भारत में एंट्री करने वाला है Elon Musk का Starlink! जल्द मिल सकती है सरकार से हरी झंडी, मंत्री

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Elon Musk Starlink: एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink अब भारत में कदम रखने के बेहद करीब है. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि कंपनी को भारत में संचालन शुरू करने के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी जल्द ही मिल सकती है. उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने Starlink को पहले ही Letter of Intent (LOI) यानी आशय पत्र जारी कर दिया है. अब कंपनी को अंतिम मंजूरी के लिए IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) से हरी झंडी का इंतजार है.

लाइसेंस प्रक्रिया अंतिम चरण में

केंद्रीय संचार मंत्री के अनुसार, भारत में कोई भी सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने से पहले सभी कंपनियों को IN-SPACe से अनुमति लेना अनिवार्य है. वर्तमान में OneWeb और Reliance Jio के पास ऐसे लाइसेंस मौजूद हैं. Starlink अब इसी लाइन में अगली कंपनी बनने जा रही है. उन्होंने कहा, “Starlink का लाइसेंसिंग प्रोसेस लगभग पूरा हो चुका है और LOI जारी हो चुका है. जल्द ही उन्हें संचालन की मंजूरी मिलने की उम्मीद है.”

जल्द शुरू होंगे ट्रायल और स्पेक्ट्रम परीक्षण

OneWeb और Reliance को उनके पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए सीमित स्पेक्ट्रम आवंटन दिया गया था. Starlink को भी लाइसेंस मिलने के बाद इसी तरह के ट्रायल की अनुमति दी जा सकती है. इसके बाद, TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) इस सेवा के वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए स्पेक्ट्रम वितरण का ढांचा तैयार करेगा.

Amazon का Project Kuiper भी भारत में एंट्री को तैयार

Starlink के अलावा, Amazon समर्थित Project Kuiper भी भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है. सूत्रों के अनुसार, कंपनी मुंबई और चेन्नई में दो PoP (Points of Presence) और 10 सैटेलाइट गेटवे स्थापित करने की तैयारी कर रही है. Kuiper ने भी DoT को पत्र लिखकर GMPCS लाइसेंस (Global Mobile Personal Communication by Satellite) के लिए LOI जल्द जारी करने की अपील की है. यह पत्र Starlink को मई की शुरुआत में LOI जारी होने से पहले भेजा गया था.

TRAI ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम पर तय किए नए चार्ज

हाल ही में TRAI ने सैटेलाइट कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम चार्ज तय किए हैं. इसके अनुसार, सभी सैटकॉम ऑपरेटरों को अपने सकल समायोजित राजस्व (AGR) का 4% स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में देना होगा. इसके साथ ही शहरी उपभोक्ताओं के लिए सालाना 500 रुपये प्रति यूजर का अतिरिक्त शुल्क भी लगेगा जबकि ग्रामीण इलाकों के लिए यह छूट दी गई है. वहीं, सभी सैटेलाइट ऑपरेटरों को 8% का लाइसेंस शुल्क भी चुकाना होगा.

ग्रामीण भारत के लिए सब्सिडी की सिफारिश

TRAI ने सुझाव दिया है कि सैटेलाइट टर्मिनल डिवाइस की अधिक कीमतें (20,000 से 50,000 रुपये के बीच) ग्रामीण इलाकों में सेवा अपनाने में बाधा बन सकती हैं. इसलिए इन क्षेत्रों में सब्सिडी का प्रावधान होना चाहिए. हालांकि, COAI (सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने TRAI के प्रस्तावों पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि सैटेलाइट सेवाओं के लिए तय शुल्क पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क के मुकाबले बहुत कम हैं जिससे असंतुलन पैदा हो सकता है.

840 रुपये में अनलिमिटेड इंटरनेट देगा स्टारलिंक

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स भारत में अपनी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की शुरुआत बेहद किफायती कीमत पर करने जा रही है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक अपने शुरुआती प्रमोशनल ऑफर के तहत हर महीने लगभग 840 रुपये (10 डॉलर) में अनलिमिटेड डेटा वाला प्लान पेश कर सकती है.

