आपका घर गूगल पर है सबकी नजर में! जानें कैसे हटाएं अपना लोकेशन, जानिए आसान तरीका

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Google Street View: हममें से ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हमारा घर गूगल मैप्स पर कितनी आसानी से देखा जा सकता है जब तक कि कोई ऐसा पल न आए जो असहज कर दे. हो सकता है किसी दोस्त ने बताया हो कि उसने ऑनलाइन आपका घर देखा या फिर आपने खुद गूगल स्ट्रीट व्यू पर देखा हो कि कोई भी व्यक्ति आपकी गली में डिजिटल रूप से घूम सकता है और आपके घर की झलक ले सकता है. यह एक ऐसा आधुनिक संकट है जिसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी.

फायदेमंद भी है गूगल स्ट्रीट व्यू पर मौजूद लोकेशन

गूगल स्ट्रीट व्यू पर घर दिखाई देना कई बार फायदेमंद भी होता है. जब आपकी मां पहली बार आपके नए घर आ रही हों और रास्ता भटक जाएं तो वह सीधे स्ट्रीट व्यू खोलकर घर पहचान सकती हैं. डिलीवरी वाले भी तेजी से पहुंच जाते हैं और वह दोस्त जो हर बार रास्ता भूल जाता है, बिना गोल-गोल घूमे सीधा आपके दरवाज़े तक आ सकता है. तकनीक में अनाड़ी लोगों के लिए यह सुविधा जीवनरक्षक जैसी हो सकती है.

लेकिन दूसरी ओर, यही सुविधा किसी भी अनजान व्यक्ति को आपके घर की पूरी जानकारी दे सकती है. कोई भी आपके घर के बाहर खड़ी गाड़ी देख सकता है, बगीचे का हाल जान सकता है और यहां तक कि आपके पड़ोस का माहौल भी परख सकता है. कुछ लोगों को यह बात काफी असहज लगती है.

कैसे हटाएं अपने घर को Google Street View से?

अगर आपको लगता है कि यह डिजिटल सार्वजनिकता आपकी निजता में दखल है तो चिंता न करें इसे हटाना या कहें ब्लर करवाना बहुत आसान है. आप बस गूगल स्ट्रीट व्यू पर जाएं, अपने घर का पता खोजें, फिर “Report a problem” पर क्लिक करें और गूगल से अनुरोध करें कि आपके घर को ब्लर कर दिया जाए. कुछ दिनों में गूगल आपकी रिक्वेस्ट पर कार्रवाई करता है और आपका घर पिक्सेल्स में तब्दील हो जाता है. यह सुविधा अब सिर्फ मशहूर हस्तियों के लिए नहीं बल्कि उन आम लोगों के लिए भी है जो थोड़ा सा और प्राइवेसी चाहते हैं.

सुरक्षा या सावधानी

इस विषय पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. कुछ का मानना है कि अगर आपका घर पूरी तरह दिखता है तो यह चोरों या संदिग्ध लोगों को आकर्षित कर सकता है. अगर कोई देख ले कि आपके पोर्च में महंगे गार्डन फर्नीचर हैं या आपकी गाड़ी अक्सर गायब रहती है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. कई पुलिस अधिकारी भी सलाह देते हैं कि यदि कभी कोई सुरक्षा संबंधी चिंता रही हो तो घर को ब्लर करवा लेना बेहतर होता है.

वहीं कुछ लोगों का यह भी तर्क है कि अगर एक सड़क पर सभी घर सामान्य दिख रहे हैं और केवल एक घर ब्लर है, तो वह और अधिक ध्यान खींच सकता है जैसे कोई इनडोर में चश्मा पहन ले तो वह ज़्यादा ही नजर आता है. अंत में यह फैसला आपके व्यक्तिगत आराम और सोच पर निर्भर करता है. कुछ लोग बिल्कुल सहज रहते हैं चाहे कोई भी उनका घर देख ले. वहीं कुछ लोग इस बात से परेशान हो जाते हैं कि अनजान लोग उनके घर की जानकारी किसी भी वक्त देख सकते हैं.

