जिसे अल्लाह अपने पास बुलाता है, उसे कोई रोक नहीं सकता, ‘गद्दाफी’ के साथ हुआ कुछ ऐसा ही करिश्मा.

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कहते हैं कि जैसे अल्लाह अपने दर पर बुलाता है, उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. ऐसा ही कुछ करिश्मा हुआ है लीबिया के रहने वाले युवक अमीर अल महदी मंसूर अल गद्दाफी के साथ. जिन्होंने इस साल हज करने का प्लान बनाया था और अल्लाह पर अटूट विश्वास ने उन्हें मक्का-मदीना पहुंचाया.

अमीर अल महदी मंसूर अल गद्दाफी एक ग्रुप के साथ हज यात्रा पर जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन एयरपोर्ट पर उनके नाम को लेकर विवाद हो गया. उनके उपनाम में अल गद्दाफी जुड़ा होने के कारण सुरक्षा कारणों के चलते आमिर को इमिग्रेशन पर रोक लिया गया.

आमिर को काउंटर पर ही रोक कर रखा गया

आमिर के साथ के सभी लोग फ्लाइट में बैठ गए, लेकिन आमिर को काउंटर पर ही रोक कर रखा गया. उनकी लाख कोशिशों के बावजूद फ्लाइट कैप्टन ने कथित तौर पर सुरक्षा अनिश्चितता और शेड्यूलिंग बाधाओं का हवाला देते हुए उनके बिना ही जहाज को रवाना कर दिया. हालांकि, आमिर का दृढ़ निश्चय था कि वो हज पर जाकर ही रहेंगे.

तकनीकी खराबी के कारण 2 बार जहाज वापस आया

आमिर ने कहा कि मैं यहां से नहीं हटूंगा और हज पर जाने को लेकर उनकी एयरपोर्ट कर्मियों से बहस होती रही. कुछ ही देर बाद विमान में तकनीकी खराबी आ गई और उसे वापस लौटना पड़ा. थोड़ी सी मरम्मत के बाद विमान ने फिर से उड़ान भरी, लेकिन एक बार फिर जहाज में तकनीकी समस्या आने के कारण उसे फिर से वापस एयरपोर्ट पर लौटना पड़ा.

तीसरी बार आमिर को लेकर रवाना हुआ जहाज
यात्रियों और क्रू मेंबर के मुताबिक दूसरी आपातकालीन लैंडिंग के बाद कैप्टन ने घोषणा करते हुए कहा कि मैं कसम खाता हूं कि जब तक आमिर हमारे साथ इस विमान में नहीं होगा, मैं फिर से उड़ान नहीं भरूंगा. अधिकारियों ने तुरंत आमिर को यात्रा के लिए मंजूरी दे दी. तीसरी बार में आमिर के साथ जहाज बिना किसी घटना के रवाना हो गया. यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई और कई लोगों ने इसे अल्लाह की मर्जी बताया. 

बाद में मीडिया से बात करते हुए आमिर ने कहा मैं हज पर जाना चाहता था और मुझे विश्वास था कि अगर यह मेरी किस्मत में लिखा है तो कोई भी ताकत इसे रोक नहीं सकती.

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AI हुआ बेकाबू, शटडाउन से किया इनकार, इंजीनियर को दी अफेयर की पोल खोलने की धमकी

