आधार कार्ड फ्रॉड: आपके आधार नंबर पर ठगों की नजर, फोटो कॉपी मोबाइल नंबर सबसे ज्यादा खतरनाक… सावधान हैं तो पढ़ें ये खबर

अगर आप भी अपने आधार नंबर का ठगों के हाथ की रेखा का डर बना सकते हैं। तो इस खबर में लिखे टिप्स को अपनाकर आप इससे बच सकते हैं। हाल ही में पुलिस ने भोपाल में एक ऐसा गिरोह पकड़ा है, जो दूसरे के आधार नंबर के जरिए फर्जी बैंक अकाउंट के साथ मोबाइल सिम भी ले जा रहा था। इसके बाद बैंक अकाउंट को साइबर ठगों को बेच दिया गया।

द्वारा प्रशांत पांडे

प्रकाशित तिथि: सोम, 18 नवंबर 2024 01:34:01 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 18 नवंबर 2024 01:34:01 अपराह्न (IST)

आधार कार्ड फ्रॉड: आपके आधार नंबर पर ठगों की नजर, फोटो कॉपी मोबाइल नंबर सबसे ज्यादा खतरनाक... सावधान हैं तो पढ़ें ये खबर

पर प्रकाश डाला गया

  1. फोटो कॉपी की दुकान पर व्हाट्सएप और ई-मेल से आधार की पीडीएफ नहीं।
  2. अपने आधार नंबर पर हमेंशा बॉयो प्लास्टिक लॉक ऑन करके रखना चाहिए।
  3. मासड आधार डाउनलोड करके उपयोग करें, इसमें पूरा नंबर शो नहीं होता है।

डिजिटल डेस्क, इंदौर(आधार कार्ड नंबर धोखाधड़ी)। भोपाल पुलिस ने एक ऐसा गिरोह पकड़ा है, जिसमें आधार कार्ड के जरिए सिम कार्ड के साथ बैंक खाते भी रखे गए थे। फिर गिरोह ने इन बैंकों को 10-10 हजार रुपये में साइबर ठगों को बेच दिया।

इस घटना ने लोगों को चिंता में डाल दिया है कि वे अपना आधार नंबर सुरक्षित रख सकते हैं। इस खबर में हम आपको ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिनके जरिए आप आधार को स्कैमर्स से सुरक्षित रख सकते हैं।

सबसे ज्यादा डर फोटो कॉपी की दुकान पर

हम सभी को कभी न कभी आधार कार्ड की फोटो कॉपी की जरूरत पड़ती है। आधार कार्ड का प्रिंटआउट निकलवाने के लिए फोटो कॉपी की फोटोकॉपी के साथ इसकी पीडीएफ या फाइल को पेन ड्राइव में लगाना सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है।

अगर प्रिंट आउट प्रिंट के लिए व्हाट्सएप या ई-मेल के माध्यम से आधार कार्ड डाउनलोड करें तो ना करें। क्योंकि यह डेटा नष्ट नहीं होता है और इसकी भयावहता बनी रहती है।

फोटो कॉपी की दुकान पर आधार कार्ड का प्रिंट आउट किसी भी पर सही ना पृष्ठ, तो उसे फेंके नहीं। दुकान के डस्टबिन में भी उसे ना डाला। ऐसे में कोई भी गलत उपयोग कर सकता है।

यदि फोटोकॉपी दुकान मालिक आपका आधार कार्ड आपके कंप्यूटर में लेकर प्रिंट आउट निकालता है, तो इसके बाद उसे निश्चित रूप से हटा दें।

आधार नंबर देते समय इस बात का ध्यान रखें

सिम लेना, लोन लेना, मकान किराए पर लेना या अन्य किसी काम के लिए आप आधार कार्ड की फोटो कॉपी दे रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले इस बात को जान लें कि आप जो आधार कार्ड की फोटो कॉपी दे रहे हैं वो इसे लेने के लिए अधिकृत है। किसी भी अज्ञात व्यक्ति को यह न दें।

आधार कार्ड की फोटो कॉपी पर यह विवरण भी लिखा है कि यह आपके किस कार्य के लिए है। यदि आपने बैंक से लोन लेने के लिए इसे दिया है, तो इसकी जानकारी की फोटो में कॉपी कर लें कि सिर्फ बैंक से लोन लेना है, साथ में तारीख भी लिखें। फोटो कॉपी पर बीच में यह जानकारी इस तरह से लिखी गई है कि कोई भी इसमें शामिल न हो सके।

बायो बायोम लॉक ऑन पेज

आधार का बायोमॅमिकल लॉक ऑन मेंटेनेंस से इसे सुरक्षित रखा जा सकता है। आधार बायोलॉजिकल स्टॉक या आधार कार्ड खरीदने के लिए आप यू-डायरेक्ट वेबसाइट, मोबाइल ऐप एम-आधार या आधार सेवा केंद्र पर भी जा सकते हैं।

