बच्चों को डायबिटीज से बचाने के लिए टिप्स, 1000 दिनों तक बच्चों को चीनी और मिठाई न दें

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बच्चों में मधुमेह : शराब एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसका इलाज नहीं है। इसे केवल दस्तावेज़ीकृत किया जा सकता है। आज बेटियाँ में इसके रोगी बढ़ रहे हैं। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में करीब 212 मिलियन लोग प्रदर्शनकारियों की संख्या है, जो वैश्विक स्तर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 26% है। इसका खतरा सिर्फ युवाओं में ही नहीं बल्कि बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। यूके में हुई एक स्टडी में बताया गया है कि अगर प्रेगनेंसी और बच्चों को चीनी या मीठा कम दिया जाए तो उन्हें टाइप 2 नशे और हाई ब्लड डिसऑर्डर का खतरा कम होता है। आइए जानते हैं क्या है ये अध्ययनकर्ता…

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बच्चों को मीठा से बचाएं

60,000 लोगों के ट्रैक को दशकों तक ट्रैक करने के बाद अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था में चीनी कम करने से करीब एक-तिहाई तक जोखिम कम हो गया था। खासकर 6 महीने बाद जब बच्चों को ठोस चीजें खाना शुरू हुआ, तो इन दिनों चीनी कम करने से और काफी फायदा हुआ। तर्कशास्त्रियों का कहना है कि चीनी शुरुआत से ही कई चुनौतियों का जोखिम कम हो जाता है। माता-पिता बच्चों को जहाज़ की खासियतें डलवा सकते हैं। इस आदत से वर्कआउट और हार्ट डिजीज जैसी पुरानी चुनौती का खतरा कम होता है। पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाने से और स्टोकेर्ड फ़ार्म्स से सेव की गई फल-सब्जियां जैसे कि फ़ार्म-सब्जियां देने की सलाह दी जाती है।

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बच्चों को कब तक न खिलाएं मीठा

संतों का मानना ​​है कि जीवन में 1 हजार दिन से लेकर बच्चे के दूसरे जन्म तक चीनी काम करने से टाइप 2 तक का खतरा काफी कम हो सकता है। यह समय मेटाबोलिक ऑफ़लाइन अत्यंत आवश्यक है। इस समय शरीर में ग्लूकोज को प्रोसेज़ करने की क्षमता प्रभावशाली है। इस समय सबसे ज्यादा चीनी खाने वाले स्कॉलरशिप रेजिस्टेंस होने कादर रहते हैं, जो कि सिगरेट का प्रमुख कारण है।

बच्चों को क्या-क्या नहीं खिलाएं

बच्चों को पहले एक हजार दिन तक प्लास्टर वाले टुकड़े, प्रॉसेस्ड खाद्य पदार्थ, साबुत सामग्री और बड़े पैमाने पर नमक वाले टुकड़े नहीं दिए जाने चाहिए। उन्हें फल, साबुत अनाज जैसे अनाज देने पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों को भी पर्याप्त प्रोटीन और पैकेट्स अवश्य देने चाहिए। बेटियाँ, पहले 6 महीने तक बच्चों को सिर्फ माँ का दूध पिलाना चाहिए।

अस्वीकरण: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया पर आधारित है। आप भी अमल में आने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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नीचे स्वास्थ्य उपकरण देखें-
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112 प्राचीन रेस्तरां ने रेस्तरां से बाहर का तेल नहीं निकाला, उसी में ताला जा रहा था बर्गर, स्वाद का राज बताया

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<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;"ट्रेंडिंग वीडियो: आपको ज्यादातर लोग बर्गर और पेटीज खाना पसंद करेंगे। कई लोग इसे रोज खाते हैं तो कई लोग इसे वीकेंड के मौके पर खाना पसंद करते हैं, लेकिन लोग इसके इस्तेमाल में शामिल होने वाले तेल के बारे में चर्चा ही नहीं करते। जी हाँ, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बर्गर को ख़त्म करने वाले तेल के बारे में बताया गया है, एक रेस्तरां इस दुनिया में ऐसा भी है जो एक ही मसाले के तेल को पिछले 112 पारंपरिक से इस्तेमाल करता आ रहा है, और लोगों को पता होने के बावजूद वहां बर्गर खाने वालों की भीड़ लगी रहती है।

