भूख लगने पर दिमाग क्यों नहीं, 99% लोग इसका जवाब नहीं जानते

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मस्तिष्क और पेट का कनेक्शन : जब भी हमें भूख लगती है तो हमारा दिमाग ही काम करना बंद कर देता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है. आख़िर दिमाग और भूख का कनेक्शन क्या है. अर्थशास्त्रियों के अनुसार, खाली पेट हमारे दिमाग की वायरिंग को बिगाड़ देता है, जिससे उसकी सोच-समझने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। ब्रेन की री-वायरिंग को न्यूरोस्टैटिसिटी भी कहा जाता है, जो डॉक्टर से फीचर करता है। यही कारण है कि जब बहुत अधिक भूख लगती है तो तनाव और अवसाद बढ़ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं भूख और दिमाग के बीच का रिश्ता…

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खाली पेट रहना क्या होगा

जब हमें भूख लगती है, तब ब्लड में गट हार्मोन ग्रेलिन बढ़ता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर होता है। ऐसे में कुछ भी खा लेना सामान्य बात है। खाली पेट रहने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे भूख और थकान बढ़ सकती है। खाली पेट स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल भी बढ़ता है, जिससे स्ट्रेस होने पर दिमाग काम करना बंद कर देता है।

भूख का दिमाग से क्या कनेक्शन है?

एक शोध में पाया गया है कि दिमाग का वो भाग जो जजमेंट है, वो गैट में मौजूद भूख हार्मोन पर निर्भर होता है। जब भूख हार्मोन ग्रेलिन ब्लड ब्रेन बैरियर से अधिक होती है, तो ब्रेकन की सक्रियता सीधे तौर पर प्रभावित होती है। शरीर में लगभग 50% डोपामिन और 95% सेरोटोनिन की मात्रा ही बनती है। डोपामिन एक तरह का न्यूरोट्रांसमीटर है, जो भोजन या नींद जैसी संतुष्टि पूरी तरह से खुशी का एहसास कराता है।

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भूख लगने पर दिमाग क्यों नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, सेरोटोनिन मूड को खराब करता है, नींद और याददाश्त को प्रभावित करता है। जब हमारा पेट खाली हो जाता है, तब न सेरोटोनिन बनता है और न ही डोपामिन। इसके बजाय कोर्टिसोल बनना लगता है, जिससे शरीर में तनाव आ जाता है और मूड खराब हो जाता है। ब्रेन से सीधे पेट और कोलन तक जाने वाली वेगस नर्व गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मेडिसिन के संकेत दिमाग तक ले जाते हैं।

भूख पर स्ट्रेस का रिस्पॉन्स भेजा जाता है, जिससे दिमाग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता है। इसका कारण यह है कि जब किसी चीज को ले जाया जाता है तो पेट में दर्द होने लगता है या नर्वस होने लगता है।

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एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मेट्रो रेल से मिला बड़ा ऑर्डर, शेयरों पर पड़ेगा असर

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शापूरजी प्लोजी ग्रुप की रियल एस्टेट कंपनी एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर का एक और बड़ा प्रोजेक्ट मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कंपनी से 1006.74 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर कंपनी को 14 दिसंबर को मिला और इस हफ्ते कंपनी को दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट मिला है।

भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए ऑर्डर

एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कंपनी से भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए बीएच-5 का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (एलओए) मिला हुआ है। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी 12 किमी से ज्यादा लंबी रूट पर 13 मेट्रो स्टेशन और एलीवेटेड वायाडॉट बना रही है। यह प्रोजेक्ट मेट्रो फिल्म में कंपनी की क्षमता को मजबूत और मजबूत बनाता है।

इससे पहले, 11 दिसंबर को एफकॉन्स के ज्वाइंट वेंचर को 500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का एक वॉटर-स्टॉक प्रोजेक्ट भी मिला था। कंपनी के लिए यह हफ़्ता सफलता से भरा हुआ है।

हाल ही में हुआ है वास्तुशिल्प

एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने 4 नवंबर को शेयर बाजार में निवेश की थी। ईश्यू न्यूनतम 463 रुपये था, लेकिन यह 8% के साथ 426 रुपये की सूची में आया। इसके बावजूद, एक महीने में इस स्टॉक ने 11% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की है। 13 दिसंबर को यह स्टॉक 0.65% की गिरावट के साथ 522.65 रुपये पर बंद हुआ।

