ये देश इंस्टाग्राम-फेसबुक समेत टिकटॉक को करने वाला है बैन! जानें क्यों लिया इतना बड़ा फैसला

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ऑस्ट्रेलिया में आगामी चार महीनों में लागू होने जा रहे एक कानून के तहत 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के फेसबुक, स्नैपचैट, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया मंच का उपयोग करने पर प्रतिबंध लग जाएगा.

संघीय सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया कंपनियों को 10 दिसंबर तक इन नाबालिग उपयोगकर्ताओं के सोशल मीडिया खातों को हटाने और आयु सत्यापन सॉफ्टवेयर के माध्यम से इन्हें नए खाते बनाने से रोकने के लिए “उचित कदम” उठाने होंगे. इस कानून के तहत माता-पिता की अनुमति से भी बच्चों को इन सोशल मीडिया मंचों तक पहुंच नहीं दी जा सकेगी.

विवाद जारी लेकिन प्रतिबंध तय
इस फैसले को लेकर संभावित लाभ और नुकसान को लेकर देशभर में तीखी बहस हो रही है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवा स्वयं को व्यक्त करते हैं, अपनी पहचान बनाते हैं और सामाजिक जुड़ाव महसूस करते हैं. एक ऐसे समाज में, जहां हर पांच में से दो बच्चे खुद को अकेला महसूस करते हैं, यह जुड़ाव काफी महत्वपूर्ण हो सकता है. वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया की लत और इसका आनंद उठा पाने से वंचित रह जाने का अंदेशा बच्चों को इन सोशल मीडिया मंचों पर अत्यधिक समय बिताने के लिए प्रेरित करता है.

विशेषज्ञों के सुझाव
विशेषज्ञों ने माता-पिता के लिए पांच सुझाव साझा किए हैं, जिससे वे अपने बच्चों को 10 दिसंबर से लागू होने वाले इस प्रतिबंध के लिए तैयार कर सकें.

1) प्रतिबंध की तारीख दस दिसंबर तक प्रतीक्षा न करें-बच्चों के लिए सोशल मीडिया से अचानक दूरी बनाना झटका साबित हो सकता है. इसलिए माता-पिता को अभी से बच्चों के साथ इस विषय पर बातचीत शुरू करनी चाहिए. उन्हें बताएं कि यह प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है और इसका उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

2) सोशल मीडिया से धीरे-धीरे दूरी बनाई जाए-धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करने से बच्चों को बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में मदद मिलेगी. हर सप्ताह सोशल मीडिया पर बिताया समय 25 फीसदी तक कम किया जा सकता है और एक महीने में पूरी तरह से बंद किया जा सकता है.

3) हटाने की जगह विकल्प दें-सोशल मीडिया के विकल्प के रूप में सामूहिक गतिविधियां, सामूहिक खेल, रचनात्मक अभिरुचियां जैसे कला, संगीत, हस्तशिल्प या स्वयंसेवा जैसे कार्यों को शामिल किया जा सकता है. इससे बच्चों को सामाजिक जुड़ाव और अपनी पहचान व्यक्त करने के अवसर मिलेंगे.

4) ऑफलाइन संबंधों को बढ़ावा दें-बच्चों को सोशल मीडिया से इतर समुदाय में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित करें. ऑफलाइन समूह बनाना, जहां बच्चे आमने-सामने जुड़ सकें, एक सकारात्मक बदलाव हो सकता है. ऐसे समूह एक-दूसरे को सोशल मीडिया से दूर रहने में सहयोग कर सकते हैं.

5) खुद उदाहरण बनें-बच्चे अपने अभिभावकों के व्यवहार को देखकर सीखते हैं. माता-पिता को भी स्क्रीन टाइम सीमित करना चाहिए, आमने-सामने के संबंधों को प्राथमिकता देनी चाहिए और नियमित रूप से ऑफलाइन गतिविधियों में शामिल होना चाहिए.विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध एक अवसर हो सकता है, जिससे बच्चे डिजिटल जीवन और असल जीवन में संतुलन बनाना सीखें. हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं होगा, लेकिन समयपूर्व तैयारी से इसका असर कम किया जा सकता है.

