ये है वर्ल्ड बुक ऑफ गिनीज में दर्ज दुनिया की सबसे छोटी बकरी, हाइट इतनी कम कि स्केल से ही ले सकते हैं नाप
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ये है वर्ल्ड बुक ऑफ गिनीज में दर्ज दुनिया की सबसे छोटी बकरी, हाइट इतनी कम कि स्केल से ही ले सकते हैं नाप
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ये है वर्ल्ड बुक ऑफ गिनीज में दर्ज दुनिया की सबसे छोटी बकरी, हाइट इतनी कम कि स्केल से ही ले सकते हैं नाप
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सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL देशभर में अपनी 4G सर्विस शुरू करने के लिए तैयार है. कंपनी ने जून तक एक लाख 4G टावर लगाने का लक्ष्य रखा है. इनमें से अधिकतर टावर लगकर काम करना शुरू कर चुके हैं. उम्मीद की जा रही है कि जून अंत तक कंपनी की सभी 4G साइट्स ऑपरेशनल हो जाएंगी. इसके तुरंत बाद 5G कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू कर दिया जाएगा. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इसकी शुरुआत हो सकती है.
4G पर अभी तक कितनी प्रोग्रेस?
हाल ही में दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया था कि BSNL की 4G कनेक्टिविटी के लिए एक लाख साइट की योजना बनाई गई थी. इनमें से 89 हजार इंस्टॉल कर दी गई है और सिंगल सेल फंक्शन टेस्ट प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा मई-जून तक सभी एक लाख साइट को ऑपरेशनल बनाने की योजना है. इसके बाद जून से 5G के काम शुरू हो जाएगा. रिपोर्ट्स के अनुसार, BSNL देश की एकमात्र ऐसी कंपनी है, जिनसे 4G टेक्नोलॉजी खुद डेवलप की है. बाकी कंपनियों ने 4G कनेक्टिविटी के लिए विदेशी कंपनियों की मदद ली थी.
दिल्ली से शुरू हो सकती है BSNL की 5G सर्विस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BSNL दिल्ली में 5G (स्टैंडअलोन) को टेस्ट करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही कंपनी के पास अपनी 4G साइट्स को 5G में अपग्रेड करने का भी ऑप्शन है. BSNL के साथ काम कर रही TCS ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कंपनी की 4G साइट्स को सॉफ्टवेयर अपडेट की मदद से 5G NSA (नॉन-स्टैंडअलोन) में अपग्रेट किया जा सकता है. बता दें कि 5G कनेक्टिविटी शुरू करने के मामले में BSNL सबसे पीछे चल रही है. एयरटेल और जियो कई महीनों से 5G सर्विसेस दे रही हैं, जबकि वोडाफोन आइडिया ने भी मुंबई में अपनी 5G सर्विसेस को शुरू कर दिया है. जल्द ही देश हिस्सों में यह सर्विस शुरू कर दी जाएगी.
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गौतम अडानी (Gautam Adani) के लिए साल 2025 इतना खास नहीं रहा, जितना साल 2024 था. FY25 में अब तक गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप के शेयरों ने पिछले साल की तुलना में 21 फीसदी की गिरावट देखी है. यानी, कुल मार्केट कैपिटल में 3.4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इस गिरावट के पीछे बाजार में उतार-चढ़ाव, रेगुलेटरी जांच और कुछ आरोपों का हाथ माना जा रहा है. चलिए, आपको बताते हैं कि गौतम अडानी की किस कंपनी को FY25 में कितना नुकसान हुआ.
किस कंपनी को कितना नुकसान?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 28 मार्च 2024 से 21 मार्च 2024 के बीच, अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयरों ने सबसे ज्यादा गिरावट देखी. इसका मार्केट कैप 2.90 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.46 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. यानी, लगभग आधा मार्केट कैप खत्म हो गया है. वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में भी 27 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे 94,096 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
अडानी पोर्ट्स एंड SEZ के मार्केट कैप में भी 11.40 फीसदी की कमी आई है, जो 33,029 करोड़ रुपये के बराबर है. जबकि अडानी टोटल गैस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयरों में भी 31.84 फीसदी और 18.95 फीसदी की गिरावट देखी गई है. सीमेंट कंपनियों की बात करें तो इसमें ACC और अंबुजा सीमेंट्स के शेयर भी 23.10 फीसदी और 15.92 फीसदी नीचे आए हैं. जबकि एनडीटीवी, जो अडानी ग्रुप की मीडिया कंपनी है, के शेयरों में 41.58 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
किन वजहों से गिरे अडानी ग्रुप के शेयर?
