गजब! 140 साल पुराने ‘थाने’ में लोगों को परोसे जा रहे लजीज पकवान, आप भी ले सकते हैं मज़े

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Meghalaya News: मेघालय के सोहरा में 140 साल पुराने एक पुलिस थाने को खूबसूरत कैफे में तब्दील किया गया है. सबसे ज्यादा बारिश वाले इलाकों में शुमार सोहरा में स्थित इस कैफे में अब ग्राहकों को लजीज पकवान परोसे जा रहे हैं. साल 1885 में स्थापित सोहरा पुलिस थाने की इमारत मेघालय की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है. ब्रिटिश शासन के दौरान इस इमारत का इस्तेमाल एक कुख्यात हिरासत केंद्र के रूप में किया जाता था.

‘सोहरा 1885’ नाम के कैफे में तब्दील किया गया थाना

हालांकि, अब इस थाने को ‘सोहरा 1885’ नाम के कैफे में तब्दील कर दिया गया है, जो खाने के शौकीन लोगों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है. इस कैफे में इतिहास और आतिथ्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. ग्राहक ‘कैफे 1885’ में ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील की गई जेलों में अपने पसंदीदा पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं. कैफे से अर्जित मुनाफा पुलिस कल्याण के लिए दान कर दिया जाता है.

सोहरा पुलिस थाने को कैफे में बदलने का विचार ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक सईम ने दिया था, जो उस समय क्षेत्र (सोहरा) में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में तैनात थे. मेघालय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके इस विचार का पूर्ण समर्थन किया.

सईम ने ‘पीटीआई-भाषा’ न्यूज एजेंसी से कहा, “मैं इतिहास में खास स्थान रखने वाले इस पुलिस थाने के साथ हमेशा से कुछ अलग करना चाहता था. राज्य में ऐसी बहुत कम इमारतें बची हैं, जो इतिहास में खास स्थान रखती हैं.” उन्होंने कहा, “मैंने सोहरा पुलिस थाने को कैफे में बदलने का विचार तब दिया था, जब मैं इलाके में डीएसपी था. मुझे पता था कि इतिहास में खास स्थान रखने के कारण यह भवन बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करेगा.”

पुलिस कल्याण के लिए किया जा रहा आय का इस्तेमाल

मेघालय सरकार ने दो साल पहले जब सोहरा में ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात करने के लिए नये थाना भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी, तब पुरानी इमारत से आर्थिक लाभ हासिल करने के इरादे से इसे कैफे में बदलने की कवायद तेज हो गई.

सईम ने कहा, “थाने को कैफे में बदलने का मतलब था पुलिस बल के लिए अतिरिक्त आय, जिसका इस्तेमाल पुलिस कल्याण के लिए किया जा सकता था.” उन्होंने बताया कि कैफे के संचालन के लिए साझेदार चुनने के वास्ते निविदा प्रक्रिया दो साल पहले शुरू की गई.

सईम के मुताबिक, युवा उद्यमी नफी नोनग्रम को कैफे के संचालन के लिए चुना गया, जिन्होंने इमारत की संरचना के हिसाब से इसका डिजाइन प्रस्तुत किया और इसे ‘सोहरा 1885’ नाम दिया. उन्होंने बताया कि नफी ने ब्रिटिश काल की वस्तुओं का इस्तेमाल कर पुलिस थाने को खूबसूरत कैफे का रूप दिया.

जेलों को ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील किया गया

नफी ने कहा, “हमने जेलों को ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील किया. आगंतुकों को कैफे का लुक और माहौल काफी अच्छा लगता है.” सईम ने बताया कि नफी ने इमारत की दीवारों और फर्श में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि ये आज भी काफी अच्छी स्थिति में हैं. उन्होंने बताया कि थाने में मौजूद अंगीठी की भी मरम्मत कर उसे उसके पुराने स्वरूप में ढाला गया.

नफी के मुताबिक, कैफे में एक साथ 200 लोग अपने पसंदीदा पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं. उन्होंने बताया कि इसमें 200 किलोग्राम की एक तिजोरी का भी रंगरोगन किया गया है, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण के केंद्र के रूप में उभर रही है.