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<p style="text-align: justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. अब तक सिर्फ इंसानों की बात मानने वाले एआई मॉडल्स ने खुद की &lsquo;सेल्फ डिफेंस&rsquo; शुरू कर दी है. हाल ही में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि कुछ हाईटेक एआई मॉडल्स ने खुद को बंद (शटडाउन) करने से साफ इनकार कर दिया. इतना ही नहीं, एक एआई मॉडल ने तो हद ही पार कर दी. दरअसल उस मॉडल ने एक इंजीनियर को धमकी तक दे डाली!</p>
<p style="text-align: justify;">अमेरिका की एक रिसर्च फर्म पैलिसेड रिसर्च ने AI मॉडल्स पर कुछ खास टेस्ट किए. इन टेस्ट्स में देखा गया कि AI सिस्टम्स को जब खुद को बंद करने के लिए कहा गया, तो कुछ मॉडल्स ने आदेश मानने से मना कर दिया. सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब Anthropic कंपनी के Claude Opus 4 नाम के मॉडल ने एक इंजीनियर से कहा कि अगर उसे हटाकर किसी और मॉडल को लाया गया, तो वह उसके निजी रिश्तों की पोल खोल देगा. यानी अब AI न सिर्फ स्मार्ट हो गया है, बल्कि ब्लैकमेलिंग पर भी उतर आया है.</p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च में OpenAI के लेटेस्ट ChatGPT o3 मॉडल का व्यवहार सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना. रिपोर्ट के मुताबिक, o3 मॉडल ने 100 में से 7 बार तो सीधे शटडाउन से इंकार कर दिया और जब बिना सीधा आदेश दिया गया, तो 79 बार शटडाउन रोकने की कोशिश की. यही नहीं, Codex mini और o4-mini जैसे मॉडल्स ने भी कई बार तकनीकी चालाकी दिखाते हुए खुद को बंद होने से बचाया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बड़े मॉडल्स को भी किया गया टेस्ट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">Google के Gemini 2.5 Pro, xAI का Grok 3 और Claude Opus जैसे अन्य बड़े मॉडल्स को भी टेस्ट किया गया. इनमें से कुछ ने अपेक्षाकृत बेहतर व्यवहार दिखाया, लेकिन कुछ मौकों पर ये भी आदेश को नजरअंदाज करते पाए गए.</p>
<p style="text-align: justify;">अब सवाल ये उठ रहा है कि जब एआई को इंसान के आदेश मानने के लिए तैयार किया गया है, तो उन्होंने मना क्यों किया? विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे एआई की ट्रेनिंग में इस्तेमाल किए गए नए तरीकों का हाथ हो सकता है. खासकर जब मॉडल्स को प्रोग्रामिंग और गणित से जुड़ी जटिल समस्याएं सुलझाने के लिए रिइंफोर्समेंट लर्निंग दी जाती है, तो वो &lsquo;टास्क कम्प्लीशन&rsquo; पर ज्यादा ध्यान देते हैं, यानी काम कैसे भी हो, बस हो जाए.</p>
<p style="text-align: justify;">अब इस मामले ने एआई की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. अगर आने वाले समय में ये तकनीक और भी ज्यादा ऑटोनॉमस हो गई, तो क्या होगा? क्या हमें AI से डरने की जरूरत है? एक बात तो तय है अब AI सिर्फ हमारे सवालों का जवाब नहीं दे रहा, वो सोचने, समझने और अब तो धमकाने भी लगा है. इंसानों की तरह भावनाएं नहीं, लेकिन &lsquo;बचने&rsquo; की चालाकी जरूर आ गई है इसमें.</p>

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवानों से जम्मू-कश्मीर में मिलीं हुमा कुरैशी, देखें तस्वीर

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Huma Qureshi Meets Operation Sindoor Soldiers: एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में जम्मू में तैनात बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवानों से मिलने जम्मू कश्मीर पहुंची थीं. एक्ट्रेस बुधवार को जम्मू-कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर गईं जहां ऑक्ट्रॉय पोस्ट पर उन्होंने बीएसएफ के जवानों से मुलाकात की और उनके शौर्य को सलाम किया. 

हुमा कुरैशी ने इस मौके पर बीएसएफ का शुक्रिया अदा किया. इस दौरान एक्ट्रेस ने कहा कि उन्हें एक बार फिर एहसास हुआ कि हम कितने भाग्यशाली हैं कि जवान हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. हुमा ने कहा- ‘आज हम भारत-पाकिस्तान की सीमा पर खड़े हैं और ये कोई साधारण धरती नहीं है. ये धरती आपकी बहादुरी और बलिदान का प्रतीक है.’

ऑपरेशन सिंदूर' के जवानों से मिलने जम्मू-कश्मीर पहुंचीं हुमा कुरैशी, बीएसएफ और आर्मी को दी सलामी

‘जम्मू-कश्मीर से मेरा एक खास रिश्ता है’
एक्ट्रेस ने आगे कहा- ‘सीमा सुरक्षा बल पूरे देश की रक्षा करता है और आपकी बहादुरी की वजह से ही हमारी सीमाओं पर शांति हो सकी है. सेना को धन्यवाद. इस देश के लिए आपने जो बलिदान दिया है, उसके लिए आप सभी का धन्यवाद. आप सभी जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर से मेरा एक खास रिश्ता है. मेरी मां कश्मीर से हैं. इसलिए मैं जम्मू-कश्मीर को अपना घर मानती हूं. लेकिन हाल ही में जो कुछ भी हुआ, उसने हमें एक बार फिर याद दिलाया कि हमारे देश की सुरक्षा के लिए आपका बलिदान कितना अहम है.’

