बच्चे के हाथ से रोटी छीनकर खाने लगा लंगूर, देखते ही मासूम की निकल गई चीख; वीडियो वायरल

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बाजार की भीड़-भाड़ में जिंदगी वैसे ही दौड़ती है जैसे दिल्ली में लोग मेट्रो पकड़ने के लिए दौड़ लगाते हैं. कई बार यह दौड़ उस मजेदार पल को देखने के लिए रुक जाती है, जिसे देखने के बाद न केवल राहगीर बल्कि सोशल मीडिया यूजर्स भी हंसते हुए लोटपोट हो जाते हैं. इस बार एक छोटे से बच्चे ने लोगों की उस दौड़ भाग को रोक दिया और रुकवाई भी किसके लिए? एक लंगूर के लिए! जी हां, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो लोगों की आंखों से आंसू निकाल रहा है लेकिन ये आंसू हंसी के हैं. वीडियो देखने के बाद आप खुद समझ जाएंगे.

लंगूर ने बच्चे की दावत में डाला खलल

वीडियो में एक बच्चा, जिसकी उम्र मुश्किल से चार या पांच साल रही होगी, अपने पिता के साथ किसी बाजार में एक बंद रेहड़ी के काउंटर पर बैठा है. बच्चे के हाथ में है एक रोटी बिल्कुल वैसी जैसी प्यार से मां सुबह देती है, लेकिन इस रोटी की किस्मत में कुछ और ही लिखा था. बच्चा बैठा है, पिता पास में खड़े हैं, शायद सोच रहे होंगे कि चलो बच्चा खा ले, फिर हम भी सांस लें. लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था. अचानक वीडियो में एक लंगूर प्रवेश करता है और ऐसी एंट्री मारता है कि सलमान खान भी शरमा जाए. बिना किसी सस्पेंस, बिना किसी शर्म के, सीधा बच्चे की तरफ लपका और रोटी छीन ली. अब बच्चा तो बच्चा ठहरा उसके लिए ये किसी ‘किंग कॉन्ग’ का अटैक था. वह दहाड़े मार मारकर ऐसा रोया कि पूरा बाजार केवल उसकी रोने वाली दहाड़े सुनने लगा.

पिता हंसते-हंसते हुए लोटपोट

अब बारी आई बाप की. आम भारतीय पिता की तरह उन्होंने पहले ठहाका मारा जैसे कह रहे हों, “अबे कुछ नहीं करेगा रे, मैं हूं ना.” लेकिन बच्चे को फर्क नहीं पड़ा, उसका ट्रॉमा उस लंगूर से कहीं ज्यादा ताकतवर था. लंगूर वहीं बैठा रोटी खा रहा था जैसे कोई ठेले से कुलचा मंगवाकर खा रहा हो. बाप हंस रहा था, बच्चा रो रहा था और इंटरनेट… इंटरनेट हंस-हंस के अपनी जान गंवा रहा था. वीडियो को देखने के बाद अब यूजर्स भी तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.

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यूजर्स भी ले रहे मजे

वीडियो को @gharkekalesh नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है, जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…बच्चे को रेबिज हो जाए वो चलेगा, लेकिन रील बनाना जरूरी है. एक और यूजर ने लिखा…किस तरह का पिता है, शर्म नहीं है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…बाप की तरह मेरी भी हंसी नहीं रुक रही है.

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‘हमास स्टाइल में झूठ फैला रहा पाकिस्तान’, राफेल गिराने के दावे पर US लेखक ने खोली PAK की पोल

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Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान जहां एक ओर सीजफायर की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर एक नया मोर्चा खोल दिया है, जो है इंफॉर्मेशन वॉर. पाकिस्तान यह दावा कर रहा है कि भारत के कई राफेल और अन्य लड़ाकू विमान मार गिराए गए हैं, जबकि अब तक कोई ठोस सबूत या जमीनी प्रमाण सामने नहीं आए हैं.

