DeepSeek को चीन में ही मिली चुनौती, यह कंपनी ले आई नया AI मॉडल, पलक झपकते ही दे देगा जवाब

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कम लागत में AI मॉडल बनाकर दुनिया को चौंकाने वाले चीनी स्टार्टअप DeepSeek को घर में ही चुनौती मिल गई है. दरअसल, चीनी कंपनी Tencent ने अपना नया AI मॉडल Hanyuan Turbo S लॉन्च किया है. कंपनी का दावा है कि यह DeepSeek के R1 मॉडल से तेज है और पलक झपकते ही किसी भी सवाल का जवाब देने में सक्षम है. बता दें कि DeepSeek ने R1 मॉडल को बेहद कम लागत में तैयार किया है और इसके अपने मुकाबले के कई AI मॉडल को पछाड़ दिया है.

एक सेकंड से भी कम समय में जवाब देता है Hanyuan Turbo S

Tencent ने अपने बयान में कहा कि Hunyuan Turbo S एक सेकंड से भी कम समय में किसी भी सवाल का उत्तर दे सकता है. इसकी यही खासियत इसे बाकी मॉडल से अलग करती है. कंपनी ने कहा कि AI इवेल्यूशन में इसके मॉडल ने DeepSeek के V3 मॉडल के बराबर प्रदर्शन किया है.

चीनी कंपनियों से मिल रही DeepSeek को टक्कर

OpenAI जैसी अमेरिकी कंपनियों को चुनौती देने वाले DeepSeek को अब घरेलू स्तर पर कड़े मुकाबला का सामना करना पड़ रहा है. Tencent से पहले अलीबाबा ग्रुप ने भी अपना एआई मॉडल Qwen 2.5 लॉन्च किया था. कंपनी का दावा है कि यह मॉडल GPT 4o, मेटा के Llama और DeepSeek के R1 मॉडल को पीछे छोड़ सकता है. 29 भाषाओं को सपोर्ट करने वाला Qwen 2.5 टेक्स्ट, इमेज और ऑडियो को भी हैंडल कर सकता है. 

चीन में सरकारी एजेंसियां कर रहीं DeepSeek का यूज

DeepSeek की कामयाबी की चीनी सरकार सेलिब्रेट कर रही है. चीनी सरकार के कई विभाग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. हांगकांग में भी इसके एआई मॉडल पर बने टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. बढ़ती डिमांड के बीच DeepSeek ने पीक ऑवर्स के बाद अपने मॉडल को यूज करने की फीस में भी कटौती का ऐलान किया है.

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रकुल के हाथ लगा बड़ा प्रोजेक्ट, सैफ के साथ बनेगी जबरदस्त केमेस्ट्री, स्टोरी और जॉनर को लेकर सस्

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‘मेरे हसबैंड की बीवी’ की जबरदस्त सफलता के बाद रकुल प्रीत सिंह के करियर को नई उड़ान मिल गई है. अब वह एक और धमाकेदार फिल्म के लिए तैयार हैं. इंडस्ट्री के एक सूत्र के मुताबिक, रकुल जल्द ही सैफ अली खान के साथ स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी. इस फिल्म का निर्माण जाने-माने प्रोड्यूसर रमेश तौरानी कर रहे हैं.

इंडस्ट्री से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “रकुल, रमेश तौरानी के बैनर तले एक रोमांचक नए प्रोजेक्ट के लिए सैफ अली खान के साथ काम करने के लिए तैयार हैं. मेरे हसबैंड की बीवी की सफलता के बाद, वह स्मार्ट विकल्प चुन रही हैं और यह फिल्म उनकी लय को और मजबूत करेगी.”

रकुल प्रीत सिंह लगातर अलग-अलग इंडस्ट्री में दमदार रोल कर अपनी पहचान बना रही हैं. चाहे रोमांटिक कॉमेडी हो या इंटेंस ड्रामा, उन्होंने हर तरह के किरदार ऐसे चुने हैं जो उनकी एक्टिंग स्किल को और निखारते हैं. ‘मेरे हसबैंड की बीवी’ ने दिखा दिया कि वो कॉमेडी और ड्रामा को बड़े ही नैचुरल अंदाज में बैलेंस कर सकती हैं. अब उनकी अगली फिल्म को लेकर भी यही उम्मीदें हैं कि वो इस सिलसिले को आगे बढ़ाएंगी और एक और शानदार परफॉर्मेंस देंगी.

