स्टील और एल्युमिनियम पर 50% टैरिफ आज से होगा लागू, ट्रंप के ऐलान का भारत पर होगा बड़ा असर

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US Tariffs On Steel-Aluminium: अमेरिका में बुधवार से स्टील और एल्युमिनियम पर आयात शुल्क अब दोगुना यानी 50 प्रतिशत कर दिया गया है. व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर करते हुए इसे नवीनतम पहल बताया है. हालांकि, ब्रिटेन के ऊपर टैरिफ की दर 25 प्रतिशत ही रहेगी क्योंकि दोनों देश पहले ही व्यापार समझौता कर चुके हैं और उसमें शर्तों के मुताबिक टैरिफ और कोटा निर्धारित किया जा चुका है.

पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ट्रंप ने पेंसिल्वेनिया में अमेरिकी स्टील प्लांट के कामगारों को संबोधित करते हुए स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ को दोगुना करने का ऐलान किया था. ट्रंप ने कहा था कि कोई भी आपकी इंडस्ट्री को चुराने में सक्षम नहीं होगा.

अब एल्युमिनियन और स्टील पर दोगुना टैरिफ

अमेरिका ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट 1962 की धारा 232 के तहत राष्ट्रपति ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से दोगुना कर उसे अब 50 प्रतिशत कर दिया है. यहां पर गौर करने वाली बात ये है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान साल 2018 में स्टील पर टैरिफ को बढ़ाकर 25 प्रतिशत और एल्युमिनियम पर 10 प्रतिशत किया था. लेकिन इस साल एल्युमिनियम पर टैरिफ को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया था.

राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले का भारत पर काफी असर पड़ेगा क्योंकि पिछले साल यहां से करीब 4.56 अरब के स्टील और एल्युमिनियम का अमेरिका को एक्सपोर्ट किया गया था. भारतीय स्टील की अमेरिकी में तेजी से मांग बढ़ रही थी. ऐसे में इस टैरिफ के बाद स्टील की कीमतें अब अमेरिकी में महंगी हो जाएंगी और इसका सीधा असर भारत से होने वाले एक्सपोर्ट पर पड़ेगा.

भारत उठाया जवाब कदम

इधर, भारत भी अमेरिकी टैरिफ के बदले जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर ली है. विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ को भेजे नोटिस में भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले सामानों पर टैरिफ की दरें बढ़ने के बारे में बता दिया है. हालांकि, अभी उस पर लागू करने के बारे में अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. अब जबकि ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ बढ़ा दिया है, ऐसे में देखना है कि भारत कब से जवाब कदम के तौर पर अमेरिका से आयातित सामानों पर टैरिफ बढ़ाता है.

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क्या खान सर की दुल्हनिया हिन्दू हैं? मांग में सिंदूर देख नेटिजनस ने उठाए सवाल

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Khan Sir Wife Sindoor: अपने पढ़ाने के अंदाज के कारण चर्चा में रहने वाले खान सर आजकल अपनी शादी और दुल्हनिया को लेकर चर्चा में हैं. बिहार के खान सर ने पिछले दिनों शादी की थी और फिर उन्होंने रिसेप्शन दिया था. इस दौरान खान सर से ज्यादा सुर्खियां बटोर ले गईं उनकी दुल्हनिया. रिसेप्शन के दौरान खान सर की दुल्हन घूंघट में थी. अभी तक खान सर ने अपनी पत्नी के नाम या उसकी पहचान का खुलासा नहीं किया है. खान सर की पत्नी की मांग में सिंदूर देखकर लोग उनके हिंदू होने का अंदाज लगा रहे हैं. बता दें कि खान सर ने अभी तक सार्वजनिक रूप से अपने नाम का भी खुलासा नहीं किया है. 

