भारत ने कसा शिकंजा तो बिलबिलाया बांग्लादेश, विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन ने कह दी ये बात

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मार्क जुकरबर्ग ने क्यों थामा न्यूक्लियर प्लांट का हाथ, जानें क्या है मेटा का नया मिशन

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<p style="text-align: justify;">फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चलाने वाली मेटा कंपनी ने अब एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिका की न्यूक्लियर एनर्जी कंपनी कॉन्स्टेलेशन एनर्जी के साथ एक बड़ी डील कर ली है. ये पहली बार है जब किसी बड़ी टेक कंपनी ने सीधे तौर पर किसी परमाणु ऊर्जा कंपनी से हाथ मिलाया है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर सोशल मीडिया कंपनी को न्यूक्लियर पावर प्लांट से साझेदारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डेटा सेंटर्स और AI की बढ़ती भूख</strong></p>
<p style="text-align: justify;">असल में मेटा का ये फैसला आने वाले समय की तैयारियों का हिस्सा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भारी-भरकम डेटा सेंटर्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. अमेरिका में बीते दो दशकों में पहली बार बिजली की डिमांड में इतना बड़ा उछाल देखा गया है और इसके पीछे AI और टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल है.</p>
<p style="text-align: justify;">मेटा आने वाले सालों में अपनी डिजिटल सेवाओं को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए बिजली की सप्लाई को लेकर पहले से ही तैयारियां कर रही है. यही वजह है कि कंपनी ने न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट से जुड़ने का फैसला लिया है ताकि उन्हें भविष्य में बिजली की कोई कमी ना हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सब्सिडी खत्म, मेटा बनी सहारा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कॉन्स्टेलेशन एनर्जी का यह न्यूक्लियर पावर प्लांट अमेरिका के इलिनोइस राज्य में है. अभी तक यह कंपनी सरकार से सब्सिडी लेकर काम कर रही थी क्योंकि न्यूक्लियर प्लांट्स से कार्बन फ्री बिजली बनती है. लेकिन साल 2027 के बाद ये सब्सिडी खत्म हो जाएगी। ऐसे में कंपनी को आर्थिक रूप से दिक्कत हो सकती थी.</p>
<p style="text-align: justify;">यहीं मेटा ने आगे बढ़कर हाथ थाम लिया. अब इस डील के जरिए मेटा कॉन्स्टेलेशन को सपोर्ट करेगी ताकि प्लांट 2027 के बाद भी बिना किसी अड़चन के बिजली बनाता रहे. इससे मेटा को भी अपने AI और डेटा सेंटर्स के लिए स्थिर और स्वच्छ बिजली मिलती रहेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेटा की नजर अब डिफेंस सेक्टर पर भी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इतना ही नहीं, मेटा अब अमेरिकी सेना के लिए भी टेक्नोलॉजी तैयार करने जा रही है. मेटा ने एंड्रिल इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी के साथ मिलकर वर्चुअल रियलिटी (VR) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) डिवाइसेस बनाने की योजना बनाई है. इन डिवाइसेस में खास सेंसर और AI तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे सैनिकों की सुनने और देखने की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी.</p>
<p style="text-align: justify;">ये डिवाइसेस हेलमेट और चश्मों के रूप में तैयार हो सकती हैं, जो सैनिकों को छुपे हुए खतरे को जल्दी पहचानने और सही लक्ष्य साधने में मदद करेंगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बिजली की जंग शुरू हो चुकी है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेटा का यह कदम साफ दिखाता है कि आने वाला दौर सिर्फ सोशल मीडिया और एआई का नहीं, बल्कि बिजली और ऊर्जा के लिए जद्दोजहद का भी होगा. टेक कंपनियों को अब न सिर्फ अपने यूजर्स की चिंता है, बल्कि उनके ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स को चलाने के लिए लगातार और साफ बिजली की जरूरत भी है. जुकरबर्ग का न्यूक्लियर पावर प्लांट से हाथ मिलाना इस बात का संकेत है कि टेक्नोलॉजी का भविष्य अब एनर्जी से जुड़ा हुआ है और जो कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं, वही आने वाले वक्त में टिक पाएंगी.</p>

