IPL फाइनल से पहले वायरल हो रही विराट कोहली की ये तस्वीर, अय्यर को चिढ़ाने पर खूब मजे ले रहे लोग

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Trending News: आईपीएल 2025 का फाइनल जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, वैसे-वैसे माहौल सिर्फ क्रिकेट का नहीं, जज्बातों का बनता जा रहा है. मैदान में सिर्फ बल्ला और गेंद नहीं, ईगो और हंसी का हिसाब भी बराबर होने जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर ने जैसे पूरे मुकाबले को ‘पर्सनल’ बना दिया है. इसमें विराट कोहली श्रेयस अय्यर का मजाक उड़ाते हुए और उन्हें चिढ़ाते हुए नजर आ रहे हैं और अब फैंस कह रहे हैं- “आज का फाइनल तो बदला लेने वाला है, बस खेल नहीं ये पूरी की पूरी फिल्म है.” वायरल हो रही तस्वीर इसी सीजन की है जो कि अब इस फाइनल के पर्सनल होने का सबब बन चुकी है.

वायरल हो रही श्रेयस और विराट कोहली की ये तस्वीर

दरअसल, आईपीएल के इसी सीजन के एक लीग मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को हरा दिया था. इस मैच में विराट कोहली शानदार खेल दिखाते हुए मैच को एक तरफा ला खड़ा किया था. फिर जीतने के बाद विराट ने श्रेयस अय्यर को गजब अंदाज में चिढ़ाया भी था.


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अब इसी तस्वीर को सोशल मीडिया पर यूजर्स ट्रेंड करा रहे हैं और श्रेयस को सलाह दे रहे हैं कि लोहा गर्म है और ये हथौड़ा मारने का एक दम ठीक समय है. इंटरनेट पर आईपीएल 2025 का मुकाबला अब केवल मुकाबला नहीं रह गया है बल्कि इसे पर्सनल ईगो और भड़ास निकालने का जरिया बनाने की पूरी कोशिश यूजर्स करते दिखाई दे रहे हैं.

बदले का वक्त है, बोले यूजर्स

तस्वीर को सोशल मीडिया पर अलग अलग प्लेटफॉर्म से शेयर किया जा रहा है, जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने इसे लाइक भी किया है. अब ऐसे में RCB और PBK के फैंस भी खासे जोश में दिखाई दे रहे हैं और तरह तरह के रिएक्शन देते नजर आ रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…कुछ भी कर लो, जीतेगी तो आरसीबी ही. एक और यूजर ने लिखा…पंजाब किंग्स फाइनल में विराट का गुरूर तोड़ेगी. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…ये फाइनल नहीं फुल ऑन बदले का वक्त है.

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India-Pakistan: मंगल-केतु की युति भारत-पाक सिंधु विवाद की चिंगारी को देगी हवा, जानें हिमाचल के

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India-Pakistan: 7 जून 2025 को मंगल का सिंह राशि में प्रवेश होने वाला है, जहां केतु पहले से ही विराजमान है. ऐसे में सिंह राशि में मंगल और केतु की युति बनेगी और यह युति 28 जुलाई 2025 तक बनी रहेगी. मंगल-केतु की इस युति का भारत-पाकिस्तान सिंधु विवाद पर क्या प्रभाव पड़ेगा. भारत और पाकिस्तान में से कौन उखाड़ेगा गड़े मुर्दे, जो बनेंगे युद्धजन्य परिस्थितियों का कारण. क्या फिर से पाकिस्तान मुंह की खाएगा, जानते हैं ज्योतिष के माध्यम से.

क्या फिर से आतंकी गतिविधियो को अंजाम देगा पाकिस्तान

पाकिस्तान की मेष लग्न की कुंडली में पंचम भाव में यह युति बनने वाली है, जिसमें मंगल लग्न और अष्टम भाव का स्वामी है. लग्न अर्थात स्वयं पाकिस्तान और अष्टम भाव अर्थात गहरे जल स्थान का भाव. इन दोनों का स्वामी मंगल अग्नि तत्व की राशि में जाकर केतु से पीड़ित है. यह युति पाकिस्तान के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं कही जा सकती है. पंचम भाव में केतु मंगल पाकिस्तान के दिमाग में फिर किसी आतंकी गतिविधियो को अंजाम देने के संकेत दे रहे हैं और यह जल संबंधित विवाद होने की प्रबल संभावना है.

