Premanand Ji Maharaj: सफल दाम्पत्य जीवन के लिए पति-पत्नी किन-किन बातों का ध्यान रखें, प्रेमानंद

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Premanand Ji Maharaj Vachan: प्रेमानंद जी महाराज एक महान संत और विचारक हैं जो जीवन का सच्चा अर्थ समझाते और बताते हैं. प्रेमानंद जी के अनमोल विचार जीवन को सुधारने और संतुलन बनाएं रखने में मार्गदर्शन करते हैं.

सफल दाम्पत्य जीवन के लिए पति-पत्नी को किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, इस पर प्रेमानंद जी महाराज का मानना है कि दोनों यानि पति-पत्नी को चाहिए बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड अगर पूर्व में बनाया था तो एक दूसरे को शादी के बाद बताना नहीं है. अब शादी के बाद इन बातों की चर्चा ना करें. नया जीवन शादी के बाद शुरु होता है, इन बातों को पूर्व जन्म की मान कर छोड़ देना चाहिए और अपनी लाइफ में आगे बढ़ें. नए जीवन में खटास ना पैदा हो इसीलिए इन पुरानी बातों को छोड़ देना चाहिए.

नए जीवन में अपनी पत्नी सें अनुराग करें, अपनी पति से अनुराग करें. एक दूसरे की घर-गृहस्थी की गलतियों को क्षमा करें. कोई बात हो जाती है और एक नाराज हो जाए तो दूसरा शांत हो जाएं, शांत होने बाद उस बात का निर्णय कर लें, मार-पीट लड़ाई-झगड़ा ना करें. पत्नी को चाहिए की पति की प्रशंसा, सास सुसर की सेवा करें. घर में सभी का मान रखें और अपने धर्म को अच्छे से पूरा करें. जिससे पति को प्रशंसा प्राप्त हो. पति को चाहिए की अपने अर्धांगिनी की हर इच्छा की पूर्ति करें. पत्नी का पति ने जिंदगी भर के लिए लिया है पति का यह फर्ज है उसकी लाख गलतियों को क्षमा करके प्यार दे.डांट-फटकार नहीं लगाएं इससे संबंध कभी खराब हो ही नहीं सकता.

अगर अचानक आपने देखा एकांत में किसी से बात कर रहें हैं भले ही आप सही हैं लेकिन एक शक जो दिमाग में आ जाता है उससे रिश्ते खराब होने लगते हैं. इसीलिए इस रिश्ते में किसी भी बात को पति या पत्नी से छुपाएं नहीं. पति की अनुमति के बिना किसी काम को ना करें. हमारे किसी भी आचरण से पति या पत्नी को संयश ना हो. आपकी अधिनता पति या पत्नी के प्रति हो, तो हमाका जीवन निर्वाह हो जाएगा. आजकल छोटी-छोटी बातों से रिश्ते खराब हो जाते हैं. जीवन खराब हो जाता है. मनमुटाव वाला कार्य ना करें. यह बातें जब अंतर मन में बैठ जाती है तो प्यार करते समय भी मन में संयश रहता है, और मन मलीन हो जाता है. इसीलिए दोनों लोग सावधान रहें जो पीछे हुआ उसको भूलकर आगे बढ़ें. नया जीवन मंगलमय हो ऐसा जीवन बिताएं. अधारना करें, भगवान का नाम जप करें और अच्छा सोचे. आप ही आगे आने वाली पीढ़ी की नींव हैं. संतान आपकी तेज बनेगी.

Premanand Ji Maharaj: क्या अपनों के प्रति मोह और आसक्ति भजन मार्ग में बाधा हैं? जानें प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल वचन

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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महाकुंभ में संगम नहाने आए नागा साधु अब कहां है?

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महाकुंभ में पहुंचे नागा साधु का बहुत महत्व होता है. नागा साधुओं को तपस्वी योद्धा माना जाता है. महाकुंभ में होने वाले शाही स्नान की शुरूआत नागा साधु ही करते हैं. नागा साधु महाकुंभ में शाही स्नान के लिए आते हैं.

महाकुंभ में पहुंचे नागा साधु का बहुत महत्व होता है. नागा साधुओं को तपस्वी योद्धा माना जाता है. महाकुंभ में होने वाले शाही स्नान की शुरूआत नागा साधु ही करते हैं. नागा साधु महाकुंभ में शाही स्नान के लिए आते हैं.

