CUET 2025 में टॉप स्कोर का मास्टरप्लान! इन स्मार्ट टिप्स से पक्की करें मनपसंद यूनिवर्सिटी में स

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कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET), जैसा कि नाम से पता चलता है, भारत में 260 से अधिक यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए एक प्रमुख एंट्रेंस एग्जाम है. इसमें 45 सेंट्रल, 37 स्टेट, 32 डीम्ड और 132 प्राइवेट यूनिवर्सिटीज शामिल हैं. CUET एग्जाम का मूल मंत्र है – “एक भारत, एक प्रवेश परीक्षा.” यह इनिशिएटिव सभी अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड्स, मार्किंग सिस्टम्स, डिफिकल्टी लेवल्स और यूनिवर्सिटीज की एंट्रेंस एग्जाम्स को एक साथ लाने का है.

CUET इफेक्टिव स्टडी प्लान

  1. अपना सिलेबस समझें: CUET UG पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न को अच्छी तरह समझें. पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट लें. इससे आपको पता चलेगा कि आप किन एरिया में अच्छे हैं और कहां सुधार की जरूरत है.
  2. स्पष्ट लक्ष्य तय करें: बिना लक्ष्य के तैयारी बेकार है. CUET की तैयारी के लिए क्लियर गोल्स सेट करें.

  • शॉर्ट-टर्म गोल्स: रोज और हफ्ते के टारगेट सेट करें जैसे कवर करने वाले चैप्टर्स, रिवाइज़ करने वाले टॉपिक्स, और प्रैक्टिस क्वेश्चन्स.
  • लॉन्ग-टर्म गोल्स: लंबी अवधि के लक्ष्य तय करें जैसे कुछ समय में सभी सब्जेक्ट्स कंप्लीट करना, सभी मॉक टेस्ट खत्म करना, या स्पेसिफिक स्कोर पाना.

हफ्तेवार और मंथली रिव्यू करें

रेगुलर रिव्यू से आपकी तैयारी ऑर्गनाइज्ड और राइट डायरेक्शन में रहेगी.

  • वीकली प्रेप 
    -अपने सेट किए गोल्स के अगेंस्ट प्रोग्रेस चेक करें.
    -स्टडी प्लान को एडजस्ट करें बेस्ड ऑन क्या वर्क कर रहा है और क्या नहीं.
    -किसी भी डिफिकल्टी पर विचार करें और अपना एप्रोच बदलें.
  • मंथली प्रेप 
    -ओवरऑल प्रोग्रेस चेक करने के लिए फुल मॉक टेस्ट दें.
    -ट्रेंड्स और पैटर्न्स आइडेंटिफाई करने के लिए अपने परफॉरमेंस का एनालिसिस करें.
    -इस इनफॉर्मेशन के बेस पर अगले महीने का स्टडी प्लान एडजस्ट करें.

CUET तैयारी के लिए टाइम टेबल

हर स्टूडेंट का टाइम टेबल अलग होता है, पर यहां एक सिंपल एग्जांपल है:

  • सोमवार से बुधवार: डोमेन-स्पेसिफिक सब्जेक्ट्स और लैंग्वेज स्किल्स पर फोकस करें. प्रैक्टिस क्वेश्चन्स और पिछले पेपर्स सॉल्व करें.
  • गुरुवार: एग्जाम कंडीशन्स में फुल मॉक टेस्ट दें और डिटेल में रिजल्ट्स रिव्यू करें.
  • शुक्रवार: जनरल टेस्ट सेक्शन्स और डोमेन-स्पेसिफिक सब्जेक्ट्स पर रिवाइज करें. मॉक टेस्ट के रिजल्ट्स का रिव्यू करें और वीक एरियाज की पहचान करें.
  • शनिवार: ग्रुप स्टडी या ट्यूशन में पार्टिसिपेट करें. डिफिकल्ट टॉपिक्स को समझें और सॉल्व करें.
  • रविवार: लाइट एक्टिविटीज के लिए दिन रखें: मेन कॉन्सेप्ट्स रिवाइज करें, शॉर्ट मॉक टेस्ट दें, रिलैक्स करें, और नेक्स्ट वीक के लिए प्लान बनाएं.

