दिमाग की नसों में सूजन होने पर शरीर देता है 6 संकेत, लक्षण दिखते ही तुरंत भागें डॉक्टर के पास
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दिमाग की नसों में सूजन होने पर शरीर देता है 6 संकेत, लक्षण दिखते ही तुरंत भागें डॉक्टर के पास
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दिमाग की नसों में सूजन होने पर शरीर देता है 6 संकेत, लक्षण दिखते ही तुरंत भागें डॉक्टर के पास
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Sagittarius Horoscope Today 3 june : धनु राशिफल 3 जून 2025, मंगलवार के दिन आपकी लाइफ में कुछ खास होने जा रहा है. धनु राशि के स्वामी ग्रह शुक्र हैं. ज्योतिष ग्रंथों में इसे कला, प्रेम, सौंदर्य, सौभाग्य आकर्षण और भौतिकता का कारक माना गया है. आइए जानते हैं कि आपकी धनु राशि क्या कहती है.
धनु राशि हेल्थ राशिफल (Sagittarius Health Horoscope)-
धनु राशि वालों को भावुकता से मानसिक तनाव हो सकता है.
धनु राशि फैमली राशिफल (Sagittarius Family Horoscope)-
धनु राशि वालों के बातूनी रवैये से परिवार में झगड़े हो सकते हैं, सावधानी जरूरी. दाम्पत्य जीवन सामान्य रहेगा. पार्टनर की अधिक तवज्जो से समस्या हो सकती है.
धनु राशि लव राशिफल (Sagittarius Love Horoscope)-
धनु राशि वालों की लव लाइफ में कुछ परेशानियां आ सकती हैं. भावनात्मक उतार-चढ़ाव हो सकते हैं.
धनु राशि बिजनेस राशिफल (Sagittarius Business Horoscope)-
धनु राशि वालों के सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ेगी, जिससे लोगों की मदद मिलेगी. खर्चों पर नियंत्रण के लिए पहले से बजट तैयार करें. निवेश या नए प्रोजेक्ट में आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं की जांच कर लें. आज का दिन व्यापारिक निर्णयों के लिए शुभ है.
धनु राशि जॉब राशिफल (Sagittarius Job Horoscope)-
धनु राशि वालों को काम के सिलसिले में अच्छे नतीजे पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी. अधिकारियों का सहयोग प्राप्त करने की कोशिश करें. धनु राशि वालों को कामकाज से भी जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है.
शुभ अंक: 3
शुभ रंग: पीला
उपाय: गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और पीले वस्त्र धारण करें.
FAQs
Q1. क्या धनु राशि वालों को कारोबार बढ़ाने के लिए मेहनत करनी होगी?
A1. हां, धनु राशि वालों को कारोबार बढ़ाने के लिए मेहनत करनी होगी.
Q2. क्या धनु राशि वालों को कोई अच्छी खबर मिल सकती है?
A2. हां, धनु राशि वालों को कोई अच्छी खबर मिल सकती है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरुर लें.
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Riddhima Kapoor Completes Shooting: बॉलीवुड के कपूर खानदान की एक और लाडली बेटी फिल्मों में जल्द ही एंट्री लेने वाली हैं. ये कोई और नहीं बल्कि रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की बड़ी बहन रिद्धिमा कपूर साहनी (Riddhima Kapoor) हैं. जो पिछले कई दिनों से पहाड़ों में अपनी डेब्यू फिल्म की शूटिंग कर रही थी. अब उनकी शूट कंपलीट हो चुका है. जिसके बाद रिद्धिमा ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की और साथ में एक भावुक नोट भी लिखा.
नीतू कपूर और कपिल के साथ शेयर की रिद्धिमा ने फोटो
रिद्धिमा कपूर ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मां नीत कपूर और कपिल शर्मा के साथ एक प्यारी सी फोटो शेयर की है. जिसमें फिल्म की हीरोइन भी नजर आ रही हैं. चारों की ये फोटो शूटिंग की हैं. जिसमें वो ट्रेडिशनल लुक में दिखे. फोटो शेयर कर रिद्धिमा ने लिखा कि, ‘शाइनी पीपल्स..शूट डायरी, शिमला, सेट से फोटो..’
