Holika Dahan 2025 Muhurat Live: होलिका दहन 13 या 14 मार्च ? सही दिन और शुभ मुहूर्त, सब यहां देख

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Holika Dahan 2025 Muhurat Live: होलिका दहन के बाद रंग की होली खेली जाती है. हिंदू धर्म में होली को उत्साह का पर्व माना गया है. होली का पर्व देश ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है. मथुरा और काशी की होली तो विश्व प्रसिद्ध है. देश के कोने-कोने में इस पर्व की धूम दिखाई देने लगी है. होली (Holi 2025) से पूर्व होलिका दहन की परंपरा है. मान्यता है कि होलिका दहन को शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए. होलिका दहन के दौरान भद्रा का समय भी देखा जाता है. सनातन धर्म में होलिका दहन के लिए पंचांग देखने की परंपरा है, यही कारण है कि होलिका दहन के दौरान शुभ मुहूर्त, पूजा विधि का विशेष महत्व है.

होलिका दहन को लेकर कुछ संशय भी है, इसकी तिथि और दिन को लेकर ये चर्चा है कि होलिका दहन कब होगा (Holika Dahan kab Hoga). होलिका दहन 13 या मार्च किस दिन किया जाएगा? पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास की मानें तो वर्ष 2025 में होली से पूर्व होलिका दहन 13 मार्च को किया जाएगा.

होलिका दहन की एक विधि है, जिसका पालन करना चाहिए. होलिका दहन (Holika Dahan 2025) हमारी नकारात्मक ऊर्जा को नाश करती है, यही कारण है कि इस दिन धन संबंधी, कर्ज, सेहत और विवाह तथा जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए उपाय भी किए जाते हैं, मान्यता है कि होलिका दहन को यदि विधि पूर्वक किया जाए तो सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. 

होलिका दहन के बाद ही रंग की होली (Holi) खेलना का सिलसिला आरंभ हो जाता है. होलिका दहन कैसे करते हैं इसके क्या नियम हैं, इसे करने से जीवन में क्या परिवर्तन आता है तथा होलिका दहन का धार्मिक महत्व क्या है, इसे लेकर शास्त्र क्या कहते हैं और ज्योतिषीय मत व उपाय आदि क्या हैं इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए यहां पर विद्वानों द्वारा दी गई जानकारी प्रस्तुत की जा रही है, तो आइए जानते हैं होलिका दहन से जुड़ी महत्वपूर्ण व आवश्यक जानकारी-

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‘बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक के पीछे भारत’ शहबाज सरकार का बड़ा आरोप

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Balochistan Train Hijack: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मंगलवार (11 मार्च, 2025) को बलूच विद्रोहियों  ने एक ट्रेन को अगवा कर लिया, जिसमें 500 से ज्यादा यात्री सवार थे. इस आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने ट्रेन हाईजैक को लेकर भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं. 

इससे पहले बलूच विद्रोहियों ने सामान्य नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को रिहा कर दिया गया, जबकि पाकिस्तानी सेना के जवानों, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और ट्रेन को पटरी से उतारने का दावा किया है. बलूच विद्रोहियों ने 214 यात्रियों को बंधक बनाने का भी दावा किया है.

भारत पर लगाए गंभीर आरोप 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने बलूचिस्तान ट्रेन अपहरण कांड को लेकर भारत पर निराधार आरोप लगाए हैं. राणा सनाउल्लाह ने दावा किया कि ‘इस हमले के पीछे भारत का हाथ है.’ उन्होंने समाचार एजेंसी डॉन से बातचीत में कहा, ‘अफगानिस्तान के अंदर से भारत इन हमलों को संचालित कर रहा है.’ जब डॉन के एंकर ने उनसे पूछा, ‘क्या तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच विद्रोहियों के बीच कोई संबंध है? क्या TTP बलूचों को समर्थन देता है?’ तो इसके जवाब में राणा सनाउल्लाह ने कहा, ‘ये सब इंडिया कर रहा है, इसमें कोई शक नहीं है. इसके बाद बलूच विद्रोहियों को अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकाना मिल जाता है.’

