काठमांडू की भाट-भटेनी सुपरमार्केट में 1 करोड़ की लूट, प्रदर्शनकारियों ने पलभर में किया सब साफ

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<p style="text-align: justify;">नेपाल की सबसे बड़ी सुपरमार्केट चेन भाट-भटेनी के कोटेश्वर स्थित शोरूम में शुक्रवार यानी 28 मार्च को घटी एक भयावह घटना ने राजधानी के व्यापार जगत को झकझोर दिया है. दरअसल प्रदर्शनकारियों के उग्र समूह ने न सिर्फ भारी तोड़फोड़ की, बल्कि करोड़ों रुपये की लूट भी मचाई. यह घटना प्रशासन की विफलता और असुरक्षा की पोल खोलने के साथ-साथ व्यापारियों के बीच गंभीर चिंता का कारण बन गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">सूत्रों के अनुसार, लगभग एक करोड़ रुपये का सामान लूट लिया गया. हमलावरों ने मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, महंगे ब्रांडेड उत्पाद और अन्य कीमती सामानों को निशाना बनाया. इस घटना में सुपरमार्केट को 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें कांच के पैनल और शोकेस की तोड़फोड़ भी शामिल है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>व्यापारियों में दहशत, प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सुपरमार्केट के COO पानू पौडेल ने कहते हैं कि लूटपाट के दौरान सुपरमार्केट के काउंटर से करीब 94,000 रुपये नकद भी चोरी कर लिए गए. यह घटना केवल एक तोड़फोड़ नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित लूट का हिस्सा थी. इस प्रकार की हिंसा ने व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के बीच डर पैदा कर दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">साथ ही, यह घटना प्रशासन के सुरक्षा प्रबंधों की कमी को उजागर करती है. राजधानी के व्यस्त इलाके में ऐसी लूटपाट के दौरान पुलिस की उपस्थिति न के बराबर थी, जिससे असुरक्षा का माहौल बना. व्यापारी संघ ने अब सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन सवाल बरकरार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">स्थानीय पुलिस और अपराध जांच कार्यालय ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और बाकी आरोपियों की तलाश भी की जा रही है. हालांकि, यह सवाल उठता है कि जब इतने बड़े पैमाने पर लूटपाट हो सकती है, तो सुरक्षा तंत्र किस तरह से कार्य कर रहा है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>विरोध प्रदर्शन में बदल गई हिंसा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह घटना एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई, जिसका नेतृत्व राजशाही समर्थक समूहों ने किया था. प्रदर्शनकारियों ने पहले तो बाजार में आवाज उठाई और बाद में इस आंदोलन को हिंसा में बदल दिया. यह घटना दर्शाती है कि विरोध के नाम पर अगर अराजकता और हिंसा को बढ़ावा दिया जाएगा, तो इससे न केवल व्यापार बल्कि समाज की सुरक्षा पर भी गहरा असर पड़ेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">नेपाल सरकार और प्रशासन पर इस घटना के बाद दबाव बढ़ गया है. व्यापारियों ने प्रशासन से सख्त सुरक्षा इंतजामों की मांग की है ताकि इस तरह के हमले भविष्य में न हो.</p>

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