मांग में सिंदूर पर सवाल
खान सर की पत्नी लाल जोड़े में रिसेप्शन के दौरान मौजूद थी. उन्होंने बड़ी सी नथनी पहन रखी थी जो कि उनके घूंघट से साफ दिख रहा था. इस दौरान कई नेटिजन्स दावा किया कि उनकी मांग में सिंदूर भी था तो क्या खान सर की पत्नी हिंदू हैं?

Khan Sir Wife Sindoor: क्या खान सर की दुल्हनिया हिन्दू हैं? मांग में सिंदूर देख नेटिजनस ने उठाए सवाल


Khan Sir Wife Sindoor: क्या खान सर की दुल्हनिया हिन्दू हैं? मांग में सिंदूर देख नेटिजनस ने उठाए सवाल

क्या हो सकता है सिंदूर का कारण
बिहार और यूपी के कुछ इलाकों में मुस्लिम समुदाय से जुड़ी महिलाएं भी श्रृंगार करती हैं. उनके साथ में भी चूड़ी और मांग में सिंदूर देखा जाता है. ऐसे में लोग ये भी चर्चा कर रहे हैं कि हो सकता है बिहार से आने वाले खान सर की पत्नी भी उसी इलाके की हों. वहां ना सिर्फ मुस्लिमों में सिंदूर लगाया जाता है बल्कि शादी के दौरान सिंदूरदान की रस्म भी निभाई जाती है. सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इसी तरफ इशारा करते हुए कमेंट किए हैं. 

सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने खान सर की पत्नी के सिंदूर को लेकर सवाल उठाए तो उनके फैंस ने जवाब दिया कि बिहार में मुस्लिम महिलाएं भी सिंदूर लगाती हैं.

घूंघट पर भी सवाल 
खान सर की पत्नी को घूंघट में देखकर कई लोग सवाल उठा रहे हैं. कई इसे पिछड़ी सोच की निशानी तो कई इसे महिलाओं की आजादी से जोड़ रहे हैं. बता दें कि पिछले दिनों खान सर ने खुद ऑनलाइन क्लास के दौरान खुलासा किया था कि जब भारत-पाकिस्तान का संघर्ष चल रहा था उसी दौरान उन्होंने शादी कर ली थी. शादी में बहुत ही कम लोग शामिल हुए थे. इसके बाद पटना में खान सर ने रिसेप्शन दिया था. 

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मौत को छूकर टक से वापस…तेज रफ्तार कार ने ऑटो को मारी जोरदार टक्कर, फिर ऐसे बच गई जान

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Trending Video: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की एक खास बात होती है. वो सिर्फ दृश्य नहीं होते, वो एहसास छोड़ते है और जब वीडियो किसी हादसे से जुड़ा हो, तो हर फ्रेम जैसे दिल की धड़कनों को तेज कर देता है. इन दिनों एक ऐसा ही वीडियो इंटरनेट पर तूफान की तरह वायरल हो रहा है, जिसमें सड़क पर खड़ा एक साधारण सा ऑटो और उसका चालक अचानक एक ऐसी घटनाक्रम का हिस्सा बन जाता है, जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता. वीडियो की शुरुआत में सबकुछ बेहद शांत नजर आता है.

कार ने ऑटोरिक्शा को मारी जोरदार टक्कर

एक मेगा हाईवे के किनारे खड़ा ऑटो, उसका मालिक उसमें झुककर कुछ साफ-सफाई कर रहा है. न कोई अफरा-तफरी, न कोई खतरे की आहट. लेकिन कहते हैं ना, “तूफान से पहले की शांति सबसे घातक होती है” और यही इस वीडियो में अगले ही सेकंड में देखने को मिलता है. वीडियो में दिखता है कि हाईवे के एक किनारे ऑटोरिक्शा खड़ा है. उसका चालक पूरी तल्लीनता से ऑटो की धूल साफ कर रहा है, जैसे हर रोज करता होगा. उसके आसपास कोई चहल-पहल नहीं, माहौल बिल्कुल सामान्य है. अचानक एक तेज़ आवाज और कैमरे की फ्रेम में दाखिल होती है एक बेहद तेज रफ्तार कार, जो पूरी बेकाबू होती हुई सीधे जाकर ऑटो और उसके चालक को उड़ा देती है.

