तिरुमाला मंदिर में लगेगा दुनिया का पहला सोने और चांदी का पेंडेंट एटीएम

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Gold Pendant ATM: अब तक आप एटीएम से केवल नोट निकालते रहे हैं. लेकिन जल्द ही एटीएम से आप सोने और चांदी के पेंडेट भी हासिल कर सकेंगे.  तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (Tirumala Tirupati Devasthanams) तिरुमाला मंदिर में दुनिया का पहला सोने और चांदी का पेंडेंट एटीएम शुरू करने जा रहा है. भगवान वेंकटेश्वर और देवी लक्ष्मी देवी की तस्वीर वाले पेंडेंट इन एटीएम मशीनों से खरीदा जा सकेगा जिसकी बदौलत आस्था को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा जा सकेगा. 

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी जे श्यामला राव के पहल पर तिरुमाला मंदिर, तिरुपति में गोविंदराज मंदिर और तिरुचनूर में पद्मावती अम्मावरी मंदिर में डिजिटल ट्रांसफॉरर्मेशन को अंजाम दिया जा रहा है. जे श्यामला राव ने दि न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बकाया कि, इस एटीएम मशीन के लिए सॉफ्टवेयर को डिजाइन किया गया है जिससे कोई भी व्यक्ति कैश एटीएम के मुकाबले एक या दो ज्यादा स्टेप्स में इस एटीएम को ऑपरेट कर सोने और चांदी का पेंडेट हासिल कर सकेगा. हालांकि, उन्होंने ये साफ किया कि प्रोजेक्ट तभी आगे बढ़ेगी जब यह पवित्र शास्त्रों और आगमों के साथ मंदिर की परंपराओं के पालन को सुनिश्चित करेगा. 

यूएई में कमर्शियल सोने के एटीएम से अलग, सोने और चांदी का पेंडेट वाले एटीएम में बैंकिंग एटीएम के समान एआई-सक्षम इंटरफेस है, जिसके लिए न्यूनतम अतिरिक्त चरणों की आवश्यकता होती है. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम टेक्नोलॉजी को अंतिम रूप देने के लिए सॉफ्टवेयर फर्मों और एआई स्टार्टअप के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है. कई कंपनियों प्रस्ताव पेश करने और मशीन प्रोटोटाइप का प्रदर्शन करने की योजना बना रही हैं. गोल्ड और सिल्वर पेंडेंट एटीएम 2 ग्राम, 5 ग्राम, और 10 ग्राम वैरिएंट में पेंडेंट प्रदान करेंगे. मानवीय हस्तक्षेप के बिना खरीदारी को अंजाम दिया जा सकेगा.  

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम में पले से ही दान कियोस्क चल रहा है जो बेहद सफल रहा है. इसमें भक्तों को यूपीआई, डेबिट या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से योगदान करने की इजाजत देता है. ये कियोस्क अन्नाप्रसादम कैंटीन, वकाउला मठ मंदिर और तिरुचनूर मंदिर में चालू हैं और इसे और भी विस्तार देने की योजना पर काम चल रहा है. 

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2 दिन 1000 से ज्यादा हत्याएं, हर तरफ शव ही शव… इस मुस्लिम देश में क्यों शुरू हुआ खूनी खेल?

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Syria Revenge Killing: सीरिया में बीते दो दिनों से जारी हिंसा में हजार से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. गुरुवार (6 मार्च, 2025) को सरकारी बलों और राष्ट्रपति बशर असद के समर्थकों के बीच यह हिंसा भड़की. ये हिंसा देश में बीते 14 साल से चल रहे संघर्ष में अब तक की सबसे घातक घटनाओं में से एक है. 

एसोसिएट प्रेस (एपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध निगरानी समूह ने इस बात की जानकारी दी कि इस हिंसा में 1000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. वहीं ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि मरने वालों में 745 नागरिक शामिल हैं, जिनमें से ज्यादातर नज़दीक से मारे गए, साथ ही 125 सरकारी सुरक्षाकर्मी और असद से जुड़े 148 आतंकवादी भी शामिल हैं.