इफेक्टिव स्टडी स्ट्रेटेजीज

  • बेसिक्स से शुरू करें: CUET एग्जाम प्रिंसिपल्स की अच्छी समझ पर फोकस करें. हर सब्जेक्ट के फंडामेंटल्स समझें.
  • रेगुलर प्रैक्टिस करें: टाइम्ड मॉक टेस्ट से एग्जाम स्टैमिना और टाइम मैनेजमेंट इंप्रूव करें. अपने परफॉरमेंस का एनालिसिस करें.
  • बार-बार दोहराएं: इंपॉर्टेंट कॉन्सेप्ट्स और प्रैक्टिस प्रॉब्लम्स को रेगुलरली रिवाइज करें. क्विक रिव्यू के लिए सम्मरी नोट्स और फ्लैशकार्ड्स बनाएं.
  • ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट दें: पिछले क्वेश्चन पेपर्स और प्रैक्टिस टेस्ट्स से एग्जाम फॉर्मेट बेटर समझें और एक्यूरेसी इंप्रूव करें.
  • वीक एरियाज पर काम करें: डिफिकल्ट लगने वाले टॉपिक्स या क्वेश्चन टाइप्स पर फोकस करें और इन एरियाज में बेटर होने के लिए प्रोफेसर्स से हेल्प लें.
  • गाइडेंस लें: टीचर्स और मेंटर्स से एडवाइस लें जब चैलेंजेस आएं, उनका एक्सपीरियंस वैल्युएबल इनसाइट्स दे सकता है.
  • पॉजिटिव रहें: प्रेप के दौरान पॉजिटिव माइंडसेट मेंटेन करें. नर्वसनेस फील करना नॉर्मल है, लेकिन राइट माइंडसेट मदद करेगा.

यह भी पढ़ें: यहां है CUET क्रैक करने का फॉर्मूला, तैयारी में अपनाएं ये मास्टर स्ट्रोक

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धोनी की मैदान में हुई एंट्री तो ये चीज बर्दाश्त नहीं कर पाईं नीता अंबानी! ऑन कैमरा की ऐसी हरकत

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Trending Video: आईपीएल 2025 के तीसरे मुकाबले में क्रिकेट के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक, महेंद्र सिंह धोनी की एंट्री ने स्टेडियम को झकझोर कर रख दिया. जैसे ही धोनी मैदान पर बल्लेबाजी के लिए उतरे, वैसे ही दर्शकों ने जबरदस्त शोर मचाकर उनका स्वागत किया. इस दौरान पूरा स्टेडियम “धोनी…धोनी…” के नारों से गूंज उठा. लेकिन इस माहौल में एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब मुंबई इंडियंस की मालिक नीता अंबानी इस शोर से बचने के लिए अपने दोनों कान बंद करती नजर आईं.

नीता अंबानी ने एमएस धोनी की एंट्री पर दोनों कान बंद किए

आईपीएल का क्रेज हर साल नई ऊंचाइयों को छूता है, लेकिन जब बात एमएस धोनी की हो, तो उनके चाहने वालों की दीवानगी अलग ही लेवल पर पहुंच जाती है. इस मैच में भी जैसे ही धोनी बल्लेबाजी के लिए निकले, पूरे स्टेडियम में एक साथ चीख-पुकार मच गई. चारों तरफ सिर्फ “थाला” के नाम की गूंज थी. लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया और कुछ फैंस तो भावुक भी हो गए. जहां एक तरफ धोनी के फैंस खुशी से झूम रहे थे, वहीं मुंबई इंडियंस की ओनर नीता अंबानी की प्रतिक्रिया ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

जैसे ही स्टेडियम में शोर बढ़ा, उन्होंने अपने दोनों कान बंद कर लिए. उनके इस रिएक्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. फैंस इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ लोगों ने इसे शोर से बचाव बताया, तो कुछ ने इसे धोनी की फैन फॉलोइंग की ताकत करार दिया.

चेन्नई ने जीता रोमांचक मुकाबला

एमएस धोनी क्रिकेट जगत के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं. भले ही उनका बल्ला हमेशा गरजता हो या ना हो, लेकिन उनकी मौजूदगी ही स्टेडियम को रोमांच से भर देती है. चाहे किसी भी टीम के फैंस हों, जब धोनी मैदान में आते हैं, तो तालियों और चीखों की गूंज से स्टेडियम गूंज उठता है. इस कल के इस शानदार मुकाबले में चैन्नई सुपर किंग्स ने मुंबई इंडियंस को 4 विकेट से हरा दिया.

