न्यूजीलैंड के खिलाफ रोजा रखकर खेली पाकिस्तान की टीम, इफ्तारी का वीडियो आया सामने

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Pakistan Team Iftar: तीसरे टी20 मैच में पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड को 9 विकेट से हराकर स्तब्ध कर दिया है. पाकिस्तान को 205 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे उसने 4 ओवर शेष रहते प्राप्त कर लिया. हसन नवाज ने नाबाद 105 रनों की पारी खेल कीवियों को भौंचक्का कर दिया था. अब एक वीडियो सामने आया है जिसमें पाकिस्तानी खिलाड़ी इफ्तार करते दिखे. यानी पाक टीम के सभी खिलाड़ियों ने रोजा रखकर न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरा टी20 मैच खेला था.

बता दें कि सामने आया यह वीडियो उस समय का है जब न्यूजीलैंड ने 5 ओवर में दो विकेट के नुकसान पर 49 रन बना लिए थे. तभी पाकिस्तान की पूरी टीम इकट्ठा हुई और शाम के समय सभी खिलाड़ियों ने पानी और जूस जैसी चीजें पीकर रोजा खत्म किया. पाकिस्तानी फैंस कमेन्ट सेक्शन में अपनी टीम पर गर्व करने की बात कहते दिखे.


मैच में क्या-क्या हुआ

बता दें कि कीवी टीम के लिए मार्क चैपमैन ने 94 रनों की शानदार पारी खेली थी, लेकिन हसन नवाज की पारी उनपर भारी पड़ी. न्यूजीलैंड के लिए कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने भी 31 रनों की पारी खेली. टीम का कोई अन्य बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं कर पाया. जब पाक टीम की बैटिंग आई तो मोहम्मद हारिस ने 20 गेंद में 41 रनों की तेजतर्रार पारी खेली, हसन नवाज ने 44 गेंदों में सेंचुरी लगाई और पाकिस्तान के लिए टी20 क्रिकेट में सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बने. उन्होंने 45 गेंद में 105 रन बनाए थे. कप्तान सलमान आगा ने  भी 51 रनों का योगदान दिया था.

तीसरा मैच जीत जाने के बाद भी पाकिस्तान पांच टी20 मैचों की सीरीज में 1-2 से पिछड़ रहा है. अभी शृंखला में 2 मैच और खेले जाने बाकी हैं. उसके बाद पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच 3 वनडे मैचों की सीरीज भी खेली जानी है.

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UPI में Pull Transaction के जरिए हो रहे स्कैम, पलक झपकते ही उड़ जाएंगे पैसे, ऐसे रहें सुरक्षित

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आजकल साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से साइबर क्राइम को अंजाम दे रहे हैं. इससे लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऐसा ही एक स्कैम UPI में Pull Transaction के नाम पर हो रहा है. इसमें स्कैमर लोगों के पास पेमेंट रिक्वेस्ट भेजते हैं. अगर कोई गलती से इसे एक्सेप्ट कर लेता है तो उसके खाते से पैसे उड़ जाते हैं. स्कैम के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब इस तरीके को बंद करने पर विचार हो रहा है. 

क्या है Pull Transaction?

Pull Transaction में कोई मर्चेंट ग्राहक के पास पेमेंट रिक्वेस्ट भेजता है. इसमें पेमेंट की रकम पहले से दी गई होती है. पेमेंट करने के लिए ग्राहक को केवल UPI पिन डालना होता है. दूसरी तरफ Push Transaction वह होती है, जिसमें ग्राहक खुद QR कोड स्कैन कर या दूसरे तरीकों से मर्चेंट को पेमेंट करता है. इसमें रकम भी खुद ग्राहक भरता है. RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 की पहली छमाही में पुल ट्रांजैक्शन से जुड़ी 27,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं हैं.

