पॉपकॉर्न पर जीएसटी, सोशल मीडिया पर आने लगे मजेदार मीम्स, पूछा सांस लेने पर टैक्स कब लेते हो?
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रुझान वाली ख़बरें: शनिवार को हुई अनाथालय काउंसिल की बैठक में सरकार की ओर से कई साक्षियों का अभिनंदन किया गया। सरकार ने पुरानी कहानियों से लेकर पॉपकॉर्न तक पर पॉपकॉर्न की स्थापना की घोषणा की, जिसके बाद पॉपकॉर्न के शेयरधारक के आंकड़े पर तो मन खंजर चल गए। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा घटिया कचरा पॉपकॉर्न पर लेकर आए, जहां उपभोक्ता ने सरकार के इस जजमेंट के लिए जमकर मजे किए और क्रिस्टियनिज्म की पढ़ाई पार कर डाली। कुछ उपभोक्ताओं ने इस पर सरकार का बचाव भी किया तो कुछ ने इसे लूट कहा।
लोगों ने कहा कि सरकारी सरकारी इक्विटी से भी बहुत कुछ हो सकता है, लेकिन सरकारी लूट मचाकर चाहती है। सबसे ज्यादा हिट थिएटर में लोकप्रिय फिल्म देखने वाले लोग उपले, जो हर हफ्ते एक फुल पॉपकॉर्न का पैक लेकर पैर पसार थिएटर में फिल्म के मजे लेते हैं।
अचानक #पॉपकॉर्न चाहिए इतना ध्यान मिला #ACTII बिना विज्ञापन के इतना लोकप्रिय है 😀😃#एग्रोटेकइंडिया pic.twitter.com/4aN1PYgtb5
-ब्रजेश झावर (@Brajeshjhwar1) 21 दिसंबर 2024
सरकार ने पॉपकॉर्न पर लगाया टैक्स तो आय मीम की बाढ़
बता दें कि सरकार ने शनिवार को मटियामेट काउंसिल की मीटिंग में निर्णय लेते हुए पॉपकॉर्न को अपने ब्लॉग पर सेमिनार में शामिल किया था, जिसके बाद नेटिजंस ने इंटरनेट पर कॉल काट दिया था। खबर जैसे ही फोटो लोगों ने इस पर मीम बनाना शुरू कर दिया, किसी ने कहा कि पॉपकॉर्न लीक से पहले युवाओं की पढ़ाई शुरू हुई तो किसी ने कहा कि अब सांस लेने में देर हो गई है। एक और किसान ने लिखा कि कैरेमल आइडियाज पॉपकॉर्न पर 18 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है मानों इसे सुनार की दुकान पर बेचा जाना बाकी है।
जब आप पॉपकॉर्न पर 18% जीएसटी चुकाते हैं #पॉपकॉर्नटैक्स pic.twitter.com/Ryrgz6fZRB
— ನಗಲಾರದೆ… ಅಳಲಾರದೆ… (@UppinKai) 22 दिसंबर 2024
बता दें कि सरकार ने टमाटर की अलग-अलग श्रेणी की किस्में बनाई हैं, जिनमें रेडी टू ईट पॉपकॉर्न पर 5 प्रतिशत के अनुपात, लेबल वाले और डब्बा पैक पॉपकॉर्न को 12 प्रतिशत पर रखा गया है, तो वहीं कैरेमल के पॉपकॉर्न को 18 प्रतिशत पर रखा गया है। उपभोक्ता ने सरकार से सवाल किया कि सांस लेने पर पिज्जा कब लग रहा हो।
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पॉपकॉर्न को राजा घोषित कर दिया जाए, उपभोक्ता बोले
सोशल मीडिया पर पॉपकॉर्न को लेकर मीम की बाढ़ आ गई, लोगों ने पॉपकॉर्न की असलियत बताई तो कुछ ने कहा कि पॉपकॉर्न पार्टियों को इसी तरह बढ़ावा दिया गया है। एक और गीतकार ने लिखा कि पॉपकॉर्न अब सभी जगहों का सरदार बन गया है, इसे खाद्य उद्योग का राजा घोषित कर दिया जाए।
500-800 रुपये का पॉपकॉर्न खरीदना किसी के लिए कोई समस्या नहीं है!
हालाँकि, जीएसटी के रूप में अतिरिक्त 60 रुपये का भुगतान तब होता है जब हर कोई सुपर मिडिल क्लास बन जाता है।#पॉपकॉर्नटैक्स #पॉपकॉर्न चाहिए #जीएसटीकाउंसिलमीटिंग #जीएसटी अपडेट pic.twitter.com/5wvTCBeJPI
– एन राम अय्यर (@HeyKrishna2024) 22 दिसंबर 2024
हालाँकि, पॉपकॉर्न के अलग-अलग फ्लेवर को पेश किया गया है, लेकिन सार्वजनिक तो सार्वजनिक है, और टांग खींचना उनका अधिकार है। इंटरनेट पर कैरेमल विधि और सॉल्टेड पॉपकॉर्न पर टैक्स की तुलना की जा रही है और लोग इस पर सरकार के मजे ले रहे हैं।
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