मार्च महीने में 4 ग्रहों का राशि परिवर्तन, ये राशियां रहें सतर्क

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March Grah Gochar 2025: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मार्च माह ग्रह और नक्षत्रों के हिसाब से काफी खास होने वाला है क्योंकि इस माह सूर्य, बुध, शनि और शुक्र ग्रह राशि परिवर्तन करने वाले हैं. मार्च माह में 4 ग्रहों का राशि परिवर्तन हो रहा है. मार्च के महीने में भी कई बड़े ग्रह अपनी चाल बदलेंगे.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मार्च मास में शुक्र, बुध, शनि और सूर्य ग्रह राशि परिवर्तन करने वाले हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों के राशि परिवर्तन करने से 12 राशियों के जीवन में शुभ या फिर अशुभ प्रभाव पड़ता है

शुक्र 02 मार्च को होंगे वक्री

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुखों के कारक शुक्र ग्रह 02 मार्च को सुबह 06:02 मिनट पर मीन राशि मीन में वक्री होंगे. यह गोचर मीन राशि वालों के लिए प्रतिकूल प्रभाव देने वाला रहेगा जातक के वैभव ऐश्वर्य, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में कमी आएगी.

लाइफ पार्टनर के साथ छोटी-छोटी बातों पर क्लेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. समय को धैर्यपूर्वक निकालें. शुक्रवार के दिन सफेद रंग की मिठाई का भोग लक्ष्मी माता को लगाकर छोटी कन्याओं को दान करें.

सूर्य का मीन में गोचर

ग्रहों के राजा सूर्य देव 14 मार्च को संध्याकाल 06: 34 मिनट पर अपने मित्र ग्रह बृहस्पति की राशि मीन में गोचर करेंगे. सूर्य का गोचर मीन राशि के जातकों के लिए अत्यधिक लाभदायक रहने वाला है. सरकारी नौकरी अथवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर लोगों को सफलता मिल सकती है.

व्यापार-व्यवसाय में जिन जातकों का काम रुका हुआ है, वह काम पूरा हो सकता है. जातक का आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा. समाज में मान सम्मान, ख्याति प्राप्त होगी. राजनीति से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है.

बुध 15 मार्च को होंगे वक्री

ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह मीन राशि में 15 मार्च को दोपहर 12:20 पर वक्री होंगे और 7 अप्रैल को दोपहर 4:39 पर मार्गी होंगे। इस दौरान मीन राशि के जातक को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा. जातक भ्रमित रहेंगे. निर्णय लेने की क्षमता में कमी आयेगी.

बुद्धि और विवेक का तालमेल नहीं बनेगा. जातक को व्यापार-व्यवसाय में हानि हो सकती है. सतर्क रहें गृह क्लेश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.साथ ही छोटे भाई बहन से लड़ाई या विवाद हो सकता है. जातक का दिमाग पढ़ाई-लिखाई में नहीं रहेगा. मन भय, नकारात्मक विचारों से ग्रस्त हो सकता है.

19 मार्च को अस्त होंगे बुध ग्रह

बुध ग्रह 19 मार्च को सुबह 5:54 पर अस्त होंगे और 1 अप्रैल को सुबह 8:37 पर उदय होंगे. यह गोचर मीन राशि के जातकों के लिए अच्छा नहीं रहेगा. जातक इस अवधि में तनाव ग्रस्त महसूस करेंगे जो जातक नौकरी से जुड़े हैं, उन पर बोझ बढ़ सकता है. व्यापार-व्यवसाय में भी नकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे.

जातक इस अवधि में अत्यधिक खर्च कर सकता है. सलाह दी जाती है कि जरूरत होने पर ही पैसे खर्च करें. आर्थिक दृष्टि से यह समय अच्छा नहीं रहेगा. जातक को पेट दर्द का भी सामना करना पड़ सकता है. प्रतिदिन गणेश जी पर दूर्वा चढ़ाएं और गणेश अथर्वशीर्ष का नियमित पाठ करें.

