डिमेंशिया का खतरा भांप लेता है आपके शरीर का यह अंग, जानें कैसे करता है अलर्ट?

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कभी शायद हम सोचना भी न चाहें कि आंखें न होतीं तो क्या होता! खूबसूरत दुनिया देखने से हम महरूम हो जाते. अपने जज्बात जाहिर करने से चूक जाते. सवाल यह उठता है कि क्या आंखें हमारा यही दर्द बयां करती हैं तो इसका जवाब है नहीं, क्योंकि आंखें और भी बहुत कुछ बताती हैं. हममें से जिनकी दृष्टि ठीक है, वे बेफिक्र रहते हैं. सोच यही कि चश्मा नहीं लगा, कॉन्टैक्ट लेंस नहीं लगा, तो चिंता कैसी? लेकिन एक शोध बताता है कि रेगुलर चेकअप जरूरी है. अगर आप चश्मा नहीं पहनते हैं तो भी आपको ऑप्टोमेट्रिस्ट के पास जांच के लिए जाना जरूरी है. एक शोध तो यही बताता है. ब्रिटिश जर्नल्स ऑफ ऑप्थोमोलॉजी में एक शोध प्रकाशित हुआ, जो डिमेंशिया और आंखों से संबंधित था. यह कई साल के रिसर्च पर आधारित था.

रिसर्च में सामने आई यह बात

शोध में पता चला कि हमारी आंखें हमारे मस्तिष्क को हमारे आस-पास की चीजों के बारे में बहुत सारी जानकारी देती हैं. इससे ये साबित हुआ कि हमारी आंखों और मस्तिष्क के बीच का संबंध बहुत मजबूत होता है. शोध में पाया गया कि आई हेल्थ भी डिमेंशिया और कॉग्निटिव गिरावट का एक प्रारंभिक संकेतक हो सकता है.

स्टडी में इतने लोगों को किया गया शामिल

स्टडी में 2006 से 2010 के बीच जांची गईं आंखों की दास्तान थी और फिर 2021 में इन्हीं लोगों को जांचा गया, तो रिजल्ट सामने आया. यूके बायोबैंक की इस रिसर्च स्टडी में 55-73 वर्ष की आयु के 12,364 वयस्क शामिल हुए. प्रतिभागियों का 2006 और 2010 के बीच बेसलाइन पर मूल्यांकन किया गया और 2021 की शुरुआत तक उन पर नजर रखी गई. ये देखने के लिए कि क्या सिस्टमैटिक डिजीज (प्रणालीगत बीमारियों) से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है? यहां सिस्टमैटिक डिजीज से मतलब डायबिटीज, हृदय रोग और डिप्रेशन से था. पाया गया कि जो लोग इन समस्याओं से पीड़ित थे या फिर उम्र संबंधित एएमडी (मैक्यूलर डिजनरेशन, जिसमें धुंधला दिखने लगता है) से जूझ रहे थे, उनमें डिमेंशिया का जोखिम सबसे अधिक था.

कब करानी चाहिए आंखों की जांच?

जिन लोगों को कोई नेत्र रोग नहीं था, उनकी तुलना में जिन लोगों को आयु-संबंधित मैक्यूलर डिजनरेशन था, उनमें 26% जोखिम बढ़ा था, मोतियाबिंद वाले लोगों में 11% जोखिम बढ़ा था और मधुमेह से संबंधित नेत्र रोग वाले लोगों में 61% जोखिम बढ़ा था. इससे स्पष्ट होता है कि अगर कोई डायबिटीज से पीड़ित है, किसी को हार्ट संबंधी दिक्कत है या फिर डिप्रेशन का शिकार है, तो उसे नियमित तौर पर आंखों की जांच करानी चाहिए. इसके साथ ही गर्भवती को भी चिकित्सक इसकी सलाह देते हैं. इस दौरान हार्मोनल चेंजेस होते हैं. कइयों को धुंधलेपन की शिकायत होती है, तो कुछ ड्राई आइज से जूझ रही होती हैं. ऐसी स्थिति में भी चिकित्सक की सलाह जरूरी होती है.