फ्रॉड से बचने के लिए मास्कड आधार का उपयोग करें

आधार नंबर के मिसयूज पर रोक लगाने के लिए आप आधार नंबर का उपयोग कर सकते हैं। डाउनलोड किए गए ई-आधार में आपको आधार नंबर का विवरण मिलता है। आधार के आगे आठ नंबर को छिपाया जाता है, जबकि आखिरी के केवल 4 अंक ही नीचे दिए जाते हैं। ऐसे में कोई भी आपका पूरा आधार नंबर नहीं जान पाता। यूआईडीएआई की वेबसाइट से आधार डाउनलोड करने के लिए समय-समय पर आधार कार्ड का चयन करें।

ऐसे चेक करें आपके आधार से कितने मोबाइल लिंक हैं

आधार नंबर के आधार का सबसे बड़ा डर यह रहता है कि कोई उसे सिम ना ले ले। आपके आधार से कितने मोबाइल नंबर जुड़े हुए हैं, इसकी जानकारी फ़्लोरिडा एनेस्थेटिक्स और कंज्यूमर प्रोटेक्शन पोर्टल (TAFCOP) से मिल सकती है।

इन स्टेप्स से कर सकते हैं चेक

  • सबसे पहले TAFCOP की वेबसाइट www.tafcop.dgtelecom.gov.in की वेबसाइट पर।
  • इसके बाद अपना मोबाइल नंबर सबमिट करें।
  • आपके मोबाइल नंबर पर एक ओपीटीपी आए, जिसमें साइट पर खरीदारी करें।
  • अब एक पेज खुला है जिसमें आपके आधार से लिंक सभी मोबाइल नंबर की जानकारी होगी।
  • जो मोबाइल नंबर आपने नहीं लिया हो उसे यहां से ब्लॉक भी किया जा सकता है।

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Deepak Chahar Response on MS Dhoni CSK: चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में अपने कई सारे पुराने खिलाड़ियों को खरीद लिया है. लेकिन दीपक चाहर उन खिलाड़ियों में से एक हैं, जिनपर चेन्नई मैनेजमेंट ने बोली तो लगाई लेकिन ज्यादा रकम के चलते खरीद नहीं पाई. उन्हें मुंबई इंडियंस ने 9.25 करोड़ रुपये में खरीदा है. अब एक मीडिया इंटरव्यू में दीपक से चेन्नई और एमएस धोनी का साथ छोड़ने का सवाल पूछा गया, इस पर भारतीय तेज गेंदबाज का बयान वायरल हो रहा है.

कई बार मैदान पर दीपक चाहर और एमएस धोनी को मस्ती करते देखा जा चुका है, लेकिन अब ये दोनों एक ही टीम का हिस्सा नहीं होंगे. दीपक ने मुंबई इंडियंस में जाने को लेकर कहा, “मैं जब भी अपने भाई राहुल चाहर से बात करता हूं, तो कहता हूं कि स्किल के आधार पर तुम उस टीम (MI) के लिए खेल रहे हो जिसके लिए मुझे खेलना चाहिए और मैं उस टीम (CSK) में हूं जिसके लिए तुम्हें खेलना चाहिए. चूंकि चेन्नई के मैदान में स्पिनरों को मदद मिलती है, लेकिन मुंबई की पिच तेज गेंदबाजों के अनुरूप होती है. वो चेन्नई नहीं आ सके, लेकिन मैं मुंबई जा रहा हूं.”

एमएस धोनी की याद आएगी…

इस इंटरव्यू का एक मजेदार लम्हा वह भी रहा जब सुरेश रैना ने दीपक चाहर से पूछा कि वो एमएस धोनी भाई को मिस तो जरूर करेंगे. इसके जवाब में मुस्कुराते हुए दीपक ने जवाब दिया, “उनको कौन मिस नहीं करेगा.” दीपक ने साल 2016 में राइजिंग पुणे सुपर जायंट्स के लिए खेलते हुए अपना IPL डेब्यू किया था और उस समय धोनी इसी टीम के लिए खेला करते थे. 2 साल का बैन झेलने के बाद CSK की वापसी हुई और तभी से दीपक चेन्नई टीम में धोनी के अंडर खेलते आ रहे थे.

दीपक ने अब तक अपने आईपीएल करियर में 81 मैच खेलकर 77 विकेट लिए हैं. उनके लिए सर्वश्रेष्ठ सीजन 2019 रहा जब CSK के लिए खेलते हुए उन्होंने 17 मैचों में 22 विकेट चटकाए थे. IPL 2019 में CSK ने फाइनल तक का सफर तय किया था.

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IPL 2025 Auction: CSK ने तैयार कर ली एक चैंपियन टीम, ऐसी हो सकती है संभावित प्लेइंग इलेवन

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खामेनेई ने बेटे मोजतबा को चुना उत्तराधिकारी, बन सकते हैं ईरान के अगले सुप्रीम लीडर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गंभीर रूप से बीमार चल रहे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई कोमा में चले गए हैं। हालांकि, इससे पहले ही हुई एक गुप्त बैठक में वह अपने छोटे बेटे मोजतबा को अपना उत्तराधिकारी चुन गए थे। बहरहाल, अभी तक ईरान की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

By Shashank Shekhar Bajpai

Edited By: Shashank Shekhar Bajpai

Publish Date: Mon, 18 Nov 2024 01:33:37 PM (IST)

Up to date Date: Mon, 18 Nov 2024 01:33:37 PM (IST)