तकनीक तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है और हमारे कानून और सामाजिक नियम इसके पीछे-पीछे दौड़ रहे हैं. ऐसे में, यह छोटे-छोटे फैसले हमारी निजता के लिए बहुत मायने रखते हैं. विकल्प आपके हाथ में है चाहे आप अपने घर को सबके सामने रखें या कुछ परदे खींच लें. लेकिन यह सोचने लायक बात जरूर है कि आप अपनी डिजिटल उपस्थिति को लेकर कितनी खुली या सतर्क मानसिकता रखते हैं.

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बाबा वेंगा की July 2025 की भविष्यवाणी, क्या होगा दुनिया का हाल?

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Baba Vanga July 2025 Prediction: बाबा वेंगा एक भविष्यवक्ता, जिनकी भविष्यवाणियों को लेकर लोगों में डर का माहौल रहता है. ऐसे में साल 2025 के लिए बाबा वेंगा की भविष्यवाणी एक बार फिर से चर्चा में बनी हुई है. आज से जुलाई महीने की शुरुआत हो चुकी है.

ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि जुलाई महीने में कौन से बड़े बदलाव हो सकते हैं, जिसकी भविष्यवाणी पहले ही बाबा वेंगा ने कर दी थी. इनमें कुछ भविष्यवाणियां मौसम, बीमारी और वैश्विक राजनीति से जुड़ी हुई है, जो आम जीवन पर गहरा असर डाल सकती है.

जुलाई महीने के लिए बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां
बाबा वेंगा ने साल 2025 के लिए पहले से ही भविष्यवाणियां कर दी है. उनकी पिछली कई भविष्यवाणी सही साबित हुई हैं. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि बाबा वेंगा ने जुलाई महीने के लिए कौन सी भविष्यवाणियां की है?

जुलाई महीने में कुछ अनचाही घटनाओं को लेकर बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की है, अगर ये सच होती है तो दुनिया को भयंकर विनाश का सामना करना पड़ सकता है.









1 बाबा वेंगा ने 2025 के मध्य जून-जुलाई के बीच दुनिया में बड़ी प्राकृतिक और मानव निर्मित दुर्घटनाओं की भविष्यवाणी की है.
2 इस महीने बाबा वेंगा ने अग्नि, वायु और जल से संबंधित विनाश के संकेत दिए हैं.
3 ज्योतिषचार्यों के मुताबिक बीते 7 जून से लेकर 28 जुलाई 2025 तक अंगारक योग सक्रिय है. इस योग में सड़क दुर्घटना, विस्फोट, आगजनी और विमान दुर्घटना होने की संभावना बढ़ सकती है.
4 वही ज्योतिषचार्यों के अनुसार 7 जून से 28 जुलाई 2025 तक अंगारक योग सक्रिय है, जो दुर्घटना, विस्फोट, आगजनी और विमान दुर्घटना का संकेत देता है.
5 जुलाई में बाबा वेंगा ने प्राकृतिक आपदाओं और आग जैसी भयानक घटनाओं की भविष्यवाणियां की है.अगर ये सच होती है तो मानव इतिहास की ये अबतक की सबसे बड़ी त्रासदी हो सकती है.
6 बाबा वेंगा और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर जुलाई का महीना सतर्कता बरतने का है.

कौन है बाबा वेंगा?
बाबा वेंगा का जन्म साल 1911 में बुल्गारिया में हुआ था. बाबा वेंगा ने एक बीमारी के कारण कम उम्र में ही अपनी आंखें खो दी थी. इस घटना के बाद दावा किया जाता है कि उनके अंदर भविष्य देखने की शक्ति आ गई थी.

भविष्य बताने के कारण उनकी ख्याति दुनिया भर में फैल गई. हालांकि बाबा वेंगा अब तो नहीं रहे लेकिन उनकी भविष्यवाणियां आज भी लोगों के बीच काफी प्रचलित है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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क्या 1800 के लेवल को पार कर जाएगा RIL का शेयर? नुवामा को है भारी रिटर्न की उम्मीद

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Reliance Industries Share: ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के लिए अपने टारगेट प्राइस को बढ़ाकर 1,801 रुपये प्रति शेयर कर दिया है. ब्रोकरेज ने इसके शेयर को ‘Buy’ की रेटिंग भी दी है. इसी के साथ आज कारोबार के दौरान दोपहर 12.50 बजे कारोबार के दौरान रिलायंस के शेयर 1.9 परसेंट उछलकर 1,529 रुपये पर पहुंच गए. बताया जा रहा है रिलायंस के हाल ही में सोलर मॉड्यूल लॉन्च किए जाने के बाद ही नुवामा ने इस पर बड़ा दांव लगाया है. 

