शेयर बाजार खुलते ही मचेगी हलचल, होने जा रही है 3,480 करोड़ की 4 बड़ी ब्लॉक डील्स

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भारतीय शेयर बाजार में 4 जून को निवेशकों की हलचल बढ़ने वाली है. वजह है, चार बड़ी कंपनियों में करीब 3,480 करोड़ की ब्लॉक डील्स. टर्म शीट्स के मुताबिक, यह डील्स चार अलग-अलग संस्थागत निवेशकों द्वारा की जाएंगी, जो मौजूदा मार्केट रिबाउंड का फायदा उठाना चाहते हैं.

किन कंपनियों में होगी हिस्सेदारी की बिक्री?

इन सौदों के तहत चार कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी बेची जाएगी. इसमें Alkem Laboratories Ltd में प्रमोटर ग्रुप की सदस्य जयंती सिन्हा 2.9 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगी. अनुमानित डील वैल्यू 825 करोड़ रुपये है.

इसके अलावा, Indegene Ltd में ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म Carlyle की निवेश इकाई CA Dawn Investments 10.2 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है, जिसकी वैल्यू 1,420 करोड़ रुपये के आसपास है. वहीं, Tata Technologies Ltd में TPG Rise अपनी पूरी 2 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रहा है, जिससे करीब 635 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे. Aditya Birla Fashion and Retail Ltd में Flipkart लगभग 6 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है, जिसकी डील 600 करोड़ रुपये की बताई जा रही है.

सौदों के पीछे कौन-कौन?

इन सौदों में बड़ी इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म्स सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं. जयंती सिन्हा को Axis Capital सलाह दे रही है. Bank of America Tata Technologies डील में TPG Rise का मार्गदर्शन कर रही है. Goldman Sachs Flipkart को सपोर्ट कर रही है. जबकि Kotak Securities और IIFL Carlyle की Indegene डील में शामिल हैं.

मार्केट रिबाउंड के साथ डील्स को मिला बल

बीते कुछ महीनों में बाजार की सुस्ती के बाद अब निवेशकों को नए मौके दिखाई दे रहे हैं. Nifty 50 ने 7 अप्रैल के निचले स्तर 21,744 से 12.86 फीसदी की उछाल दिखाते हुए 3 जून को 24,542.50 पर बंद किया. 

मई में ही हो चुकी हैं बड़ी डील्स

डेटा के अनुसार, मई 2025 के पहले 15 दिनों में ही 12 ब्लॉक डील्स के जरिए 3,541.97 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ, जबकि अप्रैल में केवल पांच डील्स के जरिए 506.37 करोड़ रुपये ही जुटे थे.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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18 साल के सूखे पर हुई जीत की बारिश…झूमने लगे RCB फैंस तो यूजर्स ने ले लिए मजे

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RCB यानी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर. वो टीम जो सालों से सिर्फ “प्योर इमोशन” बनकर रह गई थी. वो टीम जिसके फैन हर साल “ई साल कप नामदे” बोलते-बोलते बूढ़े हो गए, लेकिन ट्रॉफी उनके ख्वाबों में ही रह गई. लेकिन इस बार नहीं! इस बार 2025 के आईपीएल में विराट कोहली के अनुभव और रजत पाटीदार की अगुवाई में RCB ने वो कर दिखाया जो 18 साल से नामुमकिन लग रहा था. उन्होंने फाइनल जीतकर पहली बार आईपीएल की ट्रॉफी उठा ली. और बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर खुशी की लहर दौड़ गई और मीम रिएक्शन्स का सैलाब उमड़ पड़ा जो अब वायरल है.

कन्नड़ को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

अब ये जीत सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं रही. ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक सब जगह RCB ट्रेंड में है, लेकिन जीत के साथ-साथ कुछ यूजर्स की शरारतें भी कमाल की हैं. एक यूजर ने लिखा “विराट RCB में 18 साल रहे लेकिन अब तक कन्नड़ नहीं सीख पाए, ऐसे में RCB के फैंस उन्हें कैसे अपना मानें?”

