10 साल बाद इन तकनीकों का होगा दुनिया पर राज! अपने आप को नहीं किया अपडेट तो रह जाएंगे पीछे

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World’s Future Technology: आज जिस तरह से तकनीकें तेज़ी से बदल रही हैं आने वाले 10 सालों में हमारी दुनिया की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. वो चीज़ें जो आज हमें भविष्य की कहानी लगती हैं, कल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा होंगी. आइए जानते हैं उन तकनीकों के बारे में जो अगले दशक में पूरी दुनिया पर राज कर सकती हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहले से ही हेल्थकेयर, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ बना चुका है. आने वाले समय में यह तकनीक और ज़्यादा स्मार्ट होगी. डॉक्टर की जगह AI से डायग्नोसिस, वकील की जगह केस स्टडी और यहां तक कि फिल्म या किताब लिखने तक में AI का इस्तेमाल आम हो जाएगा.

क्वांटम कंप्यूटिंग

अभी यह तकनीक शुरुआती दौर में है, लेकिन अगले 10 सालों में क्वांटम कंप्यूटर हमारी कंप्यूटिंग क्षमता को हजारों गुना बढ़ा देंगे. यह दवाइयों के रिसर्च, मौसम की सटीक भविष्यवाणी, अंतरिक्ष अन्वेषण और साइबर सुरक्षा के लिए क्रांतिकारी साबित होंगे.

5G से आगे 6G नेटवर्क

आज हम 5G की रफ्तार का अनुभव कर रहे हैं, लेकिन 10 साल बाद 6G तकनीक दुनिया को जोड़ने का सबसे तेज़ जरिया होगी. 6G से न सिर्फ़ इंटरनेट की स्पीड कई गुना बढ़ेगी बल्कि यह वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी को असली दुनिया जैसा अनुभव देगी.

रोबोटिक्स और ऑटोमेशन

आने वाले समय में रोबोट सिर्फ़ फैक्ट्री में नहीं, बल्कि हमारे घरों में भी साथी बन जाएंगे. खाना बनाने, बुजुर्गों की देखभाल करने और यहां तक कि दोस्त की तरह बातचीत करने वाले रोबोट आम दिखाई देंगे. इससे काम आसान होगा लेकिन रोजगार की चुनौतियाँ भी बढ़ेंगी.

बायोटेक्नोलॉजी और जीन एडिटिंग

CRISPR जैसी जीन एडिटिंग तकनीकें इंसानों की बीमारियों का जड़ से इलाज करने में मदद करेंगी. आने वाले सालों में हम जन्म से पहले ही कई आनुवंशिक बीमारियों को रोक पाएंगे. इससे हेल्थकेयर क्षेत्र में क्रांति आएगी और औसत आयु में भी वृद्धि होगी.

मेटावर्स और वर्चुअल रियलिटी

आज मेटावर्स गेमिंग और सोशल मीडिया तक सीमित है, लेकिन 10 साल बाद यह हमारी पढ़ाई, नौकरी और बिज़नेस का नया प्लेटफ़ॉर्म बनेगा. वर्चुअल क्लासरूम, डिजिटल ऑफिस और 3D शॉपिंग मॉल हमारे जीवन का हिस्सा होंगे.

स्पेस टेक्नोलॉजी और मार्स मिशन

अगले दशक में इंसानों की नज़र पृथ्वी से बाहर की दुनिया पर होगी. चांद और मंगल पर इंसानी बस्तियाँ बनाने की दिशा में तेज़ी से काम होगा. निजी कंपनियां जैसे SpaceX और Blue Origin इस बदलाव में अहम भूमिका निभाएंगी.

ग्रीन एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी

जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती है. आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रोजन ईंधन मुख्य स्रोत बनेंगे. इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन कारें आम हो जाएंगी जिससे प्रदूषण पर काबू पाया जा सकेगा.

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टैरिफ से बेखौफ इन टॉप 10 में से 5 कंपनियों के 60675 करोड़ बढ़े मार्केट कैप, जानें टॉप गेनर कौन

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बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी दर्ज की गई. छुट्टियों से छोटे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स 739.87 अंक यानी 0.92 प्रतिशत और निफ्टी 268 अंक यानी 1.10 प्रतिशत चढ़ा. इस दौरान सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के बाजार पूंजीकरण में सामूहिक रूप से 60,675.94 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. सबसे अधिक लाभ भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक को हुआ.

टॉप गेनर रहे एसबीआई, आरआईएल

समीक्षाधीन सप्ताह में भारतीय स्टेट बैंक का बाजार पूंजीकरण 20,445.82 करोड़ रुपये बढ़कर 7,63,095.16 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. एचडीएफसी बैंक का मूल्यांकन 14,083.51 करोड़ रुपये बढ़कर 15,28,387.09 करोड़ रुपये हो गया. इसी तरह इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण 9,887.17 करोड़ रुपये बढ़कर 6,01,310.19 करोड़ रुपये, भारती एयरटेल का मूल्यांकन 8,410.6 करोड़ रुपये बढ़कर 10,68,260.92 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 7,848.84 करोड़ रुपये बढ़कर 18,59,023.43 करोड़ रुपये रहा.

