पहाड़ की प्यास बुझाने के लिए खोले वॉटर स्प्रिंग्स के रास्ते, मैदानी इलाकों पर भी कर रहे ‘अहसान’

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गर्मी अपने चरम पर है तो ठंडी हवाओं और बर्फीली वादियों का लुत्फ उठाने के मकसद से पहाड़ों पर सैलानियों का पहुंचना भी शुरू हो चुका है. हालांकि, दिल-ओ-दिमाग को सुकून पहुंचाने वाले इन पहाड़ों का हलक भी अब गर्मियों में सूखने लगा है. गर्मियों के दौरान पहाड़ों की रानी शिमला में पानी की किल्लत की खबरें पिछले कई साल से आम हैं. अहम बात यह है कि यह संकट सिर्फ शिमला में नहीं है. हिमाचल के बाकी पहाड़ी इलाकों में भी पानी की किल्लत आम हो चुकी है.

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 50 फीसदी से ज्यादा वॉटर स्प्रिंग्स सूखने की जानकारी दी है. ऐसे में कई जगह वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव यानी पुनर्जीवित भी किया गया है. कई जगह तो महिलाओं ने यह जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले ली. हालांकि, सवाल यह उठता है कि पानी के साथी कहे जाने वाले पहाड़ आखिर क्यों प्यास से जूझ रहे हैं? कैसे इसका असर मैदानी इलाकों पर भी पड़ रहा है और इन्हें कैसे रिवाइव किया जा रहा है? आइए जानते हैं इस स्पेशल रिपोर्ट में.

नीति आयोग दे चुका खतरे की आहट

गौर करने वाली बात यह है कि नीति आयोग ने इंडियन हिमालयन रीजन (IHR) यानी भारतीय हिमालयी क्षेत्र में वॉटर स्प्रिंग्स के सूखने को लेकर दिसंबर 2017 में एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें बताया गया कि आईएचआर में करीब 50 फीसदी वॉटर स्प्रिंग्स सूख चुके हैं. इसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और हिमाचल प्रदेश में रहने वालों पर पड़ा, जो रोजमर्रा के कामों से लेकर सिंचाई तक के लिए निर्भर हैं.

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वहीं, इसका खमियाजा मैदानी इलाकों में रहने वालों को भी भुगतना पड़ रहा है. दरअसल, मैदानी इलाकों के लोग भी साल-दर-साल पानी की कमी से जूझ रहे हैं. नीति आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अलग-अलग पहाड़ी जिलों में पानी बचाने की मुहिम शुरू हुई.

पहाड़ों में कैसे बनते हैं वॉटर स्प्रिंग्स?

हिमाचल प्रदेश में काफी वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव करने में अहम भूमिका निभा चुके व्हील ग्लोबल फाउंडेशन संस्था के सदस्य और 1979 बैच के आईआईटियन योगेश आंदले ने बताया कि पहाड़ों में मौजूद चट्टानों के कहीं क्रैक होते हैं और कई जगह गैप होते हैं. बारिश होने पर इन्हीं क्रैक और गैप में पानी इकट्ठा हो जाता है. यही पानी पहाड़ों के अंदर से रिस-रिसकर एक जगह से बाहर निकलता है. इसी पानी को पहाड़ के लोग इस्तेमाल करते हैं, जिसे वॉटर स्प्रिंग कहा जाता है.

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हिमालयन रेंज में जगह-जगह इसी तरह के वॉटर स्प्रिंग्स बने हुए हैं, जो समय के साथ रखरखाव नहीं होने की वजह बंद होने लगे हैं. नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट इन्हीं वॉटर स्प्रिंग्स के सूखने की जानकारी दी है. अहम बात यह है कि काफी वॉटर स्प्रिंग ऐसे होते थे, जो सालभर पानी देते थे. जब बारिश होती तो ये रिचार्ज हो जाते और वॉटर फ्लो बढ़ जाता था. बता दें कि व्हील ग्लोबल फाउंडेशन को आईआईटी एल्युमिनाई ने भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद की प्रेरणा से बनाया था.

पहाड़ों में क्यों होने लगी दिक्कत?

योगेश आंदले के मुताबिक, वॉटर स्प्रिंग्स के सूखने की कई वजह हैं. इनमें पहाड़ों में होने वाला कंस्ट्रक्शन, डिवेलपमेंट के नाम पर जंगलों की कटाई आदि शामिल हैं. वहीं, रोजगार की वजह से पहाड़ में रहने वाले काफी लोग बड़े शहरों का रुख करने लगे हैं, जिसके चलते पहाड़ के उन हिस्सों को सफाई कम हो गई, जिससे पानी को गैप या क्रैक में समाने की जगह मिलती रहे. धीरे-धीरे यह समस्या बड़ी होती चली गई और तमाम वॉटर स्प्रिंग्स सूख गए.