रिलायंस ने शुरू की HJT मॉड्यूल की मैन्युफैक्चरिंग 

दरअसल, रिलायंस ने 1 GW (गीगावाट) की HJT मॉड्यूल की मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी है. 2026 तक इसकी कैपेसिटी को बढ़ाकर 10 GW तक करने का प्लान है. यह मॉड्यूल हेटरोजंक्शन टेक्नोलॉजी (HJIT) पर बेस्ड है और इसकी एफिशिएंसी 23.1 परसेंट है, जो आम सोलर पैनलों के मुकाबले काफी ज्यादा है. यह दूसरे सोलर पैनलों के मुकाबले कहीं अधिक यूनिट बिजली पैदा करती है. रिलायंस के उठाए गए इस कदम से भारत को क्लीन एनर्जी के अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी. 

क्यों नुवामा को है RIL पर भरोसा?

नुवामा का कहना है कि उनके इंडस्ट्री में चैनलों के मुताबिक, RIL अपने HJT मॉड्यूल को घरेलू मार्केट में बेचने की तैयारी में है क्योंकि बिजली पैदा होने के काम में अभी थोड़ा वक्त लग सकता है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नुवामा में जल ईरानी और उनकी टीम का कहना है कि रिलायंस के न्यू एनर्जी के रोलआउट से न केवल कंपनी के PAT में 50 परसेंट तक का इजाफा होगा, बल्कि 2035 तक कंपनी के नेट-जीरो कार्बन टारगेट को देखते हुए O2C बिजनेस को भी फिर से री-रेट किया जाएगा. रिलायंस का  O2C सेगमेंट (Oil to Chemicals) अभी इसके प्रॉफिट का बहुत बड़ा सोर्स है, जो EBITDA का दो-पांचवां हिस्सा और PAT का आधे से ज्यादा हिस्सा देता है.

रिलांयस के प्लान में ये सारी चीजें भी शामिल

रिलायंस फिलहाल इस इंटीग्रेटेड सोलर फेसिलिटी के साथ 30 GWh बैटरी फैसिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग, और 55 CBG प्लांट्स लगाने का भी प्लान बना रही है. कंपनी का टारगेट 50 CBG प्लांट्स के सेटअप का है.

नुवामा ने अपने नोट में कहा कि अगस्त-सितंबर में होने वाली कंपनी की अगली AGM पर नजर रखें. हम SOTP-बेस्ड टारगेट प्राइस को बढ़ाकर 1,801 रुपये कर रहे हैं – जो कि मार्केट में सबसे अधिक है. मॉड्यूल का प्रॉफिट उम्मीद से ज्यादा हो इसकी संभावनाओं को देखते हुए हम RIL के शेयर पर अपनी ‘Buy’की रेटिंग को बरकरार रखते हैं. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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क्या लिवर भी होता है ट्रांसप्लांट, जानिए इसमें कितना आता है खर्चा और कब पड़ती है इसकी जरूरत?

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Cost of Liver Transplant in India: हम सबने किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट सर्जरी या बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बारे में सुना है. लेकिन जब कोई यह कहता है कि “मुझे लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है”, तो लोगों के चेहरे पर हैरानी और डर झलकने लगता है. ऐसा क्यों? क्योंकि लिवर को लेकर हमारी जानकारी अब भी काफी सीमित है. लिवर हमारे शरीर का वह खामोश सिपाही है, जो हर दिन टॉक्सिन्स से लड़ता है, पाचन में मदद करता है और शरीर को एनर्जी देता है. लेकिन जब यही लिवर कमजोर हो जाए या काम करना बंद कर दे, तो उसका एक ही इलाज बचता है, लिवर ट्रांसप्लांट.

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कब पड़ती है लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत?

लिवर ट्रांसप्लांट तब किया जाता है जब लिवर इतनी बुरी तरह से खराब हो जाए कि वह शरीर के लिए खतरा बन जाए

क्रॉनिक लीवर सिरोसिस होने पर किया जाता है

एक्यूट लिवर फेल्योर (अचानक लिवर का काम बंद कर देना)

लिवर कैंसर (जब कैंसर फैलने लगे और अन्य इलाज काम न आए)

अगर मरीज को भूख नहीं लगती, बार-बार उल्टी होती है, त्वचा या आंखें पीली हो जाती हैं, पेट में पानी भरने लगता है, तो ये संकेत हो सकते हैं कि लिवर फेल हो रहा है और ट्रांसप्लांट पर विचार किया जाना चाहिए

लिवर ट्रांसप्लांट का खर्चा कितना आता है?