भारत में लाखों यूजर्स तक पहुंच बनाना का लक्ष्य

स्टारलिंक सहित कई सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों का मकसद भारत जैसे बड़े बाजार में तेजी से यूजरबेस खड़ा करना है. आने वाले कुछ वर्षों में इनका लक्ष्य 1 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाना है. इससे वे अपने महंगे स्पेक्ट्रम खर्च की भरपाई भी कर सकेंगी.

TRAI ने हाल ही में सिफारिश की है कि शहरी इलाकों में सैटेलाइट इंटरनेट के लिए प्रति यूजर 500 रुपये सालाना चार्ज लिया जाए. इससे यह सेवा पारंपरिक मोबाइल और ब्रॉडबैंड नेटवर्क्स के मुकाबले महंगी हो जाती है. हालांकि जानकारों का मानना है कि स्टारलिंक जैसी आर्थिक रूप से मजबूत कंपनी को इस प्रीमियम कीमत के बावजूद भारत के प्रतिस्पर्धी बाजार में खुद को स्थापित करने में खास मुश्किल नहीं होगी.

सैटेलाइट इंटरनेट: अब भी महंगा विकल्प

हाल के अध्ययनों में सामने आया है कि भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की लागत अब भी घरेलू फाइबर इंटरनेट से 7 से 18 गुना तक ज्यादा है. IIFL के मुताबिक, भारत को कवर करने वाली सैटेलाइट्स की संख्या, पूरी दुनिया की तुलना में सिर्फ 0.7% से 0.8% ही है – जो देश के क्षेत्रफल के अनुपात में कम मानी जा सकती है.

कैसे काम करता है स्टारलिंक इंटरनेट?

स्टारलिंक सैटेलाइट्स धरती की कक्षा से सीधे यूजर को हाई-स्पीड, कम लेटेंसी वाला इंटरनेट मुहैया कराती हैं. लेटेंसी यानी डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में लगने वाला समय जो गेमिंग या वीडियो कॉल जैसे कार्यों में अहम होता है.

स्टारलिंक की किट में क्या-क्या मिलता है

  • एक खास स्टारलिंक डिश
  • Wi-Fi राउटर
  • पावर केबल्स
  • और एक माउंटिंग ट्राइपॉड

इस डिश को खुले आसमान के नीचे लगाना जरूरी होता है ताकि सिग्नल बिना बाधा के मिल सके. इसके अलावा, सेटअप और मॉनिटरिंग के लिए स्टारलिंक की ऐप iOS और Android दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है.

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सिद्धार्थ मल्होत्रा की एक्स गर्लफ्रेंड ने भेजे कियारा आडवाणी को तोहफे, एक्ट्रेस ने दिखाई झलक

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Alia Bhatt Send Gifts To Kiara Advani: बॉलीवुड के फेवरेट कपल्स में से एक कियारा अडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा बहुत जल्द पेरेंट्स बनने वाले थे. कपल ने मार्च 2025 में एक साथ सोशल मीडिया पोस्ट कर प्रेग्नेंसी की खबर दी थी. अब एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने उनके आने वाले बच्चे के लिए तोहफा भेजा है.

आलिया भट्ट अपना बेबी क्लोथिंग ब्रांड एड-ए-मम्मा चलाती हैं. एक्ट्रेस ने अपने ही ब्रांड से बच्चे के कुछ क्यूट कपड़े कियारा को भिजवाए हैं. कियारा आडवाणी ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर गिफ्ट्स की फोटो शेयर किया है. इसके साथ उन्होंने लिखा- ‘थैंक्यू माना आलिया भट्ट.’ 

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रिलेशनशिप में थे सिद्धार्थ और आलिया!
बता दें कि आलिया भट्ट और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने एक साथ फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर से बॉलीवुड डेब्यू किया था. इस फिल्म के बाद दोनों के अफेयर की भी खूब चर्चा रही. हालांकि बाद में दोनों ने अपनी राहें अलग कर ली. जहां सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कियारा आडवाणी से शादी की तो वहीं आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर संग शादी रचाई.

मेट गाला में फ्लॉन्ट किया बेबी बंप
हाल ही में कियारा आडवाणी ने मेट गाला 2025 में शानदार डेब्यू किया था. व्हाइट ट्रेन और ब्लैक गाउन के साथ मेटैलिक ब्रेस्टप्लेट पहनकर उन्होंने अपने बेबी बंप को कॉन्फिडेंस से फ्लॉन्ट किया था. उनका ये लुक सोशल मीडिया और इंटरनेशनल मीडिया में छाया रहा. 