तरीके को बंद करने पर हो रहा विचार

पुल ट्रांजेक्शन के जरिए बढ़ रहे साइबर अपराधों को रोकने के लिए इसे बंद करने पर विचार किया जा रहा है. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इसके लिए बैंकों से बातचीत कर रहा है. अभी तक यह बातचीत बहुत शुरुआती चरण में है और इसे लागू करने पर कोई फैसला नहीं हुआ है. 

UPI से होने वाले स्कैम से कैसे बचें?

  • किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से UPI पिन समेत कोई भी संवेदनशील जानकारी शेयर न करें.
  • UPI पर आई पेमेंट रिक्वेस्ट को ध्यान से देखें. आपने जितनी कीमत का सामान लिया है, उतने ही पैसों की रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करें.
  • UPI ऐप्स को हमेशा ऑफिशियल सोर्स से ही डाउनलोड करें. अनजान व्यक्ति के भेजे लिंक से कभी भी ऐप डाउनलोड न करें.
  • पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय सावधान रहें. साथ ही बैंक से आने वाले मैसेज को ध्यान से देखते रहें. संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें.

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Shani Gochar 2025: दुनिया में बड़े बदलाव लेकर आएगा मीन राशि में शनि का गोचर

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Shani Gochar 2025: शनि का गोचर (Saturn Transit) भारतीय वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है. पूर्व की घटनाओं के देखें तो पाएंगे कि जब-जब शनि देव (Shani Dev) मीन राशि में आए हैं, तब-तब वैश्विक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों की लहर देखी गई है. एक बार शनि मीन राशि में आ रहे हैं, पुरानी घटनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण करते हुए जानने का प्रयास करते हैं कि इस बार शनि गोचर के क्या परिणाम देखने के संकेत मिल रहे हैं.

वैदिक ज्योतिषीय दृष्टिकोण
शनि देव (Shani Dev) को “कर्मफल दाता” और “संहारक ग्रह” माना जाता है, जो न्याय का कारक होता है. जब यह मीन राशि में गोचर करता है, तो यह गहरे भावनात्मक और सामाजिक बदलाव लाता है. मीन राशि एक जल तत्व की राशि है, जिसके स्वामी देव गुरु बृहस्पति (Jupiter) हैं. इसलिए शनि के गोचर से वैश्विक जल संकट, समुद्री गतिविधियां और जलवायु परिवर्तन पर असर हो सकता है. साथ ही गुरु और शनि के संयोग या दृष्टि से न्यायिक और प्रशासनिक क्षेत्र में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.

ऐतिहासिक घटनाएं जब शनि मीन राशि में था-








साल (वर्ष) शनि मीन में गोचर की अवधि महत्वपूर्ण घटनाएं ज्योतिषीय विश्लेषण
1903-1905 अप्रैल 1903 – जून 1905

1- रूस-जापान युद्ध (1904-05)

2- पहला वायुयान उड़ान (राइट ब्रदर्स, 1903)

3- रूसी क्रांति की शुरुआत (1905)

1- शनि-गुरु की युति: युद्ध और औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा.

2- शनि-चंद्र संबंध: रूस में अशांति.

1933-1935 मई 1933 – जून 1935

1- हिटलर का सत्ता में आना (1933)

2- अमेरिका में न्यू डील (1933)

3- इटली का इथियोपिया पर हमला (1935)

1- शनि-राहु प्रभाव: अधिनायकवादी शासन का उदय.

2- गुरु का प्रभाव: आर्थिक सुधार और नई नीतियां.

1963-1966 मार्च 1963 – अप्रैल 1966

1- अमेरिका में राष्ट्रपति केनेडी की हत्या (1963)

2- वियतनाम युद्ध में अमेरिका की बढ़ती भागीदारी (1965)

3- भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965)

1- शनि-केतु युति: राजनीतिक हत्या और वैश्विक संघर्ष.

2- गुरु की दृष्टि: भारत में युद्ध और विस्तारवाद.