बाल बाल बचा चालक

टक्कर इतनी ज़ोरदार होती है कि ऑटोरिक्शा के परखच्चे उड़ जाते हैं और चारों तरफ प्लास्टिक और मेटल के टुकड़े बिखर जाते हैं. ये एक ऐसा पल होता है जो देखने वाले को अंदर तक हिला देता है. लेकिन चमत्कार जैसा कुछ उस पल होता है जब टक्कर के ठीक बाद जब धूल और मलबा छंटता है, तो देखा जाता है कि ऑटो रिक्शा चालक जिंदा है. न सिर्फ जिंदा, बल्कि चमत्कारिक रूप से उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई. अब सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को देखकर भयंकर हैरानी में हैं कि इतनी जोरदार टक्कर के बाद चालक बच कैसे गया.

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यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट

वीडियो को @Deadlykalesh नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…जाको राखे साइयां मार सके ना कोय. एक और यूजर ने लिखा…अंधा नहीं ये नशेड़ी था. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…ऑटो वाले को क्यों तोड़ा भाई.

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मार्क जुकरबर्ग ने क्यों थामा न्यूक्लियर प्लांट का हाथ, जानें क्या है मेटा का नया मिशन

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<p style="text-align: justify;">फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चलाने वाली मेटा कंपनी ने अब एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिका की न्यूक्लियर एनर्जी कंपनी कॉन्स्टेलेशन एनर्जी के साथ एक बड़ी डील कर ली है. ये पहली बार है जब किसी बड़ी टेक कंपनी ने सीधे तौर पर किसी परमाणु ऊर्जा कंपनी से हाथ मिलाया है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर सोशल मीडिया कंपनी को न्यूक्लियर पावर प्लांट से साझेदारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डेटा सेंटर्स और AI की बढ़ती भूख</strong></p>
<p style="text-align: justify;">असल में मेटा का ये फैसला आने वाले समय की तैयारियों का हिस्सा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भारी-भरकम डेटा सेंटर्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. अमेरिका में बीते दो दशकों में पहली बार बिजली की डिमांड में इतना बड़ा उछाल देखा गया है और इसके पीछे AI और टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल है.</p>
<p style="text-align: justify;">मेटा आने वाले सालों में अपनी डिजिटल सेवाओं को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए बिजली की सप्लाई को लेकर पहले से ही तैयारियां कर रही है. यही वजह है कि कंपनी ने न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट से जुड़ने का फैसला लिया है ताकि उन्हें भविष्य में बिजली की कोई कमी ना हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सब्सिडी खत्म, मेटा बनी सहारा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कॉन्स्टेलेशन एनर्जी का यह न्यूक्लियर पावर प्लांट अमेरिका के इलिनोइस राज्य में है. अभी तक यह कंपनी सरकार से सब्सिडी लेकर काम कर रही थी क्योंकि न्यूक्लियर प्लांट्स से कार्बन फ्री बिजली बनती है. लेकिन साल 2027 के बाद ये सब्सिडी खत्म हो जाएगी। ऐसे में कंपनी को आर्थिक रूप से दिक्कत हो सकती थी.</p>
<p style="text-align: justify;">यहीं मेटा ने आगे बढ़कर हाथ थाम लिया. अब इस डील के जरिए मेटा कॉन्स्टेलेशन को सपोर्ट करेगी ताकि प्लांट 2027 के बाद भी बिना किसी अड़चन के बिजली बनाता रहे. इससे मेटा को भी अपने AI और डेटा सेंटर्स के लिए स्थिर और स्वच्छ बिजली मिलती रहेगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेटा की नजर अब डिफेंस सेक्टर पर भी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इतना ही नहीं, मेटा अब अमेरिकी सेना के लिए भी टेक्नोलॉजी तैयार करने जा रही है. मेटा ने एंड्रिल इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी के साथ मिलकर वर्चुअल रियलिटी (VR) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) डिवाइसेस बनाने की योजना बनाई है. इन डिवाइसेस में खास सेंसर और AI तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे सैनिकों की सुनने और देखने की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी.</p>
<p style="text-align: justify;">ये डिवाइसेस हेलमेट और चश्मों के रूप में तैयार हो सकती हैं, जो सैनिकों को छुपे हुए खतरे को जल्दी पहचानने और सही लक्ष्य साधने में मदद करेंगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बिजली की जंग शुरू हो चुकी है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेटा का यह कदम साफ दिखाता है कि आने वाला दौर सिर्फ सोशल मीडिया और एआई का नहीं, बल्कि बिजली और ऊर्जा के लिए जद्दोजहद का भी होगा. टेक कंपनियों को अब न सिर्फ अपने यूजर्स की चिंता है, बल्कि उनके ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स को चलाने के लिए लगातार और साफ बिजली की जरूरत भी है. जुकरबर्ग का न्यूक्लियर पावर प्लांट से हाथ मिलाना इस बात का संकेत है कि टेक्नोलॉजी का भविष्य अब एनर्जी से जुड़ा हुआ है और जो कंपनियां पहले से तैयारी कर रही हैं, वही आने वाले वक्त में टिक पाएंगी.</p>

