मार्को रुबियो ने दी रूस को वॉर्निंग और यूक्रेन को नसीहत, ट्रंप-जेलेंस्की की मुलाकात से पहले बोल

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच होने वाली बैठक से पहले यूएस के विदेश मंत्री मार्कों रूबियो का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने दो टूक कहा कि शांति समझौते पर पहुंचने के लिए यूक्रेन और रूस दोनों को एक-दूसरे को रियायतें देनी होंगी. इस दौरान उन्होंने एक बार फिर पुतिन को अतिरिक्त प्रतिबंध की चेतावनी दी.

मार्को रुबियो का बयान ऐसे समय में आया है जब कई रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने युद्ध को समाप्त करने के लिए डोनबास का पूर्वी क्षेत्र मॉस्को को सौंपने की शर्त रखी है. वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की शांति के लिए कोई भी क्षेत्र छोड़ने से साफ तौर मना कर दिया है.

नहीं हुई शांति तो मरते रहेंगे लोग- मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन और रूस को समझौते तक पहुंचने में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करता रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन के लिए तीन साल से अधिक समय से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई स्पेशल प्लान बनाना संभव नहीं हो सकता है. मार्को रुबियो ने फेस द नेशन शो को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर रूस-यूक्रेन के बीच शांति नहीं हो पाई और यह युद्ध की तरह ही चलता रहा तो हजारों लोग मरते रहेंगे.

मार्को रुबियो ने रूस को फिर दी चेतावनी

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह भी चेतावनी दी कि यदि शांति समझौता नहीं हुआ तो रूस को अतिरिक्त प्रतिबंध जैसे परिणाम भुगतने पड़ेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार (18 अगस्त 2025) को व्हाइट हाउस में जेलेंस्की के साथ बैठक करेंगे, जिसमें यूरोपीय देशों के नेता भी मौजूद रहेंगे. इस बैठक में रूस-यूक्रेन शांति समझौता पर चर्चा होने वाली है.

ट्रंप और पुतिन के बीच अलास्का में शुक्रवार (15 अगस्त 2025) को बैठक हुई, लेकिन सीजफायर को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ. हालांकि दोनों नेताओं ने ये जरूर कहा कि बातचीत अच्छी रही जो शांति समझौते के लिहाज से काफी सकारात्मक थी. अलास्का शिखर वार्ता के बाद ट्रंप ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हम जिस समझौते पर पहुंचे हैं, वह हमें समाधान खोजने के और करीब लाने में मदद करेगा और यूक्रेन में शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा.”

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एयरफोर्स में किस पद पर हैं सचिन तेंदुलकर और कितनी मिलती है सैलरी, क्या 8वें वेतन आयोग से..

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भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को सिर्फ क्रिकेट मैदान पर ही नहीं, बल्कि देश की सेवा और सम्मान के लिए भी अलग पहचान मिली है. देश ने उन्हें न केवल खेल के क्षेत्र में बल्कि वंदनीय योगदान के लिए हमेशा सराहा है और यह सम्मान उन्हें भारतीय वायुसेना (IAF) में मिला है. सचिन तेंदुलकर को एयरफोर्स ने Honorary Group Captain का पद दिया है. यह पद वायुसेना में कर्नल के बराबर होता है और इसे पाने का मतलब सिर्फ रैंक या टाइटल नहीं बल्कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी को दर्शाता है.

2010 में मिला था सम्मान

2010 में यह सम्मान सचिन को उनके क्रिकेट करियर और देशभक्ति के लिए प्रदान किया गया. यह किसी प्रशिक्षण या पायलट के तौर पर नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह एक Honorary पद है. यानि, सचिन तेंदुलकर को असली एयरफोर्स के कामकाज में शामिल नहीं किया गया और न ही उन्हें इस पद के लिए नियमित सैलरी या भत्ते मिलते हैं. वे इस पद के माध्यम से वायुसेना के ब्रांड एम्बेसडर की तरह देश और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहते हैं.

कितनी मिलती है सचिन को सैलरी, क्या 8वें वेतन से होगा फायदा?

हालांकि अक्सर लोग पूछते हैं कि इस पद पर होने के बाद सचिन को सैलरी कितनी मिलती है और क्या उन्हें 8वें वेतन आयोग से फायदा होगा. इसका साफ जवाब है कि किसी भी तरह की सरकारी तनख्वाह या भत्ता उन्हें नहीं मिलता है. 8वें वेतन आयोग के लाभ केवल असली commissioned अधिकारियों के लिए होते हैं, जो नियमित रूप से वायुसेना में कार्यरत होते हैं. चूंकि सचिन का पद honorary है, वेतन आयोग उनके लिए लागू नहीं होता.