शनि का मीन में गोचर

न्याय के देवता शनिदेव 29 मार्च को मीन राशि में प्रवेश करेंगे. यह गोचर मीन राशि के जातकों के लिए शुभ रहने वाला है. जो जातक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें इस अवधि में सफलता प्राप्त हो सकती है. व्यापार-व्यवसाय में कोई नया आइडिया या प्रभावशाली योजना का विस्तार कर सकते हैं.

इस अवधि में विदेश से धन लाभ हो सकता है. जातक को सलाह दी जाती है कि इस अवधि में शेयर मार्केट में निवेश करने से बचें और अन्य प्रलोभन वाली चीजों से भी बचें अन्यथा नुकसान हो सकता है. इस अवधि में कोई निकट का व्यक्ति धोखा दे सकता है. सतर्क रहें. प्रतिदिन सूर्यास्त के पश्चात शनि चालीसा का पाठ करें.

प्राकृतिक आपदा और दुर्घटनाओं की आशंका

बड़े मामले सामने आएंगे. बड़े बदलाव और विवाद होने की आशंका है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि के साथ शेयर बाजार फिर से बढ़ने की भी संभावना रहेगी. इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होने के योग बनेंगे. राजनीतिक उथल-पुथल एवं प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ेगी. धरना जुलूस प्रदर्शन आंदोलन गिरफ्तारियां होगी.

दुर्घटना होने की संभावना. देश और दुनिया में राजनीतिक बदलाव होंगे. सत्ता संगठन में परिवर्तन होगा. आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा. अचानक मौसमी बदलाव भी हो सकते हैं. बारिश और बर्फबारी होने की आशंका है. सेना की ताकत बढ़ेगी. देश की कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी. मनोरंजन फिल्म खेलकूद एवं गायन क्षेत्र से बुरी खबर मिलेगी. बड़े नेताओं का दुखद समाचार मिलने की संभावना.

राशियों को होगा फायदा

वृषभ, मिथुन, कर्क, तुला और मीन राशि के जातकों को हर क्षेत्र में सफलता मिलने वाली है. आर्थिक मामलों में भी फायदा मिलेगा. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. कार्य स्थल में आपके काम की प्रशंसा होगी. ऐसे में पदोन्नति भी मिल सकती हैं. व्यापारी वर्ग के लोगों को भी मुनाफा मिलेगा।कार्यों में अच्छी सफलताएं प्राप्त होंगी.

करें पूजा-पाठ और दान

  • ग्रहों के अशुभ असर से बचने के लिए हं हनुमते नमः, ऊॅ नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें.
  • प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
  • हनुमान चालीसा और संकट मोचन का पाठ करें. लाल मसूर की दाल शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में चढ़ाएं.
  • हनुमान जी को पान और दो बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं. ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है.
  • महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए. माता दुर्गा, भगवान शिव और हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए.

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Disclaimer : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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टैरिफ का किस्सा है पुराना: जब खत्म हुआ था सेकेंड वर्ल्ड वॉर और जर्मनी में बढ़ी थी चिकन की खपत