रिद्धिमा की डेब्यू फिल्म की शूटिंग हुई पूरी
वहीं इससे पहले रिद्धिमा ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा था कि, ’ हर पहली चीज हमेशा खास होती है..52 दिन के लिए 200 लोगों ने काम किया. हम सबने साथ में खूब मस्ती की, रोए, काम किया. अब आपके साथ थिएटर्स में जुड़ने के लिए हम इंतजार नहीं कर सकते.’
कपिल शर्मा ने भी दिखाई थी सेट की झलक
कपिल शर्मा ने भी कुछ दिन पहले फिल्म के सेट से एक फोटो शेयर की थी. इस फोटो में वो पत्नी गिन्नी चतरथ, रिद्धिमा, नीतू कपूर, सादिया के साथ नजर आ रहे थे. इस पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा था कि, ‘मुस्कुराहटें, कहानियां और पर्दे के पीछे का ढ़ेर सारा प्यार..’
बताते चलें कि रिद्धिमा कपूर ने खुद फिल्मों में अपने डेब्यू पर खुलासा किया था. उन्होंने एक इंटरव्यू में फिल्म का नाम तो नहीं लिया था कि लेकिन कहा था कि, ‘मैं पहाड़ों में एक फिल्म की शूटिंग कर रही हूं. मैं बस इतना कह सकती हूं कि हम जून तक यहां शूटिंग करेंगे.”
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<p style="text-align: justify;">यूक्रेन (Ukraine) ने रूस पर ट्रोजन-हॉर्स रणनीति का इस्तेमाल करके बड़ा नुकसान पहुंचाया है, इसके लिए यूक्रेन ने महीनों पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी. अब नतीजा पूरी दुनिया के सामने है. इस युद्ध रणनीति के तहत यूक्रेन ने ट्रकों और ड्रोन से बड़ा हमला किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">जिससे रूस (Russia) हिल गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ट्रोजन-हॉर्स रणनीति नई नहीं है, महाभारत के युद्ध में भी ऐसी रणनीति का प्रयोग किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, कह सकते हैं यूक्रेन ने जिस रणनीति को अपना कर युद्ध में रूस को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है वैसे रणनीति से भारत बहुत पहले से परिचित है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ट्रोजन हॉर्स क्या होता है? </strong><br />’ट्रोजन हॉर्स’ यानी ऐसा धोखा जिसे शत्रु उपहार समझकर स्वीकार कर ले और वही उसके विनाश का कारण बन जाए. यह युद्ध नीति महाभारत और ग्रीक महाकाव्य इलियड (Iliad) से प्रेरित है, जहां यूनानियों ने एक विशाल लकड़ी के घोड़े में सैनिकों को छिपा कर ट्रॉय नगर पर आक्रमण किया था.</p>
<p style="text-align: justify;">आज के दौर में यह रणनीति आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर और भी खतरनाक हो गई है. बीते दिन यूक्रेन ने ड्रोन को ट्रकों में छिपाकर रूस के अंदर एयरबेस पर हमला किया जो ट्रोजन हॉर्स की आधुनिक मिसाल है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महाभारत में ट्रोजन हॉर्स जैसी कौन-कौन सी रणनीतियां अपनाई गईं?</strong><br />महाभारत का युद्ध जो 18 दिनों तक चला. ऐसा माना जाता है कि महाभारत के युद्ध में करीब 1 अरब 66 करोड़ 20 हजार योद्धाओं की मौत हुई. इस युद्ध में 24,165 योद्धाओं का पता नहीं चला है. महाभारत के युद्ध में पांडव और कौरवों तरफ से 18 अक्षौहिणी सेनाओं ने भाग लिया था. </p>
<p style="text-align: justify;">महाभारत के युद्ध में अश्वत्थामा की ‘झूठी मृत्यु’ की खबर एक संधि का परिणाम थी. इस युद्ध में द्रोणाचार्य युद्ध में अपराजेय हो रहे थे. उन्हें युद्ध से हटाने के लिए युधिष्ठिर ने एक अर्धसत्य कहा गया जिसकी चर्चा आज भी होती है ‘अश्वत्थामा मारा गया’.</p>