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अपने बेटे को चुना उत्तराधिकारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अयातुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे और छोटे बेटे हैं मोजतबा।
  2. ईरान की तरफ ने नहीं की गई है अभी तक आधिकारिक पुष्टि।
  3. सितंबर में हुए पेजर विस्फोट में मोजतबा भी हो चुके हैं घायल।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजरायल से ईरान के बढ़ते तनाव के बीच ईरान से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अचानक दूसरे और छोटे बेटे मोजतबा को अपना उत्तराधिकारी चुना है। हालांकि, ईरान की तरफ से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई गंभीर रूप से बीमार हैं और कोमा में चले गए हैं। अपने बेटे को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर उन्होंने दुनिया को चौंका दिया है। वह सर्वोच्च नेता के कार्यालय में कमांडिंग ऑफिसर हैं। यह जानकारी ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

पिछले महीने गुप्त मीटिंग के बाद हुआ चयन

दावा किया जा रहा है कि अधिकारियों ने पिछले महीने एक सीक्रेट मीटिंग की थी। इस दौरान खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में उनके बेटे मोजतबा का चुनाव किया। मोजतबा का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। उन्होंने साल 1987 से 1988 तक ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया।

अपने पिता की तरह ही मोजतबा भी इस्लामिक मामलों के जानकार बताए जाते हैं। बताया जा रहा है कि ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मौत के बाद मोजतबा ही खामेनेई की उत्तराधिकारी के शीर्ष दावेदार हैं।

सितंबर के पेजर धमाकों में हुए थे घायल

वह ग्रेजुएशन के बाद धर्म शास्त्र का अध्ययन कर चुके हैं और इसके बाद उन्होंने मौलवी बनने के लिए साल 1999 में पढ़ाई भी की थी। बताते चलें कि सितंबर में जो पेजर विस्फोट हुए थे, उसमें मोजतबा भी घायल हुए थे।

लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह समूह के लोग जो पेजर और वॉकी-टॉकी इस्तेमाल कर रहे थे, उसमें धमाके हुए थे। इस हमले में करीब 3000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और कम से कम 39 लोगों की मौत हुई थी। ईरान और हिजबुल्लाह ने इन हमलों को अंजाम देने का आरोप इजरायल पर लगाया था।

इजरायल पर दागी थीं 180 मिसाइलें

गौरतलब है कि पिछले महीने ईरान ने इजरायल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए 180 मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई ने पांच साल में बाद तेहरान की एक मस्जिद में हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था कि इजरायल लंबे समय तक नहीं टिकेगा।

IND vs AUS: ‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि टीम इंडिया…’ अभ्यास मैच नहीं खेलने से हैरान पूर्व कप्तान

नई दिल्ली. आस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी से पहले अभ्यास मैच नहीं खेलने के भारत के फैसले से हैरान इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने आशंका जताई है कि मैच अभ्यास के बिना भारतीय टीम डिफेंडिंग माइंटसेट के साथ कैसे खेलेगी. भारत ने पर्थ में 22 नवंबर से शुरू हो रही पांच टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले आस्ट्रेलिया की घरेलू टीम के खिलाफ कोई अभ्यास मैच नहीं खेलने का फैसला किया है जबकि पिछले दो दौरों पर ऐसा नहीं हुआ था.

वॉन ने ‘फॉक्स स्पोटर्स ’ से बातचीत के दौरान कहा ,‘‘ मुझे समझ में नहीं आ रहा कि भारत जैसी टीम आस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी धरती पर खेलने से पहले ‘इंट्रा स्क्वाड’ (आपस में मुकाबला) मैच ही क्यों खेलना चाहती है. ऐसे मेंडिफेंडिंग माइंटसेट के साथ कैसे उतरेंगे. यह समय ही बतायेगा.”

Perth Check: रोहित के बाद शुभमन गिल भी बाहर… प्लेइंग XI में वापसी कर सकता है युवा सितारा

भारत ने अपनी ‘ए ’ टीम के साथ तीन दिवसीय ‘इंट्रा स्क्वाड’ मैच भी नहीं खेलने का फैसला किया है. वे पर्थ में वाका की मुख्य पिच पर अभ्यास पर फोकस कर रहे हैं. भारतीय टीम मैनेजमेंट का मानना है कि वाका की पिच पर उछाल पर्थ स्टेडियम की पिच तैसा है और इस पर अभ्यास करने से शीर्षक्रम के बल्लेबाजों को फायदा होगा.

वॉन ने कहा ,‘‘ मैं हैरान हूं कि यह भारतीय टीम एक भी अभ्यास मैच नहीं खेलना चाहती. वाका की विच मुख्य पिच के जैसी है जिस पर समान उछाल है.’ बता दें कि आस्ट्रेलिया ने भी पिछले साल भारत और इंग्लैंड के टेस्ट दौरों पर अभ्यास मैच नहीं खेले थे.