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RCB के ट्रॉफी जीतने पर विजय माल्या का रिएक्शन, कहा- ई साला कप नाम दे; लोगों ने मांगे पैसे

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Vijay Mallya First Reaction: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने आईपीएल 2025 का खिताब जीत लिया है. बेंगलुरु ने फाइनल मुकाबले में पंजाब किंग्स को 6 रन से हरा दिया. बेंगलुरु के आईपीएल की पहली ट्रॉफी जीतने पर RCB के पूर्व मालिक विजय माल्या का रिएक्शन भी सामने आया है. विजय माल्या ने पूरी टीम को जीत की बधाई दी है. विजय माल्या ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि ‘ई साला कप नाम दे’, जो कि आरसीबी की टैग लाइन है.

विजय माल्या ने दी RCB को जीत की बधाई

विजय माल्या ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु आखिरकार 18 साल बाद आईपीएल चैंपियन बन गई है. आरसीबी के लिए 2025 का ये आईपीएल टूर्नामेंट काफी शानदार रहा’. विजय माल्या ने आगे लिखा कि ‘बेहतरीन कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ के साथ एक बैलेंस्ड टीम ने बोल्ड गेम खेला है. बहुत-बहुत बधाई! ई साला कप नामदे’.

लोगों ने मांग लिए विजय माल्या से पैसे

विजय माल्या को आरसीबी को जीत की बधाई देना भारी पड़ गया. लोगों ने माल्या से देश के पैस मांगने शुरू कर दिए. विजय माल्या ने बेंगलुरु के क्वालीफायर-ौ1 में पहुंचने पर भी बधाई दी थी. तब भी सोशल मीडिया पर लोगों ने विजय माल्या को पैसे देने के लिए ट्रोल किया था.

RCB ने जीता पहला खिताब

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम ने अपना पहला आईपीएल टाइटल जीत लिया है. बेंगलुरु की इस जीत पर टीम के स्टार प्लेयर विराट कोहली काफी इमोशनल नजर आए. आरसीबी के इस 18वें सीजन को जीतने पर विराट बीच स्टेडियम में ही रोने लगे. विराट आईपीएल की शुरुआत से इस टीम के साथ हैं और 3 जून की रात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपना पहला खिताब जीत लिया है.