112 साल पुराने तेल में तब्दील हो गया है बर्गर

एलमर "डॉक" डायर ने 1912 में मेम्फिस में अपना अब तक का प्रसिद्ध बर्गर जॉइंट खोला, जिसमें पैटीज़ को अनोखी बनाने के लिए चिप्स के अपने गुप्त बेटर पर दांव लगाए गए। यह बह रहा है, लोगों को डायर्स के बर्गर बहुत पसंद आए, लेकिन एक रात को जब रसोइयों में से एक पैन में तेल निकला तो बदकिस्मती भूल गई। डायर्स बर्गर्स के वर्तमान मालिक केंडल रॉबर्टसन का दावा है कि अगले दिन एक बर्गर के पास एक विशेष व्यक्ति आया और उसने कहा, ‘यह मेरी जिंदगी का अब तक का सबसे बेहतरीन बर्गर है।’ तब से तेल की उस ब्रेड को कभी नहीं बदला गया है, इसलिए सभी बर्गर अभी भी उसी तेल में पके हुए हैं जिन्होंने 112 साल पहले भी इस रेस्तरां को मशहूर बनाया था।

एक बार में नहीं भरता लोगों का पेट

रॉबर्टसन ने हाल ही में साउदर्न लिविंग्स वर्जिनिया को बताया, "ये 1912 के समान ही अत्याचार हैं, इसे कभी बदला नहीं गया है।" "हम इसमें से सभी कण निकालने के लिए इसे अच्छा करते हैं और फिर इसे सीज़न करते हैं।" डायर के बर्गर मांस के गोल के रूप में शुरू होते हैं जिनमें लकड़ी के हथौड़े से बने टुकड़े डाले जाते हैं और फिर उन्हें रेस्तरां के प्रसिद्ध 112 साल पुराने तेल से लगभग बड़े कच्चे लोहे की कड़ियाँ में डाला जाता है। तलने पर फिली पैटी स्कीने जाती है, इसलिए ज्यादातर लोग आमतौर पर डबल पर, कभी-कभी ट्रिपल मांगते हैं, "क्योंकि एक बार में उनका पेट नहीं भरता।

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यूज़र्स ने कहा, बंद हो जाएगा ये मौत का खेल

आपको लगता है कि ज्यादातर लोग पुराने जमाने के तेल में पके हुए बर्गर से दूर चले गए हैं, लेकिन केंडल रॉबर्टसन का कहना है कि उन्हें इस गुप्त सामग्री के बारे में पता है और न केवल वे इससे खुश हैं बल्कि कुछ लोग तो डबल-डिप भी करते हैं हैं. वे अपने पूरे बर्गर – बन्स और बाकी सभी को कुछ – पैक करने से पहले उन्हें इस पुराने तेल में डुबोने के लिए कर्मचारियों को कहते हैं। लेकिन इस सोशल मीडिया पर उपभोक्ता का कहना है कि ये सब फिजूल है और लोगों की जान से देखने को मिलती है, इस रेस्टोरेंट को तुरंत बंद करके कानूनी कमाई करनी चाहिए।

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कांगो में बसिरा नदी में यात्रियों से भरी एक नौका डूबी, कांगो में सबसे घातक दुर्घटना में 38 लोगों की मौत

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बुसिरा नदी में एक नौका डूबी: कांगो में एक डायनामाइट घटना सामने आई है। नदी में एक ओवरलोडेड फेरी के पलटने से 38 लोग मारे गए और 100 से अधिक लोग लापता हो गए। इस घटना के बारे में जानकारी में स्थानीय अधिकारियों और गवाहों ने बताया कि यह डायनासोर की घटना शुक्रवार (20 दिसंबर) की रात को बुसीरा नदी में हुई थी, जब लोग क्रिसमस के लिए अपने घर लौट रहे थे। हालांकि इस हादसे में अब तक 20 लोगों के बचने की पुष्टि हुई है.

