‘ये तो क्लियर कट भारत की जीत है’, दुनिया के सबसे बड़े मिलिट्री एक्सपर्ट ने पाक को दिखाया आईना

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ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान के खोखले और झूठे दावों पर ऑस्ट्रेलियन मिलिट्री एक्सपर्ट टॉम कूपर ने शहबाज शरीफ सरकार को आईना दिखाया है. उन्होंने 3-4 दिन चली कार्रवाई को न सिर्फ भारत की जीत बताया, बल्कि यह भी कहा कि पाकिस्तान का सीजफायर के लिए गुहार लगाना कोई हैरानी वाली बात नहीं है क्योंकि उसको इतना नुकसान हो चुका था कि वह बुरी तरह घबरा गया.

टॉम कूपर दुनिया के सबसे सम्मानित युद्ध इतिहासकारों में से हैं. वह विश्लेषक, लेखक और मध्य पूर्व से दक्षिण एशिया तक के हवाई युद्धों के एक्सपर्ट हैं. 6 और 7 मई की दरमियानी रात को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को बर्बाद किए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों के सैन्य ठिकानों पर हमले की नाकाम कोशिश की. भारत ने भी उसकी इस कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया. एक हफ्ते चले इस घटनाक्रम पर टॉम कूपर ने एक ब्लॉग लिखा है.

टॉम कूपर ने बता दिया कि भारतीय सेना के सामने पाक आर्मी टिक नहीं सकी. टॉम कूपर ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर जिस तरह तबाही मचाई, वो पाक की हार को दिखाता है. इसी वजह से वह सीजफायर के लिए अमेरिका के पास गुहार लगाने पहुंच गया था. उन्होंने भारत के अभियान को क्लियर कट जीत बताया है. 

टॉम कूपर ने एक ब्लॉग में लिखा, ‘साफ-साफ कहूं जैसा हमेशा करता हूं. जब एक पक्ष दूसरे के परमाणु हथियार भंडारण पर बम बरसा रहा हो और दूसरा कुछ भी करने की हालत में न हो तो मेरे हिसाब से यह साफ-साफ जीत है. इस्लामाबाद की तरफ से सीजफायर के लिए गुहार लगाना, कोई हैरानी की बात नहीं है.’

टॉम कूपर ने साफ-साफ लिखा कि भारत इस कार्रवाई में पाकिस्तान से कहीं ऊपर था और भारत की सीधे तौर पर जीत हुई. टॉम कूपर के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर में कम से कम पांच मुख्य आतंकी मारे गए और 140 अन्य आतंकवादियों का सफाया हुआ. पाकिस्तान की सरकार ने चुप्पी साध ली, लेकिन आईएसआई ने इन आतंकियों को शहीद बताकर पाक सेना के अफसरों के साथ राजकीय सम्मान दिया, जो ये बताने के लिए काफी है कि आतंकियों का सेना के साथ सीधा संबंध है. 

टॉम कूपर ने लिखा कि भारत की पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने की कार्रवाई पूरी तरह सफल रही और पाकिस्तान फेल हो गया. उन्होंने कहा कि भारत ने न सिर्फ आतंकी कैंप्स पर हमला किया, बल्कि पाकिस्तान के हमलों को भी कुशलता से रोका. पाकिस्तान के हमले भारत के एयर डिफेंस सिस्टम एस-400, बराक, आकाश, स्पाइडर और बोफोर्स का पार नहीं कर पाए. 

टॉम कूपर ने इंडस वॉटर ट्रीटी सस्पेंशन पर भी लिखा है. उन्होंने लिखा कि भारत ने पानी रोक दिया और पाकिस्तान कुछ नहीं कर सका, जबकि ये उसके लिए रेड लाइन थी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कुछ नहीं सीखा और वह यह भी नहीं समझा कि भारत ने उसकी धमकियों को गंभीरता से लेना बंद कर दिया है. इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तान के रावलपिंडी और कराची जैसे अहम शहरों में लगे एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 को भी बर्बाद कर दिया और आखिर में पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया और उसको खुद भारत से बात करके सीजफायर की बात करनी पड़ी.

टॉम कूपर की रिपोर्टिंग ने पाकिस्तान के दावों और जमीनी हकीकत के अंतर को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है.

