Smartphone को रखना है नए जैसा? इन टिप्स से फोन रहेगा टिप-टॉप, चलाने में भी आएगा मजा

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चाहे आपने नया Smartphone खरीदा हो या पुराना फोन यूज कर रहे हों, लंबे समय तक यूज करने के लिए इसे ठीक कंडीशन में रखना जरूरी होता है. जब इसके रखरखाव की बात आती है तो अधिकतर लोग स्क्रीन प्रोटेक्टर और कवर को काफी समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. फोन को लंबा चलाने के लिए सॉफ्टवेयर का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. आइए आज फोन को नए जैसा रखने की कुछ टिप्स जानते हैं.

हफ्ते में एक बार जरूर करें रिस्टार्ट

हफ्ते में एक बार फोन को रिस्टार्ट करने के कई फायदे होते हैं. यह जीरो-क्लिक अटैक्स जैसे खतरों से तो बचाता ही है, साथ ही बैकग्राउंड ऐप्स को बंद कर फोन की फंक्शनलिटी को भी बेहतर करता है.

चार्जिंग का रखे विशेष ध्यान

यूज के साथ फोन की बैटरी की कैपेसिटी कम होती जाती है. इसकी लाइफ बढ़ाने के लिए फोन चार्ज करते समय यह ध्यान रखें कि बैटरी को एक साथ पूरा चार्ज न करें. लगभग 80 प्रतिशत तक बैटरी चार्ज कर लें. इसे दोबारा चार्ज करने के लिए फोन के बंद होने का इंतजार न करें.

फोन को ओवरहीट होने और पानी से बचाएं

फोन को लंबे समय तक गर्मी और पानी में रहने के लिए डिजाइन नहीं किया जाता है. इसलिए फोन को ओवरहीट से बचाने की कोशिश करें. इसके लिए गर्म टेंपरेचर के दौरान फोन में गेमिंग आदि न करे. ओवरहीट से बचाने के लिए फोन को धूप में न रखें. इसी तरह फोन को लंबे समय तक पानी में भी न रखें.

स्क्रीन प्रोटेक्टर और केस का करें इस्तेमाल

स्क्रीन प्रोटेक्टर और केस फोन के हार्डवेयर का अच्छे से ख्याल रख सकते हैं. ये फोन की बॉडी और स्क्रीन को स्क्रैचेज से तो बचाते ही हैं, गिरने पर बड़ा नुकसान भी टाल सकते हैं. इसलिए हमेशा अच्छी क्वालिटी के स्क्रीन प्रोटेक्टर और कवर का इस्तेमाल करें.

फोन को करते रहें अपडेट

स्मार्टफोन कंपनियां नियमित अंतराल के बाद सॉफ्टवेयर अपडेट रोल आउट करती रहती हैं. इन अपडेट्स को नजरअंदाज न करें. फोन की बेहतर सिक्योरिटी, परफॉर्मेंस और नए फीचर्स के लिए अपने फोन को अपडेट करते रहें. अपडेट इंस्टॉल न करने से फोन की परफॉर्मेंस तो खराब होती ही है, साइबर थ्रेट का खतरा भी बढ़ जाता है.

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NATO, यूएन और वर्ल्ड बैंक से बाहर निकलेगा अमेरिका? डोनाल्ड ट्रंप के करीबियों ने कर दिया इशारा

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Elon Musk On Nato: एलन मस्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार और सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के प्रमुख हैं. उन्होंने अमेरिका को नाटो (NATO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) से बाहर निकालने के ट्रंप के ओर से किए गए आह्वान का समर्थन किया.

यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन संघर्ष पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं. शुक्रवार (28 फरवरी,2025) को व्हाइट हाउस में ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच तीखी बहस भी देखी गई. इस बीच मस्क ने ट्रंप समर्थक सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर गुंथर ईगलमैन के सुझाव का समर्थन किया, जिन्होंने एक्स पर लिखा, “नाटो और संयुक्त राष्ट्र को छोड़ने का समय आ गया है.”

ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ रुख को समर्थन
ट्रंप लंबे समय से नाटो पर संदेह जताते रहे हैं और कई बार उसे छोड़ने की धमकी भी दी है. ओवल ऑफिस में जेलेंस्की के साथ तीखी बहस के बाद ट्रंप समर्थकों के बीच अमेरिका को ग्लोबल गठबंधनों से अलग करने की मांग तेज हो गई. ट्रंप ने सोमवार (03 मार्च,2025 ) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “कल की रात बड़ी होगी. मैं इसे वैसे ही बताऊंगा जैसा है!” वह मंगलवार रात (04 मार्च, 2025 ) को कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे, जहां उनकी पार्टी के पास बहुमत है और डेमोक्रेट्स कमजोर स्थिति में हैं.

नाटो छोड़ने के समर्थन में रिपब्लिकन सांसदों की राय
कुछ रिपब्लिकन नेता भी अमेरिका के नाटो और अन्य वैश्विक संगठनों में शामिल होने पर सवाल उठा रहे हैं. सीनेटर माइक ली (यूटाह) ने नाटो को “कोल्ड वॉर का अवशेष” बताया और कहा कि इससे अमेरिका को कम, लेकिन यूरोप को ज्यादा लाभ मिलता है. 

रूस और ट्रंप की नीति
ट्रंप का झुकाव नाटो सहयोगियों के बजाय रूस के प्रति अधिक दिखाई दिया है. उन्होंने पहले भी धमकी दी थी कि अगर नाटो सदस्य देश अपनी रक्षा बजट में वृद्धि नहीं करते तो वह नाटो को रूस के सामने असहाय छोड़ देंगे. दरअसल, ट्रंप ने कहा था, “अगर वे भुगतान नहीं करेंगे तो मैं रूस को जो करना है करने दूंगा.” रूढ़िवादी टिप्पणीकार कैंडेस ओवेन्स ने भी ट्रंप के इस रुख का समर्थन किया, यह दावा करते हुए कि “यूक्रेन, मनी-लॉन्ड्रिंग और नाटो ही असली समस्या हैं.”

अमेरिका पर आर्थिक बोझ का मुद्दा
दरअसल, MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थक और ट्रंप के सहयोगी यह तर्क दे रहे हैं कि अमेरिका को वैश्विक गठबंधनों में पैसा खर्च करना बंद करना चाहिए. वहीं, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि अमेरिका पहले से ही $35 ट्रिलियन के कर्ज में है, ऐसे में उसे दुनिया के लिए पिग्गी बैंक बनना नहीं बनना चाहिए चाहिए. अमेरिका का यूक्रेन युद्ध में $350 बिलियन खर्च करना आर्थिक रूप से सही नहीं है.

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