कांगो के उत्तर- पूर्वी क्षेत्र में लड़कों के कामो का हिस्सा यह फेरी थी

वास्तविक, दुर्घटनास्थल से पहले का अंतिम शहर इंगेंडे के मेयर जोसेफ जोसेफ कांगोलिंगोली ने बताया, “यह ओवरलोडेड फेरी नाव कांगो के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अन्य साथियों के एक दावे का हिस्सा था। इस फेरी में यात्री यात्री मुख्य रूप से व्यापार करते थे, जो क्रिसमस के लिए अपने घर लौट रहे थे।” उल्लेखनीय है कि यह दुखद हादसा देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में चार दिन बाद एक और नाव के पलटन से हुआ, जिसमें 25 लोग मारे गए थे।

इंगेंडे के निवासी नडोलो कड्डी ने इस दुर्घटना के बारे में और जानकारी दी। उन्होंने बताया, ”इस फेरी में 400 से ज्यादा लोग सवार थे. क्योंकि यह दो बंदरगाह, इंगेंडे और लोलो, से बोर्डे जा रही थी, इसलिए यह दोस्ती का कारण है कि और भी पहचान हुई है।”

कांगोली अधिकारियों ने ओवरलोडिंग के खिलाफ दी चेतावनी

कांगोली अधिकारियों ने लगातार नदी में नावों पर सवारियों की ओवरलोडिंग के खिलाफ चेतावनी दी है और जल परिवहन सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करने वालों को सजा देने का वादा किया है। हालाँकि, जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक पर्यटक आते हैं, वहाँ के लोग कुछ सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन का खर्चा नहीं उठा सकते हैं। इसलिए वह नावों के माध्यम से यात्रा करते हैं।

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किस कंपनी ने एनप्लाइज को डायनामिक टाटा की बाइक, रॉयल एनफील्ड बाइक और एक्टिवा पार्टनर्स, एलेक्जेंड्रा की क्लासेज से जोड़ा है

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<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;"उपहार में कार: दिवाली के मौके पर भारत की कुछ कंपनियों के ऐसे बम्पर ईनाम मिलते हैं जो जानने लायक होते हैं। मर्सिडीज-बेंज से लेकर, स्लैब, कैश डैशबोर्ड शामिल होते हैं और इसके माध्यम से वोल्ट और स्टाफ़ के सदस्य भी इसमें शामिल होते हैं। आज भी ऐसा ही कुछ हुआ है और देश की एक कंपनी ने अपने एंप्लाइज को कार से लेकर रॉयल एनफील्ड जैसे महान गुरु बताए हैं। जानिए कौन सी कंपनी है और नीचे दिए गए हैं ऐसे बेशकीमती भगवान… 

चेन्नई की कंपनी ने दिए विशेष आभूषण, बाइक और बाइक जैसे कई भगवान

चेन्नई की सरमाउंट लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कर्मचारियों को कंपनी के प्रति उनकी कड़ी मेहनत और दावत को देखते हुए उन्हें कार और मोटरसाइकिल भगवान दिए हैं। कंपनी के एक टॉप अवलोकन ने रविवार को यह जानकारी दी है। कंपनी के 20 एंप्लाइज को हैयर गोल हासिल करने के लिए मोटिवेट करने के लिए उन्हें टाटा की बाइक, एक्टिवा स्कूटर और रॉयल एनफील्ड बाइक का उपहार दिया गया है। 

कंपनी के शानदार उपहारों के बारे में क्या सोचते हैं?

उपहार के बारे में उन्होंने कहा कि एक मजबूत एनप्लाइज डेजर्ट प्रोग्राम को लागू करने से न केवल ओवरऑल एम्प्लाई सेटिसफेक्शन में सुधार होता है, बल्कि प्रोडक्टिविटी और विलासिता में भी बढ़ोतरी होती है। ऐसा करने से मोटिवेशन वाले कर्मचारियों से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद ज्यादा है।

क्या करती है कंपनी और मार्केटर्स का कहना

चेन्नई हेडक्वॉर्टर वाली ये कंपनी यानी सरमाउंट लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड माल शेयरिंग में देरी, ट्रांसपेरेंसी की कमी और एंस्किल्ड क्रिस्टोफर चेन सॉल्यूशंस जैसी लॉजिस्टिक्स सेक्टर की आम शुरुआत को सॉल्यूशंस की पेशकश करती है। कंपनी के संस्थापक और फैक्ट्रिंग एसोसिएट्स (मास्टर) डेन्जिल रयान ने बयान में कहा कि "हमारा मिशन सभी आकार के बिजनेस के लिए लॉजिस्टिक्स को आसान बनाना है। हम ट्रेडिशनल माल भंडार और लॉजिस्टिक्स स्टॉक के आधार हैं। हमारा टारगेटगेट ऐसे सॉल्यूशंस प्रोवाइड देना है जो न केवल स्टिल्ड हों, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी दावा करने वाले हों।