सिद्धार्थ भी हैं बेहद एक्साइटेड
सिद्धार्थ मल्होत्रा भी अपने नए सफर के लिए बेहद एक्साइटेड हैं. हाल ही में यूरोप ट्रिप से उन्होंने कुछ फोटोज शेयर कीं, जिनमें वह कैफे में मुस्कुराते नजर आए और कैमरे के पीछे कियारा की झलक भी दिखी. 

कियारा का वर्कफ्रंट
प्रेग्नेंसी के चलते कियारा ने काम से थोड़ी दूरी बनाई है और फिलहाल अपनी हेल्थ पर ध्यान दे रही हैं. लेकिन फैंस उन्हें जल्द ही ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर के साथ ‘वॉर 2’ में देखेंगे, जो 14 अगस्त 2025 को रिलीज होगी.

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सावधान! स्कूल जाने वाले एक-चौथाई बच्चों की पूरी नहीं हो रही नींद, इसके पीछे हैं गंभीर कारण

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Child Education: नीति आयोग के स्वास्थ्य विभाग के सदस्य डॉ. (प्रो.) वी.के. पॉल ने हाल ही में एक गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हमारे देश के एक-चौथाई स्कूली बच्चे आज पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं. यह स्थिति न केवल उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि उनके समग्र विकास को भी प्रभावित कर रही है.

यह रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र (एनएचएसआरसी) और सर गंगा राम अस्पताल के सहयोग से तैयार की गई, जिसमें 12 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के स्कूली किशोरों के नींद से जुड़ी आदतों और उनके असर को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई. इसका मुख्य मकसद यह सझना था कि नींद की कमी किस प्रकार बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता (संज्ञानात्मक कार्यों) पर असर डालती है.

7 से 8 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी

डॉ. पॉल ने नींद को एक मौलिक जैविक आवश्यकता बताया और कहा कि यह मस्तिष्क के अच्छे कामकाज, बेहतर याददाश्त, शारीरिक प्रतिरक्षा प्रणाली और बेहतर प्रदर्शन के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हर बच्चों को प्रतिदिन कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए, ताकि उनका मानसिक और शारीरिक संतुलन बना रहे.

उन्होंने यह भी बताया कि आज के शैक्षणिक माहौल में नींद की कमी बच्चों के सेहत पर गंभीर असर डाल रही है. इस समस्या के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण स्क्रीन टाइम है. मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी जैसे उपकरणों का जरूरत से ज्यादा उपयोग बच्चों की नींद में सबसे बड़ी रूकावट बन चुका है. देर रात तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना, वीडियो गेम खेलना या ऑनलाइन कंटेंट देखना बच्चों के सोने-जागने के स्वाभाविक समय को बिगाड़ रहा है.

60 फीसदी बच्चों में पाए गए डिप्रेशन के लक्षण

इस रिपोर्ट के आंकड़े और भी ज्यादा चौंकाने वाले हैं. इसमें पाया गया कि करीब 22.5 प्रतिशत बच्चे को नींद पूरी नहीं मिलती, जो एक बहुत बड़ा समस्या है. इतना ही नहीं, इसमें शामिल होने वाले 60 प्रतिशत बच्चों में अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षण पाए गए, जबकि 65.7 प्रतिशत प्रतिभागियों में संज्ञानात्मक कमजोरी, यानी सोचने और समझने की क्षमताओं में गिरावट देखी गई. इस यह साफ है, कि नींद की कमी केवल थकान या आलस्य की वजह नहीं है, बल्कि यह गंभीर मानसिक और बौद्धिक समस्याओं की जड़ भी बन सकती है. बच्चों में नींद की कमी का असर उनकी एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन और पढ़ाई के प्रदर्शन पर भी पड़ता है.