 

 

‘अफगानिस्तान में होती है प्लानिंग’

राणा सनाउल्लाह ने आगे कहा, ‘अफगानिस्तान में बैठकर वे हर तरह की साजिश रचते हैं. पाकिस्तान के दुश्मन सक्रिय हैं और इसमें अब कोई दूसरी राय नहीं है. यह न तो कोई राजनीतिक मसला है और न ही किसी एजेंडे का हिस्सा, बल्कि एक साजिश है.’ उन्होंने भारत पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘हां, भारत तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) दोनों का समर्थन कर रहा है.’

अफगान सरकार को दी चेतावनी

उन्होंने यह भी दावा किया कि अफगानिस्तान में उनके पास सुरक्षित ठिकाने हैं, जिसकी वजह से उनके हमले बढ़ गए हैं. तालिबान के सत्ता में आने से पहले उन्हें इतनी छूट नहीं थी, लेकिन अब वे खुलेआम गतिविधियां चला रहे हैं. राणा सनाउल्लाह ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘हमने अफगान सरकार से साफ कह दिया है कि वह इन गतिविधियों को तुरंत रोके, नहीं तो पाकिस्तान खुद कार्रवाई करते हुए उन ठिकानों को निशाना बनाएगा.



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अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सोया था शख्स, पालतू कुत्ते ने मार दी गोली! हैरान कर देगा ये मामला

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जब करियर के पीक पर अमिताभ बच्चन पर फिल्म मैग्जीन्स ने लगा दिया था बैन, हैरान करने वाली है वजह

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Amitabh Bachchan Banned By Film Magazines: अमिताभ बच्चन सदी के महानायक हैं और वे फैंस के दिलों पर राज करते हैं. बॉलीवुड के शहंशाह ने अपने अब तक के करियर में तमाम शानदार फिल्में दी हैं जिन्हें फैंस बेहद पसंद करते हैं. हालांकि, अपने करियर के पीक पर  जब बिग बी की लगभग सभी फ़िल्में सुपरहिट साबित हो रही थीं तब  अभिनेता को 1975 की इमरजेंसी के दौरान एक हैरान कर देने वाली सिचुएशन का सामना करना पड़ा था. दरअसल कुछ फ़िल्म मैग्जींस ने अमिताभ बच्चन पर बैन लगा दिया था.

फिल्म मैग्जीन ने अमिताभ बच्चन पर क्यों लगाया था बैन
फिल्म क्रिटिक और राइटर भारती एस. प्रधान ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में इस घटना के बारे में बात की थी और कहा, “इमरजेंसी हटने के तुरंत बाद, कुछ मैग्जीन ने मिलकर अमिताभ बच्चन पर बैन लगा दिया था क्योंकि उन्हें लगा कि वह और वीसी शुक्ला सभी कांग्रेस के लोगों का एक गिरोह हैं और वे सभी कॉपी को ब्लू-पेंसिल कर रहे थेय”

प्रधान ने यह भी बताया कि बायकॉट के कारण अजीबोगरीब सिचुएशन पैदा हो गयी थी. मैग्जीन ने बिग बी का नाम लेने से परहेज करना शुरू कर दिया था.  प्रधान ने कहा, “अगर हेमा मालिनी की कोई फिल्मोग्राफी होती और अमिताभ बच्चन उनके को-एक्टर होते, तो वे उनके नाम के बजाय सिर्फ़ कोमा लगा देते थे क्योंकि अमिताभ बच्चन पर बैन लगा दिया गया था, इसलिए आप उनका नाम पत्रिका में नहीं डाल सकते थे.”

अमिताभ ग्रुप फोटो में खड़े होते थे दाईं या बाईं और
प्रधान ने आगे बताया कि शोले एक्टर इस स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ थे.उन्होंने कहा, “अगर वे कहीं ग्रुप फोटो ले रहे होते, तो एक बार जब उन्हें (अमिताभ बच्चन) को पता चल जाता कि वे ऐसा करने वाले हैं, तो जब कोई ग्रुप फोटो होता, तो वह सबसे दाईं ओर या सबसे बाईं ओर खड़े हो जाते थे.” प्रधान ने याद करते हुए कहा, “उन्होंने मुझसे कहा, ‘बस उनकी कटिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए, मैं सबसे दाईं ओर या सबसे बाईं ओर खड़ा हो जाऊंगा.”