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Video: बाउंड्री वाल और कंटीले तार, बावजूद शातिर चोर उठा ले गया साइकिल, हैरान कर देगा ये वीडियो

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Bicycle Theft: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक चोर बाउंड्री वाल पर लगे कंटीले तारों को पार कर बड़ी आसानी से साइकिल चोरी करके ले जाता दिख रहा है. यह पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में साफ कैद हो गई है. वीडियो सामने आने के बाद लोग हैरान हैं कि आखिर चोर कितनी चालाकी और बेखौफी से वारदात को अंजाम दे रहे हैं.

सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी चोरी हुई साइकिल

वीडियो में देखा जा सकता है कि रात का समय है और घर की बाउंड्री वाल पर कंटीले तार लगे हुए हैं. सामान्य तौर पर लोग मानते हैं कि ऐसी सुरक्षा व्यवस्था के बाद कोई भी घर या सामान सुरक्षित रहता है. लेकिन इस घटना में चोर ने कंटीले तारों की परवाह तक नहीं की और बिना किसी परेशानी के अंदर पहुंच गया. इसके बाद उसने घर के अंदर खड़ी साइकिल पर हाथ साफ किया और चुपचाप बाहर निकल गया.

इस घटना ने सोशल मीडिया पर सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. लोग कह रहे हैं कि चोरों के लिए अब कोई ताला या सुरक्षा इंतजाम मायने नहीं रखते. एक यूजर ने लिखा – “चोरों के लिए अब कोई ताला-चाभी नहीं है, वे सबकुछ तोड़ने का तरीका जानते हैं.” वहीं दूसरे यूजर ने इसे मजाक में लेते हुए कहा कि “चोर इंजीनियरिंग में पीएचडी कर चुके लगते हैं.”

सुरक्षा के लिए तकनीकी साधनों की है जरूरत

हालांकि, यह घटना कहां की है, इसकी अब तक कोई पुष्टि नहीं हो पाई है. लेकिन वीडियो देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि चोरी की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं और चोर अब हर सुरक्षा व्यवस्था को आसानी से पार कर ले रहे हैं.

लोगों का मानना है कि सिर्फ बाउंड्री वाल या कंटीले तार लगाना काफी नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिए तकनीकी साधनों जैसे अलार्म सिस्टम और गार्ड की भी जरूरत है. वहीं, कई लोगों ने पुलिस और प्रशासन से ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

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Video: मांगी भीख-मिली सीख… वृंदावन में भिखारियों से बातचीत करके मथुरा के डीम का वीडियो वायरल


‘परिणीता’ के ऑडिशन से परेशान होकर विद्या बालन ने फिल्ममेकर को दे दी थी गाली

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बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन ने फिल्म परिणीता से डेब्यू किया था. इस फिल्म को रिलीज हुए 20 साल पूरे हो चुके हैं. फिल्म के 20 साल पूरे होने की खुशी में प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा ने मुंबई में फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी थी. इवेंट में उन्होंने खुलासा किया कि कैसे विद्या को ये रोल मिला था जबकि कई बड़ी एक्ट्रेसेस ये रोल करना चाहती थीं.

विद्या बालन ने इस रोल के लिए कई सारे ऑडिशन दिए थे. विधू विनोद चोपड़ा ने कहा- ‘बहुत सारी एक्ट्रेस परिणीता करना चाहती थीं लेकिन प्रदीप सरकार ने कहा एक चैंबूर से नई लड़की है. तो मैंने कहा-इस चैंबूर की लड़की का टेस्ट लो. मैं ज्यादातक स्क्रीन टेस्ट के दौरान एक्टर्स से नहीं मिलता हूं. विद्या ने बहुत सारे टेस्ट दिए थे.’

फाइनल टेस्ट से पहले दी विद्या ने गाली
उन्होंने आगे कहा- ‘मैंने प्रदीप से कहा कि एक फाइनल टेस्ट करते हैं. इस प्रोसेस से विद्या इतनी थक चुकी थी कि वो फाइनल टेस्ट से पहले गाली बड़बड़ा रही थी. मैं उन्हें ये कहते हुए देख सकता था कि वो खुद को समझता क्या है. तब तक वो 20-25 टेस्ट दे चुकी थीं. मगर उसके बाद उन्होंने एक शानदार फाइनल टेस्ट दिया और वो जबरदस्त था. मैंने प्रदीप को कहा उसे तुरंत बुलाओ.’