‘सोहरा 1885’ का उद्घाटन 22 मई को किया गया. तब से बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग इसका रुख कर रहे हैं. बत्स्केम थबाह नाम की एक ग्राहक ने कहा, “यह कैफे वाकई बहुत खूबसूरत है. हमें ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील की गई जेल में खाना खाकर काफी मजा आया.”

IMF के बाद अब पाकिस्तान पर ADB भी मेहरबान, भारत के विरोध के बावजूद दिए 800 मिलियन डॉलर; फूले नह

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<p style="text-align: justify;"><a title="ऑपरेशन सिंदूर" href=" data-type="interlinkingkeywords">ऑपरेशन सिंदूर</a> के तहत भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ है. जिसके बाद एक बार फिर पाकिस्तान दुनियाभर के देशों के सामने सहायता के नाम पर भीख मांगने पहुंच गया. इस बीच एशियाई विकास बैंक (ADB) ने पाकिस्तान के लिए 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंज़ूरी दे दी है. भारत के विरोध के बावजूद ADB ने ये कदम उठाया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत ने जताई कड़ी आपत्ति</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत ने आतंकवाद को फंडिंग करने के इतिहास के कारण पाकिस्तान को किसी भी तरह की सहायता पर कड़ी आपत्ति जताई थी. पिछले पहले पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी करीब 8,500 करोड़ रुपये का बेलआउट पैकेज जारी किया था. भारत ने पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी का हवाला देते हुए लोन की राशि के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>’पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम में होगा सुधार'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पाकिस्तान के वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने कहा कि इस पैकेज के तहत 300 मिलियन अमरीकी डॉलर का पॉलिसी बेस्ड लोन (PBL) और 500 मिलियन अमरीकी डॉलर लोन देश में योजना कार्य (PBG) को पूरा करने के लिए दिया गया है. उन्होंने कहा कि एडीबी ने सुधार कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के लिए 800 मिलियन अमरीकी डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी दी है.</p>
<p style="text-align: justify;">पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार पाक वित्त मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य घरेलू संसाधन जुटाना और वित्तीय सुधारों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को स्थिर करना है. मंत्रालय ने कहा, "इस सहायता से टैक्स सिस्टम में सुधार, राजस्व में बढ़ोतरी मिलेगी. यह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है."</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>’विकास के बजाय आतंकवाद पर खर्च करेगा पाकिस्तान'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत का कहना है कि एडीबी और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाले लोन का उपयोग पाकिस्तान अपने देश के विकास के बजाय आतंकवाद और सैन्य खर्चों के लिए कर सकता है. भारत ने &nbsp;कहा कि एडीबी और आईएमएफ से कई बार लोन के बाद भी पाकिस्तान अपने आर्थिक सुधारों को लागू करने में बार-बार विफल रहा है. भारत ने पाकिस्तान की कमजोर सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सेना के हर फैसले में सेना का दखल होता है.&nbsp;</p>

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माता सीता के शोक को हरने वाला ‘अशोक’ खास, इसमें है महिलाओं की कई समस्याओं का समाधान

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Benefits of Ashok Tree: “तरु अशोक मम करहूं अशोका…” माता सीता कहती हैं “अशोक के पेड़ ने मेरी विरह वेदना को दूर किया, इसलिए मैं इसका सम्मान करती हूं.” माता सीता की विरह वेदना को दूर करने वाले अशोक के पेड़ के पास महिलाओं की हर समस्या का समाधान है. अशोक की पत्तियों, छाल से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है.

महिलाओं की हर समस्या के लिए लाभदायक

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि इस पेड़ के पास महिलाओं की हर समस्या का हल है. धर्म शास्त्रों में भी अशोक पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि पवित्र पेड़ की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई थी. पेड़ की चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पूजा की जाती है. मान्यता है कि अशोक अष्टमी के दिन पूजा करने से न केवल सुख-शांति की प्राप्ति होती है, बल्कि रोग-शोक भी दूर होते हैं.