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RCB के ट्रॉफी जीतने पर विजय माल्या का रिएक्शन, कहा- ई साला कप नाम दे; लोगों ने मांगे पैसे

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Vijay Mallya First Reaction: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने आईपीएल 2025 का खिताब जीत लिया है. बेंगलुरु ने फाइनल मुकाबले में पंजाब किंग्स को 6 रन से हरा दिया. बेंगलुरु के आईपीएल की पहली ट्रॉफी जीतने पर RCB के पूर्व मालिक विजय माल्या का रिएक्शन भी सामने आया है. विजय माल्या ने पूरी टीम को जीत की बधाई दी है. विजय माल्या ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ‘ई साला कप नाम दे’, जो कि आरसीबी की टैग लाइन है.

विजय माल्या ने दी RCB को जीत की बधाई

विजय माल्या ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु आखिरकार 18 साल बाद आईपीएल चैंपियन बन गई है. आरसीबी के लिए 2025 का ये आईपीएल टूर्नामेंट काफी शानदार रहा’. विजय माल्या ने आगे लिखा कि ‘बेहतरीन कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ के साथ एक बैलेंस्ड टीम ने बोल्ड गेम खेला है. बहुत-बहुत बधाई! ई साला कप नामदे’.

लोगों ने मांग लिए विजय माल्या से पैसे

विजय माल्या को आरसीबी को जीत की बधाई देना भारी पड़ गया. लोगों ने माल्या से देश के पैस मांगने शुरू कर दिए. विजय माल्या ने बेंगलुरु के क्वालीफायर-ौ1 में पहुंचने पर भी बधाई दी थी. तब भी सोशल मीडिया पर लोगों ने विजय माल्या को पैसे देने के लिए ट्रोल किया था.

RCB ने जीता पहला खिताब

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम ने अपना पहला आईपीएल टाइटल जीत लिया है. बेंगलुरु की इस जीत पर टीम के स्टार प्लेयर विराट कोहली काफी इमोशनल नजर आए. आरसीबी के इस 18वें सीजन को जीतने पर विराट बीच स्टेडियम में ही रोने लगे. विराट आईपीएल की शुरुआत से इस टीम के साथ हैं और 3 जून की रात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपना पहला खिताब जीत लिया है.

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यूपी पुलिस में भर्ती निकली तो कितने अग्निवीरों को मिलेगी नौकरी? जान लीजिए पूरा गणित

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उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. अब वे नौजवान जो सेना में ‘अग्निपथ योजना’ के तहत चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें यूपी पुलिस और पीएसी की भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. ये फैसला ना सिर्फ पूर्व अग्निवीरों को नई दिशा देगा, बल्कि यूपी पुलिस को भी एक अनुशासित और ट्रेंड फोर्स देने का काम करेगा.

राज्य सरकार ने साफ किया है कि अग्निवीरों को यूपी पुलिस में कांस्टेबल (आरक्षी), पीएसी, घुड़सवार पुलिस और फायरमैन जैसे पदों पर सीधी भर्ती में मौका मिलेगा. संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि इन सभी पदों पर 20% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए रिज़र्व रहेंगे. यह आरक्षण क्षैतिज होगा, यानी जो अग्निवीर जिस श्रेणी (SC/ST/OBC/EWS) से आते हैं, उन्हें उसी कैटेगरी का लाभ मिलेगा.

आयु सीमा में भी राहत

अग्निवीरों को अधिकतम उम्र सीमा में तीन साल की छूट दी जाएगी. यानी अगर सामान्य उम्मीदवार के लिए अधिकतम आयु सीमा 23 साल है, तो पूर्व अग्निवीरों के लिए यह सीमा 26 साल हो सकती है.

कितनी भर्तियां और कितने पद?