सर गंगा राम अस्पताल में बाल स्वास्थ्य संस्थान की वरिष्ठ सलाहकार और बच्चे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. लतिका भल्ला ने कहा कि यह रिपोर्ट एक चिंता बढ़ाने वाला सच को सामने लाती है. उन्होंने कहा कि पर्याप्त नींद न मिलने के कारण बच्चों को मानसिक रूप से अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. यह स्थिति लंबे समय में उनके करियर और जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सिर्फ स्क्रीन टाइम का ज्यादा इस्तेमाल ही नहीं, बल्कि स्कूल की कड़ी दिनचर्या, शैक्षणिक दबाव और परिवार की जीवनशैली भी बच्चों की नींद को प्रभावित कर रही है. यदि बच्चे सुबह जल्दी स्कूल जाते हैं और देर रात तक होमवर्क या ट्यूशन में व्यस्त रहते हैं, तो उन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती.

बच्चों की नींद को ध्यान में रखकर टाइम टेबल बनाएं स्कूल

इसलिए यह आवश्यक है कि स्कूल, परिवार और नीति निर्माता मिलकर इस समस्या का समाधान करें. स्कूलों को चाहिए कि वे बच्चों की नींद को ध्यान में रखकर समय-सारणी बनाए. माता-पिता को बच्चों के सोने-जागने के समय पर विशेष ध्यान देना चाहिए और घर में एक ऐसा माहौल बनाना चाहिए जो अच्छी नींद को प्रोत्साहित करे. डॉ. पॉल ने यह भी कहा कि अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे बुद्धिमान, सक्षम और आत्मनिर्भर बनें, तो हमें उनकी नींद को प्राथमिकता देनी होगी. नींद को शिक्षा और पोषण की तरह ही स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाना चाहिए.

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गजब! 140 साल पुराने ‘थाने’ में लोगों को परोसे जा रहे लजीज पकवान, आप भी ले सकते हैं मज़े

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Meghalaya News: मेघालय के सोहरा में 140 साल पुराने एक पुलिस थाने को खूबसूरत कैफे में तब्दील किया गया है. सबसे ज्यादा बारिश वाले इलाकों में शुमार सोहरा में स्थित इस कैफे में अब ग्राहकों को लजीज पकवान परोसे जा रहे हैं. साल 1885 में स्थापित सोहरा पुलिस थाने की इमारत मेघालय की सबसे पुरानी इमारतों में से एक है. ब्रिटिश शासन के दौरान इस इमारत का इस्तेमाल एक कुख्यात हिरासत केंद्र के रूप में किया जाता था.

‘सोहरा 1885’ नाम के कैफे में तब्दील किया गया थाना

हालांकि, अब इस थाने को ‘सोहरा 1885’ नाम के कैफे में तब्दील कर दिया गया है, जो खाने के शौकीन लोगों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है. इस कैफे में इतिहास और आतिथ्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. ग्राहक ‘कैफे 1885’ में ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील की गई जेलों में अपने पसंदीदा पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं. कैफे से अर्जित मुनाफा पुलिस कल्याण के लिए दान कर दिया जाता है.

सोहरा पुलिस थाने को कैफे में बदलने का विचार ईस्ट खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक (एसपी) विवेक सईम ने दिया था, जो उस समय क्षेत्र (सोहरा) में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में तैनात थे. मेघालय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके इस विचार का पूर्ण समर्थन किया.

सईम ने ‘पीटीआई-भाषा’ न्यूज एजेंसी से कहा, “मैं इतिहास में खास स्थान रखने वाले इस पुलिस थाने के साथ हमेशा से कुछ अलग करना चाहता था. राज्य में ऐसी बहुत कम इमारतें बची हैं, जो इतिहास में खास स्थान रखती हैं.” उन्होंने कहा, “मैंने सोहरा पुलिस थाने को कैफे में बदलने का विचार तब दिया था, जब मैं इलाके में डीएसपी था. मुझे पता था कि इतिहास में खास स्थान रखने के कारण यह भवन बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करेगा.”

पुलिस कल्याण के लिए किया जा रहा आय का इस्तेमाल

मेघालय सरकार ने दो साल पहले जब सोहरा में ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात करने के लिए नये थाना भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी, तब पुरानी इमारत से आर्थिक लाभ हासिल करने के इरादे से इसे कैफे में बदलने की कवायद तेज हो गई.

सईम ने कहा, “थाने को कैफे में बदलने का मतलब था पुलिस बल के लिए अतिरिक्त आय, जिसका इस्तेमाल पुलिस कल्याण के लिए किया जा सकता था.” उन्होंने बताया कि कैफे के संचालन के लिए साझेदार चुनने के वास्ते निविदा प्रक्रिया दो साल पहले शुरू की गई.