लिवर ट्रांसप्लांट एक जटिल और महंगी प्रक्रिया है. भारत में इसका खर्च अस्पताल, शहर और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है

लिवर ट्रांसप्लांट कराने में 20 लाख से 30 लाख तक का खर्च हो सकता है

इसमें सर्जरी, ICU स्टे, दवाएं, टेस्ट और डॉक्टर फीस शामिल होती है

सर्जरी के बाद 6 महीने से 1 साल तक की दवाएं और नियमित जांच की भी जरूरत होती है, जिन पर हर महीने 10,000 से 20,000 तक का खर्च आ सकता है

क्या लिवर डोनेट किया जा सकता है?

एक स्वस्थ व्यक्ति भी अपने लिवर का हिस्सा डोनेट कर सकता है. क्योंकि लिवर का एक हिस्सा भी शरीर में नया लिवर बनने में सक्षम होता है, इसलिए “लिविंग डोनर” ट्रांसप्लांट संभव है. आमतौर पर परिवार के सदस्य ही डोनर बनते हैं.

लिवर ट्रांसप्लांट भले ही डरावना लगे, लेकिन यह आज की आधुनिक चिकित्सा का एक चमत्कार है, जो हजारों जिदगियों को नया जीवन दे रहा है. ज़रूरत है समय पर जांच कराने की, लक्षणों को नजरअंदाज न करने की और अगर कभी जरूरत पड़े तो डरे नहीं, क्योंकि अब लिवर ट्रांसप्लांट संभव है.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा निलंबित, संवैधानिक अदालत इसलिए उठाया बड़ा कदम

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Thailand PM Suspended: थाईलैंड की राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मच गई है. देश की संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को उनके पद से निलंबित कर दिया है. यह फैसला कंबोडिया के साथ राजनयिक विवाद और एक लीक हुई टेलीफोन कॉल के बाद आया है, जिसने थाईलैंड की संसद और सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर भारी राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है. कोर्ट ने 7-2 के बहुमत से यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को 1 जुलाई से उनके कार्यों से निलंबित किया जाता है, जब तक कि इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं आ जाता.

कंबोडिया विवाद और लीक कॉल बनी वजह
यह पूरा विवाद मई 2025 में थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर हुए टकराव के बाद शुरू हुआ, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई थी. इसी दौरान प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न ने कंबोडियाई नेता और पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन को एक टेलीफोन कॉल किया था. यह कॉल हाल ही में लीक हो गई, जिसमें उन्होंने हुन सेन को “अंकल” कहकर संबोधित किया और थाई सेना के एक वरिष्ठ कमांडर को “विरोधी” बताया. इस बयान ने देश के भीतर खासकर सेना और रूढ़िवादी ताकतों के बीच तीखी प्रतिक्रिया पैदा की.

सेना समर्थक सांसदों की याचिका बनी आधार
लीक कॉल के सामने आने के बाद थाई संसद के उन सांसदों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ संवैधानिक अदालत में याचिका दायर की जो सेना के करीबी माने जाते हैं. उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कंबोडिया के सामने झुकने का संकेत दिया और सार्वजनिक रूप से थाई सेना को अपमानित किया. याचिका में कहा गया कि यह व्यवहार मंत्री पद की “नैतिक मर्यादा” और “स्पष्ट ईमानदारी” की संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता, जिससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और सैन्य प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है.

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
हालांकि प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा ने अब तक इस मामले में कोई सीधा सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके प्रवक्ता ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का उद्देश्य सिर्फ क्षेत्र में शांति बनाए रखना और टकराव से बचना था. प्रवक्ता ने कहा कि फोन कॉल के लीक होने और उसे गलत संदर्भ में प्रचारित करने से प्रधानमंत्री बेहद आहत हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करती हैं और जांच में पूरा सहयोग करेंगी.