सचिन ने देश के लिए दिया है काफी योगदान

सचिन तेंदुलकर का यह सम्मान केवल प्रतीकात्मक है, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है. यह दिखाता है कि देश ने उनके योगदान को कितना सराहा है. एक तरफ क्रिकेट के मैदान में उनके शतक, रिकॉर्ड और कड़ी मेहनत ने देश का नाम रोशन किया, वहीं दूसरी तरफ यह honorary पद उन्हें देशभक्ति और नागरिक सम्मान का प्रतीक बनाता है. वायुसेना में Honorary Group Captain का रैंक पायलटों और अधिकारियों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत है. सचिन जैसे नामचीन और विश्व प्रसिद्ध खिलाड़ी को यह रैंक मिलने से यह संदेश जाता है कि देशभक्ति सिर्फ सैन्य सेवा में ही नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वालों को भी सम्मान मिलता है.

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खतरा है! भारत के लिए मुसीबत बन सकते हैं पाकिस्तान के 5 खिलाड़ी, पहली बार होंगे भारत के सामने

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एशिया कप का शेड्यूल जारी हो चुका है, पाकिस्तान का स्क्वाड (Pakistan Squad Players List Asia Cup) भी सामने आ चुका है. अब इंतजार है तो सिर्फ भारतीय स्क्वाड और 14 सितंबर का, क्योंकि उसी दिन एशिया कप में भारत बनाम पाकिस्तान (India vs Pakistan Asia Cup) मैच खेला जाएगा. अभी टीम इंडिया का एलान नहीं हुआ है, लेकिन PCB ने पाक टीम में 5 ऐसे युवा खिलाड़ियों को जगह दी है, जो पहली बार भारत के खिलाफ खेल सकते हैं और साथ ही बड़ा खतरा भी साबित हो सकते हैं.

ये 5 खिलाड़ी पहली बार भारत के खिलाफ खेलेंगे

-इनमें सबसे पहला नाम चाइनामैन स्पिनर सुफियान मुकीम का है, जो अब तक 13 मैचों में 21 विकेट चटका चुके हैं. अबू धाबी और दुबई की पिच स्पिनरों के लिए मददगार रहती हैं, मुकीम कंडीशंस का पूरा फायदा उठा पाए तो वो केवल भारत ही नहीं बल्कि एशिया कप में अन्य सभी टीमों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.

-बाएं हाथ के पाकिस्तानी तेज गेंदबाज अक्सर भारतीय बल्लेबाजों के लिए बुरा सपना साबित हुए हैं. मोहम्मद आमिर कहें, वसीम अकरम का नाम लें या फिर शाहीन अफरीदी ने 2021 टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की कमर तोड़कर रख दी थी. अब इस लिस्ट में सलमान मिर्जा जुड़ने जा रहे हैं, जिनके पास ना सिर्फ पेस बल्कि गजब का वेरिएशन भी है. ग्लोबल सुपर लीग के एक मैच में उन्होंने डेथ ओवरों में एक ओवर मेडन कर अपनी प्रतिभा से दुनिया को चौंकाया था.

-हसन नवाज मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज हैं, इसी साल पाकिस्तान के लिए इंटरनेशनल डेब्यू किया है. बड़े-बड़े शॉट लगाने में माहिर हैं, इसी का नतीजा है कि उन्होंने अब तक 14 टी20 मैचों के करियर में 19 चौके और 27 छक्के लगाए हैं. उनका टी20 में स्ट्राइक रेट 175 से ज्यादा है. भारतीय गेंदबाजों को उनकी हिटिंग पावर से निजात पाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है. वो 2025 में पाकिस्तान के लिए अब तक सबसे ज्यादा रन (339) बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं.

-साहिबजादा फरहान ने 2024 में पाकिस्तान की टी20 टीम में वापसी की थी और तभी से उन्हें बतौर ओपनर मौके मिल रहे हैं. साल 2025 में अब तक 6 टी20 पारियों में उन्होंने तीन अर्धशतक समेत 229 रन बनाए हैं. उनका स्ट्राइक रेट 145 का है और वो एशिया कप में पाक टीम को तेज शुरुआत दिलाने का काम कर सकते हैं.

-लिस्ट में आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण नाम, कप्तान सलमान आगा का है. उनकी कप्तानी में अब तक पाकिस्तान ने चार में से 2 टी20 सीरीज जीती हैं. सलमान अभी तक 2025 में 14 टी20 मैचों में 330 रन बना चुके हैं. उन्हें अपने 130 के स्ट्राइक रेट को बेहतर करने की जरूरत है, लेकिन उनका लगभग 37 का औसत एशिया कप में पाकिस्तान के लिए काफी अहम पहलू साबित हो सकता है.

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तिरंगे को लात मारते हुए वीडियो हो रहा वायरल! असम में दिया गया शर्मनाक घटना को अंजाम- वीडियो

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देश की शान तिरंगा सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं बल्कि करोड़ों भारतीयों की भावनाओं और बलिदानों का प्रतीक है. यही वह झंडा है जिसके नीचे लाखों शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी. यही वह तिरंगा है जो हर भारतीय के दिल में जोश भर देता है. जब यह हवा में लहराता है तो हर किसी की आंखों में गर्व और सम्मान झलकता है. लेकिन सोचिए, अगर इसी तिरंगे को कोई जमीन पर पटक दे, उसे लात मारे और पैरों तले रौंद दे तो दिल पर क्या बीतेगी. गुस्से की ज्वाला किसी की भी आंखों से निकल पड़ेगी. यही मंजर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखने को मिला है जिसने पूरे देशवासियों के दिल को चोट पहुंचाई है. वीडियो में कुछ लड़के खुलेआम भारत के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते नजर आ रहे हैं और ये दृश्य इतना शर्मनाक है कि देखकर हर किसी का खून खौल उठता है.