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पाकिस्तान में हाईजैक ट्रेन में हुआ धमाका, खौफनाक वीडियो आया सामने! यूजर्स बोले- ये होता है आतंक

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बलूचिस्तान में हाल ही में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक यात्री ट्रेन, जाफर एक्सप्रेस, को हाईजैक कर लिया. यह ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी और इसमें लगभग 500 यात्री सवार थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. यह घटना बलूचिस्तान प्रांत के बोलान जिले में माशकाफ के पास हुई, जब ट्रेन एक सुरंग से गुजर रही थी. हमलावरों ने ट्रेन पर भारी गोलीबारी की, जिससे ट्रेन के ड्राइवर घायल हो गए और ट्रेन रुक गई. ट्रेन में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की. अब घटना का खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चलती ट्रेन में धमाका दिखाया गया है.

धमाके का खौफनाक वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ट्रेन को गुजरते हुए दिखाया गया है. लेकिन अचानक ट्रेन के बाहर एक जोरदार धमाका होता है और वहां धुआं ही धुआं हो जाता है. नजारा देखकर आपको भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं होगा. इस तरह के धमाके के पीछे BLA का मकसद ट्रेन को रोक कर उसे हाइजैक करना था. बहरहाल ट्रेन पूरी तरह से हाइजैक है और BLA लगातार धमाके और धमकियों की बरसात करने पर आमादा है.

क्यों हुआ हाइजैक

बलूचिस्तान में ट्रेनों में आमतौर पर सुरक्षाकर्मी सवार होते हैं, क्योंकि अलगाववादियों ने पहले भी इस क्षेत्र में ट्रेनों और सुरक्षा बलों पर घातक हमले किए हैं. नवंबर में, एक अलगाववादी समूह ने क्वेटा के एक ट्रेन स्टेशन पर आत्मघाती बम विस्फोट किया जिसमें सुरक्षाकर्मियों, रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों सहित 26 लोग मारे गए थे. तेल और खनिज संपदा से समृद्ध बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है. यह देश के जातीय बलूच अल्पसंख्यकों का केंद्र है, जिनके सदस्यों का कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार उनसे भेदभाव करती है.

यूजर्स ने लताड़ा

सोशल मीडिया पर वीडियो जैसे ही वायरल हुआ यूजर्स ने प्रतिक्रियाओं की झड़ी लगा दी. एक यूजर ने लिखा….वाह पाकिस्तान, इसलिए बदनाम हो आप. एक और यूजर ने लिखा…इस काम के अलावा पाकिस्तानियों से क्या उम्मीद की जाए. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…बहुत खूब, बर्बाद मुल्क. वहीं कुछ यूजर्स ट्रेन में मौजूद लोगों के लिए चिंता में हैं, उनका कहना है कि ये आतंक का रूप काफी भयावह है. 

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लग्जरी हाउसिंग की बढ़ती मांग का नतीजा, 2024 में 9 टॉप शहरों में बिके 6.73 लाख करोड़ के घर

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Real Estate Sector: देश में हाल के वर्षों में लग्जरी हाउसिंग की बढ़ती मांग का नतीजा है कि साल 2024 में प्रॉपर्टी के लिहाज से 9 प्रमुख शहरों में सालाना आधार पर 12 फीसदी के उछाल के साथ 6.73 लाख करोड़ रुपये के वैल्यू के घरों की सेल्स देखने को मिली है. साल 2023 में 6 लाख करोड़ रुपये के वैल्यू की घरों की सेल्स देखने को मिली थी. 