बबाइ में नौकरानी

एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग और कोचिंग सेक्टर के प्रमुखों में से एक है। कंपनी ने अब तक 30 देशों में 56,305 करोड़ रुपये के 79 प्रोजेक्ट पर काम किया है। कंपनी का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है, जब उसने हिमालय में 9.02 किलोमीटर वोल्ट अटल टनल बनाया। यह विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग पर स्थित है।

बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम

एफकॉन्स ने कई बड़े और हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। इनमें दिल्ली मेट्रो फेज-3, कानपुर मेट्रो, उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक और कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। कंपनी की क्षमता और अनुभव इसे रेलवे सेक्टर की सबसे खास कंपनी में शामिल करती है।

आगे की कहानियाँ क्या हैं

एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर की कंपनी की सफलता से यह साफ है कि रेलवे सेक्टर कंपनी की मजबूत पकड़ है। यह कंपनी भविष्य में बढ़ते प्रोजेक्ट्स और अनुभव के साथ और भी बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल कर सकती है।

डिस्कलेमर: (यहां वैज्ञानिक ज्ञान परामर्श सलाह दी जा रही है। यहां बताया गया है कि बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेशक के लिए विशेष रूप से पैसा बनाने से पहले हमेशा के लिए सलाह लें। ABPLive.com की तरफ से किसी को यहां कभी भी पैसा कमाने की कोई सलाह नहीं दी जाती है।)

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AAP सांसद राघव चड्ढा ने क्रिकेट मैच एएनएन के माध्यम से राजनीति से परे एकता का एक मजबूत संदेश दिया

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आप सांसद राघव चड्ढा: आम आदमी पार्टी के समाजवादी पार्टी के समाजवादी नेता राघवन चन्ना ने हाल ही में राज्यसभा और लोकसभा के बीच क्रिकेट मैच के आयोजन को लेकर अपनी राय साझा की है। यह विशेष रूप से क्षय (टीबी) रोग के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। राघव चन्ना ने एबीपी न्यूज़ से कहा, “यह एक बहुत ही दिलचस्प मुकाबला है, जम्मू और कश्मीर के 11-11 न्यूनतम क्रिकेट खेलेंगे। इसका मकसद समूह में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि यह हर कोने में संदेश दे सके।”

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि इस मैच का सबसे अहम खिलाड़ी यह है कि यह पार्टी चैलेंज से परे एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “यह मैच राजनीति से परे एकजुट होकर खेला जा रहा है, और संदेश देता है कि चुनाव के बाद हमें राजनीति की लड़ाइयों से ऊपर के दिग्गज देशों के लिए सामूहिक काम करना चाहिए।” उनका मानना ​​था कि प्रतिष्ठा के बाद कई राजनीतिक आश्रमों के कलाकारों, कलाकारों और नेताओं को मिलकर देश के निर्माण के लिए काम करना चाहिए, ताकि देश आगे बढ़ सके।

भावना टीम का संदेश

राघव चन्ना ने मैसाचुसेट्स टीम से भावना से काम करने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह संदेश साफ है कि टीम भावना से काम करो, न सिर्फ क्रिकेट मैच में, बल्कि संसद में भी। जब चुनाव होता है तो राजनीति में गरमागरमी होती है, लेकिन चुनाव के बाद हमें एकजुट होकर अपना राज्य और देश लेना होता है।” के लिए काम करना चाहिए।” उनका भी यही मानना ​​था कि पिछले कुछ दशकों में चुनावों के बाद भी जो राजनीति में खटास कायम है, वह देशहित के लिए सही नहीं है।

राहुल गांधी के भाषण पर राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी और राहुल गांधी के भाषणों को लेकर राघव चन्ना ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा, “दोनों के भाषण अच्छे थे, लेकिन प्रियंक गांधी ने एक बेहतरीन शुरुआत की थी। हालांकि, मुझे उनका पूरा भाषण नहीं मिला, लेकिन जो मैंने सुना, वह प्रभावशाली था। यह मुझे मेरे पहले भाषण की याद दिलाता है।”

राघव चन्ना ने यह भी कहा कि यह देश की राजनीति में नए दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उनके अनुसार, युवाओं की राजनीति में सक्रिय भागीदारी देश के भविष्य के लिए हो सकती है।

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भारत के यूनुस ने सरकार के खिलाफ ड्रैगन संग मिल रची की बड़ी साजिश! बांग्लादेश को चीन दे रहा है ये खतरनाक फाइटर जेट