ये तो था पौराणिक महत्व, इसके औषधीय गुणों से आयुर्वेदाचार्य और पंजाब स्थित ‘बाबे के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल’ के डॉ. प्रमोद आनंद तिवारी ने रूबरू कराया. उन्होंने बताया, “अशोक के पेड़ का आयुर्वेदिक महत्व है. इसे महिलाओं का दोस्त कहें तो ज्यादा नहीं होगा. इसका इस्तेमाल स्त्री रोग और मासिक धर्म की समस्याओं जैसे- भारीपन, ऐंठन, अनियमितता और दर्द को कम करने में भी सहायक है.”

अशोक के पेड़ के अनगिनत फायदे

आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि समस्याओं से राहत पाने के लिए इसे भोजन के बाद दिन में दो बार गर्म पानी या शहद के साथ चूर्ण के साथ ले सकते हैं. अशोक की छाल खून साफ करती है, जिससे महिलाओं की त्वचा में निखार आती है. अशोक की छाल को चेहरे पर लगाने से डेड स्किन से छुटकारा मिलता है.

रिसर्च बताती है कि अशोक की छाल पीरियड्स में होने वाले तेज दर्द और ऐंठन, सूजन को कम कर देती है. यह बढ़े हुए वात को नियंत्रित करती है. अशोक के सेवन से वात की समस्या खत्म होती है. इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है, जिससे कब्ज, वात, ऐंठन, दर्द में राहत मिलती है.

त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक

अशोक के पेड़ में कई प्रकार के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारी विभिन्न रोगों से रक्षा करने में सहायक होते हैं. इसमें प्रचुर मात्रा में ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन, फ्लेवोनोइड्स तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए टॉनिक के रूप में काम करते हैं. अशोक के पेड़ की जड़ें और छाल मुहासे और त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक हैं. आयुर्वेदाचार्य प्रेग्नेंसी के दौरान और उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रसित लोगों को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतने और बिना डॉक्टर के परामर्श के इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं.

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RCB के लिए रुक गई शादी, जीतने के बाद जमकर झूमे दूल्हा-दुल्हन- वीडियो हो रहा वायरल

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Trending Video: भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है और जब बात RCB की पहली IPL ट्रॉफी की हो, तो ये जुनून शादी के मंडप तक भी पहुंच गया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शादी समारोह के दौरान मेहमानों ने शादी की रस्मों को रोककर RCB बनाम PBKS का फाइनल मैच देखा. जैसे ही RCB ने 18 साल बाद अपनी पहली ट्रॉफी जीती, वहां मौजूद सभी लोग खुशी से झूम उठे, और दूल्हा-दुल्हन भी इस जश्न में शामिल हो गए. लोग नए नवेले जोड़े को छोड़ विराट कोहली को चीयर करने लगे.

दूल्हा दुल्हन को छोड़ विराट का जश्न मनाने लगे लोग

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि शादी के मंडप के पास एक बड़ी LED स्क्रीन लगाई गई थी, जिस पर मैच का लाइव टेलीकास्ट हो रहा था. जैसे ही RCB ने आखिरी गेंद पर जीत हासिल की, वहां मौजूद सभी लोग खुशी से चिल्लाने लगे और शादी का माहौल एक क्रिकेट स्टेडियम में बदल गया.

यह नजारा देखकर सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे, “ये सिर्फ भारत में ही हो सकता है.” RCB की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल उनके फैंस को खुशी दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि भारत में क्रिकेट का क्रेज किस हद तक है. जब शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी लोग मैच देखने के लिए रुक जाते हैं, तो समझा जा सकता है कि क्रिकेट भारतीयों के दिलों में कितनी गहराई से बसा हुआ है.

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यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट

वीडियो को @gharkekalesh नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन भी दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…आरसीबी के जीतने के बाद देश विकसित हो गया है. एक और यूजर ने लिखा…बेचारे दूल्हा दुल्हन का तो पैसा बर्बाद हो गया. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…आरसीबी में बहुत खोजने के बाद शायद बेंगलुरु का एक खिलाड़ी दिखाई दे जाए.