यह चीज पहुंचाती है सबसे ज्यादा नुकसान

एक और चीज जो आज की लाइफस्टाइल से जुड़ गई है, वो है स्क्रीन टाइम. तो जिसका भी मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर वक्त ज्यादा बीतता है, उन्हें नियमित चेकअप कराना चाहिए. हाल ही में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रोहतक ने एक स्टडी के आधार पर कहा कि भारत में औसतन लोग साढ़े तीन घंटे स्क्रीन देखते हुए गुजारते हैं. पुरुषों का औसत स्क्रीन टाइम 6 घंटे 45 मिनट है, जबकि महिलाओं का औसत स्क्रीन टाइम 7 घंटे 5 मिनट है. ये भी खतरे का ही सबब है. अगर ऐसा है, तो जल्द से जल्द ऑप्टोमेट्रिस्ट से अपॉइंटमेंट लेना जरूरी हो जाता है.

कैसे रखें आंखों का ख्याल?

अब बात आती है कि आखिर आंखों का ख्याल हम कैसे रख सकते हैं. फंडा एक ही है, अच्छा और पोषक खाएं. विटामिन ए का इनटेक बढ़ाएं. पोषक तत्वों से भरपूर पौधों-फलों, सब्जियों, मेवों, बीजों, साबुत अनाज और फलियों को अपनी डाइट में शामिल करें. गाजर को पारंपरिक रूप से आंखों के लिए सबसे अच्छी सब्जी माना जाता है, तो वहीं शकरकंद, अंडे, बादाम, मछली, पत्तेदार साग, पपीता और बीन्स भी दृष्टि का ख्याल रखने में माहिर हैं.

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4 बार दिया UPSC, तीन बार हुए पास, चौथी बार में बने IAS, पढ़िए ऐसे ही एक ऑफिसर की Success Story

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UPSC पास करने में लोगों को सालों गुजर जाते हैं. कई युवा एक बार भी पास नहीं कर पाते हैं तो कुछ ऐसे भी युवा हैं जो तीन-तीन बार UPSC क्लियर कर लेते हैं. हम आपके लिए एक खास सीरीज ‘सक्सेस मंत्रा’ लेकर आए हैं, जिसमें आज हम आपको बताएंगे गुजरात के निवासी कार्तिक जीवानी के बारे में. आईपीएस अधिकारी बनने के बाद भी आईएएस बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की. उनकी यह यात्रा आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें उनका लक्ष्य हासिल करने में मदद की. 

आईआईटी बॉम्बे से की मेकेनिकल इंजीनियरिंग

गुजरात के एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार्तिक जीवानी ने अपनी शिक्षा आठवीं कक्षा तक गुजराती माध्यम से की थी. इसके बाद, उन्होंने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में प्रवेश लिया और 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, उन्होंने जेईई मेन और एडवांस्ड परीक्षा दी और दोनों में सफलता प्राप्त की. इसके बाद, उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया.

दूसरे अटेम्प्ट में बने IPS

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए, जीवानी ने सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया और 2016 में यूपीएससी की परीक्षा के लिए तैयारी शुरू की. पहले प्रयास में, यानी 2017 में, वह असफल हो गए. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अगले दो सालों तक कड़ी मेहनत की. 2019 में उन्होंने दूसरा प्रयास किया और इस बार उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर 94वीं रैंक हासिल की. हालांकि, वह आईएएस के लिए सिर्फ दो रैंक से चूक गए, लेकिन वह आईपीएस अधिकारी के तौर पर चयनित हो गए.

चौथे अटेम्प्ट में बने IAS

आईपीएस की ट्रेनिंग शुरू करने के बाद भी, जीवानी ने अपनी आईएएस की तैयारी जारी रखी. उन्होंने 2019 में तीसरे प्रयास में 84वीं रैंक प्राप्त की, और इसके बाद 2020 में चौथे प्रयास में उन्होंने 8वीं रैंक हासिल की, जिससे वह आईएएस बन गए. उनके पिता के अनुसार, उन्होंने आईपीएस की ट्रेनिंग से 15 दिन की छुट्टी ली थी ताकि वह यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हो सकें.

रोजाना 10 घंटे की पढ़ाई से पाई सफलता 

जीवानी ने रोजाना 10 घंटे पढ़ाई की. उनकी अधिकतर पढ़ाई रात में होती थी. वह सिर्फ किताबों पर निर्भर नहीं थे, बल्कि उन्होंने ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री का भी उपयोग किया और बहुत सारे नोट्स बनाए, जो उनकी तैयारी में सहायक साबित हुए. उनके इस संघर्ष और समर्पण से यह साबित होता है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगर सच्ची मेहनत और लगातार प्रयास किया जाए, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है.