तिरंगे को मारी गई लात, वीडियो हो रहा वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ लड़के तिरंगे झंडे को जमीन पर पटक देते हैं. इसके बाद वे उसे लात मारते हैं और पैरों तले रौंदते हैं. जिस झंडे को देखकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, उसी झंडे को इन युवकों ने खिलौना समझकर बेइज्जत कर दिया. इस वीडियो को किसी ने घर की बालकनी से छुपकर शूट किया है और सोशल मीडिया पर डाल दिया. वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि यह घटना असम के गुवाहाटी के खनकार गांव की है. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है.

गिरफ्तारी की हो रही मांग

लोग सोशल मीडिया पर लगातार इन युवकों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. कई यूजर्स ने लिखा कि तिरंगे का अपमान बर्दाश्त से बाहर है और ऐसा करने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह सिर्फ तिरंगे का अपमान नहीं बल्कि पूरे देश की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है. वीडियो को लेकर लोग गुस्से में हैं और लगातार प्रशासन से कार्रवाई की अपील कर रहे हैं.

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यूजर्स का खौल उठा खून

वीडियो को @VigilntHindutva नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…इन्हें पकड़कर पब्लिक को सौंप दो. एक और यूजर ने लिखा…ऐसे लोग रहते भारत में हैं और गाते कहीं और का. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…इन लोगों को गिरफ्तार करके कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

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शरीर में तेजी से बढ़ेगा Vitamin B12, बस इस तरीके से खा लीजिए मूंग दाल

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अक्सर लोग इसकी कमी पूरी करने के लिए सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन आपकी किचन में ही एक ऐसा खजाना मौजूद है, जो इस विटामिन की कमी को दूर करने में मददगार है, वह है मूंग दाल.

अक्सर लोग इसकी कमी पूरी करने के लिए सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन आपकी किचन में ही एक ऐसा खजाना मौजूद है, जो इस विटामिन की कमी को दूर करने में मददगार है, वह है मूंग दाल.

मूंग दाल सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स के साथ-साथ विटामिन बी12 भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि इसे 'शाकाहारियों का पावर फूड' कहा जाता है.

मूंग दाल सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स के साथ-साथ विटामिन बी12 भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि इसे ‘शाकाहारियों का पावर फूड’ कहा जाता है.

Vitamin B12 हमारे DNA बनाने और कोशिकाओं को एनर्जी देने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी, एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं. ऐसे में मूंग दाल आपके लिए नेचुरल और आसान उपाय बन सकती है.

Vitamin B12 हमारे DNA बनाने और कोशिकाओं को एनर्जी देने में अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से थकान, कमजोरी, एनीमिया और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं. ऐसे में मूंग दाल आपके लिए नेचुरल और आसान उपाय बन सकती है.

अगर आप रोजाना सही तरीके से मूंग दाल का सेवन करेंगे तो न सिर्फ Vitamin B12 की कमी दूर होगी, बल्कि शरीर में खून की कमी, इम्यूनिटी की कमजोरी और कमजोरी जैसी समस्याएं भी कम होंगी.

अगर आप रोजाना सही तरीके से मूंग दाल का सेवन करेंगे तो न सिर्फ Vitamin B12 की कमी दूर होगी, बल्कि शरीर में खून की कमी, इम्यूनिटी की कमजोरी और कमजोरी जैसी समस्याएं भी कम होंगी.

इसको यूज करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि रात में सोने से पहले एक कप मूंग दाल को अच्छे से धोकर पानी में भिगो दें. सुबह उसका पानी पी लें और भीगी हुई दाल में प्याज, नींबू, टमाटर डालकर सलाद की तरह खा लें. यह तरीका आपके शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स का खजाना देगा.

इसको यूज करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि रात में सोने से पहले एक कप मूंग दाल को अच्छे से धोकर पानी में भिगो दें. सुबह उसका पानी पी लें और भीगी हुई दाल में प्याज, नींबू, टमाटर डालकर सलाद की तरह खा लें. यह तरीका आपके शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स का खजाना देगा.

इसके अलावा, मूंग दाल की खिचड़ी, सूप या स्प्राउट्स के रूप में भी इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है. यह हल्की, पचने में आसान और पोषण से भरपूर होती है.

इसके अलावा, मूंग दाल की खिचड़ी, सूप या स्प्राउट्स के रूप में भी इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है. यह हल्की, पचने में आसान और पोषण से भरपूर होती है.

अगर आप बिना सप्लीमेंट के, सिर्फ नैचुरल तरीके से Vitamin B12 की कमी पूरी करना चाहते हैं, तो मूंग दाल को अपनी डेली डाइट में जरूर शामिल करें. कुछ ही हफ्तों में फर्क खुद महसूस करेंगे.

