रायपुर में डबल प्लास्टिक से हमला, विवाद में दो टुकड़े टुकड़े कर दिए बदमाशों ने बनाया मसाला, चाकू से हमला कर ले ली जान

रायपुर के थाना क्षेत्र स्थित आमासिवनी शराब की दुकान के पास सोमवार की देर शाम बदमाशों ने दो बदमाशों की हत्या कर दी। कुक्कुटबाजी किन गुणों से हुई है इस पुलिस ने अब तक राजफाश से बात नहीं की है।

द्वारा आशीष कुमार गुप्ता

प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 10:15:47 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 10:15:47 पूर्वाह्न (IST)

रायपुर में डबल प्लास्टिक से हमला, विवाद में दो टुकड़े टुकड़े कर दिए बदमाशों ने बनाया मसाला, चाकू से हमला कर ले ली जान

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी रायपुर के थाना क्षेत्र स्थित आमासिवनी शराब की दुकान के पास सोमवार की शाम एक दिल दहला देने वाले अपराध ने पूरे इलाके को लूट में डाल दिया। दो दस्तावेजों की खोपड़ी हत्याकांड को अंजाम दिया गया, और इस मामले में पुलिस की जांच अभी तक ठंडे बस्ते में ही नजर आ रही है। यह हत्या किस कारण से हुई, इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विवाद को गुप्त रूप से एक अपराधी ने अपहरण कर लिया और फिर उसे किसी अज्ञात स्थान पर लेलेकर कूलर से हमला करके जान से मार दिया।

विवाद के बाद हत्यारों ने हमला किया

पुलिस के मुताबिक, एक आमासिवनी के ऋषि सागर और दूसरे ओडिशा के रोहित सागर में मारे गए पत्थर हैं। ऋषि के भाई आदित्य ने बताया कि सोमवार शाम को आमासिवनी शराब दुकान के पास कुछ लोग झगड़ा कर रहे थे। इस आश्रम को शांत करने के लिए रीश का राज्य में आगमन हुआ, लेकिन अचानक विवाद और बढ़ गया। इसके बाद, रीश वहीं से वापस लौट आया, लेकिन इसी दौरान बदमाशों ने रोहित को चाकू मार दिया, जिससे उसकी भी मौत हो गई।

परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए

घटना के बाद ऋषि के परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के बजाय, उनके ही परिवार के सदस्यों के साथ आश्रम की। ऋषी के पिता और चाचा को पुलिस ने प्लाटिंग लीज का ठेका दिया। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में मछुआरों को फिल्मांकन में शामिल कर लिया और उनके परिवार को फटकार लगाई।

सागर में हल्दी की बोरियों से लदा ट्रक 50 फीट गहरी खाई में गिरा, चालक व क्लीनर घायल

नागपुर से कानपुर के लिए जा रहे ट्रक में खड़ी हल्दी की बोरियां भरी हुई थीं। नेशनल हाईवे-44 बिजोरा पुल पार करते समय ट्रक चालक को अचानक नींद की झपकी आई, जिसकी वजह से हादसा हो गया। घायल ट्रक चालक व क्लीनर को देवरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।

By OP Tamrakar

Publish Date: Tue, 19 Nov 2024 10:18:06 AM (IST)

Up to date Date: Tue, 19 Nov 2024 10:18:06 AM (IST)

खाई में गिरा ट्रक।

HighLights

  1. नागपुर से कानपुर जा रहा था ट्रक।
  2. बिजोरा पुल के पास हुआ हादसा।
  3. घायलों को भिजवाया अस्पताल।

नवदुनिया प्रतिनिधि, देवरीकलां (सागर) Sagar Accident Information: नेशनल हाईवे-44 पर बिजोरा पुल के पास मंगलवार सुबह एक सड़क हादसा हो गया। एक ट्रक बेकाबू होकर 50 फीट गहरी खाई में जा गिरा, जिससे ट्रक ड्राइवर और क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल भिजवाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है।

सुबह हुआ हादसा

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ट्रक नागपुर से कानपुर के लिए जा रहा था। ट्रक में खड़ी हल्दी की बोरियां भरी हुई थीं। सुबह करीब 8:15 बजे नेशनल हाईवे-44 बिजोरा पुल पार करते समय ट्रक चालक को अचानक नींद की झपकी आई, जिसकी वजह से उसका संतुलन बिगड़ा और ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क से उतरते हुए 50 फीट नीचे खाई में जाकर गिरा। खाई में जाकर ट्रक पलट गया और उसमें लदी हल्दी की बोरियां चारों ओर बिखर गई।

naidunia_image

आसपास के लोगों ने की मदद

हादसे के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और ट्रक में फंसे घायल चालक और क्लीनर को बाहर निकाला।

घटना की सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और ट्रक चालक सुखराम पिता जसवंत सिख 34 साल एवं क्लीनर रंजीत पिता रामस्वरूप निवासी गंज खमरिया जबलपुर 24 साल को देवरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां उनका उपचार किया जा रहा है। ट्रक चालक के पैर में फैक्चर होने की आशंका जताई गई है।

naidunia_image
india creates history wins first test match australia in perth ind vs aus 1st test virat kohli jasprit bumrah

[ad_1]

India vs Australia 1st Test Perth Consequence: एक पीढ़ी के लिए पर्थ स्थित वो वाका का मैदान उस अपमान पर लगे मरहम की तरह है, जहां मिली जीत ने भारतीय क्रिकेट को एक बार फिर से एक सूत्र में पिरो दिया था. याद करिए 2008 का वो पर्थ टेस्ट मैच जब लंबे बालों वाले युवा तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा की गेंदों ने कंगारू कप्तान को घुटनों पर ला खड़ा किया था. पर्थ की वो जीत आज भी ऐतिहासिक है, इसकी पटकथा सिडनी में लिखी गई थी. जहां हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स की कहासुनी ने दोनों क्रिकेट बोर्ड्स के बीच तनाव पैदा कर दिया था. जहां अंपायरिंग का स्तर बद से बदतर हो गया था. भारतीय खिलाड़ियों के साथ कई मौकों पर नाइंसाफी हुई थी. भारत के तत्कालीन कप्तान अनिल कुंबले ने 1933 में प्लम वॉर्नर के दिए गए बयान को दोहराया था कि वहां दो टीम खेल रही थीं, लेकिन उनमें से केवल एक टीम ने खेल भावना का सम्मान किया था. ये बयान यह बताने के लिए काफी था कि उस विवाद में भारत का रुख कैसा था. इस सबके बाद भारत ने पर्थ में इतिहास रच दिया.