जैसा कि सिंधु नदी को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है और यह विवाद पाकिस्तान के लिए एक कड़ी चुनौती बन गया है जिसे पार कर पाना पाकिस्तान के लिए असंभव सा प्रतीत होता है. इसी को लेकर पाकिस्तान कुछ गड़े मुर्दे उखाड़ने का प्रयास कर सकता है. सिन्धु और POK की शर्त पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी समस्या है जिसे सुलझाने में पाकिस्तान समर्थ ही रहेगा. भारत सरकार के अनुसार POK और सिंधु जल समझौते के अलावा और कोई बात नहीं होगी. पाकिस्तान POK देने के लिए मानेगा नहीं और बिना POK के अभी भारत पाकिस्तान को जल नहीं देगा.

मंगल केतु की युति इस विवाद की चिंगारी को हवा देने वाली है, पाकिस्तान अपनी बेबुनियाद जिद्द पर अड़ा रहेगा और भारत पर पुनः आतंकी हमला करने का प्रयास कर सकता है. इस समय पाकिस्तान भारत पर अचानक हमला कर के भारत की सुरक्षा पर कुछ समय के लिए हावी होता प्रतीत होने लगेगा, लेकिन पाकिस्तान की गर्दन शीघ्र ही भारतीय सेना के हाथ में आ जाएगी. सिन्धु जल विवाद अभी सुलझता नजर नहीं आ रहा है, लेकिन  गोचरीय स्थिति पाकिस्तान के लिए अच्छी नहीं हैं.

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[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

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जैश सरगना मसूद अजहर का करीबी एजाज इसार मारा गया, PoK टैरर कैंप का था चीफ

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Jaish-e-Mohammed: जैश ए मोहम्मद के सेंट्रल सूरा के सदस्य और टॉप कमांडर अब्दुल ऐज़ाज़ इसार की अज्ञात कारणों से कल सुबह (2 जून) को 10:30 बजे मौत हो गई. ये मसूद अजहर का करीबी था. अब्दुल ऐज़ाज़ इसार जैश के सेंट्रल सूरा के सदस्य के अलावा PoK के गिलगिट बलिटिस्टान प्रांत के टैंगर इलाके में स्थित जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैम्प मरकज तालीम का भी प्रमुख था.

कल रात 8 बज कर 48 मिनट पर जैश के ध्वस्त हेडक्वार्टर मरकज़ सुभानल्लाह में अब्दुल ऐज़ाज़ इसार का नमाज़ ए जनाज़ा हुआ, जिसके बाद इसे मरकज सुभानल्लाह के परिसर ने ही दफन कर दिया गया. जहां 7 मई को भारत की स्ट्राइक में मारे गए मसूद अजहर के परिवार वालों को दफन किया गया था.

पाकिस्तान से था अब्दुल ऐज़ाज इसार का संबंध
अब्दुल ऐज़ाज इसार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के भक्कर जिले का रहने वाला था और 90 के दशक से मसूद अज़हर के साथ जुड़ा हुआ था. अब्दुल ऐज़ाज़ इसार मसूद अज़हर के करीबियों में एक था और इसकी ज़िम्मेदारी गिलगिट बैलिटिस्तान में जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैम्प की देखरेख करना, आतंकियों की ट्रेनिंग करना और गिलगिट बैलिटिस्तान ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं को जिहाद का पाठ पढ़ा कर जैश में भर्ती करना था.