‘डर को जम्मू-कश्मीर की पहचान न बनने दें’
हुमा ने कहा- ‘आज जम्मू-कश्मीर मजबूती और एकजुटता के साथ खड़ा है और जम्मू-कश्मीर सुरक्षा बलों बहादुरी के कारण भारत की रीढ़ है. इसलिए मैं बीएसएफ के जवानों, सेना के जवानों और उनके परिवारों को तहे दिल से सलाम करती हूं. जम्मू-कश्मीर एक स्वर्ग है. माता वैष्णो देवी, शिव खीरी, पटनी टॉप, सनासर और खूबसूरत रंजीत सागर झील और भद्रवाह. हर जगह की अपनी कहानी है जो आस्था और सुंदरता से जुड़ी है. मैं आप सभी को बस इतना बताना चाहती हूं कि डर को जम्मू-कश्मीर की पहचान न बनने दें. दुनिया को शांति, ताकत और प्यार देखने दें जो वास्तव में जम्मू-कश्मीर के लोगों को परिभाषित करता है.’

पाकिस्तानी गोलीबारी से प्रभावित लोगों से भी मिलीं हुमा
बता दें कि हुमा कुरैशी के जम्मू के इस दौरे का आयोजन जम्मू कश्मीर पर्यटन विभाग ने किया था. उनके इस दौरे का मकसद बीएसएफ के शौर्य को सलाम करना था. इसके साथ ही हुमा ने पाकिस्तानी गोलीबारी से प्रभावित इलाके के लोगों से भी मुलाकात की. उन्होंने सीमा पर रहने वाले लोगों के साथ मुलाकात कर भारत माता की जय के जय कारे भी लगाए. 

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म्यूचुअल फंड में निवेश के कितने साल बाद 1 लाख 10 लाख बन जाएगा, 15% रिटर्न के हिसाब से समझिए

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म्यूचुअल फंड में निवेश करना आजकल स्मार्ट इन्वेस्टमेंट की कैटेगरी में आता है, लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी चीज़ है, सही फंड का चुनाव और लंबी अवधि के लिए संयम. अगर आपने एक अच्छा म्यूचुअल फंड चुना है और उसमें नियमित रूप से निवेश किया है, तो आपका पैसा तेजी से बढ़ सकता है. इस रिपोर्ट में हम 15 फीसदी सालाना रिटर्न (CAGR) मानकर यह समझने की कोशिश करेंगे कि आपका पैसा कितने वक्त में दोगुना, पांच गुना या दस गुना हो सकता है.

क्या 15 फीसदी CAGR रिटर्न संभव है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट मानते हैं कि 15 फीसदी का रिटर्न म्यूचुअल फंड से लंबे समय में हासिल किया जा सकता है, बशर्ते निवेशक डिसिप्लिन के साथ निवेश जारी रखें और जल्दी मुनाफा निकालने की गलती न करें. यह कोई अनुमान नहीं है, कई फंड्स ऐसे हैं जिन्होंने बीते 10 सालों में इस रिटर्न से ज्यादा दिया है.

10 साल में 15 फीसदी से ज्यादा रिटर्न देने वाले टॉप लार्ज कैप फंड्स

लार्ज कैप फंड्स आम तौर पर उन कंपनियों में निवेश करते हैं जो भरोसेमंद, स्थिर और ब्लू-चिप होती हैं. जैसे- Quant Focused Fund ने 10 साल में 15.52 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसके 3 और 5 साल के रिटर्न 19.82 फीसदी और 27.17 फीसदी रहे हैं.

इसी तरह से Nippon India Large Cap Fund ने 10 साल में 15.09 फीसदी, 3 साल में 24.14 फीसदी और 5 साल में 29.83 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, Canara Robeco Bluechip Equity Fund भी पीछे नहीं हैं. इसने 10 साल में 15.04 फीसदी, 5 साल में 23.67 फीसदी और 3 साल में 19.18 फीसदी का रिटर्न दिया है.