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फाइनल हारने वाली पंजाब IPL 2026 से पहले इन खिलाड़ियों को करेगी रिलीज? लिस्ट में बड़े नाम भी शामिल

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युक्रेन ने 20 साल पुरानी तकनीक से उड़ा दिए रूस के होश, ड्रोन हमले से कई जगहों को किया तबाह

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Russia-Ukraine War: यूक्रेन ने हाल ही में रूस के खिलाफ एक बड़ा ड्रोन हमला किया जिसे “ऑपरेशन स्पाइडर वेब” नाम दिया गया. यह हमला रूस की सीमाओं के भीतर गहराई तक किया गया जिसमें यूक्रेन ने रूस के तीन बड़े एयरबेस बेलाया, ओलेन्या और इवानोवो पर जोरदार हमला कर दिया. इस हमले में रूस के एक-तिहाई से ज्यादा रणनीतिक लंबी दूरी तक मार करने वाले बमवर्षक विमानों को नष्ट कर दिया गया. लेकिन इस हमले की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि इसमें जिस तकनीक का उपयोग हुआ, वह करीब 20 साल पुराना ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर था ArduPilot.

क्या है ArduPilot?

यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है जिसमें कहा गया है कि इस हमले में ArduPilot नामक सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल हुआ जिसे सबसे पहले 2007 में क्रिस एंडरसन ने LEGO Mindstorms किट की मदद से बनाया था. एंडरसन उस वक्त WIRED मैगज़ीन के एडिटर-इन-चीफ थे. इसके बाद उन्होंने जोर्डी मुनोज़ और जेसन शॉर्ट के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को एक पूर्ण प्लेटफॉर्म में बदल दिया.

शुरुआत में यह सॉफ्टवेयर Arduino हार्डवेयर के लिए तैयार किया गया था लेकिन समय के साथ यह इतना उन्नत हो गया कि अब यह ड्रोन, नाव, पनडुब्बी और रोवर्स को भी नियंत्रित कर सकता है. इसके ज़रिये GPS वेपॉइंट सेट करना, टेक-ऑफ और लैंडिंग को ऑटोमैट करना और ड्रोन की उड़ान को स्थिर रखना संभव होता है.

सॉफ्टवेयर शांति के लिए बना था

ArduPilot को मूल रूप से शांति और जनसेवा के उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया था जैसे कि खोज और बचाव कार्य, कृषि सर्वेक्षण या 3D मैपिंग. लेकिन अब यह सॉफ्टवेयर युद्ध के मैदान में भी अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. चूंकि यह ओपन-सोर्स है, इसलिए कोई भी इसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से मॉडिफाई कर सकता है.

इस प्रोजेक्ट की आधिकारिक वेबसाइट भी यही कहती है कि यह एक वैश्विक समुदाय द्वारा संचालित है जो नैतिक विकास पर जोर देता है. हालांकि डेवलपर्स इसका हथियारों के रूप में इस्तेमाल न करने की अपील करते हैं लेकिन किसी पर रोक नहीं है क्योंकि यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है.

कैसे हुआ ऑपरेशन ‘स्पाइडर वेब’?

ऑनलाइन सामने आए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि यूक्रेनी ड्रोन ArduPilot से लैस थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU ने इन विस्फोटक ड्रोन को रूस के भीतर ट्रकों और स्टोरेज यूनिट्स में छिपाकर पहुंचाया था. जैसे ही ऑपरेशन शुरू हुआ, इन छिपे हुए कंटेनरों की छतें खुलीं और ड्रोन अपने टारगेट की ओर रवाना हो गए.

दिलचस्प बात यह है कि इन ड्रोन ने Starlink जैसी सैटेलाइट सेवा की जगह साधारण मोबाइल नेटवर्क और Raspberry Pi जैसे छोटे कंप्यूटर बोर्ड्स का इस्तेमाल किया. हाई लैटेंसी के बावजूद, ArduPilot सॉफ़्टवेयर ने उड़ान नियंत्रण और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई.

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दी पुष्टि

राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने X (पहले ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में कुल 117 ड्रोन शामिल थे और इस मिशन की तैयारी पिछले एक साल से चल रही थी. उन्होंने कहा, “हमने रूस की तीन टाइम ज़ोन में एक साथ हमला किया और हमारे सभी ऑपरेटिव्स को रूस से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.”