एलआईसी का मार्केट कैप घटा

वहीं, दूसरी ओर एलआईसी का बाजार पूंजीकरण 15,306.5 करोड़ रुपये घटकर 5,61,881.17 करोड़ रुपये रह गया. बजाज फाइनेंस की बाजार हैसियत 9,601.08 करोड़ रुपये घटकर 5,35,547.44 करोड़ रुपये हो गई. आईसीआईसीआई बैंक के मूल्यांकन में 6,513.34 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 10,18,982.35 करोड़ रुपये पर आ गया. टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 4,558.79 करोड़ रुपये घटकर 10,93,349.87 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का मूल्यांकन 3,630.12 करोड़ रुपये घटकर 5,83,391.76 करोड़ रुपये रह गया.

मार्केट कैप के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही. इसके बाद क्रमशः एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एलआईसी और बजाज फाइनेंस का स्थान रहा.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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कैसे पाकिस्तान के सम्पूर्ण सिंह बने हिंदी सिनेमा के गुलजार, जानें इनकी दिलचस्प कहानी

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हिंदी सिनेमा और साहित्य की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो समय के साथ फीके नहीं पड़ते, बल्कि और भी चमकते हैं. गुलजार उन्हीं में से एक हैं. उर्दू, पंजाबी, खड़ीबोली और हिंदी जैसी कई भाषाओं में उन्होंने जो कविताएं, गीत और कहानियां लिखी हैं, वो सीधे दिल में उतर जाती हैं. कल उनका बर्थडे हैं. ऐसे में हम आपको उनकी लाइफ की खासे बातें बताने जा रहे हैं.

पाकिस्तान में जन्में थे गुलजार

18 अगस्त 1934 को झेलम (अब पाकिस्तान) में जन्मे गुलजार, जिनका असली नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा है., आज भी अपनी सादगी, संवेदनशीलता और शब्दों की गहराई से लोगों को बांध लेते हैं. लेकिन अगर गुलजार की जिंदगी को किसी एक नजरिए से सबसे गहराई से समझा जा सकता है, तो वो है उनकी बेटी मेघना गुलजार का,एक सफल फिल्म निर्देशक के तौर पर पहचान बनाने वाली मेघना (जिनका प्यार का नाम बोस्की है) ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर बताया है कि उनके पिता ने सिर्फ एक महान लेखक या गीतकार की भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील अभिभावक की तरह भी जीवन जिया.


एक्ट्रेस राखी से रचाई थी शादी

गुलजार ने 1973 में अभिनेत्री राखी से शादी की थी. लेकिन जब उनकी बेटी बोस्की केवल एक साल की थीं, तब गुलजार और राखी अलग हो गए. अलग होने के बाद गुलजार ने मेघना की परवरिश में पूरी भूमिका निभाई. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2019 में मेघना ने भावुक होकर कहा था कि उनके पापा ने कभी उन्हें डांटा नहीं, लेकिन अनुशासन हमेशा बनाए रखा. गुलजार खुद मेघना को स्कूल के लिए तैयार करते, उनकी चोटी बनाते, जूते पॉलिश करते और समय निकालकर दोपहर साढ़े तीन बजे स्कूल से लेने भी जाते.

बेटी की अकेली की परवरिश

गुलजार ने ऐसा कोई काम नहीं छोड़ा जिससे मेघना को मां की कमी महसूस हो. उन्होंने बताया था कि गुलजार ने हमेशा उन्हें आजादी से जीने की छूट दी, लेकिन पढ़ाई को लेकर कभी समझौता नहीं किया. उनका एक ही नियम था, ‘पढ़ाई पूरी करो, उसके बाद जो मन करे वो करो..’ शायद यही वजह है कि मेघना आज खुद एक सफल निर्देशक हैं, जिन्होंने ‘राजी’, ‘छपाक’ और ‘सैम बहादुर’ जैसी फिल्मों के जरिए अपना हुनर दिखाया.


बंदिनी से हुई थी गुलजार के करियर की शुरुआत

गुलजार की शायरी, गीत और नज्मों में बंटवारे का दर्द, दिल्ली की गलियों की खुशबू, और गालिब की रचनाओं की छाया मिलती है. उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि वे खुद को ‘कल्चरली मुसलमान’ मानते हैं, क्योंकि उनकी सोच में हिंदी और उर्दू दोनों की मिलावट है. यह बात उनकी लेखनी में भी साफ झलकती है. उनकी शुरुआत बतौर गीतकार 1963 में बिमल रॉय की फिल्म ‘बंदिनी’ से हुई थी, जिसमें लिखा गया गाना ‘मोरा गोरा रंग लइले’ आज भी उतना ही मासूम और गहरा लगता है जितना शायद तब लगता होगा.