समय का पहिया घूमा है और 16 साल बाद आज फिर पर्थ का मैदान संजीवनी बन कर आया है. आज की पीढ़ी के लिए पर्थ फिर उम्मीद की किरण बन कर आया है. पर्थ के नए ऑप्टस स्टेडियम में भारतीय टीम ने कंगारुओं को रौंद कर उनके नवनिर्मित किले को ध्वस्त कर दिया. ये जीत खास इसलिए है क्योंकि इससे पहले जो कुछ भारतीय क्रिकेट में घटा है वह एक बुरे सपने की तरह था. भारतीय टीम पहली बार 3 मैचों की सीरीज में एक मैच जीतने में भी सफल नहीं हो सकी. इसपर चर्चा हो सकती है कि वो क्या कारण रहे कि कीवियों ने भारतीय चुनौती को ध्वस्त कर दिया. क्रिकेट पंडितों से चौतरफा आलोचना झेल रही टीम इंडिया पर स्पिन न खेल पाने का ठप्पा लग जाता है और इसके साथ ही पूछा जाता है वो ही घिसा पिटा सवाल कि क्या ये टीम ऑस्ट्रेलियाई चुनौती झेल पाने में सक्षम है? जिसका जवाब पहले टेस्ट मैच में दिया गया.

पहले टेस्ट के लिए भारतीय कप्तान रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में कमान जसप्रीत बुमराह के हाथों में थी, और उनके सामने थे कई सवाल जिनके जवाब मिलने मुश्किल थे. राहुल की फॉर्म चिंता का सबब , गिल का चोटिल होना एक बड़ा झटका और अंतिम एकादश में नए चेहरों को मौका देने के अलावा भारत के पास कोई चारा नहीं था. यहां भारत निश्चिंत इसलिए भी था क्योंकि पर्थ की विकेट पर वो टर्न नहीं था जिसके आगे भारत ने कुछ दिन पहले हथियार डाल दिए थे. पिच में पेस और बाउंस भरपूर थी, जो नए युग के भारतीय बल्लेबाजों को काफी रास आता है. इसके अलावा वो सभी रिकॉर्ड्स जेहन में ताजा थे, जैसे ऑस्ट्रेलियाई टीम का नया गढ़ बन रहा ऑप्टस का नया मैदान, कंगारू खिलाड़ियों का बेहतरीन रिकॉर्ड और टॉस की महत्वपूर्ण भूमिका. लेकिन जैसा कहा जाता है, “क्रिकेट कागजों पर नहीं मैदान में खेला जाता है.” वो एक चीज जो भाग्य के हाथों में थी वो था टॉस का नतीजा, वो भाग्य भारतीय कप्तान के पक्ष में गिरा और बिना देरी किए भारत ने बल्लेबाजी का निर्णय लिया. 

इसके बाद जो हुआ उसने फिर भारतीय बल्लेबाजी को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया. भारतीय बल्लेबाजी कंगारू पेस बैट्री के सामने ताश के पत्तों की तरह ढह रही थी. एक तरफ सवालों के चक्रव्यूह में फंसे केएल राहुल की खूबसूरत बल्लेबाजी एक छोर संभाले थी तो वहीं दूसरी तरफ ऋषभ पंत की आतिशबाजी जारी थी. ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर पहला टेस्ट मैच खेल रहे नीतीश कुमार रेड्डी की परिपक्व बल्लेबाजी से भारत 150 रन तक पहुंच सका. इस टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई टीम के “अच्छे दिन” यहीं समाप्त हुए और फिर शुरू हुई वो कहानी जो पर्थ के मैदान पर बरसों तक याद की जाएगी। 

बल्लेबाजी करने आई कंगारू टीम के सामने थे अदम्य साहस से लबरेज भारतीय कप्तान जसप्रीत बुमराह, जो ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को डरा रहे थे. बुमराह की गेंदों का आतंक उनकी आंखों में साफ देखा जा सकता था. उनके सबसे बेहतरीन बल्लेबाज स्टीव स्मिथ को बुमराह ने सांस लेने की भी फुरसत नहीं दी. पहली गेंद पर गुड लेंथ की गेंद पड़कर तेजी से अंदर आई और स्टीव स्मिथ को बाहर का रास्ता दिखा गई. आग उगलते बुमराह के उस स्पेल के लिए कमेंट्री कर रहे कई पूर्व खिलाड़ियों ने उनकी तुलना मैलकम मार्शल से कर दी. यहां डेब्यू कर रहे हर्षित राणा की उस गेंद की तारीफ भी करनी होगी जिसने ट्रैविस हेड को पवेलियन भेजा. वो गेंद शायद इस मुकाबले की सबसे शानदार गेंद थी. भारत की गेंदबाजी का स्तर कुछ यूं था कि पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम का स्कोर 7 विकेट पर 67 रन था. किसी तरह ऑस्ट्रेलिया ने 100 का आंकड़ा पार किया और बुमराह के पंजे के कारण 104 रन पर सिमट गया.  