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यूजर्स ने यूं किया रिएक्ट

वीडियो को सोशल मीडिया पर अलग अलग प्लेटफॉर्म से शेयर किया जा रहा है, जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…थाला फॉर ए रीजन. एक और यूजर ने लिखा…एम एस धोनी की बात ही अलग है. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…शोर से बचाव के लिए कान बंद करना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन क्या रोहित की एंट्री पर ऐसा होता तब भी कान बंद किए जाते?

यह भी पढ़ें: इसे पैदा नहीं डाउनलोड किया गया है…छोटी सी उम्र में दे रहा बड़े-बड़े जवाब, बच्चे की होशियारी देखकर आप भी हो जाएंगे हैरान 


सुशांत सिंह राजपूत केस में क्लिन चिट मिलने के बाद फैमिली के साथ सिद्धिविनायक गईं रिया चक्रवर्ती

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सुशांत सिंह राजपूत केस में क्लिन चिट मिलने के बाद फैमिली के साथ सिद्धिविनायक गईं रिया चक्रवर्ती, पापा-भाई के साथ दिए पोज

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अकेलापन या अकेला रहना… आपकी मेंटल हेल्थ के लिए क्या है सही? एक्सपर्ट से जानें काम की बात

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अकेलापन या अकेले रहना दोनों ही मेंटल हेल्थ को बुरी तरह प्रभावित करता है. कहते हैं न किसी भी चीज का अच्छा और बुरा दोनों तरह का असर होता है.  एक तरफ कुछ रिसर्चर कहते हैं कि अकेला रहना एक व्यक्ति के मेंटल हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है. क्योंकि उस दौरान वह क्वालिटी और प्रोडक्टिव काम कर सकता है.

वहीं कुछ ऐसे भी हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अकेले रहने से दिमाग पर बुरा असर पड़ता है. और इसके कई साइड इफेक्ट्स आपके शरीर पर दिखाई दे सकते हैं. अकेलापन दूसरे व्यक्ति से अलगाव की भावना को बढ़ाता है. सिर्फ इतना ही नहीं ज्यादा अकेले रहने वाले व्यक्ति के मेंटल और फिजकल दोनों तरह के हेल्थ पर काफी ज्यादा बुरा असर होता है. साइकोलॉजिस्ट आशा किरण सेल्फ बताती हैं कि जबकि कई बार ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति काफी ज्यादा एकांत या अकेले रहना पसंद करते हैं वह डिप्रेशन का शिकार का शिकार हो जाते हैं. वहीं कुछ लोग अकेले रहने को सेल्फ ग्रोथ के तौर पर देखते हैं. 

अकेले रहने के फायदे:

आत्म-चिंतन और माइंडफुलनेस: अकेले अगर खुद के साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं तो एक व्यक्ति अपने सेल्फ ग्रोथ पर ज्यादा फोकस कर पाता है. अपने विचारों और भावनाओं का पता लगाने और माइंडफुलनेस के प्रैक्टिस करने का एक सबसे बेहतरीन तरीका है अकेला रहना. 

 तनाव और चिंता में कमी: अकेले समय बिताने से सामाजिक दबाव कम करने और निरंतर उत्तेजना से ब्रेक लेने में मदद मिल सकती है. जिससे तनाव का लेवल कम हो सकता है.

 क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिव कामों में बढ़ोतरी: आप अकेले या एकांत रहते हैं तो आपकी प्रोडक्टिवी में बढ़ोतरी होकी है. सिर्फ इतना ही नहीं बिना किसी तरह के फोकस गवाएं आप फोकस के साथ किसी काम को बड़े मन से करते हैं. तो वो काम पहले से भी ज्यादा अच्छे तरीके से करते हैं. 
 
सेल्फ कॉन्फिडेंस और रिचार्ज: अकेले समय आपकी मानसिक और भावनात्मक बैटरी को रिचार्ज करने के लिए जरूरी होता है. जिससे आप तरोताजा महसूस करते हुए सामाजिक बातचीत में वापस आ सकते हैं. 

लाइफ में बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है: अकेले रहना फायदेमंद हो सकता है. लेकिन एकदम से अलगाव इंसान के लिए सही नहीं है. इससे बचने के लिए एकांत और सामाजिक संपर्क के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है.