रियल एस्टेट क्षेत्र की डेटा विश्लेषक फर्म प्रॉपइक्विटी ने 2024 कैलेंडर वर्ष के लिए मूल्य के संदर्भ में शीर्ष नौ शहरों में हाउससिंग सेल्स का डेटा जारी किया है. इस डेटा के मुताबिक, देश के नौ प्रमुख शहरों में कुल आवास बिक्री पिछले साल 12 प्रतिशत बढ़कर 6,73,000 करोड़ रुपये हो गई, जो 2023 के दौरान 6,00,143 करोड़ रुपये थी. गुरुग्राम में घरों की बिक्री एक साल पहले के 64,314 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 1,06,739 करोड़ रुपये हो गई. लेकिन प्रॉपइक्विटी ने उन रियल एस्टेट कंपनियों के नाम नहीं बताए हैं जिन्होंने पिछले साल गुरुग्राम में मजबूत बिक्री हासिल की. 

प्रॉपइक्विटी के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कुल मिलाकर रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री 63 प्रतिशत बढ़कर 1,53,000 करोड़ रुपये हो गई जबकि 2023 में यह 94,143 करोड़ रुपये थी. प्रॉपइक्विटी के संस्थापक और सीईओ समीर जसूजा ने कहा, ‘‘दिल्ली-एनसीआर में रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी का औसत मुल्य 12,469 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया है. कीमतों में वृद्धि और मांग में उछाल मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास, बढ़ती कॉरपोरेट उपस्थिति और पर्याप्त रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी इसकी प्रमुख वजह है. प्रॉपइक्विटी के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में घरों की बिक्री पिछले साल 13 प्रतिशत बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो कैलेंडर वर्ष 2023 में 1.22 लाख करोड़ रुपये थी. 

ठाणे में बिक्री छह प्रतिशत बढ़कर 56,000 करोड़ रुपये हो गई जो एक साल पहले 53,000 करोड़ रुपये थी. वहीं पुणे में आवास बिक्री 77,000 करोड़ रुपये से एक प्रतिशत गिरकर 76,000 करोड़ रुपये रह गई. नवी मुंबई में बिक्री में 32 प्रतिशत बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये हो गई, जबकि 2023 में यह 19,000 करोड़ रुपये थी. 

हालांकि, पिछले साल हैदराबाद में बिक्री 1.28 लाख करोड़ रुपये से 18 प्रतिशत घटकर 1.05 लाख करोड़ रुपये रह गई. बेंगलुरु में बिक्री 75,000 करोड़ रुपये से 13 प्रतिशत बढ़कर 85,000 करोड़ रुपये जबकि चेन्नई में 19,000 करोड़ रुपये से पांच प्रतिशत की वृद्धि के साथ 20,000 करोड़ रुपये हो गई. कोलकाता में आवास बिक्री वर्ष 2024 के दौरान 15 प्रतिशत बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 13,000 करोड़ रुपये थी. 

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Airtel के बाद Jio ने भी मिलाया SpaceX से हाथ, भारत में लाएगी Starlink की सेवाएं, जानें डिटेल्स

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Jio ने 12 मार्च को Elon Musk की SpaceX के साथ साझेदारी का ऐलान किया है. इसके तहत Jio Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को भारत में पेश करेगी. इससे पहले 11 मार्च को Airtel ने भी SpaceX के साथ इसी तरह की साझेदारी का ऐलान किया था. बता दें कि स्टारलिंक ने भारत में अपनी सर्विस शुरू करने के लिए आवेदन किया हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कंपनी को हरी झंडी मिल सकती है. 

स्टारलिंक को मंजूरी मिलने के बाद शुरू होगी सर्विस

भारत में स्टारलिकं को मंजूरी मिलने के बाद जियो या एयरटेल मस्क की कंपनी की सर्विस भारत में शुरू कर पाएंगे. ताजा साझेदारी के तहत जियो और स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाओं को विस्तार देने के लिए एक-दूसरे की मदद करेंगी. एयरटेल की तरह जियो भी स्टारलिंक के प्रोडक्ट्स अपने रिटेल और ऑनलाइन स्टोर्स में उपलब्ध करवाएगी. रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो के फिजिकल स्टोर्स में स्टारलिंक के उपकरण उपलब्ध होंगे और कंपनी कस्टमर सर्विस इंस्टॉलेशन और एक्टिवेशन के लिए कस्टमर सर्विस भी मुहैया कराएगी.