बॉलीवुड के इन गानों ने दी अलग पहचान

इसके बाद उन्होंने एक से एक खूबसूरत गीत लिखे. फेहरिस्त बहुत लंबी है लेकिन ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा नहीं’, ‘कजरारे कजरारे’ और ‘छैंया छैंया’ ये ऐसे तीन गाने हैं जो गुलजार की कलम के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराते हैं. उनकी लेखनी में दिल्ली की बल्लीमारान की गलियों से लेकर मुंबई की रेलगाड़ियों तक का सफर महसूस होता है.गुलजार की केवल लेखनी ही नहीं, उनकी आवाज भी दमदार है.


गुलजार ने टीवी के लिए भी किया काम

कई टेलीविजन विज्ञापनों और फिल्मों में उनके बोले डायलॉग किसी कविता की तरह लगते हैं. यही वजह है कि आज भी जब वह मंच पर कुछ बोलते हैं, तो लोग शांत होकर सिर्फ सुनते हैं और कह उठते हैं ‘शिकवा नहीं…’

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Global Prediction 2025: सूर्य, मंगल, शुक्र और बुध बदलेंगे सत्ता, युद्ध और बाज़ार की दिशा…

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Prediction 2025: 20 अगस्त से 20 सितंबर 2025 तक का समय साधारण नहीं है. इस कालखंड में सूर्य, शुक्र, बुध और मंगल अपनी चाल बदलेंगे और इनके साथ गुरु, शनि, राहु–केतु और चंद्रमा भी निर्णायक स्थिति में रहेंगे. बृहद्पाराशर होरा शास्त्र स्पष्ट करता है-

ग्रहाणां संचारतः नृणां नृपाणां च सुखदुःखं भवेत्.
अर्थात ग्रहों का संचार केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रों और शासकों की दशा बदलता है. यही कारण है कि अगस्त–सितंबर 2025 को Cosmic Reset कहा जा रहा है. यह महीना राजनीति, युद्ध, बाजार और जनजीवन-चारों पर असर डालेगा. आइए समझते हैं विस्तार से-

सिंह राशि में सूर्य की एंट्री (16 अगस्त – 17 सितंबर): 

सूर्य जब सिंह राशि (अपने स्वगृह) में प्रवेश करता है तो नेतृत्व और सत्ता को बल मिलता है. बृहद संहिता (अध्याय 3) में कहा गया है-
सिंहे रवौ स्थिते प्रजाः राजानं नमन्ति.
अर्थात सिंह में सूर्य होने पर जनता शासक की ओर झुकती है. इसका प्रमाण 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में मिला, जहां उन्होंने Mission Sudarshan Chakra और आर्थिक सुधारों की घोषणा की.

यूरोप भी अमेरिका पर निर्भरता घटाकर अपनी सैन्य नीति बना रहा है. सिंह में सूर्य का तर्क यही है कि नेता अधिक आत्मविश्वासी और निर्णायक होते हैं, पर विरोधी ताकतें भी संगठित होती हैं.

तुला में मंगल ग्रह का गोचर (13 सितंबर से): युद्ध की स्थिति या कूटनीति सफल?

मंगल जब तुला में प्रवेश करता है, तो संतुलन और साझेदारी की राशि में युद्ध का कारक प्रवेश करता है. बृहतजातक कहता है-
मङ्गले सीमायां क्लेशः.
अर्थात मंगल सीमाओं और समझौतों में क्लेश लाता है. 15 अगस्त को हुई ट्रम्प–पुतिन वार्ता का असफल रहना इसका संकेत है. भारत–पाकिस्तान सीमा और चीन के साथ LAC पर भी तनाव बढ़ सकता है.

मंगल का तुला गोचर बताता है कि इस अवधि में शांति की कोशिशें होंगी, लेकिन उनमें संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन हावी रहेगा. कूटनीति विफल हो सकती है और युद्ध की रेखाएं फिर से उभर सकती हैं. सैन्य शक्तियां, सैन्य संयुक्त अभ्यास, हथियार, उपकरण की खरीदारी बढ़ेंगी. समुद्र में सेनाओं की सक्रियता बढ़ेगी.

कर्क राशि में शुक्र का आना (21 अगस्त 2025 से): उपभोग और आर्थिक नीतियां होगी प्रभावित!

21 अगस्त को शुक्र कर्क राशि में प्रवेश कर गजलक्ष्मी योग बनाएगा. फलदीपिका कहता है-
शुक्रे समृद्धिर्भवति, वाणिज्यं वर्धते.
अर्थात शुक्र व्यापार और वैभव को बढ़ाता है. इस दौरान भारत में EV और रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. चीन को रियल एस्टेट संकट से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन यह स्थायी नहीं होगी.

अमेरिका और यूरोप में लग्जरी और FMCG ब्रांड्स में उछाल संभव है. शुक्र का यह गोचर आर्थिक समृद्धि का आभास देगा, लेकिन राहु–केतु और मंगल आगे अस्थिरता पैदा करेंगे. यही वह समय है जब सरकारें आयात–निर्यात पर टैरिफ और टैक्स नीति सख्त कर सकती हैं.

बुध कर्क राशि में मार्गी और सिंह राशि में प्रवेश (11 अगस्त – 30 अगस्त): सूचना का विस्फोट!