FY25 में अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट के कई कारण हैं. इसमें, भारतीय शेयर बाजार को मैक्रोइकॉनॉमिक्स दबाव, शहरी खर्च में कमी और वैश्विक राजनीतिक तनाव, जैसे ट्रंप के टैरिफ का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी और गैस सेक्टर में समस्याओं ने भी अडानी समूह को प्रभावित किया है. जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली ने भी अडानी ग्रुप की 6 कंपनियों को प्रभावित किया है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET), जैसा कि नाम से पता चलता है, भारत में 260 से अधिक यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए एक प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम है. इसमें 45 सेंट्रल, 37 स्टेट, 32 डीम्ड और 132 प्राइवेट यूनिवर्सिटीज शामिल हैं. CUET एग्जाम का मूल मंत्र है – “एक भारत, एक प्रवेश परीक्षा.” यह इनिशिएटिव सभी अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड्स, मार्किंग सिस्टम्स, डिफिकल्टी लेवल्स और यूनिवर्सिटीज की एंट्रेंस एग्जाम्स को एक साथ लाने का है.
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Trending Video: आईपीएल 2025 के तीसरे मुकाबले में क्रिकेट के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक, महेंद्र सिंह धोनी की एंट्री ने स्टेडियम को झकझोर कर रख दिया. जैसे ही धोनी मैदान पर बल्लेबाजी के लिए उतरे, वैसे ही दर्शकों ने जबरदस्त शोर मचाकर उनका स्वागत किया. इस दौरान पूरा स्टेडियम “धोनी…धोनी…” के नारों से गूंज उठा. लेकिन इस माहौल में एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब मुंबई इंडियंस की मालिक नीता अंबानी इस शोर से बचने के लिए अपने दोनों कान बंद करती नजर आईं.
आईपीएल का क्रेज हर साल नई ऊंचाइयों को छूता है, लेकिन जब बात एमएस धोनी की हो, तो उनके चाहने वालों की दीवानगी अलग ही लेवल पर पहुंच जाती है. इस मैच में भी जैसे ही धोनी बल्लेबाजी के लिए निकले, पूरे स्टेडियम में एक साथ चीख-पुकार मच गई. चारों तरफ सिर्फ “थाला” के नाम की गूंज थी. लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया और कुछ फैंस तो भावुक भी हो गए. जहां एक तरफ धोनी के फैंस खुशी से झूम रहे थे, वहीं मुंबई इंडियंस की ओनर नीता अंबानी की प्रतिक्रिया ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
Nita Ambani ji closing her ears during MS Dhoni’s entry 🥶🔥 pic.twitter.com/lPtCJYh2Kw
— ` (@WorshipDhoni) March 24, 2025
जैसे ही स्टेडियम में शोर बढ़ा, उन्होंने अपने दोनों कान बंद कर लिए. उनके इस रिएक्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. फैंस इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ लोगों ने इसे शोर से बचाव बताया, तो कुछ ने इसे धोनी की फैन फॉलोइंग की ताकत करार दिया.
एमएस धोनी क्रिकेट जगत के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं. भले ही उनका बल्ला हमेशा गरजता हो या ना हो, लेकिन उनकी मौजूदगी ही स्टेडियम को रोमांच से भर देती है. चाहे किसी भी टीम के फैंस हों, जब धोनी मैदान में आते हैं, तो तालियों और चीखों की गूंज से स्टेडियम गूंज उठता है. इस कल के इस शानदार मुकाबले में चैन्नई सुपर किंग्स ने मुंबई इंडियंस को 4 विकेट से हरा दिया.