Tags: Border Gavaskar Trophy, Michael vaughan, Crew india

मध्याह्न भोजन समाचार: एमपी में मध्याह्न भोजन जा रहा है सस्ता…ऊर्जा मंत्री के बाद अब सरकार को मिली पानी सी दाल

बैलबाडी और स्मारक स्कूलों में एस प्लाईज जाने वाले एडॉप्टान द हाउस की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। पहले मंत्री ऊर्जा को परमाणु ऊर्जा भोजन की सब्जी में आलू नहीं मिलता था तो अब ताकत को दाल में ही नहीं मिलता। ऐसे में पुरालेखा भोजनालय की स्टिक पुस्तिका का आकार निर्धारित किया जा सकता है।

द्वारा वरुण शर्मा

प्रकाशित तिथि: सोम, 18 नवंबर 2024 01:27:43 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 18 नवंबर 2024 01:32:18 अपराह्न (IST)

मध्याह्न भोजन समाचार: एमपी में मध्याह्न भोजन जा रहा है सस्ता...ऊर्जा मंत्री के बाद अब सरकार को मिली पानी सी दाल
दस्तावेज़ानाम भोजन का निरीक्षण करते हुए

पर प्रकाश डाला गया

  1. वार्ड 13 के ढांचे में थे पार्क के अंतिम दर्शन साक्षात स्तुति आई सामने
  2. सितम्बर में रिज़र्व मंत्री ने निरीक्षण किया था कि सब्जी में आलू नहीं मिले थे
  3. भारी भरकम बजट के बाद भी सिस्टम पर शेयर हो रहे हैं सवाल

नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। अन्यत्र में मध्याह्न भोजन के नाम पर मजाक चल रहा है। जिम्मेदार लाख अच्छे भोजन के दावे करते हैं लेकिन स्कूल के नौनिहालों के मुंह तक गुणवत्ता वाला भोजन नहीं पहुंच रहा है। सरकार का भारी भरकम बजट और संसाधन लेकर पूरे सिस्टम पर सवाल हो रहे हैं। सितम्बर माह में डी.ए.पी. लाइन के सरकारी स्कूल से प्रवेश के दौरान खुद प्रदेश के खनन मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को सस्ता मध्यान भोजन मिला था यहां में सब्जी आलू ही नहीं थे।

अब रविवार को किलागेट क्षेत्र में प्राइमरी स्कूल में पार्क की अंतिम दर्शन के लिए मध्य प्रदेश में भाजपा के डॉ. दिनेश सिकरवार के समक्ष उद्घाटन किया गया। यहां दाल पूरी पानी जैसी थी और सब्जी भी सस्ती मिली। यह देख चौंका दिया गया और व्यावसायिक मशीनरी से ज्वालामुखी शहर अतुल सिंह को काल तक पूरा मामला बताया गया। वहीं इस स्कूल में 63 बच्चों ने एक ही टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

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बताएं कि मध्याह्न भोजन के लिए संग्रह में दो केंद्रीय रसोई हैं। एक शिव किचनपुरी लिंक रोड पर है जहां विदिशा की संस्था के पास का ठेका बताया गया है। दूसरी अप्रचलित पुरानी मूर्ति वहां स्थित है जहां पर सुशीला देवी संस्था के पास स्थित है। इन दो किचनों से ही खाना भेजा जाता है। गाडियों के लिए अलग-अलग तरह के सिक्कों का इस्तेमाल किया जाता है जो खाना खाने आते हैं। 19 सितंबर को उपनगर में आने वाली डीएपी लाइन में गुरुवार को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

यहां से निकले तो पास के ही श्री श्री पिरामिड मिडिल स्कूल को देखा तो अंदर चले गए। यहां स्कूल के बच्चे मध्याह्न भोजन के तहत भोज करा रहे थे, जहां ऊर्जा मंत्री भी सहजता से खाना खाने बैठे। मंत्रीजी को जब खाना खिलाया गया तो वे डंग रह गए। यहां खाने में आलू की सब्जी में आलू ही नहीं थे. इस मामले का वीडियो भी बहुप्रसारित हो गया था।

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30 बच्चों का खाना कैसे पूछा गया

30 बच्चों का खाना कैसे बनाया गया जबकि बच्चा तो तीन नहीं है। इस पर टीचर ने बताया कि एक दिन पहले ही बच्चों की जानकारी भेजी जाती है। यह जानकारी दी गई है। एक दिन पहले अगर तीस बच्चे आते थे तो दूसरे दिन के लिए तीस ही बच्चे खाना खाते हैं। नौकरानी ने कहा कि बच्चों को इस तरह का खाना दिया जाता है तो इसपर टीचर के पास कोई जवाब नहीं था।

क्वांटम प्राइमरी स्कूल में पार्क फाइनैंशियल की हमारी योजना एक साथ लेकर मैं अंतिम रूप से देखने के लिए गया था। यहां मेरे सामने ही मध्याह्न भोजन आया और देखा कि भोजन कितना खराब है। मैंने इस संबंध में टीचर से भी पूछा और जानकारी ली। इस मामले की अन्य जानकारी भी यहां दी गई है।

दिनेश सिकरवार, वडोदरा,वार्ड-13

किलागेट में सरकारी स्कूल में मध्याह्न भोजन को लेकर क्षेत्रीय भोजनालय की ओर से जानकारी दी गई है। भोजन की जाँच टीम डिजिटल उपकरण

अतुल सिंह, ऑफिसियल सिटी

Youth slaps TI in Tikamgarh: टीकमगढ़ में टीआइ को युवक ने जड़ा थप्पड़, देरी से पुलिस के पहुंचने पर नाराज थे ग्रामीण