एक बार फिर सवाल के घेरे में थी भारतीय बल्लेबाजी, सवाल ये था कि क्या बल्लेबाज गेंदबाज के किए कराए पर पानी फेर देंगे. इसके बाद शुरू हुआ वो खूबसूरत बल्लेबाजी का प्रदर्शन जिसे हम कहते हैं कि अगर टेस्ट में बल्लेबाजी हो तो ऐसी हो. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की अच्छी गेंदबाजी का जवाब भारत ने सूझ बूझ भरी बल्लेबाजी से दिया. राहुल और यशस्वी ने कंगारू गेंदबाजों को थका-थका कर मारा. अच्छी गेंदों को सम्मान दिया और खराब गेंदों को उसके अंजाम तक पहुंचाया. सॉफ्ट हैंड से गेंदों को खेला जिसका नतीजा ये हुआ कि बल्ले का किनारा ले रही गेंदें भी स्लिप तक का रास्ता तय नहीं कर सकीं. उनके धैर्य का ही परिणाम था कि भारत बड़े स्कोर की नींव रख सका. राहुल ने शानदार 77 रन बनाए और यशस्वी के बल्ले से खूबसूरत 161 रन निकले. ये रन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की मुश्किलें और बढ़ा रहे थे. 
उस खिलाड़ी ने रन बनाए जो लगातार सवालों के घेरे में था. उसकी स्पिन के खिलाफ कमजोरी जगजाहिर थी. लेकिन 2014 में यहां मिली संजीवनी ने 2024 में भी अपना काम किया और विराट कोहली ने शानदार सैंकड़ा लगा दिया. यहां दूसरे छोर पर नीतीश रेड्डी की बात करनी भी जरूरी है जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी से विराट के ऊपर से भार हटा दिया. भारतीय टीम ने 487 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को 534 रनों का विशाल लक्ष्य दिया.

दूसरी पारी में भी कंगारू बल्लेबाजी भारतीय गेंदबाजों के गदर के आगे नहीं टिक पाई. तीसरे दिन के अंतिम घंटे में कंगारू बल्लेबाज बिल्कुल असहाय दिख रहे थे. उनके सामने फिर वही बुमराह आ गया जो इस समय दुनिया का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज है. जिस बल्लेबाज की इस ऑप्टस मैदान पर 100 से ज्यादा की औसत हो उस बल्लेबाज को बुमराह की गेंदे समझ नहीं आ रही थीं. मार्नस लबुशेन का रिकॉर्ड यहां सिर चढ़कर बोलता है। उसे गेंद समझ ही नहीं आ रही थी. ये बुमराह की चतुराई ही है कि वो इतने खतरनाक दिख रहे थे. वहां एक छोर पर उनका भरपूर साथ दे रहे थे मोहम्मद सिराज. दोनों की जोड़ी ने कंगारुओं की नाक में दम कर दिया था. तीसरे दिन का खेल समाप्त होने पर ऑस्ट्रेलिया 3 विकेट के नुकसान पर मात्र 12 रन बनाकर हार के कगार पर खड़ी थी.

चौथे दिन भारत की जीत औपचारिकता मात्र थी. लेकिन यहां ट्रेविस हेड ने ऑस्ट्रेलिया की हार को कुछ देर के लिए टाल जरूर दिया. उनके 89 रनों ने ऑस्ट्रेलिया के हार के अंतर को कम किया। हर्षित राणा ने धीमी गति की खूबसूरत गेंद पर जैसे ही एलेक्स कैरी की विकेट उड़ाई भारत पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम में ऑस्ट्रेलियाई चुनौती को ध्वस्त करने वाली पहली टीम बन गई थी.

ये जीत 2021 की गाबा वाली जीत से कम नहीं है। एक बार फिर भारत के जायसवाल, राहुल, विराट, रेड्डी, हर्षित, सिराज और कप्तान बुमराह ने ऑस्ट्रेलिया में जीत का तिरंगा लहरा दिया है. हालांकि ये सीरीज लंबी है और भारत ऑस्ट्रेलिया को हल्के में आंकने की गलती बिल्कुल भी नहीं करेगा. पर्थ में एकबार फिर भारत ने पलटवार करके 16 साल का सूखा खत्म कर दिया है। 

ये जीत खुशी के साथ कई सवाल भी छोड़ कर जा रही है जो भारतीय टीम प्रबंधन के लिए कड़ी परीक्षा हो सकती है. क्या कप्तान रोहित शर्मा और शुभमन गिल की वापसी के बाद लोकेश राहुल की जगह छिन ली जाएगी? या इन सबको टीम में फिट करने के बदले ध्रुव जुरेल को बाहर जाना होगा? डे नाइट टेस्ट मैच में रात के समय स्विंग होती गेंदों ने रोहित को हालिया समय में काफी परेशान किया है. क्या उससे निपटने के लिए गंभीर एंड कंपनी कोई खास तैयारी करेगी? क्योंकि पिछला डे नाइट टेस्ट भारत के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था. फिलहाल ये सवाल भविष्य के गर्भ में हैं. इसके अलावा क्या कंगारू टीम और पैट कमिंस टीम में कोई बदलाव करने की कोशिश करेंगे? क्या डे नाइट टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया का अजेय रिकॉर्ड कायम रह पाएगा? जो सामने है वो है एक ऐतिहासिक जीत जिसने इस ऐतिहासिक सीरीज को और भी रोमांचक बना दिया है.

यह भी पढ़ें:

IPL 2025 Mega Public sale: राजस्थान रॉयल्स ने 13 साल के खिलाड़ी को बनाया करोड़पति, वैभव सूर्यवंशी पर लगाया बड़ा दांव

[ad_2]

Supply hyperlink

इंदौर क्राइम न्यूज़: इंदौर में पत्थरबाजों ने किया था इमरान, पुलिस ने निकाला जुलूस तो निकाला पथराव

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में अपराध लगातार बढ़ रहा है। अब तो नशीले मसाले के सेवन के मामले आते हैं। वहीं, पुलिस ने भी कमर कस ली है और हर तरफ धरपकड़ कर दी गई है। पुलिस की निगरानी में तस्करों पर है हमला।

द्वारा अरविन्द दुबे

प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 10:35:21 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 10:35:21 पूर्वाह्न (IST)

इंदौर क्राइम न्यूज़: इंदौर में पत्थरबाजों ने किया था इमरान, पुलिस ने निकाला जुलूस तो निकाला पथराव
अपराधियों का जुलूस निकले पुलिस।

पर प्रकाश डाला गया

  1. इंदौर में पुलिस ने ऑपरेशन ऑपरेशन ईगल क्लो चलाया
  2. दुष्टों पर जादू करने वालों की किस्मत
  3. मूलनिवासी इमरान पुत्र यूनुस गौरी का जुलूस