अगर आप बिना सप्लीमेंट के, सिर्फ नैचुरल तरीके से Vitamin B12 की कमी पूरी करना चाहते हैं, तो मूंग दाल को अपनी डेली डाइट में जरूर शामिल करें. कुछ ही हफ्तों में फर्क खुद महसूस करेंगे.

Published at : 17 Aug 2025 04:38 PM (IST)

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10 साल बाद इन तकनीकों का होगा दुनिया पर राज! अपने आप को नहीं किया अपडेट तो रह जाएंगे पीछे

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World’s Future Technology: आज जिस तरह से तकनीकें तेज़ी से बदल रही हैं आने वाले 10 सालों में हमारी दुनिया की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. वो चीज़ें जो आज हमें भविष्य की कहानी लगती हैं, कल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा होंगी. आइए जानते हैं उन तकनीकों के बारे में जो अगले दशक में पूरी दुनिया पर राज कर सकती हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहले से ही हेल्थकेयर, बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ बना चुका है. आने वाले समय में यह तकनीक और ज़्यादा स्मार्ट होगी. डॉक्टर की जगह AI से डायग्नोसिस, वकील की जगह केस स्टडी और यहां तक कि फिल्म या किताब लिखने तक में AI का इस्तेमाल आम हो जाएगा.

क्वांटम कंप्यूटिंग

अभी यह तकनीक शुरुआती दौर में है, लेकिन अगले 10 सालों में क्वांटम कंप्यूटर हमारी कंप्यूटिंग क्षमता को हजारों गुना बढ़ा देंगे. यह दवाइयों के रिसर्च, मौसम की सटीक भविष्यवाणी, अंतरिक्ष अन्वेषण और साइबर सुरक्षा के लिए क्रांतिकारी साबित होंगे.

5G से आगे 6G नेटवर्क

आज हम 5G की रफ्तार का अनुभव कर रहे हैं, लेकिन 10 साल बाद 6G तकनीक दुनिया को जोड़ने का सबसे तेज़ जरिया होगी. 6G से न सिर्फ़ इंटरनेट की स्पीड कई गुना बढ़ेगी बल्कि यह वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी को असली दुनिया जैसा अनुभव देगी.

रोबोटिक्स और ऑटोमेशन

आने वाले समय में रोबोट सिर्फ़ फैक्ट्री में नहीं, बल्कि हमारे घरों में भी साथी बन जाएंगे. खाना बनाने, बुजुर्गों की देखभाल करने और यहां तक कि दोस्त की तरह बातचीत करने वाले रोबोट आम दिखाई देंगे. इससे काम आसान होगा लेकिन रोजगार की चुनौतियाँ भी बढ़ेंगी.

बायोटेक्नोलॉजी और जीन एडिटिंग

CRISPR जैसी जीन एडिटिंग तकनीकें इंसानों की बीमारियों का जड़ से इलाज करने में मदद करेंगी. आने वाले सालों में हम जन्म से पहले ही कई आनुवंशिक बीमारियों को रोक पाएंगे. इससे हेल्थकेयर क्षेत्र में क्रांति आएगी और औसत आयु में भी वृद्धि होगी.

मेटावर्स और वर्चुअल रियलिटी

आज मेटावर्स गेमिंग और सोशल मीडिया तक सीमित है, लेकिन 10 साल बाद यह हमारी पढ़ाई, नौकरी और बिज़नेस का नया प्लेटफ़ॉर्म बनेगा. वर्चुअल क्लासरूम, डिजिटल ऑफिस और 3D शॉपिंग मॉल हमारे जीवन का हिस्सा होंगे.

स्पेस टेक्नोलॉजी और मार्स मिशन

अगले दशक में इंसानों की नज़र पृथ्वी से बाहर की दुनिया पर होगी. चांद और मंगल पर इंसानी बस्तियाँ बनाने की दिशा में तेज़ी से काम होगा. निजी कंपनियां जैसे SpaceX और Blue Origin इस बदलाव में अहम भूमिका निभाएंगी.

ग्रीन एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी

जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती है. आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रोजन ईंधन मुख्य स्रोत बनेंगे. इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन कारें आम हो जाएंगी जिससे प्रदूषण पर काबू पाया जा सकेगा.

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टैरिफ से बेखौफ इन टॉप 10 में से 5 कंपनियों के 60675 करोड़ बढ़े मार्केट कैप, जानें टॉप गेनर कौन

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बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी दर्ज की गई. छुट्टियों से छोटे कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स 739.87 अंक यानी 0.92 प्रतिशत और निफ्टी 268 अंक यानी 1.10 प्रतिशत चढ़ा. इस दौरान सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के बाजार पूंजीकरण में सामूहिक रूप से 60,675.94 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. सबसे अधिक लाभ भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक को हुआ.