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अब JNU में नहीं होगा ‘कुलपति’, नए नाम ‘कुलगुरु’ से लौटेगी भारतीय परंपरा की गूंज

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<p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने एक अहम फैसला लिया है. अब इस यूनिवर्सिटी में &lsquo;कुलपति&rsquo; नहीं बल्कि &lsquo;कुलगुरु&rsquo; कहा जाएगा. यह बदलाव सिर्फ शब्दों का नहीं है, बल्कि सोच और परंपरा से भी जुड़ा हुआ है. यूनिवर्सिटी की मौजूदा कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने खुद इस प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में रखा, जिसे सहमति भी मिल गई है.</p>
<p>इस फैसले को 2025 से लागू किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि अब से यूनिवर्सिटी के सभी ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स, जैसे डिग्री सर्टिफिकेट, नियुक्ति पत्र या अन्य सरकारी कागजों में &lsquo;कुलपति&rsquo; शब्द की जगह &lsquo;कुलगुरु&rsquo; लिखा जाएगा. प्रो. शांतिश्री जब किसी डॉक्यूमेंट पर साइन करेंगी, तो उनके नाम के साथ ‘कुलगुरु’ लिखा नजर आएगा.</p>
<p><strong>बदलाव क्यों किया गया?</strong></p>
<p>इस फैसले के पीछे दो बड़े कारण हैं &ndash; पहला, जेंडर न्यूट्रलिटी (लैंगिक समानता) और दूसरा, भारतीय शैक्षिक परंपरा से जुड़ाव.<br />&lsquo;कुलपति&rsquo; शब्द का मतलब होता है &ndash; &lsquo;कुल का पति&rsquo; यानी परिवार का पुरुष प्रमुख. यह शब्द पुरुष प्रधान सोच को दर्शाता है. वहीं &lsquo;कुलगुरु&rsquo; शब्द में ऐसा कोई लिंग निर्धारण नहीं है. यह एक ऐसा शब्द है जो किसी भी महिला या पुरुष के लिए समान रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है.</p>
<p>प्रोफेसर शांतिश्री ने साफ कहा है कि यह बदलाव समावेशी सोच को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, जिससे किसी को भी सिर्फ लिंग के आधार पर अलग महसूस न हो. उनका मानना है कि भाषा भी हमारे समाज की सोच को बनाती है और हमें ऐसी भाषा का उपयोग करना चाहिए जो सबके लिए सम्मानजनक हो.</p>
<p><strong>भारतीय परंपरा से जुड़ाव</strong></p>
<p>&lsquo;कुलगुरु&rsquo; शब्द की जड़ें भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा में हैं. पुराने समय में शिक्षा का केंद्र गुरुकुल होता था और वहां शिक्षा देने वाले को कुलगुरु कहा जाता था. वह सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शक भी होते थे. इस परंपरा में &lsquo;गुरु&rsquo; को सिर्फ ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि नैतिक और मानसिक रूप से मजबूत करने वाला माना जाता था.</p>
<p>जेएनयू का यह कदम इसी सोच से प्रेरित है. प्रो. शांतिश्री ने कहा कि भारतीय मॉडल में शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, यह सोच, व्यवहार और संस्कृति को भी गढ़ती है. इसलिए &lsquo;कुलगुरु&rsquo; शब्द इस परंपरा के अधिक नजदीक है.</p>
<p><strong>अन्य राज्यों में भी हो चुका है प्रस्ताव</strong></p>
<p>बताते चलें कि ये पहला मौका नहीं है जब किसी संस्था ने कुलपति को कुलगुरु कहने की बात की हो. इससे पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी विश्वविद्यालयों में &lsquo;कुलपति&rsquo; शब्द की जगह &lsquo;कुलगुरु&rsquo; शब्द को अपनाने का प्रस्ताव सामने आ चुका है.</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;<a href=" की पढ़ाई अब नहीं रह जाएगी सपना, एजुकेशन लोन से मिलेगी राहत, आसान किस्तों में चुका सकेंगे पैसा</a></strong></p>

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कितने बजे खेला जाएगा फाइनल मैच, कब होगा टॉस, मौसम से लेकर पिच तक की जानकारी एक क्लिक में पढ़िए

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IPL Final Match Time : आईपीएल 2025 के फाइनल मुकाबले का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है. पूरे सीजन की रोमांचक जंग के बाद फाइनल मुकाबले में अब सिर्फ दो टीमें बची हैं—रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और पंजाब किंग्स(PBKS). यह मुकाबला आज, 3 जून को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. आप को बता दें कि दोनों ही टीमें अब तक एक भी बार खिताब नहीं जीत सकी हैं, ऐसे में आज कोई एक टीम इतिहास रचने वाली है.