नईदुनिया, इंदौर। ऑपरेशन ईगल क्लो के तहत मदही माफिया की गिरफ्तारी वाले बदमाश को खजराना पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस ने इमरान पुत्र यूनुस गौरी निवासी रोशन नगर का जुलूस भी निकाला। जुलूस के दौरान सबसे ज्यादा डर लगा कि उसकी पेंट छूट गई।

लंबे समय से स्टॉक के कारोबार में स्थिरता थी, कंपनी लंबे समय से तलाश की जा रही थी। पुलिस ने जब उसे गिरा दिया तो उसके हाथ और पैर में भी चोट लग गई।

मोबाइल लूटने वाले का भी आउटलुक मार्च

naidunia_image

इसी तरह तुकोगंज थाना क्षेत्र में 15 नवंबर की रात को चाकू से मोबाइल लूटने वाले को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने अलास्का का मार्च भी निकाला।

पुलिस के मुताबिक शिकायती समीर खान निवासी काजी की चाल से पता चला कि वह रात को एट्टो से जा रहा था। एकमुश्त टेलर की दुकान के सामने दोषी सागर वर्मा और शुभम बिधोने ने चोरी की। ट्रैक्टर ट्रैक्टर धमाका और मोबाइल चेन लिया गया था।

naidunia_image

पुलिस ने ग्रेड के बैचलर को गिरफ्तार कर लिया

एक अन्य मामले में कनाडिया पुलिस ने रविवार रात को गैंग के एक बदमाश को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे बड़ी घटना के बाद से ही राजस्थान और मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में बाली कट रहे थे।

पुलिस के मुताबिक दो सितंबर को शिकायतकर्ताओं ने बताया था कि उसके साथ पांच लोगों ने गैंग की घटना को अंजाम दिया था। फ़ोर्थ्स की खोज में इंदौर, देवास, मसाज़ में उनके टुकड़े पर टुकड़ा दिया गया था, लेकिन पता नहीं चला था। बरोजगारों के लिए 10 हजार रुपये की घोषणा की गई थी।

पुलिस को सूचना मिली कि ग्रुप के बैचलर कम्यूनिटी तेली व शोरूम राजस्थान से इंदौर की ओर आ रहे हैं। सूचना पर टीम थाना सुसनेर जिला-आगर मालवा की टीम को गिरफ्तार किया गया।

कान काटने वाले गिरफ्तार

  • इसी तरह, राउ थाना क्षेत्र में युवक का कान काटने के विवाद में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार तेजाजी चौक पर सचिन चौधरी की बाइक से अंबेडकर डींगू, पुष्कर डींगू और सागर की बाइक की लूट हुई थी।
  • घटना के बाद आवेदक और बुनियादी ढांचे पर विवाद हो गया। इसपर सचिन का कान दांत से काटा गया था। एंथोनी को पकड़ने वाली पुलिस ने पांच नामांकित ऑर्केस्ट्रा की थी। 15 दिन बाद गिरफ़्तार किया गया।
Gwalior council meeting Information: आउटसोर्स एजेंसियों का कार्यकाल बढ़ाया, हंगामे से पहले बैठक स्थगित

नगरनिगम परिषद की बैठक हुई, लेकिन जिन बिंदुओं पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन पर चर्चा ही नहीं हुई। पार्षद गुटों में नजर आए। दूसरे शब्‍दों में पार्षदों में गुटबाजी हावी होने से मैन पावर वाले बिंदु पर चर्चा ही नहीं हुई। साथ ही बैठक में हंगामा हो पाता, उससे पहले ही बैठक को स्‍थगित कर दिया गया।

By Priyank Sharma

Publish Date: Tue, 19 Nov 2024 10:34:44 AM (IST)

Up to date Date: Tue, 19 Nov 2024 10:34:44 AM (IST)

HighLights

  1. बैठक में नजर आई पार्षदों की गुटबाजी
  2. मैन पावर ठेके पर नहीं हुई बैठक में चर्चा
  3. विवादित ठेके में विपक्ष के कुछ लोगों की मिलीभगत

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भाजपा पार्षदों के बीच शुरू हुई गुटबाजी के कारण सोमवार को नगर निगम परिषद की बैठक में सिर्फ दो बिंदुओं पर ही चर्चा हो सकी। सभापति मनोज सिंह तोमर की अध्यक्षता में जलविहार स्थित परिषद कार्यालय में दोपहर तीन बजे शुरू हुई बैठक में एजेंडा के बिंदु क्रमांक सात में वर्तमान में आउटसोर्स मैन पावर उपलब्ध करा रही एजेंसी राज सिक्योरिटी फोर्स की कार्य अवधि को 30 अगस्त तक बढ़ाने की सहमति दी गई।

naidunia_image

वहीं बिंदु क्रमांक आठ में आउटसोर्स पर 1379 अकुशल सफाई श्रमिक उपलब्ध कराने वाली एजेंसी सेंगर सिक्योरिटी का कार्यकाल 30 सितंबर तक बढ़ाने की निर्णय भी सर्वसम्मति से लिया गया। जैसे ही विवादित मैन पावर के नए ठेके बिलीव साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दो साल के लिए 1510 आउटसोर्स कर्मचारी 65 करोड़ रुपये में उपलब्ध कराने पर चर्चा की बारी आई, तो बैठक में बालाजी मंदिर के गौरव महाराज और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी की पुत्री कृतिका माखीजानी के निधन पर शोक प्रस्ताव पढ़वाकर 27 नवंबर दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