1993-1996 अप्रैल 1993 – अप्रैल 1996

1- यूरोपीय संघ की स्थापना (1993)

2-रवांडा नरसंहार (1994)

3- विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना (1995)

4- भारत में आर्थिक सुधार (1995-96)

1- शनि-मंगल दृष्टि: सामाजिक हिंसा और नरसंहार.

2- शनि-गुरु का प्रभाव: वैश्वीकरण को बढ़ावा.

2025-2028 से जुड़ी भविष्यवाणी
शनि 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश करेगा और 7 मई 2027 तक वहीं रहेगा. इस दौरान, विभिन्न क्षेत्रों पर इसका असर देखने को मिलेगा.

  1. वैश्विक आर्थिक स्थिति:
    आर्थिक मंदी का खतरा, कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर हो सकती हैं.
    क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल करेंसी को बढ़ावा, शनि मीन में तकनीकी वित्तीय सुधारों को जन्म दे सकता है.
    बैंकिंग और वित्तीय घोटाले, क्योंकि शनि न्यायधीश ग्रह है, भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा संभव.
  2. राजनीतिक उथल-पुथल:
     बड़ी सरकारों में सत्ता परिवर्तन, अमेरिका, रूस, चीन और भारत में राजनीतिक अस्थिरता संभव.
     युद्ध और संघर्ष, दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप में सैन्य गतिविधियां बढ़ सकती हैं.
    नए गठजोड़ और संधियां, जैसे 1993 में WTO की स्थापना हुई थी, वैसे ही नए व्यापारिक समझौते बन सकते हैं.
  3. विज्ञान और तकनीक में क्रांति:
    अंतरिक्ष और AI तकनीक का उछाल, NASA, ISRO और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां नई खोज करेंगी.
    चंद्रमा और मंगल मिशन में बढ़ोतरी, जैसे 1903 में पहला हवाई जहाज बना, वैसे ही अंतरिक्ष में बड़ी छलांग संभव.
    बायोटेक और फार्मा इंडस्ट्री में नए आविष्कार, चिकित्सा क्षेत्र में नई दवाइयों और इलाज की खोज होगी.
  4. सामाजिक और धार्मिक परिवर्तन:
    विश्व स्तर पर आध्यात्मिक जागृति, नए धार्मिक, ध्यान और योग आंदोलन उभर सकते हैं.
    विध्वंसक मानसिकता, जातीय और धार्मिक संघर्ष बढ़ सकते हैं.
    पारिवारिक संरचना में बदलाव, विवाह, तलाक और रिश्तों के पैटर्न बदल सकते हैं.

भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

भारतीय अर्थव्यवस्था:

  • बाजार में भारी उतार-चढ़ाव.
  • स्टार्टअप सेक्टर में सुधार और छंटनी के दौर के बाद नई नौकरियों का सृजन.

राजनीतिक घटनाएं:

  • सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व का उभरना.
  • न्यायिक और प्रशासनिक सुधार.

प्राकृतिक आपदाएं:

  • जलवायु परिवर्तन के कारण चक्रवात और भूकंप.
  • समुद्री क्षेत्रों में प्राकृतिक घटनाओं की संभावना.

शनि गोचर को लेकर शास्त्र क्या कहते हैं-

  • बृहत् संहिता (वराहमिहिर): शनि के जल तत्व राशि में गोचर से सामाजिक उथल-पुथल का संकेत मिलता है.
  • फलदीपिका (मंत्रेश्वर): शनि-गुरु के संयोग से बड़े आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन होते हैं.
  • लघु पराशरी (पाराशर मुनि): शनि के मीन राशि में आने से प्राकृतिक आपदाएं और जल संकट की स्थिति बनती है.

प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रीय ज्योतिषीय सिद्धांतों में शनि गोचर को महत्वपूर्ण माना गया है-

1. बृहत् संहिता (वराहमिहिर) 
बृहत् संहिता के ग्रहचारे प्रभावाध्याय (Chapter on Planetary Transits) में बताया गया है कि जब शनि जल तत्व राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) में प्रवेश करता है, तो समुद्री और जलीय आपदाएं, व्यापार में अस्थिरता, और वैश्विक सत्ता परिवर्तन होते हैं.