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<p style="text-align: justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए ये एलान किया कि आने वाले 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया जाएगा. ऐसे में सबसे पहले ये सवाल उठता है कि आखिर ये रेसिप्रोकल टैरिफ है क्या और इसके लागू किए जाने से भारत और पूरी दुनिया में उसका क्या कुछ असर होगा. दरअसल, टैरिफ एक तरह का टैक्स है जो किसी देश की तरफ से लगाया जाता है, जब वे किसी दूसरे देश से सामान खरीदते हैं. यानी आयात करने के ऊपर ये टैक्स लगाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसे प्रोटेक्शनिस्ट पॉलिसी (Protectionist policy) कहा जाता है. इसके लगाने से ये होता है कि जिस देश से हम सामान लेते हैं, वो सामान महंगा हो जाता है. स्थानीय उत्पाद और उद्योगों को संरक्षण के लिए ये कदम उठाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">अब सवाल आता है उस रेसिप्रोकल की, जिसके बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बात की है. रेसिप्रोकल टैरिफ वो होता है जो हम उस देश पर लगाते हैं और उसी मैचिंग से लगाते हैं जिस देश ने हमारे ऊपर टैरिफ लगाया होता है. मान लीजिए कि दो देश है- ए और बी. अगर देश ए ने बी पर अगर 10% टैरिफ देश बी पर लगाया है तो देश बी भी इसके जवाब में आयात पर 10% टैरिफ लगाता है. इसे रेसिप्रोकल टैक्स कहा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रेसिप्रोकल टैरिफ लगने की कहानी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, अब सवाल ये उठता है कि ये टैरिफ आखिरकार आया कहां से है. टैरिफ कर लगाने का एक पुराना तरीका है. अब बताते हैं कि आखिर कब से ये लगाना शुरू किया गया. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद जर्मनी में लोगों ने खूब चिकन खाना शुरू कर दिया, खासकर अमेरिकन चिकन. इससे यूनाइटेड स्टेट्स के किसानों के चिकन की बिक्री बहुत ज्यादा होने लग गई. 50 मिलियन डॉलर के करीब उनके चिकन की बिक्री होने लगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src=" /></p>
<p style="text-align: justify;">इसका परिणाम ये हुआ कि यूरोपीयन किसानों पर इसका असर होने लग गया. आज जिस संघ को हम जानते हैं यूरोपीयन यूनियन, उस वक्त जो ऑर्गेनाइजेशन थी उसने ये कहा कि हम चिकन पर टैरिफ लगा देते हैं और उन्होंने टैरिफ लगा दिया. इसके बाद जो चिकन 1.60 डॉलर का था वो हो गया 2.25 डॉलर का. इससे आयात कम होना शुरू हो गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आयात को हतोत्साहित करने का प्रयास</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जब आयात कम हुए तो जैसे आज डोनाल्ड ट्रंप बात कर रहे हैं कि अमेरिकन इकॉनोमी प्रभावित हो रही है, &nbsp;मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) का स्लोगन दे रहे हैं. उस वक्त अमेरिकी नेताओं ने ये सोचा कि जर्मनी एक बड़ी मार्कट उनके चिकन की बिक्री के लिए है, तो उन्होंने सोचा कि हम जर्मन को कैसे रोकें, ताकि उनके दिमाग में बदलाव लाया जा सके.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद उन्होंने 25% टैरिफ ट्रकों के ऊपर लगा दिया, जैसे जर्मन वॉक्स वैगन है और ये उनका तरीका काम किया भी. इसके बाद उनके ट्रकों की बिक्री अमेरिका में कम हो गई.</p>
<p style="text-align: justify;">इसका असर ये हुआ कि जर्मनी के लोगों को चिकन के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े. दूसरा अमेरिका के लोगों के लिए ये हुआ कि उनके पास ट्रकों के ऑप्शन कम हो गए. यानी, टैरिफ उपभोक्ताओं को प्रभावित करने के लिए लगाया जाता है. कुछ निश्चित उद्योग के संरक्षण में ये कदम उठाया जाता है. या फिर सामने वाले देश के व्यवहार में बदलाव के लिए ऐसा किया जात है.</p>
<p style="text-align: justify;">यहां जिस तरह से ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैक्स लगाने की बात है, इसका मकसद साफ तौर पर दिख रहा है कि उनकी कोशिस सामने वाले देश के व्यवहार में बदलाव लाने का उनका ये प्रयास है.</p>
<p style="text-align: justify;">अगर आपको याद हो तो 2018 में टैरिफ लगाने के बाद ट्रंप ने कहा था कि मैं इसको इकॉनोमिक नेशनलिज्म मानता हूं. जाहिर है ऐसे में अगर टैरिफ लगता है तो आयात वाली चीजों को दाम बढ़ेंगे. दुनिया में ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगा और मंदी की उसके बाद एक बड़ी आहट आ सकती है. क्योंकि जब एक देश टैरिफ लगाएगा तो सामने वाला देश भी लगाएगा. भारत में तो रुपये की कीमत लगातार बढ़ रही है. इसमें आयात वाली वस्तुओं की चीजें तो महंगी हो ही रही है. दाम बढ़ेंगे. प्रोडक्शन गिरेगा. इस तरह से पूरी दुनिया पर इसका व्यापक असर होगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]&nbsp;</strong></p>