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रूस की सेना ने किया 19,556 बच्चों का अपहरण? पूरी दुनिया में चर्चा का विषय

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Russia-Ukraine War : रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे लंबे समय तक चलने वाला युद्ध है. इस युद्ध में हजारों की संख्या में लोगों की जान गई. अरबों डॉलर की संपत्ति पूरी तरह से तबाह हो गई. लेकिन अब इस युद्ध के दौरान रूस के खिलाफ एक ऐसा आरोप लगाया है, जिसे सुनने वाला हर इंसान हैरान हो गया है.

दरअसल, ब्रिटेन में लेबर पार्टी की एक सांसद ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार से सवाल किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति के लिए होने वाली चर्चा में क्या उन 19,556 बच्चों की सुरक्षित वापसी का भी जिक्र किया गया है, जिन्हें रूसी सैनिकों ने युद्ध के दौरान अगवा कर लिया था. हजारों यूक्रेनी बच्चों के अपहरण का मामला अब काफी जोर पकड़ता जा रहा है.

ब्रिटिश सांसदों का कहना है कि जब तक इन बच्चों को सुरक्षित तरीके से वापस नहीं किया जाएगा, तब तक शांति को लेकर कोई बात नहीं हो सकती.

बिट्रिश सांसद ने की मांग, पीएम ने दिया जवाब

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स में बहस के दौरान लेबर पार्टी की सांसद जोहाना बैक्सटर ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से सवाल किया कि क्या वह उनके साथ इस बात पर सहमति रखते हैं कि यूक्रेन में स्थायी शांति स्थापित करने लिए रूस को पहले उन 19,556 बच्चों को सुरक्षित रूप से वापस करना होगा, जिन्हें रूसी सैनिक चुराकर ले गए.

इस सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा, “आपका गुस्सा पूरी तरह से जायज है. इन बच्चों को अगवा कर ले जाया गया है. हम उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेंगे. उसके बिना शांति स्थापित करने की कोई चर्चा आगे नहीं बढ़ सकती.” प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को उठाने के लिए बैक्सटर को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्हें ऐसे सवाल बार-बार करने चाहिए.

19,546 बच्चे लापता, 599 की हो चुकी है मौत

यूक्रेन की सरकार का अनुमान है कि 2022 में जब से युद्ध की शुरुआत हुई, तब से कम से कम 19,500 बच्चों को यूक्रेन से रूस ले जाया गया है. जिनमें से सिर्फ 388 बच्चे ही अपने घर लौटे हैं. इन सभी बच्चों की उम्र 3 से 10 साल बताई जा रही है. हालांकि, रूस ने अभी तक इस आरोप को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

Childrenofwar.gov.ua की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध के दौरान करीब 19,546 बच्चे लापता हुए. इनमें से 599 की मौत हो चुकी है और 1774 घायल अवस्था में थे.

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वन नाइट स्टैंड के बाद प्रेग्नेंट हुई थीं कुब्रा सेत, अबॉर्शन पर सालों बाद कही ये बात

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Kubbra Sait On Abortion: एक्ट्रेस कुब्रा सेत अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं. एक्ट्रेस ने अपनी एक किताब लिखी है जिसका टाइटल ओपन बुक है. इस किताब के एक चैप्टर में कुब्रा ने बताया था कि साल 2013 में एक वन नाइट स्टैंड के बाद वे प्रेग्नेंट हो गई थीं. ऐसे में उन्हें सबसे छुपकर अबॉर्शन कराना पड़ा था. अब सालों बाद एक्ट्रेस ने अपने अबॉर्शन पर फिर बात की है और बताया है कि उस वक्त वे काफी कमजोर महसूस कर रही थीं.

बॉलीवुड बबल को दिए एक इंटरव्यू में कुब्रा सेत ने कहा- ‘मुझे लगता है कि जब मैं अबॉर्शन से गुजरी तो मैं बिल्कुल इतनी मजबूत नहीं थी. मैं बहुत कमजोर थी उसके लिए. मुझमें ये हिम्मत नहीं थी कि अगर ये हम नहीं करेंगे तो हम इसके साथ रह लेंगे. मैं उस वक्त बहुत कमजोर महसूस कर रही थी. बहुत खाली महसूस कर रही थीं. मुझे लग रहा था कि मैं इस लायक ही नहीं हूं. लेकिन बाद में ये हिम्मत आई कि आपने अपने लिए फैसला लिया और आपने जो किया आप उसपर बने रहे और स्टेरियोटिपिकल सोसाइटल नॉर्म्स को तोड़ा.’