शिनावात्रा परिवार फिर विवादों में
प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न, पूर्व प्रधानमंत्री थाक्सिन शिनावात्रा की बेटी हैं, जिन्हें 2006 में सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता से हटाया गया था. तब से उनका परिवार लगातार थाई राजनीति में विवादों और सत्ता संघर्ष का केंद्र बना रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह निलंबन सिर्फ एक संवैधानिक या कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सेना और रूढ़िवादी शक्तियों द्वारा एक बार फिर लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को कमजोर करने का प्रयास है. पैतोंगतार्न की सरकार शुरू से ही सेना समर्थित प्रतिष्ठान के विरोध का सामना करती रही है, और अब यह मामला थाईलैंड की लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए एक और चुनौती बन गया है.

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सिंगल फादर होने पर उठे सवाल से टूट गए थे करण जौहर, कहा- ‘मैं कमरे में अकेले बैठकर रोया था’

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Karan Johar On Single Parent: फिल्म मेकर करण जौहर ने शादी नहीं की लेकिन वो सरोगेसी के जरिए 2017 में दो जुड़वा बच्चों के पिता बने. उनकी एक बेटी रूही और बेटा यश है. करण जौहर सिंगल पेरेंट बनकर अपने बच्चों की परवरिश कर रहे हैं. एक बार सोशल मीडिया पर किसी ने करण जौहर पर आरोप लगाया था कि वो अपने बच्चों को मां के प्यार से वंचित रख रहे हैं. अब करण ने बताया है कि वो इस कमेंट से टूट गए थे.

बरखा दत्त को दिए एक हालिया इंटरव्यू में करण जौहर ने सिंगल पेरेंट पर उठे सवाल पर बात की. उन्होंने कहा- इससे मेरा दिल टूट गया. क्योंकि पहली बार, मैंने सिंगल पेरेंट बनने के अपने फैसले पर सवाल उठाया. मेरा मानना ​​है कि मैं उनके लिए सबकुछ बन सकता हूं- ‘एक पेरेंट, उनकी मां, उनका पिता, उनका दादा-दादी. मेरे अंदर वो प्यार है.’

सिंगल फादर होने पर उठे सवाल से टूट गए थे करण जौहर, कहा- 'मैं कमरे में अकेले बैठकर रोया था

‘मैं अपने कमरे में अकेला बैठा और रोया’
करण जौहर आगे कहते हैं- ‘लेकिन उस कमेंट ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या मैंने सही काम किया है. उसी सुबह, जब मैंने वो कमेंट पढ़ा, तो मैं एक पल के लिए टूट गया. मैं अपने कमरे में अकेला बैठा और रोया. मैं उनके (बच्चों के) कमरे में गया और उनसे पूछा कि क्या आप खुश हैं? और उन्होंने कहा कि हां बहुत खुश हैं, दादा. मैंने उनसे पूछा कि क्यों और उन्होंने बस इतना कहा कि क्योंकि आप हमारे दादा हैं.’

सिंगल फादर होने पर उठे सवाल से टूट गए थे करण जौहर, कहा- 'मैं कमरे में अकेले बैठकर रोया था

करण जौहर का वर्कफ्रंट
वर्कफ्रंट पर करण जौहर इन दिनों प्राइम वीडियो पर ‘द ट्रेटर्स’ को होस्ट कर रहे हैं जो 3 जुलाई को खत्म होने जा रहा है. शो का दूसरा सीजन भी अनाउंस हो चुके है. वहीं फिल्म मेकर की अगली फिल्म ‘सरजमीन’ रिलीज के लिए तैयार है. काजोल, पृथ्वीराज सुकुमारन और इब्राहिम अली खान की इस फिल्म का टीजर रिलीज हो चुका है. ‘सरजमीन’ 25 जुलाई को जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम की जाएगी.

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सावधानी हटी, सब्जी पूड़ी बंटी! छत की दीवार पर स्टंट कर रहा था लड़का, तभी बिगड़ा बैलेंस और…

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हवा में उड़ने का ख्वाब देखना आसान है, लेकिन हकीकत की जमीन बहुत सख्त होती है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी खौफनाक सच की गवाही दे रहा है. वीडियो में एक युवक, जिसे अपने स्टंट और बैलेंस पर हद से ज्यादा भरोसा था, वो भरोसा उसे सीधे मौत के मुहाने तक ले जाता है. करीब 8 मंजिला ऊंची इमारत की छत से शुरू हुआ उसका ये ‘एडवेंचर शो’ कुछ ही सेकंड में खून जमा देने वाले हादसे में बदल जाता है. वीडियो देखकर किसी की भी रूह कांप जाएगी. एक गलत कदम, और जिंदगी खत्म.