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फाइनल में भारत की जीत की गारंटी है ये चार खिलाड़ी! ऐसा हुआ तो न्यूजीलैंड की हार पक्की

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Champions Trophy 2025 Final: भारत और न्यूजीलैंड के बीच चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल मैच खेला जाएगा. यह मुकाबला रविवार को दुबई में आयोजित होगा. वरुण चक्रवर्ती, मोहम्मद शमी, विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने अभी तक कमाल का प्रदर्शन किया है. ये चारों खिलाड़ी अगर फाइनल में चल गए तो न्यूजीलैंड की हार लगभग तय हो जाएगी. अगर न्यूजीलैंड के पिछले मैच के प्रदर्शन को देखें तो वह भी भारत को फाइनल में कड़ी टक्कर दे सकती है.

भारत ने न्यूजीलैंड को ग्रुप मैच में हरा दिया था. इस मुकाबले में वरुण ने कमाल की गेंदबाजी की थी. उन्होंने 10 ओवरों में 42 रन देकर 5 विकेट झटके थे. वरुण की स्पिन न्यूजीलैंड को परेशान कर सकती है. वे फिलहाल टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में तीसरे नंबर पर हैं. वरुण 7 विकेट ले चुके हैं. उनके साथ-साथ मोहम्मद शमी भी भारत की जीत में अहम साबित हो सकते हैं. शमी 4 मैचों में 8 विकेट ले चुके हैं. फाइनल में शमी का परफॉर्मेंस भी अहम साबित हो सकता है.

कोहली और अय्यर का नहीं है कोई तोड़ –

विराट कोहली और श्रेयस अय्यर अभी तक कमाल के फॉर्म में दिखे हैं. कोहली नंबर तीन पर बैटिंग करते हुए भारत के लिए इस टूर्नामेंट में 217 रन बना चुके हैं. उन्होंने एक शतक भी जड़ा है. कोहली ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी कमाल का प्रदर्शन किया. वे बड़े मैच के खिलाड़ी हैं. अगर रिकॉर्ड्स को देखें तो वे ऐसे मुकाबलों में जरूर अच्छा परफॉर्म करते हैं. अय्यर की बात करें तो वे मिडिल ऑर्डर को मजबूत करते हैं. अय्यर 195 रन बना चुके हैं और फाइनल में भी कमाल दिखा सकते हैं.

दुबई में चल सकता है टीम इंडिया का सिक्का –

भारत ने पिछले मैच में न्यूजीलैंड को बुरी तरह हराया था. उसने पाकिस्तान और बांग्लादेश को भी धोया. टीम इंडिया सेमीफाइनल में भी रंग में दिखी. उसने ऑस्ट्रेलिया को हराया. उसका दुबई में अभी तक कमाल का प्रदर्शन किया है. अब भारतीय टीम फाइनल में भी कमाल कर सकती है.

यह भी पढ़ें : Hardik Pandya: रूमर्ड गर्लफ्रेंड को फॉलो करते हैं हार्दिक पांड्या, मिल गया सबूत! जानें पूरा मामला

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Tamannaah Bhatia & Vijay Varma Part Ways After Years Of Being Together

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<p>amannaah Bhatia &nbsp;और Vijay Varma के बीच कुछ दिन पहले breakup की खबर आई थी. अब reports के reports, Tamannaah ने अपने social media से Vijay के साथ सारी photos हटा दी हैं. उनके साथ जो भी photos थीं, वह सब delete कर दी हैं, जो fans को काफी shock देने वाली बात है. ये step उठाने के बाद, social media पर speculations बढ़ गई हैं कि दोनों के बीच कुछ serious issues चल रहे हैं. लेकिन, Tamannaah और Vijay दोनों ने अपने breakup पर अभी तक कोई official statement नहीं दिया है, लेकिन Tamannaah का ये step fans के लिए काफी surprising था. ये देखना अब interesting होगा कि ये story आगे कहां तक ​​जाती है, और updates के लिए बने रहें.</p>