टीकमगढ़ के बड़ागांव धसान में एक्‍सीडेंट में युवक की मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद भी पुलिस करीब चार घंटे देरी से पहुंची। ऐसे में आक्रोशित लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। इसी दौरान एक युवक को टीआई ने थप्‍पड मार दिया। इसके बाद युवक ने भी टीआई को थप्‍पड् रसीद कर दिया।

Train Cancelled Checklist: यात्रिगण यात्रा पर जान से पहले पढ़ें ये खबर, जबलपुर-अम्बिकापुर एक्सप्रेस सहित 16 ट्रेनें कैंसिल

नवंबर में कई ट्रेनें भारतीय रेलवे द्वारा कैंसिल की गई हैं, जो यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बन रही हैं। रेलवे के नेटवर्क विस्तार और नई रेल लाइनों के निर्माण के कारण यह कदम उठाया गया है। यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले कैंसिल की गई ट्रेनों की सूची चेक करने की सलाह दी जा रही है।

By Anurag Mishra (*16*)

Publish Date: Mon, 18 Nov 2024 02:07:30 PM (IST)

Up to date Date: Mon, 18 Nov 2024 02:07:30 PM (IST)

Train Cancelled List: यात्रिगण यात्रा पर जान से पहले पढ़ें ये खबर, जबलपुर-अम्बिकापुर एक्सप्रेस सहित 16 ट्रेनें कैंसिल
रेवले ने कैंसिल की ये ट्रेनें। (फोटो क्रेडिट- मेटा एआई)

HighLights

  1. यात्रियों को यात्रा से पहले सूची चेक करने की सलाह।
  2. रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी प्राप्त करें।
  3. वैकल्पिक यात्रा के विकल्पों पर विचार करना जरूरी।

नेशनल डेस्क, इंदौर।(*16*) यात्रियों के लिए यात्रा का सबसे पसंदीदा माध्यम रेलवे है। इन दिनों में कई ट्रेनें कैंसिल की जा रही हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा हो रही है। नवंबर महीने में ही कुछ ट्रेनों को कैंसिल किया गया है। रेलवे के नेटवर्क विस्तार और नई रेल लाइनों के निर्माण कार्य के चलते यह निर्णय लिया है। कई ट्रेनें विभिन्न रूट्स पर अस्थायी रूप से बंद की गई हैं, जिनमें प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं।

आप नवंबर में ट्रेन से सफर करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जरूरी है कि आप अपनी यात्रा से पहले कैंसिल की गई ट्रेनों की सूची जरूर चेक कर लें, जिससे किसी भी असुविधा से बच सकें। रेलवे ने यात्रियों को सुझाव दिया है कि वे अपने ट्रेन के रूट और समय की जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से ले सकते हैं। ऐसे में सही जानकारी प्राप्त करना और वैकल्पिक यात्रा विकल्पों पर विचार करना यात्रा को सुगम बना सकता है।

ये ट्रेनें की गईं कैंसिल

  • ट्रेन नंबर 11265 जबलपुर-अम्बिकापुर एक्सप्रेस 16 से 19 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 11266 अम्बिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस 17 से 20 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 18247 बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस 15 से 19 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 18248 रीवा-बिलासपुर एक्सप्रेस 16 से 20 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 11751 रीवा-चिरमिरी पैसेंजर स्पेशल 18 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 11752 चिरमिरी-रीवा पैसेंजर स्पेशल 19 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 18203 दुर्ग-कानपुर एक्सप्रेस 17 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर18204 कानपुर-दुर्ग एक्सप्रेस 18 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 18205 दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस 14 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 18206 नौतनवा-दुर्ग एक्सप्रेस 16 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 05755 चिरमिरी-अनूपपुर पैसेंजर स्पेशल 19 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 05756 अनूपपुर-चिरमिरी पैसेंजर स्पेशल 19 नवंबर को कैंसिल रहेगी
  • ट्रेन नंबर 08269 चिरमिरी-चंदिया रोड पैसेंजर स्पेशल 17 से 19 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 08270 चंदिया रोड-चिरमिरी पैसेंजर स्पेशल 17 से 19 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 06617 कटनी-चिरमिरी मेमू स्पेशल 16 से 19 नवंबर तक के लिए कैंसिल
  • ट्रेन नंबर 06618 चिरमिरी-कटनी मेमू स्पेशल 17 से 20 नवंबर तक के लिए कैंसिल
VIDEO: अरे वापस कर दे यार….बहुत महंगी है गेंद, हार्दिक को साउथ अफ्रीका में पड़ा छक्का, गेंद लेकर फरार हुआ शख्स

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम इस वक्त साउथ अफ्रीका के दौरे पर है. टीम इंडिया के खिलाड़ी चार मैचों की टी20 सीरीज खेल रहे हैं. संजू सैमसन की तूफानी शतकीय पारी के बाद वरुण चक्रवर्ती और रवि बिश्नोई की स्पिनर जोड़ी के कमाल ने टीम इंडिया को पहले मुकाबले में दमदार जीत दिलाई. इस मैच के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हार्दिक पंड्या की गेंद पर लगाए गए छक्के पर गेंद स्टेडियम पार पहुंच गई जिसे एक शख्स लेकर फरार हो गया.