टॉप गेनर रहे एसबीआई, आरआईएल

समीक्षाधीन सप्ताह में भारतीय स्टेट बैंक का बाजार पूंजीकरण 20,445.82 करोड़ रुपये बढ़कर 7,63,095.16 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. एचडीएफसी बैंक का मूल्यांकन 14,083.51 करोड़ रुपये बढ़कर 15,28,387.09 करोड़ रुपये हो गया. इसी तरह इन्फोसिस का बाजार पूंजीकरण 9,887.17 करोड़ रुपये बढ़कर 6,01,310.19 करोड़ रुपये, भारती एयरटेल का मूल्यांकन 8,410.6 करोड़ रुपये बढ़कर 10,68,260.92 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 7,848.84 करोड़ रुपये बढ़कर 18,59,023.43 करोड़ रुपये रहा.

एलआईसी का मार्केट कैप घटा

वहीं, दूसरी ओर एलआईसी का बाजार पूंजीकरण 15,306.5 करोड़ रुपये घटकर 5,61,881.17 करोड़ रुपये रह गया. बजाज फाइनेंस की बाजार हैसियत 9,601.08 करोड़ रुपये घटकर 5,35,547.44 करोड़ रुपये हो गई. आईसीआईसीआई बैंक के मूल्यांकन में 6,513.34 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 10,18,982.35 करोड़ रुपये पर आ गया. टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 4,558.79 करोड़ रुपये घटकर 10,93,349.87 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का मूल्यांकन 3,630.12 करोड़ रुपये घटकर 5,83,391.76 करोड़ रुपये रह गया.

मार्केट कैप के लिहाज से शीर्ष 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही. इसके बाद क्रमशः एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, इन्फोसिस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एलआईसी और बजाज फाइनेंस का स्थान रहा.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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कैसे पाकिस्तान के सम्पूर्ण सिंह बने हिंदी सिनेमा के गुलजार, जानें इनकी दिलचस्प कहानी

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हिंदी सिनेमा और साहित्य की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो समय के साथ फीके नहीं पड़ते, बल्कि और भी चमकते हैं. गुलजार उन्हीं में से एक हैं. उर्दू, पंजाबी, खड़ीबोली और हिंदी जैसी कई भाषाओं में उन्होंने जो कविताएं, गीत और कहानियां लिखी हैं, वो सीधे दिल में उतर जाती हैं. कल उनका बर्थडे हैं. ऐसे में हम आपको उनकी लाइफ की खासे बातें बताने जा रहे हैं.

पाकिस्तान में जन्में थे गुलजार

18 अगस्त 1934 को झेलम (अब पाकिस्तान) में जन्मे गुलजार, जिनका असली नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा है., आज भी अपनी सादगी, संवेदनशीलता और शब्दों की गहराई से लोगों को बांध लेते हैं. लेकिन अगर गुलजार की जिंदगी को किसी एक नजरिए से सबसे गहराई से समझा जा सकता है, तो वो है उनकी बेटी मेघना गुलजार का,एक सफल फिल्म निर्देशक के तौर पर पहचान बनाने वाली मेघना (जिनका प्यार का नाम बोस्की है) ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर बताया है कि उनके पिता ने सिर्फ एक महान लेखक या गीतकार की भूमिका ही नहीं निभाई, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील अभिभावक की तरह भी जीवन जिया.


एक्ट्रेस राखी से रचाई थी शादी

गुलजार ने 1973 में अभिनेत्री राखी से शादी की थी. लेकिन जब उनकी बेटी बोस्की केवल एक साल की थीं, तब गुलजार और राखी अलग हो गए. अलग होने के बाद गुलजार ने मेघना की परवरिश में पूरी भूमिका निभाई. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2019 में मेघना ने भावुक होकर कहा था कि उनके पापा ने कभी उन्हें डांटा नहीं, लेकिन अनुशासन हमेशा बनाए रखा. गुलजार खुद मेघना को स्कूल के लिए तैयार करते, उनकी चोटी बनाते, जूते पॉलिश करते और समय निकालकर दोपहर साढ़े तीन बजे स्कूल से लेने भी जाते.

बेटी की अकेली की परवरिश

गुलजार ने ऐसा कोई काम नहीं छोड़ा जिससे मेघना को मां की कमी महसूस हो. उन्होंने बताया था कि गुलजार ने हमेशा उन्हें आजादी से जीने की छूट दी, लेकिन पढ़ाई को लेकर कभी समझौता नहीं किया. उनका एक ही नियम था, ‘पढ़ाई पूरी करो, उसके बाद जो मन करे वो करो..’ शायद यही वजह है कि मेघना आज खुद एक सफल निर्देशक हैं, जिन्होंने ‘राजी’, ‘छपाक’ और ‘सैम बहादुर’ जैसी फिल्मों के जरिए अपना हुनर दिखाया.


बंदिनी से हुई थी गुलजार के करियर की शुरुआत

गुलजार की शायरी, गीत और नज्मों में बंटवारे का दर्द, दिल्ली की गलियों की खुशबू, और गालिब की रचनाओं की छाया मिलती है. उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि वे खुद को ‘कल्चरली मुसलमान’ मानते हैं, क्योंकि उनकी सोच में हिंदी और उर्दू दोनों की मिलावट है. यह बात उनकी लेखनी में भी साफ झलकती है. उनकी शुरुआत बतौर गीतकार 1963 में बिमल रॉय की फिल्म ‘बंदिनी’ से हुई थी, जिसमें लिखा गया गाना ‘मोरा गोरा रंग लइले’ आज भी उतना ही मासूम और गहरा लगता है जितना शायद तब लगता होगा.