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हाई स्पीड कनेक्टिविटी के लिए बीएसएनएल ने बिहार में 2000 मोबाइल टावर स्थापित किए, अधिक जानकारी देखें

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कंपनी ने बिहार में 2000 4जी टावर्स को ऑन एयर किया है। इसका मतलब यह है कि यहां के उपभोक्ताओं को हाई स्पीड इंटरेस्ट मिलने वाली है।

कंपनी ने बिहार में 2000 4जी टावर्स को ऑन एयर किया है। इसका मतलब यह है कि यहां के उपभोक्ताओं को हाई स्पीड इंटरेस्ट मिलने वाली है।

सिद्धांतकारों के अनुसार, बिहार में करीब 200 ऐसे गांव थे जो मोबाइल नेटवर्क से दूर थे। अब बीएसएनएल ने ऐसे में भी अपनी 4जी सेवा पहुंचाई है।

सिद्धांतकारों के अनुसार, बिहार में करीब 200 ऐसे गांव थे जो मोबाइल नेटवर्क से दूर थे। अब बीएसएनएल ने ऐसे में भी अपनी 4जी सेवा पहुंचाई है।

बिहार के ये गाँव रोहतास, कैमूर, गया, पशुपालन, संगठित समूह और जमुई जिले में स्थित हैं। इन उद्यमों में कुल 74 मोबाइल टावर्स के जरिए 4जी सर्विस दी जा रही है।

बिहार के ये गाँव रोहतास, कैमूर, गया, पशुपालन, संगठित समूह और जमुई जिले में स्थित हैं। इन उद्यमों में कुल 74 मोबाइल टावर्स के जरिए 4जी सर्विस दी जा रही है।

बिहार में बड़े पैमाने पर गिरावट मोबाइल उपभोक्ताओं को हमेशा नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती थी। लेकिन अब सरकारी टेलीकॉम कंपनी को इस समस्या से राहत मिली है।

बिहार में बड़े पैमाने पर गिरावट मोबाइल उपभोक्ताओं को हमेशा नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती थी। लेकिन अब सरकारी टेलीकॉम कंपनी को इस समस्या से राहत मिली है।

कंपनी ने हाल ही में 10,000 4जी साइट्स की स्थापना की है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी के लाखों निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।

कंपनी ने हाल ही में 10,000 4जी साइट्स की स्थापना की है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी के लाखों निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।

बता दें कि इसी साल जुलाई महीने में जियो, एयरटेल और वीआई ने अपने रिचार्ज प्लान्स के दाम में अनाप-शनाप देखने को मिला था। इसके बाद लोग बीएसएनएल में अपना नंबर पोर्ट शेयर करते हैं। अब अपने मस्कुलर बेस को बढ़ाने के लिए कंपनी ने पोर्टफोलियो में 4जी नेटवर्क को स्थिर करने की पहल की है।

बता दें कि इसी साल जुलाई महीने में जियो, एयरटेल और वीआई ने अपने रिचार्ज प्लान्स के दाम में अनाप-शनाप देखने को मिला था। इसके बाद लोग बीएसएनएल में अपना नंबर पोर्ट शेयर करते हैं। अब अपने मस्कुलर बेस को बढ़ाने के लिए कंपनी ने पोर्टफोलियो में 4जी नेटवर्क को स्थिर करने की पहल की है।

प्रकाशित: 22 दिसंबर 2024 12:56 अपराह्न (IST)

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अतुल सुभाष केस में जानिए उन्होंने किस कंपनी में काम किया, वहां नौकरी पाने के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए

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अतुल सुभाष कंपनी: बेंगलुरु के मस्जिद इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद पूरे देश में उनकी चर्चा हो रही है। अपनी पत्नी और अपने मुस्लिम साथियों की प्रतिज्ञा से तंग गियान अतुल सुभाष ने निधन की थी। उनकी मौत के बाद कॉलेज पुलिस ने उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया को उनकी सास और साले को हिरासत में ले लिया है। अब वर्चस्व पुलिस इस मामले की जांच में हुई है। अब अतुल सुभाष की जिंदगी के बारे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं। अतुल किस कंपनी में काम करते थे. वहां कैसे जाॅब ली जा सकती है और उसके लिए क्या क्वाल असाइन करना जरूरी है। इस बारे में आपको अपॉइंटमेंट लेना होगा।

महिंद्रा और महिंद्रा कंपनी में काम करने वाले थे अतुल

बैंगलोर के इंजीनियर अतुल महिंद्रा महिंद्रा एंड कंपनी में आर्टिफिशियल एसोसिएशन (एआई) में सहायक डीजीएम उपकरण थे। अतुल महल और महल में विशेषज्ञ थे। डीजीएम यानी डिप्टी जनरल मैनेजर एक उच्च पद होता है। जो प्रौद्योगिकी और प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियों को बनाए रखता है। अतुल आर्टिफ़िशियल सोसाइटी क्षेत्र में काम कर रहे थे। वह महिंद्रा ऐंड महिंद्रा कंपनी के महल आधारित सभी प्रोजेक्ट और उत्पादों को विकसित करने और उन पर काम करने के लिए काम कर रहे थे।

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जाॅब के लिए कितनी योग्यता आवश्यक है?

अतुल सुभाष सुपरमार्केट में बिजनेसमैन डीजीएम काम करते थे। अगर किसी को यह पद ऑनलाइन है। तो कंप्यूटर विज्ञान, डेटा विज्ञान, कलात्मक वैज्ञानिक और मशीन सीखना या इससे संबंधित किसी भी क्षेत्र से स्नातक और डिग्री हासिल करना होगा। हालाँकि कई मामलों में ड्रायवल डिग्री धारकों को भी प्राथमिकताएँ मिलती हैं। इसके अलावा टेक्निकल एबिलिटीज में इंटरनेशनल लैंग्वेज आना भी जरूरी है। डीजीएम के पद के लिए आर्टिफिशियल क्लिनिक और मशीन प्रोजेक्ट्स में 10 से 15 साल तक का अनुभव होना जरूरी है।

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यह कोर्स कर सकते हैं

आप इन कोर्स में से किसी भी कोर्स को चुन सकते हैं। इनमें आर्टिफिशियल क्लिनिक और डेटा साइंस में बी.टेक जो कि दरभंगा, जोधपुर से जा सकता है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंस्टीट्यूट में एम.टेक जो कि बॉम्बे, रिजर्व दिल्ली, रिजर्व मद्रास से कर सकते हैं।

इसके अलावा ऑनलाइन एआई कोर्स के अलावा एनपीटीईएल (राष्ट्रीय विशिष्ट संवर्धित शिक्षा कार्यक्रम) कोर्स और आर्टिफिशियल क्लिनिक (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) कोर्स के लिए आईआईटी और आईआईएससी की ओर से ऑनलाइन कुछ कोर्स मौजूद हैं। ध्यान रखें कि किसी भी कोर्स में यात्री लेने से पहले आप उसके बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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शिक्षा ऋण की जानकारी:
शिक्षा ऋण ईएमआई की गणना करें

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विदेशी पर्यटकों को ठग रहा था रिक्शा वाला! लोगों ने सिखाया सबक, देखें वायरल वीडियो

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<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;"ट्रेंडिंग वीडियो: वीडियो में दिल्ली के बाजार इलाके में एक टूरिस्ट ड्राइवर के साथ मारपीट की घटना सामने आ रही है। फायर टैब तब शुरू हुआ जब स्पेशलिस्ट को लगा कि टूरिस्ट ने जो पैसे दिए हैं वो कम हैं और उसने ज्यादा पैसे की मांग की है। इस पूरी घटना को टूर ने अपने कैमकॉर्डर पर रिकॉर्ड किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और देखते ही देखते इसे दस लाख से ज्यादा बार देखा गया। यह उस वक्त की बात है जब टूरिस्ट क्रू के पास से 500 रुपये की नकदी मिलती है और 500 रुपये की नकदी मिलती है।” जिस पर उस शख्स ने कहा, “ठीक है.”

