भारतीय बाजार में इस साल भी चाइना कीटेक सोसायटी के बने रहने का अनुमान है। वैल्यूएशन का कहना है कि इस साल चीनी मार्केटर्स ने अपने पोर्टफोलियो शेयर को मिड-रेंज और प्रीमियम प्रीमियम पर फोकस के साथ बढ़ाया है, जिससे उनका शेयर बाजार बना रहेगा और स्टॉक शेयर मजबूत रहेगा। 2020 से कॉन्स्टेंट चीनी किसान भारतीय बाजार में सबसे आगे बनी हुई हैं। इस साल उनकी शिपमेंट पिछले साल के ग्रुप एक प्रतिशत अनुपात 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
अंतिम चरण में कंपनी का जोर
भारत और चीन के संबंधों में सुधार के बीच चीनी निर्माता भारत में अपने निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं और प्लास्टिसिटी स्ट्रक्चरर्स के साथ अपने-अपने स्तर बेहतर कर रहे हैं। नोएडा, पोको और रियलमी बिल्डर्स अपने पहले से मौजूद स्टोर को एडिशन करने के साथ-साथ यूनिवर्सल में प्लांट इंस्टिट्यूट बढ़ा रहे हैं। वीवो ने डिक्सन टेक्नोलॉजी के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया है ताकि भारत में ही निर्मित किया जा सके।
पिछले साल भारत में लगभग 25 सक्रिय ब्रांड थे
मनीकंट्रोल के, स्टैंडर्ड्स ने बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी में एकीकरण पूरा हो चुका है और इस साल किसी भी नई कंपनी के आने या स्थिर रहने की उम्मीद नहीं है। पिछले साल भारत में लगभग 25 एक्टिविस्ट ब्रांड थे, जो 2018 में एक्टिव 100 सोसायटी के संगठनों में बड़ी गिरावट आई है। अगर चीनी कंपनियों की बात करें तो जुलाई-सितंबर तिमाही में टॉप-5 कंपनियों में वीवो, शाओमी, कोरिया और रियलमी समेत 4 चीनी कंपनियां शामिल हैं। बाज़ार में शेयर बाजार 60 प्रतिशत था।
बाज़ार में वृद्धि की दर बनी रहेगी
इस साल भारतीय प्रौद्योगिकी बाजार में वृद्धि की दर बनी रहेगी और शिपमेंट 16 करोड़ से पार होने की उम्मीद है। हालाँकि, मामूली वृद्धि के बाद भी स्केल वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है। इसकी वजह से कंपनी की तरफ से प्रीमियम क्वालिटी का जबरदस्त चलन है। 2025 में भारतीय बाजार में 50 डॉलर डॉलर की कीमत को पार किया जा सकता है।
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