धर्म के रक्षक नागा साधु महाकुंभ के प्रमुख आकर्षण होते हैं.आध्यात्मिक महत्व रखने वाले यह साधु आखिर महाकुंभ के बाद कहा गए.

धर्म के रक्षक नागा साधु महाकुंभ के प्रमुख आकर्षण होते हैं.आध्यात्मिक महत्व रखने वाले यह साधु आखिर महाकुंभ के बाद कहा गए.

महाकुंभ में संगम नहाने आए नागा साधु अब वाराणसी में हैं. भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में नागा साधुओं ने धुनी जलाई हैं जहां पर वह जप-तप करते हैं.

महाकुंभ में संगम नहाने आए नागा साधु अब वाराणसी में हैं. भोलेनाथ की नगरी वाराणसी में नागा साधुओं ने धुनी जलाई हैं जहां पर वह जप-तप करते हैं.

नागा साधु वाराणसी में होली तक रहेंगे. नागा साधु इसके बाद मसाने की होली खेलेंगे और काशी में गंगा के बाद लौट जाएंगे.

नागा साधु वाराणसी में होली तक रहेंगे. नागा साधु इसके बाद मसाने की होली खेलेंगे और काशी में गंगा के बाद लौट जाएंगे.

नागा साधु इसके बाद वाराणसी से अपने अखाड़ों की ओर लौट जाएंगे. वहीं कुछ साधु तपस्या के लिए भी जा सकते हैं.

नागा साधु इसके बाद वाराणसी से अपने अखाड़ों की ओर लौट जाएंगे. वहीं कुछ साधु तपस्या के लिए भी जा सकते हैं.

26 फरवरी को महाकुंभ का  समापन हो गया है. इसके साथ ही नागा साधु भी जो देश के अलग-अलग कोनों से आएं थे वह भी वाराणसी में होली के बाद अपने-अपने अखाड़ों को लौट जाएंगे.

26 फरवरी को महाकुंभ का समापन हो गया है. इसके साथ ही नागा साधु भी जो देश के अलग-अलग कोनों से आएं थे वह भी वाराणसी में होली के बाद अपने-अपने अखाड़ों को लौट जाएंगे.

Published at : 28 Feb 2025 10:10 AM (IST)

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महाकुंभ जिस 144 साल की जमकर हो रही चर्चा, आखिर उसका सच क्या ?

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Mahakumbh 2025: प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ महाकुंभ का समापन महाशिवरात्रि पर हो चुका है. महाकुंभ सिर्फ एक मेला नहीं है बल्कि यह आस्था, परंपरा और हिंदू संस्कृति का संगम है. श्रद्धालु कुंभ मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं.

2025 में 144 साल बाद आए महाकुंभ का संयोग बना, यही वजह थी कि महाकुंभ में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. आखिर क्यों इस बार के महाकुंभ में 144 साल की चर्चा जोरों पर है, क्या है इसकी सच्चाई, क्या वाकई ये महाकुंभ 144 साल बाद आया था जानें इन्हीं सवालों के जवाब.

क्यों होता है कुंभ मेले का आयोजन ?

पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत को लेकर राक्षस और देवताओं के बीच संघर्ष चल रहा था तब, इंद्र देव के पुत्र जयंत कौवे का रूप धरकर अमृत कलश लेकर उड़ गए, इस दौरान अमृत कलश की बूंदे चार जगह हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में गिरी. जहां जहां बूंदे गिरी वहां-वहां कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है.

कुंभ चार प्रकार के होते हैं ?

  • कुंभ हर चार सालों में एक बार आता है.
  • अर्धकुंभ हर 6 साल बाद आयोजित होता है.
  • पूर्णकुंभ 12 सालों में एक बार आता है.
  • महाकुंभ 144 सालों बाद आयोजित होता है.

पूर्णकुंभ और महाकुंभ में अंतर

पूर्णकुंभ तब आता है जब बृहस्पति की सूर्य का 1 चक्कर लगाने में 12 साल लगते हैं. वहीं जब ये 12 साल के 12 पूर्ण कुंभ पूरे होते हैं तब 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन होता है.

क्या है महाकुंभ के 144 साल वाले संयोग का सच ?

इस साल महाकुंभ को 144 वर्षों बाद होने वाला बताया गया था, लेकिन सरकारी रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले 2013 के कुंभ को भी महाकुंभ का नाम दिया गया था. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि अगर 2013 में 144 साल वाले महाकुंभ का संयोग बना था तो इस बार 2025 में ये संयोग कैसे बन सकता है.