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ये प्रोजेक्ट सैफ अली खान के साथ रकुल का एक जबरदस्त कॉम्बिनेशन लेकर आ रहा है. सैफ अपनी नैचुरल चार्म और हर किरदार में जान डालने की काबिलियत के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में ये जोड़ी स्क्रीन पर एक नई फ्रेश एनर्जी लेकर आएगी. इसी वजह से ये फिल्म अभी से साल की सबसे चर्चित कास्टिंग में से एक मानी जा रही है.

रमेश तौरानी, जो हमेशा एंटरटेनिंग फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, इस प्रोजेक्ट में भी अपनी ट्रेडमार्क स्टाइल लेकर आ रहे हैं—कमर्शियल अपील के साथ दमदार कहानी. भले ही अभी फिल्म की स्टोरी और जॉनर को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन इस कोलैबोरेशन की चर्चा इंडस्ट्री में जोरों पर है.

इस फिल्म के साथ रकुल अपनी सक्सेसफुल जर्नी को आगे बढ़ा रही हैं, ये साबित करते हुए कि वो सिर्फ यहां टिकने नहीं, बल्कि हर बार कुछ नया करने आई हैं. अलग-अलग और चैलेंजिंग रोल्स को अपनाने की उनकी काबिलियत ने उन्हें खास बनाया है. फैंस अब बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि वो सैफ अली खान के साथ कैसी केमिस्ट्री शेयर करेंगी, क्योंकि ये फिल्म एक धमाकेदार सिनेमैटिक एक्सपीरियंस देने का वादा करती है.

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चलते-फिरते लोगों और ठेलों पर लठ बरसा रहा था दबंग! पीछे से आई पुलिस और कर दिया खेला

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यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की फ्लाइट अमेरिका में लैंड, ट्रंप के साथ होगी बड़ी डील!

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US-Ukraine Minerals Deal : सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की अपने संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे पर पहुंच चुके हैं. उनका विमान ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर लैंड कर चुका है. यूक्रेनी राष्ट्रपति के शुक्रवार (28 फरवरी) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने की उम्मीद है. इस दौरान दावा किया जा रहा है कि ट्रंप जेलेंस्की के साथ ट्रिलियन-डॉलर की डील करने वाले हैं, जिससे अमेरिका को यूक्रेन के दुर्लभ खनिजों का खजाना आसानी से मिल जाएगा.

हालांकि, वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों को कहना है कि यूक्रेन में दुर्लभ खनिजों और अन्य खनिज संपत्तियों के बारे में बहुत कम सबूत हैं और जो कुछ भी है, उसे पूर्व युद्धग्रस्त क्षेत्र से निकालना मुश्किल, यहां तक की असंभव होगा.

एक्सपर्ट्स ने जताया संदेह

ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता अमेरिकी करदाताओं के लिए काफी फायदेमंद होगी क्योंकि इससे यूक्रेन की सहायता में खर्च हुए अरबों डॉलर्स की भरपाई होगी. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों और एक्सपर्ट्स को इस समझौते पर संदेह है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह इतना आसान नहीं है, क्योंकि यूक्रेन में दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. जो आंकड़े हैं वो पुराने हैं और सोवियत युग के मानचित्रों पर आधारित हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूक्रेन में उपलब्ध खनिजों की मात्रा वैश्विक स्तर पर काफी कम है.

जेलेंस्की ने दिया था इस डील का विचार

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के साथ यूक्रेनी खनिजों के सौदा करने का मुख्य विचार यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की का था. उन्होंने पिछले साल अमेरिका का दौरा किया था और अपनी विजय योजना सामने रखी थी. इस योजना में अमेरिका को यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच देने के बदले में अमेरिकी सहायता जारी रखने की बात कही गई थी.