परिणीता की स्पेशल स्क्रीनिंग की बात करें तो इसमें कई बड़े सितारे पहुंचे थे. रेखा, दीया मिर्जा, विद्या बालन, विधु विनोद चोपड़ा, श्रेया घोषाल और राजकुमार हिरानी पहुंचे थे. स्क्रीनिंग की एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें विद्या बालन रेखा के पैर छूती नजर आ रही हैं. दोनों का ये क्यूट मूमेंट खूब वायरल हो रहा है.

परिणीता की बात करें तो इसमें विद्या के साथ सैफ अली खान और संजय दत्त लीड रोल में नजर आए थे. वो स्क्रीनिंग में नहीं पहुंचे थे. इस फिल्म के गाने से लेकर कहानी तक हर चीज ने लोगों का दिल जीत लिया था.

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क्या भारत में MBBS करके अमेरिका में कर सकते हैं प्रैक्टिस, क्या है नियम?

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अमेरिका में डॉक्टर बनना हमेशा से ही भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा सपना रहा है. लेकिन यह सपना पूरा करना आसान नहीं है, क्योंकि वहां डॉक्टर बनने का रास्ता लंबा और काफी महंगा है. वहीं भारत में यह प्रक्रिया थोड़ी छोटी और किफायती है. आइए जानते हैं कि अमेरिका और भारत में डॉक्टर बनने का तरीका कितना अलग है और क्या भारतीय MBBS ग्रेजुएट बिना रेजिडेंसी किए अमेरिका में प्रैक्टिस कर सकते हैं.

अमेरिका में डॉक्टर बनने की लंबी राह

अमेरिका में डॉक्टर बनने के लिए सबसे पहले छात्र को चार साल का ग्रेजुएशन करना होता है. इसके बाद मेडिकल कॉलेज एडमिशन टेस्ट (MCAT) जैसे कठिन एंट्रेंस एग्जाम को पास करना जरूरी होता है. इसी स्कोर के आधार पर छात्रों को डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) कोर्स में एडमिशन मिलता है. यह कोर्स भी चार साल का होता है. यानी, अमेरिका में सिर्फ पढ़ाई और ट्रेनिंग पूरी करने में लगभग आठ साल लग जाते हैं.

भारत में डॉक्टर बनने का तरीका

इसके उलट भारत में 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद छात्र सीधे MBBS कोर्स में दाखिला ले सकते हैं. MBBS की अवधि 5.5 साल की होती है, जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है. इस लिहाज से भारत में डॉक्टर बनने में अपेक्षाकृत कम समय लगता है.

भारत का MBBS और अमेरिका का MD

वैसे देखा जाए तो भारत का MBBS और अमेरिका का MD, दोनों ही डिग्रियां मूल्य और मान्यता में बराबर मानी जाती हैं. लेकिन यहां एक बड़ा फर्क है—अमेरिका में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स (International Medical Graduates-IMGs) को तब तक मेडिकल प्रैक्टिस की इजाजत नहीं मिलती, जब तक वे अमेरिका में रेजिडेंसी प्रोग्राम पूरा न कर लें.

क्या बिना रेजिडेंसी अमेरिका में प्रैक्टिस संभव है?

यह सवाल अक्सर भारतीय छात्रों के मन में आता है कि क्या भारत से MBBS करने के बाद अमेरिका में बिना रेजिडेंसी किए प्रैक्टिस की जा सकती है. जवाब है—कुछ हद तक हां.

दरअसल, अमेरिका में इन दिनों डॉक्टरों की भारी कमी है. इसी वजह से कई राज्यों ने विदेशी डॉक्टरों के लिए नियमों में ढील दी है. ‘फेडरेशन ऑफ स्टेट मेडिकल बोर्ड्स’ (FSMB) के मुताबिक, अब कम से कम 18 राज्यों ने ऐसे प्रोग्राम बनाए हैं, जो कुछ इंटरनेशनल मेडिकल ग्रेजुएट्स को पूरी रेजिडेंसी किए बिना प्रैक्टिस की अनुमति देते हैं.