श्लोक:

“शनि: समुद्रे यदि संचरति, तदा महती वारिवृष्टिर भवति.”
अर्थ- यदि शनि जल राशि में संचरण करता है, तो वर्षा अधिक होती है, समुद्री व्यापार प्रभावित होता है, और जल से जुड़ी आपदाएं आती हैं. 1963-66 में जब शनि मीन में था, तब समुद्री तूफान, बाढ़ और चक्रवात की घटनाएं देखी गई थीं.

2. फलदीपिका
फलदीपिका के शनि फलाध्याय (Effects of Saturn) में वर्णित है कि जब शनि मीन राशि में स्थित होता है, तो वैश्विक न्याय व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि होती है.

श्लोक:

“शनि: गुरुपथे यदि संचरति, धर्मसंस्थानं, राजसत्ता परिवर्त्तनं, चौर्यकर्म प्रवृद्धयश्च.”
अर्थ- जब शनि गुरु की राशि में गोचर करता है (धनु या मीन), तो धर्म, न्याय और प्रशासन में बड़े बदलाव आते हैं, सत्ता परिवर्तन होता है, और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है.

(शनि न्याय का कारक है और मीन राशि आध्यात्मिकता और नीतिगत सुधारों की प्रतीक है. 1993-96 (पिछली शनि मीन गोचर) के दौरान विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना और यूरोपीय संघ (EU) का गठन हुआ था.)

 3. लघु पराशरी (पराशर मुनि) 
लघु पराशरी ग्रंथ के अनुसार, शनि के जल तत्व राशि में गोचर से वैश्विक युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और सत्ता संघर्ष होते हैं.

श्लोक:

“शनि: जलराशौ स्थिते, नृणां महतां युध्दं, क्षेत्राणि विपत्तिं, जलदोषश्च जायते.”
अर्थ- जब शनि जल राशि (कर्क, वृश्चिक, मीन) में स्थित होता है, तो युद्ध, कृषि क्षेत्र में नुकसान और जल से संबंधित संकट उत्पन्न होते हैं. इस श्लोक से स्पष्ट है कि शनि का मीन में गोचर युद्ध और आपदाओं को जन्म दे सकता है. 1933-35 (हिटलर का उदय और द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत) और 1963-66 (भारत-पाक युद्ध) इस गोचर के दौरान हुए.

4. बृहद् जातक (वराहमिहिर)
बृहद् जातक के अनुसार, जब शनि मीन राशि में होता है, तब बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल और आध्यात्मिक आंदोलन देखने को मिलते हैं.

श्लोक:

“शनि: जलराशौ स्थिते, धर्मनाशो वा नूतनधर्मोत्पत्तिः.”
अर्थ- जब शनि जल राशि (विशेषकर मीन) में होता है, तो या तो धर्म की हानि होती है, या कोई नया धर्म या विचारधारा जन्म लेती है.

5. जातक परिजात
शनि जब मीन राशि में प्रवेश करता है, तो नौकरी और उद्योग जगत में भारी बदलाव, बेरोजगारी में वृद्धि और श्रम संकट होता है.

श्लोक:

“शनि: मीनराशौ स्थिते, कर्मक्लेशो, उद्योगे विलंबः, एवं च विपन्नश्रमः.”
अर्थ- जब शनि मीन राशि में होता है, तब कामकाजी वर्ग को कठिनाइयां होती हैं, उद्योगों में रुकावटें आती हैं, और श्रमिकों को संकट का सामना करना पड़ता है. पूर्व में देखें तो 1933-35 और 1993-96 (शनि मीन गोचर) के दौरान कई देशों में बेरोजगारी दर बढ़ी थी. 2025-28 में भी वैश्विक मंदी और जॉब लॉस की संभावना बन रही है. 