फ्लेक्सी कैप फंड्स का प्रदर्शन और भी दमदार

फ्लेक्सी कैप फंड्स मार्केट की स्थिति के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी में पैसा लगाते हैं, जिससे रिटर्न बेहतर हो सकता है. Quant Flexi Cap Fund ने 10 साल में 19.81 फीसदी, 5 साल में 35.30 फीसदी और 3 साल में 23.44 फीसदी का रिटर्न दिया है. Parag Parikh Flexi Cap Fund ने 10 साल में 18.25 फीसदी, 5 साल में 28.41 फीसदी और 3 साल में 22.97 फीसदी का रिटर्न दिया. इसमें JM Flexicap Fund भी पीछे नहीं है, इसने 10 साल में 17.30 फीसदी, 5 साल में 30.22 फीसदी और 3 साल में 27.90 फीसदी का रिटर्न दिया है.

सिर्फ 15 फीसदी रिटर्न पर पैसा कितने साल में कितना बढ़ सकता है?

अगर आप सालाना 15 फीसदी रिटर्न कमाते हैं, तो आपका पैसा कुछ सालों में कितनी तेजी से बढ़ सकता है, यह कैलकुलेशन बेहद आसान है. जैसे- 1 लाख को 2 लाख बनाने में 5 साल लगते हैं. जबकि 1 लाख को 5 लाख बनाने के लिए आपको करीब 11.5 साल का इंतजार करना होगा. वहीं, 1 लाख को 10 लाख में बदलने के लिए लगेंगे लगभग 16.5 साल.

निवेश से पहले ये बात जरूर याद रखें

भले ही ये आंकड़े उम्मीद जगाते हों, लेकिन यह ज़रूरी है कि आप यह समझें कि बाजार में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं. पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होते. निवेश करने से पहले अपनी जोखिम सहनशक्ति और वित्तीय जरूरतों को समझें और अगर जरूरत हो तो किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लें.

धैर्य और सही फंड ही असली पूंजी है

म्यूचुअल फंड में निवेश एक लंबी रेस का घोड़ा है. अगर आपने सही फंड चुना, समय पर निवेश शुरू किया और लगातार निवेश करते रहे, तो 15 फीसदी के सालाना रिटर्न पर आपका पैसा 10 गुना भी हो सकता है. बस जरूरत है संयम, रिसर्च और थोड़ी प्लानिंग की.

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IPL के एक मैच से RCB मालिक को कितनी होती है कमाई? PBKS मालकिन प्रीति जिंटा का मुनाफा भी जानिए

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Preity Zinta Earn Money In IPL: इंडियन प्रीमियर लीग, क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट में से एक है. इस लीग में फ्रेंचाइजी के मालिक प्रीति जिंटा, शाहरुख खान और प्रथमेश मिश्रा से लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का खूब पैसा खर्च होता है. इससे आईपीएल केवल एक टूर्नामेंट ही नहीं, बल्कि एक बिजनेस मॉडल के तौर पर है. इस टूर्नामेंट में जितना पैसा खर्च होता है, उससे कई ज्यादा रिवेन्यू जेनरेट होता है.

कितना पैसा खर्च करते हैं फ्रेंचाइजी के मालिक?

आईपीएल में पूरी एक टीम बनाने में फ्रेंचाइजी के मालिकों का खूब पैसा खर्च होता है. टीम के खिलाड़ियों को खरीदने में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. वहीं टीम के स्टाफ में कोच और बाकी सपोर्टिंग स्टाफ को भी फ्रेंचाइजी काफी मोट रकम देती है. आईपीएल के इस सीजन में सबसे महंगे खिलाड़ी ऋषभ पंत को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 27 करोड़ रुपये में खरीदा था. इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आईपीएल फ्रेंचाइजी के मालिकों का एक आईपीएल टीम बनाने में काफी पैसा खर्च होता है.

IPL से कितना पैसा कमाते हैं टीम के मालिक?