 

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CBSE 12वीं का रिजल्ट जारी, यहां जानें कॉपी रीचेकिंग प्रोसेस सहित अन्य डिटेल्स

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 13 मई को 12वीं कक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं. इस बार कुल 88.39% छात्र पास हुए हैं, जो कि पिछले साल की तुलना में थोड़ा बेहतर है. रिजल्ट में इस बार भी लड़कियों ने बाजी मारी है और ट्रांसजेंडर छात्रों ने 100% सफलता हासिल की है.

हर साल कई ऐसे छात्र होते हैं जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते और उन्हें लगता है कि उनकी कॉपियों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ है. ऐसे छात्रों के लिए CBSE ने इस बार 2025 से एक नया और पारदर्शी रीचेकिंग सिस्टम लागू किया है.

अब छात्र पहले अपनी कॉपी की स्कैन की गई फोटो कॉपी प्राप्त कर सकते हैं. इसके बाद वे यह तय कर सकते हैं कि उन्हें मार्क्स वेरिफिकेशन या रीएवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन करना है या नहीं. इससे छात्र पहले खुद अपनी उत्तर पुस्तिका को देखकर जान पाएंगे कि कहां गलती हुई और उसके आधार पर सही फैसला ले सकेंगे.

कौन कर सकता है आवेदन और कैसे?

CBSE कक्षा 12 के वे सभी छात्र जो वर्ष 2025 की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए हैं, इस प्रक्रिया का लाभ ले सकते हैं. इसके लिए छात्रों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा.

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क्या है प्रक्रिया का अनुमानित टाइमलाइन?

उत्तर पुस्तिका की फोटो कॉपी प्राप्त करने में 7 दिन तक का समय लग सकता है.
मार्क्स वेरिफिकेशन और रीएवैल्यूएशन की प्रक्रिया 15 दिन तक चल सकती है.

छात्र अब क्या करें?

छात्र cbseresults.nic.in पर जाकर अपनी मार्कशीट डाउनलोड करें. अगर संतुष्ट नहीं हैं तो उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करें. फिर जरूरत के अनुसार रीचेकिंग या रीएवैल्यूएशन के लिए आगे बढ़ें.

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GB रोड में नाबालिग बच्चियों की डिमांड, ये इंजेक्शन देकर किया जाता है उम्र से पहले जवान

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दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो एक पॉडकास्ट का है, जिसमें जीबी रोड की सच्चाई को लेकर सवाल किया गया है. पॉडकास्ट में सोशल वर्कर अतुल शर्मा बताती हैं कि उन्होंने कई ऐसे किस्से देखे हैं जहां लड़कियों को रंजिश में उठा लिया गया और बहुत कम उम्र में इस धंधे में धकेल दिया गया. लड़कियों को अपनी जिस्म की नुमाइश के लिए खिड़कियों पर खड़ा कर दिया जाता है और उतनी ही हाइट पर उन्हें खड़ा किया जाता है जितने में उनका फेस और छाती नजर आती रहे. क्योंकि कस्टमर यही सब देखकर आते हैं.

अतुल शर्मा ने ये भी बताया कि कैसे नाबालिग बच्चियों के अंगों को बड़ा करने और उन्हें जवान दिखाने के लिए उन्हें ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) नाम का इंजेक्शन दिया जाता है. इतना ही नहीं, एक छोटी उम्र की लड़की को एक दिन में 15 से 20 कस्टमर के साथ हमबिस्तर होना पड़ता है. खूबसूरत लड़कियों और खुशबू से महकती लड़कियों को ऐसे कस्टमर के हवाले कर दिया जाता है जिसकी शक्ल देखने का मन भी नहीं होता, यहां तक की उन कस्टमर की शक्ल देखने के बाद कोई उनके हाथ का पानी तक नहीं पिएगा.

जब तक प्रेग्नेंट ना हो तब तक नहीं करने दिया जाता कंडोम का इस्तेमाल

अतुल शर्मा ने जीबी रोड का एक काला सच ये भी बताया कि शुरू में लड़कियों को कंडोम इस्तेमाल की इजाजत उनकी मालकिन देती ही नहीं है, क्योंकि इससे भी वो पैसा कमाती है. लड़की जब प्रेग्नेंट हो जाती है तो बच्चा पैदा कराकर उससे छीन लिया जाता है और हर बार अपने बच्चे से मिलने के लिए उन्हें 200 रुपये चुकाने होते हैं. आगे वो बोलीं कि नाबालिग बच्चियों की डिमांड बाजार में सबसे ज्यादा है. कई लड़कियों ने तो केवल इस काम की वजह से उनकी आंखों के सामने दम तोड़ दिया है. आपको बता दें कि अतुल शर्मा एक सोशल वर्कर हैं और पिछले 30 सालों से सेक्स वर्कर के अधिकारों के लिए काम कर रही हैं. इसके अलावा उन्होंने कई सारी सेक्स वर्कर को रेस्क्यू भी किया है. अतुल शर्मा हाल ही में True Talk के पॉडकास्ट में पहुंची थीं.