सईम के मुताबिक, युवा उद्यमी नफी नोनग्रम को कैफे के संचालन के लिए चुना गया, जिन्होंने इमारत की संरचना के हिसाब से इसका डिजाइन प्रस्तुत किया और इसे ‘सोहरा 1885’ नाम दिया. उन्होंने बताया कि नफी ने ब्रिटिश काल की वस्तुओं का इस्तेमाल कर पुलिस थाने को खूबसूरत कैफे का रूप दिया.

जेलों को ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील किया गया

नफी ने कहा, “हमने जेलों को ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील किया. आगंतुकों को कैफे का लुक और माहौल काफी अच्छा लगता है.” सईम ने बताया कि नफी ने इमारत की दीवारों और फर्श में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि ये आज भी काफी अच्छी स्थिति में हैं. उन्होंने बताया कि थाने में मौजूद अंगीठी की भी मरम्मत कर उसे उसके पुराने स्वरूप में ढाला गया.

नफी के मुताबिक, कैफे में एक साथ 200 लोग अपने पसंदीदा पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं. उन्होंने बताया कि इसमें 200 किलोग्राम की एक तिजोरी का भी रंगरोगन किया गया है, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण के केंद्र के रूप में उभर रही है.

‘सोहरा 1885’ का उद्घाटन 22 मई को किया गया. तब से बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग इसका रुख कर रहे हैं. बत्स्केम थबाह नाम की एक ग्राहक ने कहा, “यह कैफे वाकई बहुत खूबसूरत है. हमें ‘डाइनिंग रूम’ में तब्दील की गई जेल में खाना खाकर काफी मजा आया.”

IMF के बाद अब पाकिस्तान पर ADB भी मेहरबान, भारत के विरोध के बावजूद दिए 800 मिलियन डॉलर; फूले नह

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<p style="text-align: justify;"><a title="ऑपरेशन सिंदूर" href=" data-type="interlinkingkeywords">ऑपरेशन सिंदूर</a> के तहत भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ है. जिसके बाद एक बार फिर पाकिस्तान दुनियाभर के देशों के सामने सहायता के नाम पर भीख मांगने पहुंच गया. इस बीच एशियाई विकास बैंक (ADB) ने पाकिस्तान के लिए 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंज़ूरी दे दी है. भारत के विरोध के बावजूद ADB ने ये कदम उठाया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत ने जताई कड़ी आपत्ति</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत ने आतंकवाद को फंडिंग करने के इतिहास के कारण पाकिस्तान को किसी भी तरह की सहायता पर कड़ी आपत्ति जताई थी. पिछले पहले पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी करीब 8,500 करोड़ रुपये का बेलआउट पैकेज जारी किया था. भारत ने पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी का हवाला देते हुए लोन की राशि के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>’पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम में होगा सुधार'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पाकिस्तान के वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने कहा कि इस पैकेज के तहत 300 मिलियन अमरीकी डॉलर का पॉलिसी बेस्ड लोन (PBL) और 500 मिलियन अमरीकी डॉलर लोन देश में योजना कार्य (PBG) को पूरा करने के लिए दिया गया है. उन्होंने कहा कि एडीबी ने सुधार कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के लिए 800 मिलियन अमरीकी डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी दी है.</p>
<p style="text-align: justify;">पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार पाक वित्त मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य घरेलू संसाधन जुटाना और वित्तीय सुधारों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को स्थिर करना है. मंत्रालय ने कहा, "इस सहायता से टैक्स सिस्टम में सुधार, राजस्व में बढ़ोतरी मिलेगी. यह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है."</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>’विकास के बजाय आतंकवाद पर खर्च करेगा पाकिस्तान'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत का कहना है कि एडीबी और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाले लोन का उपयोग पाकिस्तान अपने देश के विकास के बजाय आतंकवाद और सैन्य खर्चों के लिए कर सकता है. भारत ने &nbsp;कहा कि एडीबी और आईएमएफ से कई बार लोन के बाद भी पाकिस्तान अपने आर्थिक सुधारों को लागू करने में बार-बार विफल रहा है. भारत ने पाकिस्तान की कमजोर सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि वहां सेना के हर फैसले में सेना का दखल होता है.&nbsp;</p>

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माता सीता के शोक को हरने वाला ‘अशोक’ खास, इसमें है महिलाओं की कई समस्याओं का समाधान

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Benefits of Ashok Tree: “तरु अशोक मम करहूं अशोका…” माता सीता कहती हैं “अशोक के पेड़ ने मेरी विरह वेदना को दूर किया, इसलिए मैं इसका सम्मान करती हूं.” माता सीता की विरह वेदना को दूर करने वाले अशोक के पेड़ के पास महिलाओं की हर समस्या का समाधान है. अशोक की पत्तियों, छाल से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है.