बुध जब वक्री से मार्गी होकर सिंह में प्रवेश करता है, तो सूचना और संवाद का प्रवाह बढ़ता है. जातक पारिजात कहता है-
बुधे मार्गगते विद्या वाणिज्यं च बलं लभेत्.
भारत में इस दौरान स्टार्टअप्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI नीति को बढ़ावा मिलेगा. अमेरिका और यूरोप में साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कड़े कानून और मीडिया में बड़े खुलासे संभव हैं. सोशल मीडिया पर आंदोलनों की लहर उठ सकती है. यह बुध दर्शाता है कि तकनीकी विकास और सूचना का प्रवाह नेताओं और जनता दोनों की सोच और निर्णय को बदल देगा.

गुरु का मिथुन राशि में गोचर: राजनीति और प्राकृतिक संकट

गुरु इस समय मिथुन राशि और राहु के पुनर्वसु नक्षत्र में हैं. बृहत संहिता (वराहमिहिर) में गुरु का शुभ नक्षत्रों में होना धर्म और राज्य के लिए कल्याणकारी माना गया है.

भविष्य पुराण और बृहत संहिता दोनों पुनर्वसु को ‘सर्वपोषिणी’ शक्ति मानते हैं, यानी समाज को पुनः संबल देने वाली स्थिति के तौर पर इसे बताया गया है.

गुरु के पुनर्वसु नक्षत्र में आने पर जियो-पॉलीटिक्स और अर्थव्यवस्था में रीसेट और पुनर्जीवन की लहर उठती है. यह समय युद्ध या संघर्ष के बाद समझौते और संतुलन लाने वाला होता है. तकनीक और संचार क्षेत्र में पुराने विचारों का नए रूप में प्रयोग होगा.

जैसे- स्पेस इंटरनेट, 6G और साइबर सुरक्षा. सूचना युद्ध और प्रोपेगेंडा भी बढ़ेंगे. बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद IT, कृषि, सोना और धार्मिक-आर्थिक क्षेत्र मजबूत होंगे. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग नए संतुलन में आएंगे. कुल मिलाकर यह कालखंड राजनीति, तकनीक और बाजार-तीनों में पुनः उत्थान और नवजीवन का संकेत देता है. 

शनि मीन में: धीमी क्रांति और जनअसंतोष

शनि मीन राशि में धीमी गति से चल रहा है. मेदिनी ज्योतिष कहता है-
शनेः संचारे योजनाः विलम्बन्ति, जनाः क्लिश्यन्ति.
इस समय अंतरराष्ट्रीय समझौते और समुद्री व्यापार धीमा होगा. तेल और गैस सेक्टर में दबाव रहेगा. भारत में विपक्ष सरकार पर हमले तेज करेगा. जनता को लग सकता है कि योजनाएँ धीमी हैं. शनि मीन गोचर दर्शाता है कि असंतोष धीरे-धीरे गहराता है और समय आने पर क्रांति का रूप लेता है.

  • राहु–केतु कुंभ–सिंह अक्ष पर होने से युद्ध और शांति की खींचतान देखने को मिलती है. जनता भी भ्रमित रहती है.
  • राहु मेष में और केतु तुला में हैं. राहु यहां आक्रामकता का संकेत दे रहा, केतु ग्रह त्याग और टूटन की स्थिति को बता रहा है.
  • राहु कुंभ में में नेताओं को आक्रामक और युद्धप्रिय बनाता है.
  • केतु सिंह राशि साझेदारियों को कमजोर करता है.

यही कारण है कि रूस–अमेरिका वार्ता का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला, भारत–पाक सीमा विवाद और चीन का दक्षिण चीन सागर पर दबाव. यह स्पष्ट करता है कि अगस्त–सितंबर में युद्ध और शांति की रस्साकशी एक साथ चलेगी. नेताओं के लिए यहा समय चुनौतियों से भरा रहेगा.

चंद्रमा का प्रभाव का जनता की मनोदशा पर दिखेगा प्रभाव

23 अगस्त अमावस्या: धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों पर जनता की तीखी प्रतिक्रिया की संभवना बन रही है.

7 सितंबर (पूर्णिमा): राजनीतिक असंतोष और जनआंदोलन तेज हो सकते हैं.

बृहद संहिता कहती है-
चन्द्रेण लोकभावनाः.
यानी चंद्रमा सीधे जनता की सोच और भावनाओं पर असर डालता है. यह बताता है कि इस दौरान जनभावना नेताओं को निर्णय बदलने पर मजबूर कर सकती है.

आर्थिक असर: टैरिफ, शेयर बाजार और उपभोक्ता

यह अवधि केवल राजनीति और युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी निर्णायक है.