विदेशी पर्यटन को ठगने लगा ऑटो वाला

वीडियो पर सेमसेमविक ने पिरामिड के साथ पोस्ट किया था, “भारत में पहले दिन ही धोखा हुआ – लेकिन स्थानीय लोगों ने मुझे बचाया!” टूर से पैसे लेने के तुरंत बाद, उस स्पेशलिस्ट ने और मैग्जीन से कहा कि उसे 500 रुपये के दो नोट चाहिए। उन्होंने कहा कि "मैंने राक्षस तीर्थ पर कुचया है," इसलिए उसे 500 रुपए के दो नोट चाहिए। वीडियो में, क्रूज़ ड्राइवर 1500 रुपये मांगता है, टूर 500 रुपये क्रूज़ क्रू को नोट देता है। हालाँकि, घटना के वीडियो रिकॉर्डिंग में, चालक ने मना कर दिया और कहा कि उसे 500 रुपये के दो नोट और चाहिए।

 
 
 

 
 
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लोकल लोगों ने एशियाई उद्योग

पर्यटक समसामेविक ने कहा कि 500 ​​रुपये ठीक हैं. लोगों ने अपने चारों ओर एक समूह बनाया और सामेसामेविक के समर्थन में लोग दल हो गये। उन्होंने पूछा कि पिछली बार उसे कब लाया गया था, तो कैरिकेचर ने कहा कि मैं दो बजे एक बजे से इसे घुमा रहा हूं, जिस पर विदेशी टूर ने साक्षात् कर दिया और स्थानीय लोगों ने कहा कि यह झूठ बोल रहा है। इसके बाद क्रू और क्रू को समझ में आया कि अब वे वहां से जाने वाले नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें पैसे वापस देने को कहा, और बताया कि इसके लिए 200 रुपये काफी हैं, लेकिन टूरिस्ट ने 500 का नोट खींच लिया। ड्राइवर को खुशी-खुशी ले जाने दिया।

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यूजर्स ने कहा, जेल में डालो

वीडियो को शेयर करने के बाद अब तक 10 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है। ऐसे में सोशल मीडिया उपभोक्ता वीडियो को लेकर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक लेखक ने लिखा….भारत की छवि ख़राब करने में पूरा योगदान दिया गया चित्र वाला। एक और गीतकार ने लिखा….भारत की छवि को उजागर करने में योगदान देते हुए स्थानीय लोग. तो वहीं एक और राक्षस ने लिखा….इस पेंटिंग वाले को जेल में डाल दो.

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महिला U19 T20 एशिया कप 2024 फाइनल में भारत ने ट्रॉफी जीती जी त्रिशा प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट आयुषी शुक्ला IND vs BAN

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IND U19 बनाम BAN U19 फाइनल: भारत ने वीमेंस अंडर 19 एशिया कप 2024 के फाइनल में बांग्लादेश को हरा दिया। टीम इंडिया ने यह मैच 41 बल्लेबाजों से जीता। उन्होंने इस खिताब के साथ खिताब पर कब्ज़ा कर लिया। भारत की बेटी ने जीत के बाद फहराया. अगर प्लेयर द टूर्नामेंट की बात हो तो यह शीर्षक जी तृषा को मिले। उनके साथ-साथ आयुषी शुक्ला ने भी कमाल का प्रदर्शन किया। आयुषी ने फाइनल मैच में 3 विकेट झटके।

जी तृषा ने भारत के लिए बैटिंग में अद्भुत प्रदर्शन किया। उन्होंने फाइनल मैच में सामी जड़ाता खेला। तृषा ने टूर्नामेंट की पांच पारियों में 159 रन बनाए। वे टॉप पर सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में हैं। इसी वजह से तृषा को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब मिला। भारत के लिए जी कमलिनी ने भी कमाल का प्रदर्शन किया। उन्होंने पांच पारियों में 85 रन बनाए. वे सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में तीसरे नंबर पर हैं।

आयुषी शुक्ला ने लिए सबसे ज्यादा विकेट –

वीमेन्स अंडर 19 एशिया कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट आयुषी शुक्ला ने लिए। उन्होंने पांच पारियों में कुल 10 विकेट झटके. भारत की परुणिका सोशिद ने भी अच्छी पोस्ट की। उन्होंने 5 पारियों में 9 विकेट लिए. आयुषी की बात करें तो उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 3 विकेट से फाइनल में जगह बनाई।