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इसका नतीजा यह हुआ कि पहाड़ में रहने वाले भी पानी के लिए तरसने लगे और मैदानी इलाकों पर भी इसका असर नजर आने लगा. दरअसल, पहाड़ों से लगातार बहने वाला पानी ही नदियों की मदद से मैदानी इलाकों में आता है, जो खेतीबाड़ी से लेकर जीवनयापन के काम आता है. 

पानी को लेकर क्या कहते हैं बुजुर्ग?

बचपन में बुजुर्गों से सुना था कि पहाड़ है तो पानी हमेशा रहेगा.  शायद यही वजह रही कि किसी ने इस पानी की कद्र नहीं की और धीरे-धीरे यह पानी पहाड़ के लोगों से ही रूठने लगा. यह कहना है हिमाचल के मंडी जिले में बसे धर्मशाला की नरवाणा पंचायत के गांव सालिग में रहने वाली 75 साल की सत्या देवी का.

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उन्होंने बताया कि पहाड़ की बदहाली देखते-देखते मेरी उम्र गुजर चुकी है. एक वक्त था, जब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता था, लेकिन अब कई बार ऐसे हालात बन चुके हैं, जिससे पीने के लिए पानी मिलना ही मुश्किल होने लगा. ऐसे में सरकार ने वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव करने का प्रोसेस शुरू किया, जिससे गांव के लोगों को राहत मिली है. हालांकि, आसपास के सभी गांवों के लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे फ्यूचर में काफी दिक्कत हो सकती है.

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महिलाओं ने यूं उठाई जिम्मेदारी

खिड़कू गांव में रहने वाली बीना देवी ने बताया कि वॉटर स्प्रिंग्स की देखभाल उन्होंने एक ग्रुप बना रखा है, जिसमें 24 महिलाएं हैं. इसी तरह के ग्रुप अलग-अलग गांवों में हैं. इन ग्रुपों में शामिल महिलाएं अपनी-अपनी जिम्मेदारी के हिसाब से काम करती हैं. अगर नाले में गंदगी हो जाती है तो उसे साफ किया जाता है.

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हमारे बुजुर्गों ने बताया कि पानी की अहमियत कितनी ज्यादा है, जिसे हम लगातार फॉलो कर रहे हैं. यही बात हम अपने बच्चों को सिखाते हैं. इसके लिए फॉरेस्ट विभाग से लेकर तपोवन आदि के लोगों ने काफी मदद की. उन्होंने पानी की क्वालिटी से लेकर उसके फ्लो का ध्यान रखने का तरीका बताया. पानी की क्वालिटी चेक करने के लिए कई मशीनें भी दी गईं, जिनसे हर महीने पानी को चेक किया जाता है. वहीं, दूसरे गांव के लोगों को भी पानी बचाने की मुहिम के लिए जागरूक किया जाता है. इसके तहत सालिग, अंद्राड, खुलुई और बाडग आदि गांवों के लोगों को पानी की अहमियत और उसे बचाने का तरीका सिखाया गया. 

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कैसे बदलते चले गए हालात?

सालिग गांव में ही रहने वाले सुरेंद्र कुमार का कहना है कि वॉटर स्प्रिंग्स तो हम बचपन से इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन काफी वॉटर स्प्रिंग्स अब सूख चुके हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग अब नलों के पानी पर निर्भर रहते हैं. हालांकि, जो वॉटर स्प्रिंग्स रिवाइव हुए हैं, उनका खास ध्यान रखा जाता है. हर 15-20 दिन बाद वॉटर स्प्रिंग्स की सफाई की जाती है, जिससे उनमें पानी की दिक्कत न हो.

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गांव के लोग खुद भी वॉटर स्प्रिंग्स खोजते हैं और उन्हें खोलने की कोशिश करते हैं, जिससे भविष्य में पानी की दिक्कत न हो. अहम बात यह है कि गर्मियों के दौरान वॉटर स्प्रिंग्स ही लोगों को पानी देते हैं, क्योंकि उस दौरान नलों में पानी की सप्लाई कई बार नहीं हो पाती है. ऐसे में गांव के लोग ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने पर फोकस करने लगे हैं और वॉटर स्प्रिंग्स पर भी काम कर रहे हैं.

महिलाएं कैसे रखती हैं वॉटर स्प्रिंग्स का ध्यान?

अंद्राड़ पंचायत के गांव कंडी से ताल्लुक रखने वाले अनिल ने बताया कि वॉटर स्प्रिंग्स का ध्यान ज्यादातर महिलाएं ही करती हैं. दरअसल, घर में पानी की आपूर्ति का काम महिलाओं के जिम्मे ही होता है, जिसके चलते वॉटर स्प्रिंग्स की देखभाल भी महिलाएं ही ज्यादा करती हैं. पूरा गांव इन वॉटर स्प्रिंग्स की देखभाल करता है. हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझता है.