अमेरिका के जाने-माने खुफिया विशेषज्ञ और लेखक रयान मैकबेथ का कहना है कि पाकिस्तान झूठ को फैलाने के लिए हमास और चीन की स्टाइल में काम कर रहा है. वो सोशल मीडिया, सेलफोन वीडियो और फर्जी इमेज का इस्तेमाल कर फेक नैरेटिव गढ़ रहा है. उन्होंने मिग-21 के मलबे की तस्वीर को उदाहरण के तौर पर बताया, जिसे भारत के राफेल के मलबे की तरह प्रचारित किया गया, जबकि भारत अब मिग-21 का इस्तेमाल सीमित रूप से करता है. इससे साफ है कि पाकिस्तान फेक इमेज और सोशल इंजीनियरिंग से अपनी हार को छिपाने की कोशिश कर रहा है.

भारत में कुछ भी छिपा रहना असंभव: मैकबेथ

रयान मैकबेथ ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है. यहां हर सैन्य संसाधन का सार्वजनिक लेखा-जोखा होता है. अगर भारत ने कोई विमान खोया होता तो वह बजट दस्तावेजों, संसदीय रिपोर्ट या मीडिया जांच के माध्यम से सामने आ ही जाता. उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत ने कोई राफेल या सुखोई खोया होता तो उनके रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स में कमी आने पर वह फैक्ट सार्वजनिक हो जाता. भारत में कुछ भी छिपा रहना असंभव है.

फर्जी नैरेटिव से दबाव बनाना, PAK की रणनीति: रयान मैकबेथ 

पाकिस्तान की सूचना रणनीति में दो मुख्य उद्देश्य स्पष्ट हैं.अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहानुभूति बटोरना, ताकि भारत को ‘आक्रामक’ दिखाया जा सके. अपने नागरिकों और सेना का मनोबल बनाए रखना ताकि ऑपरेशन सिंदूर की मारक क्षमता को नकारा जा सके. इन दोनों उद्देश्यों के लिए, पाकिस्तान AAMPR (Air Asset Management and Protection Radar) और फर्जी गिराए गए विमानों की कहानियों का सहारा ले रहा है.

भारत को कैसे जवाब देना चाहिए? 

रयान मैकबेथ और अन्य विशेषज्ञों की राय स्पष्ट है कि भारत को 21वीं सदी के इनफॉरमेशन वॉर युद्ध में भी उतनी ही तत्परता से लड़ना होगा जितनी अग्रिम मोर्चे पर. भारत को फर्जी वीडियो और अफवाहों का तुरंत खंडन सरकारी हैंडल से किया जाए. डिजिटल बुलेटिन और ऑपरेशन सिंदूर की प्रामाणिक फुटेज/फैक्ट सार्वजनिक किए जाएं. भारत विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को जमीनी स्थिति दिखाने के लिए आमंत्रित करे.

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हिमाचल बोर्ड आज जारी करेगा 12वीं क्लास का रिजल्ट, यहां नतीजे देखने का आसान तरीका

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बोर्ड के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और किसी भी वक्त परीक्षा परिणाम की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट hpbose.org पर की जा सकती है.

बोर्ड के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और किसी भी वक्त परीक्षा परिणाम की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट hpbose.org पर की जा सकती है.

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपना रिजल्ट आसानी से चेक कर सकते हैं. अगर वेबसाइट क्रेश है तो उसका भी रास्ता आपको हम बताने जा रहे हैं.

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप अपना रिजल्ट आसानी से चेक कर सकते हैं. अगर वेबसाइट क्रेश है तो उसका भी रास्ता आपको हम बताने जा रहे हैं.

पहला रास्ता तो ये है कि HPBOSE की आधिकारिक वेबसाइट hpbose.org पर जाएं. होमपेज पर

पहला रास्ता तो ये है कि HPBOSE की आधिकारिक वेबसाइट hpbose.org पर जाएं. होमपेज पर “Results” सेक्शन में जाकर अपनी कक्षा 12वीं के रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.

इसके बाद अपना रोल नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करें.

इसके बाद अपना रोल नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज करें. “Submit” पर क्लिक करें और अपना परिणाम देखें, स्क्रीन पर आपको अपना स्कोर कार्ड दिखाई देने लगेगा.

इसके अलावा आप डीजी लॉकर के माध्यम से भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इसके लिए आपको डिजी लॉकर ऐप डाउनलोड करके उसमें रजिस्ट्रेशन और आधार केवाईसी करानी होगी.

