चेहरे पर हंसी और आंखों में आंसू, RCB के फाइनल में पहुंचने पर ऐसा रहा अनुष्का शर्मा का रिएक्शन

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Anushka Sharma Reaction RCB Reach Final: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को 8 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली है. यह 2016 सीजन के बाद पहली बार है जब RCB फाइनल खेल रही होगी. विराट कोहली की वाइफ अनुष्का शर्मा भी इस मैच को देखने पहुंची थीं, जैसे ही रजत पाटीदार ने आरसीबी के लिए विनिंग सिक्स लगाया उसके बाद अनुष्का शर्मा का रिएक्शन वायरल हो चला है.

RCB के जीतने पर अनुष्का शर्मा खुशी से झूम उठीं, उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे. वहीं विराट कोहली का भी रिएक्शन वायरल हो रहा है. उन्हें एक उंगली के जरिए यह इशारा करते देखा गया कि उनकी टीम अब इतिहास रचने से सिर्फ एक कदम दूर है. इस पर अनुष्का ने चेहरे पर हंसी के साथ जोर-जोर से तालियां बजाईं. अनुष्का के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी.

RCB ने रच दिया इतिहास

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 2016 में अंतिम बार फाइनल में जगह बनाई थी. अब 9 साल बाद रजत पाटीदार की कप्तानी में RCB फिर से इंडियन प्रीमियर लीग का फाइनल खेलने जा रही है. पंजाब किंग्स के लिए यह हार निराशाजनक रही क्योंकि वह भी अपनी पहली खिताबी जीत की तलाश में है.

 

अपडेट जारी है…



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दिल्ली यूनिवर्सिटी में PG दाखिले का सुनहरा मौका, ‘ER’ वाले छात्रों को भी राहत

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में पोस्ट ग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है. शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी आवेदन प्रक्रिया में वे छात्र भी आवेदन कर सकते हैं, जिनके रिजल्ट में “ईआर” यानी एसेंशियल रिपीट आई है. हालांकि इन छात्रों को 31 अक्टूबर 2025 तक कम से कम 50 फीसदी अंक प्राप्त कर लेने होंगे, तभी उनका दाखिला सुनिश्चित माना जाएगा.

डीयू की ओर से हाल ही में एक वेबिनार के माध्यम से PG दाखिले से जुड़ी कई अहम बातें साझा की गईं. इस वेबिनार में छात्रों को बताया गया कि PG कोर्सेस में आवेदन की अंतिम तिथि 6 जून 2025 है. ऐसे में जिन छात्रों ने अब तक फॉर्म नहीं भरा है, वे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर लें.

माइग्रेशन सर्टिफिकेट को लेकर भी साफ निर्देश

डीयू के छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि अगर कोई दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र PG कोर्स में आवेदन कर रहा है, तो उसे माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा नहीं करना होगा. जबकि दूसरी यूनिवर्सिटी से आवेदन करने वाले छात्रों को माइग्रेशन सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा.

आवेदन के लिए ध्यान रखें ये बातें

छात्रों को वही ईमेल आईडी इस्तेमाल करनी है, जिससे उन्होंने CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) के लिए रजिस्ट्रेशन किया था. PG कोर्सेस में दाखिला CUET स्कोर के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाकर किया जाएगा.

मेरिट के अनुसार छात्रों को सीट अलॉट की जाएगी, जिसे तय समय पर स्वीकार करना होगा. अगर कोई छात्र सीट स्वीकार नहीं करता है, तो वह कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम 2025 से बाहर हो जाएगा. एक बार सीट स्वीकार करने के बाद उसे अपग्रेड भी किया जा सकता है.

फॉर्म भरते समय बरतें सावधानी

वेबिनार में छात्रों को यह भी चेतावनी दी गई कि अगर किसी फॉर्म में गलत जानकारी पाई गई, तो वह आवेदन रद्द किया जा सकता है. साथ ही, अगर कोई छात्र एक से ज्यादा कोर्स में आवेदन करना चाहता है, तो हर कोर्स के लिए अलग से आवेदन शुल्क देना होगा.

बैंक अकाउंट की जानकारी भी सही भरनी जरूरी है, क्योंकि अगर आगे किसी तरह का फीस रिफंड होता है, तो वह वहीं भेजा जाएगा.