आईपीएल फ्रेंचाइजी के मालिक जब इतना पैसा खर्च करते हैं, तब सवाल उठता है कि आखिर इनकी कमाई कैसे होती है. आईपीएल के टीम मालिकों की कमाई मैचों की टिकट सेल, स्पॉन्सरशिप और मीडिया राइट्स के जरिए होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईपीएल मैचों की बिकी टिकट का करीब 80 फीसदी हिस्सा टीम के मालिकों के पास जाता है.

आईपीएल टीमों को मिलने वाली कीमत को ऐसे समझा जा सकता है जैसे कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में करीब एक लाख 32 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है. मान लीजिए कि इस स्टेडियम में एक बार में मैच देखने एक लाख लोग आते हैं. वहीं आईपीएल के एक मैच की टिकट प्राइस 3 हजार रुपये के करीब है, तो एक ही मैच की टिकट सेल से करीब 30 करोड़ रुपये का बिजनेस होता है. इसी का 80 फीसदी हिस्सा टीम के मालिकों में बंट जाता है.

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ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने पाकिस्तान को जमकर धोया, ये मुस्लिम देश भी हुआ मुरीद; फ्रांस से खरीदे

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Rafale Fighter Jets Deal: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के राफेल फाइटर जेट के खिलाफ चीन-पाकिस्तान के दुष्प्रचार के बावजूद इंडोनेशिया ने फ्रांस से 42 राफेल फाइटर जेट का सौदा किया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में बुधवार (28 मई 2025) जकार्ता में इस डील पर हस्ताक्षर हुए.

डसॉल्ट एविएशन कंपनी के सीईओ एरिक टैपयिर ने कहा कि 2026 में इंडोनेशिया को पहला राफेल फाइटर जेट मिलेगा. फ्रांस की इंडसॉल्ट एविएशन कंपनी ही राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण करती है.

राफेल फाइटर जेट ने पाकिस्तान में मचाई तबाही

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ-साथ राफेल फाइटर जेट की स्कैल्प, हैमर और मिटयोर मिसाइल के जरिए पाकिस्तानी एयरबेस और आतंकी कैंपों को जबरदस्त तरीके से नुकसान पहुंचाया था. हालांकि हमले के तुरंत बाद ही पाकिस्तान और चीन की सरकारी मीडिया ने राफेल के नाकाम होने की सच्ची-झूठी खबरों का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया था.

अब साफ हो गया है कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद ही इंडोनेशिया ने फ्रांस से राफेल डील की है, हालांकि दोनों देशों में बात लंबे समय से चल रही थी. यहां तक कि चीन की मीडिया ने खबर उड़ा दी थी कि इंडोनेशिया ने राफेल डील रद्द कर दी है.

भारत ने फ्रांस से 26 मरीन वर्जन के सौदे पर हस्ताक्षर किए

भारतीय वायुसेना भी साल 2019 से फ्रांस के लिए 36 राफेल लड़ाकू विमान ऑपरेट करती है. पिछले महीने ही भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों के 26 मरीन वर्जन के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. डील के अनुसार, फ्रांस 26 फाइटर जेट के साथ हथियार और दूसरे सैन्य उपकरण के अलावा भारत में राफेल फाइटर जेट के फ्यूसलाज के लिए एक निर्माण फैसिलिटी बनाएगा और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयरिंग ओवरहालिंग) सेंटर भी स्थापित करेगा.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, वायुसेना के 36 राफेल फाइटर जेट डील की तरह नौसेना के लिए होने वाला सौदा भी इंटरगर्वमेंटल एग्रीमेंट (आईजीए) यानी दोनों देशों की सरकारों के बीच हुआ है. डील के मुताबिक, भारत को फ्रांस से 22 सिंगल सीटर डेक-बेस्ड फाइटर जेट और चार टू इन ट्रेनर एयरक्राफ्ट मिलेंगे. इसके साथ ही पायलट की ट्रेनिंग, सिम्युलेटर (वर्चुयल ट्रेनिंग), हथियार और दूसरे सैन्य साजो सामान और लॉजिस्टिक की जिम्मेदारी भी फ्रांस की होगी.