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इस डिफेंस स्टॉक को मिला एक और ऑर्डर, मार्केट खुलते ही रॉकेट बन सकता है स्टॉक

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<p>भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), जो देश की बड़ी डिफेंस PSU कंपनियों में से एक है, ने हाल ही में 577 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर हासिल किए हैं. यह ऑर्डर 20 फरवरी 2025 के बाद से मिले हैं. इसके साथ ही, BEL का कुल ऑर्डर बुक वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में 13,724 करोड़ तक पहुंच गया है.</p>
<p><strong>क्या हैं ये ऑर्डर?</strong></p>
<p>BEL ने स्टॉक एक्सचेंजों को दिए गए एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि इन ऑर्डर में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं, जैसे- एयरबोर्न इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रोडक्ट्स, पनडुब्बियों के लिए एडवांस्ड कम्पोजिट कम्युनिकेशन सिस्टम, डॉपलर वेदर रडार, ट्रेन कम्युनिकेशन सिस्टम, रडार अपग्रेडेशन और स्पेयर पार्ट्स और सर्विसेज.</p>
<p><strong>इंटरिम डिविडेंड भी देगी कंपनी</strong></p>
<p>भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने बुधवार, 5 मार्च 2025 को वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए 1.50 रुपये प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड घोषित किया है. यह डिविडेंड शेयरधारकों को घोषणा के 30 दिनों के भीतर भुगतान किया जाएगा. इसके लिए BEL ने 11 मार्च 2025 को रिकॉर्ड डेट तय किया है. इसका मतलब है कि इस तारीख तक BEL के शेयरधारक ही डिविडेंड के हकदार होंगे.</p>
<p><strong>शेयर प्राइस पर क्या असर हुआ?</strong></p>
<p>इंटरिम डिविडेंड की घोषणा के बाद मंगलवार को BEL के शेयर में तेजी देखी गई. शेयर का भाव 3.76 फीसदी बढ़कर 274.90 रुपये तक पहुंच गया. हालांकि, पिछले एक महीने में BEL के शेयर में 3 फीसदी और पिछले तीन महीनों में 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.</p>
<p><strong>क्या कहते हैं एक्सपर्ट</strong></p>
<p>एक्सपर्ट्स का मानना है कि BEL का लगातार अच्छा प्रदर्शन और डिविडेंड की घोषणा निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है. यह कंपनी न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि शेयरधारकों को अच्छा रिटर्न भी दे रही है.</p>
<p><strong>डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)</strong></p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href=" के 30,161 टैक्सपेयर्स के पास है 29,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी संपत्ति! सुत्रों के हवाले से हुआ खुलासा</a></strong></p>

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टैटू बनवाते हैं तो संभल जाए क्योंकि इससे लिंफोमा कैंसर बढ़ता है खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा

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टैटू बनवाते हैं तो संभल जाए क्योंकि इससे लिंफोमा कैंसर बढ़ता है खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा

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‘डराना, धमकाना बर्दाश्त नहीं’, लंदन में एस जयशंकर की गाड़ी के सामने खालिस्तानियों के प्रदर्शन प

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S Jaishankar Security Breach: लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर की गाड़ी के सामने आकर खालिस्तान समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे. इसे लेकर अब यूके के विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम विदेश मंत्री एस जयशंकर की यूके यात्रा के दौरान चैथम हाउस के बाहर हुई घटना की कड़ी निंदा करते हैं. यूके शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करता है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों को डराने, धमकाने या बाधित करने का कोई भी प्रयास पूरी तरह से अस्वीकार्य है.”