घात लगाकर किया था हमाल

ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, गुरुवार को उस समय लड़ाई शुरू हुई, जब सुरक्षाबलों ने जबलेह के पास एक व्यक्ति को हिरासत में लेने का प्रयास किया, लेकिन बशर असद के लोगों ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया. खास बात ये है कि लताकिया प्रांत के बड़े हिस्से में बिजली और पीने का पानी भी रोक दी गई है.

अलावी समुदायों को बनाया निशाना 

इसके बाद शुक्रवार (7 मार्च, 2025) को बदला लेने के लिए हमले और बढ़ गए. सरकार के प्रति वफादार सुन्नी मुसलमान बंदूकधारियों ने असद के अल्पसंख्यक संप्रदाय अलावी को निशाना बनाया. यह हिंसा हयात तहरीर अल-शाम के लिए एक बड़ी चुनौती है. वह समूह, जिसने असद को उखाड़ फेंकने में मदद की थी.

गांवों में रहने वालों की भी हत्या 

निवासियों ने अलावी गांवों में भी हत्याओं के बारे में बताया गया. बनियास के 57 वर्षीय अली शेहा ने कहा, “सड़कों पर लाशें पड़ी थीं. बंदूकधारी 100 मीटर से भी कम दूरी पर थे, घरों और निवासियों पर गोलीबारी कर रहे थे. हमलावरों ने लोगों की हत्या करने से पहले उनके संप्रदाय की पुष्टि करने के लिए उनके पहचान पत्र की जांच भी की.

फ्रांस ने की निंदा

सीरिया की सरकार ने कहा कि उसने असद के वफादारों की ओर से कब्जा किए गए अधिकांश क्षेत्रों को वापस पा लिया है. वहीं फ्रांस ने हिंसा की निंदा की. विदेश मंत्रालय ने कहा, “पेरिस धार्मिक आधार पर नागरिकों के खिलाफ किए गए अत्याचारों की कड़े शब्दों में निंदा करता है.” इस बीच, हज़ारों अलावी भाग गए हैं, जिनमें से कई रूस के हमीमिम एयरबेस में शरण लिए हुए हैं. लेबनानी विधायक हैदर नासर ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अलावी लोगों की रक्षा करनी चाहिए, जो अपने देश के प्रति वफ़ादार सीरियाई नागरिक हैं.”

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अब जो आप सोचेंगे वह हो जाएगा टाइप? जानें क्या है Meta की नई Brain-Typing AI तकनीक

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Brain-Typing AI: इस डिजिटल दुनिया में लोग नए-नए तकनीकों से घिरे हुए हैं. ऐसे में क्या आपने कभी सोचा ही कि आप जो सोचें वह अपने आप टाइप हो जाए. जी हां, दरअसल 2017 में Facebook ने एक अनोखा विचार पेश किया था. कंपनी के मुताबिक, एक ऐसा ब्रेन-रीडिंग सिस्टम होना चाहिए जो सिर्फ सोचने भर से टाइप कर सके. कई वर्षों के शोध के बाद, कंपनी ने इस दिशा में प्रगति की है. हालांकि अभी यह तकनीक आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है.

कैसे काम करता है Meta का ब्रेन-टाइपिंग AI

Meta की यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और न्यूरोसाइंस के जरिए ब्रेन की एक्टिविटीज का विश्लेषण करके यह अनुमान लगाती है कि व्यक्ति कौन-सा अक्षर टाइप कर रहा है. लेकिन इसमें एक समस्या भी है. दरअसल, यह पूरा सिस्टम एक बड़े और महंगे उपकरण पर निर्भर करती है. साथ ही इसे सिर्फ एक कंट्रोल्ड एक्सपेरिमेंट रूम में ही इस्तेमाल किया जा सकता है.