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वीडियो को सोशल मीडिया पर अलग अलग प्लेटफॉर्म से शेयर किया जा रहा है, जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…थाला फॉर ए रीजन. एक और यूजर ने लिखा…एम एस धोनी की बात ही अलग है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…शोर से बचाव के लिए कान बंद करना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन क्या रोहित की एंट्री पर ऐसा होता तब भी कान बंद किए जाते?
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अकेलापन या अकेले रहना दोनों ही मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करता है. कहते हैं न किसी भी चीज का अच्छा और बुरा दोनों तरह का असर होता है. एक तरफ कुछ रिसर्चर कहते हैं कि अकेला रहना एक व्यक्ति के मेंटल हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है. क्योंकि उस दौरान वह क्वालिटी और प्रोडक्टिव काम कर सकता है.
वहीं कुछ ऐसे भी हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अकेले रहने से दिमाग पर बुरा असर पड़ता है. और इसके कई साइड इफेक्ट्स आपके शरीर पर दिखाई दे सकते हैं. अकेलापन दूसरे व्यक्ति से अलगाव की भावना को बढ़ाता है. सिर्फ इतना ही नहीं ज्यादा अकेले रहने वाले व्यक्ति के मेंटल और फिजकल दोनों तरह के हेल्थ पर काफी ज्यादा बुरा असर होता है. साइकोलॉजिस्ट आशा किरण सेल्फ बताती हैं कि जबकि कई बार ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति काफी ज्यादा एकांत या अकेले रहना पसंद करते हैं वह डिप्रेशन का शिकार का शिकार हो जाते हैं. वहीं कुछ लोग अकेले रहने को सेल्फ ग्रोथ के तौर पर देखते हैं.
अकेले रहने के फायदे:
आत्म-चिंतन और माइंडफुलनेस: अकेले अगर खुद के साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं तो एक व्यक्ति अपने सेल्फ ग्रोथ पर ज्यादा फोकस कर पाता है. अपने विचारों और भावनाओं का पता लगाने और माइंडफुलनेस के प्रैक्टिस करने का एक सबसे बेहतरीन तरीका है अकेला रहना.
तनाव और चिंता में कमी: अकेले समय बिताने से सामाजिक दबाव कम करने और निरंतर उत्तेजना से ब्रेक लेने में मदद मिल सकती है. जिससे तनाव का लेवल कम हो सकता है.
क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिव कामों में बढ़ोतरी: आप अकेले या एकांत रहते हैं तो आपकी प्रोडक्टिवी में बढ़ोतरी होकी है. सिर्फ इतना ही नहीं बिना किसी तरह के फोकस गवाएं आप फोकस के साथ किसी काम को बड़े मन से करते हैं. तो वो काम पहले से भी ज्यादा अच्छे तरीके से करते हैं.
सेल्फ कॉन्फिडेंस और रिचार्ज: अकेले समय आपकी मानसिक और भावनात्मक बैटरी को रिचार्ज करने के लिए जरूरी होता है. जिससे आप तरोताजा महसूस करते हुए सामाजिक बातचीत में वापस आ सकते हैं.
लाइफ में बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है: अकेले रहना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन एकदम से अलगाव इंसान के लिए सही नहीं है. इससे बचने के लिए एकांत और सामाजिक संपर्क के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है.
जानबूझकर एकांत: सुनिश्चित करें कि आप जानबूझकर अकेले समय बिता रहे हैं और आप ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं जो आपकी भलाई को बढ़ावा देती हैं.
कई बार अकेलेपन दूसरी कई सारी बीमारी का कारण बन सकते हैं?
मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानी का जोखिम बढ़ाता है:
अकेलेपन से अवसाद, चिंता और दूसरी तरह की मानसिक तनाव और समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है.