जानकारों के अनुसार जब विशेष खगोलिय स्थिति में चंद्रमा, शनि और बृहस्पति ग्रह सूर्य के साथ एक रेखा में मौजूद होते हैं तब 144 साल बाद महाकुंभ का संयोग बनता है, ये खास महासंयोग इस बार 2025 में बना, इसलिए इस बार पूर्णकुंभ को 144 साल बाद आने वाला महाकुंभ बताया जा रहा है. सनातन में महाकुंभ में संगम पर स्नान करना सबसे पवित्र माना जाता  है, इसलिए रिपोट्स के अनुसार इस बार करीब 65 करोड़ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई.

किसने की कुंभ की शुरुआत

ग्रंथों में उल्लेख है कि सतयुग से ही इस मेले का आयोजन किया जा रहा है. आदि शंकराचार्य द्वारा महाकुंभ की शुरुआत की गई थी. कुछ कथाओं में बताया गया है कि कुंभ का आयोजन समुद्र मंथन के बाद से ही किया जा रहा है.

Lathmar Holi 2025: बरसाना में लठ्ठमार होली किस दिन खेली जाएगी?

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इन खास संदेशों के जरिए अपनों को कहें रमजान मुबारक, यहां हैं शुभकामना संदेशों की लिस्ट

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Ramadan 2025 Wishes In Hindi: 28 फरवरी 2025 से रमजान के पाक महीने की शुरुआत हो रही है. मुस्लिम धर्म के लोग पूरे एक माह तक अल्लाह की इबादत करते हैं, पांच वक्त की नमाज पढ़ने के साथ ही दिन भर रोजा किया जाता हैं. ऐसे में चांद दिखने के साथ ही आज से रमजान की शुरुआत हो जाएगी और आप अपनों को बधाई ,शुभकामना और मुबारकबाद देना चाहते हैं, तो यह कोट्स और मैसेज भेज सकते हैं.

रमजान 2025 मुबारक शुभकामनाएं 

रहमतों की बारिश हो, गुनाहों से माफी मिले, दुआएं कबूल हों और दिल को सुकून मिले. रमजान 2025 मुबारक.

 

रोजे की रहमत, दुआओं की बरकत, इबादत से रोशन हो आपका जहान, रहमत से महक उठे आपका अरमान. रमजान 2025 की दिल से मुबारकबाद.

 

रमजान के इस पाक महीने में, रोशनी हो हर रास्ते में, खुशियां हो हर दिल में, दुआएं हों हर लब पर और बरकत हो हर घर में. रमजान मुबारक.

 

सबर और इबादत का महीना, रमजान का चांद रोशन हो गया, रहमतों का मौसम बरसने लगा, रब से यही दुआ है हमारी, आपके घर में खुशियों का बसेरा हो सदा. रमजान 2025 की मुबारकबाद.

 

या अल्लाह! हमें ताकत दें नेक राह पर चलने की, हमें बरकत दे हर अच्छे काम में, हमें रहमत दे दुनिया और आखिरत में. रमजान मुबारक.

 

रमजान कोट्स इन हिंदी 

 

रमजान का महीना अल्लाह की इबादत का महीना है, इसमें हर नेक काम का सवाब दोगुना मिलता है.

 

रमजान की बरकत से दिल पाक हो जाते हैं, अल्लाह की रहमत से हर मुश्किल आसान हो जाती है.

 

रमजान में की गई हर इबादत, हर सजदा और हर दुआ हमारी ज़िन्दगी को रोशन करती है.

 

रमजान सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं, यह अपने अंदर सब्र और अल्लाह के करीब जाने का महीना है.

 

जो रमजान में दिल से दुआ करता है, अल्लाह उसकी हर मुराद पूरी करता है.

 

रमजान हमें खुदा से जोड़ने और अपने गुनाहों से तौबा करने का सबसे खूबसूरत मौका देता है.

 

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रमजान में मुस्लिमों को ये ड्राई फ्रूट देता है भरपूर ताकत, पूरे महीने खाते हैं लोग

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Ramadan Powerful  Dry Fruit : सब्र, इबादत और मोहब्बत का महीना, माह-ए-रमजान 1 मार्च से शुरू हो सकता है. अगर चांद शुक्रवार देखा गया तो पहला रोजा शनिवार या फिर दो मार्च को हो सकता है. रमदान के महीने में खजूर का अपना अलह ही महत्व है. रोजा रखने वाले खजूर (Dates) से ही अपना रोजा खोलते हैं. इस वजह से इस्लाम में खजूर को खास महत्व दिया जाता है.