बिना किसी को बताए खुद करवा लिया अबॉर्शन
कुब्रा ने आगे खुलासा किया कि उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी और अबॉर्शन की बात सबसे छुपाई थी. उन्होंने कहा- ‘किसी को इस बारे में पता नहीं था. मैं खुद गई और मैंने जाकर खुद अबॉर्शन कराया. मैंने किसी को नहीं बताया. मैं दो से तीन हफ्ते तक सोचती रही, कुछ ऐसी चीजें होती रहीं. फिर मैं अपनी एक दोस्त से मिली एक कॉफी शॉप पर और वो कह रही थी कि तुम सुन नहीं रही. फिर मैंने बताया कि मुझे अबॉर्शन कराना है और उसने पूछा किसे तुम्हें कराना है. मैं रोने लगी क्योंकि मुझे ध्यान आया कि यार ये तो मैंने किसी को नहीं बताया था और किसी को नहीं पता था कि मैं किस चीज से गुजर रही हूं.’

‘5-6 साल बाद मुझे बहुत ब्लीडिंग हो रही थी’
कुब्रा ने इस दौरान ये भी खुलासा किया कि अबॉर्शन के कई साल बाद उन्हें काफी दिक्कतें हुई थीं. उन्होंने कहा- ‘5-6 साल बाद मुझे बहुत ब्लीडिंग हो रही थी जब मैं एक ट्रैवल शो के लिए शूट कर रही थीं. मुझे बहुत गर्मी लग रही थी, मैं बहुत बीमार हो रही थी, बहुत क्रैंकी थी. मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने डायरेक्टर को बता सकती थी. इनक्रेडिबल लेडी उर्मी डायरेक्ट कर रही थीं लेकिन मैंने उन्हें एक बार नहीं बताया. मुझे लगा कि कोई नहीं समझेगा. फिर मुझे लगा कि कोई नहीं समझता तो ना समझे.  जब मैं किताब लिख रही थी तो मुझे किसी की फिक्र नहीं है क्योंकि ये उनके लिए नहीं था, वो मेरे लिए था. अगर मैं खुद के लिए अपने फैसलों को लेकर रहम दिल नहीं हो सकती तो क्या फायदा.’

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इससे अच्छा जहर खिला दो! शख्स ने तल डाले गुलाब के फूल के पकौड़े, घिनौना वीडियो हो रहा वायरल

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आमलकी एकादशी की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, इससे जुड़े नियम जान लें

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फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा, जोकि इस साल 10 मार्च 2025 को पड़ रही है. इसे आवंला एकादशी और रंगभरी एकादशी जैसे नामों से भी जाना जाता है. यही कारण है कि इस एकादशी में भगवान विष्णु के साथ ही आंवला वृक्ष की भी पूजा करने का महत्व है.

फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा, जोकि इस साल 10 मार्च 2025 को पड़ रही है. इसे आवंला एकादशी और रंगभरी एकादशी जैसे नामों से भी जाना जाता है. यही कारण है कि इस एकादशी में भगवान विष्णु के साथ ही आंवला वृक्ष की भी पूजा करने का महत्व है.

धार्मिक व पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु सृष्टि की रचना कर रहे थे, तभी आंवला का वृक्ष भी प्रकट हुआ था. इसलिए हिंदू धर्म में तुलसी, पीपल आदि की तरह आंवला को भी शुभ और सौभाग्य वाला वृक्ष माना जाता है. आइए जानते हैं आंवला एकादशी पर किन गलितयों से बचें और किन नियमों का पालन करें.

धार्मिक व पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु सृष्टि की रचना कर रहे थे, तभी आंवला का वृक्ष भी प्रकट हुआ था. इसलिए हिंदू धर्म में तुलसी, पीपल आदि की तरह आंवला को भी शुभ और सौभाग्य वाला वृक्ष माना जाता है. आइए जानते हैं आंवला एकादशी पर किन गलितयों से बचें और किन नियमों का पालन करें.

आमलकी एकादशी पर भगवान श्रीहरि के साथ ही आंवला वृक्ष का पूजन भी जरूर करें. साथ ही आंवले से बनी चीजों का सेवन भी करें. लेकिन भूलकर भी मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन, मसूर की दाल और चावल का सेवन न करें.