MIT Technology Review के अनुसार, यह तकनीक मैग्नेटोएन्सेफलोग्राफी (MEG) मशीन का उपयोग करती है, जो ब्रेन की छोटी से छोटी एक्टिविटीज को मैग्नेटिक संकेतों ते तहत मशीन को भेजती है. यह मशीन बेहद ही संवेदनशील होती है.

अभी आम लोगों के लिए नहीं है उपलब्ध

भले ही यह तकनीक वैज्ञानिक दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसे एक प्रोडक्ट बनने में अभी लंबा समय लगेगा. इसके पीछे कई कारण शामिल हैं.

MEG मशीन आधा टन वजनी है और इसकी कीमत करीब $2 मिलियन (16 करोड़ रुपये) है. इसीलिए यह भी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं की जा सकती है. इसके अलावा, इस मशीन के इस्तेमाल के लिए व्यक्ति को बिल्कुल स्थिर बैठना होता है, क्योंकि हल्की सी हरकत भी ब्रेन मैसेज को गलत बना सकती है. Meta के शोधकर्ता Jean-Rémi King और उनकी टीम इस तकनीक को प्रोडक्ट के रूप में विकसित करने के बजाय ब्रेन में भाषा की प्रोसेस को बेहतर तरीके से समझने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

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‘हम इधर उधर मिलते रहते हैं’, एक्स गर्लफ्रेंड करीना कपूर को स्टेज पर गले लगाने के बाद बोले शाहिद

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IIFA Award 2025: IIFA अवॉर्ड चर्चा में बना हुआ है. इस दौरान शाहिद कपूर और करीना कपूर की सबसे ज्यादा चर्चा हुई. एक्स कपल ने एक दूसरे को स्टेज पर गले लगाया और खूब सारी बातें की. सोशल मीडिया पर उनके वीडियोज और फोटोज वायरल हैं. शाहिद और करीना को साथ बात करते देख फैंस काफी खुश नजर आए. इस मुलाकात के बाद शाहिद कपूर ने इसे लेकर रिएक्ट किया. शाहिद कपूर ने कहा कि वो और करीना मिलते जुलते रहते हैं.

करीना कपूर से मुलाकात पर शाहिद ने किया रिएक्ट
IIFA Digital Award के ग्रीन कारपेट पर मीडिया से बात करते हुए शाहिद ने कहा, ‘हमारे लिए ये कोई नई बात नहीं है. आज स्टेज पे मिले और हम लोग इधर उधर मिलते रहते हैं.’

ये पहली बार नहीं है जब शाहिद और करीना पब्लिक में टकराए. दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड 2024 में भी दोनों टकराए थे. लेकिन उस वक्त करीना ने शाहिद को इग्नोर किया और कोई बातचीत नहीं की. 


रिलेशनशिप में रहे थे करीना और शाहिद

बता दें कि शाहिद कपूर और करीना कपूर का रिलेशनशिप काफी चर्चा में रहा था. दोनों 2007 में अलग हो गए थे. उन्होंने साथ में चुप चुप के, फिदा, 36 चाइना टाउन, मिलेंगे मिलेंगे, जब वी मेट जैसी फिल्में की हैं. दोनों की जोड़ी को फैंस काफी पसंद करते थे. करीना और शाहिद का लव अफेयर काफी चर्चा में रहा था. 

हालांकि, ब्रेकअप के बाद दोनों अपनी-अपनी लाइफ में मूवऑन कर गए थे. करीना कपूर ने सैफ अली खान संग शादी की. सैफ और करीना के दो बेटे तैमूर और जेह हैं. वहीं शाहिद कपूर ने मीरा राजपूत संग शादी की. शाहिद और मीरा के भी दो बच्चे हैं. एक बेटी और बेटा मीशा और जैन.

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Surya Grahan 2025: सूर्य ग्रहण में सूतक क्या होता है? मार्च में लगने वाले ग्रहण में क्या ये लगे

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Surya Grahan 2025: साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण जल्द ही लगने वाला है. इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण होगा जो 29 मार्च, 2025 शनिवार को लग रहा है. सूर्य ग्रहण में सूतक काल को बहुत विशेष माना गया है. सबसे पहले जानते हैं साल का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा और कहां-कहां नजर आएगा.