लंदन में खालिस्तान समर्थक नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह में शामिल एक व्यक्ति ने उस समय सुरक्षा घेरा तोड़कर विदेश मंत्री एस जयशंकर की कार को रोकने का प्रयास किया जब वह थिंक टैंक चैथम हाउस के मुख्यालय से बाहर निकल रहे थे. भारत ने अलगाववादियों और चरमपंथियों के इस छोटे समूह की भड़काऊ गतिविधियों की निंदा की. भारत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा में चूक की इस घटना की निंदा की और ब्रिटिश सरकार से अपने राजनयिक दायित्वों का पालन करने का आह्वान किया. 

यूके विदेश मंत्रालयने कहा, “मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए तेजी से काम किया और हम अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार अपने सभी राजनयिक आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.” सामुदायिक संगठन इनसाइट यूके ने इस घटना का फुटेज सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा, ‘‘यह शर्मनाक है कि यह हमला उस समय हुआ है जब डॉ. एस जयशंकर ब्रिटेन की यात्रा पर हैं और उन्होंने ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी के साथ सफल बैठक की जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई.”

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने विदेश मंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा संबंधी चूक की घटना के फुटेज देखे हैं. हम अलगाववादियों और चरमपंथियों के इस छोटे समूह की, उकसावे वाली गतिविधियों की निंदा करते हैं. हम अपेक्षा करते हैं कि ऐसे मामलों में मेजबान सरकार अपने कूटनीतिक दायित्वों का पूरी तरह से पालन करेगी.”

(ये स्टोरी अपडेट की जा रही है…)

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ट्रंप या पुतिन कौन है ज्यादा पढ़ा-लिखा? एक क्लिक में जान लें किसने की है Ph.D

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फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और व्लादिमीर पुतिन रूस के. इन दोनों नेताओं की नीतियां और कार्यशैली भले ही अलग हो, लेकिन जब बात शिक्षा की आती है, तो कौन अधिक पढ़ा-लिखा है? आइए जानते हैं.

फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और व्लादिमीर पुतिन रूस के. इन दोनों नेताओं की नीतियां और कार्यशैली भले ही अलग हो, लेकिन जब बात शिक्षा की आती है, तो कौन अधिक पढ़ा-लिखा है? आइए जानते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप का जन्म 14 जून 1946 को न्यूयॉर्क में हुआ था. रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई केव फॉरेस्ट स्कूल से प्राप्त की.

डोनाल्ड ट्रंप का जन्म 14 जून 1946 को न्यूयॉर्क में हुआ था. रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी शुरुआती स्कूली पढ़ाई केव फॉरेस्ट स्कूल से प्राप्त की.

फिर वे न्यूयॉर्क में मौजूद सैन्य अकादमी में पढ़े और फिर फोर्डहम यूनिवर्सिटी गए जहां से ट्रांसफर लेकर ट्रम्प ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के व्हार्टन स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड कॉमर्स पहुंचे, जहां ट्रंप ने इकोनॉमिक्स में डिग्री प्राप्त की. फिलहाल बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति ये ट्रंप की दूसरी पारी है.

फिर वे न्यूयॉर्क में मौजूद सैन्य अकादमी में पढ़े और फिर फोर्डहम यूनिवर्सिटी गए जहां से ट्रांसफर लेकर ट्रम्प ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के व्हार्टन स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड कॉमर्स पहुंचे, जहां ट्रंप ने इकोनॉमिक्स में डिग्री प्राप्त की. फिलहाल बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति ये ट्रंप की दूसरी पारी है.

वहीं, रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन की बात करें तो व्लादिमीर पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को सोवियत संघ (अब रूस) के लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था. पुतिन की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई घर के नजदीक में मौजूद के स्कूल से हुई थी.

वहीं, रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन की बात करें तो व्लादिमीर पुतिन का जन्म 7 अक्टूबर 1952 को सोवियत संघ (अब रूस) के लेनिनग्राद (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में हुआ था. पुतिन की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई घर के नजदीक में मौजूद के स्कूल से हुई थी.