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<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;">बांग्लादेश की कंपनी चेंगदू J-10C मल्टीरोल फाइटर जेट की योजना बनी हुई है। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश दूसरा दक्षिण एशियाई देश होगा जो इस उन्नत लड़ाकू विमान को अपनी सेना में शामिल करेगा। बांग्लादेश के एयर चीफ मार्शल शेख अब्दुल हन्नान ने अपने शस्त्रागार को आधुनिक बनाने और बनाने की दिशा में यह कदम उठाना जरूरी बताया है।

बांग्लादेश एयरफोर्स पहले चरण में J-10C के 16 संस्करणों की खरीद। इसके बाद अन्य स्टेज में और भी विमान शामिल हो जायेंगे। एयर चीफ मार्शल हन्नान ने कहा कि स्टेयर के पास वर्तमान में पुराने F-7 लड़ाकू जेट हैं, जिनमें सुधार की आवश्यकता है। चीन ने इन जेट्स की स्थापना की थी, जहां कारखानों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है।

J-10C फाइटर जेट की खासियत

J-10C एक चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे पहली बार 2017 में चित्रित किया गया था। यह एयरक्राफ्ट पिक्चर्स और दुश्मनों की पकड़ में कम आने वाला है। इसके साथ ही इसमें सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग एरे (AESA) को स्थापित किया गया है, जो शिक्षार्थियों को शिक्षा में सक्षम बनाता है।

इस विमान में कंपनी द्वारा निर्मित WS-10C इंजन का उपयोग किया गया है, जो इसे और अधिक शक्तिशाली बनाता है। यह जेट PL-15 मिसाइल से लॉन्च हुआ है, जिसकी रेंज 200-300 किलोमीटर तक है। विशेषज्ञ इसे अमेरिकी F-16 के समकक्ष मानते हैं, लेकिन इसके डिजाइन में इजराइल के रद्द किए गए लवी प्रोजेक्ट के कुछ तत्व शामिल हैं।

स्थानीय शक्ति संतुलन पर प्रभाव

इस द्वीप के बाद बांग्लादेश के परमाणु क्षेत्र में मजबूत स्थिति हासिल हो सकती है। पाकिस्तान ने पहले ही 25 J-10C फाइटर जेट की खरीद का भुगतान कर दिया है, जिसका मकसद भारत के राफेल स्मार्टफोन का सामना करना है। इसके अलावा, मिस्र और अजरबैजान जैसे देश भी इस विमान में डूबे हुए हैं।

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मोटो G35 5G बनाम मोटो G45 5G पूरी तुलना हिंदी में

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मोटो G35 5G बनाम मोटो G45 5G तुलना: मोटोरोला ने हाल ही में अपने स्मार्टफोन लाइनअप का विस्तार करते हुए Moto G35 5G को बाजार में उतारा है। इसकी सीधी टक्कर कंपनी के ही Moto G45 5 से है। दोनों ही बजट सेगमेंट के उपकरण हैं, जो लोकप्रिय हैं और 5G इम्पैक्ट के साथ आते हैं। अगर आप इनमें से कोई एक फोन लेना चाहते हैं तो हम आपके लिए ये कंपनी लेकर आए हैं, जिससे आपको अपना मनपसंद फोन आसानी से मिल जाएगा।

विवरण

G35 5G में 6.72 इंच का फुल HD+ डिस्प्ले है, जो 1080×2400 रिजोल्यूशन और 120 Hz का रिफ्रेश रेट के साथ आता है। इसके गैजेट में Moto G45 5G का 6.5-इंच HD+ डिस्प्ले थोड़ा छोटा है। इसका रिजॉल्यूशन 720×1600 वैध है और रिफ्रेश रेट G35 5G के समान 120 हर्ट्ज है।

सिद्धांत में कौन आगे?