कुल पद: 26,596
आरक्षी (Constable): 19,220
आरक्षी पीएसी: 9,837
घुड़सवार पुलिस: 71
फायरमैन: पद शामिल
महिला बटालियन (बदायूं, गोरखपुर, लखनऊ): 2,282
नागरिक पुलिस: 3,245
विशेष सुरक्षा बल (UPSSF): 1,341

फैसले की अहमियत

अगर हम इसमें से 20 प्रतिशत पद भी पूर्व अग्निवीरों के लिए मानें, तो अनुमान के अनुसार लगभग 5,000 से ज्यादा पद ऐसे होंगे जो उन्हें मिल सकते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल कारगिल विजय दिवस पर इसकी घोषणा की थी और अब सरकार ने इसे लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है. यह फैसला न केवल पूर्व अग्निवीरों को रोजगार देगा, बल्कि उनके सैन्य अनुशासन और कौशल का लाभ भी प्रदेश को मिलेगा.

क्या है अग्निवीरों की स्थिति?

केंद्र सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी. इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना, एयरफोर्स और नेवी में सेवा का मौका मिलता है. 2026 में पहला बैच चार साल की सेवा पूरी करेगा. इनमें से 25% को स्थायी नियुक्ति मिल सकती है, जबकि 75% को सिविल क्षेत्र में नौकरी की जरूरत होगी.

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किडनी की बीमारी के ये हैं बेहद आम पांच लक्षण, डायबिटीज के मरीज अक्सर इन्हें कर देते हैं इग्नोर

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<p style="text-align: justify;">डायबिटीज न केवल ब्लड शुगर को प्रभावित करती है, बल्कि शरीर के कई अंगों खासकर किडनी को भी नुकसान पहुंचाती है. कई रिसर्च में सामने आया है कि डायबिटीज के मरीजों में किडनी रोग (डायबिटिक नेफ्रोपैथी) का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 30-40% ज्यादा होता है. चिंताजनक बात यह है कि किडनी रोग के शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि डायबिटीज के मरीज इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लगातार थकान और कमजोरी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज के मरीजों में किडनी रोग का एक प्रमुख लक्षण है लगातार थकान और कमजोरी. जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण ब्लड में यूरिया जैसे विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं. यह थकान और कमजोरी का कारण बनता है. रिसर्च में पाया गया कि 60% से अधिक डायबिटीज मरीज जो किडनी रोग के शुरुआती चरण में हैं, इस लक्षण को सामान्य तनाव या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पैरों और एड़ियों में सूजन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी रोग के कारण शरीर में एक्स्ट्रा फ्लूड जमा होने लगता है, जिससे पैरों, एड़ियों, और कभी-कभी चेहरे पर सूजन (एडिमा) दिखाई देती है. डायबिटीज के मरीजों में यह लक्षण तब होता है, जब किडनी प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) को रक्त में बनाए रखने में नाकाम होती है, जिसके कारण प्रोटीन मूत्र में रिसने लगता है. रिसर्च के अनुसार, यह लक्षण मध्यम से गंभीर किडनी रोग (स्टेज 3 या 4) में आम है, लेकिन इसे अक्सर गलतफहमी में सामान्य सूजन समझ लिया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेशाब में बदलाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">झागदार पेशाब (प्रोटीन की अधिकता के कारण), बार-बार पेशाब आना (खासकर रात में) या पेशाब का रंग गाढ़ा होना किडनी रोग का स्पष्ट सिग्नल हो सकता है. रिसर्च में पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों में माइक्रोएल्ब्यूमिनुरिया (मूत्र में थोड़ी मात्रा में प्रोटीन) किडनी रोग का सबसे शुरुआती लक्षण है, जिसे केवल टेस्ट के माध्यम से ही पकड़ा जा सकता है. दुर्भाग्यवश, डायबिटीज के मरीज इस लक्षण को सामान्य समझकर टेस्ट कराने से बचते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाई ब्लडप्रेशर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाई ब्लडप्रेशर (हाइपरटेंशन) डायबिटीज और किडनी रोग दोनों का एक प्रमुख कारण है. डायबिटीज के कारण किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं डैमेज हो जाती हैं, जिससे ब्लडप्रेशर बढ़ता है. रिसर्च के अनुसार, हाई ब्लडप्रेशर किडनी रोग का कारण और रिजल्ट दोनों हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लडप्रेशर को अक्सर नॉर्मल माना जाता है, जबकि यह किडनी की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भूख में कमी और जी मिचलाना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी रोग के कारण रक्त में अपशिष्ट पदार्थों का स्तर बढ़ने से भूख में कमी, जी मिचलाना और कभी-कभी उल्टी की समस्या हो सकती है. यह लक्षण तब दिखाई देता है, जब किडनी रोग एडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाता है. रिसर्च में पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों में ये लक्षण प्रारंभिक चरणों में हल्के हो सकते हैं, जिसके कारण इन्हें पाचन संबंधी समस्याओं से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डायबिटीज और किडनी रोग का संबंध</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज किडनी रोग का प्रमुख कारण है और यह ग्लोबल लेवल पर अंतिम चरण के किडनी रोग (ESRD) के लगभग 44% मामलों के लिए जिम्मेदार है. डायबिटीज के कारण ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है, जो किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं (ग्लोमेरुली) को नुकसान पहुंचाता है. ये खून की धमनियां ब्लड को फिल्टर करने का काम करती हैं और जब ये डैमेज हो जाती हैं तो किडनी अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में असमर्थ हो जाती है. इसकी वजह से प्रोटीन पेशाब में रिसने लगता है, जिसे माइक्रोएल्ब्यूमिनुरिया कहा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" में कहां करा सकते हैं कोरोना का इलाज, क्या खाना-पीना भी फ्री दे रही सरकार?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&nbsp;</strong></p>