इसके बाद पुतिन ने 1975 में लेनिनग्राद स्टेट यूनिवर्सिटी (सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी) से लॉ (LLB) की डिग्री प्राप्त की. फिर उन्होंने KGB (रूस की खुफिया एजेंसी) में शामिल होकर खुफिया कार्यों में विशेषज्ञता हासिल की. 1990 के दशक में पुतिन ने अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D) की डिग्री भी प्राप्त की.

इसके बाद पुतिन ने 1975 में लेनिनग्राद स्टेट यूनिवर्सिटी (सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी) से लॉ (LLB) की डिग्री प्राप्त की. फिर उन्होंने KGB (रूस की खुफिया एजेंसी) में शामिल होकर खुफिया कार्यों में विशेषज्ञता हासिल की. 1990 के दशक में पुतिन ने अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D) की डिग्री भी प्राप्त की.

पुतिन के राजनीतिक करियर की बात की जाए तो वह 2012 से रूस के राष्ट्रपति हैं. इससे पहले साल 2000 से 2008 तक रूसी संघ के राष्ट्रपति व 1999 से 2000 और 2008 से 2012 तक रूस के प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

पुतिन के राजनीतिक करियर की बात की जाए तो वह 2012 से रूस के राष्ट्रपति हैं. इससे पहले साल 2000 से 2008 तक रूसी संघ के राष्ट्रपति व 1999 से 2000 और 2008 से 2012 तक रूस के प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

Published at : 06 Mar 2025 04:07 PM (IST)

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औरंगजेब को लेकर सोशल मीडिया पर संग्राम, बागेश्वर बाबा अकाउंट से जूता मारते तस्वीर वायरल

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Debate on Aurangzeb: मुगल शासक औरंगजेब को लेकर महासंग्राम छिड़ा हुआ है. महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अबू आजमी के औरंगजेब पर दिए गए बयान पर सियासत गर्म हो चली है. इस बीच सोशल मीडिया पर भी औरंगजेब के खिलाफ कई बातें लिखी जा रही हैं. ऐसे में बाबा बागेश्वर धाम के ऑफिशियल एक्स अकाउंट द्वारा किया गया एक पोस्ट चर्चा में बना हुआ है. 

बाबा बागेश्वर धाम के एक्स अकाउंट @BageshwarBaba_ पर औरंगजेब को लेकर एक पोस्ट किया गया है. इस पोस्ट में औरंगजेब की तस्वीर पर जूता मारते हुए दिखाया गया है. देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई है और यूजर्स भी इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं और दो हिस्सों में बंट गए हैं. 

यह भी पढ़ें: गूगल पर भी दिखा सूर्यग्रहण का असर, यकीन न हो तो खुद जाकर देख लीजिए

हिंदुओं से की गई अपील

बागेश्वर बाबा के एक्स अकाउंट से किए गए इस पोस्ट में औरंगजेब की जूते मारते हुई तस्वीर के साथ एक कैप्शन भी लिखा गया है, जिसमें हिंदुओं से एक तरह की अपील की गई है. इस पोस्ट में कहा गया है कि बागेश्वर धाम के भक्तों दिखा दो ताकत, हिंदुओं दिखा दो अपनी ताकत. यानी पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा वायरल करने की भी अपील की गई है.



 
 
यूजर्स कर रहे कमेंट

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट जमकर वायरल हो रही है और अब तक कई लोग इसे देख चुके हैं. इस पर यूजर्स तरह-तरह के कमेंट भी कर रहे हैं. एक यजूर ने लिखा, जरूरत पड़ने पर जरूर दिखा दिया जाएगा. एक अन्य यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा औरंजजेब का नामोनिशान मिटाओ. वहीं, एक यूजर ने उल्टा बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री को ही आड़े हाथों लेते हुए लिखा, तुम अभी से हिंदू मुस्लिम के बीच नफरत की आग जलाने लगे हो तो वहीं एक यूजर ने लिखा, अरे बाबा क्यों भोले भाले हिंदुओं को पागल बना रहे हो, जो कर रहे हो वही करो वही अच्छा लगता है.

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