बॉलीवुड के इन गानों ने दी अलग पहचान

इसके बाद उन्होंने एक से एक खूबसूरत गीत लिखे. फेहरिस्त बहुत लंबी है लेकिन ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा नहीं’, ‘कजरारे कजरारे’ और ‘छैंया छैंया’ ये ऐसे तीन गाने हैं जो गुलजार की कलम के अलग-अलग रंगों से रूबरू कराते हैं. उनकी लेखनी में दिल्ली की बल्लीमारान की गलियों से लेकर मुंबई की रेलगाड़ियों तक का सफर महसूस होता है.गुलजार की केवल लेखनी ही नहीं, उनकी आवाज भी दमदार है.


गुलजार ने टीवी के लिए भी किया काम

कई टेलीविजन विज्ञापनों और फिल्मों में उनके बोले डायलॉग किसी कविता की तरह लगते हैं. यही वजह है कि आज भी जब वह मंच पर कुछ बोलते हैं, तो लोग शांत होकर सिर्फ सुनते हैं और कह उठते हैं ‘शिकवा नहीं…’

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Global Prediction 2025: सूर्य, मंगल, शुक्र और बुध बदलेंगे सत्ता, युद्ध और बाज़ार की दिशा…

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Prediction 2025: 20 अगस्त से 20 सितंबर 2025 तक का समय साधारण नहीं है. इस कालखंड में सूर्य, शुक्र, बुध और मंगल अपनी चाल बदलेंगे और इनके साथ गुरु, शनि, राहु–केतु और चंद्रमा भी निर्णायक स्थिति में रहेंगे. बृहद्पाराशर होरा शास्त्र स्पष्ट करता है-

ग्रहाणां संचारतः नृणां नृपाणां च सुखदुःखं भवेत्.
अर्थात ग्रहों का संचार केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्रों और शासकों की दशा बदलता है. यही कारण है कि अगस्त–सितंबर 2025 को Cosmic Reset कहा जा रहा है. यह महीना राजनीति, युद्ध, बाजार और जनजीवन-चारों पर असर डालेगा. आइए समझते हैं विस्तार से-

सिंह राशि में सूर्य की एंट्री (16 अगस्त – 17 सितंबर): 

सूर्य जब सिंह राशि (अपने स्वगृह) में प्रवेश करता है तो नेतृत्व और सत्ता को बल मिलता है. बृहद संहिता (अध्याय 3) में कहा गया है-
सिंहे रवौ स्थिते प्रजाः राजानं नमन्ति.
अर्थात सिंह में सूर्य होने पर जनता शासक की ओर झुकती है. इसका प्रमाण 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में मिला, जहां उन्होंने Mission Sudarshan Chakra और आर्थिक सुधारों की घोषणा की.

यूरोप भी अमेरिका पर निर्भरता घटाकर अपनी सैन्य नीति बना रहा है. सिंह में सूर्य का तर्क यही है कि नेता अधिक आत्मविश्वासी और निर्णायक होते हैं, पर विरोधी ताकतें भी संगठित होती हैं.

तुला में मंगल ग्रह का गोचर (13 सितंबर से): युद्ध की स्थिति या कूटनीति सफल?

मंगल जब तुला में प्रवेश करता है, तो संतुलन और साझेदारी की राशि में युद्ध का कारक प्रवेश करता है. बृहतजातक कहता है-
मङ्गले सीमायां क्लेशः.
अर्थात मंगल सीमाओं और समझौतों में क्लेश लाता है. 15 अगस्त को हुई ट्रम्प–पुतिन वार्ता का असफल रहना इसका संकेत है. भारत–पाकिस्तान सीमा और चीन के साथ LAC पर भी तनाव बढ़ सकता है.

मंगल का तुला गोचर बताता है कि इस अवधि में शांति की कोशिशें होंगी, लेकिन उनमें संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन हावी रहेगा. कूटनीति विफल हो सकती है और युद्ध की रेखाएं फिर से उभर सकती हैं. सैन्य शक्तियां, सैन्य संयुक्त अभ्यास, हथियार, उपकरण की खरीदारी बढ़ेंगी. समुद्र में सेनाओं की सक्रियता बढ़ेगी.

कर्क राशि में शुक्र का आना (21 अगस्त 2025 से): उपभोग और आर्थिक नीतियां होगी प्रभावित!

21 अगस्त को शुक्र कर्क राशि में प्रवेश कर गजलक्ष्मी योग बनाएगा. फलदीपिका कहता है-
शुक्रे समृद्धिर्भवति, वाणिज्यं वर्धते.
अर्थात शुक्र व्यापार और वैभव को बढ़ाता है. इस दौरान भारत में EV और रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. चीन को रियल एस्टेट संकट से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन यह स्थायी नहीं होगी.