जानबूझकर एकांत: सुनिश्चित करें कि आप जानबूझकर अकेले समय बिता रहे हैं और आप ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं जो आपकी भलाई को बढ़ावा देती हैं.

कई बार अकेलेपन दूसरी कई सारी बीमारी का कारण बन सकते हैं?

मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानी का जोखिम बढ़ाता है:

अकेलेपन से अवसाद, चिंता और दूसरी तरह की मानसिक तनाव और समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है. 

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शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं:

अकेलापन शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है. जिसके कारण दिल से जुड़ी बीमारी, कमजोर इम्युनिटी और दूसरी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं जैसी परेशानियों का जोखिम बढ़ता है.  

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ड्रैगन की मदद से भारत देगा ट्रंप के टैरिफ प्लान को मात, पढ़िए पूरा प्लान

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India-China: भारत और चीन के बीच सीमा तनाव में कमी आने के बाद अब केंद्र सरकार दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर विचार कर रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ कम करने का दबाव बनाए जाने के बीच नीति-निर्माता इसे भारत-चीन आर्थिक संबंधों को सुधारने का उपयुक्त समय मान रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मानना है कि चीन के साथ व्यापारिक संबंध सामान्य करने से अमेरिका को स्पष्ट संदेश मिलेगा और ट्रंप के दबाव से निपटने में मदद मिलेगी. सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार के विभिन्न विभागों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि चीन के साथ व्यापार और निवेश पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत दी जाए. ये प्रतिबंध 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद लगाए गए थे.

सरकार उठा सकती है ये बड़ा कदम 

औद्योगिक क्षेत्र से मिल रही मांगों के आधार पर सरकार कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है. इनमें चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियमों में ढील, चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी और कुछ प्रतिबंधित चीनी ऐप्स को दोबारा अनुमति देने जैसे कदम शामिल हैं.

इसके अलावा, चीनी स्कॉलर्स के लिए वीजा जारी करने और भारत-चीन के बीच हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. निवेश के क्षेत्र में भी भारत सरकार बीजिंग से पूंजी प्रवाह की अनुमति देने पर विचार कर रही है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को संतुलित किया जा सके. वर्तमान नीति के अनुसार, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से होने वाले निवेश के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है.

अमेरिका को स्पष्ट संदेश देने की रणनीति

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार के कुछ अधिकारियों का मानना है कि चीन के साथ व्यापार संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाने से अमेरिका को यह संकेत दिया जा सकता है कि भारत अपनी व्यापार नीति को लेकर स्वतंत्र फैसले लेने में सक्षम है. सरकार चीन के साथ व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील देकर यह जताना चाहती है कि वह अपने हितों के अनुसार नीतिगत निर्णय ले सकती है. वित्त मंत्रालय ने इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में व्यापार प्रतिबंधों में कुछ ढील देने के पक्ष में एक प्रस्तुति भी दी थी. वहीं, वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी चीन से आयातित उत्पादों पर अनिवार्य बीआईएस (BIS) प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCOs) को लेकर भी विचार कर रहे हैं.

छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए लाभदायक होगा निर्णय

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, व्यापार संबंधों को बहाल करना अब आवश्यक हो गया है, खासकर ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के बाद के दौर में. छोटे और मध्यम उद्योगों से लंबे समय से व्यापार और गैर-व्यापारिक बाधाओं को हटाने की मांग की जा रही थी. इसके अलावा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कार्यरत चीनी तकनीशियनों और श्रमिकों को भारत में काम करने की अनुमति देने के लिए वीजा नियमों में कुछ राहत देने पर भी चर्चा हो रही है.

व्यापार बहाली का इच्छुक है चीन 

सूत्रों के अनुसार, चीन भी भारत के साथ व्यापार संबंधों को पुनः स्थापित करने का इच्छुक है. चीन ने भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को ध्यान में रखते हुए भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव दिया है. 2023 में भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा 83 अरब डॉलर से अधिक हो गया था. भारत से चीन को मुख्य रूप से प्राथमिक उत्पादों का निर्यात किया जाता है, जबकि चीन से आयातित वस्तुओं में भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा की कमी देखी जाती है, जिससे यह घाटा बढ़ता जा रहा है.