वहीं, एक और मीम में विराट कोहली और श्रेयस अय्यर की तुलना करते हुए लिखा गया “श्रेयस ने एक साल में फाइनल जीत लिया, विराट ने 18 साल लिए, फिर भी विराट को ही GOAT मानोगे?” कुछ ने तो यह भी जोड़ दिया कि RCB की जीत के बाद अब भारत के नक्शे में एक नया राज्य जुड़ गया है  “RCB स्टेट ऑफ जश्न”, जिसकी राजधानी है “चिन्नास्वामी महाल” और वहां की आधिकारिक भाषा है ई साल कप नामदे.

सोशल मीडिया पर आई रिएक्शन की बाढ़

Virat Kohli Trends नाम के एक X यूजर ने पुष्पा फिल्म का एक इमोशनल सीन शेयर किया जिसमें अल्लू अर्जन रो रहे हैं. उसने लिखा आज पूरे आरसीबी फैंस का यही हाल है.  Indian Cricket Team नाम के एक एक्स यूजर्स ने विराट के आंसू वाले सीन को पोस्ट करते हुए लिखा कि बधाई हो आरसीबी! ई साल कप नमदे. एक दूसरे यूजर ने बैंगलोर में आरसीबी की जीत के बाद का सीन पोस्ट करते हुए लिखा कि अविश्वसनीय!  हर तरह खुशी का माहौल. 

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मजेदार मीम भी हुए वायरल

घर के कलेश नाम के एक यूजर ने गोरखपुर के फेमस सनी डांसर का वीडियो पोस्ट किया है. इसमें विराट कोहली को सनी डांसर दिखाया गया जो श्रेयस अय्यर को परेशान कर रहे हैं. घर के कलेश ने एक दूसरे पोस्ट में आरसीबी के खिलाडियों के खुशी के आंसू को पोस्ट करते हुए लिखा कि ये शेर उठ जरा ते, फिर वही जलवा दिखा अपना. जिसको लोग खूब लाइक कर रहे हैं. एक यूजर्स ने लिखा इंदौरी छा गए हो.

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ये है IPL के इतिहास का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा खिलाड़ी, नाम जानकर चौंक जाएंगे आप

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आईपीएल 2025 का फाइनल मैच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स के बीच हो रहा है. जब भी IPL की बात होती है, ज्यादातर लोग बल्लेबाजी और गेंदबाजी पर बात करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस लीग में ऐसे खिलाड़ी भी हैं, जो पढ़ाई के मामले में किसी इंजीनियर या डॉक्टर से कम नहीं? आज हम आपको आईपीएल के इतिहास के सबसे पढ़े-लिखे खिलाड़ी के बारे में बताएंगे. आइए जानते हैं…

रिपोर्ट्स की मानें तो आईपीएल के इतिहास के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे प्लयेर आविष्कार साल्वी (Aavishkar Salvi) हैं. आविष्कार साल्वी एक तेज गेंदबाज हैं, जिन्होंने Team India के लिए वनडे मैच खेले हैं और IPL में Delhi Daredevils ओर से खेल चुके हैं. वो भले ही लंबे समय तक IPL में न खेले हों, लेकिन एक वजह से आज भी चर्चा में रहते हैं.

कर चुके हैं Ph.D.

आविष्कार साल्वी ने एस्ट्रोफिजिक्स में Ph.D. (डॉक्टरेट) की डिग्री हासिल की है. इसका मतलब ये हुआ कि वे न केवल क्रिकेट के मैदान में गेंद से तेजी दिखाते हैं, बल्कि विज्ञान की दुनिया में भी गहराई से शोध कर चुके हैं. आविष्कार ने अपनी पढ़ाई को कभी नजरअंदाज नहीं किया. जब बाकी खिलाड़ी मैदान और नेट्स पर समय दे रहे थे, तब साल्वी ने किताबों के साथ भी उतना ही वक्त बिताया.