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मौसम अपडेट: 50 साल का रिकॉर्ड, जानिए दिल्ली-एनसीआर और यूपी समेत पूरे उत्तर भारत में कब से 50 साल की ठंड

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चीन द्वारा भारत के खिलाफ j35 स्टील्थ फाइटर जेट डील आगे बढ़ाने के बाद पाकिस्तानी वायुसेना एशिया की महाशक्ति बन जाएगी

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चीन j35 स्टील्थ फाइटर जेट: हाल ही में पाकिस्तान ने पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर J-35 जेट विमानों के लिए चीन के साथ डील की थी। अब यह फाइटर जेट अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश के लिए पूरी तरह से तैयार है। फोर्ब्स मीडिया की माने तो दो साल में उन्हें ये फाइटर जेट्स मिल जाएंगे। यह पहला मौका होगा, जब चीन की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट किसी दूसरे देश में उतरेंगे। पाकिस्तान से मिलने वाले इस विमान में भारत की योग्यता को बढ़ाया जा सकता है।

पाकिस्तान ने 40 अमेरिकी डॉलर की खरीद मंजूरी को दी

फ़्लोरिडा में इस विमान के शामिल होने से उनके एयरफोर्स काफी आगे बढ़ेंगे। फ़ोर्ड मीडिया के अनुसार पाकिस्तान एयरफ़ोर्स ने 40 दस्तावेज़ों की खरीद को मंजूरी दे दी है। अभी पाकिस्तान के पास अमेरिका के F-16 और फ्रांस के मिराज फाइटर प्लेन हैं। फॉक्स न्यूज चैनल ने जुलाई 2024 में बताया था कि पाकिस्तान एयरफोर्स के पायलट जे-31 स्टील्थ फाइटर जेट के लिए ट्रेनिंग ले रही है। इससे पहले पाकिस्तान चीन से J-10CE मल्टी रोल फाइटर जेट खरीद का भुगतान किया गया है।

पाकिस्तान का एयरफोर्स मजबूत होगा

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी वायु सेना के चाइना एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट के निदेशक ब्रेंडन मुलवेनी ने कहा कि पाकिस्तान का यह कदम भारतीय वायुसेना को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा, “वे (प्रवीनी एयरफोर्स) यह जेट कितनी अच्छी तरह उड़ सकता है और इससे लड़ सकता है, यह एक अलग मामला है।” हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यह जेट बहुत ही शानदार है, लेकिन अगर इसमें हथियार, सेंसर सूट और C4ISR नहीं है, तो इसका कोई महत्व नहीं है।

मेडिल ईस्ट को भी सोवियत जाने का अनुमान

सैन्य विशेषज्ञ और पूर्व पीआईएल प्रशिक्षक सोंग झोंगपिंग ने कहा, “चीनी छठी पीढ़ी के फाइटर प्लेन को बनाने में काफी समय लगता है, ऐसे में वह अपने मित्र देशों को आसानी से पांचवी पीढ़ी का जेट उपलब्ध करा सकते हैं। इसे चीन की घरेलू प्रशिक्षकों को पूरा करना है।” साथ-साथ विदेशी सैन्य बिक्री के लिए भी तैयार किया गया है।” वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के फेलो ब्रायन हार्ट ने चीन के इस जेट की सराहना करते हुए कहा कि इसे मीडिल ईस्ट के देश से भी जोड़ा जा सकता है।

इंडियन एयरफोर्स की ताकतें

भारत-फ्रांस से उन्नत राफेल और लड़ाकू विमानों के साथ-साथ रूस से मिग-29 एएसयू-30एमकेई लॉन्च के साथ अपनी वायु शक्ति को मजबूत कर रहा है। भारतीय शस्त्रागार अमेरिका और रूस से पीछे हो सकते हैं, लेकिन एशिया में वह चीन और जापान से आगे हैं। भारत ने एडवांस्ड डोमेन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट नाम से अपनी पांचवीं पीढ़ी का विमान विकसित करने की योजना बनाई है, जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2035 तक शुरू होने की उम्मीद है।

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