किस कदर गंध में खाना खाती हैं सेक्स वर्कर

अतुल शर्मा ने बताया कि जीबी रोड के रेडलाइट एरिया में सेक्स वर्कर इतनी गंध में खाना खाती हैं कि वहां लोग थूक कर चले जाते हैं तो कोई कंडोम फेंक कर चला जाता है. इतना ही नहीं, खाना खाती सेक्स वर्कर के पास कोई भी शख्स पेशाब भी कर जाता है. ये सच्चाई जानकर आपके भी भी रोंगटे खड़े हो गए होंगे. लेकिन जीबी रोड की इस काली सच्चाई का रथ यहीं नहीं थमता. इससे भी कई सारे घिनोने काम हैं जो सेक्स वर्कर्स से कराए जाते हैं.

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यूजर्स रह गए हैरान

वीडियो को @askshivanisahu नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…क्या वजह है कि सरकार जीबी रोड के इन रेडलाइट एरिया को बंद नहीं करवा पा रही है. एक और यूजर ने लिखा…आप बता रही हैं और कानों से खून मेरे आ रहा है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…सभी लड़कियों के साथ नहीं होता है, ज्यादातर लड़कियां अपनी मर्जी से आती हैं. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…इस काम में ज्यादातर नेपाल और बांग्लादेश की लड़कियां होती हैं.

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बच्चों के लिए बेहद खतरनाक होती है हीमोफीलिया बीमारी, ये होते हैं लक्षण