समझौते में है पेंच

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यूक्रेन के इस प्रस्ताव को यथार्थवादी नहीं माना. उनका मानना है कि यूक्रेन में खनन व्यवसाय में प्रवेश करने के लिए कोई भी अमेरिकी कंपनी उत्सुक नहीं है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यूक्रेन के अधिकांश खनिज भंडार रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में है, जहां पहुंचना खतरनाक और काफी महंगा है. ऐसे में एक्सपर्ट्स को शक है कि ट्रंप का यह सौदा फायदेमंद होगा या नहीं.

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दुनिया के जिस देश में लोग बोलते हैं भोजपुरी वहां लॉकडाउन जैसे हालात! जानिए क्यों

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Mauritius Cyclone: मॉरीशस और ला रीयूनियन आईलैंड में चक्रवात गारेंस के चलते लॉकडाउन जैसे हालात बन गए हैं. शुक्रवार को इस खतरनाक तूफान के आगमन के कारण हाई अलर्ट का ऐलान किया गया है. चक्रवात अब सेंट डेनिस तक पहुंच चुका है, जो मॉरीशस से 227 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह तूफान 195 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है.

मॉरीशस में चक्रवात के मद्देनजर लोगों से घर के अंदर ही रहने की अपील की गई है. बुधवार को ही सावधानी के तहत एयरपोर्ट और स्कूल बंद कर दिए गए थे. मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी कि शुक्रवार तक चक्रवात मॉरीशस तक पहुंच जाएगा. इसी के बाद रेड अलर्ट का ऐलान किया गया और लॉकडाउन जैसे हालात बन गए. मॉरीशस की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है. हालांकि, इसके बावजूद यहां काफी लोग लोग भोजपुरी बोलते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार मॉरीशस की कुल आबादी में से 5.3 प्रतिशत लोग भोजपुरी बोलते हैं.

चक्रवात गारेंस की तीव्रता
चक्रवात गारेंस को कैटिगरी 3 का तूफान माना गया है, जो Severe Tropical Cyclone की श्रेणी में आता है. इस तूफान में हवाएं 165-224 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं. ऐसे तूफान में मकानों, पेड़ों, और बिजली के खंभों को भारी नुकसान हो सकता है. मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तूफान के कारण बाढ़ का खतरा भी है, जिससे लोगों में डर और दहशत का माहौल बना हुआ है.

रेड अलर्ट और लॉकडाउन जैसे हालात
मॉरीशस में रेड अलर्ट जारी होने के बाद, लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो गए हैं. इस दौरान लोगों ने स्टोर्स में जाकर खाद्य सामग्री और पानी स्टॉक करने के लिए लंबी कतारें लगाईं. स्थानीय लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के समय जैसे हालात एक बार फिर बन गए हैं.

ला रीयूनियन में भी गुरुवार को ही एयरपोर्ट बंद कर दिया गया था, और सैंटे-मैरी पोर्ट में मछुआरों ने अपनी नावें सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर दीं. किसानों ने अपने ग्रीनहाउस को बचाने के लिए उन्हें ढक दिया है, ताकि तूफान से नुकसान को कम किया जा सके.

चक्रवात से बचने के प्रयास
लोगों ने तूफान से बचने के लिए हर संभव तैयारी कर ली है. स्थानीय बाजारों में पानी, खाद्य सामग्री, और आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए भीड़ उमड़ रही है. लोग इस बात से घबराए हुए हैं कि इस खतरनाक तूफान से क्या प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए उन्होंने घरों में ही सुरक्षित रहने का निर्णय लिया है.

लॉकडाउन जैसे हालात
चक्रवात गारेंस ने मॉरीशस और उसके आसपास के क्षेत्रों में लॉकडाउन जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. तूफान की तीव्रता और संभावित खतरे को देखते हुए सरकार ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है. लोगों को इस संकट से बचने के लिए घरों में सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है.

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तबाही की आहट! 3 घंटे में कांपी 4 देशों की धरती, जानें भूकंप से कहां-कहां मची खलबली

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Earthquake in Nepal: नेपाल में शुक्रवार सुबह 6.1 तीव्रता का भूकंप आया. झटके भारत के बिहार, सिलीगुड़ी और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में महसूस किए गए. जिसके बाद खौफजदा लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. राष्ट्रीय भूकंप निगरानी और अनुसंधान केंद्र ने पुष्टि की कि भूकंप का केंद्र काठमांडू से लगभग 65 किलोमीटर पूर्व में सिंधुपालचौक जिले के भैरवकुंडा में था. 

भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 2:51 बजे आया, जिससे नेपाल के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में दहशत फैल गई. शुक्रवार को आए भूकंप के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है. हालांकि, नुकसान या हताहतों की कोई खबर नहीं है. 

भारत और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी महसूस किए गए झटके

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पटना में इमारतें और छत के पंखे हिलते हुए दिखाई दिए हैं.वहीं, भारत और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों ने भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की जानकारी दी. हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने या किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन स्थानीय अधिकारी स्थिति का आकलन कर रहे हैं.

पाकिस्तान में भी आया भूकंप

इस बीच, रिक्टर स्केल पर 4.5 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया है, जिसका केंद्र पाकिस्तान था. पाकिस्तान में भूकंप शुक्रवार सुबह करीब 5:14 बजे आया. यह भूकंप नेपाल तक ही सीमित नहीं था.बता दें कि नेपाल दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है, जहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है.साल 2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता वाला भूकंप आया था, जिसमें 9,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और दस लाख से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई थीं.

सतर्क रहने की दी गई सलाह

वहीं, अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को संभावित आफ्टरशॉक के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि प्रमुख भूकंपीय घटनाओं के बाद झटके आना आम बात है.नेपाल की आपदा प्रतिक्रिया टीमें स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही हैं और आकलन जारी रहने पर आगे के अपडेट की उम्मीद है.वहीं, जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंस ने भूकंप की तीव्रता 5.6 दर्ज की है, जो 10 किमी (6.21 मील) की गहराई पर रिकॉर्ड किया गया है.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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‘ट्रंप अगर तुमने टैरिफ लगाया तो…’ अमेरिका पर आग-बबूला हुआ कनाडा, जस्टिन ट्रूडो ने दे दी बड़ी

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Justin Trudeau Warn Trump On Tariff: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका कनाडा पर अनुचित टैरिफ लागू करता है तो कनाडा की ओर से तत्काल और बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी जाएगी. यह चेतावनी कनाडा-यूएस व्यापार तनाव के बीच आई है, जिसे लेकर हालात और गंभीर हो रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आने वाली अवैध दवाओं के अमेरिका में प्रवाह की बार-बार आलोचना की है. उन्होंने घोषणा की है कि 4 मार्च से दोनों देशों पर टैरिफ लगाए जाएंगे, जिसमें फेंटेनाइल संकट के चलते कठोर कदम उठाए जाएंगे. ट्रंप का कहना है कि अगर यह समस्या नहीं रोकी गई, तो प्रस्तावित टैरिफ समयानुसार लागू किए जाएंगे.

कनाडा की प्रतिक्रिया
ट्रूडो ने स्पष्ट किया है कि कनाडा अपने हितों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने कहा, “अगर मंगलवार को कनाडा पर अनुचित टैरिफ लगाए गए तो हमारे पास तत्काल और बेहद मजबूत प्रतिक्रिया होगी जैसा कि हर कनाडाई उम्मीद करते हैं.”

सीमा सुरक्षा पर ट्रूडो का जोर
ट्रूडो ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका में तस्करी होने वाली दवाओं का अधिकांश हिस्सा कनाडा से नहीं आता है. उन्होंने कहा कि कनाडा अपनी सीमा सुरक्षा को पहले ही मजबूत कर चुका है और अमेरिका के साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करके सीमा सुरक्षा बढ़ाई गई है, जिसमें ड्रोन, ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर्स, और 10,000 सीमा गार्ड शामिल हैं.

अमेरिकी टैरिफ की अस्थायी रोक
ट्रंप ने पहले दोनों देशों से आयात पर टैरिफ को 30 दिनों के लिए रोक दिया था, यह घोषणा करते हुए कि उन्होंने सीमा सुरक्षा में सुधार के लिए मेक्सिको और कनाडा से नई प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं. हालांकि, टैरिफ का यह फैसला अब 4 मार्च से पूरी तरह लागू होने जा रहा है.