खजूर प्रोटीन से भरपूर होता है. रोजे में इसका सेवन करने से शरीर में ताकत बनी रहती है. यही कारण है कि रमजान का महीना शुरू होते ही इस ड्राई फ्रूट की डिमांड बढ़ जाती है.

खजूर क्यों है इतना फायदेमंद

खजूर में फाइबर, आयरन, सोडियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स कूट-कूटकर भरे हैं, जो शरीर के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद हैं. खजूर खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है, जो सेहतमंद रखती है.  नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, खजूर एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव और एंटी-कैंसर गुणों वाला भी है. इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनोइड्स जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स कार्डियोवस्कुलर डिजीज के जोखिम को कम करते हैं.

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खजूर खाने के फायदे

1. खजूर में करीब-करीब सभी जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं.

2. खजूर में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स आर्टरीज सेल्स से बैड कोलेस्ट्रॉल हटाने का काम करता है.

3. इस ड्राई फ्रूट में मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम हार्ट को हेल्दी रखते हैं.

4. खजूर खाने से लंबे समय तक पेट भरा-भरा महसूस करता है, जिससे ओवरईटिंग से बच जाते हैं. इस तरह यह वजन कम करने में मददगार है.

5. खजूर में फाइबर ज्यादा होने से पाचन तंत्र मजबूत बना रहता है. 

6. आयरन से  भरपूर होने के चलते इस ड्राई फ्रूट से शरीर में खून की कमी नहीं होती है.

7. खजूर में मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम हड्डियों और मसल्स को मजबूत बनाते हैं.

8. खजूर इम्यूनिटी बूस्टर है, जो बीमारियों से बचाता है.

9. इसे खाने से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर की समस्या नहीं होती है.

10. बालों और स्किन के लिए भी खजूर बेहद फायदेमंद है.

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खजूर कैसे खाना चाहिए

1. दूध में 2-3 खजूर डालकर अच्छी तरह उबाल लें और फिर पिएं.

2. खजूर को दलिया, खीर और ओट्स में मिलाकर भी खा सकते हैं.

3. हलवे में चीनी की बजाय खजूर मिला सकते हैं.

4.  खजूर को बाकी ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर लड्‌डू बनाकर भी सेवन कर सकते हैं.

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चैत्र नवरात्रि में किस पर होगा माता का आगमन और प्रस्थान, मिल रहे खास संकेत

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Chaitra Navratri 2025: मां दुर्गा की भक्ति का पर्व नवरात्रि का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. देवी पुराण के अनुसार हर साल चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा 9 दिन तक धरती पर वास करती हैं. इस दौरान देवी के भक्त पूर्ण आस्था के साथ माता के नौ स्वरूपों की पूजा, पाठ, धार्मिक अनुष्ठान में लीन रहते हैं.

चैत्र नवरात्रि में माता के आगमन और प्रस्थान की सवारी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे आने वाला समय कैसे रहेगा इसके संकेत मिलते हैं. आइए जानते हैं इस साल चैत्र नवरात्रि 2025 में कब से शुरू हो रही है, मां दुर्गा का वाहन क्या होगा.

चैत्र नवरात्रि 2025 कब से शुरू ?

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है. इसकी समाप्ति 7 अप्रैल 2024 को नवरात्रि व्रत पारण से होगी. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, इस दिन हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है, गुड़ी पड़वा का त्योहा भी मनाया जाता है.

चैत्र नवरात्रि 2025 में माता का आगमन

चैत्र नवरात्रि का आरंभ और समापन दोनों ही रविवार से हो रहा है यानी कि इस साल मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान हाथी पर होगा. मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है. हाथी पर माता के आगमन का अर्थ है इस साल अच्छी वर्षा होगी. देश में समृद्धि बढ़ेगी. 

मां दुर्गा के आगमन और विदाई के वाहन से देश-दुनिया, प्रकृति, फसल और मानव जीवन में पड़ने वाले अच्छे-बुरे प्रभाव का अनुमान लगाया जाता है. इसलिए नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी को महत्वपूर्ण माना जाता है.