इसके अलावा आप डीजी लॉकर के माध्यम से भी अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं. इसके लिए आपको डिजी लॉकर ऐप डाउनलोड करके उसमें रजिस्ट्रेशन और आधार केवाईसी करानी होगी.

इसके अलावा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अगर एसएमएस सुविधा की जानकारी हो तो दिए गए नंबरों पर बस अपना रोल नंबर एसएमएस करके आप अपना रिजल्ट अपने मैसेज बॉक्स में ही देख पाएंगे.

इसके अलावा बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर अगर एसएमएस सुविधा की जानकारी हो तो दिए गए नंबरों पर बस अपना रोल नंबर एसएमएस करके आप अपना रिजल्ट अपने मैसेज बॉक्स में ही देख पाएंगे.

Published at : 17 May 2025 10:57 AM (IST)

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शिक्षा वेब स्टोरीज

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Shani Dev: रा, री, रू, रे… से नाम शुरू होता है तो शनि देव कभी नहीं करेंगे बुरा, वजह जान हो जा

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Shani Dev: ज्योतिष शास्त्र में अक्षरों का संबंध राशियों से होता है जिसका प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है. जिन लोगों का नाम रा, री, रू, रे… अक्षर से शुरू होता है उन लोगों पर शनि देव की विशेष कृपा होती है.

तुला राशि से संबंध

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू या ते जिन लोगों का नाम का पहला अक्षर इस अक्षर से शुरू होता है वो लोग तुला राशि के होते हैं. तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह है. ऐसे लोग लग्जरी लाइफ जीने का शौक रहता है. अपनी जिंदगी में हर पल को खुलकर बीताते हैं. ऐसे लोग बहुत मेहनती होते हैं और अपनी पैसा भी दिल खोल कर खर्च करते हैं.

मित्रता का भाव

जिन लोगों का नाम रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू  या ते अक्षर से शुरू होता है उन लोगों की पर्सनालिटी काफी प्रभावशाली होती है.ऐसे लोग फैमली को साथ लेकर चलने वाले होते हैं. लेकिन एक खास बात इन लोगों में यह होती है कि इन अक्षर से शुरू होने वाले नाम के लोगों का कोई बुरा कभी नहीं कर सकता. ऐसा इसलिए है क्योंकि तुला राशि वाले शुक्र ग्रह से संबंधित होते हैं वहीं शनि देव और शुक्र का संबंध मित्रता का है. इसीलिए जिन लोगों का नाम रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू  या ते अक्षर से शुरू होता है उन लोगों पर शनि देव का हाथ होता है.

शनि की साढ़ेसाती

जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव होता है और उन लोगों का नाम अगर इन अक्षरों यानि रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू  या ते से शुरू हुआ है तो उन पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम रहता है. शनि की साढ़ेसाती जीवन में कठिनाइयां लाती है. जिस कारण जीवन में उथल-पुथल रहती है. तुला राशि के लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम रहता है, ऐसा शनि और शुक्र की मित्रता के कारण.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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‘मिशन: इम्पॉसिबल 8′ में टॉम क्रूज के एक्शन ने उड़ाए होश, लोग बोले- ‘ब्लॉकबस्टर’

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Mission Impossible 8 Twitter Review:  ‘मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग’ फाइनली 17 मई यानी आज भारत में बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है. फैंस इस फिल्म को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं  क्योंकि यह आखिरी बार है जब टॉम क्रूज को लीजेंडरी एथन हंट के रूप में देखा जा रहा है. दशकों के रोमांचकारी एक्शन, जबरदस्त स्टंट और दिल दहला देने वाले मिशनों के बाद, जासूसी-एक्शन गाथा अपने फाइनल चैप्टर तक गई हैं. चलिए यहां जानते हैं भारत में लोगों ने फिल्म को लेकर कैसा रिव्यू शेयर किया है.