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यूपी पुलिस में भर्ती निकली तो कितने अग्निवीरों को मिलेगी नौकरी? जान लीजिए पूरा गणित

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उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. अब वे नौजवान जो सेना में ‘अग्निपथ योजना’ के तहत चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें यूपी पुलिस और पीएसी की भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. ये फैसला ना सिर्फ पूर्व अग्निवीरों को नई दिशा देगा, बल्कि यूपी पुलिस को भी एक अनुशासित और ट्रेंड फोर्स देने का काम करेगा.

राज्य सरकार ने साफ किया है कि अग्निवीरों को यूपी पुलिस में कांस्टेबल (आरक्षी), पीएसी, घुड़सवार पुलिस और फायरमैन जैसे पदों पर सीधी भर्ती में मौका मिलेगा. संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जानकारी दी कि इन सभी पदों पर 20% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए रिज़र्व रहेंगे. यह आरक्षण क्षैतिज होगा, यानी जो अग्निवीर जिस श्रेणी (SC/ST/OBC/EWS) से आते हैं, उन्हें उसी कैटेगरी का लाभ मिलेगा.

आयु सीमा में भी राहत

अग्निवीरों को अधिकतम उम्र सीमा में तीन साल की छूट दी जाएगी. यानी अगर सामान्य उम्मीदवार के लिए अधिकतम आयु सीमा 23 साल है, तो पूर्व अग्निवीरों के लिए यह सीमा 26 साल हो सकती है.

कितनी भर्तियां और कितने पद?

कुल पद: 26,596
आरक्षी (Constable): 19,220
आरक्षी पीएसी: 9,837
घुड़सवार पुलिस: 71
फायरमैन: पद शामिल
महिला बटालियन (बदायूं, गोरखपुर, लखनऊ): 2,282
नागरिक पुलिस: 3,245
विशेष सुरक्षा बल (UPSSF): 1,341

फैसले की अहमियत

अगर हम इसमें से 20 प्रतिशत पद भी पूर्व अग्निवीरों के लिए मानें, तो अनुमान के अनुसार लगभग 5,000 से ज्यादा पद ऐसे होंगे जो उन्हें मिल सकते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल कारगिल विजय दिवस पर इसकी घोषणा की थी और अब सरकार ने इसे लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है. यह फैसला न केवल पूर्व अग्निवीरों को रोजगार देगा, बल्कि उनके सैन्य अनुशासन और कौशल का लाभ भी प्रदेश को मिलेगा.

क्या है अग्निवीरों की स्थिति?

केंद्र सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी. इसके तहत युवाओं को चार साल के लिए सेना, एयरफोर्स और नेवी में सेवा का मौका मिलता है. 2026 में पहला बैच चार साल की सेवा पूरी करेगा. इनमें से 25% को स्थायी नियुक्ति मिल सकती है, जबकि 75% को सिविल क्षेत्र में नौकरी की जरूरत होगी.

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किडनी की बीमारी के ये हैं बेहद आम पांच लक्षण, डायबिटीज के मरीज अक्सर इन्हें कर देते हैं इग्नोर