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43 रुपये के डिविडेंड से नारायण मूर्ति के परिवार ने कमाए करोड़ों, पोते की कमाई होश उड़ा देगी

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<p style="text-align: justify;">भारत के सबसे प्रतिष्ठित आईटी संस्थानों में से एक इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति का पोता, एकाग्र रोहन मूर्ति, मात्र 18 महीने की उम्र में 6.5 करोड़ रुपये की डिविडेंड इनकम कमा चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब एकाग्र केवल चार महीने के थे, तब नारायण मूर्ति ने उन्हें 240 करोड़ रुपये मूल्य के इंफोसिस के शेयर गिफ्ट किए थे, जो कंपनी में 0.04 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिविडेंड से भर गया नन्हे एकाग्र का खाता</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंफोसिस ने हाल ही में अपने शेयरधारकों को 43 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया, जिसमें कंपनी के कुल 54.2 करोड़ शेयरहोल्डर्स को 2,330 करोड़ रुपये बांटे गए. इसी के तहत एकाग्र के पास मौजूद 15 लाख शेयरों पर 6.5 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला. इस प्रकार, महज़ डेढ़ साल की उम्र में एकाग्र उन चुनिंदा बच्चों में शामिल हो गए हैं, जो करोड़ों के मालिक हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इंफोसिस के प्रमोटर्स ने कितनी कमाई की?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डिविडेंड के इस बंटवारे में इंफोसिस के अन्य प्रमोटर्स और संस्थापकों को भी अच्छी-खासी रकम प्राप्त हुई. कंपनी के चेयरमैन नंदन निलेकणी को उनके 4 करोड़ शेयरों पर 175 करोड़ रुपये मिले. नारायण मूर्ति ने 1.5 करोड़ शेयरों पर 65 करोड़ रुपये कमाए, जबकि सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन को 3.2 करोड़ शेयरों पर 137 करोड़ रुपये मिले. सबसे ज़्यादा डिविडेंड कमाने वाली व्यक्ति रहीं सुधा गोपालकृष्णन, जिनके पास 9.5 करोड़ शेयर हैं और उन्हें 410 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नारायण मूर्ति के परिवार की कमाई</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मूर्ति परिवार की नई पीढ़ी ने भी इस डिविडेंड से करोड़ों की कमाई की. रोहन मूर्ति को उनके 6 करोड़ शेयरों पर 261.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि उनकी बहन अक्षता मूर्ति, जो कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं को 3.8 करोड़ शेयरों से 167 करोड़ रुपये का लाभ मिला.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तीसरी पीढ़ी की एंट्री भी दमदार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंफोसिस के संस्थापकों की तीसरी पीढ़ी ने भी इस डिविडेंड से अच्छा पैसा कमाया. निकीता और मिलन शिबुलाल मांचंदा, जिनके पास 61 लाख शेयर हैं, को 26.3 करोड़ रुपये मिले. वहीं तनुष निलेकणी चंद्रा को 33.5 लाख शेयरों से 14 करोड़ रुपये की कमाई हुई. और सबसे छोटा लेकिन सबसे चर्चित नाम बना एकाग्र रोहन मूर्ति, जिसने सिर्फ 15 लाख शेयरों से 6.5 करोड़ रुपये कमा लिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कौन हैं एकाग्र रोहन मूर्ति?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एकाग्र, रोहन मूर्ति और अपर्णा कृष्णन के बेटे हैं. 2023 में जन्मे एकाग्र को उनके दादा नारायण मूर्ति ने जबरदस्त वित्तीय विरासत दी है. इतनी कम उम्र में इतने बड़े फाइनेंशियल पोर्टफोलियो के मालिक बनना भारत में बेहद दुर्लभ है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वित्तीय शिक्षा या असमानता का प्रतीक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एकाग्र की यह कहानी जहां एक ओर फाइनेंशियल प्लानिंग और विरासत प्रबंधन की मिसाल बन सकती है, वहीं यह देश में आर्थिक असमानता की एक झलक भी दिखाती है. जब आम लोग जीवन भर की कमाई में भी इतने पैसे नहीं कमा पाते, तब एक बच्चा करोड़पति बन जाए, यह समाज में गहरे सवाल खड़े करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" की टैरिफ पॉलिसी ने बिगाड़ा चीन का खेल, अब हर मोर्चे पर फेल होता नजर आ रहा है ड्रैगन</a></strong></p>