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<p style="text-align: justify;">हीमोफीलिया बेहद गंभीर और दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है. इस बीमारी में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है. गौर करने वाली बात यह है कि बच्चों के लिए यह बीमारी काफी खतरनाक हो सकती है, क्योंकि उनके शरीर में चोट लगने, खून बहने और इंटरनल ब्लीडिंग को रोकने की प्राकृतिक क्षमता कम होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में करीब चार लाख लोग हीमोफीलिया से पीड़ित हैं. वहीं, भारत में हर साल 20,000 से ज्यादा मामले सामने आते हैं. यह बीमारी ज्यादातर मामलों में लड़कों में देखी जाती है, क्योंकि इसका सीधा कनेक्शन X क्रोमोसोम से है. आइए जानते हैं कि हीमोफीलिया क्या है? इसके लक्षण कैसे होते हैं और बच्चों के लिए यह क्यों खतरनाक है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कितनी खतरनाक बीमारी है हीमोफीलिया?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हीमोफीलिया एक जेनेटिक बीमारी है. इस रोग की चपेट में आने पर शरीर में खून का थक्का बनने की प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती है. आमतौर पर जब हमें चोट लगती है तो खून में मौजूद प्रोटीन (क्लॉटिंग फैक्टर्स) ब्लीडिंग को रोकने के लिए थक्का बनाते हैं, लेकिन हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों में क्लॉटिंग फैक्टर्स (खासकर फैक्टर VIII या IX) की कमी होती है. इसकी वजह से खून बहना बंद नहीं होता है. यह बीमारी दो तरह की होती है. पहली हीमोफीलिया A, जो फैक्टर VIII की कमी के कारण होती है. यह हीमोफीलिया होने की सबसे आम वजह है. दूसरी हीमोफीलिया B, जो फैक्टर IX की कमी के कारण होती है. इसे क्रिसमस डिजीज भी कहते हैं. यह बीमारी ज्यादातर लड़कों में होती है, क्योंकि यह X क्रोमोसोम से जुड़ी होती है. इस बीमारी के लिए लड़कियां ज्यादातर कैरियर होती हैं, लेकिन उनमें लक्षण हल्के हो सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बच्चों के लिए हीमोफीलिया कितनी खतरनाक?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दौड़ना-खेलना और गिरना बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होता है. इस दौरान बच्चों को चोटें भी लगती हैं. अगर बच्चा हीमोफीलिया से पीड़ित है तो उसके लिए छोटी-सी चोट भी बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. हीमोफीलिया से जूझ रहे बच्चों के जोड़ों जैसे घुटने और कोहनी के अलावा मांसपेशियों में इंटरनल ब्लीडिंग हो सकती है. वहीं, सिर में चोट लगने पर दिमाग में ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है. इससे बच्चों को बेहोशी, दौरे जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा कई मामलों में मौत भी हो जाती है. हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चों के लिए छोटी-सी खरोंच, दांत निकलना या नाक से खून बहना भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ब्लीडिंग रोकने में परेशानी होती है. साथ ही, बार-बार ब्लीडिंग और इलाज के लिए इंजेक्शन लगवाने से इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ऐसे होते हैं हीमोफीलिया के लक्षण</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हीमोफीलिया के लक्षण बच्चों में जन्म के कुछ समय बाद या एक से दो साल की उम्र में नजर आने लगते हैं. अगर छोटी-सी चोट के बाद भी बच्चे की ब्लीडिंग नहीं रुक रही है तो यह हीमोफीलिया का लक्षण हो सकता है. इस बीमारी में हल्के दबाव या टक्कर से भी स्किन पर बड़े नीले-बैंगनी निशान (ब्रूइज) बन जाते हैं. जोड़ों में इंटरनल ब्लीडिंग की वजह से बार-बार सूजन आना भी इसी बीमारी का लक्षण है. हीमोफीलिया से जूझ रहे बच्चों में नाक से खून बहना बेहद आम समस्या है. इस बीमारी में मसूड़ों से खून बहने लगता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कैसे कराएं इस खतरनाक बीमारी का इलाज?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हीमोफीलिया जेनेटिक बीमारी है. अगर इस बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है तो समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए. वहीं, ब्लड का क्लॉटिंग फैक्टर टेस्ट (फैक्टर VIII और IX का स्तर) कराने से बीमारी का पता लगाया जा सकता है. आमतौर पर हीमोफीलिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही मैनेजमेंट से बच्चों को सामान्य जीवन जीने में मदद की जा सकती है. इसके लिए सबसे पहले रिप्लेसमेंट थैरेपी होती है, जिसमें कमी वाले क्लॉटिंग फैक्टर (VIII या IX) को इंजेक्शन की मदद से शरीर में डाला जाता है. जोड़ों में होने वाली ब्लीडिंग को रोकने के लिए फिजियोथेरेपी जरूरी होती है. यह जोड़ों को लचीला रखती है और दर्द से राहत दिलाती है. वैज्ञानिक जीन थैरेपी पर काम कर रहे हैं, जिसमें खराब जीन को ठीक करके हीमोफीलिया का इलाज किया जा सकेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" तो खूब खाई होगी, लेकिन क्या इसके अंडे खाए हैं? जान लीजिए ये कितने फायदेमंद</a></strong></p>
<p><strong>Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.</strong></p>

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AI की वजह से नौकरी गई, ChatGPT के चलते Chegg ने 248 कर्मचारियों को निकाला

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अब पढ़ाई के लिए बच्चों को न तो भारी-भरकम किताबों की जरूरत है और न ही घंटों ट्यूटर के पास बैठना पड़ता है. बस मोबाइल उठाइए, ChatGPT जैसे AI टूल से पूछिए और तुरंत जवाब मिल जाता है. इसी बदलाव का सबसे बड़ा असर अब नौकरी पर दिखने लगा है.

अमेरिका की एजुकेशन कंपनी Chegg ने हाल ही में 248 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. ये कंपनी ऑनलाइन स्टडी हेल्प, ट्यूटोरियल्स और टेक्स्टबुक रेंटल जैसी सुविधाएं देती है, लेकिन अब बच्चे इन सब के बजाय AI टूल्स का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे Chegg की जरूरत कम हो गई है.

कंपनी के मुताबिक, ये छंटनी उनके कुल कर्मचारियों का करीब 22% हिस्सा है. Chegg का कहना है कि वो अब अपने खर्चों को घटा रही है और कंपनी की दिशा में बदलाव ला रही है, ताकि वो इस नए दौर में खुद को टिकाए रख सके.

क्यों घट रहा है Chegg का काम?

2024 की पहली तिमाही में उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या 31% गिर गई है और अब केवल 3.2 मिलियन छात्र ही उससे जुड़े हैं. इतना ही नहीं, कमाई में भी 30% की गिरावट आई है.