कब किया था डेब्यू

क्रिकेट के सफर की बात की जाए तो साल्वी ने बांग्लादेश के खिलाफ ODI डेब्यू किया था. उनका डेब्यू 11 अप्रैल 2003 में हुआ था. साथ ही उनका आखिरी ODI मैच भी इसी साल हुआ था. 18 नवंबर 2003 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला. इसके बाद वह आईपीएल में Delhi Daredevils (अब दिल्ली कैपिटल्स) की तरफ से खेले. आज उनकी गिनती आईपीएल के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे खिलाड़ियों में होती है.

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इस मुस्लिम देश के पास हैं वो पांच खतरनाक वेपन तकनीक जिससे दुश्मनों को मिनटों में मिटा देगा, जान

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Top 5 Weapon Technology: मध्य पूर्व में सऊदी अरब एक ऐसा देश है जो क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता मानता है. लेकिन जब उसके चारों ओर यमन, सीरिया, इराक जैसे देश युद्ध की आग में झुलस रहे हों तो रियाद को अपनी सैन्य शक्ति को मज़बूत बनाए रखना अनिवार्य हो जाता है. किंग सलमान इस बात को अच्छी तरह समझते हैं और यही कारण है कि सऊदी सेना आधुनिक तकनीक और ताक़तवर हथियारों से लैस है. आइए जानते हैं वो पांच घातक हथियार जिनकी बदौलत सऊदी अरब अपनी सैन्य रणनीति को अंजाम देता है.

F-15/F-15A/F-15SA फाइटर जेट्स

सऊदी एयरफोर्स की रीढ़ माने जाने वाले ये लड़ाकू विमान अमेरिका द्वारा विकसित किए गए हैं और रियाद के पास लगभग 238 F-15 मौजूद हैं. इनमें 84 आधुनिकतम F-15SA शामिल हैं जो 2010 में अमेरिका से खरीदे गए थे. ये विमान लंबी दूरी तय करने में सक्षम हैं जिसकी वजह से पायलट्स को इराक के उत्तर और यमन के दक्षिण में मिशन के लिए हवा में ईंधन भरवाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. ये क्षमता हौथी विद्रोहियों और ISIL के ख़िलाफ़ अभियानों में बहुत मददगार रही है.

Paveway IV Bomb

500 पाउंड वज़नी यह बम अपनी सटीकता और मारक क्षमता के लिए जाना जाता है. ब्रिटेन के साथ सऊदी के रक्षा सहयोग की वजह से सऊदी वायुसेना इसे यमन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में सक्रिय रूप से इस्तेमाल करती है. यह बम GPS-निर्देशित तकनीक से लैस है और ख़राब मौसम में भी निशाने पर सटीक वार करता है. F-15 विमान इन हल्के बमों को ज़्यादा मात्रा में लेकर उड़ सकता है जिससे मिशन के दौरान बार-बार बेस पर लौटने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

सऊदी विशेष बल (Special Forces)

सऊदी अरब के कमांडो यूनिट्स, अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस की तरह, छिपे हुए अभियानों, प्रशिक्षण, और हथियार आपूर्ति जैसे मिशनों में माहिर हैं. यमन के अदन क्षेत्र में हादी समर्थक बलों को सऊदी विशेष बलों से मिली मदद ने हौथी विद्रोहियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था. अत्याधुनिक युद्ध वाहनों (जैसे MRAP और Enigma) के साथ इन बलों ने ज़मीन पर रणनीतिक बढ़त हासिल की है. सीरिया में ISIL के ख़िलाफ़ लड़ रहे समूहों को प्रशिक्षण देने में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

आर्थिक ताक़त (Cash)

तेल से मालामाल सऊदी अरब के पास अपार धन है जिसे वह सामरिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है. उसका रक्षा बजट लगातार बढ़ता जा रहा है और वह मध्य पूर्व का सबसे बड़ा हथियार ख़रीदार बन चुका है. 2002 में जहाँ इसका डिफेंस बजट 20 अरब डॉलर था, वहीं अब यह 80 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है. जब किसी देश के पास इतना पैसा हो तो वह सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रभाव भी ख़रीद सकता है.