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जल्द अस्त होने वाले हैं बृहस्पति, अभी कर लें ये शुभ काम नहीं तो 5 महीने करना होगा इंतजार

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'हमने डिप्लोमैसी में भी भारत को हरा दिया...', ऑपरेशन सिंदूर में मात खाए शहबाज ने फिर कराई जगहंसाई; ईरान को कैसे भूल गए पाक PM?

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यूक्रेन का रूस पर बड़ा अटैक, अंडरवाटर 1100 KG विस्फोटक से उड़ाया पुल; 3 दिन में यूक्रेनी सेना क

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यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस (एसबीयू) ने मंगलवार (3 जून, 2025) को दावा किया कि उन्होंने रूस और क्रीमिया को जोड़ने वाले सड़क और रेल पुल को जल स्तर से नीचे विस्फोटकों से क्षतिग्रस्त कर दिया है.   

एसबीयू ने एक बयान में कहा कि इस पुल को उड़ाने के लिए 1,100 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था, जिससे सुबह-सुबह विस्फोटक किया गया और पुल के पानी के नीचे के बने खंभों को उड़ा दिया. ये अतीत में यूक्रेन में रूसी सेना के लिए एक प्रमुख आपूर्ति मार्ग था.

‘पुल को फिर से खोल दिया गया है’  

रूसी अधिकारियों ने बताया कि इस पुल का संचालन स्थानीय समयानुसार सुबह 4 बजे से सुबह 7 बजे के बीच लगभग तीन घंटे के लिए निलंबित कर दिया गया था. बाद में बताया कि पुल को फिर से खोल दिया गया है और यह सामान्य रूप से काम कर रहा है.

एसबीयू ने अपने बयान में कहा, “इससे पहले हमने 2022 और 2023 में दो बार क्रीमियन ब्रिज पर हमला किया था. उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमने आज पानी के नीचे विस्फोट किया. साथ ही कहा कि इस ऑपरेशन की तैयारी कई महीनों से की जा रही थी. एसबीयू ने एक वीडियो फुटेज शेयर किया है, जिसमें पुल के कई सहायक स्तंभों में से एक के बगल में विस्फोट हुआ.