महिलाओं की हर समस्या के लिए लाभदायक

आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि इस पेड़ के पास महिलाओं की हर समस्या का हल है. धर्म शास्त्रों में भी अशोक पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि पवित्र पेड़ की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई थी. पेड़ की चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पूजा की जाती है. मान्यता है कि अशोक अष्टमी के दिन पूजा करने से न केवल सुख-शांति की प्राप्ति होती है, बल्कि रोग-शोक भी दूर होते हैं.

ये तो था पौराणिक महत्व, इसके औषधीय गुणों से आयुर्वेदाचार्य और पंजाब स्थित ‘बाबे के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल’ के डॉ. प्रमोद आनंद तिवारी ने रूबरू कराया. उन्होंने बताया, “अशोक के पेड़ का आयुर्वेदिक महत्व है. इसे महिलाओं का दोस्त कहें तो ज्यादा नहीं होगा. इसका इस्तेमाल स्त्री रोग और मासिक धर्म की समस्याओं जैसे- भारीपन, ऐंठन, अनियमितता और दर्द को कम करने में भी सहायक है.”

अशोक के पेड़ के अनगिनत फायदे

आयुर्वेदाचार्य ने बताया कि समस्याओं से राहत पाने के लिए इसे भोजन के बाद दिन में दो बार गर्म पानी या शहद के साथ चूर्ण के साथ ले सकते हैं. अशोक की छाल खून साफ करती है, जिससे महिलाओं की त्वचा में निखार आती है. अशोक की छाल को चेहरे पर लगाने से डेड स्किन से छुटकारा मिलता है.

रिसर्च बताती है कि अशोक की छाल पीरियड्स में होने वाले तेज दर्द और ऐंठन, सूजन को कम कर देती है. यह बढ़े हुए वात को नियंत्रित करती है. अशोक के सेवन से वात की समस्या खत्म होती है. इससे पाचन तंत्र भी मजबूत होता है, जिससे कब्ज, वात, ऐंठन, दर्द में राहत मिलती है.

त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक

अशोक के पेड़ में कई प्रकार के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारी विभिन्न रोगों से रक्षा करने में सहायक होते हैं. इसमें प्रचुर मात्रा में ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन, फ्लेवोनोइड्स तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए टॉनिक के रूप में काम करते हैं. अशोक के पेड़ की जड़ें और छाल मुहासे और त्वचा संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक हैं. आयुर्वेदाचार्य प्रेग्नेंसी के दौरान और उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रसित लोगों को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतने और बिना डॉक्टर के परामर्श के इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं.

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RCB के लिए रुक गई शादी, जीतने के बाद जमकर झूमे दूल्हा-दुल्हन- वीडियो हो रहा वायरल

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Trending Video: भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है और जब बात RCB की पहली IPL ट्रॉफी की हो, तो ये जुनून शादी के मंडप तक भी पहुंच गया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शादी समारोह के दौरान मेहमानों ने शादी की रस्मों को रोककर RCB बनाम PBKS का फाइनल मैच देखा. जैसे ही RCB ने 18 साल बाद अपनी पहली ट्रॉफी जीती, वहां मौजूद सभी लोग खुशी से झूम उठे, और दूल्हा-दुल्हन भी इस जश्न में शामिल हो गए. लोग नए नवेले जोड़े को छोड़ विराट कोहली को चीयर करने लगे.

दूल्हा दुल्हन को छोड़ विराट का जश्न मनाने लगे लोग

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि शादी के मंडप के पास एक बड़ी LED स्क्रीन लगाई गई थी, जिस पर मैच का लाइव टेलीकास्ट हो रहा था. जैसे ही RCB ने आखिरी गेंद पर जीत हासिल की, वहां मौजूद सभी लोग खुशी से चिल्लाने लगे और शादी का माहौल एक क्रिकेट स्टेडियम में बदल गया.