कूटनीतिक प्रभाव (Diplomatic Influence)

सऊदी अरब की असली ताक़त उसका ‘चेकबुक डिप्लोमेसी’ मॉडल है मतलब वो अपने धनबल से अन्य देशों को अपने पक्ष में कर लेता है. मिस्र, पाकिस्तान, बहरीन, जॉर्डन और यहां तक कि अमेरिका भी सऊदी मदद के चलते उसके कुछ न कुछ ऋणी हैं. चाहे आतंकवाद विरोधी प्रशिक्षण हो, सैन्य अड्डों की मेज़बानी हो या ISIL पर हमले सऊदी नेतृत्व क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए पर्दे के पीछे बड़ी चालें चलता है.

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Netherland Govt Collapse: यूरोपीय देश नीदरलैंड इस समय राजनीतिक संकट से जूझ रहा है. नीदरलैंड में दक्षिणपंथी पार्टी PVV ने गठबंधन से बाहर निकलने का ऐलान किया, जिसके बाद वहां के प्रधानमंत्री डिक शूफ को इस्तीफा देना पड़ा. PVV चीफ ने कहा कि उनका पार्टी के सभी मंत्री सरकार से इस्तीफा दे रहे हैं. यह सरकार सिर्फ 11 महीने चल पाई. PVV नेता गीर्ट विल्डर्स के इस कदम से नीदरलैंड में फिर से चुनाव होने की संभावना है.

प्रधानमंत्री डिक शूफ ने दिया इस्तीफा

प्रधानमंत्री डिक शूफ ने आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसके बाद उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस्तीफा सौंपने से पहले कहा, “हम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनके लिए हमें निर्णायक क्षमता की आवश्यकता है.” प्रवासियों के मुद्दे पर दक्षिणपंथी सांसद गीर्ट विल्डर्स ने अपनी पार्टी (PVV ) को नीदरलैंड के सत्तारूढ़ चार दल वाले गठबंधन से अलग किया.

प्रवासियों के मुद्दे पर समर्थन वापस लिया

PVV नेता गीर्ट विल्डर्स ने कहा, “सरकार शरणार्थी संकट पर कोई ठोस फैसला नहीं ले पा रही थी. मैंने सरकार को इस मामले में सख्त नीति अपनाने के लिए समर्थन दिया था, लेकिन सरकार ने इस नीति को और कमजोर किया.” PVV यूरोप की सबसे कट्टरपंथी दक्षिणपंथी पार्टियों में गिनी जाती है. नवंबर 2023 में हुए चुनाव में PVV सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन विल्डर्स खुद सरकार में शामिल नहीं हुए थे.

नीदरलैंड में जुलाई 2024 में गठबंधन सरकार बनी थी. 4 पार्टियों ने सहयोग के बाद नीदरलैंड में सरकार बन पाई थी. अब सरकार अल्पमत में आ गई. पिछले हफ्ते वाइल्डर्स ने 10 सूत्रीय प्लान तैयार किया था, जिसमें शरणार्थियों की आवाजाही को पूरी तरह से बंद करने, सीरियाई शरणार्थियों को वापस भेजने, सेना से सीमाओं की हिफाजत करने समेत कई कठोर निर्णय लेने के लिए कहा था.

गीर्ट विल्डर्स ने नूपुर शर्मा का किया था सपोर्ट 

नूपुर शर्मा विवाद मामले में नीदरलैंड के दक्षिणपंथी नेता गीर्ट विल्डर्स ने उनका सपोर्ट किया था. उन्होंने फोन पर उनसे बात भी की थी. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा था, “नूपुर शर्मा से बहुत अच्छी बातचीत हुई. वह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे स्वतंत्र विश्व के लिए स्वतंत्रता का प्रतीक हैं. पिछले दो वर्षों में उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की हानि और कानूनी परेशानियां अनुचित है क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है.

