रिलायंस की 48वीं आम बैठक में जियो IPO से लेकर एआई तक… मुकेश अंबानी ने किए बड़े ऐलान

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Reliance AGM 2025 Highlights: रिलायंस इंडस्ट्रीज की 48वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) आज दोपहर 2 बजे शुरू हो चुकी है आरआईएल के चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी संबोधन शुरू हो चुका है जो निवेशकों और बाजार दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इसमें मुकेश अंबानी ने यह ऐलान किया है कि अगले साल यानी 2026 की पहली छमाही में जियो आईपीओ लिस्ट होगा. इससे साथ ही उन्होंने एआई को आधुनिक युग का कामधेनु बताया है. मुकेश अंबानी ने कहा कि देश की जडीपी 10 प्रतिशत के रफ्तार से बढ़ सकती है. 

मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान

उन्होंने 48वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कृत्रिम मेधा (AI) को ‘कामधेनु’ बताते हुए कहा कि यह तकनीक उत्पादकता, दक्षता और मानवीय क्षमता को अकल्पनीय ऊंचाइयों तक ले जा रही है. अंबानी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, जीनोमिक्स और एआई का संगम दुनिया को “अत्यधिक प्रचुरता और अत्यधिक किफायत” वाले नए युग की ओर ले जा रहा है. उन्होंने इसे भारत के लिए “तुरंत उपलब्ध अवसर” बताया, न कि दूर का सपना.

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सहयोग ही साझा समृद्धि का रास्ता है. “आज एक देश की समृद्धि, दूसरे देशों की समृद्धि से गहराई से जुड़ी हुई है.” अंबानी ने बताया कि जियो अब एआई को नया विकास इंजन बनाने जा रहा है और खुदरा से लेकर टेलीकॉम तक हर बिज़नेस में इसका इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए रिलायंस ने नई इकाई ‘रिलायंस इंटेलिजेंस’ लॉन्च की है, जिसका लक्ष्य है – “एआई को हर व्यक्ति और हर जगह तक पहुँचाना.”

क्यों खास है यह AGM?

कंपनी ने एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गूगल और मेटा जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों के साथ साझेदारी की है. अंबानी ने कहा कि रिलायंस का उद्देश्य एआई को केवल तकनीकी शक्ति न मानकर, आम लोगों का जीवन बेहतर बनाने और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का है.

खास तौर पर शेयर बाजार की नजर रिलायंस रिटेल के संभावित IPO और जियो से जुड़े बड़े ऐलानों पर है. माना जा रहा है कि रिटेल यूनिट का IPO भारत के स्टॉक मार्केट के अब तक के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में से एक हो सकता है. पिछले दिनों SEBI ने नए IPO को लेकर कुछ नियमों में बदलाव किए थे. इसके बाद से बाजार में कयास तेज हो गए हैं कि रिलायंस रिटेल के IPO का रास्ता अब और साफ हो गया है.

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Trump Tariff: ‘उन्हें इतने असीमित अधिकार…’, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को कोर्ट ने बताया अवैध

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US Federal Appeals Court On Tariff Case: अमेरिका की फेडरल अपील कोर्ट (Federal Appeals Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगभग हर देश पर लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया. हालांकि अदालत ने इन टैरिफ को तुरंत खत्म नहीं किया है और प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय दिया है.

अदालत ने कहा कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया. कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट के 7 4 के फैसले में कहा गया, ‘ऐसा संभव नहीं लगता कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति देने का इरादा किया हो.’ न्यूयॉर्क की ट्रेड कोर्ट भी पहले मई में ऐसा ही फैसला सुना चुकी थी. हालांकि, फैसले से असहमत रहे जजों ने कहा कि यह कानून असंवैधानिक नहीं है और राष्ट्रपति को सीमित हद तक टैरिफ अधिकार दिए जा सकते हैं.

“लिबरेशन डे” पर लगाए थे टैरिफ

2 अप्रैल को ट्रंप ने ‘लिबरेशन डे’ घोषित कर सभी देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे. इनमें 50% तक का “रेसिप्रोकल टैरिफ” उन देशों पर था, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है, जबकि बाकी लगभग सभी देशों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ लगाया गया. बाद में भारत जैसे देशों पर और अतिरिक्त शुल्क लगाए गए, जो व्यापार घाटे से अलग वजहों से जुड़े थे.