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच आईसीसी टी20 विश्व कप फाइनल के बाद पहली बार मुकाबला खेला जाना था. हर किसी को इस टक्कर का इंतजार था कि मेजबान टीम क्या फाइनल की हार का बदला भारतीय टीम से ले पाएगी. मैच के नतीजे ने बताया दिया कि टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड चैंपियन क्यों बनी. 4 मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने 61 रन की बड़ी जीत दर्ज कर 1-0 की बढ़त बनाई. संजू सैमसन ने शानदार शतक जमाया जबकि वरुण चक्रवर्ती और रवि बिश्नोई ने 3-3 विकेट चटकाए. 203 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मेजबान टीम 141 रन पर सिमट गई.

गेंद लेकर भागा शख्स
साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टी20 मैच के दौरान हार्दिक पंड्या को एक ओवर में दो लगातार छक्के लगे. गेराल्ड कोएत्जी ने पारी का 16वां ओवर करने आए हार्दिक को चौथी और पांचवीं गेंद पर दो जोरदार छक्के लगाए. इस दौरान एक छक्का तो इतना जोरदार था कि गेंद स्टेडियम पार करती हुई सड़क पर जा गिरी. वहां मौजूद एक शख्स ने उसे उठाया और लेकर भाग निकला.

प्रदेश में आगमन पर आए हाथों पर भारी बोझ पड़ा, सरकार ने इसके लिए कभी बजट ही नहीं दिया…

वडोदरा प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दस हाथियों की मौत हो गई, ही स्वस्थ्य कोदो खाने से हुई हो, लेकिन जंगल से लगे सागर में क्या ओला और बांदे ने क्या खामियां रखीं, इसकी जानकारी रखने की जिम्मेदारी पार्क प्रबंधन की है। संक्रमण से बचाव की जिम्मेदारी वन विभाग की ही है।

द्वारा धीरज कुमार बाजपेयी

प्रकाशित तिथि: सोम, 18 नवंबर 2024 02:22:20 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 18 नवंबर 2024 02:22:20 अपराह्न (IST)

प्रदेश में आगमन पर आए हाथों पर भारी बोझ पड़ा, सरकार ने इसके लिए कभी बजट ही नहीं दिया...
बांधवगढ़ के राजकीय दल में शामिल हाथी। फ़ाइल फ़ोटो

पर प्रकाश डाला गया

  1. प्रोजेक्ट टाइगर की तरह ही प्रोजेक्ट एलीफेंट की आवश्यकता महसूस की गई।
  2. दुनिया का सबसे बड़ा गार्डनर हाथी वर्ष 2018 में बसने की नियत से प्रदेश तक पहुंच गया।
  3. छह साल वन अधिकारी तो इशारा करें- लोगों को हाथियों के साथ रहने की आदत हो।

श्वित्र शुक्ला, नईदुनिया, सहायक अधिकारी, जबलपुर। हमेशा अपने बाघों को लेकर चर्चा में रहने वाले बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में दिनों में बाघों की मौत को लेकर चर्चा जारी है। करीब छह साल पहले बांधवगढ़ में हाथी मेहमान आए थे। यहां पर्यावरण ने उन्हें इतना पसंद किया कि उन्होंने इसे नया घर ही बना लिया।

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वर्ष 2018 में बसने की नियत से मध्य प्रदेश पहुंचा था

दुनिया का सबसे बड़ा गार्डनर हाथी वर्ष 2018 में बसने की नियत से मध्य प्रदेश पहुंचा तो आम टॉयलेट, किसानों की तरह ही वन अधिकारियों ने भी उन्हें अपने लिए संकट ही महसूस कराया।

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गांव के लोगों को भी हाथियों के साथ रहने की आदत डालनी होगी

जंगल के आसपास बसने वालों के लिए जब भी हाथी की समस्या पैदा हुई तो प्रदेश के वन अधिकारियों को बताया गया कि न सिर्फ उन्हें बल्कि गांव के लोगों को भी हाथियों के साथ रहने की आदत डालनी होगी।

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अधिकारियों का रुख भी हाथों के प्रति सकारात्मक नहीं रहता है

  • पिछले छह वर्षों में कुछ हद तक इस बात को वन अधिकारी तो समझने लगे।
  • अभी भी वन अधिकारी गांव के लोगों को यह जरूरी बात नहीं समझा सकते हैं।
  • मुख्य कारण सरकार का सारा फोकस और बजट प्रोजेक्ट टाइगर के लिए होता है।
  • इसी कारण अधिकारियों का रुख भी हाथों के प्रति सकारात्मक नहीं रहता है।

संक्रमण से बचाव की जिम्मेदारी वन विभाग की ही है

जब पार्क प्रबंधन प्रोजेक्ट टाइगर के लिए जंगल से जुड़े में वन्यजीवों का टीकाकरण कराता है तो निश्चित रूप से जंगल से जुड़े रहने वाले जंगल को भी इस तरह के संक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी वन विभाग की होती है।

जिहादियों का पहले ही सर्वे अवेर्मेन्ट की सुरक्षा के लिए जरूरी है

जिस तरह से हाथियों की मौत के बाद जीप को नष्ट कर दिया गया, ठीक उसी तरह से उन आतंकियों की सुरक्षा के लिए भी सर्वे करना जरूरी है।