हवा में फ्लिप मारते वक्त हुआ हादसा

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक कुछ दोस्तों के साथ किसी ऊंची इमारत की छत पर खड़ा है. बताया जा रहा है कि बिल्डिंग करीब 10 मंजिला ऊंची है. युवक जोश में आता है, दौड़ लगाता है और छत की उस दीवार पर चढ़ जाता है जो आमतौर पर सुरक्षा के लिए बनी होती है. वहां से वह हवा में फ्लिप मारने की कोशिश करता है, यानी एक गुलाटी खाकर दोबारा उसी दीवार पर लैंड करने का इरादा रखता है. शायद उसे अपने बैलेंस पर बहुत भरोसा था, लेकिन भरोसे का खेल तब बिगड़ता है जब हवा में उसका संतुलन टूट जाता है.

8 मंजिल से सीधा नीचे गिरा युवक!

जैसे ही वो हवा में घूमता है, उसका शरीर अनियंत्रित हो जाता है और वो सीधा इमारत से नीचे जा गिरता है. जानकारी के मुताबिक युवक करीब 8 मंजिल नीचे गिरता है. वीडियो में उसके दोस्तों की चीखें भी सुनाई देती हैं. पूरा माहौल कुछ ही पलों में सन्नाटा बन जाता है. नीचे गिरते ही आसपास मौजूद लोग उसकी तरफ दौड़ते हैं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. हादसे के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई, हालांकि अभी तक किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ना ही युवक की पहचान सामने आई है और ना ही यह स्पष्ट हो पाया है कि यह हादसा किस शहर में हुआ.

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यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट

वीडियो को सोशल मीडिया पर अलग अलग प्लेटफॉर्म से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…बंट गई सब्जी पूड़ी, कर लो स्टंट. एक और यूजर ने लिखा..अगर ये जिंदा बच गया तो कभी स्टंट करने लायक नहीं रहेगा. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा..इसने खुद अपने लिए मौत को चुना है, अफसोस ना करें, आगे बढ़ें.

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Huawei ने पेश की नई EV बैटरी तकनीक! सिर्फ 5 मिनट में फुल चार्ज, 3,000 KM तक की रेंज

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Huawei EV Battery: हुआवेई ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दुनिया में हलचल मचा दी है. कंपनी ने एक नई EV बैटरी तकनीक का खुलासा किया है जो सैद्धांतिक रूप से एक बार चार्ज होकर 3,000 किलोमीटर तक चलने की क्षमता रखती है और जिसे मात्र 5 मिनट में पूरी तरह से चार्ज किया जा सकता है. इस तकनीक का खुलासा चीन में दायर किए गए एक नए पेटेंट के ज़रिए हुआ है जिसमें एक उन्नत सॉलिड-स्टेट बैटरी डिज़ाइन और तेज़ चार्जिंग की बात की गई है.

इस तकनीक पर तैयार हुई बैटरी

हुआवेई की इस बैटरी में नाइट्रोजन-डोप्ड सल्फाइड इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल किया गया है जिसका मकसद समय के साथ बैटरी के परफॉर्मेंस में गिरावट को कम करना है. कंपनी का दावा है कि इस बैटरी की ऊर्जा घनता (energy density) 400 से 500 Wh/kg तक हो सकती है जो मौजूदा लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में तीन गुना ज़्यादा है. इस स्तर की एनर्जी डेंसिटी से मिड-साइज़ EV कार 3,000 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है, वो भी बिना दोबारा चार्ज किए.

हालांकि, हुआवेई का यह 3,000 किलोमीटर का आंकड़ा CLTC (China Light-Duty Vehicle Test Cycle) पर आधारित है, जिसे अक्सर वास्तविक परिस्थितियों से अधिक बेहतर आंकड़े दिखाने के लिए जाना जाता है. अगर इसे अमेरिका के EPA जैसे ज्यादा सख्त मानकों पर मापा जाए तो यह आंकड़ा लगभग 2,000 किलोमीटर पर आ सकता है जो अब भी मौजूदा EVs से कहीं बेहतर है.