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रैपिडो से जुड़ी बड़ी खबर! ट्रैफिक लगा तो ग्राहक की जेब से कटेंगे हर मिनट पैसे

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Rapido Traffic Charge: राइड-हेलिंग ऐप रैपिडो (Rapido) ने एक नया चार्ज सिस्टम शुरू किया है, जिसने यात्रियों को चौंका दिया है. अब अगर आपकी राइड के दौरान ट्रैफिक ज्यादा हुआ और यात्रा में देरी हुई, तो इसका खर्च भी आपको ही उठाना होगा. 10 मिनट से ज़्यादा की ट्रैफिक देरी पर हर मिनट 0.50 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 30 रुपये तय की गई है.

उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी

इस फैसले को लेकर बेंगलुरु जैसे शहरों में रैपिडो के खिलाफ नाराज़गी का माहौल है. कई यूजर्स ने इस नियम को “अनुचित” और “शोषणकारी” बताया है. उन्होंने सवाल उठाया है कि जब ट्रैफिक उनके नियंत्रण में नहीं है, तो फिर उसके लिए चार्ज क्यों लिया जा रहा है?

ट्रैफिक मेरी गलती नहीं है

हेब्बल की रहने वाली पवित्रा राव ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही 40 रुपये टिप दी थी, लेकिन फिर भी उन्हें ट्रैफिक के कारण अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा. उनका कहना था, “ड्राइवर को मेहनताना मिलना चाहिए, लेकिन जो बात यात्री के बस में नहीं है, उसका चार्ज लेना गलत है. यह तो सीधे-सीधे जबरन वसूली जैसा लगता है.”

पहले टिपिंग विवाद, अब ट्रैफिक चार्ज पर बवाल

रैपिडो पर हाल ही में टिपिंग को लेकर भी सवाल उठे थे, जब कंपनी ने राइड बुक करते समय ही ‘टिप जोड़ें’ का विकल्प देना शुरू किया. इसे लेकर उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 21 मई को CCPA (Central Consumer Protection Authority) से जांच के निर्देश दिए थे. इसके बाद रैपिडो, ओला और उबर ने भाषा में बदलाव कर “Add more (voluntary)” कर दिया, लेकिन यूजर्स का कहना है कि अनुभव अब भी वैसा ही है.

भरोसा टूट रहा है

लोगों का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म्स अब उन हालातों से पैसा कमा रहे हैं जो ग्राहक के हाथ में ही नहीं हैं. ये सीधे-सीधे भरोसे को खत्म करने वाली बात है. ऐसे मामलों में रेगुलेटर्स को हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

CCPA की जांच जारी

फिलहाल CCPA इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है, लेकिन रैपिडो की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं और उम्मीद है कि सरकार इस पर सख्त कार्रवाई करेगी.

रैपिडो का यह कदम सवालों के घेरे में इसलिए भी है क्योंकि अब यात्रियों को उन कारणों का भी भुगतान करना पड़ रहा है, जो उनके नियंत्रण में ही नहीं हैं? उपभोक्ताओं का कहना है कि “अगर ये ट्रेंड शुरू हुआ, तो हर ट्रैफिक सिग्नल एक नया बिल थमा जाएगा.

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तियानमेन स्क्वायर पर ऐसा क्या बोला अमेरिका की आग उगलने लगा ‘ड्रैगन’, बोला-‘तोड़-मरोड़ कर न पेश

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China On US Over Tiananmen Square: बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में 4 जून, 1989 को जो हुआ वह न केवल चीन, बल्कि पूरे विश्व के लिए लोकतंत्र और दमन के टकराव का प्रतीक बन गया. हजारों छात्र और आम नागरिक, राजनीतिक स्वतंत्रता, प्रेस की आज़ादी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे. इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का अंत टैंकों और गोलियों से हुआ. तियानमेन स्क्वायर में प्रदर्शन 15 अप्रैल से 4 जून 1989 तक चला. PLA (People’s Liberation Army) की तरफ से की गई कार्रवाई में अनुमानित सैकड़ों से लेकर हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई. हालांकि, आज तक चीन सरकार ने मौत के आंकड़ों से जुड़ी सही जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. घटना के बाद से चीन में इस पर चर्चा, शिक्षा या मीडिया कवरेज पूरी तरह प्रतिबंधित है.