धीरे-धीरे मिलेगी छूट

भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चीन के साथ व्यापारिक प्रतिबंधों में धीरे-धीरे छूट दी जा सकती है, जिससे चीनी कंपनियों को भारत में निवेश की अनुमति मिलेगी. हालांकि, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि चीनी कंपनियों की भागीदारी केवल भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी में हो और उन परियोजनाओं में चीन की हिस्सेदारी अल्पसंख्यक रहे. इससे भारत में चीनी निवेश को नियंत्रित ढंग से प्रोत्साहित किया जा सकेगा, जिससे भारतीय बाजार और कंपनियों को लाभ मिलेगा.

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क्या सिर्फ नाम के कप्तान हैं गायकवाड़? धोनी ही हैं CSK के लीडर! खुद उठाया बड़े राज से पर्दा

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MS Dhoni on Captain Ruturaj Gaikwad: चेन्नई सुपर किंग्स, IPL की सबसे सफल टीमों में से एक है. एमएस धोनी ने अपनी कप्तानी में इस टीम को पांच बार चैंपियन बनाया है, लेकिन पिछले वर्ष यानी IPL 2024 से पहले ही उन्होंने चेन्नई की कमान ऋतुराज गायकवाड़ के हाथों में सौंप दी थी. गायकवाड़ का व्यक्तिगत प्रदर्शन सीजन दर सीजन बेहतर होता गया है, साथ ही अपनी कप्तानी से भी उन्होंने प्रभावित किया है. मगर बहुत से लोगों का मानना है कि अब भी बहुत हद तक CSK टीम को धोनी ही चला रहे हैं. इस विषय पर खुद धोनी ने चुप्पी तोड़ी है.

हाल ही में धोनी ने जियो हॉटस्टार को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने खुलासा किया कि मैच के दौरान अधिकांश फैसले खुद गायकवाड़ ही लेते हैं. उन्होंने कहा, “टूर्नामेंट शुरू होने से पहले मैंने उनसे कहा था, ‘मैं अगर तुम्हें कोई सलाह दे रहा हूं, तो जरूरी नहीं कि उसे तुम्हें मानना ही मानना है. मैं कोशिश करूंगा कि टीम के फैसलों से दूरी ही बनाए रखूं.’ जब पिछला सीजन चल रहा था तब बहुत सारे लोगों ने कयास लगाए जैसे पीछे से टीम के सारे फैसले मैं ले रहा था. मगर सच्चाई यही है कि टीम के 99% फैसले गायकवाड़ ही ले रहे थे.”

ऋतुराज में कुछ खास है – धोनी

एमएस धोनी ने कहा कि ऋतुराज गायकवाड़ को CSK से जुड़े काफी समय हो गया है और उन्होंने टीम के लिए अच्छा किया है. धोनी ने कहा, “वो बहुत विनम्र और शांत रहते हैं. उनके और स्टीफन फ्लेमिंग के बीच काफी अच्छा तालमेल है. ये कारण थे कि हमने उन्हें लीडरशिप के रोल के लिए चुना था. जब पिछला IPL सीजन समाप्त हुआ तो मैंने उनसे कहा अगले सीजन टीम की 90 प्रतिशत जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर ही होगी. इसलिए मानसिक रूप से खुद को तैयार कर लो.”

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अब 49 रुपये एक्स्ट्रा देकर करनी होगी ऑनलाइन शॉपिंग? सामने आई बड़ी जानकारी, जानिए किन ग्राहकों पर पड़ेगा असर

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यदि बैंक डिस्काउंट 500 रुपये से अधिक है तो ग्राहक को 49 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा जिससे उनकी कुल बचत पर असर पड़ेगा. यह शुल्क अमेज़न द्वारा लागू किया गया है और इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शुल्क अमेज़न प्राइम मेंबर्स पर भी लागू होगा.

यदि बैंक डिस्काउंट 500 रुपये से अधिक है तो ग्राहक को 49 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा जिससे उनकी कुल बचत पर असर पड़ेगा. यह शुल्क अमेज़न द्वारा लागू किया गया है और इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शुल्क अमेज़न प्राइम मेंबर्स पर भी लागू होगा.

अमेज़न के अनुसार, यह शुल्क बैंक ऑफर्स को मैनेज, एग्रीगेट और प्रोसेस करने की लागत को कवर करने के लिए लिया जा रहा है.