लोगों को कैसी लगी ‘मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग’
क्रिस्टोफर मैकक्वेरी द्वारा निर्देशित, पॉपुलर फ्रैंचाइज़ी की आठवीं किस्त भारत में समय से पहले रिलीज हो ही है. य़े फिल्म यूएस सिनेमाघरों में 23 मई को रिलीज हो रही है. वहीं अब जब  ‘मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग’ ने भारत में दस्तक दे ही दी है सोशल मीडिया पर इसके रिव्यू की बाढ़ आ गई है. लोगों ने फ्रेंचाइजी की इस आखिरी फिल्म की खूब तारीफ की है तो कई टॉम क्रूज की एक्टिंग के कायल हो गए हैं.

बेहतरीन एक्शन फिल्मों में से एक
एक यूजर ने लिखा, “ मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग अब तक की सबसे बेहतरीन एक्शन फिल्मों में से एक है. टेंशन, स्टंट, निर्देशन, संपादन, सब कुछ परफेक्शन के बॉर्डर पर है. टॉम क्रूज़ ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है, और प्रोडक्शन वैल्यू वाकई कमाल की है. अगर आपको लगता है कि आपने इस फ्रैंचाइज़ में सब कुछ देख लिया है, तो ये आपको इम्पॉसिबल का असल मतलब बताएगा. माइंड ब्लोइंग एक्सपीरियंस.”

 

फ्रेंचाइजी का संतोषजनक एंड
एक अन्य ने लिखा, “ मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग कुल मिलाकर फ्रैंचाइज़ी का एक संतोषजनक अंत है (अगर यह खत्म होता है) जिसमें एथन हंट के साथ हुई कई घटनाओं और उनके आदर्श वाक्य की यादें हैं।. टॉम क्रूज़ अभी भी बहुत ज़्यादा और उतनी ही तेज़ी से दौड़ते हैं जितनी 30 साल पहले दौड़ते थे ! अभी भी बहुत सारे अमेजिंग एक्शन सीक्वेंस हैं. मुझे तीसरा एक्ट सबसे ज़्यादा पसंद है लेकिन वहाँ तक पहुँचने में काफ़ी समय लगा, आपको पेशंस रखना होगा, चाहे आपको प्लॉट पसंद हो या न हो, आप अभी भी इस फ्रैंचाइज़ी के लिए टॉम क्रूज़ ने जो कुछ भी किया है, उसकी तारीफ करेंगे.”

 



मिशन इम्पॉसिबल 8 आई बहुत पसंद
एक और ने लिखा, “ मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग बहुत पसंद आई. शानदार सीरीज का एक बेहतरीन अंत है.”

 

कई और लोगों ने भी फिल्म की तारीफ की है

 

कान्स में भव्य प्रीमियर
सिनेमाघरों में आने से पहले, ‘मिशन: इम्पॉसिबल – द फाइनल रेकनिंग’ का 78वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ. रेड कार्पेट पर पूरी कास्ट ने लोगों का ध्यान खींचा और दर्शकों ने टॉम क्रूज के लिए पूरे पांच मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाईं, रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रूज इवेंट के दौरान भावुक हो गए और फैंस फ्रेंचाइजी के लास्ट चैप्टर के महत्व को महसूस किए बिना नहीं रह सके. 

 

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एडम गिलक्रिस्ट ने चुनी IPL की ऑल टाइम इलेवन, विराट और गेल को नहीं दी जगह; एमएस धोनी कप्तान

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Adam Gilchrist IPL all time XI: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज और आईपीएल में डेक्कन चार्जर्स हैदराबाद के कप्तान रहे एडम गिलक्रिस्ट ने इंडियन प्रीमियर लीग की ऑल टाइम इलेवन चुनी है. गिलक्रिस्ट ने एमएस धोनी को इस लीग का कप्तान बनाया है. धोनी पहले सीजन से अब तक आईपीएल खेल रहे हैं. वह पांच बार अपनी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल का खिताब जिता चुके हैं. 

आईपीएल विजेता कप्तान एडम गिलक्रिस्ट ने लीग में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले विराट कोहली को अपनी ऑल टाइम इलेवन में नहीं रखा है. उन्होंने वेस्टइंडीज के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल को भी टीम में जगह नहीं दी है. विराट और गेल के नाम आईपीएल में कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं. 