मोटोरोला के ये दोनों हाईटेकडिज़ाइन 14 पर चलते हैं। चिपसेट की बात करें तो मोटो जी35 5जी में 2.2 गीगाहर्ट्ज ऑक्टा-कोर प्रोसेसर के साथ यूनिसोक टी760 चिपसेट है, वहीं मोटो जी45 5जी में अनोखा 6एस जेन3 प्रोसेसर है।

कैमरा

मोटोरोला ने Moto G35 5G में स्केच कैमरा डिज़ाइन दिया है। इसमें 50MP का प्राइमरी वीडियो-एंगल और 8MP का अल्ट्रा-वीडियो पोर्टेबल है। दूसरी तरफ Moto G45 5G में 50MP प्राइमरी कैमरा के साथ 2MP का डेप्थ सेंसर है। दोनों फोन 4K वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करते हैं। फ्रंट कैमरे की बात करें तो दोनों हाईटेक 16MP स्थिर के साथ आते हैं।

बैटरी

Moto G35 5G और Moto G45 5G दोनों में 5,000mAh की बैटरी है। Moto G35 5G जहां 18W फास्ट वेरिएंट सपोर्ट के साथ आता है, वहीं Moto G45 5G 20W फास्ट वेरिएंट सपोर्ट के साथ आता है।

रंग वर्गीकरण

Moto G35 5G लीफ ग्रीन, ग्वावा रेड और मिडनाइट ब्लैक कलर में उपलब्ध है, जबकि Moto G45 5G में ब्रिलियंट ब्लू, ब्रिलियंट ग्रीन और वीवा मेजेंटा कलर मिलता है। दोनों ही फोन में कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 3 के लिए स्क्रीन स्क्रीन और स्प्लैशस्टेंस के लिए IP52 रेटिंग मिली है।

कीमत और आपके लिए बेहतर विकल्प कौन-सा?

Moto G35 5G के लिए आपको 9,999 रुपये चुकाने होंगे, जबकि Moto G45 5G की कीमत 10,999 रुपये है। अगर आप कंटेट देखने के लिए फोन लेना चाहते हैं तो हाई रिजॉल्यूशन के कारण Moto G35 5G आपके लिए ठीक रहेगा। वहीं अगर आपको दमदार ग्राफिक्स और फास्ट स्टोरेज चाहिए तो Moto G45 5G बेहतर विकल्प है।

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भारत ने महिला जूनियर एशिया कप 2024 फाइनल जीता, चीन को 3-2 पेनल्टी शूटआउट से हराया

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महिला जूनियर एशिया कप 2024 फाइनल भारत: भारत की वीमेंस हॉकी टीम ने कमाल कर दिया है। टीम इंडिया ने वीमेंस जूनियर एशिया कप 2024 का खिताब जीता। उन्होंने फाइनल में चीन को बुरी तरह रचा। टीम इंडिया ने पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से जीत दर्ज की। पहले यह मैच 1-1 से बराबरी पर था। इसके बाद शूटआउट हुआ। इसमें भारत ने रोमांचक जीत दर्ज की। भारत के लिए साक्षी राणा, मुमताज खान और इशिका ने शानदार प्रदर्शन किया. भारत के गोलकीपर में निधि ने भी जीता अहम किरदार।

चीन ने हॉकी के फाइनल में अच्छी शुरुआत की थी। उन्होंने 30वें मिनट में पहला गोल दागा था. चीन के लिए जिंजुंग ने गोल किया था. भारतीय टीम हाफ टाइम तक पीछे ही रही। लेकिन इसके बाद कनिका ने भारत को लेकर चौंकाने वाली तस्वीरें शेयर कीं। टीम इंडिया ने कनिका के गोल पर 1-1 से बढ़त बना ली है। यह मुकाबला टाइम आउट तक 1-1 की बढ़त पर है।

भारत ने शूटआउट में दर्ज की जीत –

टीम इंडिया ने पेनल्टी शूटआउट में कमाल का प्रदर्शन किया। भारत की ओर से पहला प्रयास वैज्ञानिक राणा ने किया। उन्होंने पहले प्रयास के साथ ही गोल दाग दिया। दूसरा प्रयास मुमताज ने किया, जो जारी रहा। तीसरा प्रयास इशिका ने किया. यह सफल रहा. इसके बाद कनिका ने गोल का प्रयास किया। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. अंत में सुनेलिता ने गोल कर दिया. इसका जवाब चीन की तरफ से दो गोल ही हो सके।

भारत की जीत में निधि की रही अहम भूमिका –

गोलकीपर निधि ने कमाल के प्रदर्शन के दौरान पेनल्टी शूटआउट का अभिनय किया। वे चीन के तीन प्रयास विफल हो गए। चीन की तरह से पहला प्रयास वांग ली हैंग ने किया। निधि ने गोल से बच लिया। वहीं चौथे और पांचवे खिलाड़ी को भी गोल करने से रोक दिया गया.