रिजर्व की ईको वन समितियां पूरी तरह से निष्क्रिय

वन प्रबंधन के अधिकारी हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रोजेक्ट टाइगर की तरह ही प्रोजेक्ट एलीफेंट की आवश्यकता पर जो भी देते हैं, रिजर्व की इको वन समितियाँ पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। एको वन समितियां सक्रिय हैं तो वन विभाग की सूचना तंत्र इतना खराब नहीं होता कि हाथियों के बीमार होने से 14 घंटे से भी अधिक समय तक इसकी सूचना अधिकारियों तक न दें।

बीमार हाथों के उपचार के लिए सूचनात्मक बैठक के बाद भी तीन से चार घंटे तक चले गए

प्रोजेक्ट टाइगर पर भी अगर पूरी ईमानदारी से काम हो रहा है तो बीमार हाथों के उपचार में सूचना बैठक के बाद भी तीन से चार घंटे तक नहीं दिया गया। हैंडीज़ की मौत ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पूरे प्रबंधन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले में पूरी दुनिया वन अधिकारियों की ही मनी जा रही है।

10 हाथियों की मौत के तीन अहम कारण जंगल की जानकारी रखने वाले लोग बता रहे हैं

  1. सबसे पहले माइकोटाक्सिन प्रभावित कोडो से बीमारी की सूचना प्रबंधन को 14 घंटे की देरी से मिली।
  2. दूसरी वजह यह है कि बीमार हाथों का उपचार लगभग 16 से 17 घंटे बाद शुरू हो जाता है।
  3. तीसरी महत्वपूर्ण घटनाएँ अनुभव से प्राप्त अनुभव को खुद को यादों के लिए तैयार रखें।
  4. बांधवगढ़ व दूसरे वन्य एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हुई घटनाओं को लेकर पार्क प्रबंधन ने कोई सबक नहीं लिया।

2022 नवंबर में ही पत्थाथा के छतवा बीट घोरीघाट में कोदो से मौत हो गई थी

वर्ष 2022 नवंबर में ही पत्थाथा के छतवा बीट घोरीघाट में कोदो खाने वाले से एक हाथी इसी तरह बीमार हो गया था। सूचना के बाद हाथी का इलाज किया गया लेकिन वह डॉक्टर नहीं जा सका। उस हाथी को रेंजर ने दराज जलवा दिया था। इस मामले में रेंजर के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी।

जानकारी बैठक के दौरान बांधवगढ़ में कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं था

वह मामला अभी भी जांच में है। इस घटना से भी सबक नहीं लिया और 10 हाथियों को अपनी जान गंवाना पड़ा। घटना की जानकारी बैठक के दौरान बांधवगढ़ में कोई डॉक्टर भी मौजूद नहीं था। यहां के डॉक्टर संजय धुबरी रिजर्व में मैनिटरिंग के लिए गए थे।

मदद करने से इनकार करते हुए, जो अत्यंत गंभीर अपराधिक स्थिति है

एक वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट ने अपनी याचिका में यह जानकारी दी है कि बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में हाथियों के पदार्थों के सेवन के बाद निकटवर्ती राज्य में सरकारी पशु रसायनों ने मदद करने से इनकार कर दिया है, जो बेहद गंभीर आपराधिक स्थिति है।

उनकी लाग दवाओं की पहुंच में भी काफी समय लगा

यहां सबसे पहले एक महिला चिकित्सक ने इलाज शुरू किया था। अन्य डॉक्टरों तक यहां पहुंचने और फिर उनकी बताई गई दवाओं तक पहुंचने में भी काफी समय लग गया। हाथियों की बीमारी के बाद उनका जो इलाज किया गया वह बहुत ही साधारण था और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पहली बार सामने आई घटनाओं से प्रबंधन ने कोई सबक नहीं लिया।

समय से उपचार- दीक्षांत तो शायद कुछ जान बच सकती थी

पार्क प्रबंधन को हमेशा यही उम्मीद रखनी चाहिए कि हाथी या अन्य जानवर कुछ बीमार हों तो वे कैसे सुरक्षित हैं। समय से इलाज और दवा मिल गई तो शायद कुछ हाथियों का जान बच सका।

2021 से अब तक 46 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है

बांधवगढ़ नेशनल पार्क प्रबंधन का पूरा ध्यान बाघों पर रहता है। ये भी सच है कि यहां सबसे ज्यादा बाघ हैं, उनके केस पर भी कई बार इंडस्ट्रीयल स्टॉक्स बिकते हैं। यहां पर आए दिन बाघ की मौत या शिकार की जानकारी भी मिलती है। बांधवगढ़ में वर्ष 2021 से अब तक 46 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है।

अविश्वास करने का विधान है, ऐसा कोई नियम वन विभाग में नहीं

बांधवगढ़ में शिकार के लिए गए बाघों के बीच आपसी संघर्ष और सामान्य मौत के तथ्य सामने आए हैं। संबंधित वन विभाग में टेबलों की कोई तय व्यवस्था नहीं है। जिस प्रकार आयएस और पीएससी आई का तीन साल में स्टॉक करने का प्रावधान है, ऐसा कोई नियम वन विभाग में नहीं है।