अमेज़न के अनुसार, यह शुल्क बैंक ऑफर्स को मैनेज, एग्रीगेट और प्रोसेस करने की लागत को कवर करने के लिए लिया जा रहा है.

अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये की खरीदारी करता है और 10% यानी 1,000 रुपये का बैंक डिस्काउंट मिलता है तो उसे 9,000 रुपये की बजाय 9,049 रुपये चुकाने होंगे.

अगर कोई ग्राहक 10,000 रुपये की खरीदारी करता है और 10% यानी 1,000 रुपये का बैंक डिस्काउंट मिलता है तो उसे 9,000 रुपये की बजाय 9,049 रुपये चुकाने होंगे.

यह कोई नई नीति नहीं है, क्योंकि फ्लिपकार्ट पहले से ही ऐसा प्रोसेसिंग शुल्क ले रहा है. अब अमेज़न ने भी इसे लागू कर दिया है. अगर ग्राहक ऑर्डर कैंसल या रिटर्न कर देता है, तब भी 49 रुपये की प्रोसेसिंग फीस वापस नहीं की जाएगी.

यह कोई नई नीति नहीं है, क्योंकि फ्लिपकार्ट पहले से ही ऐसा प्रोसेसिंग शुल्क ले रहा है. अब अमेज़न ने भी इसे लागू कर दिया है. अगर ग्राहक ऑर्डर कैंसल या रिटर्न कर देता है, तब भी 49 रुपये की प्रोसेसिंग फीस वापस नहीं की जाएगी.

अगर बैंक डिस्काउंट 500 रुपये से कम है, तो यह शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसलिए ग्राहकों को छूट और अतिरिक्त शुल्क की गणना ध्यान से करनी होगी.

अगर बैंक डिस्काउंट 500 रुपये से कम है, तो यह शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसलिए ग्राहकों को छूट और अतिरिक्त शुल्क की गणना ध्यान से करनी होगी.

अगर ग्राहक 49 रुपये का शुल्क नहीं देना चाहते, तो वे पेमेंट का तरीका बदल सकते हैं और बैंक डिस्काउंट का उपयोग करने से बच सकते हैं.

अगर ग्राहक 49 रुपये का शुल्क नहीं देना चाहते, तो वे पेमेंट का तरीका बदल सकते हैं और बैंक डिस्काउंट का उपयोग करने से बच सकते हैं.

नए शुल्क की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग पर मिलने वाली छूट कम हो जाएगी, जिससे ग्राहकों को पहले की तुलना में कम फायदा होगा.

नए शुल्क की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग पर मिलने वाली छूट कम हो जाएगी, जिससे ग्राहकों को पहले की तुलना में कम फायदा होगा.

Published at : 24 Mar 2025 01:18 PM (IST)

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राहु-केतु गोचर 2025 राशियों पर प्रभाव

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राहु का गोचर 18 मई 2025 को होगा. इस दिन राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे. वहीं इसी दिन केतु सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. राहु-केतु मायावी ग्रह हैं. इनका गोचर जीवन में उथल-पुथल मचा देता है, तो वहीं कुछ राशियों को छप्पर फाड़ धन मिलता है.

राहु का गोचर 18 मई 2025 को होगा. इस दिन राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे. वहीं इसी दिन केतु सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. राहु-केतु मायावी ग्रह हैं. इनका गोचर जीवन में उथल-पुथल मचा देता है, तो वहीं कुछ राशियों को छप्पर फाड़ धन मिलता है.

सिंह राशि वालों को केतु के अशुभ प्रभाव के कारण सेहत संबंधी समस्याएं झेलनी पड़ सकती है. लक्ष्य से भटक सकते हैं. नौकरी में बदलाव करने की स्थिति भी आ सकती है.

सिंह राशि वालों को केतु के अशुभ प्रभाव के कारण सेहत संबंधी समस्याएं झेलनी पड़ सकती है. लक्ष्य से भटक सकते हैं. नौकरी में बदलाव करने की स्थिति भी आ सकती है.

मेष राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर आपके एकादश भाव से होगा. आपकी योजनाएं सफल होंगी. काम के सिलसिले में यात्रा सुखद रहेगी. शेयर मार्केट से अच्छा मुनाफा होगा.

मेष राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर आपके एकादश भाव से होगा. आपकी योजनाएं सफल होंगी. काम के सिलसिले में यात्रा सुखद रहेगी. शेयर मार्केट से अच्छा मुनाफा होगा.