टॉस का समय क्या है और क्यों है टॉस जीतना महत्वपूर्ण?

फाइनल मुकाबले का टॉस शाम 7:00 बजे होगा. टॉस के तीस मिनट बाद मैच की शुरुआत होगी. टॉस को लेकर खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि अहमदाबाद की पिच पर बाद में बल्लेबाज़ी करना फायदेमंद माना गया है, खासकर ओस की भूमिका यहां महत्वपूर्ण रहती है. ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का विकल्प चुन सकती है.

फाइनल कितने बजे शुरू होगा?

आईपीएल 2025 का फाइनल मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे शुरू होगा. यह वही समय है जो इस सीजन के लगभग सभी नाइट मैचों के लिए तय किया गया था. दिन भर की हलचल के बाद शाम को दर्शकों के पास पूरा वक्त होता है मैच का लुत्फ उठाने का और यही वजह है कि यह टाइम स्लॉट सबसे ज्यादा पॉपुलर माना जाता है. इससे अधिकतम व्यूअरशिप की भी संभावना रहती है.

मौसम और पिच रिपोर्ट

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हल्की बारिश की आशंका है. मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक,3 जून की शाम अहमदाबाद में बारिश की संभावना बनी हुई है. शाम 6:00 बजे तक बारिश की संभावना 51 प्रतिशत है, जो मैच शुरू होने तक घटकर 5-2 प्रतिशत तक आ सकती है. पिच की बात करें तो शुरुआत में बल्लेबाज़ों को मदद मिल सकती है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, स्पिनर्स भी अहम भूमिका निभा सकते हैं.

आज होने वाले इस महामुकाबले में अगर बारिश के चलते खेल रुक जाता है, तो मैच को अगले यानी रिजर्व डे के दिन पूरा कराने की कोशश की जाएगी, जिसकी तारीख 4 जून निर्धारित की गई है.

लाइव कहां देखें?

इस बड़े मुकाबले का सीधा प्रसारण Star Sports नेटवर्क पर होगा, वहीं डिजिटल दर्शकों के लिए JioHotstar पर फ्री लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा उपलब्ध है.

अब बस इंतज़ार है उस ऐतिहासिक पल का, जब कोई एक टीम पहली बार आईपीएल की ट्रॉफी अपने नाम करेगी. क्या विराट कोहली की टीम आरसीबी अपना सपना पूरा करेगी या पंजाब किंग्स रचेगी नया इतिहास? जवाब आज रात मिल जाएगा.

दोनो टीमों की संभावित प्लेइंग इलेवन

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर : फिल साल्ट, विराट कोहली, मयंक अग्रवाल, रजत पाटीदार (कप्तान), लियाम लिविंगस्टोन, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पंड्या, भुवनेश्वर कुमार, यश दयाल, जोश हेज़लवुड.

पंजाब किंग्स : प्रभसिमरन सिंह , प्रियांश आर्य, जोश इंग्लिस(विकेटकीपर),श्रेयस अय्यर(कप्तान), नेहाल वढेरा,शशांक सिंह,मार्कस स्‍टोइनिस,अजमतुल्ला उमरजई, युजवेंद्र चहल, अर्शदीप सिंह, काइल जैमीसन.

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दिल्ली मेट्रो में सीट को लेकर दो महिलाओं में भिड़ंत, खूब वायरल हो रहा वीडियो

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सोशल मीडिया और दिल्ली मेट्रो में कोई खास फर्क है नहीं, दोनों ही में न जाने कब क्या कांड हो जाए कोई कह नहीं सकता. मेट्रो में अक्सर आपने कर्म कांड होते तो बहुत देखे होंगे, लेकिन आज हम आपको जो दिखाने जा रहे हैं उसे देखकर आप अपनी जगह से उठ खड़े होंगे. दरअसल, इंटरनेट पर वायरल दिल्ली मेट्रो के एक वायरल वीडियो में एक महिला दूसरी महिला पर जोर जोर से गला फाड़ कर चीखती दिखाई दे रही है. गोद के एक साइड में बच्चे को लिया हुआ है और दूसरी तरफ लड़ाई करने का जुनून जिसे देखने के बाद किसी को भी डर लग जाए और थर थर कांपने लगे.