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<p style="text-align: justify;">डायबिटीज न केवल ब्लड शुगर को प्रभावित करती है, बल्कि शरीर के कई अंगों खासकर किडनी को भी नुकसान पहुंचाती है. कई रिसर्च में सामने आया है कि डायबिटीज के मरीजों में किडनी रोग (डायबिटिक नेफ्रोपैथी) का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 30-40% ज्यादा होता है. चिंताजनक बात यह है कि किडनी रोग के शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि डायबिटीज के मरीज इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. आइए इनके बारे में जानते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लगातार थकान और कमजोरी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज के मरीजों में किडनी रोग का एक प्रमुख लक्षण है लगातार थकान और कमजोरी. जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण ब्लड में यूरिया जैसे विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं. यह थकान और कमजोरी का कारण बनता है. रिसर्च में पाया गया कि 60% से अधिक डायबिटीज मरीज जो किडनी रोग के शुरुआती चरण में हैं, इस लक्षण को सामान्य तनाव या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पैरों और एड़ियों में सूजन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी रोग के कारण शरीर में एक्स्ट्रा फ्लूड जमा होने लगता है, जिससे पैरों, एड़ियों, और कभी-कभी चेहरे पर सूजन (एडिमा) दिखाई देती है. डायबिटीज के मरीजों में यह लक्षण तब होता है, जब किडनी प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) को रक्त में बनाए रखने में नाकाम होती है, जिसके कारण प्रोटीन मूत्र में रिसने लगता है. रिसर्च के अनुसार, यह लक्षण मध्यम से गंभीर किडनी रोग (स्टेज 3 या 4) में आम है, लेकिन इसे अक्सर गलतफहमी में सामान्य सूजन समझ लिया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेशाब में बदलाव</strong></p>
<p style="text-align: justify;">झागदार पेशाब (प्रोटीन की अधिकता के कारण), बार-बार पेशाब आना (खासकर रात में) या पेशाब का रंग गाढ़ा होना किडनी रोग का स्पष्ट सिग्नल हो सकता है. रिसर्च में पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों में माइक्रोएल्ब्यूमिनुरिया (मूत्र में थोड़ी मात्रा में प्रोटीन) किडनी रोग का सबसे शुरुआती लक्षण है, जिसे केवल टेस्ट के माध्यम से ही पकड़ा जा सकता है. दुर्भाग्यवश, डायबिटीज के मरीज इस लक्षण को सामान्य समझकर टेस्ट कराने से बचते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाई ब्लडप्रेशर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हाई ब्लडप्रेशर (हाइपरटेंशन) डायबिटीज और किडनी रोग दोनों का एक प्रमुख कारण है. डायबिटीज के कारण किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं डैमेज हो जाती हैं, जिससे ब्लडप्रेशर बढ़ता है. रिसर्च के अनुसार, हाई ब्लडप्रेशर किडनी रोग का कारण और रिजल्ट दोनों हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लडप्रेशर को अक्सर नॉर्मल माना जाता है, जबकि यह किडनी की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भूख में कमी और जी मिचलाना</strong></p>
<p style="text-align: justify;">किडनी रोग के कारण रक्त में अपशिष्ट पदार्थों का स्तर बढ़ने से भूख में कमी, जी मिचलाना और कभी-कभी उल्टी की समस्या हो सकती है. यह लक्षण तब दिखाई देता है, जब किडनी रोग एडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाता है. रिसर्च में पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों में ये लक्षण प्रारंभिक चरणों में हल्के हो सकते हैं, जिसके कारण इन्हें पाचन संबंधी समस्याओं से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डायबिटीज और किडनी रोग का संबंध</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डायबिटीज किडनी रोग का प्रमुख कारण है और यह ग्लोबल लेवल पर अंतिम चरण के किडनी रोग (ESRD) के लगभग 44% मामलों के लिए जिम्मेदार है. डायबिटीज के कारण ब्लड में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है, जो किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं (ग्लोमेरुली) को नुकसान पहुंचाता है. ये खून की धमनियां ब्लड को फिल्टर करने का काम करती हैं और जब ये डैमेज हो जाती हैं तो किडनी अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में असमर्थ हो जाती है. इसकी वजह से प्रोटीन पेशाब में रिसने लगता है, जिसे माइक्रोएल्ब्यूमिनुरिया कहा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" में कहां करा सकते हैं कोरोना का इलाज, क्या खाना-पीना भी फ्री दे रही सरकार?</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&nbsp;</strong></p>

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43 रुपये के डिविडेंड से नारायण मूर्ति के परिवार ने कमाए करोड़ों, पोते की कमाई होश उड़ा देगी