दरअसल, पिछले दिनों भाजपा पार्षदों के एक गुट ने आपस में बैठक करने के बाद जिलाध्यक्ष अभय चौधरी से मुलाकात की थी। पार्षदों को इस बात की भनक लग गई थी कि विवादित ठेके में विपक्ष के ही कुछ लोगों की मिलीभगत है। इसके कारण वे इस प्रस्ताव पर हंगामे की तैयारी में लगे थे। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष की मिलीभगत की जानकारी भाजपा पार्षदों के एक धड़े को लग चुकी है। ऐसे में वे इस बिंदु को पास नहीं कराना चाहते थे और इसके लिए शासन के नियमों के साथ ही टेंडर के दस्तावेज भी लेकर पहुंचे थे, लेकिन उससे पहले ही बैठक को स्थगित कर दिया गया।

naidunia_image

क्या है ठेके की गड़बड़ी

  • आउटसोर्स मैन पावर के नए ठेके में विवाद यह है कि शासन के 31 मार्च 2023 के आदेश के अनुसार आउटसोर्स एजेंसी को टेंडर में भाग लेते समय न्यूनतम 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज भरना है, लेकिन बिलीव साल्यूशन ने कम राशि भरी थी। तत्कालीन निगमायुक्त हर्ष सिंह ने इस मामले में कानूनी राय भी मांगी थी, जिसमें इस ठेके को निरस्त करने की सलाह दी गई थी।
  • इन्हीं शर्तों के आधार पर अकुशल सफाई श्रमिकों का ठेका कराने के लिए भी टेंडर जारी किए गए थे, जिसे इसी एजेंडा में निरस्त करने का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन विवादित शर्तों और तमाम गड़बड़ियों के बावजूद मिलीभगत कर बिलीव साल्यूशन के मैन पावर के ठेके को पास कराने की तैयारी की जा रही है।
विश्व शौचालय दिवस: शौचालय बंद विदिशा शहर के ‘सुविधा घर’, जो चल रहे]उनमें शौचालयों का अंबार

शहर में शौचालयों के अंदरूनी फीचर्स की कमी है। 17 सार्वजनिक शौचालय हैं, लेकिन इनके नाम पर हाथ धोने के साबुन के अलावा कुछ नहीं है। चार साल पहले कुछ शौचालयों में हस्तनिर्मित प्लास्टिक मशीन, फिमेड मशीन, पैड वेंडिंग मशीनें चली गईं, जो अब बंद हो चुकी हैं।

द्वारा आशीष यादव

प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 11:01:20 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 11:01:20 पूर्वाह्न (IST)

विश्व शौचालय दिवस: शौचालय बंद विदिशा शहर के 'सुविधा घर', जो चल रहे]उनमें शौचालयों का अंबार
आबादी क्षेत्र में बना सार्वजनिक शौचालय, जो बंद है। -नवदुनिया

पर प्रकाश डाला गया

  1. विदिशा में सिर्फ एक आदर्श सार्वजनिक शौचालय।
  2. स्वच्छता के मानक पर खरे नहीं सार्वजनी शौचालय।
  3. घरेलू का रेशम, जल्द ही शुरू होगा नया शौचालय।

आशीष यादव, विदिशा। लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए सुविधा घर में बंद कर दिए गए हैं। नगर पालिका ने शहरी क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। शहर में 17 सार्वजनिक शौचालय ही हैं, लेकिन इनके नाम पर हाथ धोने के साबुन के अलावा कुछ भी नहीं है। चार साल पहले कुछ शौचालयों में हस्तनिर्मित प्लास्टिक मशीन, फिमेड मशीन, पैड वेंडिंग मशीनें चली गईं, जो अब बंद हो चुकी हैं।

आज शौचालय दिवस है, लेकिन इस शौचालय पर विदिशा नगर पालिका में किसी भी आयोजन की तैयारी नहीं की जा सकी। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए नपा के साथ काम कर रही संस्था सिद्धि विनायक वेस्ट बिल्डर्स की टीम के सदस्य एलेन्ट पांचनाल ने कहा कि टॉयलेट डे को लेकर पहले से कोई आयोजन करने की तैयारी नहीं थी, लेकिन आज कुछ भी नहीं, कुछ नया नहीं होगा।

उन्होंने बताया कि शहर में शौचालयों के आंतरिक ढांचे की कमी है। पुराने शौचालय हैं जो वर्तमान में स्वच्छ सर्वेक्षण के आधार पर नहीं हैं। इसलिए इन शौचालयों में आदर्श शौचालय नहीं बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में एक ही आदर्श शौचालय है जो पुराने तहसील कार्यालय के पास है। आदर्श शौचालयों में अनैतिकों के लिए भी सुविधा है जबकि अन्य पुराने शौचालयों में ऐसी कई कमियाँ हैं।

naidunia_image

लाखों की लागत से बनाया गया टॉयलेट बंद

जिला अस्पताल परिसर, यूएसएचएल जैसे सार्वजनिक स्थान पर नगर पालिका ने सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया है। एक शौचालय की निर्माण लागत करीब दस लाख रुपये है, विक्रय भवनकर नगर की दुकान ही भूल गयी। शौचालयों का संचालन किसी भी संस्था को वर्जित नहीं है। इस वजह से करीब छह महीने से ज्यादा का समय हो गया, ये दावे ही लगे हुए हैं।

इसके अलावा हरिपुरा, शेरपुरा फिश मार्केट के पास, बेतवा नदी के पास, जतरापुरा, नदीपुरा बक्सरिया रोड, टॉयलेट बंद पड़े हैं। इनसे कुछ तो कारखाने हो चुके हैं। लेडी बीडी कतरोलिया का कहना है कि शहर में नए सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं, जिनमें जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। अलग-अलग उद्देश्यों से कुछ संचालित नहीं हो रहे हैं। ये कमियाँ दूर जायेंगे।

क्षेत्र के स्वतंत्रता केंद्रों के ही अवशेष हाल

गांव-गांव में सार्वजिनक शौचालयों का निर्माण हो रहा है, जिसमें स्वतंत्रता समुदाय का नाम दिया गया है। लेकिन निर्माण के बाद से ही ये सुविधा खराब हो जाती है। जिले में अलग-अलग परियोजनाओं में निर्मित इन शौचालयों के नवीनीकरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आनंदपुर में पिछले दस वर्षों से शौचालय बंद है तो वहीं ग्यारसपुर के मृगन्नाथ धाम के पास स्वच्छता समिति भी स्थित है। दीपना एसोसिएट बस स्टैंड का शौचालय में पानी की कमी, सफाई न होने के कारण बंद है। अधिकतर शौचालयों में सफाई व्यवस्था नहीं होने से नुकसान हो गया है।