कंपनी ने अपने बयान में कही यह बात

रिलायंस जियो के ग्रुप सीईओ मैथ्यू ओम्मेन ने कहा कि हर भारतीय को किफायती और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड की एक्सेस देना जियो की प्राथमिकता रही है. स्पेसएक्स के साथ साझेदारी में स्टारलिकं की सेवाएं भारत में लाना कंपनी की प्रतिबद्धता दर्शता है. उन्होंने आगे कहा कि स्टारलिंक को जियो के ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम में इंटीग्रेट कर कंपनी की पहुंच और भरोसे को बढ़ाने का प्रयास है.

एयरटेल और स्पेसएक्स के बीच भी हुआ समझौता

बीते दिन एयरटेल ने स्पेसएक्स के साथ अपने समझौते की जानकारी दी थी. इसके तहत दोनों कंपनियां मिलकर स्कूल-कॉलेजों, अस्पतालों और रिमोट इलाकों में स्टारलिंक की सर्विस देने के लिए मिलकर काम करेंगी. एयरटेल के नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में भी स्टारलिंक की टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट किया जा सकता है. बता दें कि स्टारलिंक लॉ अर्थ ऑरबिट में भेजे गए सैटेलाइट्स के जरिए इंटरनेट सर्विसेस प्रदान करती है. ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के कई देशों में यह कंपनी पहले से ही अपनी सर्विसेस दे रही हैं.

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IPL 2025: जब मैदान पर आया गेल का तूफान, छक्कों की बारिश कर जड़ा था शतक

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Chris Gayle IPL Records: आईपीएल 2025 का पहला मैच कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (KKR vs RCB) के बीच 22 मार्च को ईडन गार्डन पर खेला जाएगा. 2 महीने तक चलने वाले क्रिकेट के इस महाकुंभ में कई रिकॉर्ड बनेंगे और कई टूटेंगे, लेकिन वेस्टइंडीज प्लेयर क्रिस गेल के वो 3 बड़े रिकार्ड्स हैं जो तोड़ना काफी मुश्किल है. ये तीनों रिकार्ड्स उन्होंने एक ही पारी में बनाए थे. 12 साल पहले उस पारी में गेल के बल्ले से तूफ़ान आया था, गेंदबाजों के पसीने छूट गए थे. गेल ने गेंदबाजों की खूब पिटाई की थी.

आईपीएल को बल्लेबाजों का खेल कहा जाता है, क्रिकेट के इस छोटे फॉर्मेट में बल्लेबाज आते ही गेंदबाजों पर प्रहार शुरू कर देते हैं. वर्तमान में खेल रहे ट्रैविस हेड, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा आदि विस्फोटक बल्लेबाज हैं जो तेज गति से रन बनाते हैं. लेकिन इन विस्फोटक बल्लेबाजों के लिए भी क्रिस गेल के वो रिकार्ड्स तोड़ना काफी मुश्किल है, जो उन्होंने आरसीबी के लिए खेलते हुए एक ही पारी में बनाए थे.

आईपीएल इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर

23 अप्रैल, 2013 को क्रिस गेल जब आरसीबी के लिए बल्लेबाजी करने आए तो किसी को नहीं पता था कि आज उनका बल्ला आग उगलने वाला है और वह आईपीएल के ऐसे रिकार्ड्स बनाने जा रहा है जो 1 दशक तक भी नहीं टूटेगा. पुणे वारियर्स के खिलाफ उस मैच में गेल ने 66 गेंदों में 175 रन बनाए. इस विस्फोटक पारी में गेल ने 13 चौके और 17 छक्के लगाए थे. 

आईपीएल इतिहास का सबसे तेज शतक 

इस पारी में क्रिस गेल ने आईपीएल इतिहास का सबसे तेज शतक भी जड़ा था, उन्होंने 30 गेंदों में अपना शतक पूरा किया था जबकि उनका अर्धशतक 17 गेंदों में आया था. यानी अगले 50 रन बनाने के लिए उन्होंने सिर्फ 13 गेंदें खेली थी. आईपीएल में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड आज भी उनके नाम है, 12 साल बाद भी उनका ये रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया है.