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शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं:
अकेलापन शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है. जिसके कारण दिल से जुड़ी बीमारी, कमजोर इम्युनिटी और दूसरी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं जैसी परेशानियों का जोखिम बढ़ता है.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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India-China: भारत और चीन के बीच सीमा तनाव में कमी आने के बाद अब केंद्र सरकार दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर विचार कर रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ कम करने का दबाव बनाए जाने के बीच नीति-निर्माता इसे भारत-चीन आर्थिक संबंधों को सुधारने का उपयुक्त समय मान रहे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मानना है कि चीन के साथ व्यापारिक संबंध सामान्य करने से अमेरिका को स्पष्ट संदेश मिलेगा और ट्रंप के दबाव से निपटने में मदद मिलेगी. सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार के विभिन्न विभागों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि चीन के साथ व्यापार और निवेश पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत दी जाए. ये प्रतिबंध 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद लगाए गए थे.
सरकार उठा सकती है ये बड़ा कदम
औद्योगिक क्षेत्र से मिल रही मांगों के आधार पर सरकार कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है. इनमें चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियमों में ढील, चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी और कुछ प्रतिबंधित चीनी ऐप्स को दोबारा अनुमति देने जैसे कदम शामिल हैं.
इसके अलावा, चीनी स्कॉलर्स के लिए वीजा जारी करने और भारत-चीन के बीच हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. निवेश के क्षेत्र में भी भारत सरकार बीजिंग से पूंजी प्रवाह की अनुमति देने पर विचार कर रही है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को संतुलित किया जा सके. वर्तमान नीति के अनुसार, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से होने वाले निवेश के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है.
अमेरिका को स्पष्ट संदेश देने की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार के कुछ अधिकारियों का मानना है कि चीन के साथ व्यापार संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाने से अमेरिका को यह संकेत दिया जा सकता है कि भारत अपनी व्यापार नीति को लेकर स्वतंत्र फैसले लेने में सक्षम है. सरकार चीन के साथ व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील देकर यह जताना चाहती है कि वह अपने हितों के अनुसार नीतिगत निर्णय ले सकती है. वित्त मंत्रालय ने इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में व्यापार प्रतिबंधों में कुछ ढील देने के पक्ष में एक प्रस्तुति भी दी थी. वहीं, वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी चीन से आयातित उत्पादों पर अनिवार्य बीआईएस (BIS) प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCOs) को लेकर भी विचार कर रहे हैं.
छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए लाभदायक होगा निर्णय
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, व्यापार संबंधों को बहाल करना अब आवश्यक हो गया है, खासकर ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद के दौर में. छोटे और मध्यम उद्योगों से लंबे समय से व्यापार और गैर-व्यापारिक बाधाओं को हटाने की मांग की जा रही थी. इसके अलावा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कार्यरत चीनी तकनीशियनों और श्रमिकों को भारत में काम करने की अनुमति देने के लिए वीजा नियमों में कुछ राहत देने पर भी चर्चा हो रही है.
व्यापार बहाली का इच्छुक है चीन
सूत्रों के अनुसार, चीन भी भारत के साथ व्यापार संबंधों को पुनः स्थापित करने का इच्छुक है. चीन ने भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को ध्यान में रखते हुए भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव दिया है. 2023 में भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 83 अरब डॉलर से अधिक हो गया था. भारत से चीन को मुख्य रूप से प्राथमिक उत्पादों का निर्यात किया जाता है, जबकि चीन से आयातित वस्तुओं में भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा की कमी देखी जाती है, जिससे यह घाटा बढ़ता जा रहा है.
धीरे-धीरे मिलेगी छूट
भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चीन के साथ व्यापारिक प्रतिबंधों में धीरे-धीरे छूट दी जा सकती है, जिससे चीनी कंपनियों को भारत में निवेश की अनुमति मिलेगी. हालांकि, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि चीनी कंपनियों की भागीदारी केवल भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी में हो और उन परियोजनाओं में चीन की हिस्सेदारी अल्पसंख्यक रहे. इससे भारत में चीनी निवेश को नियंत्रित ढंग से प्रोत्साहित किया जा सकेगा, जिससे भारतीय बाजार और कंपनियों को लाभ मिलेगा.