किन राज्यों में है यह सुविधा?

एनपीआर की एक रिपोर्ट के अनुसार, फ्लोरिडा, वर्जीनिया, विस्कॉन्सिन, इडाहो, मिनेसोटा और टेक्सास जैसे राज्य ऐसे डॉक्टरों को अस्थायी लाइसेंस दे रहे हैं, जिनके पास पहले से अपने देश में प्रैक्टिस करने का अनुभव और लाइसेंस है. हालांकि इसके लिए उन्हें यूएस मेडिकल एग्जाम पास करना जरूरी है. साथ ही उन्हें शुरुआती समय में निगरानी के तहत काम करना होता है.

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Video: बर्गर खा रहे थे फूड ब्लॉगर, फिर रेस्टोरेंट में हुआ कुछ ऐसा… कभी नहीं भूल पाएंगे, देखें

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Social Media Viral Video: अमेरिका के ह्यूस्टन के टेक्सास में एक भयावह घटना ने हर किसी को हिलाकर रख दिया. एक SUV कार का बैलेंस बिगड़ गया और वह एक रेस्तरां में घुस गई, जहां दो जाने-माने कंटेंट क्रिएटर्स यानी फूड ब्लॉगर खाना का आनंद ले रहे थे. इस दुर्घटना में दोनों क्रिएटर्स घायल हो गए, जिससे स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया. इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान हो गया है.

कार की तेज रफ्तार ने भारी तबाही मचाई

हादसे में घायल हुए लोकप्रिय यूट्यूबर्स नीना सैंटियागो और पैट्रिक ब्लैकवुड, जो अपने गैस्ट्रोनॉमिक कंटेंट के लिए मशहूर हैं. उस समय नीना और पैट्रिक अपने व्यूवर्स के लिए रेस्तरां के स्वादिष्ट खानों जैसे बर्गर, चिकन विंग्स, मैकरोनी और अन्य डिशेज का रिव्यू कर रहे थे, तभी एक कैमियोनेटा एट्रैवेसो SUV रेस्तरां की खिड़की तोड़ते हुए उनके टेबल की ओर बढ़ी.

चश्मदीदों के मुताबिक, वाहन की तेज रफ्तार ने भारी तबाही मचाई और दोनों यूट्यूबर्स को गंभीर चोटें आई. वायरल वीडियो में देखा गया कि टेबल पर सचा हुआ खाना बिखर गया और रेस्तरां में अफरा-तफरी मच गई.

रेस्तरां में मौजूद  ग्राहकों को मामूली चोटें आई

दुर्घटना के बाद नीना और पैट्रिक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने बताया कि उनका इलाज चल रहा है. उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर उनके जल्दी ठीक होने की दुआएं मांग रहे हैं. ह्यूस्टन पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है.

शुरूआती जानकारी के मुताबिक, कार ड्राइवर का बैलेंस खोना और तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है. रेस्तरां में मौजूद अन्य ग्राहकों और स्टाफ को भी मामूली चोटें आई हैं, लेकिन कोई जानलेवा स्थिति नहीं है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.


एशिया कप के लिए चुने गए 15 में से 7 प्लेयर्स लेफ्टी, 3 ऑलराउंडर, पढ़िए टीम इंडिया का वो प्लान ज

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भारतीय क्रिकेट टीम का अगला लक्ष्य एशिया कप जीतना है, जिसके लिए बीसीसीआई ने मंगलवार को टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है. टीम में 7 प्लेयर्स लेफ्ट हैंडर्स हैं, टीम में 3 ऑलराउंडर्स प्लेयर्स हैं. बल्लेबाजी और गेंदबाजी यूनिट भी शानदार नजर आ रही है. शुभमन गिल को उपकप्तान चुना गया है, जसप्रीत बुमराह भी टीम में शामिल हैं. हालांकि श्रेयस अय्यर और कई बड़े प्लेयर्स के न होने से कुछ फैंस नाराज हैं लेकिन बावजूद इसके ये टीम खिताब जीतने की प्रबल दावेदार है.