टीम इंडिया की खिलाड़ियों को खास प्राइज मनी –

भारतीय टीम के खिलाड़ियों को प्राइज मनी मिलेगी। हॉकी इंडिया ने घोषणा की है कि टीम के हर खिलाड़ी को 2 लाख रुपये मिलेंगे। वहीं सपोर्ट स्टाफ को 1-1 लाख रुपए का रिजर्वेशन मिलेगा।

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चीन को नजरअंदाज कर विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा जताया

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अक्टूबर और नवंबर में भारी बिकवाली के बाद विदेशी व्यापारी (एफपीआई) एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार की ओर लौट आए। दिसंबर के पहले दो सप्ताह में एफपीआई ने भारतीय उद्योग में शुद्ध रूप से 22,766 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह निवेश अमेरिकी रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज ब्याज में स्टॉक्स की उम्मीदों और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की कंपनियों से प्रेरित है।

अक्टूबर के छात्र

पिछले महीने एफपीआई की ओर से निवेश में भारी गिरावट का आकलन किया गया था। अक्टूबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 94,017 करोड़ रुपये की कमाई की, जो इस साल का सबसे बड़ा आंकड़ा था। इसके बाद नवंबर में 21,612 करोड़ रुपये और बिक्री बढ़ी। इससे पहले सितंबर में एफपीआई निवेश 57,724 करोड़ रुपये के साथ नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। यह अर्थशास्त्र वैश्विक अर्थशास्त्र और अमेरिकी रुचि को लेकर अनिश्चितता का परिणाम था।

दिसंबर में निवेश की वापसी

13 दिसंबर तक एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 22,766 करोड़ रुपये का निवेश किया है। अमेरिकन रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती और भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दर (सीआरआर) को कम करने की घोषणा से विदेशी निवेशकों का विश्वास फिर से जीत गया है।

रोबोट और नीतिगत कलाकार की भूमिका

भारतीय बाजार में उद्यमियों का रूझान उपभोक्ता मूल्य उपभोक्ता (सीपीआई) आधारित बांड में कमी से भी प्रभावित हुआ। अक्टूबर में नामांकन 6.21% था, जो नवंबर में नामांकन 5.48% रहा। इस सुधार से उम्मीद है कि आरबीआई अपनी आगामी नवीनतम नीति समीक्षा में रेपो दर में कटौती करेगा।

चीन का बाजा बजा

हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लेकर भारत-चीन में निवेश की प्रवृत्ति का अनुमान लगाया गया था। हालाँकि, दिसंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार को प्राथमिकता दी है। रिज़र्व द्वारा प्रमाणितता बढ़ाने के लिए मजबूत कदम और बेहतर प्रतिस्पर्धी दर के आंकड़े, भारतीय बाजार में निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

आगे की कहानी

टिप-टिप से बात करते हुए मॉर्निंग स्टार इनवेस्टमेंट रिचर्स के इतिहासकारों का कहना है कि विदेशी निवेशकों का रुख आगामी वैश्विक और घरेलू आर्थिक नामांकन पर वर्जित है। इसके अलावा ब्याज दर, ब्याज ब्याज दर में तिमाही और तीसरी तिमाही के नतीजों के नतीजे प्रभावित होंगे। इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी शेयर बाजार का स्थिर मजबूत होना दिख रहा है।

बता दें, इस साल अब तक एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में कुल 7,747 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। यह कथन बताता है कि भारतीय उद्योग की स्थिरता और विकास उद्योग विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

डिस्कलेमर: (यहां वैज्ञानिक ज्ञान परामर्श सलाह दी जा रही है। यहां बताया गया है कि बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेशक के लिए विशेष रूप से पैसा बनाने से पहले हमेशा के लिए सलाह लें। ABPLive.com की तरफ से किसी को यहां कभी भी पैसा कमाने की कोई सलाह नहीं दी जाती है।)

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उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का निधन, जानें उनकी शैक्षणिक योग्यता, मुंबई के मशहूर कॉलेज से की पढ़ाई

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तबला वादक जाकिर हुसैन को हार्ट एसोसिएटेड एसोसिएट्स के बाद अमेरिकन सिटी सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मीडिया के अनुसार जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. जाकिर हुसैन को पुरी दुनिया ने याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने तबला वादन से न जाने कितने करोड़ लोगों का दिल जीत लिया।