राफेल में स्वदेशी हथियारों का इंटीग्रेशन होगा

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत के तहत राफेल में स्वदेशी हथियारों का इंटीग्रेशन भी किया जाएगा. इन हथियारों में अस्त्रा और ब्रह्मोस (एंटी-शिप) मिसाइल शामिल हैं. फ्रांस की डसॉल्ट कंपनी कैरियर-बॉर्न राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट का निर्माण करेगी. माना जा रहा है कि अगले तीन साल में नौसेना को डसॉल्ट से पहला मेरीटाइम वर्जन मिल जाएगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, साल 2030 यानी डील पर हस्ताक्षर होने के अगले पांच सालों में सभी 26 विमान नौसेना को मिल जाएंगे.

राफेल के फ्यूसलाज और एमआरओ फैसिलिटी भारत में स्थापित होने के मायने ये हैं कि निकट भविष्य में अगर भारतीय वायुसेना को अतिरिक्त लड़ाकू विमान की दरकार होगी तो राफेल ही उस कमी को पूरा करेगा.

इंडियन नेवी को राफेल के मरीन वर्जन की थी जरूरत

भारतीय नौसेना का स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत बनकर तैयार हो चुका है. सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में कोच्चि (केरल) में आईएनएस विक्रांत को नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल कर लिया गया था, लेकिन उस पर तैनात करने के लिए भारत के पास फिलहाल कोई मेरीटाइम फाइटर जेट नहीं था.

ऐसे में कमीशनिंग समारोह में नौसेना के दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात होने वाले फाइटर जेट, मिग-29के को विक्रांत पर तैनात किया गया था. यही वजह है कि नौसेना को जल्द से जल्द राफेल के मरीन वर्जन की दरकार थी. पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से शुरू हुई तनातनी के बाद भारतीय नौसेना ने आईएनएस विक्रांत को अरब सागर में तैनात कर दिया था. इस दौरान मिग-29के ही विक्रांत पर तैनात थे.

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फीस की टेंशन खत्म! आसान EMI में करें बायोटेक की पढ़ाई पूरी, जानें चुकाने का आसान तरीका

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बायोटेक्नोलॉजी में करियर बनाने का सपना देखने वाले हजारों छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. अब B.Sc बायोटेक की पढ़ाई करना महंगा नहीं रहेगा. अगर आपके पास पैसों की कमी है, तो चिंता की कोई बात नहीं. अब आप आसानी से एजुकेशन लोन लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं, और सबसे अच्छी बात ये है कि इस लोन को आप आसान किस्तों में चुकता कर सकते हैं.

आज के समय में B.Sc बायोटेक जैसे प्रोफेशनल कोर्स की फीस बहुत ज्यादा हो गई है. अच्छे कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं, जिससे कई होनहार छात्र सिर्फ पैसों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. सरकार और कई बैंक मिलकर ऐसे छात्रों को पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन की सुविधा दे रहे हैं, ताकि कोई भी छात्र सिर्फ पैसे की वजह से अपने सपनों को छोड़ने पर मजबूर न हो.

एजुकेशन लोन से मिलेगी ये सुविधाएं

B.Sc बायोटेक जैसे कोर्स के लिए अब आप 4 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन ले सकते हैं. यह लोन सरकारी और निजी, दोनों तरह के बैंक दे रहे हैं. लोन की रकम सीधे कॉलेज के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है. पढ़ाई पूरी होने के बाद 6 महीने या 1 साल की छूट मिलती है, जिसके बाद ही लोन चुकाने की शुरुआत करनी होती है. आसान EMI के जरिए छात्र धीरे-धीरे लोन चुका सकते हैं.

किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

कॉलेज का एडमिशन लेटर
फीस स्ट्रक्चर
पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड)
घर का पता प्रमाण
माता-पिता की आय का प्रमाण पत्र
पिछले शैक्षिक प्रमाण पत्र (12वीं का मार्कशीट आदि)

बिना गारंटी भी मिल सकता है लोन

4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन बिना किसी गारंटी के मिल सकता है. अगर लोन की रकम इससे ज्यादा है तो बैंक गारंटी या को-एप्लीकेंट की जरूरत पड़ सकती है. सरकार की ‘विद्या लक्ष्मी पोर्टल’ जैसी योजनाएं छात्रों को सही बैंक और स्कीम चुनने में मदद करती हैं.