भारत का पहला मैच 10 सितंबर को यूएई के साथ है, उसके बाद 14 को पाकिस्तान के साथ और फिर ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच 19 सितंबर को ओमान के साथ है. भारत एशिया कप के सुपर 4 में आसानी से पहुंच जाएगी, जहां उसे अपने ग्रुप की एक और अन्य ग्रुप की बेस्ट 2 टीमों से चुनौती मिलेगी. दूसरे ग्रुप में अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और हांगकांग की टीम हैं. चलिए एक बार टीम इंडिया के स्क्वॉड में चुने गए 15 प्लेयर्स पर नजर डालते हैं.

भारतीय टीम में 7 लेफ्ट हैंडर्स

एशिया कप के स्क्वॉड में 7 प्लेयर्स ऐसे हैं, जो लेफ्ट हैंडर्स हैं. वो हैं- अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, अर्शदीप सिंह और कुलदीप यादव. इनमें से भारत की प्लेइंग 11 में 4 प्लेयर्स तो कम से कम खेलेंगे. विस्फोटक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा का खेलना तय हैं, वह पहली गेंद से बड़े हिट लगाने में माहिर हैं. अक्षर पटेल भी लगभग हर मैच में खेल सकते हैं, वह गेंदबाजी के साथ अच्छी बल्लेबाजी भी करते हैं और फील्डिंग में भी कमाल हैं.

शुभमन गिल के वापस आ जाने से वह अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग कर सकते हैं, ऐसे में संजू सैमसन मिडिल आर्डर संभाल सकते हैं. तिलक वर्मा तीसरे नंबर पर खेल सकते हैं, वह भी लेफ्ट हैंडर्स हैं और यूएई की पिचों पर वह अच्छा कर सकते हैं.

दुबई की पिच पर लेफ्ट हैंडर्स को मिल सकता है फायदा

ग्रुप स्टेज के शुरूआती 2 मैच भारत दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेलेगी, इसमें 14 सितंबर को होने वाला भारत पाकिस्तान मैच शामिल है. दुबई की पिच स्पिनर्स के लिए मददगार होती है, भारतीय टीम में अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती के रूप में अच्छे स्पिनर्स हैं. हालांकि यहां स्पिनर्स के खिलाफ लेफ्ट हैंडर्स अच्छा खेलते हैं, इसी वजह से टीम में इतने लेफ्टी होना अच्छी बात भी है.

स्पिनर्स को दुबई में काफी टर्न मिलता है, यहां रन बनाना आसान नहीं होता और बल्लेबाज यहां फंसते हैं लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज यहां स्पिनर्स की लाइन लेंथ बिगाड़ सकते हैं. तिलक वर्मा, अभिषेक शर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे शानदार बल्लेबाज हैं तो वहीं अक्षर पटेल भी अच्छी बल्लेबाजी करते हैं.

एशिया कप के लिए भारतीय टीम का स्क्वॉड

  • बल्लेबाज: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उप-कप्तान), अभिषेक शर्मा, जितेश शर्मा, संजू सैमसन, रिंकू सिंह, तिलक वर्मा
  • ऑलराउंडर: हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल, शिवम दुबे
  • गेंदबाज: जसप्रीत बुमराह,अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव.

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सभी WhatsApp यूज़र्स को पता होने चाहिए ये सीक्रेट सिक्योरिटी फीचर्स! नहीं तो खतरे में पड़ सकती है आपकी प्राइवेसी

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फिशिंग लिंक भेजने से लेकर सिम-स्वैप अटैक तक, ऐसे कई तरीके हैं जिनसे किसी का अकाउंट खतरे में आ सकता है. अगर सुरक्षा सेटिंग्स सही समय पर सक्रिय न की गईं तो आपकी निजी जानकारी गलत हाथों में जा सकती है. अच्छी बात यह है कि WhatsApp के अंदर ही कई ऐसे टूल मौजूद हैं जिन्हें कुछ ही मिनटों में एक्टिवेट करके अकाउंट को काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है.