फेंटेनाइल संकट और चीन पर टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन ने फेंटेनाइल तस्करी को रोकने के लिए यह टैरिफ लगाने का फैसला लिया है. ट्रंप का दावा है कि चीन में निर्मित और आपूर्ति की जाने वाली दवाओं ने अमेरिका में 100,000 से अधिक लोगों की जान ली है. इसके साथ ही, चीन पर भी 4 मार्च से 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की योजना बनाई गई है.

कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव
कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है, खासकर अवैध दवाओं और फेंटेनाइल संकट के चलते. ट्रूडो ने टैरिफ के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि कनाडा इस मुद्दे पर कड़ा कदम उठाने को तैयार है. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच यह व्यापारिक विवाद कैसे हल होगा.

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अमेरिका चीन को देने वाला दोगुना झटका! 10 फीसदी टैरिफ को डबल करने का बना रहा प्लान, जानिए वजह

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US Tariff On China: ट्रंप प्रशासन ने फेंटेनाइल प्रोडक्टसन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के निर्माण के कारण चीन पर लगाए गए 10 फीसदी टैरिफ को दोगुना करने की घोषणा की है. यह कदम फेंटेनाइल की तस्करी और उत्पादन को रोकने के लिए उठाया गया है.

चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ ने इस मुद्दे पर नवनियुक्त अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर को पत्र लिखकर कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेदों को बातचीत और वार्ता के जरिए हल किया जाना चाहिए. चीन की तरफ से यह पहल व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक कदम है, हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल टैरिफ बढ़ाने का निर्णय लिया है.

अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैरिफ का असर
सेंटर-राइट थिंक टैंक अमेरिकन एक्शन फ़ोरम के व्यापार नीति विश्लेषक जैकब जेन्सेन का कहना है कि मेक्सिको और कनाडा पर 25% टैरिफ से अमेरिकी जनता पर सालाना 120 बिलियन डॉलर से 225 बिलियन डॉलर तक का कर भार पड़ेगा. इसके अलावा, चीन पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ से उपभोक्ताओं को 25 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है.

चीन पर बढ़ते टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने पहले फेंटेनाइल उत्पादन में शामिल रसायनों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिसे अब दोगुना करने की योजना है. यह कदम अमेरिकी बाजार में अवैध दवाओं की सप्लाई को रोकने के मकसद से लिया गया है.

चीन पर टैरिफ बढ़ाने का कदम
ट्रंप प्रशासन का चीन पर टैरिफ बढ़ाने का कदम व्यापारिक तनाव को और बढ़ा सकता है. जबकि चीन ने संवाद के माध्यम से समाधान की बात कही है, बढ़ते टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं और वैश्विक व्यापार पर गहरा असर पड़ने की संभावना है.

हालांकि, कनाडा के पीएम ने अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप को धमकी दी है कि वो टैरिफ न लगाए. अगर ऐसा किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना पड़ेगा.

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‘सैलरी में करनी होगी बढ़ोत्तरी’, एलन मस्क ने बताया भ्रष्टाचार रोकने का तरीका, क्या ट्रंप मानेंगे

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Elon Musk: अरबपति एलन मस्क ट्रंप प्रशासन में सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) का नेतृत्व करते हुए नजर आ रहे हैं. इसी बीच उन्होंने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भ्रष्टाचार को कम करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के वेतन में वृद्धि होनी चाहिए. 

एलन मस्क का सरकारी दक्षता विभाग इस समय सरकारी खर्चे को कम करने के लिए बनाया है. इसके लिए उन्हें कई अधिकार भी मिले हुए हैं. 

एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर कही ये बात 

एलन मस्क का मानना है कि उच्च वेतन से अधिकारियों को अवैध गतिविधियों में शामिल होने से रोका जा सकता है, जो आखिर में जनता के लिए अधिक महंगा साबित होता है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “भ्रष्टाचार के लिए दबाव को कम करने के लिए कांग्रेस और वरिष्ठ सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करना सही फैसला हो सकता है क्योंकि भ्रष्टाचार की वजह से जनता को नुकसान होता है.”