सीट को लेकर दिल्ली मेट्रो में छिड़ा गदर!

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला दिल्ली मेट्रो में सीट को लेकर दूसरी महिला पर लगातार जुबानी हमले बोल रही है. गोद में बच्चे को लेकर महिला कथित तौर पर अपने साथ यात्रा कर रहे बुजुर्ग को सीट पर बैठाने की जद्दोजहद में लगी है, लेकिन इसकी कीमत उसे वरिष्ठ नागरिकों की सीट पर बैठी महिला को उठाकर चुकानी होगी और इसीलिए सारा झगड़ा हो रहा है. महिला लगातार सरकारी नियमों का हवाला दे रही है और कह रही है कि उठें आप वरना मैं हेल्पलाइन वालों को बुला लूंगी.

सीट पर बैठी महिला भी देती रही बराबर जवाब

इसकी एवज में सीट पर बैठी महिला भी कहती है कि जिसे बुलाना है बुला ले. सरकार सिर्फ तेरे ही लिए है क्या, सरकार तो सभी की है. हालांकि बाकी के यात्री इस पूरे सीन को चुपचाप खड़े होकर देखते रहते हैं. काफी देर बहस के बाद भी महिला अपनी सीट से नहीं उठती है तो लड़ाई झगड़े से तंग आकर सीट मांग रही महिला अपने बच्चे को लेकर वहां से दूर हो जाती है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद यूजर्स तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.

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यूजर्स ले रहे मजे

वीडियो को एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…दिल्ली मेट्रो की लड़ाई मैं कभी मिस नहीं करता. एक और यूजर ने लिखा…मेट्रो में मनोरंजन के लिए इस तरह के कलेश जरूरी हैं. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…सीट पर बैठी महिला गलत है.

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दीपिका पादुकोण के बाद अब पंकज त्रिपाठी ने भी की शिफ्ट टाइमिंग को लेकर बात, बोले- ‘लिमिट जरूरी’

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Pankaj Tripathi On Working Hours: हाल ही में दीपिका पादुकोण के संदीप रेड्डी वांगा की अपकमिंग फिल्म ‘स्पिरिट’ से बाहर होने की ख़बरें सुर्खियों में छाई हुई थीं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि हाल ही में मां बनी अभिनेत्री ने अपने शिफ्ट टाइमिंग को आठ घंटे करने की डिमांड की थी. लेकिन एक्ट्रेस का ये क्लॉज़  फ़िल्म निर्माता को पसंद नहीं आया और उन्होंने दीपिका को फिल्म से ही बाहर कर दिया.

वहीं अब दीपिका के बाद क्रिमिनल जस्टिस 4 एक्टर पंकज त्रिपाठी ने वर्क बाउंड्रीज तय करने और उन लिमिट्स को पार करने पर ‘नहीं’ कहने की अहमियत पर बात की है.

शिफ्ट टाइमिंग पर क्या बोले पंकज त्रिपाठी
हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया से बातचीत में पंकज त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें ‘नहीं’ कहना मुश्किल लगता है, यही वजह है कि वह इसकी प्रैक्टिस कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “अभी, मैं ‘नहीं’ कहने की प्रैक्टिस कर रहा हूं. क्योंकि सभी को पता होना चाहिए कि लिमिट कहां है और ये लाइन है, और इसके आगे, यह एक विनम्र ‘नहीं’ है.” उन्होंने उन दिनों को भी याद किया जब सेट पर उनके काम के घंटे 16 से 18 घंटे तक बढ़ जाते थे. एक्टर ने कहा, “काम में खिंचे जा रहा है. 16 घंटे-18 घंटे हो गया मैं लगा हुआ हूं. मैं बोल भी रहा हूं, एक्टर जा चुका है. लेबर रुका हुआ है.”