ट्रंप बोले-निर्णय से अमेरिका बर्बाद हो जाएगा

अदालत के फैसले पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला कायम रहा तो यह ‘अमेरिका को तबाह कर देगा.’ ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘अगर ये टैरिफ हटे तो देश पूरी तरह आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा. हम अब किसी भी देश चाहे दोस्त हो या दुश्मन के अनुचित टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे. यह फैसला अमेरिका को बर्बादी की ओर ले जाएगा.’

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे ट्रंप

व्हाइट हाउस प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि ट्रंप ने पूरी तरह कानूनी तरीके से काम किया है और वे इस मामले में अंततः जीतेंगे. इस बीच अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने अदालत पर राष्ट्रपति के विदेशी नीति संबंधी अधिकारों में दखल का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही. न्याय विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर टैरिफ हटा दिए गए तो अमेरिका के लिए यह ‘आर्थिक बर्बादी’ साबित होगा. मौजूदा टैरिफ से राजस्व 159 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल की तुलना में दोगुना है.

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Google का बड़ा फैसला! अब नहीं डाउनलोड होंगे अनजाने ऐप्स, ऐसे बढ़ेगी यूजर्स की सेफ्टी, जानें कैस

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Android Apps: गूगल ने एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर ऐप इंस्टॉलेशन से जुड़े बड़े बदलाव का ऐलान किया है. सितंबर 2026 से केवल वही ऐप्स सर्टिफाइड एंड्रॉइड डिवाइसों पर इंस्टॉल किए जा सकेंगे जो वेरिफाइड डेवलपर्स द्वारा पंजीकृत होंगे. इसका मतलब है कि यूज़र्स अब अनजान या अप्रमाणित सोर्स से APK फाइल्स साइडलोड नहीं कर पाएंगे.

गूगल का कहना है कि यह कदम एंड्रॉइड को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है. अक्सर हैकर्स मालवेयर और धोखाधड़ी वाले ऐप्स इन्हीं APKs के ज़रिए फैलाते हैं. अब डेवलपर्स की पहचान अनिवार्य करने से उनकी जवाबदेही तय होगी और नकली नाम या फर्जी अकाउंट के पीछे छिपना मुश्किल हो जाएगा.

नया सिस्टम कैसे काम करेगा?

गूगल ने साफ किया है कि यह नीति ऐप्स की सामग्री की जांच नहीं करेगी बल्कि सिर्फ डेवलपर की पहचान को सत्यापित करेगी जैसे किसी आईडी चेक की तरह. इसके लिए डेवलपर्स को दो चरण पूरे करने होंगे:

  • डेवलपर को अपना पूरा नाम, पता, फोन नंबर और ईमेल देना होगा. संगठनों को D-U-N-S नंबर, आधिकारिक वेबसाइट और गवर्नमेंट आईडी जमा करनी होगी.
  • डेवलपर को ऐप का पैकेज नेम और ऐप साइनिंग कीज़ देकर उसके स्वामित्व का सबूत देना होगा.

जो डेवलपर पहले से Google Play Store पर पब्लिश कर रहे हैं उनके लिए यह प्रक्रिया लगभग पूरी मानी जाएगी और उनके ऐप्स ऑटोमेटिक रूप से रजिस्टर्ड हो जाएंगे. लेकिन जो Play Store से बाहर ऐप वितरित करते हैं उनके लिए एक नया Android Developer Console लॉन्च किया जाएगा.

प्राइवेसी को लेकर आश्वासन

शौकिया डेवलपर्स की चिंता को ध्यान में रखते हुए गूगल ने कहा है कि इस प्रक्रिया में ली गई व्यक्तिगत जानकारी पब्लिक नहीं की जाएगी. यह केवल पहचान वेरिफाई के लिए इस्तेमाल होगी.

कब लागू होगा नया नियम?

गूगल ने इस पॉलिसी को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का रोडमैप साझा किया है:

अक्टूबर 2025: चुनिंदा डेवलपर्स के लिए अर्ली एक्सेस शुरू होगा.

मार्च 2026: वेरिफिकेशन सभी डेवलपर्स के लिए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध होगा.