2009 से नहीं हुई है वेतन में वृद्धि 

वर्तमान में, अमेरिकी सांसदों का वार्षिक वेतन $174,000 है, जो 2009 से नहीं बदला है. यदि इसे मुद्रास्फीति के अनुसार समायोजित किया जाए, तो यह राशि $217,900 होनी चाहिए. मस्क का तर्क है कि उच्च वेतन से सरकारी अधिकारियों को निजी क्षेत्र में जाने या भ्रष्टाचार में लिप्त होने से रोका जा सकता है.

दिलचस्प बात यह है कि दिसंबर में मस्क ने एक द्विदलीय सरकारी फंडिंग बिल का विरोध किया था, जिसमें कांग्रेस सदस्यों के लिए मामूली वेतन वृद्धि शामिल थी. अब, उन्होंने अपने रुख में बदलाव करते हुए उच्च वेतन को भ्रष्टाचार कम करने का साधन बताया है.

सिंगापुर में भी ऐसी नीति 

यह सिंगापुर जैसे देशों की नीतियों के समान है, जहां सरकारी अधिकारियों को उच्च वेतन दिया जाता है ताकि भ्रष्टाचार की संभावना कम हो.वहीं, मस्क के नेतृत्व में सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) संघीय खर्चों में कटौती और उच्च प्रदर्शन करने वाले सरकारी कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. इससे पहले, मस्क ने संघीय कर्मचारियों से उनके कार्यों का विस्तृत विवरण मांगा था, जिसमें जवाब न देने पर नौकरी से हटाने की चेतावनी भी शामिल थी. 

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अमेरिका की टैरिफ धमकियों से डरा वियतनाम, डिपोर्टेशन का समर्थन करने का किया वादा

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US Deportation and Tariff Threats to Vietnam : अमेरिका के डिपोर्टेशन और टैरिफ मामलों की जानकारी रखने वाले एक वकील ने बताया कि वियतनाम ने अमेरिका में हिरासत में लिए गए दर्जनों वियतनामी नागरिकों को वापस भेजने और ट्रेड टैरिफ और वीजा पर सैंक्शन की अमेरिका की धमकियों के बाद डिपोर्टेशन के नए रिक्वेस्ट पर जल्द कार्रवाई करने का वादा किया है.

वियतनाम का ये कदम वामपंथी संचालित देश की ओर से उसकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए व्यापक कटौती का एक हिस्सा है, जो अपने एक्सपोर्ट बिजनेस के लिए सभी अमेरिकी ट्रेड पार्टनर्स में सबसे ज्यादा संयुक्त राज्य पर निर्भर है.

इमिग्रेशन अटॉर्नी ने क्या कहा?

एक अमेरिका बेस्ड इमिग्रेशन अटॉर्नी टिन थान्ह न्गुयेन ने कहा, “वियतनाम ने 30 दिनों के अंदर अमेरिकी डिपोर्टेशन के अनुरोधों पर जवाब देने पर सहमति बनाई है.” एक वियतनामी अधिकारी के हवाले से मिली जानकारी को बताते हुए उन्होंने कहा कि हनोई ने भी डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल के पहले महीने में हिरासत में लिए गए 30 वियतनामी नागरिकों के यात्रा दस्तावेज तैयार करने पर सहमति जताई है, जिससे कि उन सभी के डिपोर्टेशन का रास्ता तैयार हो.

उन्होंने आगे कहा, “यह एक अजीब बात है क्योंकि वियतनाम ने ऐतिहासिक रूप से ऐसे दस्तावेजों को तैयार करने से इनकार किया है, जिससे कि ऐसे कई डिपोर्टेशन को प्रभावी तौर पर रोका जाए,”

व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने क्या कहा?

अमेरिकी व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्टोरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूगेस ने कहा, “हम सभी देशों से आशा करते है कि वे अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे अपने सभी नागरिकों के वापस ले लें, वरना वीजा सैक्शन और टैरिफ जैसे नतीजों को भुगतने के लिए तैयार रहें.”

हालांकि, वियतनाम के विदेश मंत्रालय ने अब इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी है. वियतनाम के मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने फरवरी महीने की शुरुआत में कहा था कि वियतनाम अमेरिका के साथ हुए समझौतों के मुताबिक अपने नागरिकों की वापसी के लिए अपना सहयोग देगा.

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