कब लगेगा साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण?

  • साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025, को लग रहा है.
  • भारतीय समय अनुसार यह ग्रहण दोपहर 2.20 मिनट पर लगेगा और शाम 6.16 मिनट पर समाप्त होगा.
  • ग्रहण की कुल अवधि 2.53 मिनट रहेगी.

सूर्य ग्रहण में सूतक काल क्या होता है?

सूर्य ग्रहण को एक खगोलीय घटना माना जाता है. सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आने से सूर्य ग्रहण लगता है. सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है. सूतक काल का अर्थ है जब ग्रहण के असर का प्रभाव बढ़ जाता है. इस दौरान धार्मिक और मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किए जाते. सूतक काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. सूतक काल का ग्रहण के दौरान बहुत महत्व होता है. 

साल 2025 में लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, यह ऑस्ट्रेलिया, एशिया, हिंद महासागर में नजर आएगा. इसीलिए जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता वहां सूतक काल मान्य नहीं होता. 

सूतक काल में क्या नहीं करना चाहिए?

  • सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए.
  • इस दौरान मंदिर में भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए.
  • सूतक काल के दौरान भोजन नहीं पकाना चाहिएं.
  • सूतक काल में खाना के भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए.
  • सूतक काल के दौरान किसी भी ठोस या तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें.
  • ग्रहण के प्रतिकूल प्रभाव के कारण भोजन दूषित और अस्वास्थ्यकर हो सकता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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क्या अंडे खाने से भी बढ़ता है कैंसर होने का खतरा? ये स्टडी उड़ा देगी आपके होश

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Eggs and Cancer : जब भी प्रोटीन रिच फूड की बात आती है तो अंडा सबसे बेस्ट माना जाता है. इसे ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर किसी भी समय खाया जा सकता है. अंडे को डाइट के लिए जरूरी माना जाता है. कहा जाता है कि रोजाना एक अंडा खाने से ही शरीर को कई बड़े फायदे मिलते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि अंडा खाने से कैंसर भी हो सकता है. यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है एक हालिया रिपोर्ट में. जिसमें कहा गया है कि हफ्ते में कुछ अंडे खाने से कैंसर (Cancer) का खतरा 19% तक बढ़ सकता है. आइए जानते हैं इस रिसर्च के बारें में…

अंडा खाने से कैंसर का खतरा

Nutrition Facts वेबसाइट में पब्लिश एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, अंडे को खाने के लिए जिस तरह से पकाते हैं, वह इसके साइड इफेक्ट्स को तय करता है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अंडे कार्सिनोजेनिक केमिकल्स के सोर्स हो सकते हैं, जो हाई टेंपरेचर पर तलने के दौरान बनते हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि उबले हुए अंडे तले हुए अंडों से ज्यादा सुरक्षित हैं, जो कैंसर के खतरे को दोगुना कर सकते हैं. इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हफ्ते में केवल कुछ अंडे भी कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) के 19 प्रतिशत ज्यादा रिस्क से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन अगर हफ्ते में तीन या उससे ज्यादा अंडे खाते हैं, तो यह रिस्क 71 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.

अंडा क्यों इतना खतरनाक

अंडा और कैंसर न्यूट्रिशन फैक्ट्स वेबसाइट के एक वीडियो के अनुसार, अंडे में कोलीन की मात्रा अधिक होती है और यह कोलीन जब आंत के बैक्टीरिया (Gut Bacteria) से संपर्क करता है, तो यह ट्राइमेथिलैमाइन (TMA) में बदल जाता है, जो हमारे लीवर से ऑक्सीकृत होकर ट्राइमेथिलैमाइन-एन-ऑक्साइड (TMAO) में बदल जाता है, जो आगे चलकर सूजन को बढ़ाता है और कैंसर के बढ़ने का कारण बनता है. ऐसा कहा जाता है कि TMAO का लेवल सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और ट्यूमर को बढ़ावा दे सकता है, जिससे कैंसर के बढ़ने की आशंका बढ़ सकती है, खासकर कोलन और लीवर कैंसर में.

