राइजिंग राजस्थान समिट में करण अडानी ने कहा, अडानी ग्रुप राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में 7.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा

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अदानी समूह निवेश योजनाएँ: गौतम अडानी (गौतम अडानी) का अडानी ग्रुप (अडानी ग्रुप) राजस्थान (राजस्थान) के अलग-अलग सेक्टरों में अगले 7.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन) के संचालन निदेशक अडानी (करण अदानी) ने राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समित (राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट) ग्रुप के इन्वेस्टमेंट की इस योजना की शुरुआत की है।

अगले 5 वर्षों में 50 प्रतिशत निवेश

जयपुर में सोमवार 9 दिसंबर 2024 को शुरू हुआ जयपुर राइजिंग राजस्थान समित 11 दिसंबर 2024 तक जारी रहेगा। अडानी ने अपने उद्यम में राजस्थान में निवेश योजना का खाका पेश करते हुए कहा, अडानी समूह ने राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों में 7.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें से 50 प्रतिशत यानी 3.75 लाख करोड़ रुपये अगले पांच वर्षों में ही निवेश किया। .

इंटीग्रेटेड ग्रीन ऊर्जा इकोसिस्टम तैयार होगा

अडानी ने कहा, अडानी ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम (इंटीग्रेटेड ग्रीन एनर्जी इकोसिस्टम) तैयार कर रहा है, जिसमें 100 गीगावाट का रिन्यूएबल ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा), 2 मिलियन टन का परमाणु ऊर्जा संयंत्र (हाइड्रोजन) और 1.8 गीगावाट का परमाणु ऊर्जा संयंत्र (पंप हाइड्रो) शामिल है। भंडारण) शामिल है. उन्होंने कहा, इन निवेशों से राजस्थान को ग्रीन जॉब्स (ग्रीन जॉब्स) क्षेत्र का गढ़ (ओएसिस) बनाने में मदद मिलेगी।

4 नए नामित प्लांट प्लांट की घोषणा

समित को निशाना बनाते हुए अडानी ने कहा, ऊर्जा के अलावा राजस्थान में अडानी ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी बनने के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रुप राज्य में 6 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले चार नए बैचलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। राजस्थान में अडानी ग्रुप की और भी निवेश की योजना है। ग्रुप जयपुर एयरपोर्ट पर वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी तैयार की जा रही है, जिसमें मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क) और आईसीडी (आईसीडी) शामिल हैं, जिसमें स्टेट के ट्रांसफॉर्मेशन प्लान को सपोर्ट करने में मदद मिलेगी।

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मौनी अमावस्या 2025 तिथि महाकुंभ शाही स्नान समय माघ अमावस्या

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मौनी अमावस्या 2025: दुर्भाग्य से साल में 12 बार आती है। ये दिन पितरों की शांति के लिए सबसे अहम माना जाता है। वैसे तो सभी वनस्पति खाज़ें हैं लेकिन माघ महीने में आने वाली वनस्पतियों को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे मौनी बिज़नेस कहते हैं.

सिद्धांत यह है कि इस वनस्पति पर मौन स्नान और दान करने से इंसान के कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं। साल 2025 में महाकुंभ का महासंयोग भी बन गया है, आइए जानते हैं अगले साल आने वाला है मौनी इलेक्ट्रॉनिक्स.

मौनी नीलामी 2025 कब? (मौनी अमावस्या 2025 तिथि)

धार्मिक सिद्धांत जो है कि मौनी के औषधि पर दान, पितृ पूजन आदि उसे जीवनभर कभी कष्ट नहीं झेलने देता है, वादी के आशीर्वाद से उसका घर फल फूलता है।

मौनी बिज़नेस 29 जनवरी 2025 को मनाएगा. इस दिन अलौकिक में महाकुंभ का तीसरा शाही स्नान भी होगा। मौनी परमाणु के साथ महाकुंभ का अद्भुत संयोग बहुत फलदायक माना जाता है।

मौनी अमावस्या स्नान का दोहरा फल (मौनी अमावस्या स्नान महत्व)

माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान शुभ माना जाता है। लेकिन मौनी कंपनी पर इस स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन अगर संपूर्ण रूप से मौन रहे तो अद्भुत स्वास्थ्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

जिन लोगों को भी मानसिक समस्या है या फिर भय और वहम की समस्या, उनके लिए मौनी ओबेसिन का स्नान महत्वपूर्ण माना गया है।