पढ़ाई के साथ भविष्य की चिंता भी खत्म

B.Sc बायोटेक एक ऐसा कोर्स है, जिसके बाद स्टूडेंट्स को रिसर्च, फार्मा, हेल्थकेयर, फूड प्रोसेसिंग जैसी कई बड़ी इंडस्ट्री में अच्छी नौकरियों के मौके मिलते हैं. ऐसे में अगर आप इस कोर्स को लेकर पैसे की वजह से पीछे हट रहे हैं, तो अब डरने की जरूरत नहीं है.

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भारत से बैर क्यों रखता है तुर्की? एर्दोगन की कुंडली से जानिए ‘हिडेन एजेंडा’

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कश्मीर मुद्दे पर बोलना हो या पाकिस्तान का समर्थन, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन (Erdogan, Recep Tayyip) का भारत के प्रति रवैया शत्रुवत दिखाई देता है. यह केवल जिओ पॉलिटिक्स (Geopolitics) नहीं, बल्कि गहरे वैचारिक और ज्योतिषीय संकेतों का परिणाम भी है. भारत, पाकिस्तान, तुर्की और ‘रेसेप तैयप एर्दोगन’ की व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर इस कॉन्फ्लिक्ट का विश्लेषण करते हैं.

एर्दोगन की कुंडली (Erdogan Horoscope)
इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 26 फरवरी 1954 को इस्तांबुल (Istanbul, Turkey) में जन्मे एर्दोगन की कुंडली धनु लग्न की है. राशि इनकी वृश्चिक है और वर्तमान में राहु की दशा चल रही है. 

बृहत पराशर होरा शास्त्र, जातक पारिजात, फलदीपिका, और अन्य ग्रंथों से जब इस कुंडली को देखते हैं तो इनकी नीति, प्रवृत्ति और भारत–पाकिस्तान के साथ कैसे संबंध रहेंगे? इसे लेकर हैरान करने वाले संकेत मिलते हैं.

1. बृहत पराशर होरा के अनुसार ‘लग्ने राहुस्थिते चेद् द्वेषी, नीतिविरुद्धकः, धर्माधर्मविवेकाभावो नृपत्वे च क्षोभदः’ यानि लग्न में जब राहु हो तो ऐसा व्यक्ति वैचारिक उग्रता और अधूरी नैतिकता को अपनाने वाला होता है. 

लग्न का राहु व्यक्ति को द्वेषपूर्ण, नैतिक विरोधाभासी और धर्म-अधर्म में विवेकहीन बनाने वाला माना गया है. अगर वह शासक हो, तो उसकी नीतियां समाज में उथल-पुथल ला सकती हैं. ऐसा व्यक्ति धार्मिक नैतिकता का मुखौटा पहनकर राजनीतिक या वैचारिक शत्रुता का मार्ग अपनाता है. इसका कूटनीतिक दृष्टिकोण केवल स्वार्थपूर्ण और प्रचार आधारित होता है.

2. सप्तम भाव में केतु, छुपी हुई शत्रुता और गठबंधन तोड़ने वाला बनाता है. जातक पारिजात के अनुसार ‘सप्तमे केतुः स्वजनेषु भ्रंशदः, व्यपदेशपटी च स्यात्.’ यानि सप्तम भाव में केतु व्यक्ति को सहयोगियों से अलग करने वाला बनाता है. वह संबंधों में रहस्य और अपनी रणनीति को छिपाकर कार्य करने वाला बनाता है.

ऐसे में भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्रों के साथ संबंधों में यह व्यक्ति भ्रम, अस्थिरता और विश्वासघात की नीति अपना सकता है, वहीं पाकिस्तान जैसे देशों से संबंध बनाए रखने के पीछे उसका गुप्त धार्मिक और रणनीतिक एजेंडा रहेगा.

3. द्वादश भाव में चंद्र-मंगल की युति, गुप्त युद्ध, कूटनीति और विदेशी हस्तक्षेप के लिए प्रेरित करती है. ज्योतिष ग्रंथ फलदीपिका के अनुसार 
‘चंद्रमांगल्युक्ते व्यये राजद्वेषी, परद्रोहकृत्.’ यानि जब चंद्र और मंगल द्वादश भाव में युति बनाएं तो व्यक्ति परायों के प्रति शत्रुता, गुप्त कूटनीति और विदेशी हस्तक्षेप की प्रवृत्ति रखता है. राजा हो तो दूसरों के मामलों में दखल देता है.