AI से मिल रहा फ्री और फास्ट जवाब

आजकल छात्र सवाल पूछने के लिए सीधे ChatGPT जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सेकेंडों में उत्तर देता है. वो भी बिल्कुल मुफ्त. इसके चलते Chegg जैसी कंपनियों की सेवाएं अब कम इस्तेमाल हो रही हैं.

इसके अलावा, Google जैसे प्लेटफॉर्म्स भी अब AI से बने डायरेक्ट जवाब सर्च रिजल्ट में दिखा रहे हैं, जिससे Chegg की वेबसाइट पर कम लोग पहुंच रहे हैं. इसी बात से परेशान होकर Chegg ने Google पर मुकदमा भी ठोक दिया है.

ऑफिस भी होंगे बंद, खर्चों में कटौती

Chegg ने ये भी कहा है कि वो 2024 के आखिर तक अमेरिका और कनाडा में अपने दफ्तर बंद कर देगा. साथ ही, कंपनी मार्केटिंग, प्रोडक्ट डेवेलपमेंट और बाकी विभागों में भी खर्च कम करेगी.

इससे कंपनी को 2025 में करीब $45-$55 मिलियन और 2026 तक $110 मिलियन तक की बचत होने की उम्मीद है. हालांकि, छंटनी और बदलाव की वजह से कंपनी को $34-$38 मिलियन तक का खर्च भी उठाना पड़ेगा.

क्या AI ले जाएगा और नौकरियां?

Chegg के साथ जो हुआ, वो सिर्फ एक शुरुआत है. टेक्नोलॉजी जितनी तेज़ी से बदल रही है, उतनी ही तेजी से कंपनियों को खुद को बदलना पड़ रहा है, और जो नहीं बदल पाएंगे, उन्हें शायद ऐसे ही कर्मचारियों को हटाना पड़ेगा.

शिक्षा के क्षेत्र में AI का बढ़ता इस्तेमाल यह साफ दिखा रहा है कि आने वाले समय में नौकरियों का तरीका, पढ़ाई का तरीका और कमाई का तरीका- सब कुछ बदलने वाला है.

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IPL 2025 के बचे हुए मैचों में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी खेलेंगे या नहीं? आ गया अपडेट

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IPL 2025 Australian Players Update: आईपीएल 2025 भारत-पाकिस्तान के तनाव को देखते हुए रोक दिया गया था. इसके बाद कई विदेशी खिलाड़ी वापस अपने देश लौट गए थे. अब 17 मई से दोबारा आईपीएल की शुरुआत होगी. इस बीच खबर आई कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2025 के बचे हुए मैचों में नहीं खेलेंगे. खैर, अब इस पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बड़ा अपडेट दिया है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले से आईपीएल टीमों को बड़ी राहत मिलेगी.  

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मंगलवार को कहा कि अगर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल खेलने जाना चाहते हैं तो वे जा सकते हैं. बोर्ड की तरफ से उन्हें रोका नहीं जाएगा. यह खिलाड़ी के ऊपर है कि वह जाना चाहता है या नहीं. बता दें कि ऑस्ट्रेलिया को जून में ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलना है. ऐसे में इस खिताबी मुकाबले की तैयारी भी करनी है. इसी कारण कंगारू खिलाड़ियों को आईपीएल के बचे हुए मैच खेलना मुश्किल बताया जा रहा था. 

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि आईपीएल में लौटने के खिलाड़ियों के व्यक्तिगत फैसले का वो सम्मान करेगा. बीसीसीआई ने सोमवार को फैसला किया कि आईपीएल का यह सीजन 17 मई से छह वेन्यू पर फिर से शुरू होगा. लीग का फाइनल 3 जून को खेला जाएगा. अभी प्लेऑफ के मैचों का वेन्यू घोषित नहीं किया गया है. 

इससे ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट क्रिकेटरों के सामने दुविधा पैदा हो गई है, क्योंकि 11 जून से दोनों टीमों के बीच लॉडर्स पर WTC फाइनल खेला जाना है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक बयान में कहा, आईपीएल के शनिवार से फिर शुरू होने के ऐलान के बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने तय किया है कि इसके लिये भारत लौटने या नहीं लौटने के खिलाड़ियों के व्यक्तिगत फैसले का वो सम्मान करेगा. इसमें आगे कहा गया, हम सुरक्षा इंतजामात को लेकर बीसीसीआई और आस्ट्रेलियाई सरकार के संपर्क में हैं.