सितंबर 2026: ब्राज़ील, इंडोनेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड में यह अनिवार्य हो जाएगा.

2027 और आगे: धीरे-धीरे यह नियम पूरी दुनिया में लागू होगा.

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जाह्नवी कपूर की इन फिल्मों का ‘परम सुंदरी’ ने तोड़ा रिकॉर्ड, ओपनिंग डे रहा शानदार

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सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर की परम सुंदरी को लेकर काफी बज बना हुआ था. फिल्म से फैंस को काफी उम्मीद भी थी. अब ये फिल्म सिनेमाघरों पर रिलीज हो चुकी है और इसके पहले दिन का कलेक्शन भी सामने आ गया है. परम सुंदरी ने पहले दिन ठीक-ठाक बिजनेस किया है. उम्मीद थी कि ये फिल्म 8-10 करोड़ का कलेक्शन पहले दिन करने वाली है फिर भी सही कमाई कर ली है.

सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर ने लंबे समय से कोई भी हिट फिल्म नहीं दी है. दोनों को परम सुंदरी से काफी उम्मीदें हैं. फिल्म ने पहले दिन जितनी कमाई की है वीकेंड पर वो बढ़ने ही वाली है और एक अच्छा बार सेट कर सकती हैं. परम सुंदरी ने पहले ही दिन अपनी कई फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. आइए आपको इन फिल्मों के बारे में बताते हैं.

जाह्नवी की इन फिल्मों के टूटे रिकॉर्ड

सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक परम सुंदरी ने पहले दिन 7.25 करोड़ का कलेक्शन किया है. ये अर्ली डाटा है और ऑफिशियल आने तक थोड़ा बढ़ जाएगा. परम सुंदरी ने जाह्नवी कपूर की रूही (3.06 करोड़) , मिली (40 लाख), मिस्टर एंड मिसेज माही (6.85 करोड़) और उलझ (1 करोड़) का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. ऑफिशियल डाटा आने तक फिल्म शायद देवारा पार्ट 1 का भी रिकॉर्ड तोड़ सकती है क्योंकि दोनों में अभी ज्यादा फर्क नहीं है.

परम सुंदरी ने सिद्धार्थ मल्होत्रा की भी कई फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. परम सुंदरी ने सिद्धार्थ की 8 फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. अब आगे देखना होगा ये फिल्म कितने रिकॉर्ड तोड़ पाती है.

बता दें परम सुंदरी को तुषार जलोटा ने डायरेक्ट किया है. फिल्म में नॉर्थ के लड़के और साउथ की लड़की की लव स्टोरी दिखाई गई है. फिल्म के बजट की बात करें तो ये 40-50 करोड़ में बनकर तैयार हुई है. फिल्म का बजट ज्यादा नहीं है अगर फिल्म अच्छा कलेक्शन करने में लगी रहती है तो इसे तोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.

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IPL स्लैपगेट वीडियो जारी करने पर ललित मोदी और माइकल क्लार्क पर भड़की श्रीसंत की पत्नी

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आईपीएल इतिहास के सबसे विवादित मामलों में से एक “स्लैपगेट” को हुए अब 17 साल हो चुके हैं. हरभजन सिंह और श्रीसंत इस घटना को पीछे छोड़कर अपनी जिंदगी में आगे भी बढ़ गए हैं, लेकिन हाल ही में इस पुराने विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं, जब ललित मोदी और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज माइकल क्लार्क ने उस घटना का वीडियो सार्वजनिक कर दिया. जिसके चलते श्रीसंत की पत्नी ने दोनो के ऊपर जमकर गुस्सा निकाला.

मैदान पर क्या हुआ था?

ललित मोदी ने माइकल क्लार्क के पॉडकास्ट Beyond 23 Cricket में बातचीत के दौरान यह वीडियो जारी किया. इसमें वह वाकया दिखाई देता है जब मैच खत्म होने के बाद हरभजन ने श्रीसंत को थप्पड़ जड़ा था. मोदी ने बताया कि उस समय मैदान के कैमरे बंद हो चुके थे और सिर्फ उनका एक सिक्योरिटी कैमरा ही ऑन था. मैच खत्म होने के बाद दोनो टीम के खिलाड़ी हाथ मिला रहे थे. इसी बीच जब भज्जी और श्रीसंत सामने आए तो हरभजन ने उन्हें उलटे हाथ से चाटा मारा. इसके बाद उन्होंने हरभजन पर 11 मैचों के लिए बैन भी लगाया था.