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अगर किसी को वॉटर स्प्रिंग में पानी का फ्लो कम दिखता है या गंदगी नजर आती है तो वह खुद ही सफाई कर देता है. वहीं, ग्रुप में जुड़ी हर महिला से हर महीने करीब 20 रुपये लिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल वॉटर स्प्रिंग्स की साफ-सफाई और उनके लिए पक्की जगह बनवाने में होता है.

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हर कोई समझता है अपनी जिम्मेदारी

खिड़कू गांव में रहने वाली वीना देवी ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने से वॉटर स्प्रिंग्स पर ध्यान दिया जाता रहा है, लेकिन धीरे-धीरे इस पर ध्यान देना बंद हो गया. ऐसे में वॉटर स्प्रिंग्स सूख गए. बाद में यह इलाका आर्मी के अंडर आ गया, जिसके चलते उन्होंने वॉटर टैंक बनाए, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने अपना सिस्टम यहां से खत्म कर दिया.

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इसके बाद सरकार और कई प्राइवेट संस्थाओं की मदद से वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव किया गया. वहीं, गांव के लोग भी पानी को बचाने के लिए आगे आए. इसके लिए बच्चे-बूढ़े हो या जवान, हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझता है और पानी का ध्यान रखता है.

ऐसे मजबूत किए गए वॉटर स्प्रिंग्स?

अनिल ने बताया कि पहले गांव में बावड़ी थी, लेकिन उसमें पानी ज्यादा नहीं टिकता था. ऐसे में वॉटर स्प्रिंग को पाइपों से जोड़ते हुए उनके मुहाने पर नल लगा दिए गए, जिससे पानी बर्बाद नहीं होता है. इसके लिए गांव के लोगों ने आपस में पैसा जुटाया और वॉटर स्प्रिंग के मुहाने को सीमेंटेड कराकर रिजर्व पॉइंट बनवा दिया, जिससे यह मजबूत हो गया. अगर कोई पैसा नहीं दे पाता है तो उनके पास मौजूद चीजें ली गईं. जैसे कुछ लोगों ने रेत दिया तो किसी ने ईंटें दीं. इस तरह हर किसी की मदद से रिजर्व पॉइंट तैयार किए गए.

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रिवाइवल के बाद भी सूख गए कई वॉटर स्प्रिंग्स

गांव के कुछ लोगों ने बताया कि कई वॉटर स्प्रिंग्स रिवाइवल के बाद भी सूख गए. इसकी वजह उनकी देखभाल न होने से लेकर जंगल में लगने वाली आग तक जिम्मेदार है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में तो लोगों ने वॉटर स्प्रिंग्स को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझी, लेकिन समय के साथ कुछ गांवों में जोश ठंडा पड़ता चला गया. इसका असर वॉटर स्प्रिंग्स पर भी नजर आया. कुछ वॉटर स्प्रिंग्स में पहले अच्छा-खासा वॉटर फ्लो था, लेकिन अब वे लगभग सूख चुके हैं. 

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कैसे शुरू हुआ वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव करने का काम?

योगेश आंदले ने बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस समस्या की गंभीरता का पता लगा. ऐसे में दिक्कत को दूर करने की कवायद शुरू हुई. इसके तहत सरकार, एनजीओ, एक्सपर्ट्स और कम्युनिटी को एकजुट किया गया. दरअसल, सरकार के पास साधन होते हैं और स्केल है, लेकिन कुछ कमियां भी हैं.

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एनजीओ के पास लोगों की समस्याएं सुनने की संवेदना है और उन्हें जोड़ने की ताकत है, लेकिन सरकार जैसा स्केल नहीं है. इनके अलावा कई एक्सपर्ट्स हैं, जिन्होंने हिमालय के स्प्रिंग स्ट्रक्चर से लेकर इलाके की जियोलॉजी और हाइड्रो-जियोलॉजी पर काफी रिसर्च की है. वहीं, लोकल कम्युनिटीज को भी साथ जोड़ा गया, क्योंकि उनके पास इन स्प्रिंग्स और प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने का अनुभव था. ऐसे में स्थानीय समुदायों को प्राथमिकता देते हुए ऐसा मॉडल बनाया गया, जिसमें इन सभी ने मिलकर वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव करने का बीड़ा उठाया.   

कितने वॉटर स्प्रिंग्स किए गए रिवाइव?

योगेश आंदले के मुताबिक, उनकी संस्था ने वॉटर स्प्रिंग्स रिवाइव करने के लिए 26 अप्रैल 2021 के दिन हिमाचल सरकार के साथ एक एमओयू साइन किया. इसके तहत संस्था ने सरकार को एक्सपर्ट्स की मदद से तमाम डेटा, समस्या और समाधान मुहैया कराया.

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योजना के तहत हिमाचल के चार जिलों मंडी, बिलासपुर, सोलन और कांगड़ा में कई गांवों को चुना गया और वहां आने वाले करीब 45 वॉटर स्प्रिंग्स पर काम शुरू किया गया. उस दौरान वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट ने अपने 10 वॉटर स्प्रिंग्स भी रिवाइव कराए. इस तरह 55 वॉटर स्प्रिंग्स को रिवाइव किया गया. 