 

हमला असफल रहा- रूसी सैन्य ब्लॉगर्स
रॉयटर्स ने इस विस्फोट की पुष्टि की है, जो सेेटेलाइट और फाइल इमेजरी से मेल खाता है. हालांकि, रॉयटर्स ये सत्यापित करने में सक्षम नहीं है कि ये वीडियो कब बनाया गया. वहीं, एक रूसी सैन्य ब्लॉगर्स ने कहा कि हमला असफल रहा और अनुमान लगाया कि यह एक यूक्रेनी समुद्री ड्रोन द्वारा किया गया था,

केर्च जलडमरूमध्य पर बना 19 किमी लंबा क्रीमिया ब्रिज रूस के परिवहन नेटवर्क और क्रीमिया प्रायद्वीप के बीच एकमात्र सीधा संपर्क है, जिसे मॉस्को ने 2014 में यूक्रेन से अलग कर दिया था.

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IPL 2025 में इस खिलाड़ी को मिली TATA CURVV कार, सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन की मिली ट्रॉफी

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आज से शुरू होगी JoSAA काउंसलिंग, जानिए कैसे कर सकेंगे अप्लाई

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जेईई एडवांस्ड 2025 का रिजल्ट जारी हो चुका है और अब आईआईटी में दाखिला लेने की प्रक्रिया भी शुरू होने जा रही है. जो छात्र इस परीक्षा में पास हुए हैं, उनके लिए अब अगला बड़ा कदम है JoSAA काउंसलिंग. जॉइंट सीट अलॉटमेंट अथॉरिटी (JoSAA) 3 जून 2025 यानी आज शाम 5 बजे से काउंसलिंग प्रक्रिया की शुरुआत करेगा.

JoSAA काउंसलिंग के जरिए देशभर के आईआईटी, एनआईटी, IIIT और अन्य सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला मिलेगा. काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन और कॉलेज/कोर्स की पसंद चुनने की आखिरी तारीख 12 जून 2025 है. ऐसे में जो उम्मीदवार काउंसलिंग में हिस्सा लेना चाहते हैं, उन्हें समय रहते आवेदन करना जरूरी है.

कौन कर सकता है आवेदन?

जेईई एडवांस्ड 2025 में पास होने वाले सभी उम्मीदवार JoSAA काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं. इसके जरिए उन्हें IIT, NIT, IIIT और GFTI जैसी प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला मिल सकता है.

मॉक सीट अलॉटमेंट कब होगा?

पहली मॉक सीट अलॉटमेंट लिस्ट 9 जून 2025 को आएगी.
दूसरी मॉक लिस्ट 11 जून 2025 को जारी की जाएगी.

कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स जरूरी होंगे?

  • कक्षा 10वीं और 12वीं की मार्कशीट और प्रमाणपत्र
  • जेईई मेन या एडवांस का एडमिट कार्ड
  • कैटेगरी या पीडब्ल्यूडी सर्टिफिकेट (अगर लागू हो)
  • मेडिकल सर्टिफिकेट
  • बैंक डिटेल्स (अगर रिफंड लेना हो)
  • पासपोर्ट या ओसीआई/पीआईओ कार्ड (अगर लागू हो)

कितनी फीस देनी होगी?

एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के लिए आंशिक प्रवेश शुल्क 20,000 है.
जनरल, ओबीसी-एनसीएल और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए यह फीस 45,000 तय की गई है.

जरूरी तारीखें

काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन शुरू: 3 जून 2025 (शाम 5 बजे से)
आखिरी तारीख: 12 जून 2025
मॉक अलॉटमेंट: 9 और 11 जून को

कैसे करें JoSAA काउंसलिंग के लिए आवेदन?

  1. सबसे पहले josaa.nic.in पर जाएं.
  2. होमपेज पर दिए गए “JoSAA Counselling 2025 Registration” लिंक पर क्लिक करें.
  3. अपना JEE Main या JEE Advanced रोल नंबर और पासवर्ड डालकर लॉग इन करें.
  4. अब अपने पसंदीदा कॉलेज और कोर्स का चुनाव करें और उन्हें प्राथमिकता के अनुसार सेट करें.
  5. सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट करें और उसकी एक कॉपी डाउनलोड करके रख लें.

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