कलश स्थापना मुहूर्त

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि शुरू – 29 मार्च को शाम 4 बजकर 27

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि समापन – 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49

  • कलश स्थापना – सुबह 6.13 – सुबह 10.22
  • अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12.01 – दोपहर 12.50

Mahakumbh 2025: महाकुंभ जिस 144 साल की जमकर हो रही चर्चा, आखिर उसका सच क्या ?

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मार्च में फैमिली के साथ स्कूली छात्र प्लान कर सकते हैं लॉन्ग वीकेंड, जानिए कब-कब हैं छुट्टियां

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मार्च 2024 में छात्रों को नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले काफी आराम करने का मौका मिलेगा, क्योंकि इस महीने में कई छुट्टियां पड़ रही हैं. इन छुट्टियों में प्रमुख त्योहारों और छुट्टियों के साथ-साथ वीकेंड की छुट्टियां भी शामिल हैं. इससे छात्रों को मार्च महीने में अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने और आराम करने का अच्छा मौका मिलेगा.

होलिका दहन, 13 मार्च: होली के एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है, जो अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक होता है. यह दिन विशेष रूप से उत्तर भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहां लोग होलिका दहन करके बुराई को नष्ट करने की भावना को जागृत करते हैं. यह दिन देशभर में छुट्टी के रूप में मनाया जाता है और समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है.

होली, 14 मार्च: होली का त्योहार रंगों का त्योहार है, जो वसंत ऋतु की शुरुआत और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है. इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हैं और मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं. यह त्योहार पूरे भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, और यह सामाजिक मेल-जोल और परिवार के साथ समय बिताने का बेहतरीन अवसर होता है. होली की छुट्टी विद्यार्थियों के लिए एक सुखद समय होती है, क्योंकि वे इस दिन का पूरा आनंद ले सकते हैं.

उगाड़ी, गुड़ी पड़वा, और चैत्र शुक्लादी, 30 मार्च: उगाड़ी, गुड़ी पड़वा और चैत्र शुक्लादी हिंदू नववर्ष के त्योहार होते हैं, जिन्हें महाराष्ट्र, कर्नाटका, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मनाया जाता है. ये त्योहार नए साल की शुरुआत और जीवन में नवीनीकरण का प्रतीक होते हैं. इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, पूजा करते हैं और पारंपरिक व्यंजन खाते हैं. यह दिन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह नई उम्मीदों और आशाओं का भी प्रतीक होता है.

ईद-उल-फित्र, 31 मार्च: ईद-उल-फित्र रमज़ान के महीने के बाद मनाया जाने वाला एक पवित्र त्योहार है. यह भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और रमज़ान के महीने के समापन का संकेत देता है. ईद के दिन लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, खास व्यंजन खाते हैं और गरीबों को दान देते हैं. यह त्योहार सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक होता है, और यह एक राष्ट्रीय छुट्टी होती है, जिससे स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं.

मार्च 2025 में स्कूल छुट्टियां: मार्च 2025 में छात्रों को पांच शनिवार और पांच रविवार मिलेंगे, जिससे उन्हें अतिरिक्त समय मिलेगा. इस दौरान, कुछ स्कूल तीसरे या आखिरी शनिवार को भी छुट्टी मना सकते हैं. इसके अलावा, होली के बाद 13 से 16 मार्च तक चार दिन की छुट्टी का लाभ भी उठाया जा सकता है, जिससे छात्रों को लंबा वीकेंड मिलेगा. इस तरह, मार्च 2024 में छात्रों के पास कई अवसर हैं, जहां वे त्योहारों का आनंद ले सकते हैं और आराम करने का समय पा सकते हैं.

 

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देश की किस यूनिवर्सिटी को माना जाता है नेताओं की फैक्ट्री? कई सीएम से भी कनेक्शन

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दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए छात्र-छात्राएं अक्सर परेशान रहते हैं. यहां के प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई करने की ख्वाहिश रखने वाले विद्यार्थियों की संख्या बहुत अधिक है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले कई प्रसिद्ध व्यक्तित्वों ने अपने करियर में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.

DU से पढ़े कई छात्र बन चुके हैं CM

दिल्ली की इस विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र आते हैं, ये छात्र विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाते हैं और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करते हैं. यह सिलसिला वर्षों से जारी है, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रेखा गुप्ता, मदनलाल खुराना, नवीन पटनायक, कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद, शशि थरूर, डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी, मनी शंकर अय्यर, विजय गोयल और अरुण जेटली जैसे नाम इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों की सूची में शामिल हैं.