भविष्यवाणी 2025-2028

  • शनि का मीन राशि में गोचर 2025-2028 तक रहेगा, जो वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव ला सकता है. सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग कठोरता से अपनी नीतियों को लागू करने का प्रयास करेंगे, इससे देशों के बीच आपसी टकराव की स्थिति भी बन सकती है, एक दूसरे पर प्रतिबंध लगाने जैसे फैसले ले सकते हैं. भूगोल बदलने का भी प्रयास किया जा सकता है. छोटे देशो के सामने चुनौतियां आ सकती हैं.
  • आर्थिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक और सामाजिक परिवर्तन होंगे, जिनका प्रभाव लंबे समय तक रहेगा.

ज्योतिषीय गणना से ऐसा प्रतीत होता है कि यह समय ‘पुराने युग के अंत और नए युग की शुरुआत’ के लिए जाना जाएगा.

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इजरायली एयरस्ट्राइक में हुई मां-बाप की मौत, गाजा में मलबे से जिंदा निकली एक महीने की नवजात बच्च

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Israel Gaza War: मिडिल ईस्ट में इजरायल और हमास के बीच सीजफायर टूटने के बाद से इजारयली सेना लगातार गाजा में हवाई हमले कर रही है. इस बीच गाजा पट्टी में एक ऐसी घटना घटी, जिसे पूरी दुनिया चमत्कार मान रही है. खान यूनिस में इजारायली हमले में ध्वस्त हुए बिल्डिंग के मबले में एक साल की बच्ची जिंदा निकला, जबकि इस हमले में उनके माता-पिता की मौत हो गई. जब लोगों को इस बात को पता चला तो उस बच्ची को देखते के लिए हजारों लोगों की भीड़ वहां जुट गई.

मबले से आ रही थी रोने की आवाज

न्यूज एजेंसी एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के खान यूनिस में गुरुवार (20 मार्च 2025) को जब बचावकर्मी ढही हुई एक अपार्टमेंट के मलबे को हटा रहे तो उन्हें नीचे से एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी. इसके बाद बचावकर्मी ने वहां से मलबा हटाना शुरू किया तो उन्हें एक छोटी बच्ची दिखी. ये देखकर बचावदल आश्चर्यचकित रह गए. उन्हेंने वहां से मलबे को हटाया और बच्ची को कंबल में लपेटकर वहां से सुरक्षित निकाला. इसके बाद वहां गॉड इज ग्रेट का जयकारा गूंज उठा.

दादा-दादी को छोड़कर परिवार को गया खत्म

रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया, “वह बच्ची एक महीने की है और गुरुवार सुबह से ही मलबे के नीचे दबी हुई थी. वह रो रही थी और फिर बीच-बीच में चुप हो जाती थी.” उन्होंने बताया कि बच्ची की पहचान एला ओसामा अबू दग्गा के रूप में की गई और करीब 25 दिन पहले उसका जन्म हुआ था. उन्होंने कहा कि बच्ची के जन्म ऐसे समय में हुआ था जब पूरा फिलीस्तान ये उम्मीद कर रहा था कि अब युद्ध विराम हो जाएगा. हालांकि ऐसा हुआ नहीं और सीजफायर टूटने के साथ ही इजरायल ने गाजा में अब तक के सबसे तेज हमले शुरू कर दिए.

इस हमले में जीवित बची बच्ची के माता-पिता और की मौत हो गई, जबकि लड़की के दादा-दादी अभी जीवित हैं. इस परिवार में जिंदा बची लड़की को मिलाकर कुल सात बच्चे थे, जिसमें से एक को छोड़कर अब सभी की मौत हो गई. बच्ची की दादी का नाम फातिमा अबू दग्गा जो हमले के समय एक रिश्तेदार के घर पर बैठी हुई थीं. उन्होंने कहा, हमें पता था कि किसी भी समय युद्ध फिर से शुरू हो सकता है. हमें कई ऐसा नहीं लगा कि स्थिति सामान्य हो गई हो.