मौनी अमावस्या का महत्व (Mauni अमावस्या महत्व)

  • मौनी पर स्नान के अलावा गरीबों को खाना खिलाना बहुत फलदायक होता है। ऐसा करने से तुम्हें जाने-अनजाने जो पाप होते हैं, उनका प्रायश्चित होता है।
  • पूरे दिन मौन रहें तो अच्छा स्वास्थ्य और ज्ञान मिलेगा।
  • इस औषधि पर स्नान से लेकर मानसिक समस्या, डॉक्टर या वहम से संबंधित सामग्री है।
  • इस व्रत के पूरे नियम से करें तो कुंडली के सभी ग्रह दोष दूर होते हैं।

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अस्वीकरण: यहां चार्टर्ड सूचना सिर्फ अभ्यर्थियों और विद्वानों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की सहमति, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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CUET परीक्षा में हो सकते हैं कई बड़े बदलाव, यूजीसी अध्यक्ष ने कही ये बड़ी बात

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कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के लिए अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में 2025 परीक्षाओं में कई बदलाव जल्द ही किए जा सकते हैं। बदलावों पर एक पाठ्यपुस्तक पर चर्चा की जा रही है। इसकी जानकारी खुद यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने दी है।

संस्थापक अध्यक्ष ने यह भी बताया कि आयोग जल्द ही CUET UG और CUET PG 2025 का आयोजन करने जा रहा है, जिसका नया ड्राफ्ट जारी किया जाएगा, जिसमें छात्र, समुदाय, समुदाय और छात्र शामिल होंगे और इसके लिए सुझाव देंगे। फाइनल ब्लूप्रिंट तैयार होने के बाद इन सुझावों पर विचार करें।

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देश की इस यूनिवर्सिटी में होटल होटल्स लीव ने लिया बड़ा फैसला

सीयूईटी की इंजीनियरी कंपनी (यूजी) और यूनिवर्सिटी (पीजी) स्टार पर कई सफल और क्रांतिकारी साबित हो रही हैं। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।

क्या बोले अध्यक्ष?

यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार का कहना है कि पिछले वर्षों में जो छात्र अपने आधार पर सीयूईटी की परीक्षा में शामिल हुए हैं, उनके लिए सकारात्मक माहौल दिया जाए, इसलिए सुधार जारी रहना चाहिए। इस समिति में सकारात्मक सुधार की नियुक्ति का गठन किया गया है। समिति ने परीक्षण के कई मानदंडों और सिद्धांतों पर ध्यान दिया है। जैसे कि परीक्षा का पेपर कैसा होना चाहिए, इसमें क्या सुधार किया जा सकता है, कितने पेपर होने चाहिए, टेस्ट पेपर की अवधि क्या होनी चाहिए, छात्रों के एग्जाम सेंटर कैसे सेट किए जाने चाहिए।

हाइब्रिड मॉड में हुआ था एग्जॉम

वर्ष 2024 में यह परीक्षा पहली बार हाइब्रिड मोड़ में आयोजित की गई थी, हालांकि दिल्ली में आयोजित परीक्षा कुछ घंटों पहले ही रद्द कर दी गई थी, साथ ही जो छात्र परीक्षा देने भी गए थे, उनमें से कई छात्रों की परीक्षा केंद्र पर पहुंच गई थी। पेशी आई थी. व्लाद्या लॉजिस्टिक्स पर भी सोलो में चर्चा की गई।

किसके लिए होता है आयोजन?

दरअसल, 12वीं का बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद ग्रेजुएशन करने के लिए अगर आप देश की टॉप यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना चाहते हैं तो CUET (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा के जरिए दाखिला लिया जाता है। यह एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है जिसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) आयोजित करती है।

सीयूईटी परीक्षा यूजी प्रवेश के बाद पीजी में दाखिला लेने के लिए भी सीयूईटी पीजी का आयोजन किया जाता है। बड़े पैमाने पर फर्मों के लिए कोचिंग का रास्ता आसान हो जाता है। 2024 तक एक सीयूईटी परीक्षा देने से देश के 200 से अधिक बैचलर में प्रवेश आसान हो गया था, जबकि 2025 तक एक सीयूईटी परीक्षा देने से अन्य देशों के लिए नामांकन प्राप्त करने में भी वृद्धि हो सकती है।