आईपीएल 2025 का फाइल WTC फाइनल से सिर्फ 8 दिन पहले खेला जाएगा. ऐसा भी हो सकता है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बचे हुए लीग मैच खेलने के लिए भारत आएं और प्लेऑफ के मैचों में हिस्सा न लें. फिलहाल अब सबकुछ खिलाड़ियों पर ही निर्भर है.

आईपीएल 2025 में मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड, ट्रेविस हेड, मिशेल मार्श और पैट कमिंस जैसे टेस्ट टीम के खिलाड़ी खेल रहे हैं. वहीं रिकी पोंटिंग और ब्रैड हैडिन जैसे दिग्गज कोचिंग स्टाफ में हैं.

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भाई OYO में गया था क्या?… होटल के WiFi से खुद ही कनेक्ट हो गया गर्लफ्रेंड का फोन, फिर हो गया

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Trending News: प्यार मुहब्बत और आशिकी. ये तब तक ही अपने उरूज पर रहती है जब तक कि कपल के राज एक दूसरे के सामने बाहर नहीं आते. धोखा देना किसी भी रिश्ते के लिए अच्छा नहीं है. चीन के एक शख्स का किस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसे आज तक आप केवल मीम में देखते आ रहे थे वो सच में हो गया. जी हां, शख्स ने अपनी गर्लफ्रेंड से इसलिए ब्रेकअप कर लिया क्योंकि उस लड़की का फोन होटल के वाईफाई से अपने आप कनेक्ट हो गया था. शख्स ने अपनी गर्लफ्रेंड पर धोखा देने का आरोप लगाया और उससे अपने रिश्ते को पीछे खींचते हुए अलग हो गया.

होटल के WiFi से अपने आप कनेक्ट हुआ गर्लफ्रेंड का फोन

महिला के अनुसार ये सारा ड्रामा तब शुरू हुआ जब वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ छु्ट्टियां मनाने एक होटल गई हुई थी. होटल में चेकइन के दौरान लड़की को अपनी फिजिकल आईडी खोजने में परेशानी हो रही थी. तभी डिजिटल आईडी के लिए उसने अपना फोन निकाला, तो उसमें होटल का वाईफाई अपने आप कनेक्ट हो गया था. इससे लड़के को शक हुआ कि लड़की इससे पहले भी होटल में रुकी है और उसके बाद सारा विवाद शुरू हो गया. महिला ने इस बात से बार बार इनकार किया कि वह इससे पहले कभी इस होटल में नहीं आई है, लेकिन वाईफाई वाले सवाल पर उसके पास जवाब नहीं था. लड़के ने इस काले सच को जानने के बाद लड़की से तुरंत रिश्ता खत्म कर दिया.

खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए महिला ने उठाया ये कदम

इन सब से परेशान होकर महिला ने घटना की जांच शुरू कर दी. उसे जल्द ही पता चला कि चोंगकिंग में एक अलग होटल, जहां वह काम करती थी और उसने होटल के समान ही वाईफाई नाम और पासवर्ड का इस्तेमाल किया था. उसके फोन ने संभवतः लॉगिन क्रेडेंशियल सेव किए थे और उसका फोन ऑटोमैटिक कनेक्ट हो गया था. इस बारे में उसने अपने एक्स से बात की लेकिन उसने कोई भी बात सुनने से मना कर दिया और उसे ब्लॉक कर दिया. इसके बाद महिला ने अपनी बेगुनाही साबित करने के अंतिम प्रयास में एक स्थानीय टीवी चैनल से संपर्क किया. वहां से एक रिपोर्टर उसके पूर्व कार्यस्थल पर गया और रिसेप्शन डेस्क पर वाईफाई से कनेक्ट हुआ. फिर, वे उस होटल में गए जहा घटना हुई थी और रिपोर्टर का फोन भी अपने आप कनेक्ट हो गया.

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यूजर्स ले रहे मजे

ऐसा करने से महिला की बेगुनाही साबित हो गई. हालांकि, उसने चैनल को बताया कि उसका अपने एक्स से सुलह करने का कोई इरादा नहीं है. सोशल मीडिया पर जैसे ही मामला वायरल हुआ वैसे ही यूजर्स ने रिश्ते के मजे लेने शुरू कर दिए. एक यूजर ने लिखा…भाई ओयो गया था क्या. एक और यूजर ने लिखा…अगर लड़की की बेगुनाही साबित हो गई है तो रिश्ते को फिर से जोड़ लेना चाहिए. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा….भाई भरोसा मत करना, ये बहुत चंट होती हैं, फिर से धोखा देगी.