  • शुक्र का कर्क राशि में गोचर से उपभोग में वृद्धि देखने मिलेगी जिससे सरकारें आयात पर नए टैरिफ लगा सकती हैं.
  • शनि देव का मीन राशि में गोचर संकेत दे रहा है कि तेल और गैस आयात महंगे हो सकते हैं.
  • गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में होने से प्राकृतिक संकट के बाद सुधार तेज होते हैं, कृषि और कमोडिटी मार्केट प्रभावित होंगे. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, जब गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में आता है, तो यह समय पुनर्जागरण (Revival) और पुनर्निर्माण (Reconstruction) का होता है.

उदाहरण से समझें भारत EV और सोलर प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क बढ़ाकर घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकता है. अमेरिका और यूरोप लग्जरी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं. चीन अपने उद्योग को बचाने के लिए निर्यात सब्सिडी दे सकता है. वहीं इस समय कार बनाने वाली कंपनियां सुरक्षा फीचरों पर अधिक फोकस करेंगी.

वैश्विक असर: कौन किस मोड़ पर?

  • भारत: सुधार और रक्षा नीति मज़बूत, मगर सीमा पर सतर्कता ज़रूरी.
  • रूस (पुतिन): सैन्य दबाव और ऊर्जा हथियार के रूप में उपयोग.
  • अमेरिका (ट्रम्प): आक्रामक कूटनीति, घरेलू राजनीति में विरोध.
  • यूरोप: अमेरिका पर निर्भरता घटाकर अपनी सुरक्षा नीति बनाना.
  • चीन: ताइवान और दक्षिण चीन सागर में दबाव, अर्थव्यवस्था में अस्थायी राहत.
  • पाकिस्तान: राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सीमा तनाव, सैना की ताकत बढ़ेगी. सत्ता में बड़े बदलाव के संकेत.

शास्त्र- तर्क और तथ्य जो कर रहे हैं कुछ बड़ा होने का इशारा

अव्वल यह विश्लेषण केवल भविष्यवाणी नहीं बल्कि शास्त्र सम्मत उद्धरण, तार्किक व्याख्या और वर्तमान घटनाओं के उदाहरण का संतुलन है. क्यों कि-

  1. सूर्य = सत्ता
  2. मंगल = युद्ध/कूटनीति
  3. शुक्र = उपभोग/बाजार/टैरिफ
  4. बुध = सूचना/टेक्नोलॉजी
  5. गुरु = राजनीति और आपदा
  6. शनि = विलंब और असंतोष
  7. राहु–केतु = युद्ध बनाम शांति
  8. चंद्रमा = जनभावना का कारक है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर ट्रंप संग मुलाकात से पहले जेलेंस्की के साथ बैठक करेंगे ये नेता, जाने

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अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक के बाद अब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की सोमवार (18 अगस्त, 2025) को अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले हैं. जेलेंस्की अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की तैयारी में जुटे हैं. वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के नेता रविवार (17 अगस्त, 2025) को बैठक करने वाले हैं, ताकि यूक्रेन की स्थिति को मजबूत किया जा सके, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कीव पर युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर सहमत होने का दवाब बनाया जा रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन की अलास्का में शुक्रवार (15 अगस्त, 2025) को हुई मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति पर यह दबाव है कि यूक्रेन किसी समझौते पर पहुंचे. वहीं, पुतिन ने यह इशारा किया है कि वे कब्जे वाले यूक्रेन के छोटे हिस्से को छोड़ सकते हैं, लेकिन उसके बदले में एक बड़े भू-भाग को मांग करेंगे.

पुतिन की कुछ शर्तें यूक्रेन के लिए किसी समझौते पर सहमति बनाने में मुश्किल पैदा कर रही हैं. इससे यूरोप के पिछले 80 साल में सबसे घातक युद्ध को खत्म करने पर बातचीत को और पेचीदा बना सकती है. यूक्रेन और रूस के युद्ध में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं.

कोएलिशन ऑफ द विलिंग की होगी वर्चुअल बैठक

कीव के समर्थक देशों के गठबंधन कोएलिशन ऑफ द विलिंग में शामिल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर फ्रेडरिच मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की रविवार (17 अगस्त, 2025) को 1300 GMT पर यूक्रेन मुद्दे पर वर्चुअल बैठक होगी.

यूक्रेन के लिए क्या चाहते यूरोपीय देश

यूरोप की ताकतें चाहती हैं कि ट्रंप, पुतिन और जेलेंस्की के बीच त्रिपक्षीय बैठक हो ताकि यूक्रेन भी अपने भविष्य को आकार देने में शामिल रह सके. इसके अलावा वे चाहते हैं कि यूक्रेन के लिए एक मजबूत सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित की जाए, इसमें अमेरिका की भूमिका अहम हो और अगर कभी जरूरत पड़े तो रूस पर दबाव बढ़ाया जा सके.

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अलास्का में नकली पुतिन से मिले थे ट्रंप? वीडियो देखकर यूजर्स ने जताया अंदेशा- सच्चाई कर देगी..