एक आईपीएल पारी में सबसे ज्यादा छक्के

इस पारी में क्रिस गेल ने 17 छक्के लगाए थे, ये भी रिकॉर्ड है जो आज तक नहीं टूटा. ये आईपीएल इतिहास में किसी बल्लेबाज द्वारा एक पारी में लगाए गए सबसे अधिक छक्के हैं.

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जाफर एक्सप्रेस हुई हाईजैक तो बलूचिस्तान की विधानसभा में MLA ने खोल दी सरकार की पोल

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Balochistan Crisis: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने मंगलवार (11 मार्च 2025) को जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया है. बीएलए ने पहले रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया, जिस वजह से जाफर एक्सप्रेस रुक गई और उन्होंने ट्रेन को अपने नियंत्रण में ले लिया. इसके बाद इस मुद्दे को बलूचिस्तान विधानसभा में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) के विधायक मीर जफर जेहरी ने उठाया. उन्होंने विधानसभा में कहा कि राज्य में सरकार से ज्यादा पकड़ अलगाववादियों की है और वे ही शासन चला रहे हैं.

जेहरी ने कहा कि मुख्यमंत्री सरफराज बुगटी के बजाय बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के प्रमुख बशीर जेब बलूच और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के नेता डॉ. अल्लाह नजर का दबदबा ज्यादा है. उन्होंने दावा किया कि अलगाववादी रात में सड़कों पर गश्त लगाते हैं, चेकपोस्ट बनाते हैं और प्रशासन की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली हैं.

महिलाएं तक कर रही हैं अलगाववादियों की मदद

विधायक के अनुसार स्थानीय लोग सरकार की बजाय अलगाववादियों पर ज्यादा विश्वास करते हैं. उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वेच्छा से अपने गहने BLA के लड़ाकों को सौंप रही हैं. जेहरी ने सरकार की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि यदि अत्याचार जारी रहेगा तो नई पीढ़ी और ज्यादा विद्रोही पैदा करेगी.

मीर जफर जेहरी ने सरकार को दी चेतावनी

जेहरी ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि बलूचिस्तान में जबरन दमन की नीति अपनाई गई तो परिणाम गंभीर होंगे. उन्होंने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सरकार ने केमिकल हथियारों का इस्तेमाल किया तो इसका अंजाम भी वैसा ही हो सकता है.

सरकार पर प्रतिबंधित संगठनों को समर्थन देने का आरोप

सरकार की ओर से प्रतिबंधित संगठनों और बलूच यकजहती कमेटी (BYC) का समर्थन करने के आरोपों पर जेहरी ने जवाब दिया कि यदि ऐसा कोई प्रमाण है तो सरकार एक संयुक्त जांच टीम (JIT) गठित करे और जांच कराए. उन्होंने ये भी कहा कि लापता लोगों की वापसी केवल विरोध प्रदर्शनों और सड़कों को जाम करने के बाद ही संभव होती है.

सरकार को ठोस कदम उठाने की सलाह

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार स्थिति पर कंट्रोल खो चुकी है. उन्होंने मुख्यमंत्री सरफराज बुगटी की सुरक्षा मामलों को सीधे देखने की नीति की आलोचना की और सुझाव दिया कि एक समर्पित गृह मंत्री को ये जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए.

विपक्ष ने की हमलों की निंदा

विपक्ष के नेता मीर यूनिस अजीज जेहरी ने बलूचिस्तान में हाल ही में हुई हिंसा की घटनाओं की निंदा की. उन्होंने कहा कि खुझदार और तुर्बत में जमीअत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) के नेताओं की हत्या हुई है जिसका जिम्मेदार सत्ता पक्ष है. उन्होंने कहा कि पहले JUI-F को सत्ता से बाहर करने की कोशिश की गई और अब उनके नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है.

सरकार ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने का दावा किया

बलूचिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री मीर जाहूर बुलैदी ने कहा कि राज्य लंबे समय से आतंकवाद का शिकार रहा है और किसी भी राजनीतिक दल को इससे अछूता नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकार आतंकवादियों से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस लड़ाई में विपक्ष से सहयोग की अपील की.