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एक अन्य स्टडी में अंडे से कैंसर होने का दावा

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में भी अंडे से कैंसर होने की बात कही गई है. ‘Egg Consumption and the Risk of Cancer: a Multisite Case-Control Study in Uruguay’ नाम की इस स्टडी में 1996 और 2004 के बीच उरुग्वे में 11 कैंसर साइट्स का केस-कंट्रोल अध्ययन किया, जिसमें 3,539 कैंसर के मामले और 2,032 हॉस्पिटल कंट्रोल शामिल थे, उन्होंने अंडे के ज्यादा सेवन और कई कैंसर के बढ़ते खतरों के  बीच संबंध पाया.

क्या अंडे खाना बंद कर देना चाहिए

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी अन्य फूड्स की तरह की अंडे का सेवन भी एक लिमिट में ही करना चाहिए. ऐसा कहा जाता है कि प्रोबायोटिक्स, फाइबर से भरपूर फूड्स और प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करके संतुलित गट माइक्रोबायोम बनाए रखने से TMAO के लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार, एक व्यक्ति को हफ्ते में एक या दो से अधिक अंडे नहीं खाने चाहिए. इसका कारण अंडे की जर्दी में कोलेस्ट्रॉल की उच्च मात्रा है. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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रमजान में भी टारगेट पर अहमदिया मुस्लिम, पाकिस्तानी पुलिस ने नहीं पढ़ने दी नमाज; 45 को उठा ले गए

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Ahmadi Community: पाकिस्तान में रमजान के महीने में भी अहमदिया मुस्लिमों को नहीं बख्शा जा रहा है. इस समुदाय के लोग जब शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए अपनी मस्जिदों में थे, तो पाकिस्तानी पुलिस इन्हें उठा ले गई. पाकिस्तान में दो अलग-अलग जगहों पर ये घटनाएं सामने आईं. कुल 45 लोगों को हिरासत में लिया गया. बता दें कि पाकिस्तानी कानून के मुताबिक, अहमदिया समुदाय के लोग खुद को मुस्लिम नहीं कह सकते हैं और न ही इन्हें नमाज पढ़ने की इजाजत है. 

कराची में पुलिस ने बताया कि उन्होंने 25 अहमदिया लोगों को हिरासत में लिया है. पुलिस के मुताबिक, जब ये लोग सुरजानी शहरी इलाके में अपनी मस्जिद में थे तो स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इन्हें घेर लिया और इनके खिलाफ नारे लगाए. पुलिस अधिकारी इरफान अली बलूच के मुताबिक, तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के कई कार्यकर्ता अहमदिया पूजा स्थल के बाहर इकट्ठा हुए और उन्हें धमकी दी कि वे शुक्रवार की नमाज अदा करना बंद कर दें क्योंकि यह केवल मुसलमानों के लिए है. इरफान अली ने बताया कि TLP सदस्यों द्वारा अहमदिया लोगों पर संभावित हमले की आशंका के चलते पुलिस ने पूजा स्थल पर मौजूद 25 अहमदिया लोगों को सुरक्षात्मक हिरासत में ले लिया.

सरगोधा में 20 पर मामला दर्ज
लाहौर से करीब 200 किलोमीटर दूर पंजाब प्रांत के सरगोधा जिले में करीब 20 अहमदियों पर उनके इबादतगाह पर नमाज पढ़ने के कारण हिरासतमें लिया गया. यहां भी TLP के दबाव के चलते पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी. सरगोधा पुलिस ने कहा कि उन्होंने अहमदियों पर पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 298सी के तहत मामला दर्ज किया है. बता दें कि धारा 298-सी उन अहमदियों को अपराधी बनाती है जो खुद को मुस्लिम कहते हैं. 