<p style="text-align: justify;">महाभारत में एक जगह श्लोक मिलता है ‘अश्वत्थामा हतः इति नार: कुंजरो वा’ जिसका अर्थ है कि अश्वत्थामा मारा गया है… लेकिन हाथी. लेकिन यह बात द्रोणाचार्य ने पूरी नहीं सुनी. उन्होंने यह मान लिया कि उनका पुत्र मारा गया है और उन्होंने अस्त्र-शस्त्र छोड़ दिए.</p>
<p style="text-align: justify;">यही छल उनकी मृत्यु का कारण बना. क्योंकि द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम भी अश्वत्थामा था. द्रोणाचार्य को ये भ्रम इसलिए हुआ क्योंकि ये बाद धर्मराज युधिष्ठिर ने कही थी जो सदैव सत्य बोलने के लिए जाने जाते हैं. यह एक शुद्ध मानसिक ट्रोजन हॉर्स था, जहां भ्रम फैलाकर जीत सुनिश्चित की गई. रूस-यूक्रेन युद्ध में भी यही स्थिति देखी गई.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महाभारत की चक्रव्यूह नीति</strong><br />चक्रव्यूह के बारे में सभी जानते हैं कि यह एक जटिल युद्ध रणनीति थी, जिसमें प्रवेश करना तो आसान था लेकिन बाहर निकलना लगभग असंभव. अभिमन्यु को इसकी पूरी जानकारी नहीं थी, फिर भी उसे अंदर भेजा गया.</p>
<p style="text-align: justify;">यह रणनीति पांडवों की नहीं, कौरवों की ट्रोजन शैली थी, जहां एक योद्धा को फंसाकर उसे निष्क्रिय कर मार दिया गया. महाभारत की ये घटना बताती है कि युद्ध केवल शक्ति से नहीं, रणनीति से भी जीता जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कर्ण से कवच-कुंडल छीनने की चाल</strong><br />दानवीर कर्ण को वरदानस्वरूप जन्म से कवच और कुंडल मिले थे, जो उसे अजेय बनाते थे. उसे कोई भी हरा नहीं सकता था. देवता भी नहीं. एकबार इंद्रदेव ने एक ब्राह्मण बनकर उससे दान में कवच और कुंडल मांग लिए. देखा जाए तो यह दान, एक देवताओं की एक ‘ट्रोजन चाल’ थी ताकि अर्जुन समय आने पर महाभारत के युद्ध में पराजित कर सके.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या ये रणनीतियां शास्त्र-सम्मत थीं?</strong><br />अब प्रश्न उठता है कि क्या छल- धोखेबाजी से भरी ये चाले जायज थीं? इस पर महाभारत में कहा गया है ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ यानी युद्ध का धर्म ही उसकी दिशा तय करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">जब अधर्म बढ़े, तो अधर्म को हराने के लिए युक्ति धर्म बन जाती है. यानि जब लक्ष्य धर्म की स्थापना हो, तो रणनीति यहां तक की छल भी सत्य बन जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>फिर से लौट रही हैं युद्ध की पुरानी चालें!</strong><br />ड्रोन हमलों, साइबर अटैक, फेक इंफॉर्मेशन और AI आधारित डिसइंफॉर्मेशन सभी आधुनिक ट्रोजन हॉर्स की शक्लें हैं. यूक्रेन ने रूस के एयरबेस पर हमले के लिए जो ड्रोन स्ट्रेटजी अपनाई वह महाभारत के युद्ध में अपनाई गई छल और कौशल की एक तकनीकी झलक है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>महाभारत की युद्ध रणनीतियां आज भी जीवित है, बस माध्यम बदल गया है!</strong><br />महाभारत सिखाता है कि युद्ध (War) केवल शस्त्रों से नहीं, रणनीति, मनोविज्ञान और युक्तियों से भी युद्ध जीता जाता है. ये सत्य है कि आज विश्व में चाहे वो रूस-यूक्रेन हो या साइबर वॉर, महाभारत की युद्ध-नीति पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक लगने लगीं है. </p>
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स्टॉक मार्केट में निवेश करने वाले अक्सर ऐसे शेयरों की तलाश में रहते हैं, जो उन्हें उनके निवेश का कई गुना रिटर्न दे सकें. ऐसा ही एक स्टॉक BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट ITCONS e-Solutions है. यह शेयर निवेशकों के लिए मल्टीबैगर साबित हुआ है.