क्या यह तकनीक वाकई व्यावहारिक है?

सिर्फ इतनी बड़ी बैटरी बनाना ही काफी नहीं है, उसे कार में फिट करना और उससे जुड़ी लागत को संतुलित रखना भी बड़ी चुनौती है. हुआवेई की इस तकनीक को अगर उसकी अधिकतम क्षमता पर उपयोग किया जाए तो बैटरी का वजन एक छोटी हैचबैक कार जितना हो सकता है. इससे EVs की वह लागत-कुशलता भी प्रभावित हो सकती है, जो अब तक उन्हें लोकप्रिय बना रही थी.

ज्यादा व्यावहारिक यही होगा कि कंपनियां इस तकनीक को छोटे और हल्के बैटरी पैक बनाने में इस्तेमाल करें, जिनकी रेंज भले ही 800 से 1,000 किलोमीटर हो, लेकिन वे कीमत और परफॉर्मेंस दोनों में संतुलन बनाए रखें. इससे न केवल उत्पादन लागत कम होगी, बल्कि EVs की ड्राइविंग डायनामिक्स और यूज़र एक्सपीरियंस भी बेहतर होगा.

EV तकनीक का भविष्य

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को लंबे समय से ऊर्जा भंडारण की अगली बड़ी छलांग माना जा रहा है. हालांकि, हुआवेई अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में काम कर रही है लेकिन यह तकनीक तभी बड़े स्तर पर उपयोगी होगी जब यह स्केलेबल (व्यापक उत्पादन योग्य), सस्ती और इंटीग्रेट करने में आसान साबित हो.

हुआवेई का यह पेटेंट हमें एक ऐसे भविष्य की झलक देता है जहां इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कारों से भी अधिक सुविधाजनक साबित हो सकते हैं. लेकिन असल चुनौती होगी इस तकनीक को हकीकत में, बजट में और लोगों की जरूरतों के अनुसार लाना. जब तक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कीमत और उपयोग की आदतें नहीं बदलतीं, तब तक 3,000 किमी की रेंज सिर्फ एक तकनीकी कल्पना ही बनी रह सकती है.

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RITES में नौकरी का सुनहरा मौका, कई पदों पर निकली वैकेंसी, 2 लाख मिलेगी सैलरी

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सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे इंजीनियरिंग और प्लानिंग क्षेत्र के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. राइट्स लिमिटेड (RITES Limited) ने कई पदों पर भर्ती का ऐलान किया है. यह भर्ती तकनीकी और योजना से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के लिए की जा रही है. इच्छुक उम्मीदवार राइट्स की आधिकारिक वेबसाइट rites.com पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

किन उम्मीदवारों को मिलेगा मौका?

ये भर्ती अभियान 18 पदों को भरने के लिए चलाया जा रहा है. इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में डिग्री होनी चाहिए. इसके तहत बी.आर्क (B.Arch), बीई/बीटेक (BE/B.Tech), एमई/एमटेक (ME/M.Tech), एमए इन इकोनॉमिक्स या ट्रांसपोर्ट प्लानिंग (MA Economics/Transport Planning), और बी.प्लान (B.Plan) जैसी योग्यताएं मांगी गई हैं. डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से होनी चाहिए.

उम्र सीमा क्या है?

पदों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा 32 से 41 वर्ष तक निर्धारित की गई है. हालांकि एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी.

कितनी देनी होगी आवेदन फीस?

जनरल और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 600 रुपये + टैक्स, जबकि एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और पीडब्ल्यूडी वर्ग को 300 रुपये + टैक्स के साथ आवेदन करना होगा. फीस का भुगतान ऑनलाइन मोड से ही किया जाएगा.

चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

चयन की प्रक्रिया में सबसे पहले उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी. इसके बाद इंटरव्यू, स्किल टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा. अंतिम चयन पूरी प्रक्रिया में प्रदर्शन और मेरिट के आधार पर किया जाएगा.

सैलरी कितनी मिलेगी?

राइट्स लिमिटेड की इस भर्ती में चयनित उम्मीदवारों को हर महीने शानदार वेतन मिलेगा. सैलरी 40,000 रुपये से लेकर 2,00,000 रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है. यह पोस्ट और अनुभव के अनुसार तय की जाएगी.