आग से बर्बाद हो जाते हैं वॉटर स्प्रिंग्स

हिमाचल प्रदेश के सिद्धबाड़ी स्थित कॉर्ड (CORD) यानी चिन्मय ऑर्गनाइजेशन ऑफ रूरल डिवेलपमेंट में कार्यरत विशाल ठाकुर ने बताया कि कई बार जंगलों में आग लग जाती है, जिनकी वजह से वॉटर स्प्रिंग्स को नुकसान होता है. दरअसल, आग लगने की वजह से पेड़-पौधे जल जाते हैं, जिससे बारिश के पानी को रोकने के लिए मिट्टी पकड़ नहीं कर पाती है. ऐसे में पानी बह जाता है और उसका कोई भी फायदा गांव के लोगों को नहीं मिल पाता है.

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गांव के लोगों ने बताया कि कुछ शरारती तत्व जानवरों के लिए ताजी घास उगाने के मकसद से जंगल में आग लगा देते हैं. इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है. ऐसे लोगों की शिकायत पुलिस से भी की जाती है.

कॉर्ड ने ऐसे निकाला रास्ता

चिन्मय ऑर्गनाइजेशन ऑफ रूरल डिवेलपमेंट यानी कॉर्ड की नेशनल डायरेक्टर और ट्रस्टी डॉ. क्षमा मैत्रेय ने बताया कि हमारी संस्था ने लोगों को जल, जंगल, जमीन, जीवन, जीविका और जंतु के बारे में समझाया गया. जब गांवों में काम शुरू किया गया तो सबसे पहले वॉटर शेड पर काम किया गया. इसके बाद स्प्रिंग्स शेड्स पर फोकस किया, जिसमें रिचार्ज एरिया से लेकर डिस्चार्ज एरिया का ध्यान रखा गया. हाइड्रोजियोलॉजिस्ट्स की मदद से पहाड़ों में एक्यूफायर खोजे गए.

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इस काम में व्हील ग्लोबल फाउंडेशन संस्था, स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को जोड़ा गया. इसके बाद लोगों को वॉटर स्प्रिंग्स के प्रति जागरूक किया गया. उन्हें पानी की क्वालिटी और फ्लो के बारे में सिखाया गया. अब गांव के लोग ही इन वॉटर स्प्रिंग्स का ख्याल रखते हैं. समय-समय पर संस्था के कर्मचारी भी गांव के लोगों को पानी के बारे में समझाने के लिए भेजा जाता है. 

स्थानीय लोग भूल गए अपनी जिम्मेदारी

कॉर्ड में सीईओ नरेंद्र पॉल ने बताया कि पहाड़ी इलाकों के लोग इन नैचुरल रिसोर्स का ध्यान रखते हैं, लेकिन रोजगार आदि की वजह से इसमें कई बार लापरवाही भी होती है. वहीं, कई जगह सरकारी विभागों और प्रशासन से पर्याप्त मदद नहीं मिलती, जिसका असर वॉटर स्प्रिंग्स पर नजर आता है. अगर हम सभी ने मिलकर वॉटर स्प्रिंग्स का ख्याल नहीं रखा तो पानी की किल्लत मैदानी इलाकों में भी होगी. हम सभी को नैचुरल रिसोर्स के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी अगले 20 या 50 साल बाद या आने वाली पीढ़ियों को हम नैचुरल रिसोर्सेज दे पाएंगे.

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अगर ऐसा नहीं होता है तो सिर्फ मैदानी इलाके ही नहीं, बल्कि पहाड़ भी सूख जाएंगे. हर कोई पानी के लिए तरसता हुआ नजर आएगा. नीति आयोग की रिपोर्ट के बाद कॉर्ड समेत कई संस्थाएं और स्थानीय कम्युनिटीज पहाड़ी इलाकों में पानी को लेकर एक्टिव हुई हैं, जिसका असर नजर आने लगा है.

फॉरेस्ट विभाग भी लगातार कर रहा काम

धर्मशाला के नरवाणा ब्लॉक फॉरेस्ट विभाग के डिप्टी रेंजर प्रकाश चंद ने बताया कि धर्मशाला एरिया में जितने भी वॉटर स्प्रिंग्स हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए फॉरेस्ट विभाग भी लगातार काम कर रहा है. गांव के लोगों से मदद से इस काम की शुरुआत की गई. कई गांवों के लोग आज भी इन वॉटर स्प्रिंग्स की देखभाल करते हैं. नरवाणा पंचायत में भी कई वॉटर स्प्रिंग्स अब भी सही काम कर रहे हैं.

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लोगों को यह बात समझ आ रही है कि अगर इन वॉटर स्प्रिंग्स का ध्यान नहीं रखा गया तो भविष्य में पानी की किल्लत हो जाएगी. अगर कोई वॉटर स्प्रिंग फॉरेस्ट विभाग के अंतर्गत आता है तो उसे ठीक करने के लिए कदम उठाया जाता है और गांव के लोगों को उसका ध्यान रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स मीडिया फेलोशिप के तहत प्रकाशित की गई है.