श्रीसंत की पत्नी का फूटा गुस्सा

वीडियो सामने आने के बाद श्रीसंत की पत्नी भुवनेश्वरी गुस्से में आग बबूला हो गई. उन्होंने ललित मोदी और क्लार्क को लताड़ते हुए इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा,  “ललित मोदी और माइकल क्लार्क, आपको शर्म आनी चाहिए. आप सिर्फ सस्ती लोकप्रियता और व्यूज के लिए 2008 की घटना को उठा रहे हैं. श्रीसंत और हरभजन दोनों अब अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं, अब वे बच्चों के पिता हैं. ऐसे में पुराने जख्म कुरेदना बेहद अमानवीय और घिनौना काम है.”

भुवनेश्वरी ने आगे कहा कि श्रीसंत ने जीवन की चुनौतियों को पार कर अपनी गरिमा के साथ नई शुरुआत की है, लेकिन इस तरह की हरकतों से परिवार को फिर से पुराने सदमे का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने आगे कहा, “यह सिर्फ खिलाड़ियों को ही नहीं, बल्कि उनके मासूम बच्चों को भी चोट पहुंचा रहा है. बिना किसी गलती के उन्हें शर्मिंदगी और सवालों का सामना करना पड़ रहा है.”

“मुकदमा चलना चाहिए” – भुवनेश्वरी

अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “इतना घटिया और अमानवीय काम करने के लिए आप दोनो पर केस चलना चाहिए. किसी भी तरह का वीडियो श्रीसंत से उनकी गरिमा नहीं छीन सकता है. परिवारों और बच्चों को चोट पहुंचाने से पहले ईश्वर से डरना चाहिए.”

बेटी ने हरभजन को नमस्ते करने से किया था इनकार

हाल ही में श्रीसंत ने एक पॉडकास्ट में यह भी खुलासा किया था कि उनकी बेटी ने वर्षों बाद हरभजन से मुलाकात के दौरान उन्हें नमस्ते करने से इनकार कर दिया था. यह इस बात का संकेत है कि पुरानी घटना का असर अब भी परिवार पर गहरा है.

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मेहनत और लगन से तेलंगाना की ईको वॉरियर बनीं हरि चंदना, ऐसे जीता लोगों का दिल

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मेहनत, लगन और नई सोच अगर आपके अंदर है तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता है. साथ ही, इसकी मदद से समाज में बदलाव भी ला सकते हैं. कुछ ऐसा ही काम कर दिखाया है तेलंगाना की 2010 बैच की आईएएस हरि चंदना ने, जिनकी कहानी हर उस शख्स के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानता है. अपने जज्बे की वजह से हरि चंदना तेलंगाना के लिए मिसाल भी बन चुकी हैं.

ईको वॉरियर का खिताब

हरि चंदना अपने करियर में तमाम ऐसे काम कर चुकी हैं, जिनकी मदद से वह लोगों के दिलों पर राज करती हैं. दरअसल, जब वह ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) में जोनल कमिश्नर थीं, तब उन्होंने कई अनोखे और फायदेमंद प्रोजेक्ट शुरू किए. उन्होंने सबसे पहले प्लास्टिक कचरे से पावर टाइल्स बनाने की शुरुआत की, जिससे पर्यावरण को बचाने में मदद मिली. वहीं, महिलाओं की सहूलियत के लिए उन्होंने ‘She Toilets’ शुरू किए. इसके अलावा भारत का पहला पेट पार्क भी उनके ही दिमाग की उपज था. साथ ही, टेलीमेडिसिन सेवाओं के जरिए हेल्थ फैसिलिटीज को लोगों तक आसानी से पहुंचाया. हरि चंदना ने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कई प्रोजेक्ट शुरू किए, जिससे हजारों महिलाओं को रोजगार मिला. इसकी वजह से लोग उन्हें ईको वॉरियर के नाम से भी बुलाते हैं.

सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड मिले

कोविड-19 महामारी के दौरान हरि चंदना नारायणपेट जिले की कलेक्टर थीं. उस वक्त उन्होंने Aarunya महिला सहकारी संस्था की शुरुआत की, जिससे हजारों बुनकरों और कारीगरों को ई-कॉमर्स के बड़े प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया. इससे स्थानीय कारीगरों को बाजार मिला और उनकी कला को भी पहचान मिली. उस दौरान उन्होंने 4000 महिलाओं को मास्क बनाने का काम दिलवाया, जिससे एक साल में ₹50 लाख का मुनाफा हुआ. इस शानदार काम के लिए उन्हें ब्रिटिश काउंसिल के सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड से भी नवाजा गया.

अब मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

हरि चंदना इस वक्त हैदराबाद कलेक्टर पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जो उन्हें मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सौंपी. हरि चंदना का यह सफर हर किसी को संदेश देता है कि अगर इरादे नेक हों तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं. उनका मानना है कि सही मौके और मेहनत से सुशासन के साथ-साथ जनता की प्रगति भी संभव है. हरि चंदना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं, जो साबित करती हैं कि मेहनत और ईमानदारी से कुछ भी हासिल किया जा सकता है.

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इस भारतीय कंपनी पर टिकी Google और Meta की आस, AI पर काम करने के लिए मिलाया हाथ

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दुनियाभर में AI का दबदबा बढ़ता जा रहा है और बड़ी से बड़ी कंपनी भारत की ओर देख रही है. शुक्रवार को हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज की सालाना आम बैठक में गूगल और मेटा ने भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी का ऐलान किया है. रिलायंस की गूगल और मेटा के साथ हुई साझेदारी के तहत आम लोगों के साथ-साथ बिजनेसेस के लिए भी AI को तैयार किया जाएगा. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

जुकरबर्ग ने दिखाया सुपरइंटेलिजेंस का विजन

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बैठक के दौरान हर किसी के लिए पर्सनल सुपरइंटेलिजेंस का विजन शेयर किया, जो कंपनी के ओपन-सोर्स एआई मॉडल पर आधारित होगा. उन्होंने कहा कि अब AI सिस्टम खुद में सुधार कर रहे हैं. इससे यह लग रहा है कि सुपरइंटेलीजेंस हमारे पहले से मौजूद सिस्टम को बेहतर करेगी और हम वो चीजें बना सकेंगे, जिनकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि सुपरइंटेलिजेंस सशक्तिकरण का नया दौर शुरू कर सकती है. रिलायंस के साथ मेटा की साझेदारी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां भारतीय बिजनेसेस के लिए अपने ओपन-सोर्स AI मॉडल लाएंगी.

AI अपनाने में मदद करेगी गूगल- पिचई

बैठक के दौरान गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि AI की इस क्रांति में भारत की अहम भूमिका है और कंपनी इसके डिजिटल फ्यूचर के लिए काम करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि गूगल के लिए भारत हमेशा एक विशेष स्थान रहा है और यहां दुनिया के कई सबसे शानदार बिजनेस, तेजी से उभरता स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और अपार महत्वकांक्षाएं हैं. पिचई ने कहा कि गूगल रिलायंस और जियो के साथ मिलकर भारत के डिजिटल फ्यूचर में निवेश कर रही है. इन कंपनियों के साथ साझेदारी से करोड़ों लोगों तक सस्ता इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिली है. 

अब AI की बारी- पिचई 

पिचई ने अपने संबोधन में कहा कि अब AI की बारी है और दोनों कंपनियों के बीच साझेदारी का लक्ष्य छोटी से छोटी किराना दुकान से लेकर बड़ी कंपनियों तक को बदलने का है. उन्होंने कहा कि गूगल AI अपनाने में भारत की मदद करेगी. उन्होंने रिलायंस के साथ मिलकर जामनगर क्लाउड रीजन स्थापित करने का भी ऐलान किया है. यह खासतौर पर रिलायंस के लिए बना होगा और AI और कंप्यूटिंग में कंपनी की मदद करेगा.