बेहतरीन छवि

दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपनी बेहतरीन शिक्षा प्रणाली और उत्कृष्ट कॉलेजों के कारण एक ऐसी छवि बनाई है कि यहां दाखिला लेना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है.

दिल्ली विश्वविद्यालय से कई प्रतिभाशाली छात्र निकले हैं, जिन्होंने देश की दिशा और दशा को प्रभावित किया. इनमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम भी शामिल है, जिन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय से की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ से कानून की डिग्री हासिल की.

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जरबोम गम्‍लिन भी 1981 से 1984 तक यहां के छात्र रहे. ओडिशा के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके नवीन पटनायक ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई की. दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने भी रामजस कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना ने भी किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की.

दिल्ली सीएम रेखा ने की पढ़ाई

मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दौलत राम कॉलेज से बी.कॉम किया. इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और दिवंगत अरुण जेटली ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ से एलएलबी की पढ़ाई की. केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी और पूर्व मंत्री किरन रिजिजू जैसे कई अन्य नेताओं ने भी यहीं से शिक्षा प्राप्त की है.

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बुंदेलखंड में सूखा मिटाने में इस यूनिवर्सिटी का रहा है अहम योगदान, जानिए कैसे होता है एडमिशन?

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झांसी की वीरांगना के नाम पर स्थापित रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरएलबीसीएयू) बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है. इसकी स्थापना 2014 में संसद के अधिनियम द्वारा हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड जैसे सूखा-ग्रसित क्षेत्र में कृषि शिक्षा और रिसर्च को बढ़ावा देना था. झांसी में स्थित यह विश्वविद्यालय भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है.

ऐसे होता है यूनिवर्सिटी में एडमिशन

विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना छात्रों के लिए प्रतिष्ठा का विषय है. स्नातक कार्यक्रमों के लिए प्रवेश मुख्य रूप से अखिल भारतीय कृषि प्रवेश परीक्षा (ICAR-AIEEA UG) के माध्यम से होता है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आयोजित किया जाता है. स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के लिए ICAR-AIEEA PG और ICAR-AICE JRF/SRF (PhD) परीक्षाओं के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है. वही कुछ कोर्सेज में दाखिला सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) के जरिए होता है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षण का प्रावधान है.

ये कोर्स पढ़ाए जाते हैं यूनिवर्सिटी में 

वर्तमान में विश्वविद्यालय कई पाठ्यक्रम प्रदान करता है. स्नातक स्तर पर बीएससी (ऑनर्स) कृषि, बीएससी (ऑनर्स) बागवानी, बीएससी (ऑनर्स) वानिकी, बीटेक (कृषि इंजीनियरिंग) और बीएससी (ऑनर्स) खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे कार्यक्रम उपलब्ध हैं. स्नातकोत्तर स्तर पर कृषि विज्ञान, बागवानी, कृषि इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों में एमएससी और पीएचडी कार्यक्रम प्रदान किए जाते हैं.

अलग-अलग कोर्स की ये है फीस 

फीस संरचना की बात करें तो बैचलर्स कोर्सेज के लिए प्रति सेमेस्टर लगभग 13,000 से 16,000 रुपये तक है, जबकि मास्टर्स कोर्सेज के लिए यह लगभग 18,000 से 25,000 रुपये प्रति सेमेस्टर है,वही PhD की फीस 28,000 रुपये प्रति सेमेस्टर निर्धारित है. छात्रावास, मेस और अन्य सुविधाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है. आईसीएआर छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी छात्रवृत्तियों के माध्यम से योग्य छात्रों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है, जिससे शिक्षा किफायती बनती है.

कई प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी पढ़ चुके हैं इस यूनिवर्सिटी से 

इस विश्वविद्यालय से कई प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी निकले हैं. डॉ. राजेश कुमार सिंह, जो अब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं, ने यहां से अपनी शिक्षा पूरी की और सूखा-प्रतिरोधी फसलों पर अपने शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त की. डॉ. सुनीता यादव, जो वर्तमान में एक प्रमुख कृषि-स्टार्टअप की संस्थापक हैं, ने विश्वविद्यालय से कृषि व्यवसाय प्रबंधन में अपनी डिग्री हासिल की और अब हजारों किसानों को रोजगार प्रदान कर रही हैं.

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