शहरी खपत में मंदी के कारण त्योहारी सीजन में खुदरा क्षेत्र में मांग नहीं बढ़ रही है

शहरी खपत में मंदी के कारण त्योहारी सीजन में खुदरा क्षेत्र में मांग नहीं बढ़ रही है


शहरी उपभोग में मंदी: शादी के सीजन में धूम-धड़ाके से मुंबई भी आती है। लेकिन लोगों के त्योहार मूड पर फसल की भारी मार पड़ रही है। इस कारण लोगों की आम जरूरत पर खर्च काफी बढ़ गया है। इस कारण शहरी लोगों के घरों में कमी आई है। ऐसी स्थिति में दैवीय आपदाएं हैं। क्योंकि, पूरे साल के दौरान काला चमकाने का सबसे सही समय यही होता है। लेकिन इस बार स्टार्टअप की आशा का ढाँचा बदल रहा है। इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की मांग में कमी दिखाई दे रही है।

डोपहिया सोसायटी के बिजनेस में दिख रही तेजी

द हिंदूलाइन बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, फेस्टिवल का सीजन होने के कारण दोपहिया समाज के बिजनेस में तेजी दिख रही है। इसके अलावा बाकी पोर्टफोलियो के व्यवसाय में मामूली प्रगति है। इसके पीछे का दबाव काफी काम कर रहा है।

शहरी मांग में कमी की दिसंबर तिमाही में बड़ी मार

शहर में रहने वाले लोगों की आबादी में कमी से कम हुई वस्तुओं ने दिसंबर तिमाही के कारोबार पर बड़ा असर डाला है। हालाँकि फ़ुंडसी सेक्टर के ग्रामीण डिज़ाइन में छोटी सी ज़मीनी रियल एस्टेट के लिए राहत की बात है। पार्ले प्रोडेक्ट के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह का कहना है कि दिसंबर की तिमाही में बिजनेस और अर्बन स्लोडाउन के कारण काफी फिल्में रही हैं। पिछले साल की तुलना में सात अक्टूबर से एक दिसंबर के दौरान स्ट्रेटेमा सेक्टर ने सात फीसदी की मामूली बिकवाली देखी।

इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, यह इंडस्ट्री की आशा को पूरा नहीं करता है। एसोसिएशन के सीईओ कुमार राजगोपालन का कहना है कि निम्न मध्यवर्गीय लोगों का काफी कम खर्च अब भी हमारी चिंता का कारण बन गया है। एक अन्य तर्क के अनुसार कंजूमर सेंटीमेंट पिछली तिमाही की तुलना में बेहतर बना है। लेकिन अभी भी यह प्री-कोविड या वित्तीय वर्ष 2023 के स्तर से ऊपर नहीं है।

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