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टैरिफ टेंशन के बीच सोना आज सस्ता हुआ या महंगा? जानें 29 अगस्त 2025 को अपने शहर का ताजा भाव

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Gold Price Today: पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में गिरावट के बाद एक बार फिर से धीरे-धीरे इसके दाम में इजाफा देखा जा रहा है. ट्रंप टैरिफ टेंशन के बीच शेयर बाजार में जहां शुक्रवार 29 अगस्त 2025 को शुरुआती कोराबार के दौरान तेजी देखी गई, वहीं दूसरी तरफ सोना की कीमतों में भी उछाल दिखा है. आज देश में 24 कैरेट सोना 1,00,261 रुपये प्रति 10 ग्राम की दर से बिक रहा है. जबकि 22 कैरेट सोना 94,060 रुपये और 18 कैरेट सोना 76,960 रुपये के भाव से उपलब्ध है.

गौरतलब है कि 24 कैरेट सोना जहां लोग निवेश के मकसद से खरीदते हैं तो वहीं 22 कैरेट और 18 कैरेट सोना ज्वैलरी बनाने के लिए लेते हैं. आइये जान लेते हैं आपके शहर में किस भाव से आज सोना बिक रहा है.

आपके शहर का ताजा भाव:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना 102,760 रुपये प्रति 10 ग्राम मिल रहा है तो वहीं 22 कैरेट सोना 94,210 रुपये जबकि 18 कैरेट सोना 77,090 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहा है.

इसी तरह से आर्थिक राजधानी मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, केरल और पुणे में आज 24 कैरेट सोने का भाव 1,02,610 रुपये प्रति 10 ग्राम है. जबकि इन जगहों पर 22 कैरेट सोना 94,060 और 18 कैरेट सोना 76,960 रुपये की दर से बिक रहा है.

कैसे तय होता है रेट?

सोना और चांदी के दाम रोज़ाना आधार पर तय किए जाते हैं और इसके पीछे कई कारक जिम्मेदार होते हैं. इनमें मुख्यतः निम्नलिखित कारण शामिल हैं. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर इन धातुओं की कीमत पर पड़ता है. अगर डॉलर की कीमत बढ़ती है या रुपया कमजोर होता है, तो भारत में सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं.

भारत में सोने का अधिकांश हिस्सा आयात किया जाता है. ऐसे में सीमा शुल्क (Import Duty), GST और अन्य स्थानीय टैक्स सोने की कीमतों को प्रभावित करते हैं. वैश्विक बाजार में उथल-पुथल (जैसे युद्ध, आर्थिक मंदी या ब्याज दरों में बदलाव) का सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ता है. जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक शेयर या अन्य अस्थिर संपत्तियों की बजाय सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों को चुनते हैं.

भारत में सोना केवल निवेश ही नहीं, बल्कि परंपरा और सांस्कृतिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है. शादी-ब्याह, त्योहार और शुभ अवसरों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. इसलिए मांग अधिक होती है, जिससे कीमतें प्रभावित होती हैं. सोना लंबे समय से महंगाई के मुकाबले बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प रहा है. जब महंगाई बढ़ती है या शेयर बाजार में जोखिम होता है, तो लोग सोने में निवेश करना पसंद करते हैं. यही कारण है कि इसकी मांग और कीमत हमेशा बनी रहती है.

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डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ पर लगा तगड़ा झटका, कोर्ट ने बताया अवैध; क्या बोले US राष्ट्रपति?

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 Trump on Tariff Dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अदालत के उस फैसले पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें उनकी ज्यादातर टैरिफ नीति को गैरकानूनी करार दिया गया. ट्रंप ने कहा कि उनकी टैरिफ पॉलिसी बरकरार है और वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सभी टैरिफ अब भी लागू हैं! एक पक्षपाती अदालत ने गलत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन आखिरकार जीत अमेरिका की ही होगी.’ उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ हटाए गए तो यह देश के लिए “पूर्ण आपदा” होगी, जिससे अमेरिका आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा.

‘टैरिफ ही हैं ताकत का हथियार’

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब विशाल व्यापार घाटा और अन्य देशों की अनुचित नीतियां सहन नहीं करेगा. उन्होंने कहा ,’लेबर डे वीकेंड पर हमें याद रखना चाहिए कि टैरिफ हमारे कामगारों और ‘मेड इन अमेरिका’ उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए सबसे बड़ा हथियार हैं. सुप्रीम कोर्ट की मदद से हम इन्हें देश के हित में इस्तेमाल करेंगे और अमेरिका को फिर से मजबूत बनाएंगे.’