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तियानमेन स्क्वायर की 36वीं वर्षगांठ पर कहा कि 4 जून को जो कुछ हुआ, दुनिया उसे कभी नहीं भूलेगी. उनका बयान एक ऐसी विरासत को सम्मान देने का प्रयास था, जिसे चीन वर्षों से छिपाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने सीधे-सीधे चीन पर तथ्यों को सेंसर करने का आरोप लगाया. रुबियो ने  तियानमेन स्क्वायर में शहीद हुए छात्रों को याद किया, बल्कि आज भी जो कार्यकर्ता मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनका भी उल्लेख किया.

चीन की तीखी प्रतिक्रिया
चीन ने रुबियो की टिप्पणी को चीन के आंतरिक मामलों में गंभीर हस्तक्षेप बताया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि यह बयान ऐतिहासिक तथ्यों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश करने की साजिश है. चीन इसके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज करता है. इस मुद्दे पर चीनी सरकार की नीति स्पष्ट है कि तियानमेन को भूल जाना ही एकमात्र विकल्प है. बता दें कि चीनी इंटरनेट, शिक्षा प्रणाली और मीडिया से तियानमेन से जुड़े मुद्दे को मिटा दिया गया है.

ताइवान की मुखर भूमिका
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने तियानमेन की याद में फेसबुक पोस्ट में लिखा कि हम अपने पूर्वजों के बलिदान को याद करते हैं. लोकतांत्रिक समाज सच्चाई को संरक्षित करते हैं, जबकि अधिनायकवादी सरकारें इतिहास को मिटाना चाहती हैं. इस बयान ने स्पष्ट रूप से चीन की साम्यवादी विचारधारा और ताइवान के लोकतांत्रिक मूल्य-तंत्र के बीच की खाई को फिर उजागर कर दिया. दूसरी तरफ चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और बलपूर्वक उसे मिलाने की धमकी देता है. इसके लिए उन्होंने कई बार ताइवान को सीधे तौर धमकाया भी है.

हांगकांग का मौन और चाउ हैंग-तुंग की भूख हड़ताल
हांगकांग, जो कभी तियानमेन स्मरण का एकमात्र चीनी क्षेत्र था, अब वहां भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू हो चुका है. पूर्व वकील और कार्यकर्ता चाउ हैंग-तुंग को सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित करने के कारण कैद किया गया है. इस वर्ष उन्होंने जेल में 36 घंटे की भूख हड़ताल करके लोकतंत्र की याद को जीवित रखा है.

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भुवन बाम ने कराई प्लास्टिक सर्जरी? एक्टर ने रूमर्स पर तोड़ी चुप्पी, बताई सारी सच्चाई

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 Bhuvan Bam Plastic Surgery Rumours:  भुवन बाम, जो पहले यूट्यूब पर ‘टिटू मामा’ के लिए जाने जाते थे, अब एक्टिंग में भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. वहीं उनकी नई और दमदार लुक ने इंटरनेट पर चर्चा छेड़ दी और लोग कह रहे हैं कि उन्होंने सर्जरी कराई है. भुवन ने अब इन रूमर्स पर चुप्पी तोड़ी है. 

भुवन बाम ने कराई प्लास्टिक सर्जरी? 
इंटरनेट पर एक Reddit थ्रेड वायरल हुआ, जिसमें भुवन के पुराने और नए फोटो दिखाए गए थे. इस थ्रेड में पूछा गया कि क्या भुवन ने कोई प्लास्टिक सर्जरी करवाई है, जिससे फैन्स में जिज्ञासा बढ़ गई. भुवन बाम ने अब इन सारी  अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी है और इन्हें  खुद मजाकिया अंदाज में खारिज कर दिया है., इसके साथ ही उन्होंने अपने बदले लुक की वजह भी बताई. उन्होंने बताया कि उनका चेहरा फिटनेस, कार्डियो, और सख्त डाइट की वजह से बदला है, ना कि किसी सर्जरी की वजह से. 