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आवेदन कैसे करें?

  • आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक साइट rites.com/Career पर जाएं
  • इसके बाद फिर होमपेज पर सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करें
  • अब उम्मीदवार फिर मांगी गई जानकारी भरें
  • फिर उम्मीदवार दस्तावेज अपलोड करें
  • इसके बाद उम्मीदवार फीस जमा करके फॉर्म को सबमिट करें
  • फिर उम्मीदवार फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर सेव रखें

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एजबेस्टन में क्या गिल ब्रिगेड बदल पाएगी 58 साल का इतिहास,क्या है पिच का हाल

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IND vs ENG 2nd Test :  भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला 2 जुलाई से बर्मिंघम के एजबेस्टन में खेला जाएगा. लीड्स के मैदान पर पहला टेस्ट हारने के बाद अब भारतीय टीम पर सीरीज में वापसी का दबाव है, लेकिन चुनौती आसान नहीं है. भारत को न सिर्फ इंग्लिश परिस्थितियों से जूझना है, बल्कि एक ऐसा इतिहास बदलना है जो 58 साल से अटका पड़ा है. एजबेस्टन में भारत ने आज तक कोई टेस्ट मैच नहीं जीता है.

कैसी होगी एजबेस्टन की पिच?

टेस्ट मैच से दो दिन पहले तक एजबेस्टन की पिच पर काफी घास नजर आ रही थी, जिससे ऐसा लग रहा था कि गेंदबाजों को मदद मिल सकती है, लेकिन गर्मी और धूप के कारण मैच से पहले पिच की घास काट दी जाएगी. पिच रिपोर्ट के मुताबिक अब इस पिच पर बल्लेबाजों को रन बनाने में आसानी हो सकती है.

इंग्लैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स जिनके पास 58 टेस्ट मैच खेलने का अनुभव है,उनका मानना है कि एजबेस्टन में बल्लेबाजी के लिए अच्छी पिच होगी. उन्होंने कहा, “लीड्स में हमने 20 विकेट लेकर दिखाया कि हम गेम में कैसे वापसी कर सकते हैं. जब भारतीय बल्लेबाजों ने हमारी टीम पर दबाव बनाया, तो भी हमने लड़ाई नहीं छोड़ी. मुझे यकीन है कि यहां की पिच फिर से बैटिंग फ्रेंडली ही होगी.”

हालांकि वोक्स को लीड्स टेस्ट में केवल एक ही विकेट मिला था, लेकिन जोफ्रा आर्चर और मार्क वुड की गैरमौजूदगी में इस बार उनसे ज्यादा जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि इस बार गेंदबाजों के लिए हफ्ता कठिन हो सकता है.
 
एजबेस्टन का इतिहास 

एजबेस्टन स्टेडियम भारत के लिए एक अभिशापित किला बन गया है. यहां भारत ने अब तक 8 टेस्ट मैच खेले हैं. इनमें से 7 में भारत को हार मिली है, जबकि एक मैच 1986 में ड्रॉ रहा था. यानी भारत ने इस मैदान पर आज तक कोई टेस्ट मैच नहीं जीता है.

2022 में जब भारत ने एजबेस्टन में आखिरी बार टेस्ट खेला था, तब भी स्क्रिप्ट लगभग वही थी जो लीड्स टेस्ट में हुई. भारत ने इंग्लैंड को 373 रन का लक्ष्य दिया और इंग्लैंड ने आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया था.तब कप्तानी जसप्रीत बुमराह के पास थी और इस बार संयोग से वह 2nd टेस्ट में उपलब्ध नहीं हैं. यानी भारत को इस बार बिना बुमराह के एजबेस्टन की चुनौती पार करनी है.

जोफ्रा आर्चर इस बार नहीं खेलेंगे

इंग्लैंड टीम ने दूसरे टेस्ट को लेकर एक चौंकाने वाला फैसला लिया है. चार साल बाद फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर को टीम में जगह नहीं दी गई है. उन्होंने डरहम के खिलाफ हाल ही में ससेक्स के लिए 18 ओवर में 32 रन देकर 1 विकेट लिया था. इसके बाद लग रहा था कि वह भारत के खिलाफ एजबेस्टन में वापसी करेंगे, लेकिन इंग्लैंड ने उन्हें फिलहाल आराम देने का फैसला किया है.

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