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मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक, किस मुद्दे पर एक साथ आए रूस और यूक्रेन, हैरान रह गए अमेरिका और ड्रैगन

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भारत रूस संबंध: भारत और रूस की दोस्ती बहुत पुरानी है। रूस ने मुश्किल समय में भारत की मदद की। इस साझेदारी वाले हॉल में ही एक अनोखा बदलाव आया है। इसमें अब जापानी भी शामिल हो गया है।

यह तीन देशों के बीच एक अद्भुत त्रिकोण में शामिल है, जो स्थिर भू-राजनीतिक परिदृश्य में काफी महत्वपूर्ण है। इस संयुक्त को देखकर अमेरिका और चीन दोनों ही हैरान करने वाले हैं क्योंकि इस समय रूस और जापान एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध में हैं।

रूस ने भारत को नया युद्धपोत आईएनएस तुशिल सौंपा

हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस की यात्रा पर गए थे। इस दौरान भारत को रूस से एक नया युद्धपोत आईएनएस तुशिल मिला। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि इस समय रूस और जापान के बीच युद्ध चल रहा है। इसके बाद भारत को भी एक नया युद्धपोत मिल गया। आईएनएस तुशिल एक क्रिवक III-क्लास वॉरशिप है।

रूस ने इसे भारत के लिए डिजाइन और निर्मित किया है। इसकी सबसे खास बात ये है कि इसके प्राथमिक इंजन, गैस टरबाइन, जापान में निर्मित होते हैं। ये एक अनोखी स्थिति है एक रूसी युद्धपोत, जापानी इंजन के साथ, भारत को मिल रही है।

जानिए कैसे है भारत की क्रेडिट जीत

ये भारत की पुरातात्विक क्षमता का एक शानदार उदाहरण है। इन कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने रूस और जापान के साथ मिलकर सकारात्मक संबंध बनाए रखे हैं। जबकि इस समय दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध में हैं। भारत ने इस लाभ का लाभ उठाने के लिए दोनों देशों से सैन्य उपकरणों की खरीद की है। जिसकी वजह से भारत को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में मदद मिली है। वहीं, भारत के संबंध रूस और यूक्रेन दोनों से मजबूत हुए हैं।

जानें क्यों जरूरी है भारत के लिए भागीदारी

ये साझा भारत के लिए काफी जरूरी है. भारत, रूस और जापान, तीन देशों का हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण महत्व है। चीन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत, रूस और यूक्रेन के बीच की ये संतुलित संतुलन शक्ति के रूप में आगे आ सकती है। वहीं, आईएनएस तुशिल के शामिल होने से भारतीय नेवी की ताकत में दरार आएगी। ये वैश्वीकरण वैयक्तिकृत और सेंसर सिस्टम से शुरू किया गया है।

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सोशल मीडिया से डरे पाकिस्तान के सेना प्रमुख, सरकार से सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए मजबूत कानून बनाने का आग्रह

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सोशल मीडिया से डरता है पाकिस्तान पाकिस्तान की सेना यूँ तो हर किसी को आँख मारती है कि उसे किसी का डर नहीं है। लेकिन अब विदेशी सेना प्रमुखों को ही डर लग गया है. जी हां.. विदेशी सेना के प्रमुख जनरल कोटा मुनीर को ही पाकिस्तान के आवाम की सोशल मीडिया पर सेना की ताकत का खतरा सताने लगा है। सेना प्रमुखों में ये ख़तरा पिछले हफ्ते सेना के गठन के कमांडरों की बैठक में सामने आया है.

मित्र सेना की इस बैठक के दौरान कई सैन्य सलाहकारों पर चर्चा की गई, जिसमें सोशल मीडिया और उनकी खबरों में एक बड़े लक्ष्य की चर्चा की गई। आईएसपीआर की ओर से विदेशी मीडिया में प्रकाशित जानकारी में यह बात सामने आई है। इस जानकारी में खास बात यह है कि विदेशी सेना प्रमुखों को सोशल मीडिया पर डर लग रहा है।