आमलकी एकादशी पर भगवान श्रीहरि के साथ ही आंवला वृक्ष का पूजन भी जरूर करें. साथ ही आंवले से बनी चीजों का सेवन भी करें. लेकिन भूलकर भी मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन, मसूर की दाल और चावल का सेवन न करें.

आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में उन्हें तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं. लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें. आप पूजा के लिए पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़ लें.

आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में उन्हें तुलसी के पत्ते जरूर चढ़ाएं. लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें. आप पूजा के लिए पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़ लें.

एकादशी व्रत रखने वाले व्रतधारियों को मन में किसी के प्रति भी बुरे ख्याल या विचार नहीं लाने चाहिए. साथ ही व्रत के दौरान वाद-विवाद और क्रोध भावना से भी दूर रहें.

एकादशी व्रत रखने वाले व्रतधारियों को मन में किसी के प्रति भी बुरे ख्याल या विचार नहीं लाने चाहिए. साथ ही व्रत के दौरान वाद-विवाद और क्रोध भावना से भी दूर रहें.

आमलकी एकादशी के दिन बाल या नाखून आदि काटने से बचें. जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें इस दिन नहाते समय शैंपू या साबुन का उपयोग न करते हुए सिर्फ सादे पानी से स्नान करना चाहिए.

आमलकी एकादशी के दिन बाल या नाखून आदि काटने से बचें. जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं उन्हें इस दिन नहाते समय शैंपू या साबुन का उपयोग न करते हुए सिर्फ सादे पानी से स्नान करना चाहिए.

Published at : 04 Mar 2025 09:51 AM (IST)

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iPhone 16e के बाद एक और लॉन्च के लिए तैयार Apple, Tim Cook ने शेयर किया टीजर, जानें डिटेल

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iPhone 16e के बाद Apple एक और लॉन्च के लिए तैयार है. कंपनी के सीईओ ने एक्स पोस्ट में एक और प्रोडक्ट लॉन्च की जानकारी दी है. माना जा रहा है कि यह नया MacBook Air हो सकता है. फिलहाल ऐपल के स्टोर में इसके पुराने वर्जन की इन्वेंट्री खत्म हो गई है. आमतौर पर ऐपल किसी भी प्रोडक्ट की लॉन्च से पहली यह रणनीति अपनाती आई है. ऐसे में माना जा रहा है कि कंपनी M4 MacBook Air को लॉन्च कर सकती है. यह पुराने मॉडल के मुकाबले कई अपग्रेड्स के साथ आएगा.  

चिपसेट के तौर पर होगा सबसे बड़ा अपग्रेड

नए मैकबुक एयर में सबसे बड़ा अपग्रेड चिपसेट के तौर पर हो सकता है. कंपनी इसे M4 चिपसेट से लैस कर सकती है. यह 10-कोर CPU, 10-कोर GPU और 16-कोर न्यूरल इंजन से लैस होगा, जो हर सेकंड 38 ट्रिलियन ऑपरेशन हैंडल करने में सक्षम है. यह ऐपल इंटेलीजेंस फीचर्स को भी हैंडल कर पाएगा. इसके साथ कंपनी इसकी RAM को भी 8GB से बढ़ाकर 16GB कर सकती है.

बेहतर बैटरी की उम्मीद

नए मैकबुक एयर में दमदार बैटरी मिलने की उम्मीद है. अभी कंपनी की तरफ से इसकी कैपेसिटी को लेकर कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि M4 चिप के कारण यह लंबी बैटरी लाइफ देगा. 

नैनो-टेक्सचर डिस्प्ले ऑप्शन

ऐपल अपनी नैनो-टेक्सचर टेक्नोलॉजी को धीरे-धीरे और डिवाइसेस में भी ला रही है. यह टेक्नोलॉजी ग्लेयर को कम करती है और ज्यादा रोशनी वाले वातारण में शानदार विजिबिलिटी देती है. मैकबुक प्रो, आईमैक और आईपैड प्रो में मिलने वाली यह टेक्नोलॉजी मैकबुक एयर भी दी जा सकती है. हालांकि, इसके लिए ग्राहकों को अतिरिक्त पैसा देना पड़ सकता है.