फिशिंग लिंक भेजने से लेकर सिम-स्वैप अटैक तक, ऐसे कई तरीके हैं जिनसे किसी का अकाउंट खतरे में आ सकता है. अगर सुरक्षा सेटिंग्स सही समय पर सक्रिय न की गईं तो आपकी निजी जानकारी गलत हाथों में जा सकती है. अच्छी बात यह है कि WhatsApp के अंदर ही कई ऐसे टूल मौजूद हैं जिन्हें कुछ ही मिनटों में एक्टिवेट करके अकाउंट को काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है.

सबसे पहले ज़रूरी है कि दो-स्टेप वेरिफिकेशन चालू किया जाए. यह फीचर आपके अकाउंट पर एक तरह की अतिरिक्त दीवार खड़ी कर देता है, जिसमें हर बार नए डिवाइस पर लॉग-इन करने के लिए ओटीपी के साथ-साथ छह अंकों का पिन भी डालना पड़ता है. हैकर्स के लिए यह सुरक्षा को तोड़ पाना बेहद मुश्किल बना देता है. इसके अलावा, बायोमेट्रिक लॉक यानी फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का इस्तेमाल करना भी बेहद उपयोगी है. मान लीजिए किसी के हाथ में अचानक आपका फोन आ जाए, तब भी बिना आपकी पहचान के वह आपके चैट्स तक नहीं पहुंच पाएगा.

सबसे पहले ज़रूरी है कि दो-स्टेप वेरिफिकेशन चालू किया जाए. यह फीचर आपके अकाउंट पर एक तरह की अतिरिक्त दीवार खड़ी कर देता है, जिसमें हर बार नए डिवाइस पर लॉग-इन करने के लिए ओटीपी के साथ-साथ छह अंकों का पिन भी डालना पड़ता है. हैकर्स के लिए यह सुरक्षा को तोड़ पाना बेहद मुश्किल बना देता है. इसके अलावा, बायोमेट्रिक लॉक यानी फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का इस्तेमाल करना भी बेहद उपयोगी है. मान लीजिए किसी के हाथ में अचानक आपका फोन आ जाए, तब भी बिना आपकी पहचान के वह आपके चैट्स तक नहीं पहुंच पाएगा.

गोपनीयता के लिहाज़ से एक और प्रभावी फीचर है डिसअपीयरिंग मैसेजेस. इस विकल्प को ऑन करने पर चैट्स अपने आप निर्धारित समय—24 घंटे, 7 दिन या 90 दिन के बाद गायब हो जाते हैं. इससे संवेदनशील जानकारी लंबे समय तक फोन या क्लाउड पर सेव नहीं रहती और जोखिम कम हो जाता है.

गोपनीयता के लिहाज़ से एक और प्रभावी फीचर है डिसअपीयरिंग मैसेजेस. इस विकल्प को ऑन करने पर चैट्स अपने आप निर्धारित समय—24 घंटे, 7 दिन या 90 दिन के बाद गायब हो जाते हैं. इससे संवेदनशील जानकारी लंबे समय तक फोन या क्लाउड पर सेव नहीं रहती और जोखिम कम हो जाता है.

इसी तरह, बैकअप पर ध्यान देना भी जरूरी है. अक्सर यह समझा जाता है कि WhatsApp चैट्स सुरक्षित हैं क्योंकि वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं लेकिन जब वही बैकअप क्लाउड में सेव होता है तो खतरा बना रहता है. यदि आप बैकअप्स पर भी एन्क्रिप्शन चालू कर दें और मजबूत पासवर्ड सेट करें तो कोई और आपकी पुरानी बातचीत तक नहीं पहुंच सकता.

इसी तरह, बैकअप पर ध्यान देना भी जरूरी है. अक्सर यह समझा जाता है कि WhatsApp चैट्स सुरक्षित हैं क्योंकि वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं लेकिन जब वही बैकअप क्लाउड में सेव होता है तो खतरा बना रहता है. यदि आप बैकअप्स पर भी एन्क्रिप्शन चालू कर दें और मजबूत पासवर्ड सेट करें तो कोई और आपकी पुरानी बातचीत तक नहीं पहुंच सकता.