अब हाथियों की मौत के बाद सरकार ने पूरे स्टाफ के बदलाव की तैयारी की है

इस कारण एक ही अधिकारी कई-कई साल तक एक ही पार्क में सेवा देता है। अब हाथियों की मौत के बाद सरकार ने यहां पूरे स्टाफ की व्यवस्था की तैयारी की है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद वन मुख्यालय ने अपना स्टोर शुरू कर दिया है।

अब मप्र सरकार ने एलिफेंट टास्क फोर्स के गठन का फैसला लिया

देर से आई फिल्म पर अब मप्र सरकार ने एलिफेंट टास्क फोर्स के गठन का फैसला भी ले लिया है। वन विभाग को हाथियों को लावारिस के बजाय उन्हें टाइगर स्टेट की तरह एलिफेंट स्टेट की तरफ कदम बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। हमारा प्रदेश तो वैसे भी अतिथि देवो भव: को बदनाम करने वाला है, ऐसे में देश के दिल को हाथियों को भी दिल से स्वीकार करना चाहिए।

नंबर गेम

  • पिछले पांच दशकों में देश में 528 हाथियों की मौत हो चुकी है
  • 2829 पिछले पांच दशकों में लोगों की जान जा चुकी है
  • 2017 में हुई गणना के अनुसार पूरे देश में 29,964 हाथी हैं
Gwalior murder Information: बेटी के लिव-इन पार्टनर ने की वृद्धा की हत्या, बेटी को भी मारी गोलियां

ग्वालियर के घाटीगांव स्थित दौरार गांव में लिव इन पार्टनर ने अपनी पर्टनर की मां की गोली मारकर हत्‍या कर दी। आरोपित महिला को गोली मारना चाहता था। लेकिन उसे बचाने के लिए उसकी मां सामने आ गई और गोली उसके सीने को पार कर गई। घटना में महिला भी गोली का शिकार हुई है और उसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है।

By amit mishra

Publish Date: Mon, 18 Nov 2024 02:14:57 PM (IST)

Up to date Date: Mon, 18 Nov 2024 02:14:57 PM (IST)

बेटी के लिव-इन पार्टनर ने की वृद्धा की हत्या, बेटी को भी मारी गोलियां। सांकेतिक चित्र।

HighLights

  1. रात तीन बजे घाटी गांव थाना क्षेत्र में हुई हत्या की वारदात
  2. लिव इन पार्टनर को मारने गया था आरोपित, बचाने आ गई मां
  3. गोली मारने के बाद आरोपित फरार, पुलिस कर रही है तलाश

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर के घाटीगांव स्थित दौरार गांव में रविवार-सोमवार की रात करीब 3.30 बजे 65 वर्षीय वृद्धा मीरा बाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी बेटी रज्जो बाई(32) को मारने के लिए उसका लिव-इन पार्टनर विष्णु शर्मा कट्टा लेकर आया था।

उसने रज्जो पर गोली चलाई, जब उसकी मां बचाने के लिए आई तो मां के सिर में गोली मारकर हत्या कर डाली। रज्जो के भी सीने में गोली मारी, जो उसके दिल के पास लगी है। रज्जो की भी हालत गंभीर है। हत्या करने के बाद आरोपित फरार हो गया। उसकी तलाश चल रही है।

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मां-बेटी दौरार गांव में ही एक खेत के पास झोंपड़ा बनाकर रहती थीं। करीब तीन साल पहले रज्जो की मुलाकात मुरैना के जौरा में रहने वाले विष्णु पुत्र सुरेश शर्मा से हुई। दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी, फिर विष्णु उसके साथ ही यहां रहने लगा। पिछले करीब एक साल से इनमें अनबन होने लगी।

विष्णु कभी-कभी रज्जो से मिलने के लिए आता था। बीती रात वह आया। मां-बेटी घर के बाहर ही अलग-अलग खटिया पर सो रही थीं। तभी विष्णु आया तो झगड़ा हुआ। उसने कट्टा निकाला तो मीरा बाई ने रोका। मीरा बाई पर गोली चलाई, जो उनके सिर को चीरकर निकली। रज्जो बाई के सीने में गोली मार दी।

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इस घटना के बाद आरोपित भाग गया। घाटीगांव थाना प्रभारी रशीद खान फोर्स के साथ पहुंचे। मृतका को पोस्टमाट्रम हाउस और घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। महिला के सीने में गोली फंसी है। गोली दिल के पास लगी है, अगर थोड़ी और आगे की तरफ गोली लगती तो शायद रज्जो की भी मौके पर ही मौत हो जाती। अभी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

शातिर चोर है विष्णु

विष्णु शर्मा के बारे में पुलिस ने पड़ताल की तो सामने आया कि वह शातिर चोर है। पुलिस को आरोपित को कई मामलों में तलाश भी है। आरोपित जौरा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। इसलिए पुलिस ने जौरा पुलिस को भी ग्वालियर पुलिस की टीम ने सूचना दी है। साथ ही उसके घर पर पता लगवाया। लेकिन उसका पता नहीं लगा। आरोपित का पिता भी घर पर नहीं मिला है।