इन दिग्गजों को गिलक्रिस्ट ने ऑल टाइम आईपीएल इलेवन में दी जगह 

गिलक्रिस्ट ने अपनी ऑल टाइम इलेवन में डेविड वॉर्नर और रोहित शर्मा को ओपनिंग के तौर पर रखा है. इसके बाद मिस्टर आईपीएल सुरेश रैन को चुना है. फिर सूर्यकुमार यादव हैं. वेस्टइंडीज के कीरन पोलार्ड और सुनील नरेन मिडिल ऑर्डर में हैं. महेंद्र सिंह धोनी को गिलक्रिस्ट ने इस टीम का कप्तान चुना है. 

गिलक्रिस्ट ने ऑल टाइम इलेवन में दो स्पिनर और तीन तेज गेंदबाज को रखा है. स्पिनर के तौर पर रवींद्र जडेजा और सुनील नरेन को रखा है. दोनों शानदार स्पिनर के साथ-साथ बेहतरीन बल्लेबाज भी हैं. तेज गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, लसिथ मलिंगा और भुवनेश्वर कुमार हैं. आठ नंबर तक इस टीम में बैटिंग हैं. 

हैरानी की बात यह है कि एडम गिलक्रिस्ट ने इस लीग में अफगानिस्तान के लेग स्पिनर राशिद खान को भी नहीं रखा है. राशिद लंबे समय से लीग के बेस्ट गेंदबाज रहे हैं. किंग कोहली को भी गिलक्रिस्ट ने इस ऑल टाइम इलेवन में नहीं रखा है. गिलक्रिस्ट ने इस टीम में एबी डिविलियर्स को भी शामिल नहीं किया है.

एडम गिलक्रिस्ट की ऑल टाइम आईपीएल इलेवन- डेविड वॉर्नर, रोहित शर्मा, सुरेश रैना, सूर्यकुमार यादव, कीरन पोलार्ड, एमएस धोनी (कप्तान), सुनील नरेन, रवींद्र जडेजा, जसप्रीत बुमराह, लसिथ मलिंगा और भुवनेश्वर कुमार.  

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ग्रामीण मांग ने शहरी बाजारों को पछाड़ा, कमाई के मामले में बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रहा पतंजलि

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Patanjali Business News: पतंजलि फूड्स लिमिटेड (पीएफएल) ने 31 मार्च 2025 को समाप्त तिमाही और वित्तीय वर्ष के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय परिणामों की घोषणा कर दी है. कंपनी ने इस तिमाही में अब तक का सबसे ज्यादा परिचालन राजस्व 9,692.21 करोड़ रुपये और 568.88 करोड़ रुपये का ईबीआईटीडीए हासिल किया, जिसमें परिचालन मार्जिन 5.87% रहा. यह प्रदर्शन कंपनी की मजबूत रणनीति और बाजार में बढ़ती मांग को दर्शाता है.

ग्रामीण भारत में उपभोक्ता मांग शहरी क्षेत्रों की तुलना में लगातार पांचवीं तिमाही में तेज रही. ग्रामीण मांग शहरी मांग की तुलना में चार गुना तेजी से बढ़ी, हालांकि तिमाही आधार पर इसमें मामूली कमी देखी गई. कंपनी ने होम एंड पर्सनल केयर (एचपीसी) खंड को नवंबर 2024 में पूरी तरह से एकीकृत किया, जो अब 15.74% के प्रभावशाली ईबीआईटीडीए मार्जिन के साथ प्रदर्शन कर रहा है. यह खंड पतंजलि के समकालीन, शुद्ध एफएमसीजी कंपनी में परिवर्तन की रणनीति के अनुरूप है.

साल-दर-साल बढ़ रहा कंपनी का सकल लाभ

कंपनी का सकल लाभ साल-दर-साल आधार पर 1,206.92 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,656.39 करोड़ रुपये हो गया, जो अनुकूल मूल्य निर्धारण वातावरण के कारण 17.00% के सकल लाभ मार्जिन के साथ 254 आधार अंकों की वृद्धि दर्शाता है. कर पश्चात लाभ (पीएटी) में 73.78% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई और मार्जिन 121 आधार अंकों की बढ़ोतरी के साथ 3.68% रहा.