अंत में, प्रोफ़ाइल प्राइवेसी कंट्रोल्स को नज़रअंदाज़ करना गलती साबित हो सकता है. यह फीचर आपको तय करने की सुविधा देता है कि आपकी प्रोफ़ाइल फोटो, आखिरी ऑनलाइन स्थिति, ‘अबाउट’ और स्टेटस जैसी जानकारियां कौन देख पाए. अनजान लोगों से अपनी जानकारी छुपाना हमेशा बेहतर होता है क्योंकि छोटी-सी डिटेल भी गलत मकसद से इस्तेमाल की जा सकती है.

अंत में, प्रोफ़ाइल प्राइवेसी कंट्रोल्स को नज़रअंदाज़ करना गलती साबित हो सकता है. यह फीचर आपको तय करने की सुविधा देता है कि आपकी प्रोफ़ाइल फोटो, आखिरी ऑनलाइन स्थिति, ‘अबाउट’ और स्टेटस जैसी जानकारियां कौन देख पाए. अनजान लोगों से अपनी जानकारी छुपाना हमेशा बेहतर होता है क्योंकि छोटी-सी डिटेल भी गलत मकसद से इस्तेमाल की जा सकती है.

साइबर अपराधी लगातार नई तरकीबें निकालते रहते हैं लेकिन इन पांच सरल बदलावों के साथ आप अपने WhatsApp अकाउंट को कहीं अधिक मज़बूत बना सकते हैं. हर भारतीय यूज़र के लिए यह ज़रूरी है कि इन सेटिंग्स को तुरंत एक्टिव करे क्योंकि यही डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी को बचाने का सबसे आसान तरीका है.

साइबर अपराधी लगातार नई तरकीबें निकालते रहते हैं लेकिन इन पांच सरल बदलावों के साथ आप अपने WhatsApp अकाउंट को कहीं अधिक मज़बूत बना सकते हैं. हर भारतीय यूज़र के लिए यह ज़रूरी है कि इन सेटिंग्स को तुरंत एक्टिव करे क्योंकि यही डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी को बचाने का सबसे आसान तरीका है.

Published at : 20 Aug 2025 10:43 AM (IST)

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ये 5 लक्षण दिखें तो समझ जाएं बॉडी से कम हो रहा प्रोटीन, तुरंत करें डॉक्टर को कॉल

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प्रोटीन की कमी का पहला संकेत सूजन है. हाथ, पैर या पेट में सूजन दिख सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटीन खून में फ्लूड को संतुलित रखता है. इसकी कमी होने पर पानी टिश्यू में जमा होने लगता है और शरीर फूल जाता है.

प्रोटीन की कमी का पहला संकेत सूजन है. हाथ, पैर या पेट में सूजन दिख सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रोटीन खून में फ्लूड को संतुलित रखता है. इसकी कमी होने पर पानी टिश्यू में जमा होने लगता है और शरीर फूल जाता है.

प्रोटीन सिर्फ मांसपेशियों को नहीं बनाता, यह दिमाग को भी सही रखता है. इसमें मौजूद अमीनो एसिड दिमाग के केमिकल्स (जैसे डोपामिन, सेरोटोनिन) बनाने में मदद करते हैं. इनकी कमी होने पर इंसान चिड़चिड़ा, उदास और डिप्रेस महसूस कर सकता है.

प्रोटीन सिर्फ मांसपेशियों को नहीं बनाता, यह दिमाग को भी सही रखता है. इसमें मौजूद अमीनो एसिड दिमाग के केमिकल्स (जैसे डोपामिन, सेरोटोनिन) बनाने में मदद करते हैं. इनकी कमी होने पर इंसान चिड़चिड़ा, उदास और डिप्रेस महसूस कर सकता है.

अगर आप पूरी नींद लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करते हैं तो इसका कारण प्रोटीन की कमी हो सकती है. प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देने वाले हार्मोन और एंजाइम बनाने में जरूरी है. इसकी कमी से कमजोरी, सुस्ती और दिमागी थकान बढ़ जाती है.

अगर आप पूरी नींद लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करते हैं तो इसका कारण प्रोटीन की कमी हो सकती है. प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देने वाले हार्मोन और एंजाइम बनाने में जरूरी है. इसकी कमी से कमजोरी, सुस्ती और दिमागी थकान बढ़ जाती है.

