अग्रिम कर के रूप में बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम नकदी है, कमजोर रुपया और उच्च व्यापार घाटा भारतीय बैंकिंग प्रणाली में तरलता संकट पैदा करता है

अग्रिम कर के रूप में बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम नकदी है, कमजोर रुपया और उच्च व्यापार घाटा भारतीय बैंकिंग प्रणाली में तरलता संकट पैदा करता है


बैंकों की तरलता संकट: घरेलू बैंकों की कमी का संकट गहरा गया है। ऐसे में ऋण उधार के लिए बैंकों के पास नकदी की कमी हो सकती है। होमोलोन हो या कार लोन या एजुकेशन लोन या कृषि लोन या लोन जैसे सभी लोन में बैंकों के हाथ बंध गए हैं। एसोसिएट्स के एडवांस फिक्स पैनल और रुपये में गिरावट को रोकने के लिए टेलीकॉम सेक्टर के रेगुलेटर भारतीय रिजर्व बैंक के डॉलर ऑफर के तहत बैंकों को संकट का सामना करना पड़ रहा है।

6 महीने में सबसे बड़ा रिपब्लिकन संकट!

ब्लूमबर्ग के वैज्ञानिकों के अनुसार देश के नेटवर्क सिस्टम में छह महीने में सबसे बड़ी कैश की कमी देखने को मिली है। इस अनुमान के आधार पर कहा जा रहा है कि सोमवार तक बैंकों में 1.5 करोड़ रुपये का घाटा हो गया है। अक्टूबर 2024 के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक में लगातार डॉलर की बिकवाली के कारण बेरोजगारी संकट पैदा हो गया।

रुपये में कमजोरी और ट्रेड विक्रय से बढ़ा हुआ संकट

बैंकों के पास बैंकों का संकट और वृद्धि का खतरा है। एक डॉलर के नोट पर मंगलवार 17 दिसंबर 2024 को 84.93 रुपये का रिकॉर्ड स्तर गिर गया। आरपी 85 के नीचे उतरने की तैयारी चल रही है। साथ ही व्यापार के बढ़ने और मजबूत होने से डॉलर में भी परेशानी बढ़ी है। ऐसे में रिजर्व बैंक के खाते में पैसे और डॉलर भी बिक सकते हैं, जिससे सिस्टम में कैश की कमी हो सकती है। हालांकी 6 दिसंबर को आरबीआई ने कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी और इसे 4.50 फीसदी से ज्यादा 4 फिसदी कर दिया गया था, जिससे सिस्टम में कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) हो गया। अधिक से अधिक ऋण बांड फंडी के लिए बैंक इक्विटी को सचिवालय में जमा करना। आरबीआई के इस फैसले से बैंकिंग सिस्टम में 1.16 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी में मदद मिलती है लेकिन आरबीआई का यह फैसला अब नाकाफी साबित होता नजर आ रहा है।

एडवांस टैक्स बढ़कर 1.4 लाख करोड़ हो गया

15 दिसंबर 2024 स्थिर वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए अग्रिम कर जमा की अंतिम तिथि थी। ऑर्गेनाइजेशन के एडवांस डाटा जमा से 1.4 लाख करोड़ रुपए की चोरी हो गई, जिसकी वजह से रियल एस्टेट संकट पैदा हो गया है। ऐसे में लोन देने को लेकर धारकों के हाथ बांधे जा सकते हैं।

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