पतंजलि ने अपनी वैश्विक पहुंच को मजबूत करते हुए 29 देशों में 73.44 करोड़ रुपये का निर्यात राजस्व अर्जित किया. न्यूट्रास्यूटिकल्स खंड ने 19.42 करोड़ रुपये की तिमाही बिक्री के साथ उपभोक्ता स्वीकार्यता में वृद्धि दर्ज की, जो मजबूत विज्ञापन और उत्पाद पुनर्स्थापन पहलों का परिणाम है. कंपनी ने अपने Q4FY25 राजस्व का 3.36% विज्ञापन और बिक्री संवर्धन पर खर्च किया, जो ब्रांड निर्माण में इसके आक्रामक दृष्टिकोण को दर्शाता है.

पतंजलि ने उभरते चैनलों में मजबूत किया वितरण नेटवर्क

उद्योग में सामान्य व्यापार से आधुनिक व्यापार, ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स जैसे उभरते चैनलों की ओर मात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया, जो सुविधा कारक के कारण है. पतंजलि ने लक्षित पहलों और चैनल भागीदारों के साथ गहरे जुड़ाव के माध्यम से इन उभरते चैनलों में अपनी वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं.

कंपनी ने पवन टरबाइन बिजली उत्पादन खंड से 5.53 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया और अपने भगवानपुर, उत्तराखंड स्थित बिस्किट विनिर्माण संयंत्र में सौर ऊर्जा का उपयोग जारी रखा. मुद्रास्फीति में कमी के बावजूद, परिवारों ने सतर्कता बरतते हुए बचत को प्राथमिकता दी, जिसके परिणामस्वरूप उपभोक्ता मांग में कमी देखी गई.

गुणवत्ता, नवाचार और स्थिरता पर है हमारा ध्यान- पतंजलि

पतंजलि फूड्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने कहा, “हमारा ध्यान गुणवत्ता, नवाचार और स्थिरता पर है. हमारी रणनीतिक पहलें, विशेष रूप से एचपीसी और न्यूट्रास्यूटिकल्स खंडों में, हमें एक अग्रणी एफएमसीजी कंपनी के रूप में स्थापित कर रही हैं.”

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गाजा के 10 लाख लोगों को लीबिया में बसाया जाएगा! डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा प्लान

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Donald Trump Plan For Palestine: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीन के लिए बड़ी योजना तैयार की है, जिस पर उनका प्रशासन तेजी से काम कर रहा है. एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन गाजा पट्टी के करीब 10 लाख लोगों को लीबिया में स्थायी रूप से पुनर्वास की योजना पर विचार कर रहे हैं. 

रिपोर्ट में इस योजना की जानकारी रखने वाले पांच अलग-अलग सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को इतनी गंभीरता से लिया कि इसे लीबिया के नेतृत्व के सामने भी रखा गया. इसमें दो मौजूदा अधिकारी और एक पूर्व अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे, जिनके अनुसार यह बातचीत कूटनीतिक स्तर पर हो चुकी है.

अरबों डॉलर की पेशकश और राजनीतिक सौदेबाजी 

इस योजना के तहत अगर लीबिया गाजा के फिलिस्तीनियों को बसाने को तैयार होता है तो अमेरिका उसे अरबों डॉलर की आर्थिक सहायता प्रदान करेगा. यह वह फंड है, जिसे वाशिंगटन ने एक दशक पहले रोक दिया था और इसे अब दोबारा जारी करने की पेशकश की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव न केवल मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से अत्यंत विवादास्पद होता, बल्कि इससे मध्य-पूर्व में स्थायित्व की उम्मीदों पर भी बुरा असर पड़ सकता था क्योंकि गाजा के लोगों को उनके मूल स्थान से हटा कर किसी तीसरे देश में बसाने का विचार संवेदनशील राजनीतिक और नैतिक सवाल खड़े करता है.