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25,000 रुपये से कम में बेस्ट स्मार्टफोन! Independence Day Sale में मिल रहे हैं कई सारे बेहतरीन

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Nothing Phone (3a)

अगर आप ऐसे फोन की तलाश में हैं जो तेज़ नहीं, लेकिन स्मूद और क्लीन एक्सपीरियंस दे, तो Nothing Phone (3a) आपके लिए है. इसमें Android 15 का बगैर ब्लोटवेयर वाला अनुभव, 3 साल के अपडेट्स और 6 साल की सिक्योरिटी पैचेस मिलते हैं. फोन का डिज़ाइन प्रीमियम है और इसमें 50MP टेलीफोटो के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप भी मिलता है. यह कैमरा और साफ सॉफ्टवेयर के शौकीनों के लिए शानदार विकल्प है. Amazon Sale 2025 में इस फोन के 8+128GB वेरिएंट को 22,900 रुपये में लिस्ट किया गया है.

OnePlus Nord CE5

अगर आपको बार-बार चार्जिंग की झंझट नहीं चाहिए, तो OnePlus Nord CE5 एकदम सटीक चॉइस है. इसकी 7100mAh की बैटरी दो दिन आराम से चलती है और 80W SuperVOOC चार्जिंग के कारण चार्जिंग में समय भी नहीं लगता. OxygenOS का साफ इंटरफेस और Dimensity 8350 Apex चिप संतुलित परफॉर्मेंस देता है. हालांकि स्टीरियो स्पीकर्स और NFC नहीं हैं लेकिन बैटरी फर्स्ट यूज़र्स के लिए ये फोन नंबर वन है. फ्लिपकॉर्ट पर इस फोन के 8+128GB वेरिएंट की कीमत 23,969 रुपये रखी गई है.

Realme P3 Ultra

Realme P3 Ultra इस बजट में एक छुपा रुस्तम है. इसमें मिलता है शानदार 1.5K कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट, Gorilla Glass 7i और IP69 रेटिंग वो भी 25,000 रुपये से कम में. Dimensity 8350 Ultra प्रोसेसर और 6000mAh बैटरी के साथ 80W चार्जिंग इसे और भी दमदार बनाते हैं. कैमरा औसत है और Realme UI थोड़ा भारी लग सकता है लेकिन प्रीमियम लुक और दमदार डिस्प्ले के साथ ये फोन पैसा वसूल है. फ्लिपकॉर्ट सेल में इस फोन को 8+128GB वेरिएंट को 22,999 रुपये में लिस्ट किया गया है.

OnePlus Nord 4

OnePlus Nord 4 आमतौर पर 25,000 रुपये से ऊपर का फोन है लेकिन सेल या बैंक ऑफर में कभी-कभी यह इस बजट में आ जाता है. अगर मिल जाए तो यह डील मिस नहीं करनी चाहिए. Snapdragon 7+ Gen 3, 100W फास्ट चार्जिंग, मेटल बॉडी और 4 साल के अपडेट्स वाला OxygenOS इसे एक फ्लैगशिप जैसी फील देता है. थर्मल मैनेजमेंट और कैमरा थोड़े ठीक-ठाक हैं लेकिन ओवरऑल एक्सपीरियंस शानदार है. Flipkart पर इस फोन के 8+128GB मॉडल को 23,891 रुपये में लिस्ट किया है.

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डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी तारीफ में ऐसा क्या कहा, जो बिल क्लिंटन से होने

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान व्हाइट हाउस में उनकी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट की जमकर तारीफ की है. ट्रंप ने कैरोलिन की तारीफ करते हुए उनके चेहरे और उनके होंठों का भी जिक्र किया है. जिसके बाद से ही इस बात पर विवाद छिड़ गया है और यहां तक कि ट्रंप की ओर से की गई ये तारीफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी जमकर वायरल हो रही है.

इंटरव्यू में कैरोलिन लेविट के बारे में क्या बोले ट्रंप?

राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरव्यू में कैरोलिन लेविट के बारे में कहा, “यह उनका चेहरा है, उनका दिमाग है और उनके होंठ हैं, जिस तरह से वो हिलते हैं, लगता है कि कोई मशीनगन चल रही हो.” उन्होंने कहा, “वो एक स्टार है. दरअसल, वह एक बेहतरीन इंसान है. लेकिन मुझे नहीं लगता है कि किसी के पास कभी भी इतनी अच्छी प्रेस सेक्रेटरी रही है जितनी कैरोलिन है. उन्होंने शानदार काम किया है.”