अमेरिका और यूरोप में लग्जरी और FMCG ब्रांड्स में उछाल संभव है. शुक्र का यह गोचर आर्थिक समृद्धि का आभास देगा, लेकिन राहु–केतु और मंगल आगे अस्थिरता पैदा करेंगे. यही वह समय है जब सरकारें आयात–निर्यात पर टैरिफ और टैक्स नीति सख्त कर सकती हैं.

बुध कर्क राशि में मार्गी और सिंह राशि में प्रवेश (11 अगस्त – 30 अगस्त): सूचना का विस्फोट!

बुध जब वक्री से मार्गी होकर सिंह में प्रवेश करता है, तो सूचना और संवाद का प्रवाह बढ़ता है. जातक पारिजात कहता है-
बुधे मार्गगते विद्या वाणिज्यं च बलं लभेत्.
भारत में इस दौरान स्टार्टअप्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI नीति को बढ़ावा मिलेगा. अमेरिका और यूरोप में साइबर सिक्योरिटी से जुड़े कड़े कानून और मीडिया में बड़े खुलासे संभव हैं. सोशल मीडिया पर आंदोलनों की लहर उठ सकती है. यह बुध दर्शाता है कि तकनीकी विकास और सूचना का प्रवाह नेताओं और जनता दोनों की सोच और निर्णय को बदल देगा.

गुरु का मिथुन राशि में गोचर: राजनीति और प्राकृतिक संकट

गुरु इस समय मिथुन राशि और राहु के पुनर्वसु नक्षत्र में हैं. बृहत संहिता (वराहमिहिर) में गुरु का शुभ नक्षत्रों में होना धर्म और राज्य के लिए कल्याणकारी माना गया है.

भविष्य पुराण और बृहत संहिता दोनों पुनर्वसु को ‘सर्वपोषिणी’ शक्ति मानते हैं, यानी समाज को पुनः संबल देने वाली स्थिति के तौर पर इसे बताया गया है.

गुरु के पुनर्वसु नक्षत्र में आने पर जियो-पॉलीटिक्स और अर्थव्यवस्था में रीसेट और पुनर्जीवन की लहर उठती है. यह समय युद्ध या संघर्ष के बाद समझौते और संतुलन लाने वाला होता है. तकनीक और संचार क्षेत्र में पुराने विचारों का नए रूप में प्रयोग होगा.

जैसे- स्पेस इंटरनेट, 6G और साइबर सुरक्षा. सूचना युद्ध और प्रोपेगेंडा भी बढ़ेंगे. बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद IT, कृषि, सोना और धार्मिक-आर्थिक क्षेत्र मजबूत होंगे. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग नए संतुलन में आएंगे. कुल मिलाकर यह कालखंड राजनीति, तकनीक और बाजार-तीनों में पुनः उत्थान और नवजीवन का संकेत देता है. 

शनि मीन में: धीमी क्रांति और जनअसंतोष

शनि मीन राशि में धीमी गति से चल रहा है. मेदिनी ज्योतिष कहता है-
शनेः संचारे योजनाः विलम्बन्ति, जनाः क्लिश्यन्ति.
इस समय अंतरराष्ट्रीय समझौते और समुद्री व्यापार धीमा होगा. तेल और गैस सेक्टर में दबाव रहेगा. भारत में विपक्ष सरकार पर हमले तेज करेगा. जनता को लग सकता है कि योजनाएँ धीमी हैं. शनि मीन गोचर दर्शाता है कि असंतोष धीरे-धीरे गहराता है और समय आने पर क्रांति का रूप लेता है.

  • राहु–केतु कुंभ–सिंह अक्ष पर होने से युद्ध और शांति की खींचतान देखने को मिलती है. जनता भी भ्रमित रहती है.
  • राहु मेष में और केतु तुला में हैं. राहु यहां आक्रामकता का संकेत दे रहा, केतु ग्रह त्याग और टूटन की स्थिति को बता रहा है.
  • राहु कुंभ में में नेताओं को आक्रामक और युद्धप्रिय बनाता है.
  • केतु सिंह राशि साझेदारियों को कमजोर करता है.

यही कारण है कि रूस–अमेरिका वार्ता का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला, भारत–पाक सीमा विवाद और चीन का दक्षिण चीन सागर पर दबाव. यह स्पष्ट करता है कि अगस्त–सितंबर में युद्ध और शांति की रस्साकशी एक साथ चलेगी. नेताओं के लिए यहा समय चुनौतियों से भरा रहेगा.

चंद्रमा का प्रभाव का जनता की मनोदशा पर दिखेगा प्रभाव

23 अगस्त अमावस्या: धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों पर जनता की तीखी प्रतिक्रिया की संभवना बन रही है.

7 सितंबर (पूर्णिमा): राजनीतिक असंतोष और जनआंदोलन तेज हो सकते हैं.

बृहद संहिता कहती है-
चन्द्रेण लोकभावनाः.
यानी चंद्रमा सीधे जनता की सोच और भावनाओं पर असर डालता है. यह बताता है कि इस दौरान जनभावना नेताओं को निर्णय बदलने पर मजबूर कर सकती है.