पूर्ण सरकार से असैनिक कानून लागू करने की अपील

मीटिंग के दौरान फ़ेसबुक न्यूज़ को लेकर जो उदाहरण दिए गए वो बड़ा ही दिलचस्प था। यह खबर थी कि इस्लामाबाद में एससीओ सम्मेलन के लिए विदेशी दूतावासों की यात्रा के दौरान जब सुरक्षा के लिए सेना को बुलाया गया था, जिसमें पाकिस्तान की प्रमुख सरकारी इमारतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शामिल थी। इसे लेकर सोशल मीडिया में जो प्रचार हुआ वो सेना प्रमुखों को पसंद नहीं आया. उन्होंने इस बात पर न सिर्फ चिंता की बल्कि इसे फेसबुक न्यूज प्रोपेगेंडा तक जारी किया।

जबकि खुद विक्रमादित्य के संचालकों ने बाकायदा सेना को पट्टे पर दी गई सेना के अवशेषों की मांग की थी। उन्हें ही विदेशी सेना के प्रमुख फ़्रांसीसी समाचारों की शुरूआत में प्रशिक्षित किया जाता है। हीं नहीं, सेना प्रमुखों अब शाहबाज सरकार की ओर से पेश न्यूज को प्रतिबंध और लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून और नियम लागू करने की अपील की गई है। साथ ही जो न्यूज चैनल उनके खिलाफ प्रचारित करते हैं, उनके एपिसोड एक्शन की मांग की जाती है। इसका साफ पता यह है कि विदेशी सेना प्रमुखों को सोशल मीडिया पर लोगों के बारे में जानकारी दी जा रही है।

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Redmi बड्स 6 ईयरबड्स ने प्रतिद्वंद्वी वनप्लस नॉर्ड बड्स 3 प्रो लॉन्च किया, जानें स्पेक्स कीमत और अधिक विवरण

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रेडमी बड्स 6: रेडमी ने मार्केट में अपना एक नया ईयरबड्स रेडमी बड्स 6 लॉन्च किया है। इस ईयरबड्स में 42 घंटों की बैटरी का सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा यह ईयरबड्स का लुक भी काफी स्टाइलिश है। ये ईयरबड्स एडवांस टेक्नोलॉजी और शानदार फीचर्स के साथ आते हैं, जिनमें 12.4mm डक्ट ड्राइवर्स और 5.5mm माइक्रो पेजो इलेक्ट्रिक स्ट्रक्चर ड्राइवर शामिल हैं।

रेडमी बड्स 6 स्पेसिफिकेशन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Redmi बड्स 6 में 12.4mm के म्यूजिक ड्राइवर्स और 5.5mm के असिस्टेंट ड्राइवर्स का इस्तेमाल किया गया है, जो बेहतरीन साउंड क्वालिटी देते हैं। ये इयरबड्स 49dB तक का नॉइज़ कैंसलेशन प्रदान करते हैं, जिससे बाहरी शोर को कम किया जा सकता है। हर साल 10 घंटे (बीना एएनसी) का सपोर्ट दिया जाता है, और केस के साथ 10 घंटे तक की कुल बैटरी लाइफ 42 घंटे तक दी जाती है। ये ईयरबड्स सिर्फ 10 मिनट चार्ज करने पर ये ईयरबड्स 4 घंटे तक चल सकते हैं।

डिजाइन और वजन

इस ईयरबड्स के आकार का वजन 43.2 ग्राम है और आकार 61.01×51.71×24.80 मिमी है। ईयरबड्स का वजन 5 ग्राम है। Redmi बड्स 6 को शानदार कीमत और बेहतरीन फीचर्स के साथ लॉन्च किया गया है। शानदार बैटरी लाइफ़, ANC सपोर्ट और डुअल ड्राइवर सिस्टम यह एक बेहतरीन विकल्प हैं।

कितनी है कीमत

आइए जानते हैं भारत में Redmi बड्स 6 की कीमत 2,999 रुपये रखी गई है। Xiaomi की आधिकारिक वेबसाइट और Amazon से खरीदारी करें। कंपनी ने इसे टाइटन व्हाइट, आइवी ग्रीन और स्पेक्टर ब्लैक जैसे तीन रंगों में उतारा है। 13 दिसंबर से 19 दिसंबर के बीच खास ऑफर के तहत ये ईयरबड्स सिर्फ 2,799 रुपये में उपलब्ध होंगे।