मार्च 2023 में 51 के इश्यू प्राइस पर लिस्ट हुए इस शेयर ने महज दो साल में 1,178 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है. यहां तक कि आज कमजोर बाजार के बावजूद यह शेयर हरे निशान में रहा और इंट्राडे में 514.50 के स्तर को छू लिया.
लॉन्ग टर्म में शानदार परफॉर्मेंस
पिछले एक साल में यह शेयर 886 फीसदी चढ़ा है, हालांकि इस साल (YTD) अब तक 20.57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. इस गिरावट के बावजूद आईपीओ ऑलॉटीज को इस शेयर ने भारी मुनाफा दिया है.
कंपनी का फाइनेंशियल हाल
ITCONS e-Solutions ने FY25 में अपना रेवेन्यू पिछले साल के 28.73 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़ाकर 57.06 करोड़ रुपये कर लिया. कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 1.90 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.20 करोड़ रुपये हो गया, जबकि EPS 5.23 रुपये रही.
नए बिजनेस सेगमेंट से मिली ताकत
कंपनी ने IT मैनपावर सर्विसेज के अलावा Technical Testing और IT Asset Management Consulting जैसे नए सेगमेंट में एंट्री की, जिससे 13 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जनरेट हुआ. सरकारी प्रोजेक्ट्स में कंपनी ने खासी तरक्की की है और गवर्नमेंट क्लाइंट्स की संख्या 2 से बढ़कर 21 हो गई है.
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
इस शेयर ने छोटे निवेशकों को बड़ा मुनाफा दिया है, लेकिन इस साल की गिरावट को देखते हुए नए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है. अगर कंपनी अपने नए बिजनेस सेगमेंट में ग्रोथ जारी रखती है तो भविष्य में भी अच्छे रिटर्न की संभावना बनी रह सकती है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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Rajeev Shukla Statement: इंडियन प्रीमियर लीग 2025 का फाइनल मुकाबला पहले कोलकाता के ईडन गार्डन्स स्टेडियम में होना था, लेकिन अब बेंगलुरु और पंजाब किंग्स के बीच फाइनल मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाला है. अब इसे लेकर BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने IPL फाइनल मैच का स्थान बदले जाने पर कहा, “जो मैच शिफ्ट किए गए हैं, उसमें किसी भी तरह की राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए, किसी राजनीतिक भावना से ये फैसला नहीं लिया गया है.
अगर IPL शेड्यूल एक हफ्ते के लिए टाला नहीं होता, तो फाइनल कोलकाता में और प्लेऑफ हैदराबाद में होता. जब शेड्यूल बदला गया, तो मौसम की स्थिति को देखा गया और ब्रॉडकास्टर ने मजबूती से यह बात रखी कि उन दिनों कोलकाता का मौसम पूर्वानुमान खराब है और उन दिनों मैच धुल सकता है, इसलिए मैच ऐसी जगह पर होना चाहिए, जहां बारिश की आशंका कम हो. सभी जगहों को देखा गया और मौसम की रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ और अहमदाबाद में बारिश की सबसे कम उम्मीद थी. इसलिए मैच शिफ्ट किया गया. राजीव शुक्ला ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ कोलकाता की बात है, हैदराबाद से भी मैच शिफ्ट किए गए, ऐसा पहले भी हो चुका है. इसके पीछे कोई राजनैतिक उद्देश्य नहीं है.”