Source: Dawn/baloichistan post

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इन बड़ी यूनिवर्सिटीज में मुस्लिमों को मिलता है रिजर्वेशन, जानिए कैसे मिलता है एडमिशन

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<p>भारत में कई प्रमुख शैक्षिक संस्थान हैं जो मुस्लिम समुदाय के लिए बनाए गए हैं. इनमें से कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, कुछ राज्य विश्वविद्यालय और कुछ निजी संस्थान हैं. दिल्ली क्षेत्र के संस्थानों में जामिया मिलिया इस्लामिया एक प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालय है जिसकी स्थापना 1920 में हुई थी. इसे 1988 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और 2011 में अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया गया. यहां प्रवेश में मुस्लिम छात्रों को 50% आरक्षण मिलता है. इसी क्षेत्र में जामिया हमदर्द भी एक प्रसिद्ध संस्थान है जो आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में विशेषज्ञता रखता है. इसे 1989 में मानद विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और इसकी फार्मेसी शिक्षा काफी प्रसिद्ध है.</p>
<p><strong>आजादी के पहे स्थापित की गई थी ये यूनिवर्सिटी</strong></p>
<p>दक्षिण भारत में हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण केंद्रीय विश्वविद्यालय है जिसका नाम भारत के पहले शिक्षा मंत्री के नाम पर रखा गया है. इसे भी अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है और 2016 तक यह भारत का एकमात्र उर्दू विश्वविद्यालय था. इसी शहर में स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय भी एक ऐतिहासिक संस्थान है जिसकी स्थापना 1918 में हैदराबाद के निज़ाम द्वारा की गई थी. यह भारत का पहला ऐसा विश्वविद्यालय था जहां शिक्षा का माध्यम उर्दू था, हालांकि अब इसे धर्मनिरपेक्ष विश्वविद्यालय माना जाता है.</p>
<p><strong>प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी हैं कतार में &nbsp;</strong></p>
<p>तमिलनाडु में बी.एस. अब्दुर रहमान क्रेसेंट इंस्टिट्यूट एक प्रमुख निजी विश्वविद्यालय है जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी. यह तमिलनाडु के पहले सेल्फ फाइनेंसड इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक है. कर्नाटक के गुलबर्गा में स्थित खाजा बंदनवाज विश्वविद्यालय एक अपेक्षाकृत नया संस्थान है जिसकी स्थापना 2018 में हुई थी. इसका नाम प्रसिद्ध सूफी संत बंदे नवाज़ के नाम पर रखा गया है.</p>
<p><strong>मुस्लिम शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रही है ये यूनिवर्सिटी</strong></p>
<p>पूर्वी भारत के संस्थानों में कोलकाता का आलिया विश्वविद्यालय सबसे पुराना है, जिसकी स्थापना 1869 में हुई थी. यह पश्चिम बंगाल में मुस्लिम शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है और स्वायत्त मॉडल के तहत संचालित होता है. पटना में स्थित मौलाना मजहरुल हक अरबी एंड पर्शियन यूनिवर्सिटी की स्थापना 1998 में हुई थी और यह अरबी और फारसी भाषाओं में विशेषज्ञता रखता है.</p>
<p><strong>लखनऊ और जम्मू-कश्मीर में भी हैं इस्लामिक यूनिवर्सिटी</strong></p>
<p>उत्तर भारत में लखनऊ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण राज्य विश्वविद्यालय है जिसकी स्थापना 2009 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई थी. मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में हुई थी और यह बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करता है. राजस्थान के जोधपुर में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय की स्थापना 2013 में हुई थी और यहां 8,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं. जम्मू-कश्मीर में इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना 2005 में हुई थी और इसने 2006 से शिक्षण कार्यक्रम शुरू किए थे.</p>
<p><strong>50 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लिए&nbsp;</strong></p>
<p>इन अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में प्रवेश कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर मेरिट से होता है. कुल सीटों का 50 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लिए और 50 प्रतिशत अन्य समुदायों के लिए आरक्षित है. अल्पसंख्यक कोटे में खाली बची सीटें अन्य समुदायों के छात्रों से भरी जा सकती हैं.</p>
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