कैमरा में भी मिल सकता है अपग्रेड

माना जा रहा है कि मैकबुक एयर के कैमरा में भी अपग्रेड मिल सकता है. इस बार इसमें सेंटर स्टेज सपोर्ट के साथ 12MP कैमरा दिया जा सकता है. आईमैक और मैकबुक प्रो में मिलने वाला यह फीचर वीडियो कॉल के दौरान यूजर को फ्रेम में रखने के लिए कैमरा को ऑटोमैटिक एडजस्ट कर लेता है. 

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घरों की कीमतों में तेजी संभव, पर टैरिफ वॉर और गिरती GDP से बढ़ी रियल एस्टेट सेक्टर की चिंता

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Housing Price Increase Likely: अगर आप सपनों का आशियाना खरीदने का सोच रहे हैं तो ज्यादा कीमत देने के लिए तैयार रहिए. क्योंकि रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है. वहीं महंगे घरों के बावजूद इसका सेल्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. साथ रियल एस्टेट कंपनियों की ओर से नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्चिंग का सिलसिला जारी रहने वाला है. 

साल 2024 की चौथी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए नाईट फ्रैंक इंडिया-नारेडको रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स जारी किया गया है. इस रिपोर्ट में वैश्विक बदलते आर्थिक हालातों के साथ स्टेकहोल्डर्स में इकोनॉमिक ग्रोथ की चिंताओं को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े स्टोकहोल्डर्स में चिंता भी देखी जा रही है.  नाईट फ्रैंक इंडिया-नारेडको रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स में मौजूदा और भविष्य के लिए सेंटीमेंट उम्मीद से बेहतर है लेकिन पिछले तिमाही के मुकाबले सेंटीमेंट कमजोर हुआ है. 2024 की चौथी तिमाही में करेंट सेंटीमेंट स्कोर घटकर 59 पर आ गया है जो कि तीसरी तिमाही में 64 था. साथ ही भविष्य के लिए सेंटीमेंट स्कोर भी घटकर 59 पर आ गया है जो पिछले तिमाही में 67 था. 

रिपोर्ट के मुताबिक इन करेक्शन के बावजूद, वर्तमान और भविष्य दोनों ही के लिए सेंटीमेंट आशावादी बनी हुई है, जो इस सेक्टर में लंबी अवधि में  संभावनाओं में निरंतर विश्वास को दर्शाती है. 

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, “रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स आशावादी दायरे में रहते हुए भी बेहद सावधान है. भू-राजनीतिक स्थिति में तेज बदलाव और घरेलू आर्थिक हालातों के ऐसा हो रहा है. उन्होंने कहा, वैश्विक आर्थिक नीति में बदलाव, विशेष रूप से अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में बदलाव, साथ ही घरेलू विकास में मंदी ने रियल एस्टेट क्षेत्र को अधिक सतर्क रुख अपनाने के लिए विवश हो रही हैं. आने वाली तिमाहियों में, डेवलपर्स और निवेशकों से प्रतीक्षा और निगरानी का दृष्टिकोण बनाए रखने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र द्वारा बनाई गई गति को बनाए रखना है. 

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भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में कौन सी टीम फेवरेट? सुनील गावस्कर ने कर डाली बड़ी भविष्यवाणी

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Sunil Gavaskar Prediction India vs Australia: भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल पर क्रिकेट एक्सपर्ट लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल पर अपनी बात रखी है. सुनील गावस्कर के मुताबिक, भारतीय टीम निश्चित तौर पर फेवरेट है. ऑस्ट्रेलिया के पैट कमिंट, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड जैसे बड़े खिलाड़ी टीम का हिस्सा नहीं होंगे. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की स्पिन गेंदबाजी आक्रमण कमजोर नजर आ रही है. लिहाजा, ऑस्ट्रेलिया के लिए भारतीय टीम को रोकना आसान नहीं होगा.

‘ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी अच्छी है, लेकिन गेंदबाजी कमजोर…’

सुनील गावस्कर ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी अच्छी है, लेकिन गेंदबाजी कमजोर नजर आ रही है. इसके अलावा सुनील गावस्कर ने पिच के मिजाज पर अपनी बात रखी. दरअसल, भारत-न्यूजीलैंड मैच के बाद लगातार कहा जा रहा है कि पिच खास तौर पर स्पिनरों के लिए तैयार किया गया. लिहाजा, इस पिच पर स्पिनरों को बहुत मदद मिल रही है, लेकिन लिटिल मास्टर इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता पिच से कोई बहुत मदद मिल रही हो. आपने हमारे स्पिनरों को देखा, शुरूआती ओवरों में विकेट नहीं आए, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा पिच स्पिनरों के मुफीद होता चला गया.