सीमाएं तय करना ज़रूरी है
इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ऐसे समय में विनम्रता से सीमाएं तय करना बेहतर है. एक्टर ने कहा, “फिर लगा नहीं, अभी तो आप विनम्रतापूर्वक बोल दीजिए कि ‘नहीं, इतना ही होगा. हमने कमिट किया था, कमिटमेंट हमारी पूरी हो गई, अब धन्यवाद. जो बचा है, कल करेंगे.” उन्होंने यह कहकर निष्कर्ष निकाला कि सीमाएं तय करना ज़रूरी है न केवल अभिनय में, बल्कि जीवन के सभी पहलुओं में.

मणिरत्नम ने भी दीपिका पादुकोण का सपोर्ट किया
इस बीच, फेमस फिल्म निर्माता मणिरत्नम ने भी दीपिका पादुकोण का सपोर्ट किया है. रत्नम ने न्यूज़18 शोशा से कहा, “मुझे लगता है कि यह एक सही मांग है.  मुझे खुशी है कि वह इसके लिए पूछने की स्थिति में हैय मुझे लगता है कि एक फिल्म निर्माता के रूप में, आप कास्टिंग करते समय इस बात को ध्यान में रखेंगे. यह पूछना कोई अनुचित बात नहीं है, बल्कि एक जरूरत है. मुझे लगता है कि यह प्रायोरिटी होनी चाहिए. आपको इसे स्वीकार करना होगा, इसे समझना होगा और इसके आसपास काम करना होगा.”

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जुकरबर्ग ने अचानक क्यों ज्वाइन कर ली अमेरिकी सेना? मेटा अब बनाएगी ‘सुपर सोल्जर’

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<p style="text-align: justify;">आज की दुनिया में जंग सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी से भी जीती जाती है। और इसी दिशा में अब मेटा कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने एक बड़ा कदम उठाया है. सोशल मीडिया की दुनिया में राज करने के बाद अब जुकरबर्ग का फोकस है अमेरिका की सेना को हाईटेक और स्मार्ट बनाना.</p>
<p style="text-align: justify;">मेटा अब सिर्फ फेसबुक, इंस्टाग्राम या व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं रहने वाली. कंपनी अब अमेरिका की डिफेंस इंडस्ट्री में कदम रख चुकी है और सैनिकों के लिए खास तकनीक पर काम शुरू कर दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>स्मार्ट चश्मा और हाईटेक हेलमेट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेटा और एंड्रिल नाम की डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी मिलकर ऐसे स्मार्ट डिवाइस बना रही हैं, जो सेना के काम आने वाले हैं. इसमें खास चश्मे और हेलमेट शामिल हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कई तरह के सेंसर लगे होंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">इन गैजेट्स के ज़रिए सैनिकों को रियल टाइम में जरूरी जानकारी मिलेगी यानी जैसे ही कोई खतरा होगा, उसे तुरंत देखा और समझा जा सकेगा. ये डिवाइस सैनिकों की आंख और कान की ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दुश्मन का पता लगेगा पहले</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इन स्मार्ट चश्मों और हेलमेट्स से सैनिक दूर से आने वाले खतरे को पहले ही भांप सकेंगे चाहे वो ड्रोन हो या कहीं छिपा हुआ दुश्मन. इससे हमले की प्लानिंग और एक्यूरेसी दोनों बेहतर हो जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;">एक और खास बात ये है कि ये तकनीक सैनिकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हथियारों से सीधे संवाद करने की क्षमता देगी. यानी सैनिक एक तरह से अपने हथियारों से ‘बात’ करके उन्हें कंट्रोल कर पाएंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सेना की सोच बदलेगी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेटा और एंड्रिल की इस साझेदारी से अमेरिकी सेना का काम करने का तरीका ही बदल सकता है. अभी तक जो चीजें फिल्मों में देखी जाती थीं, अब वो असल जिंदगी में सैनिकों की रोजमर्रा की टेक्नोलॉजी बनने जा रही हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा, तो मेटा की छवि पूरी तरह बदल सकती है. अब लोग उसे सिर्फ सोशल मीडिया कंपनी नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध तकनीक बनाने वाली बड़ी टेक कंपनी के रूप में भी जानने लगेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तकनीक से बनेगा नया सुरक्षा कवच</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जुकरबर्ग का यह कदम दिखाता है कि कैसे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ चैटिंग या फोटो शेयरिंग तक सीमित नहीं है. अब यही तकनीक सेना के लिए सुरक्षा कवच बन रही है. जिस तेजी से दुनिया में खतरों के रूप बदल रहे हैं, उसी तेजी से उनकी काट भी स्मार्ट होनी चाहिए और इसमें एआई अब अहम भूमिका निभाने जा रहा है. जुकरबर्ग की मेटा अब उसी स्मार्ट वॉर का हिस्सा बन चुकी है.</p>
<p style="text-align: justify;">मार्क जुकरबर्ग अब सिर्फ डिजिटल लाइफ को बदलने की नहीं, बल्कि रियल वॉर ज़ोन में भी क्रांति लाने की तैयारी में हैं. एआई से लैस सैनिक भविष्य की लड़ाइयों में पहले से कहीं ज्यादा तैयार और मजबूत होंगे और इसमें मेटा की भूमिका अब सिर्फ एक टेक कंपनी से कहीं ज्यादा बड़ी होती जा रही है.</p>