यह नजारा देखकर सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे, “ये सिर्फ भारत में ही हो सकता है.” RCB की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल उनके फैंस को खुशी दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि भारत में क्रिकेट का क्रेज किस हद तक है. जब शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी लोग मैच देखने के लिए रुक जाते हैं, तो समझा जा सकता है कि क्रिकेट भारतीयों के दिलों में कितनी गहराई से बसा हुआ है.

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यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट

वीडियो को @gharkekalesh नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन भी दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…आरसीबी के जीतने के बाद देश विकसित हो गया है. एक और यूजर ने लिखा…बेचारे दूल्हा दुल्हन का तो पैसा बर्बाद हो गया. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…आरसीबी में बहुत खोजने के बाद शायद बेंगलुरु का एक खिलाड़ी दिखाई दे जाए.

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फाइनल हारने वाली पंजाब IPL 2026 से पहले इन खिलाड़ियों को करेगी रिलीज? लिस्ट में बड़े नाम भी शामिल

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युक्रेन ने 20 साल पुरानी तकनीक से उड़ा दिए रूस के होश, ड्रोन हमले से कई जगहों को किया तबाह

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Russia-Ukraine War: यूक्रेन ने हाल ही में रूस के खिलाफ एक बड़ा ड्रोन हमला किया जिसे “ऑपरेशन स्पाइडर वेब” नाम दिया गया. यह हमला रूस की सीमाओं के भीतर गहराई तक किया गया जिसमें यूक्रेन ने रूस के तीन बड़े एयरबेस बेलाया, ओलेन्या और इवानोवो पर जोरदार हमला कर दिया. इस हमले में रूस के एक-तिहाई से ज्यादा रणनीतिक लंबी दूरी तक मार करने वाले बमवर्षक विमानों को नष्ट कर दिया गया. लेकिन इस हमले की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह रही कि इसमें जिस तकनीक का उपयोग हुआ, वह करीब 20 साल पुराना ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर था ArduPilot.

क्या है ArduPilot?

यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है जिसमें कहा गया है कि इस हमले में ArduPilot नामक सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल हुआ जिसे सबसे पहले 2007 में क्रिस एंडरसन ने LEGO Mindstorms किट की मदद से बनाया था. एंडरसन उस वक्त WIRED मैगज़ीन के एडिटर-इन-चीफ थे. इसके बाद उन्होंने जोर्डी मुनोज़ और जेसन शॉर्ट के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को एक पूर्ण प्लेटफॉर्म में बदल दिया.

शुरुआत में यह सॉफ्टवेयर Arduino हार्डवेयर के लिए तैयार किया गया था लेकिन समय के साथ यह इतना उन्नत हो गया कि अब यह ड्रोन, नाव, पनडुब्बी और रोवर्स को भी नियंत्रित कर सकता है. इसके ज़रिये GPS वेपॉइंट सेट करना, टेक-ऑफ और लैंडिंग को ऑटोमैट करना और ड्रोन की उड़ान को स्थिर रखना संभव होता है.

सॉफ्टवेयर शांति के लिए बना था

ArduPilot को मूल रूप से शांति और जनसेवा के उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया था जैसे कि खोज और बचाव कार्य, कृषि सर्वेक्षण या 3D मैपिंग. लेकिन अब यह सॉफ्टवेयर युद्ध के मैदान में भी अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. चूंकि यह ओपन-सोर्स है, इसलिए कोई भी इसे अपनी ज़रूरत के हिसाब से मॉडिफाई कर सकता है.

इस प्रोजेक्ट की आधिकारिक वेबसाइट भी यही कहती है कि यह एक वैश्विक समुदाय द्वारा संचालित है जो नैतिक विकास पर जोर देता है. हालांकि डेवलपर्स इसका हथियारों के रूप में इस्तेमाल न करने की अपील करते हैं लेकिन किसी पर रोक नहीं है क्योंकि यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है.

कैसे हुआ ऑपरेशन ‘स्पाइडर वेब’?