‘भारत-न्यूजीलैंड मैच में स्पिनरों के लिए मदद जरूर थी, लेकिन यह…’

सुनील गावस्कर ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मैच में स्पिनरों के लिए मदद जरूर थी, लेकिन यह कोई ऐसी पिच नहीं थी जिस पर बल्लेबाजी करना नामुमकिन हो. उन्होंने कहा कि पिच में थोड़ी मदद जरूर थी, लेकिन हमारे गेंदबाजों ने अच्छी लाइन और लेंग्थ पर गेंदबाजी कर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के लिए काम मुश्किल बना दिया. बताते चलें कि भारत ने अपने आखिरी ग्रुप स्टेज मैच में न्यूजीलैंड के 44 रनों से हरा दिया. पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने 50 ओवर में 9 विकेट पर 249 रनों का स्कोर बनाया. जिसके जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 205 रनों पर सिमट गई. भारत के लिए वरुण चक्रवर्ती ने सबसे ज्यादा 5 विकेट लिए. वहीं, इस मैच में भारतीय स्पिनरों ने 9 बल्लेबाजों को आउट किया.

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कश्मीर-मणिपुर को लेकर UN मानवाधिकार प्रमुख ने दिया ज्ञान तो भारत ने दिया करारा जवाब

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India slams UN Human Rights Remarks : संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख की कश्मीर और मणिपुर को लेकर की गई ‘व्यर्थ और निराधार’ टिप्पणियों की भारत ने निंदा की है और करारा जवाब भी दिया है. इसके अलावा भारत ने इस तरह से निशाना लगाकर और चुनिंदा स्थितियों पर टिप्पणी करने को लेकर भी चिंता जाहिर की.

इस दौरान सबसे दिलचस्प बात यह थी कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने वैश्विक घटनाक्रम की जानकारी में भारत के कश्मीर और मणिपुर का उल्लेख तो किया, लेकिन उन्होंने इसमें पाकिस्तान के नाम का जिक्र भी नहीं किया, जहां अल्पसंख्यकों पर होने वाले उत्पीड़न के बारे में पूरी दुनिया को पता है.

भारत ने दिया करारा जवाब

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची ने सोमवार (3 मार्च) को कहा, “जैसा कि वैश्विक घटनाक्रमों में भारत का नाम लिया गया है, मैं शुरुआत में ही इस बात को स्पष्ट कर देता हूं कि दुनिया के सबसे बड़ा लोकतंत्र सतत रूप से एक जीवंत और बहुतवादी समाज है. अपडेट जानकारी में निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियां भारत की जमीनी सच्चाई से बिल्कुल अलग है.”

भारत ने बताई वास्तविक अपडेट की आवश्यकता

इस दौरान भारत ने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक अपडेट को एक वास्तविक अपडेट की जरूरत है. अरिंदम बागची ने कहा, “वैश्विक अपडेट में हम बड़े स्तर पर जटिल मुद्दों के अतिसरलीकरण, व्यापक और सामान्यीकृत टिप्पणियों, ढीली शब्दावली के उपयोग और स्थितियों को स्पष्ट रूप से चुनकर पेश करने को लेकर चिंतित हैं.”

UN मानवाधिकारी प्रमुख ने क्या कहा?

दरअसल, भारत की ओर से यह कड़ी प्रतिक्रिया तब आई, जब जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने वैश्विक घटनाओं पर दी गई जानकारी में भारत के उल्लेख के साथ कश्मीर और मणिपुर की स्थिति का जिक्र किया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा, “मैं मणिपुर में हिंसा और विस्थापन का हल निकालने के लिए बातचीत, शांति स्थापना और मानवाधिकारों के आधार पर कदम उठाने का भी आह्वान करता हूं.”

पाकिस्तान का नहीं किया जिक्र

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा, “मैं कश्मीर समेत अन्य स्थानों पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कानूनों और उत्पीड़न को लेकर चिंतित हूं.” बता दें कि तुर्क के वैश्विक अपडेट में यूक्रेन, गाजा से लेकर बांग्लादेश, अफगानिस्तान और अमेरिका तक के संघर्षों और स्थितियों का उल्लेख किया गया था, लेकिन इसमें पाकिस्तान का कहीं पर भी जिक्र नहीं किया गया.

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