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Shani Jayanti 2025: शनि जयंती का रहस्य जान उड़ जाएंगे होश, इन 5 राशियों को इस दिन करने चाहिए ये

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Shani Jayanti 2025: शनि जयंती को शनि  देव के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है. शनि जयंती को शनि अमावस्या के दिन मनाया जाता है. शनि देव भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र हैं. शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को पड़ती है.

शनि जयंती के दिन लोग शनि देव को प्रसन्न करने के लिए व्रत करते हैं और मंदिरों में शनि देव के दर्शन कर उन्हें तेल अर्पित करें और अन्य विभिन्न उपाय किए जाते हैं. जानते हैं साल 2025 में कब पड़ेगी शनि जयंती.

साल 2025 में शनि जयंती कब?

  • अमावस्या तिथि की शुरूआत 26 मई, 2025 को दोपहर 12.11 मिनट पर शुरू होगी.
  • अमावस्या तिथि का अंत 27 मई, 2025 सुबह 8.31 मिनट पर होगा.
  • शनि जयन्ती मंगलवार,27 मई 2025 को मनाई जाएगी.

शनि जयंती के दिन जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और शनि ढैय्या चल रही हो उन लोगों को शनि देव को प्रसन्न करने के लिए  खास उपाय करने चाहिए.

मेष राशि (Aries)-
मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. मेष राशि वाले शनि जयंती पक जल से भरा मटका जरूरतमंदों को दान में दें. साथ ही फलों का दान करें. ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं.

सिंह राशि (Leo)-
सिंह राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है. सिंह राशि वाले आर्थि परेशानियों से निजात पाने के लिए आम, खरबूजा, तरबूज का दान करें और साथ ही जल का पात्र दान में दें.

धनु राशि (Sagittarius)-
धनु राशि वालों पर शनि की ढैय्या चल रही है. धनु राशि वाले शनि जयंती के दिन काले जूते और छाते का दान करें. ऐसा करने से जीवन में चल रही मुश्किलें कम होती हैं.

कुंभ राशि (Aquarius)-
कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. कुंभ राशि वाले शनि जयंती के दिन नीले रंग के कपड़े, लोहा और काले तिल का दान करें.ऐसा करने से अटके हुए कार्यों में प्रगति प्राप्त हो सकती है.

मीन राशि (Pisces)-
मीन राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. इस दौरान मीन राशि वाले पीले रंग के फल, मिठाई और चावल का दान करें.इस दान से पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है.

Shadashtak Yoga: षडाष्टक योग मई में कब बन रहा है, शनि की राशि में राहु मंगल किसे परेशान करेंगे ?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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ट्रंप ने हजारों भारतीयों को निकाला! इस देश के लोगों को लगाया गले, लाने के लिए भेजा प्लेन

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Donald Trump Immigration Policy: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद की आप्रवासन नीति एक बार फिर विवादों के घेरे में है. एक ओर भारतीयों, ब्राजीलियन, बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों जैसे हजारों गैरकानूनी प्रवासियों को देश से निकाला गया, वहीं दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका से आए श्वेत लोगों का विशेष स्वागत किया गया.

इन श्वेत लोगों को अमेरिका सरकार द्वारा न केवल एयरलिफ्ट किया गया, बल्कि उन्हें नागरिकता देने का वादा भी किया गया. यह फैसला अब नस्लीय भेदभाव के गंभीर आरोपों की वजह बन चुका है. जिन लोगों को अमेरिका से निकाला गया, उनमें से अधिकतर एशिया और लैटिन अमेरिका के नागरिक थे. बड़ी संख्या में भारत, ब्राजील, मेक्सिको, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग शामिल थे. इनमें से कई एजेंट्स के झांसे में फंसाकर बिना वैध दस्तावेज के अमेरिका पहुंचे थे. ट्रंप प्रशासन ने “अवैध प्रवेश” को आधार बनाते हुए कोई मानवीय राहत नहीं दी.