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, छिड़ा विवाद

हालांकि, व्हाइट हाउस में अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से तारीफ करने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया. ट्रंप के इस बयान से सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है. यहां तक कई सोशल मीडिया यूजर्स उनकी तुलना पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से कर रहे हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूजर ने कमेंट किया, “इससे मोनिका लेविंस्की जैसे वाइब्स आ रहे हैं. यह कमेंट 1990 के दशक के उस स्कैंडल की ओर से इशारा करती है, जिसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और व्हाइट की इंटर्न मोनिका लेविंस्की शामिल थी.

वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “ट्रंप ने अपने ब्यूटी पेजेंट्स में, मार-ए-लागो क्लब के स्पा में, जेफरी एपस्टीन के जेट पर जैसे और कई जगहें पर शायद यही लाइन कई बार नाबालिग लड़कियों को रिझाने के लिए इस्तेमाल की होगी.” जबकि तीसरे यूजर ने कहा, “वो एक डरावना बूढ़ा आदमी है. उसे खुद समझ नहीं आ रहा है कि उसने अभी क्या कहा है.”

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Video: नीचे बैठा था युवक, सिर पर गिर गया चलता हुआ पंखा, हादसे का CCTV फुटेज वायरल

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Rajasthan News: राजस्थान यूनिवर्सिटी से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां कैंटीन की छत से एक पंखा अचानक गिर गया. इस दौरान वहां एक छात्र बैठा हुआ था, जिसे मामूली चोट आई है. पूरी घटना कैंटीन में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

छत का प्लास्टर टूटने की वजह से गिरा पंखा

घटना करीब 10 दिन पुरानी बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, भारी बारिश के कारण कैंटीन की छत का प्लास्टर पहले ही उखड़ चुका था. बावजूद इसके छत की मरम्मत नहीं करवाई गई. उसी कमजोर छत से पंखा गिरा और नीचे बैठे छात्र के बहुत पास जा गिरा. गनीमत रही कि पंखा छात्र के सिर पर नहीं गिरा, वरना गंभीर चोट या जान का खतरा हो सकता था.


वीडियो फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि छात्र फोन पर बात कर रहा था, तभी अचानक पंखा उसके सामने आकर गिरता है और वह घबरा कर उठ जाता है. मौके पर मौजूद अन्य छात्रों ने तुरंत उसकी मदद की और स्टाफ को जानकारी दी.

कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है. छात्र और अभिभावक अब कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं. छात्रों का कहना है कि पहले भी कई बार कैंटीन और हॉस्टल में खराब छत और दीवारों को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.

छात्र संघ ने प्रशासन से मांग की है कि कैंटीन की पूरी छत और इमारत की जांच कराई जाए और तुरंत मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई बड़ी दुर्घटना न हो. 

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TCS को एक झटके में 47000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान, रिलायंस और HDFC ने कर ली तगड़ी कमाई

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भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते आई गिरावट के चलते देश की कई कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा. आलम यह रहा कि दस सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से सात कंपनियों के टोटल मार्केट कैप में 1.35 लाख करोड़ की गिरावट आई. इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) सबसे ऊपर है. बीते हफ्ते बीएसई बेंचमार्क इंडेक्स में 863.18 अंक या 1.05 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई. 

इन कंपनियों को भी हुआ जबरदस्त घाटा 

TCS, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), इंफोसिस, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप कुल मिलाकर 1,35,349.93 करोड़ कम हुआ है. इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में उछाल आया. दोनों कंपनियों को सामूहिक रूप से 39,989.72 करोड़ रुपये का प्रॉफिट हुआ. 

करोड़ों का हो गया नुकसान 

इस दौरान TCS का वैल्यूएशन 47,487.4 करोड़ घटकर 10,86,547.86 करोड़ रह गया. भारती एयरटेल का मार्केट कैपिटल 29,936.06 करोड़ घटकर 10,74,903.87 करोड़ रह गया, जबकि बजाज फाइनेंस का मार्केट कैपिटल 22,806.44 करोड़ घटकर 5,44,962.09 करोड़ रह गया. इंफोसिस को भी 18,694.23 करोड़ का नुकसान हुआ, जिससे उसका वैल्यूएशन घटकर 6,10,927.33 करोड़ रह गया.

इनके भी मार्केट कैप में आई गिरावट 

इस तरह से SBI का भी मार्केट कैप 11,584.43 करोड़ घटकर 7,32,864.88 करोड़ रह गया. ICICI बैंक का वैल्यूएशन 3,608 करोड़ घटकर 10,50,215.14 करोड़ रह गया और LIC का वैल्यूएशन 1,233.37 करोड़ घटकर 5,59,509.30 करोड़ रह गया.

इन कंपनियों ने काटी मौज 

दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 32,013.18 करोड़ बढ़कर 5,99,462.97 करोड़ हो गया. HDFC बैंक का मार्केट कैप 5,946.67 करोड़ बढ़कर 15,44,025.62 करोड़ हो गया, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज का वैल्यूएशन 2,029.87 करोड़ बढ़कर 18,85,885.39 करोड़ हो गया. मार्केट वैल्यू के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप पर रही. इसके बाद HDFC बैंक, TCS, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, SBI, इंफोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, LIC और बजाज फाइनेंस का स्थान रहा.