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असम यूनिवर्सिटी सिलचर में इस साल नहीं होगी ‘दावत-ए-इफ्तार’, प्रशासन ने अनुमति देने से किया इनका

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<p style="text-align: justify;">असम यूनिवर्सिटी सिलचर में इस साल रमजान के मौके पर होने वाली ‘दावत-ए-इफ्तार’ का आयोजन नहीं होगा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों द्वारा आयोजित किए जा रहे इस इफ्तार कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों की इजाजत नहीं दी जाती, ताकि संस्थान की धर्मनिरपेक्ष छवि बरकरार रखी जा सके.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पिछले दो वर्षों में हो चुका है सफल आयोजन</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आयोजकों ने इस फैसले पर कहा है कि बीते दो वर्षों में बिना किसी अड़चन के ‘दावत-ए-इफ्तार’ का सफल आयोजन हुआ था, जिसमें विश्वविद्यालय के अधिकारी भी शामिल हुए थे. लेकिन इस साल इफ्तार कार्यक्रम के लिए समय पर अनुमति न मिलने के कारण इसे रद्द करना पड़ा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;<a title="शिक्षा व्यवस्था में अमेरिका से बेहतर है भारत का ये पड़ोसी मुल्क, नाम जानकर हैरान रह जाएंगे आप" href=" target="_blank" rel="noopener">शिक्षा व्यवस्था में अमेरिका से बेहतर है भारत का ये पड़ोसी मुल्क, नाम जानकर हैरान रह जाएंगे आप</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>छात्र ने कही ये बात</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इफ्तार आयोजन समिति के सदस्य और मास्टर्स के छात्र आर.के. आज़ाद चौधरी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए लिखा नियम तो नियम हैं, हम पूरी तरह समझते हैं. धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता का हम सम्मान करते हैं. लेकिन उम्मीद करते हैं कि भविष्य में निष्पक्षता का यह भाव समान रूप से सब पर लागू हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें- ​<a href=" पाकिस्तान के लिए सख्त, भारत के लिए बेहतर; पाक छात्र बोले- हमें भी चाहिए ​​मजबूत​ नेतृत्व</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>22 मार्च को प्रस्तावित था ‘दावत-ए-इफ्तार 2025′</strong></p>
<p style="text-align: justify;">छात्रों का यह भी कहना है कि इफ्तार केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक मेलजोल और भाईचारे का प्रतीक है. बताते चलें कि ‘दावत-ए-इफ्तार 2025’ का आयोजन 22 मार्च को प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे रद्द कर दिया गया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें-&nbsp;<a href=" Board 12th Result 2025: काउंटडाउन शुरू! अगले हफ्ते आ सकता है बिहार बोर्ड 12वीं का रिजल्ट, ऐसे कर पाएंगे चेक</a></strong></p>

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पुरुषों के मुकाबले ज्यादातर महिलाओं को ही क्यों होती है खून की कमी? जानें इसे दूर करने के 5 तरीके

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National Anaemia Day: पुरुषों के मुकाबले ज्यादातर महिलाओं को ही क्यों होती है खून की कमी? जानें इसे दूर करने के 5 तरीके

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8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर तो बढ़ जाएगा…लेकिन कर्मचारियों की सैलरी उतनी नहीं बढ़ेगी!

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8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की जब से घोषणा हुई है, इसके बाद से ही केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन और पेंशन में संशोधन के आधार ‘फिटमेंट फैक्टर’ को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.92 से 2.86 के बीच हो सकता है. दरअसल, फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जिसका इस्तेमाल सरकार कर्मचारियों के वेतन और पेंशन को रिवाइज करने के लिए करती है. हालांकि, फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक गलतफहमी भी है.

फिटमेंट फैक्टर का असली मतलब क्या है?