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दुनिया की राजनीति में कई मुलाकातें ऐसी होती हैं जिनके बाद हलचल थमने का नाम नहीं लेती. अलास्का में हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक भी कुछ ऐसा ही मंजर लेकर आई है. जब ये दोनों दिग्गज आमने-सामने आए तो कैमरों की फ्लैशें लगातार चमकती रहीं और सोशल मीडिया पर वीडियो की बाढ़ आ गई. लेकिन इस मुलाकात का असली तूफान वीडियो से नहीं बल्कि उन सवालों से उठा जो नेटिजन्स पूछने लगे. लोग कहने लगे कि ट्रंप से मिलने वाले असल में पुतिन थे ही नहीं बल्कि उनके हमशक्ल थे.

पुतिन के हमशक्ल से मिले थे ट्रंप?

अब सवाल ये है कि आखिर ये शक क्यों उठे. वीडियो में पुतिन सामान्य से ज्यादा हंसते और मुस्कुराते हुए दिखे. जबकि दुनिया उन्हें एक शांत और गंभीर नेता के रूप में जानती है. कई यूजर्स ने लिखा कि असली पुतिन इतनी आसानी से हंसते नहीं. कुछ ने तो यहां तक कह दिया कि जिस शख्स ने ट्रंप से हाथ मिलाया उसके गालों की हड्डियां अलग नजर आ रही थीं और उसकी शक्ल में हल्का सा फर्क साफ दिखा. ट्विटर और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म पर #PutinDouble और #FakePutin जैसे हैशटैग भी ट्रेंड करने लगे.

यूजर्स उठा रहे सवाल

अलास्का वाली मुलाकात ने एक बार फिर इस विवाद को ताजा कर दिया है. सोशल मीडिया पर लोग मजाक भी उड़ा रहे हैं कि असली पुतिन तो शायद मॉस्को में होंगे और अलास्का में सिर्फ उनका डुप्लीकेट भेज दिया गया. कुछ ने तो ट्रंप को भी निशाने पर ले लिया और लिखा कि वो पहचान ही नहीं पाए कि सामने खड़ा शख्स पुतिन नहीं बल्कि उनका हमशक्ल है.

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पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप!

वैसे ये पहली बार नहीं है जब पुतिन के हमशक्लों की चर्चा हुई हो. रूस और बाहर की मीडिया में कई बार ये बात उठ चुकी है कि पुतिन के कई डुप्लीकेट्स हैं, जो जरूरत पड़ने पर अलग-अलग जगहों पर उनकी जगह खड़े होते हैं. कई पुराने वीडियो और तस्वीरों में भी शक जताया गया था कि पुतिन के चेहरे में मामूली बदलाव नजर आते हैं, कभी कानों की बनावट अलग दिखती है तो कभी जबड़े की लाइन में फर्क नजर आता है. हालांकि पुतिन के करीबी लोगों ने हमेशा इन बातों को सिरे से नकारा है और कहा है कि पुतिन सिर्फ एक ही हैं और वही हर जगह मौजूद रहते हैं.

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PCB ने बाबर और रिजवान की कर दी घनघोर बेइज्जती, क्या अब संन्यास लेंगे दोनों खिलाड़ी?

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एक साल के भीतर क्या कुछ बदल सकता है, वह एशिया कप के लिए पाकिस्तानी स्क्वाड (Pakistan Squad For Asia Cup) ने साबित कर दिया है. बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान, दो बड़े नाम जो पाक टीम के बैटिंग लाइन-अप की रीढ़ की हड्डी के समान हुआ करते थे, उन्हें एशिया कप के लिए टी20 टीम में स्थान ही नहीं मिला है. एशिया कप में सलमान अली आगा (Asia Cup Pakistan Squad Captain) कप्तानी करेंगे बाबर और रिजवान को बाहर कर PCB ने उनकी घनघोर बेइज्जती कर दी है.

मोहम्मद रिजवान और बाबर आजम, दोनों पिछली चार टी20 सीरीज से पाक टीम में नहीं चुने गए हैं. कुछ सप्ताह पहले पाकिस्तान सुपर लीग में बाबर ने पूरे टूर्नामेंट में 288 रन बनाए, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 128 का रहा. यही स्ट्राइक रेट टी20 फॉर्मेट में उनका सबसे बड़ा दुश्मन बना रहा है. दूसरी ओर रिजवान ने 367 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट भी 139 से अधिक रहा, लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता की कमी टी20 टीम में उनके स्थान को भी ले डूबी है.

कोच माइक हेसन ने बताई वजह

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच माइक हेसन ने बताया कि बाबर आजम को कुछ क्षेत्रों में सुधार के लिए कहा गया है. खासतौर पर उन्हें स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ अपने स्ट्राइक रेट को बेहतर करने की सलाह दी गई है. माइक हेसन ने यह भी कहा कि बाबर अभी बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हैं.

मिल गए हैं रिप्लेसमेंट

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड लगभग एक साल पहले तक बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान पर सबसे ज्यादा भरोसा दिखाया करता था. मगर दोनों के खराब बल्लेबाजी आंकड़े उनके ड्रॉप होने का मुख्य कारण बने हैं. मोहम्मद रिजवान टी20 मैचों में ओपनिंग करते रहे हैं, उनकी जगह सैम अय्यूब एक बेहतरीन सलामी बल्लेबाज बनकर उभरे हैं. उनके जोड़ीदार के रूप में निरंतर साहिबजादा फरहान को मौका मिला है. वहीं बाबर आजम टी20 टीम में नंबर-3 पाए बैटिंग करते हैं, लेकिन उनकी जगह मोहम्मद हारिस को परखने का काम जारी है.