यह खबर अपडेट हो रही है…
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उत्तर प्रदेश पुलिस को अब नया नेतृत्व मिल गया है. 1991 बैच के आईपीएस अफसर राजीव कृष्ण को यूपी का नया डीजीपी (पुलिस प्रमुख) बनाया गया है, पूरे राज्य में चर्चा शुरू हो गई. जहां एक तरफ पुराने डीजीपी प्रशांत कुमार रिटायर हुए, वहीं दूसरी तरफ राजीव कृष्ण ने यूपी पुलिस की कमान अपने हाथों में ली.
कौन हैं राजीव कृष्ण?
राजीव कृष्ण मूल रूप से गौतमबुद्ध नगर जिले के रहने वाले हैं. उनका जन्म 26 जून 1969 को हुआ था. पढ़ाई में शुरुआत से ही होशियार राजीव ने आईआईटी रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री ली. 1985 से 1989 तक उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. हालांकि, दिल में कुछ और ही सपना था. इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की और 1991 में वह आईपीएस बन गए.
तीन दशक की बेदाग सेवा
राजीव कृष्ण ने 15 सितंबर 1991 को यूपी पुलिस में सेवा शुरू की. अपने करियर में वे मथुरा, इटावा, फर्रुखाबाद, बुलंदशहर, आगरा, नोएडा और लखनऊ जैसे जिलों में पुलिस कप्तान रह चुके हैं. लखनऊ में एसपी, आगरा में डीआईजी और मेरठ में आईजी के रूप में भी उन्होंने काम किया. इसके अलावा, वह आईजी पीएसी हेडक्वार्टर और मध्य जोन की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं.
BSF में भी निभाई अहम भूमिका
राजीव कृष्ण ने केवल यूपी पुलिस में ही नहीं, बल्कि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) में भी बड़े पदों पर काम किया है. वह इंडो-पाक और इंडो-बांग्लादेश बॉर्डर पर चार साल तक तैनात रहे. जम्मू-कश्मीर में भी उन्होंने बीएसएफ के आईजी के रूप में सेवा दी. उनके नेतृत्व में सेंसर बेस्ड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया गया.
राजीव कृष्ण की अगुवाई में यूपी में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) की शुरुआत हुई. आतंकवाद के खिलाफ उनके काम की खूब सराहना हुई और उन्हें दो बार राष्ट्रपति का गैलेंट्री अवॉर्ड मिला.
11 सीनियर अफसरों को पछाड़कर बने DGP
राजीव कृष्ण को डीजीपी बनाने के लिए राज्य सरकार ने 11 सीनियर अफसरों को पीछे छोड़ा. उनकी साफ छवि, तेज निर्णय क्षमता और भरोसेमंद नेतृत्व के कारण उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी गई. वर्तमान में उनकी सेवा से रिटायरमेंट में अभी 4 साल 1 महीना बाकी है यानी वह जून 2029 तक यूपी पुलिस की कमान संभाल सकते हैं.
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Google Calendar: अब हैकर्स की नज़र आपके Google Calendar पर है. एक खतरनाक मालवेयर सामने आया है जिसका नाम है TOUGHPROGRESS और इसका मुख्य निशाना है सरकारी वेबसाइटों पर हमला कर उन्हें ब्लैकमेल करना. इस मालवेयर का इस्तेमाल कर हैकर्स सिस्टम का एक्सेस छीन लेते हैं और फिर बदले में फिरौती की मांग करते हैं.
Google की थ्रेट इंटेलिजेंस टीम के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब TOUGHPROGRESS चर्चा में आया है. इससे जुड़ी पहली घटना अक्टूबर 2024 में रिपोर्ट हुई थी जब APT41 नाम के एक हैकर ग्रुप ने इसका इस्तेमाल किया था. अब यही ग्रुप Google Calendar जैसे एप्स का सहारा लेकर सुरक्षा प्रणालियों को भेदने की कोशिश कर रहा है.