यह गलत धारणा है कि अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.86 होता है, तो वेतन और पेंशन में भी उतनी ही गुना बढ़ोतरी होगी. असल में, फिटमेंट फैक्टर सिर्फ बेसिक सैलरी पर लागू होता है, न कि ग्रॉस सैलरी पर.

सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी फिटमेंट फैक्टर के अनुपात में क्यों नहीं होती?

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रॉस सैलरी पर फिटमेंट फैक्टर का उतना असर नहीं दिखता, क्योंकि कुल वेतन में कई अन्य घटक भी शामिल होते हैं. वेतन और पेंशन को रिवाइज करते समय, पे पैनल कई अन्य पहलुओं को ध्यान में रखता है, जैसे DA को बेसिक पे के साथ मर्ज करना और कई भत्तों को जोड़ना या हटाना. इससे यह सुनिश्चित होता है कि फिटमेंट फैक्टर की गणना सिर्फ बेसिक पे पर लागू होगी.

आसान भाषा में इसे ऐसे समझिए कि, 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिससे बेसिक पे 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया. लेकिन, वास्तविक बढ़ोतरी की बात करें, तो लेवल 1-3 के कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में औसतन 15 फीसदी की ही वृद्धि हुई. हालांकि, लेवल 4-10 के कर्मचारियों को इससे ज्यादा बढ़ोतरी मिली.

वहीं, 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था, लेकिन वेतन और पेंशन में 54 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इससे साफ है कि फिटमेंट फैक्टर ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि कुल वेतन में उतनी ही बढ़ोतरी होगी.

पिछले वेतन आयोगों में वास्तविक वेतन वृद्धि (फीसदी)

दूसरा वेतन आयोग: 14.2 फीसदी

तीसरा वेतन आयोग: 20.6 फीसदी

चौथा वेतन आयोग: 27.6 फीसदी

पांचवां वेतन आयोग: 31.0 फीसदी

छठा वेतन आयोग: 54.0 फीसदी

सातवां वेतन आयोग: 14.3 फीसदी

8वां वेतन आयोग कब गठित होगा?

अब जब 8वें वेतन आयोग के गठन की तारीख नजदीक आ रही है, तो सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स इस बार एक अच्छी वेतन वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि वे एक “सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन” जी सकें. आपको बता दें, 8वें वेतन आयोग के अप्रैल 2025 में औपचारिक रूप से गठित होने की उम्मीद है.

इससे पहले, नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष ने सुझाव दिया था कि नए वेतन आयोग की शर्तों और शर्तों में वेतन, भत्तों, अन्य लाभों, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा भी शामिल होनी चाहिए. अब यह देखना बाकी है कि 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है.

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‘भारत सरकार मेरे जवाबों से चिंतित…’, अपने खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर बोला Grok, कहा- मैं तो…

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ऐसी हो सकती है कोलकाता और बेंगलुरु की प्लेइंग इलेवन, जानें पिच रिपोर्ट और मैच प्रिडिक्शन

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KKR vs RCB IPL 2025: कोलकाता बनाम बेंगलुरु मैच से IPL 2025 का आगाज होने जा रहा है. यह मैच भारतीय समयानुसार 22 मार्च की शाम 7:30 बजे शुरू होगा. KKR को पिछले सीजन श्रेयस अय्यर ने अपनी कप्तानी में चैंपियन बनाया था। इस बार टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथों में होगी, दूसरी ओर बेंगलुरु की कप्तानी रजत पाटीदार के कंधों पर है. इससे पहले पहले मुकाबले का रोमांच शुरू हो, उससे पहले आइए दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन से लेकर मैच प्रिडिक्शन और पिच रिपोर्ट के बारे में जान लेते हैं.