एशिया कप के लिए पाकिस्तान का स्क्वाड: सलमान अली आगा (कप्तान), अबरार अहमद, फहीम अशरफ, फखर जमान, हारिस रऊफ, हसन अली, हसन नवाज, हुसैन तलत, खुशदिल शाह, मोहम्मद हारिस, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद वसीम जूनियर, साहिबजादा फरहान, सैम अय्यूब, सलमान मिर्जा, शाहीन शाह अफरीदी और सूफियां मुकीम

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एक मिनट की देर हुई और पटवारी बनने से चूके कई कैंडिडेट्स, सख्ती देखकर हर कोई हैरान

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राजस्थान में आज यानी रविवार (17 अगस्त) को पटवारी के 3705 पदों के लिए लिखित परीक्षा हुई, जिसके लिए राज्य के 38 जिलों में 1035 परीक्षा केंद्र बनाए गए. इस भर्ती के लिए करीब साढ़े छह लाख कैंडिडेट्स ने आवेदन किया. बता दें कि सबसे ज्यादा परीक्षा केंद्र राजधानी जयपुर में हैं. दो पालियों में आयोजित इस परीक्षा में काफी सख्ती बरती गई. वहीं, तमाम कैंडिडेट्स ऐसे भी रहे, जो महज एक मिनट देर से पहुंचने के कारण पटवारी बनने से चूक गए. 

नकल रोकने के लिए दिखी काफी सख्ती

परीक्षा में किसी भी तरह की नकल या गड़बड़ी रोकने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने सख्त कदम उठाए. सभी केंद्रों पर बायोमैट्रिक अटेंडेंस और फेस स्कैनिंग की व्यवस्था की गई. इसके अलावा महिला कैंडिडेट्स को सलाह दी गई थी कि वे अपने अंगूठे पर मेहंदी न लगाएं. इससे बायोमैट्रिक प्रोसेस में दिक्कत आती है. कई केंद्रों पर सख्ती इतनी ज्यादा थी कि कैंडिडेट्स को जूते-चप्पल भी क्लासरूम के बाहर उतारने पड़े. बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज ने सोशल मीडिया के जरिए कैडिडेट्स को लगातार दिशा-निर्देश दिए और निष्पक्ष परीक्षा का भरोसा दिलाया.

परीक्षा केंद्रों पर लगीं लंबी कतारें, समय पर बंद हुए गेट

परीक्षा केंद्रों के बाहर सुबह से ही कैंडिडेट्स की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं. पहली पाली के लिए सुबह 8 बजे गेट बंद कर दिए गए. नियमों के मुताबिक, एक मिनट की देरी होने पर भी किसी को एंट्री नहीं दी गई. राजसमंद जिले में लाइन में खड़े एक दिव्यांग युवक को ठीक 8 बजे गेट बंद होने की वजह से अंदर नहीं जाने दिया गया. उसने काफी गुहार लगाई, लेकिन नियमों का हवाला देकर उसे प्रवेश से रोक दिया गया. कई कैंडिडेट्स का कहना है कि वे लाइन में खड़े थे, फिर भी उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया. कुछ कैंडिडेट्स ने बोर्ड पर सवाल उठाए और कहा कि इतने सख्त नियमों की वजह से कई मेहनती छात्र-छात्राओं का मौका छिन गया. 

Patwari Exam 2025: एक मिनट की देर हुई और पटवारी बनने से चूके कई कैंडिडेट्स, सख्ती देखकर हर कोई हैरान

कुछ केंद्रों पर नजर आई अव्यवस्था

कई परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था की शिकायतें भी सामने आईं. कुछ जगहों पर बैठने की व्यवस्था ठीक नहीं थी तो कहीं कैंडिडेट्स को समय पर सही जानकारी नहीं मिली. कुछ केंद्रों पर पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी भी देखी गई. कैंडिडेट्स ने बताया कि इतनी बड़ी परीक्षा के लिए बेहतर इंतजाम किए जा सकते थे. बोर्ड का कहना है कि वे हर शिकायत को गंभीरता से ले रहे हैं और इसमें सुधार लाने की कोशिश करेंगे.

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सरकार ने दी मुफ्त बस यात्रा की सुविधा

राजस्थान सरकार ने कैंडिडेट्स की मदद के लिए खास कदम उठाया. इसके तहत कैंडिडेट्स को 15 से 19 अगस्त तक रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई. इससे कैंडिडेट्स बिना किराया दिए अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सके. हालांकि, इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए उन्हें अपना प्रवेश पत्र दिखाना पड़ा. अहम बात यह है कि परीक्षा देने के बाद कैंडिडेट्स फ्री में ही अपने घर भी जा सकते हैं.