घर-घर शौचालय, मिली टॉयलेट से मुक्ति

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत के बाद कश्मीर में बदलाव देखने को मिले हैं। घर घर शौचालय निर्माण से जमीन नहीं हो रही है। लोगों को शांति से मुक्ति मिली है। हैजा, डायरिया जैसी गंभीर बीमारी इसी गंदगी के कारण फैलती है। लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी टंकी से मुक्ति की दिशा में बढ़ोतरी हुई है। घर में बने शौचालय से महिलाओं को मिलने की सुविधा हो गई है अब उन्हें खुले में नहीं देखा जाएगा। 2019 से शुरू हुए इस अभियान के बाद आज पूरे जिले में 1521 में कश्मीर को खुले में शौच से मुक्त किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों के भूखंड लाख घरों में शौचालय का निर्माण किया गया है।

Court Information: कोर्ट ने केदारपुर की 22 बीघा दस बिस्वा जमीन निजी मानी

केदारपुर की 22 बीघा 10 बिस्वा जमीन को कोर्ट ने निजी घोषित कर दिया है। जबकि शासन ने इस पर अपना बताया था। सिविल न्‍यायालय ने 2011 में सरकारी ही बताया था और फरियादी का दावा खारिज कर दिया था। लेकिन उच्‍च न्‍यायालय ने फरियादी के दावे को सही माना और जमीन को निजी घोषित कर दिया।

By Vikram Singh Tomar

Publish Date: Tue, 19 Nov 2024 11:00:16 AM (IST)

Up to date Date: Tue, 19 Nov 2024 11:00:16 AM (IST)

कोर्ट ने केदारपुर की 22 बीघा दस बिस्वा जमीन निजी मानी। सांकेतिक चित्र।

HighLights

  1. कोर्ट ने भूमि को निजी घोषित करते हुए शासन की अपील खारिज की
  2. शासन ने आजादी से पहले से सरकारी होना बताया था
  3. सिविल न्यायालय ने 2011 में कर दिया था दावा खारिज

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर शिवपुरी लिंक रोड स्थित केदारपुर की 22 बीघा 10 बिस्वा जमीन के मामले में दायर सेकेंड अपील पर फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने भूमि को निजी घोषित करते हुए शासन की अपील को खारिज कर दिया है। बीती सुनवाई पर शासन की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता ने उक्त भूमि को आजादी से पहले से सरकारी होना बताया था और साथ ही इसको काट छांटकर पंजाब सिंह के नाम पर करने की बात कही थी।

naidunia_image

हाई कोर्ट ने फाइनल बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। जिसे स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। दरअसल, एडीजे कोर्ट के आदेश के खिलाफ शासन ने यह अपील की थी। जिसमें ग्राम केदारपुर की सर्वे क्रमांक -476 की सात बीघा नौ बिस्वा और 480 की 15 बीघा एक बिस्वा जमीन (कुल 22 बीघा 10 बिस्वा) बेशकीमती जमीन पर पंजाब सिंह के मालिकाना हक को शासन ने गलत बताया था।

वहीं पंजाब सिंह ने स्थाई निषेधाज्ञा व भूमि स्वामी घोषित करने की मांग करते हुए 2009 में सिविल कोर्ट में दावा पेश किया। 25 अगस्त 2011 को सिविल न्यायालय ने दावा खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ एडीजे कोर्ट में अपील की गई। जिस पर तीन अक्टूबर 2012 को न्यायाधीश रुचिर शर्मा ने पंजाब सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया।

naidunia_image

खनन कर भूमि को बदहाल छोड़ने के मामले में पट्टाधारियों सहित अधिकारियों को नोटिस

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में युगल पीठ के समक्ष एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका शताब्दीपुरम के महू क्षेत्र में खनन के बाद खुले पड़े गड्ढों को लेकर दायर की गई है। समाज सेवक अमित शर्मा के द्वारा दायर इस याचिका में पैरवी करते हुए अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट के समक्ष तर्क देते हुए बताया कि खनन की लीज 2017 में खत्म हो जाने के बाद भी खदान सुरक्षा अधिनियम का पालन नहीं किया गया।

न तो मौके पर तार फेंसिंग की गई है और न ही गड्ढों को भरकर समतल किया गया। अब वहां स्थिति यह है कि आए दिन घटनाएं होती हैं, कई मौतें भी हुई हैं और पानी के भराव के कारण इसी क्षेत्र में सबसे अधिक डेंगू के मामले भी दर्ज हुए हैं। हाई कोर्ट ने तर्कों पर चिंता जताते हुए ग्वालियर के कलेक्टर, प्रदूषण अधिकारी और खनन अधिकारी सहित संबंधित क्षेत्र के भोपाल तक के अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं। अब इस मामले में आगामी सुनवाई तीन जनवरी 2025 को होगी।

Satyajit (*84*) Pather Panchali actress Uma Dasgupta passes away | सत्यजीत रे की पाथेर पंचाली एक्ट्रेस उमा दासगुप्ता का निधन: कैंसर से जंग लड़ रही थीं, 84 साल की उम्र में कोलकाता में ली आखिरी सांस

8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

1955 में रिलीज हुई सत्यजीत रे की फिल्म पाथेर पंचाली में नजर आईं एक्ट्रेस उमा दासगुप्ता का 84 साल की उम्र में निधन हो गया है। एक्ट्रेस लंबे समय कैंसर से जंग लड़ रही थीं। उन्होंने कोलकाता के अस्पताल में आखिरी सांस ली है।

उमा दासगुप्ता के निधन की पुष्टि उनके रिश्तेदार और एक्टर चिरंजीत चक्रवर्ती ने की है। कैंसर से जूझ रहीं वेटरन एक्ट्रेस का इलाज बीते कुछ दिनों से कोलकाता के प्राइवेट अस्पताल में चल रहा था।

तृणमूल कांग्रेस के लीडर और बंगाली राइटर कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उमा को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, पाथेर पंचाली की दुर्गा अब चली गई हैं।