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माइक्रोसॉफ्ट 6000 स्टाफ को निकालने के बाद फिर से करने जा रहा बड़ी छंटनी, जानें कितने पर चलेगी

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Microsoft Layoffs: दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनियों में एक है अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट. यहां पर काम करने का आईटी से जुड़े प्रोफेशनल्स का एक बड़ा सपना होता है. लेकिन अब माइक्रोसॉफ्ट ने एआई के इस बदलते युग में लोगों को नौकरी देने की बजाय अब उनसे उल्टा नौकरी छीनने में लगा हुआ है. कर्मचारियों को अब सड़कों पर ला रहा है. पिछले महीने 6000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद फिर से माइक्रोसॉफ्ट ने 300 से भी ज्यादा लोगों को नौकरी से बाहर करने के दूसरे राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

एक और बड़ी छंटनी

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के काम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ये कदम उठाने जा रहा है. हालांकि, हाल में अब तक की सबसे बड़ी छंटनी के बाद किस डिपार्टमेंट से स्टाफ को निकाला जाएगा, इस बारे में अभी स्थिति साफ नहीं है और न ही ये स्पष्ट है कि कंपनी के इस कदम से कौन से डिपार्टमेंट पर असर होगा. माइक्रोसॉफ्ट के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा कि बाजार के अनुरुप कंपनी अपने आपमें सुधार लाने के कंपनी लगातार संस्थागत आवश्यक बदलाव करती रहती है. 

एआई से ली जाएगी मदद

गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट ने एक तरफ जहां अपने वर्क फोर्स में कटौती का ऐलान किया है तो वहीं दूसरी तरफ तो एआई में निवेश कर उससे कोडिंग और अन्य टेक्निकल कामों में मदद ली जा रही है.

जून 2024 के डेटा के मुताबिक, इस अमेरिकी टेक कंपनी में 2,28,800 फुल टाइम कर्मचारी थे. इसमें से करीब आधे अमेरिका में काम कर रहे थे. ऐसे में माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से ये एक स्पष्ट संकेत है कि एआई के इस युग में कंपनी अपने पूरा फोकस कंपनी के ग्रोथ पर कर रही है. साथ ही, ट्रेडिशन रोल से उठकर तकनीक पर ज्यादा निर्भर होने जा रही है.  

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क्या है ग्रीन बकरीद और वर्चुअल बकरीद, जानें क्यों सोशल मीडिया हो रहे हैं ट्रेंड

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परंपरा और तकनीक की जंग में अब ईद-उल-अजहा भी दो राहों पर खड़ी है. एक तरफ हैं वो जो इस त्योहार को ‘हरियाली’ के साथ जोड़ना चाहते हैं. पेड़ लगाकर, मीट की बजाय मोहब्बत बांटकर…वहीं दूसरी ओर वो लोग हैं, जो मोबाइल स्क्रीन पर कुर्बानी देख रहे हैं, डिजिटल गेटवे से जानवर खरीद रहे हैं और वर्चुअल ईद की गले मिलती तकनीकी खुशबू में डूबे हैं. समय बदल रहा है और उसके साथ बकरीद भी…

सवाल ये नहीं कि क्या कुर्बानी हो रही है, सवाल ये है कि वो कैसे हो रही है. बकरीद पर आमतौर पर मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे या दूसरे हलाल जानवरों की कुर्बानी देते हैं. लेकिन इस बार वर्चुअल और ग्रीन बकरीद सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है. आइए आपको बताते हैं क्या है दोनों में अंतर.