वेबसाइट पर नजर बनाए रखें

डीयू PG एडमिशन डीन प्रो. हनीत गांधी और डॉ. अमित पुंडिर ने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी अपडेट के लिए DU की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से विजिट करते रहें.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब हो रहा डार्क पैटर्न का इस्तेमाल, झांसे में लिए जा रहे यूजर्स

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Dark Pattern: सर्वे एजेंसी LocalCircles ने बुधवार को किए गए अपने एक सर्वे में पाया कि कई अलग-अलग सेक्टर के प्लेटफॉर्म्स कंज्यूमर बिहेवियर को बदलने के लिए डार्क पैटर्न का इस्तेमाल कर रहे हैं. सर्वे के मुताबिक, ट्रैवल, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, ऑनलाइन बैंकिंग और पेमेंट, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, टैक्सी ऐप में सबसे ज्यादा डार्क पैटर्न के आने की सूचनाएं मिलीं.

इस तरह से झांसे में लिए जा रहे यूजर्स

डार्क पैटर्न अक्सर यूजर्स को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर देता है, जिसे वह वास्तव में नहीं लेना चाहता है. इसके चलते आप मेंबरशिप के जाल में फंस सकते हैं, हिडेन चार्जेस या सब्सक्रिप्शन का शिकार हो सकते हैं. सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले डार्क पैटर्न में फोर्स्ड एक्शन या जबरन एक्शन लेने के लिए यूजर को मजबूर करना, सबसे ऊपर है. इसका इस्तेमाल 123 या 54 परसेंट प्लेटफॉर्म कर रहे हैं. इसमें आमतौर पर ट्रांजैक्शन के दौरान किसी ऐप को डाउनलोड करने या पर्सनल डिटेल देने का दबाव डाला जाता है. 

धोखा देने की लगातार की जा रही कोशिश

दूसरे 109 प्लेटफॉर्म या 48 परसेंट ड्रिप प्राइसिंग का इस्तेमाल करते हुए पाए गए. इसे हिडेन चार्जेस के नाम से भी जाना जाता है. इसमें लेनदेन के बिल्कुल फाइनल स्टेप में कोई एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ दिया जाता है. इसके अलावा, लगभग 76 (33 परसेंट) प्लेटफॉर्म यूजर को लालच देकर धोखा देने की कोशिश करते हैं, 74 (34 परसेंट) प्लेटफॉर्म सब्सक्रिप्शन ट्रैप का इस्तेमाल करते हैं, 58 (25 परसेंट) लोग इंटरफेस इंटरफेरेंस का इस्तेमाल करते हैं और 51 (22 परसेंट) प्लेटफॉर्म ‘कन्फर्म शेमिंग’ का इस्तेमाल करते हैं. 

गाइडलाइंस का नहीं कोई असर

इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स को बार-बार एक ही चीज कहकर परेशान करने की स्ट्रैटेजी अपनाई जाती है या अनजाने में उन्हें फंसा लिया जाता है, यूजर्स को जबरदस्ती ऐसा महसूस कराया जाता है कि उन्हें किसी खास चीज की बहुत जरूरत हो या आगे पड़ सकती है, इसके अलावा, कई दूसरे पैंतरे भी अपनाए जाते हैं. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया कि रेगुलेटर्स की तरफ से तमाम गाइडलाइंस और प्रयासों के बावजूद डार्क पैटर्न के उपयोग में कोई कमी नहीं आई है. 

इनमें डार्क पैटर्न का हो रहा इस्तेमाल

सेक्टर-वाइज बात करें, तो एडटेक, ऑनलाइन बैंकिंग और पेमेंट, ई-कॉमर्स, ओटीटी, ऐप टैक्सी, फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स, मेडिसिन और हेल्थ सर्विसेज, एयरलाइंस, मूवी/इवेंट टिकटिंग में सात या उससे अधिक डार्क पैटर्न पाए गए. टेलीकॉम, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल लेंडिंग, वॉयस असिस्टेंट, ऑनलाइन बीमा और भर्ती/पेशेवर नेटवर्किंग में चार से छह डार्क पैटर्न के होने की रिपोर्ट मिली.

ट्रेन टिकटिंग, कार रेंटल, म्यूजिक स्ट्रीमिंग, मोबाइल डिवाइस, ऑनलाइन फाइनेंशियल ट्रेडिंग, और इलेक्ट्रिक स्कूटर में एक से तीन डार्क पैटर्न की पहचान की गई. 392 जिलों के 2.3 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने 228 भारतीय प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न के पाए जाने की बात कही. 

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