ऑनलाइन सामने आए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि यूक्रेनी ड्रोन ArduPilot से लैस थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU ने इन विस्फोटक ड्रोन को रूस के भीतर ट्रकों और स्टोरेज यूनिट्स में छिपाकर पहुंचाया था. जैसे ही ऑपरेशन शुरू हुआ, इन छिपे हुए कंटेनरों की छतें खुलीं और ड्रोन अपने टारगेट की ओर रवाना हो गए.

दिलचस्प बात यह है कि इन ड्रोन ने Starlink जैसी सैटेलाइट सेवा की जगह साधारण मोबाइल नेटवर्क और Raspberry Pi जैसे छोटे कंप्यूटर बोर्ड्स का इस्तेमाल किया. हाई लैटेंसी के बावजूद, ArduPilot सॉफ़्टवेयर ने उड़ान नियंत्रण और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई.

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दी पुष्टि

राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने X (पहले ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस ऑपरेशन में कुल 117 ड्रोन शामिल थे और इस मिशन की तैयारी पिछले एक साल से चल रही थी. उन्होंने कहा, “हमने रूस की तीन टाइम ज़ोन में एक साथ हमला किया और हमारे सभी ऑपरेटिव्स को रूस से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.”

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रैपिडो से जुड़ी बड़ी खबर! ट्रैफिक लगा तो ग्राहक की जेब से कटेंगे हर मिनट पैसे

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Rapido Traffic Charge: राइड-हेलिंग ऐप रैपिडो (Rapido) ने एक नया चार्ज सिस्टम शुरू किया है, जिसने यात्रियों को चौंका दिया है. अब अगर आपकी राइड के दौरान ट्रैफिक ज्यादा हुआ और यात्रा में देरी हुई, तो इसका खर्च भी आपको ही उठाना होगा. 10 मिनट से ज़्यादा की ट्रैफिक देरी पर हर मिनट 0.50 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 30 रुपये तय की गई है.

उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी

इस फैसले को लेकर बेंगलुरु जैसे शहरों में रैपिडो के खिलाफ नाराज़गी का माहौल है. कई यूजर्स ने इस नियम को “अनुचित” और “शोषणकारी” बताया है. उन्होंने सवाल उठाया है कि जब ट्रैफिक उनके नियंत्रण में नहीं है, तो फिर उसके लिए चार्ज क्यों लिया जा रहा है?

ट्रैफिक मेरी गलती नहीं है

हेब्बल की रहने वाली पवित्रा राव ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही 40 रुपये टिप दी थी, लेकिन फिर भी उन्हें ट्रैफिक के कारण अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा. उनका कहना था, “ड्राइवर को मेहनताना मिलना चाहिए, लेकिन जो बात यात्री के बस में नहीं है, उसका चार्ज लेना गलत है. यह तो सीधे-सीधे जबरन वसूली जैसा लगता है.”

पहले टिपिंग विवाद, अब ट्रैफिक चार्ज पर बवाल

रैपिडो पर हाल ही में टिपिंग को लेकर भी सवाल उठे थे, जब कंपनी ने राइड बुक करते समय ही ‘टिप जोड़ें’ का विकल्प देना शुरू किया. इसे लेकर उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 21 मई को CCPA (Central Consumer Protection Authority) से जांच के निर्देश दिए थे. इसके बाद रैपिडो, ओला और उबर ने भाषा में बदलाव कर “Add more (voluntary)” कर दिया, लेकिन यूजर्स का कहना है कि अनुभव अब भी वैसा ही है.

भरोसा टूट रहा है

लोगों का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म्स अब उन हालातों से पैसा कमा रहे हैं जो ग्राहक के हाथ में ही नहीं हैं. ये सीधे-सीधे भरोसे को खत्म करने वाली बात है. ऐसे मामलों में रेगुलेटर्स को हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

CCPA की जांच जारी

फिलहाल CCPA इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है, लेकिन रैपिडो की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं और उम्मीद है कि सरकार इस पर सख्त कार्रवाई करेगी.

रैपिडो का यह कदम सवालों के घेरे में इसलिए भी है क्योंकि अब यात्रियों को उन कारणों का भी भुगतान करना पड़ रहा है, जो उनके नियंत्रण में ही नहीं हैं? उपभोक्ताओं का कहना है कि “अगर ये ट्रेंड शुरू हुआ, तो हर ट्रैफिक सिग्नल एक नया बिल थमा जाएगा.

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