शेयर मार्केट में भारी गिरावट 

बता दें कि पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी. ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते दलाल स्ट्रीट लाल निशान के साथ बंद हुआ.

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 585.67 अंक या 0.72 परसेंट टूटकर 80,599.91 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 203 अंक या 0.83 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई थी और यह 24,565.35 के लेवल पर बंद हुआ. इस दौरान सन फार्मा से लेकर डॉ रेड्डीज लैब, सिप्ला जैसे फार्मा स्टॉक और  ONGC व टाटा स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी 5 परसेंट तक की गिरावट आई थी. 

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ग्रैजुएशन की डिग्री चाहिए तो यहां लगा दें 10 पेड़, सरकार ने खुद बनाया यह है नियम

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ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते. लेकिन अगर आपको कहा जाए आप 10 पेड़ लगा देंगे. तो आपको ग्रेजुएशन की डिग्री मिल जाएगी. तब आप क्या कहेंगे. पेड़ों की घटती संख्या को देखते हुए एक देश में ऐसा अनोखा नियम बनाया गया है. जहां ग्रैजुएशन की डिग्री पाने के लिए छात्रों को कम से कम 10 पेड़ लगाना जरूरी है. सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से लागू किया है.

ताकि युवा पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दें.इस नियम के तहत छात्र यूनिवर्सिटी से डिग्री तभी हासिल कर सकते हैं जब वह पौधारोपण का प्रमाण दें. इसके पीछे मकसद है हर साल लाखों नए पेड़ लगाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना. यह कदम शिक्षा को सिर्फ किताबी नहीं, ज़मीनी स्तर पर ज़िम्मेदार भी बना रहा है.

फिलीपींस में ग्रेजुएशन के लिए लगाओ 10 पेड़ 

दुनिया के अलग-अलग देशों में ग्रेजुएशन की डिग्री के लिए अलग-अलग रूल बनाए गए हैं. लेकिन अगर फिलीपींस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करना है तो सिर्फ एग्जाम पास करना काफी नहीं. 10 पेड़ भी लगाने होंगे. वहां की सरकार ने एक अनोखा कानून लागू किया है. जिसके तहत हर छात्र को डिग्री के लिए पौधारोपण करना अनिवार्य है.

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इसका मकसद देश में तेजी से घटते फाॅरेस्ट एरिया को बचाना है. पहले जहां कुल फाॅरेस्ट कवर 70% था, अब वो सिर्फ 20% रह गया है. इसे देखते हुए सरकार ने हर साल 175 मिलियन से ज्यादा पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया है. पेड़ लगाना अब वहां डिग्री पाने की शर्त बन चुका है. बिना इस काम को पूरा किए आप डिग्री हासिल नहीं कर सकते हैं. 

साल 2019 में पास हुआ था नियम

फिलीपींस की संसद ने साल 2019 में  ‘Graduation Legacy for the Environment Act’ को सर्वसम्मति से पास किया था. इस कानून के तहत अब कॉलेज, हाई स्कूल और स्कूल स्तर के छात्रों को ग्रेजुएशन या प्रमोशन से पहले कम से कम 10 पेड़ लगाने होंगे. 

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सरकार ने इसके लिए मैनग्रोव जंगलों, सैन्य इलाकों और शहरी क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहां पौधारोपण किया जाएगा. इन पेड़ों की देखरेख की जिम्मेदारी स्थानीय सरकारी एजेंसियों को दी गई है. इस नियम का उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है. 

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अब कभी फोन नहीं चलाऊंगी! बच्ची की लत छुड़ाने के लिए घर वालों ने लगाया गजब का जुगाड़- वीडियो वाय

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मोबाइल फोन एक ऐसी लत है जो अगर बच्चों को लग जाए तो इसे छुड़ाना लगभग नामुमकिन होता है. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखने के बाद शायद आपकी ये सोच बदल जाए और आप बच्चों को इस लत से बाहर निकालने में कामयाब हो जाएं. जी हां, इंटरनेट पर एक मजेदार वीडियो तेजी से पैर पसार रहा है जिसमें एक छोटी सी बच्ची जिसकी आंखों में काजल लगा हुआ है वो रोए जा रही है और कह रही है कि अब से कभी फोन नहीं चलाऊंगी. अल्लाह मुझे माफ कर दो मैं कभी फोन इस्तेमाल नहीं करुंगी. वीडियो देखने के बाद आपकी हंसी छूट जाएगी.