राष्ट्रपति ने अधिकार से अधिक कदम उठाया’

वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का हवाला देकर टैरिफ लगाकर अपने अधिकार से आगे कदम उठाया. अदालत ने कहा, ‘कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में कई कदम उठाने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें टैरिफ या कर लगाने जैसी शक्ति शामिल नहीं है.’ इस फैसले से अप्रैल में लगाए गए रिसिप्रोकल टैरिफ और फरवरी में चीन, कनाडा व मेक्सिको पर लगाए गए कुछ शुल्क रद्द कर दिए गए हैं. हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए अन्य टैरिफ प्रभावित नहीं होंगे.

ट्रंप ने इन टैरिफ को 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत सही ठहराया था. यह कानून सामान्यत: आपातकाल में संपत्ति फ्रीज करने या प्रतिबंध लगाने के लिए इस्तेमाल होता है. ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने इसी कानून के तहत टैरिफ लगाए.

अदालत ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति देने का इरादा नहीं जताया था. यह फैसला पांच छोटे अमेरिकी व्यवसायों और 12 डेमोक्रेट शासित राज्यों की याचिका पर आया, जिसमें दलील दी गई थी कि संविधान के मुताबिक टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास.

 

 

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नमक और नींबू से पीले दांतों को करें साफ, ऐसे कर लें इस्तेमाल

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Home Remedies for Yellow Teeth: चेहरे की खूबसूरती में सबसे ज्यादा निखार मुस्कान से आता है. लेकिन अगर दांत पीले दिखाई दें, तो यह मुस्कान फीकी पड़ जाती है. यही वजह है कि लोग सफेद और चमकते दांत पाने के लिए तरह-तरह के टूथपेस्ट और महंगे ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके किचन में मौजूद नमक और नींबू ही दांतों की पीली परत को साफ करने में कारगर साबित हो सकते हैं?

डॉ. उपासना वोहरा बताती हैं कि सही तरीके से अगर नमक और नींबू का इस्तेमाल किया जाए, तो यह घरेलू नुस्खा दांतों की खोई चमक वापस ला सकता है. आइए जानते हैं इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका और इसके फायदे.

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नमक और नींबू क्यों हैं असरदार?

  • नमक में नेचुरल क्लीनिंग एजेंट होता है, जो दांतों की जमी हुई मैल और पीली परत को हटाने में मदद करता है.
  • नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड दांतों पर जमी गंदगी और दाग-धब्बों को साफ करता है और दांतों को चमकदार बनाता है.
  • दोनों का मिश्रण दांतों की सतह को प्राकृतिक तरीके से व्हाइटनिंग देता है.

नमक और नींबू से दांत साफ करने का तरीका

  • एक छोटी कटोरी में आधा चम्मच नमक लें.
  • इसमें कुछ बूंदें ताजे नींबू के रस की डालें.
  • इस पेस्ट को उंगली या ब्रश की मदद से हल्के हाथों से दांतों पर रगड़ें.
  • करीब 2–3 मिनट तक मसाज करने के बाद मुंह को साफ पानी से धो लें.
  • हफ्ते में 2–3 बार इसका इस्तेमाल करने से दांतों का पीलापन धीरे-धीरे कम होने लगता है.

इस्तेमाल करते समय रखें सावधानियां

  • नींबू में एसिड अधिक होता है, इसलिए इसका रोजाना इस्तेमाल दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है.
  • हमेशा हल्के हाथ से ही रगड़ें, जोर से घिसने से दांत संवेदनशील हो सकते हैं.
  • अगर दांतों में पहले से कोई समस्या (कैविटी या मसूड़ों में सूजन) है, तो इस नुस्खे को अपनाने से पहले डेंटिस्ट की सलाह जरूर लें.

ये नुस्खे भी हैं फायदेमंद

  • बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बनाकर दांत साफ करने से भी पीलापन कम होता है.
  • सरसों के तेल में नमक मिलाकर मसाज करना भी दांतों की चमक बढ़ाता है.
  • तुलसी और नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करने से भी दांत स्वस्थ और चमकदार बने रहते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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