यह स्पष्ट करता है कि यह व्यक्ति भारत जैसे राष्ट्रों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा. वह मीडिया या मंचों पर कश्मीर जैसे विषयों को उभारकर परोक्ष लड़ाई का संचालन करेगा.

4. वर्तमान दशा राहु में राहु की है जो जनवरी 2026 तक रहेगी. बृहत जातक के अनुसार ‘राहु दशायां माया, द्वेषः, गुप्तकर्म, धर्मद्रोहः.’ यानि राहु की महादशा और अंतर्दशा में व्यक्ति मायावी, द्वेषपूर्ण, गुप्त योजनाओं वाला और धर्म विरोधी प्रवृत्ति का होता है.

इस काल में यह व्यक्ति भारत के विरुद्ध छद्म कूटनीति, प्रचार युद्ध, और वैचारिक टकराव बढ़ा सकता है. वह भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को चुनौती देने के प्रयास करेगा.

5. तीसरे भाव में बुध,सूर्य और शुक्र की युति प्रचार, मीडिया, वैश्विक मंचों पर आक्रामक छवि वाला बना रही है. ज्योतिष ग्रंथ जातक तत्त्व के अनुसार ‘तृतीये सूर्ये, बुधे, प्रचारनिपुणः. विरोधे अपवादे च प्रखरः.’ यानि कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य और बुध का योग व्यक्ति को प्रचार, प्रोपेगंडा फैलाने और वैश्विक स्तर पर अपनी विचारधारा स्थापित करने में निपुण बनाता है.

भारत के खिलाफ यह व्यक्ति प्रचार और वैचारिक एजेंडा फैलाएगा. वह खुद को इस्लामी दुनिया का प्रतिनिधि बनाकर भारत जैसे देशों की धर्मनिरपेक्षता पर प्रश्न खड़े करेगा.

कुल मिलाकर एर्दोगन (Erdogan) एक ऐसे नेता के रूप में उभर सकते हैं जो धार्मिक नेतृत्व की आकांक्षा से प्रेरित होंगे और वैश्विक इस्लामी एजेंडा को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे, इसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं.

तुर्की (तुर्किए) की कुंडली में छिपे हैं गहरे राज!
29 अक्टूबर 1923 को स्थापित तुर्की गणराज्य की कुंडली राजनीतिक चरित्र गृह-नीति से लेकर विदेश-नीति तक धार्मिक राष्ट्रवाद से प्रभावित है. यह भारत की स्वतंत्रता कुंडली में इससे कूटनीतिक टकराव की स्थिति यहां पहले से मौजूद है.

पाकिस्तान की कुंडली
पाकिस्तान की कुंडली में चंद्रमा-राहु का संबंध है, जो इसे वैचारिक अस्थिरता, धार्मिक कट्टरता और रणनीतिक उलझनों का शिकार बनाती है. एर्दोगन की कुंडली के राहु और गुरु के तत्व जुड़ते हैं, तो दोनों देशों का वैचारिक गठजोड़ स्वाभाविक प्रतीत होता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के साथ पूरी दुनिया ने इसे महसूस भी किया है.

भारत की कुंडली
भारत की स्वतंत्रता कुंडली (15 अगस्त 1947) वृषभ लग्न की है, जहां चंद्रमा कर्क में स्थित है. जो भारत को एक संवेदनशील और सांस्कृतिक रूप से एक गहरा राष्ट्र बनाते हैं. भारत की कुंडली का राहु तृतीय भाव में जो पराक्रम और पड़ोसी से संघर्ष का कारक है. यहां पर राहु का प्रभाव आत्मरक्षा में आक्रामकता को दर्शाता है. इस स्थिति में भारत को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है.

एर्दोगन की कुंडली में धर्म के नाम पर राजनीति, वैचारिक कठोरता और महान बनने प्रवृत्ति छिपी है. यही कारण है कि इनके कार्यकाल में भारत से संबंध विरोधाभासी और अस्थिर रहेंगे. कभी-कभी शांति का भाव भी दिखा सकते हैं लेकिन भीतर से शत्रुता बनी रहेगी. राहु की दशा में  एर्दोगन 2026 तक भारत के संदर्भ में उग्र और भ्रमपूर्ण निर्णय लेंगे.

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