वनप्लस नॉर्ड बड्स 3 प्रो देता है टक्कर

रेडमी का ये नया ईयरबड्स वनप्लस नॉर्ड बड्स 3 प्रो (OnePlus Nord Bads 3 Pro) को टक्कर देता है। इस सालबड्स में 44 घंटे की बैटरी बैकअप मिलें हैं। साथ ही ये ईयरबड्स फास्ट रिजर्व को भी सपोर्ट करता है। इतना ही नहीं ये पानी और कूड़ा-कचरा से भी बुरा नहीं होता क्योंकि इसे टेलीकॉम 54 रेटिंग प्राप्त है। इस कंपनी की ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट (फ्लिपकार्ट) पर कीमत 2799 रुपये रखी गई है।

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ऑनलाइन भुगतान करते समय अपने क्रेडिट कार्ड के विवरण को कैसे सुरक्षित रखें यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं

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क्रेडिट कार्ड उपयोग युक्तियाँ: डिजिटली डॉक्युमेंट्स का लेन-देन जैसे-जैसे बढ़ रहा है, क्रेडिट कार्ड से संबंधित डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी हो रही है। यदि कुछ सी भी विफल हो गई, तो आप हैंकिंग या धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में ऑनलाइन क्रेडिट के लेन-देन के दौरान क्रेडिट कार्ड की सुरक्षा की मांग की जाती है। हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं, जिनमें ध्यान देते हुए हम अपने क्रेडिट कार्ड (क्रेडिट कार्ड) को सुरक्षित रख सकते हैं।

वेबसाइट का ध्यान रखना जरूरी

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौरान सबसे पहले यह जांच लें कि आप जिस भी वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं वह सुरक्षित है या नहीं। इसकी पहचान साइट के यूआरएल से करें। अगर इसकी शुरुआत “https://” से हो रही है और साथ में एक लॉक का साइन भी दिख रहा है, तो समझ जाइए कि वेबसाइट ने आपकी दी गई जानकारी को साझा किया है। यह एक तरीका है, जो आपकी दी गई जानकारी को पढ़ने से आरंभ करता है। इस तरह से असुरक्षित साइट की पहचान कर फ्रॉड का शिकार होने से बच सकते हैं।

मुफ्त में इस्तेमाल होने वाली दवा से छुट्टियाँ

फूड शॉप, रेस्तरां या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर कई बार हमें मुफ्त वाई-फाई की सुविधा मिलती है ताकि हम चौतरफा इंटरनेट का उपयोग कर सकें। हालाँकि, ऑफ़लाइन परिवहन के लिए यह एक अच्छा विकल्प नहीं है। फ्री चॉकलेट के इस्तेमाल से आप आसानी से हैकर्स की पसंद आ सकते हैं।

सार्वजनिक नेटवर्क में आपकी दी गई जानकारी को सर्वर द्वारा नहीं लिया जाता है। इससे हैकर्स आपके कनेक्शन को टैप कर सकते हैं। यदि बाहर कहीं भी आपको ऑनलाइन गैजेट्स का लेन-देन करना है, तो इस स्थिति में आप वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग करें। यह काफी हद तक आपके डेटा को सेवा देने में मददगार साबित होता है।

क्रेडिट कार्ड विवरण साझा करने से बचाया

फ़ोन, ईमेल या सोशल मीडिया पर अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा करने से सलाह लें। बैंक कभी भी आपसे CVV, OTP जैसे कार्ड डिटेल नहीं मांगता. ऐसे में अगर कोई आपसे एनईएन की जानकारी लेना चाहता है, तो तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा लें।

इसके अलावा, फिशिंग भी ऑनलाइन स्कैम का एक तरीका है। इसमें मैसेज या किसी वेबसाइट के लिंक पर क्लिक करने पर आप पर दबाव बनाया जाता है। इसमें हैकर्स ऐसे ईमेल आईडी या वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं, जो बिल्कुल ऑरिजिनल दिखते हैं।

OTP की भी ले सकते हैं मदद

दो-कारक प्रमाणीकरण (दो-कारक प्रमाणीकरण) आपके क्रेडिट कार्ड को सुरक्षा प्रदान करता है। जब भी आप ऑनलाइन दवाओं का लेन-देन करते हैं, तो आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल पर एक ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आता है, इसका उपयोग करके आप हैकर्स के झांसे में आ सकते हैं। कई बार हैकर्स आपसे आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी लेकर अद्यतन करने की फिराक में रहते हैं। इस स्थिति में ओटीपी मददगार साबित होता है।

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