दार्शनिक जाकिर हुसैन महान तबला वादक अल्लाह रक्खा के सबसे बड़े बेटे थे। उन्होंने अपने पिता के पदचिन्हों पर रहकर भारत और दुनिया भर में एक अलग पहचान बनाई। इमाम के अनुसार हुसैन ने अपने इतिहास में पाँच ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त किये हैं, जिनमें से इस वर्ष की शुरुआत में तीन 66वें ग्रैमी पुरस्कार मिले थे। भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक हुसैन को 1988 में पद्मश्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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यहां से की पढ़ाई

भारतीय तबला वादक और संगीतकार जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को बॉम्बे में हुआ था। अगर जाकिर हुसैन की शिक्षा की जाए तो उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा माहिम सेंट माइकल्स हाई स्कूल से की और बाद में मुंबई के प्रसिद्ध सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी की।

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कम उम्र में ही कर लिया कारनामा

कहावतें हैं कि उस्ताद जाकिर हुसैन ने केवल 11 साल की उम्र में अमेरिका में अपना पहला संगीत कार्यक्रम किया था। साल 1973 में उन्होंने अपना पहला एल्बम ‘लिविंग इन द मटेरियल वर्ल्ड’ लॉन्च किया था। भारत ही नहीं देश-विदेश में सार्वभौम फेवरेट तबला वादक थे।

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जाकिर हुसैन का निधन: तबला वादक जाकिर हुसैन का निधन, 73 साल की उम्र में कहा था दुनिया में रहना

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जाकिर हुसैन का निधन: मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन का 73 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में प्रवेश पत्र सौंपा गया था। डेली भास्कर और इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, वे अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में आखिरी सांस ले रहे हैं।

राजस्थान सरकार में मंत्री राज्यवर्धन मनोहर ने अपने स्टॉक एक्सचेंज से उनके निधन पर पोस्ट कर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है।

दिल की बीमारी से डॉक्टर रहे थे जाकिर हुसैन

एबीपी न्यूज के एक करीबी सूत्र ने बताया कि वे गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका इलाज अमेरिका में चल रहा है। वो पिछली कुछ सामाज से दिल से जुड़ी बीमारी से जुड़े हुए थे। करीब 2 साल पहले उन्हें हार्ट में ब्लॉकेज का कारण बताया गया था।

कम उम्र में ही जाकिर हुसैन ने तबला पढ़ा था

जाकिर हुसैन के पिता दिवगंत मशहूर तबला वादक अल्ला खां थे। बता दें कि उन्होंने कई देसी और विदेशी फिल्मों में भी संगीत और फिल्मों के लिए तबला वादन किया। जाकिर हुसैन ने बेहद कम उम्र में ही तबला सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने इसकी प्रैक्टिस 7 साल की उम्र में की थी। और 12 साल की उम्र से ही उन्होंने देश भर में ओलॉजी ओकेजी शुरू कर दी थी।

4 दशक पहले अमेरिका में जा बसे थे जाकिर हुसैन

लगभग चार दशक पहले उस्ताद जाकिर हुसैन पूरी फैमिली के साथ अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में जा बसे थे। जाकिर खान को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों से नवाजा गया है। उनके प्रसिद्ध देश के बाहरी पोस्टर में भी फोटो थे।

जाकिर हुसैन को नवाजा इन दिनों चुकाया गया है

जाकिर हुसैन को कई फिल्मों से नवाजा गया है। उन्हें भारत सरकार ने 1988 में पद्मश्री दी थी। इसके बाद साल 2002 में उन्हें पद्मभूषण भी दिया गया। साल 2023 में पद्मविभूषण जैसे सर्वोच्च पुरस्कारों से भी उन्हें नवाजा जा चुका है।

बता दें कि जाकिर हुसैन को साल 1990 में संगीत का सर्वोच्च सम्मान यानी ‘म्यूजिक ड्रामा एकेडमी अवॉर्ड’ भी दिया गया था।

जाकिर हुसैन ने 4 बार ग्रैमी पुरस्कार जीता

जाकिर हुसैन को सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया है। कंटेम्पररी वर्ल्ड म्यूजिक एलबम कैटगरी में सामूहिक संगीतमय प्रोजेक्ट/प्रयास के रूप में प्रसिद्ध एलबम ‘ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट’ के लिए उन्हें 2009 में 51वें ग्रैमी फूड्स से नवाजा गया था।

उस्ताद जाकिर हुसैन को 7 बार ग्रैमी रिकॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट का भुगतान किया जा चुका है। और भी कमाल की बात ये है कि उन्होंने इस कॉपी को 4 बार बनाया था.

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