प्रोटीन में मौजूद केराटिन और कोलेजन बाल, स्किन और नाखून के लिए बहुत जरूरी हैं. जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता तो बाल गिरने लगते हैं, नाखून टूटते हैं और त्वचा रूखी हो जाती है.

प्रोटीन में मौजूद केराटिन और कोलेजन बाल, स्किन और नाखून के लिए बहुत जरूरी हैं. जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता तो बाल गिरने लगते हैं, नाखून टूटते हैं और त्वचा रूखी हो जाती है.

अगर आपको हमेशा भूख लगती रहती है तो यह भी प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकता है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और अनावश्यक क्रेविंग रोकता है. इसकी कमी होने पर बार-बार खाने की इच्छा होती है.

अगर आपको हमेशा भूख लगती रहती है तो यह भी प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकता है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और अनावश्यक क्रेविंग रोकता है. इसकी कमी होने पर बार-बार खाने की इच्छा होती है.

शुरुआती लक्षण अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर इन संकेतों को समय रहते नहीं समझा गया तो गंभीर प्रोटीन की कमी (जैसे क्वाशीओरकर) हो सकती है.

शुरुआती लक्षण अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर इन संकेतों को समय रहते नहीं समझा गया तो गंभीर प्रोटीन की कमी (जैसे क्वाशीओरकर) हो सकती है.

अपने खाने में प्रोटीन से भरपूर चीज़ें ज़रूर शामिल करें. दूध, दालें, अंडे, मछली, सोया, पनीर और ड्राई फ्रूट्स अच्छे स्रोत हैं. अगर लक्षण ज्यादा हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

अपने खाने में प्रोटीन से भरपूर चीज़ें ज़रूर शामिल करें. दूध, दालें, अंडे, मछली, सोया, पनीर और ड्राई फ्रूट्स अच्छे स्रोत हैं. अगर लक्षण ज्यादा हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

Published at : 20 Aug 2025 10:29 AM (IST)

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अमेरिका ने इस देश के पास भेजी 3 विध्वंसक वॉरशिप, जवाब में 45 लाख लड़ाके तैयार, क्या होगा आगे?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ड्रग कार्टेल के खिलाफ अबतक का सबसे बड़ा अभियान छेड़ दिया है. ट्रंप ने इन्हें वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के नजदीक 3 युद्धपोतों को तैनात कर दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक तीन अमेरिकी एजिस क्लास गाइडेड मिसाइल विध्वंसक वॉरशिप अगले 36 घंटों में वेनेजुएला तट के पास पहुंच जाएंगे. 

डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े एक्शन को लेकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा कि उनका देश अपने हितों की रक्षा करेगा. उन्होंने अमेरिकी आक्रामकता से निपटने के लिए लाखों मिलिशिया तैनात करने का ऐलान कर दिया है. 

अमेरिका ने इन खतरनाक वॉरशिप को किया तैनात
अमेरिका ने जिन युद्धपोतों को वेनेजुएला के पास तैनात किया है, उनमें यूएसएस ग्रेवली, यूएसएस जेसन डनहम और यूएसएस सैम्पसन भी शामिल हैं. इन युद्धपोतों के अलावा कई पी-8 समुद्री गश्ती विमानों, युद्धपोतों और कम से कम एक हमलावर पनडुब्बी को भी तैनात किया जा रहा है. 

अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा 
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलेगी और योजना है कि ये विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालित किए जाएं. एक अधिकारी ने कहा कि इन नौसैनिक उपकरणों (युद्धपोतों, पनडुब्बियों और पी-8 गश्ती विमान) का इस्तेमाल न केवल खुफिया और निगरानी अभियानों के लिए किया जा सकता है, बल्कि अगर कोई निर्णय लिया जाता है तो लक्ष्यों पर हमलों के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

45 लाख से अधिक मिलिशिया तैनात 
निकोलस मादुरो ने अमेरिकी खतरों के बीच कहा कि वेनेजुएला अपने समुद्र, आकाश और जमीन की रक्षा करेगा. उन्होंने अमेरिका की नई धमकियों के जवाब में 45 लाख से अधिक मिलिशिया लड़ाकों को तैनात करने का संकल्प लिया है. 

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