अहमदी लोगों को मुस्लिम नहीं मानता पाकिस्तान
अहमदिया समुदाय के लोग हमेशा से खुद को मुस्लिम मानते हैं, लेकिन 1974 में पाकिस्तान की संसद ने इस समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था. एक दशक बाद, उन्हें न केवल खुद को मुस्लिम कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, बल्कि इस्लाम के कुछ पहलुओं का पालन करने पर भी रोक लगा दी गई. पाकिस्तानी कानून के तहत, अहमदी लोग मस्जिदों पर मीनार या गुंबद बनाने या कुरान की आयतें सार्वजनिक रूप से लिखने जैसे चीजें नहीं कर सकते हैं, यानी वह कोई भी ऐसा काम नहीं कर सकते हैं, जिससे उनकी पहचान मुस्लिम के रूप में हो.

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ऐसा हुआ तो चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीत लेगी टीम इंडिया! ये रहे तीन फैक्टर

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Champions Trophy 2025 Final: रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम इंडिया इतिहास रचने से महज एक कदम दूर है. भारत चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के खिताब के बहुत करीब पहुंच चुका है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को फाइनल मैच खेला जाएगा. रोहित के साथ-साथ विराट कोहली के लिए भी यह मैच अहम होगा. अगर भारत के जीत के फैक्टर्स की बात करें तो वह खिताब पर कब्जा कर सकता है. इसमें तीन फैक्टर अहम साबित हो सकते हैं. रिकॉर्ड्स को देखें तो टीम इंडिया का न्यूजीलैंड पर पलड़ा भारी नजर आता है.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच अभी तक कुल 119 वनडे मैच खेले गए हैं. इस दौरान भारत ने 61 मैच जीते हैं. जबकि न्यूजीलैंड ने 50 मैचों में जीत दर्ज की है. भारतीय टीम अब एक बार फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ मैदान पर उतरेगी. भारत ने न्यूजीलैंड को ग्रुप मैच में बुरी तरह हराया था. अब दुबई में खेले जाने वाले फाइनल में भी जीत हासिल कर सकती है. अगर भारतीय टीम की बॉलिंग और बैटिंग ने कमाल किया तो खिताब पर कब्जा हो सकता है.

भारत का घातक बॉलिंग अटैक –

टीम इंडिया की जीत में सबसे बड़ा फैक्टर बॉलिंग अटैक साबित हो सकता है. मोहम्मद शमी और वरुण चक्रवर्ती ने अभी तक कमाल का प्रदर्शन किया है. शमी ने 4 मैचों में 8 विकेट झटके हैं. वहीं वरुण चक्रवर्ती ने 2 मैचों में ही 7 विकेट ले डाले हैं. शमी और चक्रवर्ती फाइनल में भी कमाल दिखा सकते हैं. इनके साथ-साथ अक्षर पटेल, कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा भी बॉलिंग में कमाल का प्रदर्शन कर चुके हैं. 

टीम इंडिया मजबूत बैटिंग लाइन अप –

भारतीय टीम के पास विराट कोहली, रोहित शर्मा और श्रेयस अय्यर जैसे दमदार बैटर हैं. टीम इंडिया के लिए रोहित और शुभमन गिल ओपनिंग कर सकते हैं. अगर यह जोड़ी नहीं भी चली तो कोहली और अय्यर मामले को संभाल सकते हैं. इसके बाद मिडिल ऑर्डर में केएल राहुल और हार्दिक पांड्या दम दिखा सकते हैं. टीम इंडिया के बैटर उसकी जीत में अहम साबित हो सकते हैं.

शानदार कप्तानी के साथ अच्छी फील्डिंग –

भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा अभी तक चार आईसीसी टूर्नामेंट्स के फाइनल में पहुंच चुके हैं. उनकी कप्तानी में भारत ने टी20 विश्व कप 2024 का खिताब भी जीता. अब वे एक बार फिर फाइनल में पहुंचे हैं. रोहित भारत की जीत में अहम साबित हुए हैं. उनके साथ टीम की फील्डिंग भी अहम रही है.

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