तुला राशि वालों के लिए राहु मुसीबत खड़ी कर सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव के साथ मनमुटाव भी बढ़ सकता है. पार्टनरशिप में काम करने का विचार टाल दें नुकसान हो सकता है.

तुला राशि वालों के लिए राहु मुसीबत खड़ी कर सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव के साथ मनमुटाव भी बढ़ सकता है. पार्टनरशिप में काम करने का विचार टाल दें नुकसान हो सकता है.

राहु-केतु का गोचर वृषभ राशि के जातकों पर अच्छा प्रभाव डालेगा. कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी. तरक्की प्राप्त होगी. विरोधी काम के आड़े नहीं आएंगे. संपत्ति से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.

राहु-केतु का गोचर वृषभ राशि के जातकों पर अच्छा प्रभाव डालेगा. कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी. तरक्की प्राप्त होगी. विरोधी काम के आड़े नहीं आएंगे. संपत्ति से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी.

राहु-केतु का गोचर के अशुभ परिणाम के कारण कार्यक्षेत्र में बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है. राजनीति से जुड़े लोगों को कानून की मामले में उलझ सकते हैं. जीवनसाथी से रिश्तों में विवाद बढ़ सकता है.

राहु-केतु का गोचर के अशुभ परिणाम के कारण कार्यक्षेत्र में बहुत संघर्ष करना पड़ सकता है. राजनीति से जुड़े लोगों को कानून की मामले में उलझ सकते हैं. जीवनसाथी से रिश्तों में विवाद बढ़ सकता है.

Published at : 24 Mar 2025 01:11 PM (IST)

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दुल्हन की ब्राइडमेड बनने के लिए सहेली से ही मांग लिए 90 हजार, जमकर मचा हंगामा और दोस्ती खत्म!

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दुल्हन की ब्राइडमेड बनने के लिए सहेली से ही मांग लिए 90 हजार, जमकर मचा हंगामा और दोस्ती खत्म!

इंश्योरेंस पर सरकार जल्द उठाने जा रही बड़ा कदम, कम हो जाएगा आपका प्रीमियम

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GST Council Meeting: लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance) और हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) पर लगने वाले जीएसटी में कटौती की जा सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की अध्यक्षता में जल्द होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर जीएसटी रेट को 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जा सकता है. हालांकि इसपर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलता रहेगा. जीएसटी रेट में कमी से सरकार के खजाने में से 36000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है. 

जीएसटी काउंसिल ने जो मंत्रियों के समूह का गठन किया है उसके ज्यादातर सदस्य जिन्होंने टैक्स रेट को रिव्यू किया है वो लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी को घटाने के पक्ष में हैं. हालांकि वे पूरी तरह लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी को खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं. उनका मानना है कि इससे पूरी तरह जीएसटी खत्म किए जाने से लागत बढ़ जाएगी. इंश्योरेंस इंडस्ट्री 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने के पक्ष में है. हालांकि इसपर आखिरी फैसला जीएसटी काउंसिल को लेना है. 

इंश्योरेंस सेक्टर की रेगुलेटर आईआरडीएआई (IRDAI) ने भी स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी कम करने को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी है. मंत्रियों के समूह (जीओएम) आने वाले दिनों में अपनी बैठक में इसपर विचार करेगी. इसके बाद मंत्रियों की समूह जीएसटी काउंसिल को अप्रैल या मई महीने में होने वाली बैठक में लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी रेट में कटौती पर विचार करेगी. जीएसटी काउंसिल ने इससे पहले 21 दिसंबर को अपनी बैठक में स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी में छूट देने या इसे कम करने के निर्णय को नियामक से आगे की जानकारी मिलने तक के लिए टाल दिया था. 

विपक्ष लगातार लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी रेट में कटौती की मांग करता आया है. संसद की स्थाई समिति भी इसकी सिफारिश कर चुकी है. बीते तीन सालों में हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर जीएसटी लगाकर 21,256 करोड़ रुपये और  हेल्थ रीइंश्योरेंस प्रीमियम पर 3274 करोड़ रुपये जीएसटी वसूली की गई है. जीएसटी के लागू होने के बाद से ही हेल्थ इंश्योरेंस पर 18 फीसदी जीएसटी लग रहा है. 

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