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भारत के सरकारी स्कूल से की पढ़ाई और बन गए दुबई के फार्मा टायकून, कहानी विनोद जाधव की

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<p style="text-align: justify;">&ldquo;दूसरों को दिखाने के लिए मत जियो, जो अपने हैं, वो जानते हैं कि तुम कौन हो.&rdquo; यह एक साधारण सी पंक्ति दुबई के फार्मा टायकून विनोद जाधव की सोच और जीवन का असली परिचय देती है. एक सरकारी स्कूल के शिक्षक के बेटे से लेकर 700 मिलियन दिरहम टर्नओवर वाली फार्मा कंपनी के मालिक बनने तक का उनका सफर न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाता है कि ज़मीन से जुड़े रहकर भी ऊंचाइयों को छूआ जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बचपन से ही शुरू हुआ संघर्ष</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पुणे में एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विनोद का बचपन बहुत ही सामान्य था. महंगे स्कूल या किसी पॉश इलाके की परवरिश नहीं थी. परवरिश के साथ जो सबसे मजबूत विरासत उन्हें मिली, वह थी मेहनत की आदत और ईमानदारी की सोच. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बाद उन्होंने करीब 13 साल तक कई इंडस्ट्रीज़ में लंबा काम किया. गल्फ न्यूज से बात करते हुए वो कहते हैं, &ldquo;ये 13 साल नहीं, 20 साल के बराबर थे. मैं रोज़ 12&ndash;15 घंटे काम करता था.&rdquo;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>5000 से शुरू हुआ सफर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">2001 में विनोद ने अपने और एक पार्टनर के साथ मिलकर महज 5,000 रुपये की पूंजी से भारत में एक फार्मेसी फ्रेंचाइज़ी शुरू की. उनकी पत्नी दिन में दुकान संभालती थीं और शाम को वो. 2003 में उन्होंने 2,500 में एक छोटा क्लासिफाइड ऐड दिया, जो फिजी से पहला एक्सपोर्ट ऑर्डर लेकर आया. यहीं से इंटरनेशनल फार्मा वेंचर की नींव पड़ी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दुबई से मिली सपनों को उड़ान</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपोर्ट से जुड़े सख्त भारतीय नियमों के कारण 2007 में विनोद दुबई आए. दुबई ने उन्हें वही इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पीड दी, जिसकी उन्हें ज़रूरत थी. धीरे-धीरे कंपनी ने वेटरनरी और हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में भी कदम रखा. आज उनकी कंपनी Sava Vet भारत में छोटे जानवरों की दवाओं में सबसे बड़ा ब्रांड है, जिसके पास 20 फीसदी मार्केट शेयर है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दुबई हिल्स में 40,000 स्क्वायर फीट का महल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज विनोद दुबई हिल्स एस्टेट में एक 40,000 स्क्वायर फीट का आलीशान घर रखते हैं. यह महल शोरशराबे से नहीं, बल्कि भारतीय और अरब वास्तुकला की सुंदरता और शांति का प्रतीक है. इसमें भव्यता तो है, लेकिन दिखावा नहीं. यह उस सोच का प्रतीक है कि सफलता चुपचाप भी जी जा सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पैसे का मतलब, सिर्फ कमाई नहीं</strong></p>
<p style="text-align: justify;">विनोद का मानना है कि जब आपकी मूलभूत ज़रूरतें पूरी हो जाती हैं, तब असली सवाल ये होता है कि आप कितनों की ज़िंदगी बदल पा रहे हैं? उन्होंने अपने लिए लक्ष्य तय किया है कि वह 10,000 लोगों को रोजगार देंगे. फिलहाल वो 1,000 नौकरियों तक पहुंच चुके हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नाकामी भी आई, लेकिन सीख बनी ताकत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">2010 में उन्होंने एक मार्केटिंग कंपनी शुरू की, जिसमें 800 लोग थे. लेकिन कंपनी फ्लॉप हो गई और करोड़ों का नुकसान हुआ. तब उन्होंने सीखा कि अगर आपके पास कुछ अनोखा देने को नहीं है, तो बिज़नेस का कोई मतलब नहीं. इस सीख ने उन्हें अगले वेंचर में सफल बना दिया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" पोर्ट्स के लिए बड़ी खुशखबरी! मई में कंपनी ने 41.8 MMT कार्गो की ढुलाई की, स्टॉक पर दिख सकता है असर</a></strong></p>

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कमजोर हो गया मोबाइल नेटवर्क? तो अभी अपनाएं Android और iPhone के लिए ये 5 आसान तरीके

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How to improve Mobile Network: जब आप बाहर हों और अचानक मोबाइल सिग्नल चला जाए, तो वो पल काफी परेशान कर सकता है ना GPS, ना म्यूज़िक और ना ही किसी से संपर्क करने का ज़रिया. चाहे आप Android यूज़र हों या iPhone इस्तेमाल करते हों कभी-कभी नेटवर्क बिना किसी चेतावनी के गायब हो सकता है. अच्छी बात ये है कि कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप कुछ ही मिनटों में कनेक्शन दोबारा पा सकते हैं.