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चीन की नई तकनीक! अब रोबोट पैदा करेंगे बच्चें, जानें क्या है तकनीक और कितनी आएगी लागत

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Humanoid Robot: सोचिए, अगर एक दिन ऐसा आ जाए जब कोई रोबोट इंसानों की तरह गर्भ धारण कर सके और नौ महीने बाद बच्चे को सुरक्षित जन्म दे? यह अब सिर्फ़ कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की दिशा में पहला कदम है. चीन के शोधकर्ता एक ऐसे ह्यूमनॉइड प्रेग्नेंसी रोबोट पर काम कर रहे हैं जो आर्टिफ़िशियल गर्भाशय के ज़रिए भ्रूण को जन्म तक पाल सकेगा.

शोध के पीछे वैज्ञानिक

चीन की टेक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अनोखे प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. झांग क़ीफ़ेंग कर रहे हैं जो सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं. पारंपरिक इन्क्यूबेटर केवल प्रीमैच्योर शिशुओं को संभालने में मदद करते हैं लेकिन यह रोबोट गर्भाधान से लेकर डिलीवरी तक पूरे गर्भकाल का अनुभव देगा.

तकनीक का आधार

इस ह्यूमनॉइड के पेट के भीतर एक कृत्रिम गर्भाशय लगाया जाएगा. इसमें आर्टिफ़िशियल ऐम्नियोटिक फ़्लूइड भरा होगा जो भ्रूण के विकास के लिए इंसानी गर्भाशय जैसी परिस्थितियां प्रदान करेगा. पोषण की आपूर्ति एक विशेष ट्यूब के ज़रिए होगी बिल्कुल वैसे ही जैसे प्राकृतिक गर्भ में प्लेसेंटा शिशु को पोषण देता है.

पहले भी हो चुका प्रयोग सफल

डॉ. झांग के अनुसार यह विचार पूरी तरह नया नहीं है. कुछ साल पहले वैज्ञानिकों ने एक प्रिमैच्योर भेड़ के शिशु को “बायोबैग” नामक आर्टिफिशियल गर्भ में पाला था. वह न केवल ज़िंदा रहा बल्कि सामान्य रूप से विकसित हुआ. अब उनकी टीम इसी तकनीक को एक नए स्तर पर ले जा रही है जहां भेड़ से इंसानी-नुमा रोबोट तक का सफ़र तय किया जा रहा है.

प्रोटोटाइप और लागत

खबरों के मुताबिक इस प्रेग्नेंसी रोबोट का पहला प्रोटोटाइप अगले साल तक तैयार हो सकता है. इसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख युआन (लगभग 12.96 लाख रुपये) बताई जा रही है.

इतनी क्रांतिकारी खोज अपने साथ कई सवाल भी लाती है. क्या समाज रोबोट से जन्मे बच्चों को स्वीकार करेगा? क्या कानून उन्हें इंसानों जैसा दर्जा देंगे? रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुआंगदोंग प्रांत की सरकार के साथ इस विषय पर बातचीत शुरू हो चुकी है और नीतिगत ड्राफ्ट व कानूनी ढांचे तैयार किए जा रहे हैं.

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Video: छूकर निकल गई मौत, साइकिल सवार दो लड़कों को ट्रक ने मारी टक्कर, वीडियो देख सहम जाएंगे आप

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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां फिंगेश्वर नदी मोड़ पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल से जा रहे दो युवकों को टक्कर मार दी. हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक ट्रक के पहियों के नीचे आने से बाल-बाल बच गए. गनीमत रही कि चालक ने समय रहते ब्रेक लगा दी और बड़ा हादसा टल गया. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

ट्रक ड्राइवर ने साइकिल सवार को मारी टक्कर

जानकारी के अनुसार, दोनों युवक रोज की तरह साइकिल से अपने काम पर जा रहे थे. तभी अचानक सामने से तेज रफ्तार में आ रहा ट्रक बेकाबू हो गया और साइकिल से जा भिड़ा. टक्कर लगते ही दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे. एक पल के लिए ऐसा लगा कि ट्रक के पहिए युवकों को कुचल देंगे, लेकिन ड्राइवर ने तुरंत ब्रेक लगा दिया और उनकी जान बच गई.


हादसा इतना खतरनाक था कि वहां मौजूद हर शख्स कुछ पल के लिए सहम गया. लोग तुरंत दौड़कर युवकों को संभालने पहुंचे और उन्हें पास के अस्पताल ले गए. डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि दोनों युवकों को हल्की चोटें आई हैं और उनकी स्थिति खतरे से बाहर है.

सोशल मीडिया पर हुआ वीडियो

घटना का सीसीटीवी फुटेज इलाके में लगे कैमरे में कैद हो गया है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे ट्रक साइकिल को ठोकर मारता है और फिर युवक सड़क पर गिर जाते हैं. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर हादसे की भयावहता को महसूस कर रहे हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में अक्सर तेज रफ्तार वाहन गुजरते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है. समय रहते कार्रवाई न हुई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है. फिलहाल पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है.

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