लीबिया का रुख और कूटनीतिक दुविधा 

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि लीबिया ने इस प्रस्ताव पर कोई ठोस सहमति दी थी या नहीं, लेकिन यह तय है कि इस योजना को लेकर बातचीत गंभीर स्तर तक पहुंच चुकी थी. एक ओर जहां लीबिया आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है, वहीं ऐसे भारी संख्या में लोगों को बसाना देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता था. यह भी महत्वपूर्ण है कि लीबिया की जनता और क्षेत्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया इस तरह के किसी प्रस्ताव पर नकारात्मक हो सकती थी. कई विशेषज्ञों का मानना है कि फिलिस्तीनियों की जबरन बसावट न तो न्यायसंगत है और न ही यह कूटनीति का उदाहरण है.

ट्रंप की फिलिस्तीन नीति पर एक और विवाद 

ट्रंप प्रशासन पहले भी अपनी इजरायल-पक्षीय नीति और फिलिस्तीनी मुद्दों पर आक्रामक रुख के कारण विवादों में रहा है. यरुशलम को इज़राइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने और वेस्ट बैंक की बस्तियों पर नरम रुख अपनाने जैसे निर्णयों के कारण उन्हें अरब जगत में काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था. गाजा विस्थापन की यह गुप्त योजना अगर क्रियान्वयन में लाई जाती है तो यह न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का उल्लंघन होगा, बल्कि इससे अमेरिका की वैश्विक छवि और मध्य पूर्व में उसकी साख भी प्रभावित होता.

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काम में AI का सहारा? साथियों को लग सकता आप हैं ‘कामचोर’! स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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AI in Work: ऑफिस में ChatGPT, Gemini या Copilot जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं? तो ज़रा संभल जाइए, एक नई रिसर्च के मुताबिक, आपके सहकर्मी आपको मेहनती और होशियार नहीं बल्कि ‘आलसी’ और ‘अकुशल’ समझ सकते हैं. ये स्टडी अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी द्वारा फंड की गई और Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित हुई है. इसमें यह बताया गया है कि भले ही AI से काम की रफ्तार और प्रोडक्शन बढ़ती हो लेकिन ऑफिस में इसका एक सामाजिक नुक़सान भी है जो लोगों की नज़रों में आपकी छवि बिगड़ सकती है.

रिसर्च में हुआ खुलासा

जानकारी के मुताबिक, इस रिसर्च में 4,400 प्रतिभागियों पर चार अलग-अलग ऑनलाइन प्रयोग किए गए. पहले एक्सपेरिमेंट में, लोगों से पूछा गया कि अगर वे प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए AI का सहारा लें तो उनके सहयोगी उन्हें कैसे देखेंगे. ज़्यादातर लोगों ने माना कि उन्हें ‘कामचोर’, ‘कम मेहनती’, और ‘कम काबिल’ समझा जाएगा. कुछ ने यहां तक कहा कि ऐसे कर्मचारी आसानी से बदले जा सकते हैं.

दूसरे टेस्ट में प्रतिभागियों से कहा गया कि वे उन सहकर्मियों का वर्णन करें जो AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं. जवाबों में ये लोग ‘निर्भर’, ‘कम आत्मविश्वासी’ और ‘असहाय’ कहे गए.

तीसरे चरण में, लोगों को मैनेजर बनाकर एक सिचुएशन दी गई जहां उन्हें नए कर्मचारियों को हायर करना था. जिन्होंने बताया कि वे AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, उनकी भर्ती की संभावना कम थी. लेकिन जब मैनेजर खुद AI यूज़र हो, तो फर्क नहीं पड़ा कि उम्मीदवार AI का इस्तेमाल करता है या नहीं.

चौथे और अंतिम एक्सपेरिमेंट में यह देखा गया कि अगर AI टूल काम के लिए उपयुक्त है और प्रदर्शन पर सकारात्मक असर डालता है तो नकारात्मक सोच लगभग गायब हो जाती है.

क्या एआई का इस्तेमाल है जरूरी

ये स्टडी बताती है कि ऑफिस में AI का प्रयोग भले ही आपके काम को आसान बनाए लेकिन बाकी लोग आपको कैसे देखते हैं, इससे आपके करियर पर असर पड़ सकता है. जब तक समाज की सोच नहीं बदलती, तब तक AI का खुले तौर पर इस्तेमाल करना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है. हालांकि आज की बदलती दुनिया को देखते हुए एआई का इस्तेमाल लोगों की जरूरत बन चुका है.

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