Google की साइबर सिक्योरिटी टीम के मुताबिक, यह मालवेयर आमतौर पर फिशिंग ईमेल के ज़रिए फैलाया जाता है. पीड़ित को ऐसा ईमेल भेजा जाता है जिसमें एक संदिग्ध वेबसाइट का लिंक होता है. जैसे ही यूज़र उस लिंक को खोलता है, एक ZIP फाइल डाउनलोड होती है जिसमें नकली PDF और इमेज फाइल्स होती हैं. इन्हीं के ज़रिए मालवेयर एक्टिवेट हो जाता है.
एक बार जब TOUGHPROGRESS सिस्टम की सुरक्षा को चकमा दे देता है, तो यह Google Calendar तक पहुंच बना लेता है. फिर यह ऐप में फर्जी इवेंट्स बना कर उनमें कोड या कमांड्स छिपा देता है जिनके जरिए वह सिस्टम पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करता है. APT41 ग्रुप इससे पहले Google Drive और Google Sheets जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स का इस्तेमाल कर सरकारी डिपार्टमेंट्स को निशाना बना चुका है. अब उन्होंने Calendar ऐप को भी अपने टूलकिट में शामिल कर लिया है.
Google ने पुष्टि की है कि उन्हें इस हमले की जानकारी है और Calendar ऐप से जुड़ी खामी को ठीक कर दिया गया है. जिन संस्थानों को निशाना बनाया गया था उन्हें भी सूचित कर दिया गया है. हालांकि, Google यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि अब तक कितनी क्षति हो चुकी है.
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आईपीएल सिर्फ क्रिकेट का खेल नहीं, एक इमोशन है, एक फेस्टिवल है और कभी-कभी ये इमोशन कुछ लोगों पर इतना हावी हो जाता है कि वो स्टेडियम की सीमा लांघकर सीधे दिलों तक पहुंच जाते हैं. अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को ही देख लीजिए, जहां एक क्रिकेट प्रेमी ने सिर्फ मैच का टिकट नहीं खरीदा था, बल्कि जैसे लगता है, प्यार का पास भी ले लिया था.
मैदान में तो खिलाड़ी गेंद-बल्ले से भिड़ते रहे, लेकिन दर्शक दीर्घा में बैठे इस बंदे ने दिल जीतने का खेल खेल लिया और वो भी स्टाइल में! चॉकलेट दी, हाथ मिलाया, और बदले में मिली फ्लाइंग किस. अब भला इससे ज्यादा ‘पैसे वसूल’ पल क्या हो सकता है? जी हां, इन जनाब ने चीयर लीडर के साथ कुछ ऐसा किया कि हर कोई बस देखता रह गया.
ये वीडियो सोशल मीडिया पर बिजली की तरह वायरल हो गया है, जिसमें एक नौजवान स्टेडियम में दर्शक दीर्घा में बैठा है और सामने खड़ी एक चीयरलीडर की ओर देख रहा है. तभी वो जेब से एक चॉकलेट निकालता है और मुस्कुराते हुए उसे चीयरलीडर की ओर बढ़ा देता है. दोनों के बीच एक जाली लगी है, लेकिन नजरों और मुस्कानों के बीच कोई दीवार नहीं होती.
यह भाई मैच देखने गया था
लेकिन टिकट के पैसे वसूल करके आया हैऐसी किस्मत हर किसी की कहां होती है pic.twitter.com/ork9UnwkNg
— Rupali Gautam (@Rupali_Gautam19) June 1, 2025
वीडियो में आगे देखा जा सकता है कि शख्स धीरे से अपना हाथ जाली से बाहर निकालता है और जैसे ही चीयरलीडर उसकी ओर देखती है, वह भी मुस्कराते हुए उसका हाथ थाम लेती है. बस फिर क्या था, स्टेडियम की भीड़ में हलचल मच जाती है, कैमरे वाले लोग उधर फोकस करते हैं, और तभी चीयरलीडर हवा में एक फ्लाइंग किस उछाल देती है सीधे उस शख्स के नाम.
