत्व किसी परमाणु हमले में नष्ट हो जाए, तब भी यह प्रणाली एक व्यापक परमाणु पलटवार कर सकती है. मेदवेदेव द्वारा इस प्रणाली की याद दिलाए जाने के बाद अमेरिका की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई.

 रूस की तीखी प्रतिक्रिया
हालांकि, रूस की सरकार यानी क्रेमलिन की तरफ से इस अमेरिकी फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस के एक वरिष्ठ सांसद विक्टर वोडोलात्सकी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उसने कोई बड़ा सैन्य कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि रूस की परमाणु पनडुब्बियों की संख्या अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक है और अमेरिका की जिन पनडुब्बियों को रूस के नजदीक भेजा गया है, उन पर पहले से ही रूस की नजर है और वे उसकी निगरानी में हैं.

अमेरिका की परमाणु पनडुब्बी क्षमता

ओहायो-क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां

अमेरिकी नौसेना के पास ओहायो-क्लास की कम से कम 14 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBNs) हैं, जिन्हें ‘बूमर्स’ कहा जाता है. इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी स्टेल्थ और परमाणु हथियारों को सटीकता से पहुंचाने की क्षमता है. ये पनडुब्बियां लंबी अवधि के लिए गश्त करने में सक्षम हैं और 15 वर्षों तक किसी बड़े ओवरहॉल की ज़रूरत नहीं होती. हर पनडुब्बी में अधिकतम 20 सबमरीन लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBM) तैनात की जा सकती हैं. इनका मुख्य हथियार Trident II D5 मिसाइल है.

अमेरिकी फास्ट अटैक पनडुब्बियां

वर्जीनिया-क्लास
अमेरिका के पास वर्जीनिया-क्लास की 24 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन हैं, जिनमें USS Hawaii, USS Missouri, और USS North Carolina जैसी पनडुब्बियां शामिल हैं. यह अमेरिका की सबसे नई अंडरसी वॉरफेयर तकनीक पर आधारित हैं. इनमें विशेष रूप से स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज के मिशनों को समर्थन देने के लिए सुविधाएं होती हैं. इनमें गोताखोरों के लिए ‘लॉक-इन/लॉक-आउट चेंबर’ भी होता है. इन पनडुब्बियों में टॉमहॉक और हार्पून मिसाइलें, साथ ही MK-48 टॉरपीडो से लैस किया गया है.

सीवुल्फ-क्लास
सीवुल्फ-क्लास की कुल 3 पनडुब्बियां अमेरिकी नौसेना के बेड़े में शामिल हैं. पहली पनडुब्बी USS Seawolf को 1997 में शामिल किया गया था. ये पनडुब्बियां वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण) से रहित हैं लेकिन इनमें आठ टॉरपीडो ट्यूब होते हैं और इनका टॉरपीडो कक्ष 50 हथियार रखने में सक्षम होता है.

लॉस एंजेलिस-क्लास (688-क्लास)

लॉस एंजेलिस-क्लास पनडुब्बियां अमेरिका की सबमरीन फोर्स की रीढ़ हैं. इनमें से कम से कम 24 पनडुब्बियां सेवा में हैं. इनका निर्माण 1976 में शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ का मुकाबला करने के उद्देश्य से किया गया था. ये पनडुब्बियां तेज रफ्तार, स्टेल्थ तकनीक, और गहरे समुद्र में युद्ध संचालन में अत्यंत प्रभावी साबित हुई हैं. धीरे-धीरे इनकी जगह वर्जीनिया-क्लास की पनडुब्बियां ले रही हैं.

रूस की परमाणु पनडुब्बी क्षमता

बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां:

बोरेई-क्लास
रूस के पास बोरेई-क्लास की 8 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBNs) हैं. हर पनडुब्बी में 16 बुलावा SLBM मिसाइलें और छह 533mm टॉरपीडो लॉन्चर लगे होते हैं. इसके अलावा ये पनडुब्बियां एंटी-सबमरीन रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें भी दाग सकती हैं. इनका दल सौ से अधिक नौसैनिकों का होता है. भविष्य में यही पनडुब्बियां रूस की सबसे उन्नत रणनीतिक नौसैनिक प्रणाली बनेंगी.

डेल्टा IV-क्लास
बोरेई-क्लास पनडुब्बियों के आने से पहले रूस की परमाणु ताकत का आधार डेल्टा IV-क्लास पनडुब्बियां थीं. यह श्रेणी टायफून-क्लास के साथ विकसित की गई थी. वर्तमान में इनमें से कम से कम 6 पनडुब्बियां सेवा में हैं. प्रत्येक में 16 सिनेवा SLBM मिसाइलें होती हैं और ये आज भी रूस की समुद्र आधारित परमाणु ताकत की रीढ़ बनी हुई हैं.

फास्ट अटैक पनडुब्बियां

यासेन-क्लास
रूस की नौसेना के पास यासेन-क्लास की 4 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन हैं. ये आकार में छोटी होती हैं और इनमें कम क्रू की जरूरत होती है. हर यासेन-क्लास सबमरीन या तो पांच 3M54-1 कैलिब्र मिसाइलें या चार P-800 ओनिक्स मिसाइलें लेकर चल सकती हैं. ये मिसाइलें लंबी दूरी से दुश्मन के जमीनी ठिकानों और जहाजों पर हमला करने में सक्षम हैं.

अकुला-क्लास
रूस की अकुला-क्लास पनडुब्बियों को ‘शार्क’ भी कहा जाता है, क्योंकि ‘अकुला’ का रूसी मतलब शार्क होता है. यह पनडुब्बी अमेरिका की लॉस एंजेलिस-क्लास का जवाब मानी जाती है. रूस के पास इस क्लास की लगभग पांच पनडुब्बियां सेवा में हैं. ये पनडुब्बियां बेहद शांत संचालन क्षमता के साथ दुश्मन के क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं और इनसे कैलिब्र, ओनिक्स या ग्रेनिट मिसाइलें चलाई जा सकती हैं, साथ ही ये घातक टॉरपीडो से भी लैस होती हैं.

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