एयरप्लेन मोड को करें ऑन-ऑफ

सबसे तेज़ और आसान तरीका है एयरप्लेन मोड को चालू करके कुछ सेकंड बाद बंद करना. इससे फोन नेटवर्क से कटकर दोबारा कनेक्ट होता है और अक्सर इससे बेहतर सिग्नल मिल जाता है.

Android पर: ऊपर से स्क्रीन को नीचे स्लाइड करें, एयरप्लेन आइकन पर टैप करें, 15 सेकंड रुकें और फिर दोबारा टैप करके बंद करें.

iPhone पर: स्क्रीन के दाएं ऊपरी कोने से नीचे स्लाइड करें, एयरप्लेन आइकन (ऑन होने पर नारंगी रंग में दिखेगा) दबाएं, फिर कुछ पल बाद दोबारा दबाकर ऑफ करें.

नेटवर्क सेटिंग्स को करें रीसेट

अगर ऊपर वाला तरीका काम न करे, तो नेटवर्क सेटिंग्स को रीसेट करना एक असरदार तरीका हो सकता है. ध्यान रखें, इससे आपके Wi-Fi पासवर्ड्स, Bluetooth पेयरिंग्स और VPN सेटिंग्स हट जाएंगी.

Android पर: Settings में जाएं, “Reset network settings” या “Reset Wi-Fi, mobile & Bluetooth” ऑप्शन चुनें.

iPhone पर: Settings > General > Transfer or Reset iPhone > Reset > Reset Network Settings में जाकर पुष्टि करें.

कैरियर या सॉफ्टवेयर अपडेट चेक करें

कई बार दिक्कत आपके फोन में नहीं, बल्कि कैरियर सेटिंग्स में होती है. नेटवर्क प्रोवाइडर समय-समय पर अपडेट भेजते हैं जो कनेक्टिविटी बेहतर बनाते हैं.

iPhone पर: यदि कोई अपडेट उपलब्ध होगा तो खुद-ब-खुद नोटिफिकेशन आएगा, या Settings > General > About में जाकर मैन्युअली चेक कर सकते हैं.

Android पर: मॉडल पर निर्भर करता है, लेकिन ज़्यादातर फोन में Settings > Network & Internet > Carrier Settings के तहत यह ऑप्शन मिलेगा.

फोन को करें रिस्टार्ट

ये भले ही बेसिक लगे, लेकिन कई बार फोन को रीस्टार्ट करने से नेटवर्क की समस्या हल हो जाती है.

Android पर: पावर बटन (या कुछ मॉडल्स में पावर + वॉल्यूम डाउन) को दबाकर रखें और “Restart” विकल्प चुनें.

iPhone पर: साइड बटन और वॉल्यूम बटन में से किसी एक को साथ में दबाकर रखें जब तक पावर स्लाइडर न आ जाए. ऑफ करें, फिर साइड बटन को दोबारा दबाकर ऑन करें.

SIM कार्ड को निकालकर दोबारा लगाएं

अगर बाकी सब फेल हो जाए, तो आखिरी उपाय है SIM कार्ड को निकालना और दोबारा लगाना. इससे फोन नेटवर्क से नए सिरे से जुड़ने की कोशिश करता है. निकालते समय देखें कि SIM पर धूल या खरोंच तो नहीं. अगर SIM कार्ड खराब लग रहा है तो नया मंगाना बेहतर होगा. सभी फोनों के लिए: SIM ejector tool से कार्ड को निकालें, साफ करें और धीरे से फिर से डालें.

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