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वीडियो को एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है, जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है तो वहीं कई लोग वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन भी दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…भाई का तो फुल पैसा वसूल हो गया. एक और यूजर ने लिखा….भाई का तो दिन बन गया होगा आज. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…अच्छा हुआ पुलिस वालों ने नहीं देखा वरना भूत बना देते.
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Russia-Ukraine War: यूक्रेन ने रूस पर ट्रोजन-हॉर्स रणनीति का इस्तेमाल करके ट्रकों और ड्रोन से बड़ा हमला किया है. यह हमले भारत जैसे देशों के लिए भी खतरे की बात है क्योंकि भारत में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से बहुत सारे ट्रक और गाड़ियां व्यापार के लिए आती हैं. कुछ साल पहले तक पाकिस्तान से भी ट्रक लेकर सामान पंजाब के अटारी-वाघा बॉर्डर और जम्मू-कश्मीर आता था.
रविवार को यूक्रेन ने रूस के पांच अलग-अलग इलाकों में बहुत सारे एफपीवी ड्रोन से हमला किया. स्वार्म ड्रोन यानी ड्रोन के झुंडों ने रूस के चार बड़े और महत्वपूर्ण एयरबेस को बहुत नुकसान पहुंचाया. ये ड्रोन रूस के अंदर 600 किलोमीटर तक दूर जाकर हमला कर सके. यूक्रेन की खुफिया एजेंसी एसबीयू ने पिछले डेढ़ साल से इस हमले की तैयारी की थी.
ग्रीस की पौराणिक कथा से ली हमले की प्रेरणा
ग्रीस की विश्व-प्रसिद्ध पौराणिक कथा, ट्रोजन-हॉर्स से प्रेरणा लेते हुए यूक्रेन ने इन ड्रोन को रूस के भीतर पहुंचा दिया. यूक्रेन को पता था कि सीमावर्ती एयर-स्पेस में रूस का एयर-डिफेंस बेहद मजबूत है. ऐसे में बॉर्डर एरिया से बड़ी संख्या में ड्रोन को फ्लाई कर रूस के एयरबेस तक अटैक करने के लिए पहुंचाना टेढ़ी खीर हो सकती है. ऐसे में यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसी ने सड़क के रास्ते बड़ी संख्या में सिविलयन ट्रकों को रूस के पांच अलग-अलग प्रांतों में पहुंचा दिया.
यूक्रेन के इन ट्रकों में फाल्स-सीलिंग तैयार की गई. इन फाल्स सीलिंग में यूक्रेन ने स्वार्म ड्रोन छिपाकर रख दिए थे. ये ड्रोन, बम और दूसरे एक्सप्लोजिव मटेरियल से लैस थे. बॉर्डर पुलिस को गच्चा देकर यूक्रेन ने इन ट्रकों को रूस के चार स्ट्रेटेजिक एयरबेस के करीब ले जाकर खड़ा कर दिया. फिर रिमोट के जरिए दूर से ही ट्रकों की सीलिंग खोलकर स्वार्म ड्रोन्स से रूसी एयरबेस पर खड़े स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स पर हमला कर दिया. ड्रोन अटैक में रूस के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विमान धूधू कर जल उठे. रूस के पांच अलग-अलग एयरबेस पर एक ही मोडस-ऑपरेंडी के जरिए हमले किए गए. यूक्रेन ने इस ऑपरेशन को स्पाइडर-वेब नाम दिया है.
पांच मिलिट्री एयरफील्ड पर हुआ हमला
ग्रीस की मशहूर कहानी ट्रोजन-हॉर्स से प्रेरणा लेकर यूक्रेन ने ड्रोन को रूस के अंदर भेजा. यूक्रेन को पता था कि सीमा के पास रूस का हवाई रक्षा सिस्टम बहुत मजबूत है इसलिए सीधे ड्रोन उड़ाकर रूस के एयरबेस तक पहुंचाना मुश्किल था. इस वजह से यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने सड़क के रास्ते बहुत सारे सिविलियन ट्रकों को रूस के पांच अलग-अलग इलाकों में भेजा.