बताते चलें कि उमा दासगुप्ता को सत्यजीत रे की फिल्म पाथेर पंचाली के लिए जाना जाता है। फिल्म में उन्होंने दुर्गा रॉय की बेहतरीन भूमिका निभाई थी। दरअसल, उमा की स्कूल के हेडमास्टर, उस दौर के मशहूर फिल्ममेकर सत्यजीत रे के दोस्त हुआ करते थे। जब सत्यजीत रे ने अपने हेडमास्टर दोस्त को फिल्म में काम करने के लिए एक लड़की का सुझाव मांगा, तो उन्होंने उमा का नाम लिया और इस तरह 14 साल की उम्र में उमा का फिल्मों से रिश्ता जुड़ा। हालांकि इसके बाद उमा चंद आर्ट फिल्मों का ही हिस्सा रहीं। वो कभी मैन स्ट्रीम सिनेमा से नहीं जुड़ीं। फिल्म पाथेर पंचाली, बिभूतिभूषण की इसी नाम की नावेल पर बनी थी।

साल 2022 में इंडियन फेडरेशन ऑफ फिल्म क्रिटिक्स द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार 1955 की फिल्म पाथेर पंचाली को भारत की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का दर्जा दिया गया है। बता दें कि सत्यजीत रे की इस फिल्म आज भी कई फिल्म इंस्टीट्यूट के सिलेबस में शामिल है। फिल्म पाथेर पंचाली अपू और उसकी बड़ी बहन दुर्गा की कहानी है कि कैसे दोनों ग्रामीण जीवन की मुश्किलों के बीच जिंदगी गुजारते हैं।

बता दें कि बंगाली फिल्म पाथेर पंचाली सिनेमा जगत में काफी सराही जाती है। ये बंगाली फिल्म किशोर कुमार को इस कदर पसंद आई कि उन्होंने खुश होकर सत्यजीत रे को 5 हजार रुपए दिए थे। ये बात भी कम लोग ही जानते हैं कि किशोर कुमार की पत्नी रुमा और सत्यजीत रे दूर के रिश्तेदार होते हैं।

खबरें और भी हैं…
चार माह के बाघ शावक की निमोनिया से मौत, स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ के शोध छात्र करेंगे शव पर अध्ययन

सिवनी क्षेत्र के सिवनी में मृत नर बाघ के शावक की आयु चार माह बताई जा रही है। शव परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मनदीप शर्मा के निर्देशन में एक जांच टीम की ओर से कहा गया था। प्रथम दृष्टया परीक्षण के दौरान पता चला कि शावक की मृत्यु फेफडों में संक्रमण (निमोनिया) के कारण हुई।

द्वारा अतुल शुक्ला

प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 08:04:33 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 11:18:43 पूर्वाह्न (IST)

चार माह के बाघ शावक की निमोनिया से मौत, स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ के शोध छात्र करेंगे शव पर अध्ययन
स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के डॉक्टर डॉ. शोभा जावरे की उपस्थिति में डॉ. निधि राजपूत, डॉ. अमोल राडार, डॉ. राकेश बरैया एवं प्रयोगशाला पोधाडे ने किया शव परीक्षण: नईदुनिया।

पर प्रकाश डाला गया

  1. ख़राब होने की वजह से बंधन ने शावक को जंगल में अकेला छोड़ दिया था।
  2. पोस्टमार्डम को जबलपुर के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ के लिए लाया गया था।
  3. मगरकथा बीट के कक्ष क्र. फ़्यूज़ 188 गेडीघाट जंगल में शव मिला था।

नईदुनिया, जबलपुर (जबलपुर समाचार)। प्लांट टाइगर रिजर्व के जंगल में चार माह के बाघ शावक का शव मिला, जिसे पोस्टमार्डम के लिए जंबाल के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ के लिए लाया गया। सोमवार को वाइल्ड लाइफ स्टाफ ने शव का पोस्टमार्डम किया।

naidunia_image

प्लांट टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने शव को स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ को दे दिया

जांच रिपोर्ट में शावक के फेफडों में संक्रमण (निमोनिया) मिला, जो मौत की वजह बना। ट्रायल के बाद प्लांट टाइगर रिजर्व मैनेजमेंट ने शव को स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ को दे दिया है, जिस पर अब वाइल्ड लाइफ के शोध छात्र व्यवहारिक अध्ययन करेंगे।

naidunia_image

सैद्धांतिक परीक्षण कार्यक्रम एक साथ मिलकर तैयार किया गया

मृत नर बाघ शावक का शव परीक्षण स्कूल ऑफ लाइफ वाइल्ड फोरेंसिक एंड हेल्थ की लीडर डॉ. शोभा जावरे की उपस्थिति में डॉ. निधि राजपूत, डॉ. अमोल राडार, डॉ. राकेश बरैया एवं मंडल पोधाडे ने किया।

naidunia_image

बाघ शावक का शव रविवार सुबह सुपरमार्केट के दौरान वन अमले से मिला था

  • मगरमच्छा बीट के कक्ष क्र. के अंतर्गत अरी गोल्फर वन क्षेत्र। फ़्यूज़ 188 गेडीघाट जंगल में शव मिला था।
  • वन अधिकरियों ने बताया कि मैदानी अमले द्वारा जंगल में लगाए गए अवशेषों में बाघिन और दो शावकों की फोटो कैद हुई थी।
  • भूखा होने से मौत होने का अनुमान। डैग स्क्वायड और पैदल यात्रियों में कोई भी ज़िंदा वन अमले को नहीं मिला।
  • सूक्ष्म परीक्षण एवं पोस्ट मार्टम के लिए शव आइस बाक्स में डायपर नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विवि विज्ञान जैनबाला को भेजा गया था।

naidunia_image

कैमरा ट्रेप में थे बाघिन, दो शावक

  • बाघ के शावक का पेट काफी पिचका था, जो कुछ दिनों से भूखा था।
  • शावक के शव लगभग 10 मीटर दूर गाय के तट पर पाए गए।
  • मॉल पर लगे ट्रैप में बाघिन वी दो शावकों की फोटो खींची गई है।
  • गाय के घर में मक्खियों और अन्य सूक्ष्म जीवों की बैठक की पुष्टि हुई है।