 

 

मेडिकल सर्जरी का सच
इसके साथ ही भुवन बाम ने ये भी बताया कि हाल ही में उन्होंने एक मेडिकल सर्जरी  जरूर करवाई थी, जिसमें एक दर्दनाक फोड़ा (म्यूकोसील) हटाया गया था.  यह सर्जरी केवल स्वास्थ्य कारणों से थी, न कि कॉस्मेटिक बदलाव के लिए. 

भुवन बाम के क्लियरिफिकेशन पर  फैंस ने किया रिएक्ट 
भुवन की सच्चाई सुनकर इंटरनेट पर फैन्स ने उनकी मेहनत और ईमानदारी की खूब तारीफ की.  कई लोगों ने कहा कि यह दिखाता है कि सही लाइफस्टाइल से भी बड़ा बदलाव संभव है. भुवन बाम की कहानी ये साबित करती है कि कड़ी मेहनत, फिटनेस और सही खान-पान से कोई भी अपनी शक्ल-ओ-सूरत में बड़ा बदलाव ला सकता है, बिना किसी प्लास्टिक सर्जरी के. 

 

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कोटा की गलियों में पढ़ाई का जुनून, वाराणसी के अक्षत ने जेईई में रच दिया इतिहास

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<p style="text-align: justify;">देश के सबसे कठिन इंजीनियरिंग एग्जाम माने जाने वाले जेईई एडवांस्ड 2025 में वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के अक्षत चौरसिया ने ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर सबको चौंका दिया है. कोटा में दो साल की मेहनत और लगन से पढ़ाई करने वाले अक्षत ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो और माहौल सही मिले, तो कोई भी मुकाम दूर नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;">अक्षत की पढ़ाई की कहानी सिर्फ जेईई की नहीं है. उन्होंने 10वीं में 97.2% और 12वीं में 97% अंक हासिल किए. खास बात यह है कि उन्होंने 12वीं में मैथ्स और केमिस्ट्री दोनों में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं. इससे यह साफ है कि अक्षत की नींव शुरू से ही मजबूत रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>जेईई मेन में भी रहा शानदार प्रदर्शन</strong><br />जेईई एडवांस्ड से पहले अक्षत ने जेईई मेन 2025 में ऑल इंडिया रैंक 72 हासिल की थी. यह सफर आसान नहीं था, लेकिन अक्षत की मेहनत और स्मार्ट स्ट्रैटजी ने उन्हें हर मुकाम पर सफलता दिलाई.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कोटा में मिला पढ़ाई का सही माहौल</strong><br />अक्षत ने बताया कि वह जब टैलेंटेक्स एग्जाम में टॉप 25 में आए थे, तभी पहली बार कोटा आए थे. यहीं उन्हें महसूस हुआ कि कोटा केवल एक शहर नहीं, बल्कि छात्रों के सपनों की उड़ान का मैदान है. अक्षत ने कहा यहां हर गली में पढ़ाई का जुनून है. हर छात्र एक-दूसरे को देखकर प्रेरणा लेता है. अगर मैं कोटा नहीं आता, तो शायद आज इस रैंक तक नहीं पहुंच पाता.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>परिवार का मजबूत साथ</strong><br />अक्षत की मां वैशाली चौरासिया कोटा में उनके साथ ही रहीं. वह बतौर गृहिणी बेटे का पूरा ध्यान रखती थीं. अक्षत ने कहा मम्मी के साथ होने से मुझे न सिर्फ इमोशनल सपोर्ट मिला, बल्कि मानसिक रूप से भी मैं स्थिर रहा. यह तैयारी के दौरान बहुत जरूरी होता है. उनके पिता मनोज कुमार चौरासिया सरकारी नौकरी में हैं. अक्षत की बड़ी बहन ट्रिपलआईटी भागलपुर से बीटेक कर चुकी हैं और उन्होंने अक्षत को लगातार गाइड किया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>टीचर्स और तैयारी का तरीका</strong><br />अक्षत का मानना है कि उनके सफर में कोचिंग के अध्यापकों की बहुत बड़ी भूमिका रही. उन्होंने कहा मेरे टीचर्स ने पूरी मेहनत और समर्पण से मुझे पढ़ाया. स्टडी मटेरियल और मॉड्यूल्स ने मेरी तैयारी को दिशा दी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इनपुट: दिनेश कश्यप</strong></p>
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