दक्षिण अफ्रीका से आए श्वेत लोगों को क्यों मिली प्राथमिकता?
दक्षिण अफ्रीका से आए श्वेत लोगों को ट्रंप प्रशासन ने प्राथमिकता देते हुए कहा कि ये लोग अपने देश में नस्लीय भेदभाव और हिंसा का शिकार हैं. उन्हें नौकरियों से वंचित किया जा रहा है, जमीन छीनी जा रही हैं और जान से मारा जा रहा है.” ट्रंप ने इस वर्ग को नरसंहार से पीड़ित अल्पसंख्यक बताया और कहा कि हम इन्हें नागरिकता देंगे क्योंकि अमेरिका हर सताए हुए के लिए सुरक्षित स्थान है. इस नीति के तहत सोमवार को अमेरिका पहुंचे 49 श्वेत अफ्रीकी नागरिकों को विशेष विमान से लाया गया. इसके अलावा 8000 और लोगों ने अमेरिका में बसने की इच्छा जताई है.

क्या यह नस्लीय पक्षपात नहीं?
आलोचकों का दावा यह नीति नस्लीय प्राथमिकता पर आधारित है, जो अमेरिकी संविधान के समानता के अधिकार के विरुद्ध है. ट्रंप प्रशासन ने अश्वेत या दक्षिण एशियाई प्रवासियों के लिए मानवीय आधार पर कोई नरमी नहीं दिखाई है. यह कदम अमेरिका की श्वेत वर्चस्ववादी राजनीति को बढ़ावा देता है. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप फैसले का बचाव करते हुए कहते हैं कि हम किसी नस्ल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो लोग सताए जा रहे हैं, उन्हें मदद मिलनी चाहिए.”

न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रंप के दावे को किया खारिज
New York Times की एक विस्तृत रिपोर्ट में ट्रंप के इस दावे पर सवाल उठाए गए कि “दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों को नरसंहार का शिकार बनाया जा रहा है.” रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक 225 मौतें खेतों में हुईं. इनमें से 101 मजदूर (अधिकतर अश्वेत) थे. 53 श्वेत किसान भी मारे गए. पुलिस और मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप के दावों को प्रोपेगेंडा और राजनीतिक स्टंट बताया है.

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आ गई ‘किस किस को प्यार करूं 2’ की रिलीज डेट! इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक

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Kis Kisko Pyaar Karoon Release Date: कपिल शर्मा स्टारर फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं 2’ अपने पोस्टर्स के रिलीज होने के बाद से ही सुर्खियों में छाई हुई है. निर्माता फिल्म से अलग-अलग शादियों के पोस्टर शेयर कर रहे हैं. वहीं फैंस फिल्म को लेकर काफी एक्साइटेड हैं फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं. चलिए यहां जानते हैं ‘किस किस को प्यार करूं 2’ कब सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है?

‘किस किस को प्यार करूं 2’ कब हो रही रिलीज?
बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र के हवाले से जानकारी मिली है कि, “निर्माता कई तारीखों पर विचार कर रहे हैं और जिन तारीखों पर सीरियसली सोचा जा रहा है उनमें से एक 26 सितंबर, 2025 है. उस दिन बहुत ज्यादा कंप्टीशन नहीं है और इसके अलावा, तारीख भी अहम है. दअसल फिल्म का पहला पार्ट ठीक दस साल पहले उसी हफ्ते में  25 सितंबर, 2015 को रिलीज़ हुआ था. इससे तारीख का महत्व और बढ़ गया है.”

रिपोर्ट के मुताबिक सूत्र ने आगे बताया, “अभी तक इस बात पर फाइनल फैसला नहीं लिया गया है कि 26 सितंबर को रिलीज की तारीख तय की जाएगी या नहीं, मेकर्स  निर्माता इस बात को लेकर क्लियर हैं कि वे फिल्म के लिए बेस्ट पॉसिबल तारीख चाहते हैं, क्योंकि उन्हें बॉक्स ऑफिस पर इसकी संभावनाओं पर पूरा भरोसा है.”

 


‘किस किस को प्यार करूं 2’ स्टारा कास्ट और निर्देशक
बता दें कि अनुकल्प गोस्वामी द्वारा निर्देशित, ‘किस किस को प्यार करूं 2’ का निर्माण रतन जैन, गणेश जैन और अब्बास-मस्तान द्वारा वीनस वर्ल्डवाइड एंटरटेनमेंट के तहत अब्बास मस्तान फिल्म प्रोडक्शन के सहयोग से किया गया है. ये फिल्म एक बेहतरीन शादी-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें कपिल शर्मा का किरदार एक मल्टीकल्चरल मैरिटल उलझन में उलझ जाता है. कपिल शर्मा और मनजोत सिंह स्टारर इस फिल्म में कॉमेडी, कंफयूजन की भरमार है. फिलहाल फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

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