इन ट्रकों की बाहर से सीलिंग (ढक्कन) को धोखा देने वाला बनाया गया था. ट्रकों के अंदर ड्रोन छिपाए गए थे, जिनमें बम और विस्फोटक सामग्री भी थी. बॉर्डर पुलिस को धोखा देकर यूक्रेन ने इन ट्रकों को रूस के चार बड़े और महत्वपूर्ण एयरबेस के पास खड़ा कर दिया. फिर दूर से रिमोट कंट्रोल से ट्रकों की सीलिंग खोलकर ड्रोन को छोड़ा गया और ड्रोन ने रूसी एयरबेस पर खड़े बॉम्बर्स पर हमला किया. इस ड्रोन हमले में रूस के परमाणु हथियार ले जाने वाले विमान जल गए. रूस के पांच अलग-अलग एयरबेस पर एक ही तरह के हमले किए गए. यूक्रेन ने इस ऑपरेशन का नाम “स्पाइडर-वेब” रखा है.
रूस के 40 स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स को किया तबाह
रूस ने खुद माना है कि यूक्रेन के हमले में पांच मिलिट्री एयरफील्ड को नुकसान हुआ है. ये एयरफील्ड मुरमांस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रेयजन और अमुर इलाके में हैं. रूस का कहना है कि इवानोवो, रेयजन और अमुर में आने वाले सभी एफपीवी (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन को रोक लिया गया था, लेकिन मुरमांस्क और इरकुत्स्क में कई हवाई जहाज नुकसान में आए हैं. रूस का दावा है कि इन हमलों में कोई सैनिक घायल या मारा नहीं गया है. रूस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है.
यूक्रेन ने इस हमले के दौरान रूस के एक न्यूक्लियर सबमरीन बेस के पास भी हमला किया. इसके अलावा, कुर्स्क और ब्रायेंस्क इलाके में यूक्रेन ने बम गिराकर रूस के रेलवे ब्रिज को तोड़ दिया, जिससे दो बड़े ट्रेन हादसे हुए.
जानें क्या है पर्ल हार्बर अटैक
दिसंबर 1941 में हुआ पर्ल हार्बर हमला, द्वितीय विश्व युद्ध की एक बहुत बड़ी घटना थी, जो आज भी इतिहास में याद की जाती है. जापान ने सुबह 7 बजकर 48 मिनट पर अचानक हवाई हमला किया. यह हमला हवाई द्वीप के ओआहू पर स्थित अमेरिकी नौसेना के पर्ल हार्बर बेस पर किया गया था. इस हमले में जापान की नेवी के 177 हवाई जहाजों ने बेस को निशाना बनाया था.
चार बड़े युद्धपोतों को बनाया था निशाना
जापान का मकसद था कि अमेरिकी नौसेना की पैसिफिक फ्लीट को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जाए, ताकि उसी दिन दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रिटिश, डच और अमेरिकी इलाकों पर जापान के हमलों को रोका न जा सके. पहले हमले में उन्होंने हैंगर पर बम गिराए और पार्क किए गए हवाई जहाजों को निशाना बनाया. साथ ही हार्बर में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों पर टॉरपीडो भी दागे गए. हमले के पहले पांच मिनट में चार बड़े युद्धपोतों को निशाना बनाया गया, जिनमें यूएसएस ओक्लाहोमा और यूएसएस एरिजोना शामिल थे. कुछ ही समय बाद एरिजोना में एक बम बारूद के गोदाम पर गिरा, जिससे जहाज डूब गया और 1,177 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई.
यह हमला यहीं खत्म नहीं हुआ. एक घंटे बाद जापान के 163 और हवाई जहाजों ने दूसरा हमला किया. दो घंटे के अंदर 21 अमेरिकी युद्धपोत डूब गए या क्षतिग्रस्त हो गए, 188 हवाई जहाज तबाह हो गए और 2,403 अमेरिकी सैनिक और महिलाएं मारे गए. इनमें से कई जहाजों की मरम्मत की गई और बाद में युद्ध में उनका इस्तेमाल भी हुआ.
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