आर्थिक असर: टैरिफ, शेयर बाजार और उपभोक्ता

यह अवधि केवल राजनीति और युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी निर्णायक है.

  • शुक्र का कर्क राशि में गोचर से उपभोग में वृद्धि देखने मिलेगी जिससे सरकारें आयात पर नए टैरिफ लगा सकती हैं.
  • शनि देव का मीन राशि में गोचर संकेत दे रहा है कि तेल और गैस आयात महंगे हो सकते हैं.
  • गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में होने से प्राकृतिक संकट के बाद सुधार तेज होते हैं, कृषि और कमोडिटी मार्केट प्रभावित होंगे. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, जब गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में आता है, तो यह समय पुनर्जागरण (Revival) और पुनर्निर्माण (Reconstruction) का होता है.

उदाहरण से समझें भारत EV और सोलर प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क बढ़ाकर घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकता है. अमेरिका और यूरोप लग्जरी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं. चीन अपने उद्योग को बचाने के लिए निर्यात सब्सिडी दे सकता है. वहीं इस समय कार बनाने वाली कंपनियां सुरक्षा फीचरों पर अधिक फोकस करेंगी.

वैश्विक असर: कौन किस मोड़ पर?

  • भारत: सुधार और रक्षा नीति मज़बूत, मगर सीमा पर सतर्कता ज़रूरी.
  • रूस (पुतिन): सैन्य दबाव और ऊर्जा हथियार के रूप में उपयोग.
  • अमेरिका (ट्रम्प): आक्रामक कूटनीति, घरेलू राजनीति में विरोध.
  • यूरोप: अमेरिका पर निर्भरता घटाकर अपनी सुरक्षा नीति बनाना.
  • चीन: ताइवान और दक्षिण चीन सागर में दबाव, अर्थव्यवस्था में अस्थायी राहत.
  • पाकिस्तान: राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सीमा तनाव, सैना की ताकत बढ़ेगी. सत्ता में बड़े बदलाव के संकेत.

शास्त्र- तर्क और तथ्य जो कर रहे हैं कुछ बड़ा होने का इशारा

अव्वल यह विश्लेषण केवल भविष्यवाणी नहीं बल्कि शास्त्र सम्मत उद्धरण, तार्किक व्याख्या और वर्तमान घटनाओं के उदाहरण का संतुलन है. क्यों कि-

  1. सूर्य = सत्ता
  2. मंगल = युद्ध/कूटनीति
  3. शुक्र = उपभोग/बाजार/टैरिफ
  4. बुध = सूचना/टेक्नोलॉजी
  5. गुरु = राजनीति और आपदा
  6. शनि = विलंब और असंतोष
  7. राहु–केतु = युद्ध बनाम शांति
  8. चंद्रमा = जनभावना का कारक है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर ट्रंप संग मुलाकात से पहले जेलेंस्की के साथ बैठक करेंगे ये नेता, जाने

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अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक के बाद अब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की सोमवार (18 अगस्त, 2025) को अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले हैं. जेलेंस्की अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की तैयारी में जुटे हैं. वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के नेता रविवार (17 अगस्त, 2025) को बैठक करने वाले हैं, ताकि यूक्रेन की स्थिति को मजबूत किया जा सके, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कीव पर युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर सहमत होने का दवाब बनाया जा रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन की अलास्का में शुक्रवार (15 अगस्त, 2025) को हुई मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति पर यह दबाव है कि यूक्रेन किसी समझौते पर पहुंचे. वहीं, पुतिन ने यह इशारा किया है कि वे कब्जे वाले यूक्रेन के छोटे हिस्से को छोड़ सकते हैं, लेकिन उसके बदले में एक बड़े भू-भाग को मांग करेंगे.

पुतिन की कुछ शर्तें यूक्रेन के लिए किसी समझौते पर सहमति बनाने में मुश्किल पैदा कर रही हैं. इससे यूरोप के पिछले 80 साल में सबसे घातक युद्ध को खत्म करने पर बातचीत को और पेचीदा बना सकती है. यूक्रेन और रूस के युद्ध में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं.

कोएलिशन ऑफ द विलिंग की होगी वर्चुअल बैठक

कीव के समर्थक देशों के गठबंधन कोएलिशन ऑफ द विलिंग में शामिल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर फ्रेडरिच मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की रविवार (17 अगस्त, 2025) को 1300 GMT पर यूक्रेन मुद्दे पर वर्चुअल बैठक होगी.

यूक्रेन के लिए क्या चाहते यूरोपीय देश

यूरोप की ताकतें चाहती हैं कि ट्रंप, पुतिन और जेलेंस्की के बीच त्रिपक्षीय बैठक हो ताकि यूक्रेन भी अपने भविष्य को आकार देने में शामिल रह सके. इसके अलावा वे चाहते हैं कि यूक्रेन के लिए एक मजबूत सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित की जाए, इसमें अमेरिका की भूमिका अहम हो और अगर कभी जरूरत पड़े तो रूस पर दबाव बढ़ाया जा सके.

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