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MS Dhoni on Captain Ruturaj Gaikwad: चेन्नई सुपर किंग्स, IPL की सबसे सफल टीमों में से एक है. एमएस धोनी ने अपनी कप्तानी में इस टीम को पांच बार चैंपियन बनाया है, लेकिन पिछले वर्ष यानी IPL 2024 से पहले ही उन्होंने चेन्नई की कमान ऋतुराज गायकवाड़ के हाथों में सौंप दी थी. गायकवाड़ का व्यक्तिगत प्रदर्शन सीजन दर सीजन बेहतर होता गया है, साथ ही अपनी कप्तानी से भी उन्होंने प्रभावित किया है. मगर बहुत से लोगों का मानना है कि अब भी बहुत हद तक CSK टीम को धोनी ही चला रहे हैं. इस विषय पर खुद धोनी ने चुप्पी तोड़ी है.
हाल ही में धोनी ने जियो हॉटस्टार को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने खुलासा किया कि मैच के दौरान अधिकांश फैसले खुद गायकवाड़ ही लेते हैं. उन्होंने कहा, “टूर्नामेंट शुरू होने से पहले मैंने उनसे कहा था, ‘मैं अगर तुम्हें कोई सलाह दे रहा हूं, तो जरूरी नहीं कि उसे तुम्हें मानना ही मानना है. मैं कोशिश करूंगा कि टीम के फैसलों से दूरी ही बनाए रखूं.’ जब पिछला सीजन चल रहा था तब बहुत सारे लोगों ने कयास लगाए जैसे पीछे से टीम के सारे फैसले मैं ले रहा था. मगर सच्चाई यही है कि टीम के 99% फैसले गायकवाड़ ही ले रहे थे.”
एमएस धोनी ने कहा कि ऋतुराज गायकवाड़ को CSK से जुड़े काफी समय हो गया है और उन्होंने टीम के लिए अच्छा किया है. धोनी ने कहा, “वो बहुत विनम्र और शांत रहते हैं. उनके और स्टीफन फ्लेमिंग के बीच काफी अच्छा तालमेल है. ये कारण थे कि हमने उन्हें लीडरशिप के रोल के लिए चुना था. जब पिछला IPL सीजन समाप्त हुआ तो मैंने उनसे कहा अगले सीजन टीम की 90 प्रतिशत जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर ही होगी. इसलिए मानसिक रूप से खुद को तैयार कर लो.”
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यदि बैंक डिस्काउंट 500 रुपये से अधिक है तो ग्राहक को 49 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा जिससे उनकी कुल बचत पर असर पड़ेगा. यह शुल्क अमेज़न द्वारा लागू किया गया है और इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शुल्क अमेज़न प्राइम मेंबर्स पर भी लागू होगा.

अमेज़न के अनुसार, यह शुल्क बैंक ऑफर्स को मैनेज, एग्रीगेट और प्रोसेस करने की लागत को कवर करने के लिए लिया जा रहा है.

अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये की खरीदारी करता है और 10% यानी 1,000 रुपये का बैंक डिस्काउंट मिलता है तो उसे 9,000 रुपये की बजाय 9,049 रुपये चुकाने होंगे.

यह कोई नई नीति नहीं है, क्योंकि फ्लिपकार्ट पहले से ही ऐसा प्रोसेसिंग शुल्क ले रहा है. अब अमेज़न ने भी इसे लागू कर दिया है. अगर ग्राहक ऑर्डर कैंसल या रिटर्न कर देता है, तब भी 49 रुपये की प्रोसेसिंग फीस वापस नहीं की जाएगी.

अगर बैंक डिस्काउंट 500 रुपये से कम है, तो यह शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसलिए ग्राहकों को छूट और अतिरिक्त शुल्क की गणना ध्यान से करनी होगी.

अगर ग्राहक 49 रुपये का शुल्क नहीं देना चाहते, तो वे पेमेंट का तरीका बदल सकते हैं और बैंक डिस्काउंट का उपयोग करने से बच सकते हैं.

नए शुल्क की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग पर मिलने वाली छूट कम हो जाएगी, जिससे ग्राहकों को पहले की तुलना में कम फायदा होगा.
Published at : 24 Mar 2025 01:18 PM (IST)
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