क्या है ग्रीन बकरी?

“ग्रीन बकरीद” नाम सुनकर लग सकता है कि ये कोई पर्यावरण दिवस है, लेकिन असल में यह एक सोच है. एक ऐसा नजरिया जो बकरीद की कुर्बानी को प्रतीकात्मक बनाने की कोशिश कर रहा है. इस विचारधारा के समर्थक मानते हैं कि जानवरों की बलि की जगह अगर पेड़ लगाए जाएं, जरूरतमंदों को पैसा या भोजन दिया जाए या प्लास्टिक और प्रदूषण से बचा जाए तो ईद का पैगाम और ज्यादा पाक हो सकता है. हाल के वर्षों में पेटा जैसे संगठनों और कुछ शहरी मुस्लिम युवाओं ने इसे सोशल मीडिया पर हवा दी है. #GreenBakrid जैसे ट्रेंड्स चलते हैं, जिसमें लोग भैंस, बकरी की जगह पौधे लेकर ‘सेल्फी विद सैक्रिफाइस’ करते हैं.

क्यों है वर्चुअल बकरीद

कोविड-19 ने दुनिया को बदला और ईद भी उससे अछूती नहीं रही. जब लोग मस्जिद नहीं जा सके, कुर्बानी के लिए जानवर नहीं खरीद सके तब जन्म हुआ “वर्चुअल बकरीद” का. यह तरीका तकनीक और आस्था का मेल है. ऑनलाइन वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए लोग कुर्बानी का जानवर बुक करते हैं, बलि किसी फार्म या संस्था दे देती है और मीट या तो उन्हें भेज दिया जाता है या दान कर दिया जाता है. कुछ प्लेटफॉर्म तो कुर्बानी की लाइव स्ट्रीमिंग भी कराते हैं जहां आप स्क्रीन पर बैठे-बैठे देख सकते हैं कि आपके नाम की कुर्बानी कब और कैसे हो रही है. इससे न सिर्फ भीड़-भाड़ से बचाव हुआ, बल्कि प्रवासी मुस्लिमों और व्यस्त लोगों के लिए यह एक सहज उपाय बन गया.

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क्या ग्रीन बकरीद से कम होगा रोजगार?

बकरीद यानी ईद-उल-अजहा जब करीब आती है, तो सिर्फ बकरों की कीमतें ही नहीं बढ़तीं, बढ़ता है हजारों लोगों का रोजगार, उम्मीद और बाजार में रौनक… ये त्योहार सिर्फ कुर्बानी का नहीं, किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, ट्रांसपोर्टरों और कारीगरों के लिए भी कमाई का सबसे बड़ा मौका बनता है. खास बात ये कि इसका फायदा सिर्फ मुसलमानों को नहीं, सभी धर्मों और समुदायों के गरीब तबकों को होता है. बकरीद से पहले देशभर में बकरा मंडियां सज जाती हैं. इन मंडियों में जो जानवर बिकते हैं, उनमें से कई को पालने वाले हिंदू, दलित, आदिवासी या गरीब किसान होते हैं, जो बकरी, भेड़ या बैल पालकर सालभर इंतजार करते हैं बकरीद की बिक्री का.

यूजर्स दे रहे रिएक्शन

अब सोशल मीडिया पर ग्रीन और वर्चुअल बकरीद ट्रेंड करने के साथ ही यूजर्स के रिएक्शन भी आने शुरू हो गए हैं. ग्रीन बकरीद की शुरुआत हो गई है, किसी भी धर्म में जीव हत्या नहीं होनी चाहिए. एक और यूजर ने लिखा…बकरीद आने पर ही सभी की जीव दया जाग जाती है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…ग्रीन बकरीद ये सब केवल एक दिन चलने वाला है. बाकी खाते सब हैं.

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