मां बाप ने सेट कर दी बच्ची की फील्डिंग! वीडियो देख नहीं रुकेगी हंसी

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक छोटी सी बच्ची जोर जोर से रोए जा रही है, क्योंकि उसे लग रहा है कि फोन देखने की वजह से उसकी आंखें खराब हो चुकी है, जबकि यह सब मां बाप का सोचा समझा जुगाड़ था जिससे कि बच्ची डर जाए और फोन से दूर रहने लगे. दरअसल, पेरेंट्स ने रात को सोते हुए बच्ची की आंखों पर ढेर सारा काजल लगा दिया जिसके बाद बच्ची को बताया गया कि फोन देखने की वजह से तेरी आंखों में कीड़े पड़ गए हैं और अब डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा. जब बच्ची ने अपना चेहरा आईने में देखा तो वो जोर जोर से रोने लगी.


अल्लाह से रो रोकर दुआ करने लगी बच्ची

वीडियो में मां बाप बच्ची से कह रहे हैं कि बोल अब फोन चलाएगी? अल्लाह से तौबा करो और कहो कि अल्लाह अब मैं फोन नहीं चलाऊंगी मुझे ठीक कर दीजिए. जिसके बाद मासूम बच्ची दुआ में हाथ उठाकर अल्लाह से दुआ करती है कि मुझे ठीक कर दो मैं अब फोन नहीं चलाऊंगी. मां बाप उसे बार बार डरा रहे हैं कि तेरी आंखों में फोन देखने की वजह से कीड़े पड़ गए हैं और अब डॉक्टर को दिखाना पड़ेगा.

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यूजर्स ले रहे मजे

वीडियो को Shumail Qureshi नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…बिल्कुल ठीक किया, बच्चों को फोन से दूर रखा जाए. एक और यूजर ने लिखा…यहां तो पेरेंट्स ने ही फील्डिंग सेट कर दी है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा….मेरी बच्ची तो वीडियो देखकर ही डर गई है.

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Last Sawan Somwar 2025 Live: सावन अंतिम सोमवार व्रत कल, देखें पूजा का समय,जलाभिषेक विधि,शुभ योग

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ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

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Palak Muchhal’s Magical Journey: From Saiyaara to Wagah Border, Saving Little Hearts & Andaaz 2

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‘ओवल मैदान’ पर कितना है सबसे बड़ा रन चेज? आंकड़े देख खुशी से झूम उठेंगे भारतीय फैंस

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ओवल टेस्ट में जब भारत की पहली पारी 224 रनों पर सिमटी, तो लगने लगा जैसे अब तो मैच टीम इंडिया के हाथ से निकल चुका है. खैर मौसम में बदलाव हुआ, भारतीय गेंदबाजों ने इंग्लैंड को सिर्फ 23 रनों की बढ़त लेने दी. अब इंग्लिश टीम को 374 रनों का लक्ष्य मिला है, जिसके जवाब में बेन डकेट और जैक क्रॉली ने 50 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड को सधी हुई शुरुआत दिलाई. मगर सवाल है कि क्या इंग्लैंड इस विशाल दिखने वाले लक्ष्य को चेज कर सकता है? दरअसल आंकड़े बताते हैं कि ओवल मैदान में कभी 300 रनों का टारगेट चेज नहीं हुआ है. अगर इंग्लैंड ऐसा कर पाया तो यह ऐतिहासिक क्षण होगा.

ओवल मैदान में सबसे बड़ा रन चेज कितना है?

टेस्ट क्रिकेट में ओवल मैदान पर अब तक का सबसे बड़ा रन चेज सिर्फ 263 रन है, जो इंग्लैंड ने वर्ष 1902 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्राप्त किया था. आज वह मैच 123 साल पुरानी बात हो चला है. साल 1963 में वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड के खिलाफ 252 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया था. ओवल मैदान पर सबसे बड़े रन चेज की टॉप-5 लिस्ट में चार स्कोर 20वीं सदी के हैं. 21वीं सदी में अब तक ओवल मैदान पर सबसे बड़ा रन चेज 2024 में आया, जब श्रीलंका ने 219 रनों का टारगेट चेज कर इंग्लैंड को हराया था.

  • 263 रन – इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया – 1902
  • 252 रन – वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड – 1963
  • 242 रन – ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड – 1972
  • 225 रन – वेस्टइंडीज बनाम इंग्लैंड – 1988
  • 219 रन – श्रीलंका बनाम इंग्लैंड – 2024

आंकड़े यही दर्शाते हैं कि ओवल मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में कभी 263 रनों से ज्यादा का टारगेट चेज नहीं हुआ है. वहीं भारतीय टीम ने इंग्लैंड के सामने इससे भी 111 रन ज्यादा का लक्ष्य रखा है. स्टैट्स की मानें तो अब इंग्लैंड को कोई चमत्कार ही हार से बचा सकता है, लेकिन यह भी गौर करने वाली बात है कि इंग्लैंड टीम का बैजबॉल स्टाइल टीम इंडिया के लिए मुसीबत बन सकता है.

ओवल मैदान पर यह भारत का 16वां टेस्ट मैच है. वो अगर इंग्लैंड को हरा पाती है तो यह टीम इंडिया की यहां कुल तीसरी जीत होगी. इससे पहले भारत ने यहां 1971 और 2021 में परचम लहराया था.

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