पिच रिपोर्ट

ईडन गार्डन्स की पिच हाई-स्कोरिंग मैचों के लिए मशहूर है. यहां शुरुआत में बल्लेबाजी करना आसान होता है और पारी के शुरुआती ओवरों में बैटिंग टीम हावी रह सकती है. मगर जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती है, वैसे-वैसे स्पिनरों को मदद मिलनी शुरू हो जाती है. बताते चलें कि यहां आमतौर पर हाई-स्कोरिंग मुकाबले देखने को मिलते रहे हैं. इसी मैदान पर साल 2024 में पंजाब किंग्स ने 262 रनों के विशाल लक्ष्य को हासिल करके KKR को हराया था.

मैच प्रिडिक्शन

IPL इतिहास में ईडन गार्डन्स पर कुल 93 मैच खेले गए हैं, जिनमें से केवल 38 बार पहले बैटिंग करने वाली टीम विजयी रही है. यहां चेज करने वाली टीम को 55 बार जीत मिली है. पिछले 6 मैचों में भी यहां चार बार चेज करने वाली टीम को जीत मिली है. ईडन गार्डन्स पर KKR को होम एडवांटेज मिल रहा होगा, लेकिन टॉस भी इस भिड़ंत में बड़ा रोल अदा कर सकता है.

RCB की प्लेइंग XI: विराट कोहली, फिल साल्ट, रजत पाटीदार (कप्तान), लियाम लिविंगस्टोन, जितेश शर्मा, टिम डेविड, क्रुणाल पंड्या, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, यश दयाल, सुयश शर्मा

KKR की प्लेइंग XI: क्विंटन डी कॉक, सुनील नरेन, अजिंक्य रहाणे (कप्तान), वेंकटेश अय्यर, रिंकू सिंह, आंद्रे रसेल, रमनदीप सिंह, हर्षित राणा, स्पेंसर जॉनसन, वैभव अरोड़ा, वरुण चक्रवर्ती

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बांग्लादेश के लिए सिर दर्द बने रोहिंग्या! मोहम्मद यूनुस ने किया कबूल, अब दुनिया के देशों के साम

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Bangladesh On Rohingya: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने रोहिंग्या को लेकर बयान दिया. उन्होंने रोहिंग्या लोगों की दुर्दशा को लेकर दावा किया कि ये लोग नस्लीय भेदभाव के शिकार हैं. अंतरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस पर शुक्रवार (21 मार्च 2025) को मोहम्मद यूनुस ने कहा कि साल 2017 से बांग्लादेश 10 लाख से अधिक जबरन विस्थापितों को शरण दी है, लेकिन वापस फिर से इनका म्यांमार जाना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है.

रोहिंग्या को वापस भेजने में लगा बांग्लादेश

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद यूनुस ने दुनिया के देशों से आह्वान किया कि वे रोहिंग्या को वापस उनके अपने देश म्यांमार भेजने के लिए सक्रिय रूप से शामिल हों. उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उन्होंने नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, किसी देश के प्रति नफरत और उससे संबंधित सभी प्रकार की असहिष्णुता से लड़ने के लिए प्रतिबद्धता जतायी. इस साल सभी प्रकार के नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन पर अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन (ICERD) को अपनाए जाने की 60वीं वर्षगांठ है.

यूएन ने दिया बांग्लादेश को झटका

बांग्लादेश इस समय रोहिंग्या पर हो रहे खर्च से परेशान है. संयुक्त राष्ट्र अगले महीने बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए फूड फंड को 12.50 डॉलर से घटाकर 6 डॉलर प्रति महीना कर देगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यूएन को फंड नहीं मिल रहा है. ऐसा करने से दुनिया की सबसे बड़ी शरणार्थी बस्ती (रोहिंग्या) में भुखमरी का खतरा मंडराने लगा है. 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने कहा कि वह राशन की कीमत 12.50 डॉलर प्रति माह रखने के लिए पैसे जुटाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे दुनिया के कई देशों से फंडिंग नहीं मिल पाया. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 13 मार्च 2025 को बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों का दौरा किया था.

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