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<p style="text-align: justify;">भारत के सबसे प्रतिष्ठित आईटी संस्थानों में से एक इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति का पोता, एकाग्र रोहन मूर्ति, मात्र 18 महीने की उम्र में 6.5 करोड़ रुपये की डिविडेंड इनकम कमा चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब एकाग्र केवल चार महीने के थे, तब नारायण मूर्ति ने उन्हें 240 करोड़ रुपये मूल्य के इंफोसिस के शेयर गिफ्ट किए थे, जो कंपनी में 0.04 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>डिविडेंड से भर गया नन्हे एकाग्र का खाता</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंफोसिस ने हाल ही में अपने शेयरधारकों को 43 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया, जिसमें कंपनी के कुल 54.2 करोड़ शेयरहोल्डर्स को 2,330 करोड़ रुपये बांटे गए. इसी के तहत एकाग्र के पास मौजूद 15 लाख शेयरों पर 6.5 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला. इस प्रकार, महज़ डेढ़ साल की उम्र में एकाग्र उन चुनिंदा बच्चों में शामिल हो गए हैं, जो करोड़ों के मालिक हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इंफोसिस के प्रमोटर्स ने कितनी कमाई की?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डिविडेंड के इस बंटवारे में इंफोसिस के अन्य प्रमोटर्स और संस्थापकों को भी अच्छी-खासी रकम प्राप्त हुई. कंपनी के चेयरमैन नंदन निलेकणी को उनके 4 करोड़ शेयरों पर 175 करोड़ रुपये मिले. नारायण मूर्ति ने 1.5 करोड़ शेयरों पर 65 करोड़ रुपये कमाए, जबकि सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन को 3.2 करोड़ शेयरों पर 137 करोड़ रुपये मिले. सबसे ज़्यादा डिविडेंड कमाने वाली व्यक्ति रहीं सुधा गोपालकृष्णन, जिनके पास 9.5 करोड़ शेयर हैं और उन्हें 410 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नारायण मूर्ति के परिवार की कमाई</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मूर्ति परिवार की नई पीढ़ी ने भी इस डिविडेंड से करोड़ों की कमाई की. रोहन मूर्ति को उनके 6 करोड़ शेयरों पर 261.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि उनकी बहन अक्षता मूर्ति, जो कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं को 3.8 करोड़ शेयरों से 167 करोड़ रुपये का लाभ मिला.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तीसरी पीढ़ी की एंट्री भी दमदार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इंफोसिस के संस्थापकों की तीसरी पीढ़ी ने भी इस डिविडेंड से अच्छा पैसा कमाया. निकीता और मिलन शिबुलाल मांचंदा, जिनके पास 61 लाख शेयर हैं, को 26.3 करोड़ रुपये मिले. वहीं तनुष निलेकणी चंद्रा को 33.5 लाख शेयरों से 14 करोड़ रुपये की कमाई हुई. और सबसे छोटा लेकिन सबसे चर्चित नाम बना एकाग्र रोहन मूर्ति, जिसने सिर्फ 15 लाख शेयरों से 6.5 करोड़ रुपये कमा लिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कौन हैं एकाग्र रोहन मूर्ति?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एकाग्र, रोहन मूर्ति और अपर्णा कृष्णन के बेटे हैं. 2023 में जन्मे एकाग्र को उनके दादा नारायण मूर्ति ने जबरदस्त वित्तीय विरासत दी है. इतनी कम उम्र में इतने बड़े फाइनेंशियल पोर्टफोलियो के मालिक बनना भारत में बेहद दुर्लभ है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वित्तीय शिक्षा या असमानता का प्रतीक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एकाग्र की यह कहानी जहां एक ओर फाइनेंशियल प्लानिंग और विरासत प्रबंधन की मिसाल बन सकती है, वहीं यह देश में आर्थिक असमानता की एक झलक भी दिखाती है. जब आम लोग जीवन भर की कमाई में भी इतने पैसे नहीं कमा पाते, तब एक बच्चा करोड़पति बन जाए, यह समाज में गहरे सवाल खड़े करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" की टैरिफ पॉलिसी ने बिगाड़ा चीन का खेल, अब हर मोर्चे पर फेल होता नजर आ रहा है ड्रैगन</a></strong></p>

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