naidunia_image

वन परिशोधन ने पूरे क्षेत्र में सूक्ष्मदर्शी से निरीक्षण किया था

सूचना पर एसोसिएशन सार्क प्लांट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के विशेषज्ञ, उपसंचालक, वरिष्ठ वन्यप्राणि चिकित्सक के अलावा डैग स्क्वायड दल और वन चॉकलेट ने पूरे क्षेत्र में सूक्ष्मदर्शी से निरीक्षण किया था।

naidunia_image

पोषण अधिकतर अच्छे से करने की दृष्टि से सौम्य शावक को अकेला छोड़ देते हैं

वृद्ध वृद्ध वैद्य चिकित्सक अलोकतांत्रिक मिश्रा ने बताया कि बाघों और अन्य बड़े समुदायों में यह सामान्य व्यवहार है। जब वह किसी शावक को अकेला छोड़ देते हैं, तो अन्य शावकों को स्वस्थ और उनके भरण-पोषण में अच्छा पोषण मिलता है। खाली पेट के शावक के पास कोई और चारा नहीं मिला।

ठंड बढ़ते ही तेंदुए दे रहे जंगल से जबलपुर की ओर दस्तक, रात आठ बजते ही पसर जाता है सन्नाटा

मध्‍य प्रदेश के जबलपुर में विभाग के अमले ने क्षेत्रों में रात की गश्त बढ़ा दी है। रिहायसी इलाकों में रहने वाले लोग, तेंदुओं की बढ़ती चहलकदमी से खौफजदा हैं। विभाग इन पर नजर रखता है, लेकिन इस समय जिन क्षेत्रों में इनके होने की सूचना मिल रही है, वो जंगल से लगा है, जहां पर कैमरे लगाना मुश्किल है।

By Atul Shukla

Publish Date: Tue, 19 Nov 2024 11:16:24 AM (IST)

Up to date Date: Tue, 19 Nov 2024 11:16:24 AM (IST)

आसपास के जंगलों में रहने वाले तेंदुओं की संख्या करीब 80 के पास: नईुदनिया।

HighLights

  1. लगातार वन विभाग को मिल रही हैं सूचनाएं।
  2. सात जगहों पर लगातार दिखने पर बढ़ाई गश्त।
  3. शिकार के लिए रिहायसी इलाकों में आ रहे हैं।

अतुल शुक्ला, नईदुनिया जबलपुर (Jabalpur Information)। जबलपुर में ठंड की दस्तक के साथ ही तेंदुओं की शिरकत भी बढ़ रही है। शहर के खमरिया, सीओडी, जीसीएफ के साथ डुमना से लगे जंगल और इनकी सीमा में आने वाले रिहायसी इलाकों में लगातार तेंदुओं को देखे जाने की सूचना मिल रही है।

20 से ज्यादा सूचनाएं वन विभाग को मिली हैं

रात के आठ बजते ही इन क्षेत्रों में सन्नाटा पसर जाता है। इधर पिछले कुछ दिनों में तेंदुओं के दल को दिखे जाने की करीब 20 से ज्यादा सूचनाएं वन विभाग को मिली हैं। विभाग के मुताबिक शहर और इसके आसपास के जंगलों में रहने वाले तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो इस समय करीब 80 के ऊपर पहुंच चुकी है।

ऐसी जगहों को चिंहित किया है, जहां लगातार देखा जा रहा है

वन विभाग ने जबलपुर में करीब सात ऐसी जगहों को चिंहित किया है, जहां लगातार तेंदुओं को देखा जा रहा है, जिसमें खमरिया और एलवीआर के साथ जीसीएफ, डुमना, बरगी, पनागर और आर्मी बेस वर्कशाप के क्षेत्र शामिल हैं। यहां पर विभाग ने लोगों को रात के वक्त सर्तक रहने कहा है। इधर विभाग का गश्त लगाने वाला अमला, तेंदुए के देखने की सूचना मिलने के बाद तत्काल समय पर पहुंच रहे हैं।

कुत्तों और सुअर का कर रहे शिकार

  • ठंड के दिनों में तेंदुए दल से दूर जाकर शिकार करते हैं खासतौर पर मादा तेंदुआ।
  • आसानी से शिकार मिल जाए, शिकार के लिए यह रिहायसी इलाकों की ओर आ रहे हैं।
  • जबलपुर व आसपास तेंदुओं के बढ़ती शिरक्त की वजह से वन विभाग भी परेशान है।
  • तेंदुए की आमद के कारण वन विभाग की रेस्क्यू टीम को लगातार लोगों के फोन आ रहे।
  • तीन दिन पूर्व ही जीसीएफ के पास एक कुत्ते को मुंह में दबाकर ले जाते हुए भी देखा गया।

50 से 80 तक पहुंची तेंदुओं की संख्या

इस वजह से यह अब शहर की ओर शिरक्कत कर रहे हैं और रिहायसी इलाकों की ओर बढ़ने लगे हैं। खासतौर पर विभाग को मिलने वाली सूचना में रात के वक्त ही इनके होने की जानकारी मिलती है। ऐसे में हमने कुछ क्षेत्रों को चिंहित किया है, जहां पर लगातार इनके होने की जानकारी सामने आ रही है। हालांकि इनके शिकार करने की भी शिकायत आ रही है, जिसके बाद यहां लगातार गश्त की जा रही है और लोगों को भी सतर्क रहने कहा गया है।

naidunia_image

इसलिए बढ़ रही शिरकत

  • ठंड के दिनों में तेंदुए अपने दल से दूर जाकर शिकार करते हैं, जिससे यह आ रहे हैं।
  • खासतौर पर मादा तेंदुए ठंड में ही बच्चों को जन्म देती है और वह दल से दूर जाती हैँ।
  • मादा तेंदुआ रिहायसी इलाकों में आकर कुत्ते-बिल्ली और सुअर का शिकार कर रहीँ।
  • अधिकांश लोगों ने जंगलों की ओर अपने घर बना लिए हैं, जिसउनके घर तक पहुंच रहे हैं।

naidunia_image