Gwalior : एक पलंग पर दो से तीन मासूम भर्ती, संक्रमण का खतरा

जेएएच के बाल एवं शिशु रोग विभाग की स्थिति बदतर होती जा रही है। वार्ड और पीआईसीयू तक में बच्‍चों को पलंग नहीं मिल रहे हैं। पीडियाट्रिक पीआइसीयू, एचडीयू में पैर रखने की भी जगह नहीं हैं। यहां बेड बढ़ाकर 38 करने के बाद भी हालात बेकाबू हैं।

By Anoop Bhargav

Publish Date: Tue, 19 Nov 2024 12:50:09 PM (IST)

Up to date Date: Tue, 19 Nov 2024 12:50:09 PM (IST)

कमलाराजा अस्‍पताल के पीआइसीयू में बेड पर भर्ती एक से अधिक बच्‍चे।

HighLights

  1. केआरएच के पीआइसीयू, एचडीयू के ऐसे हालात, वार्डों में भी स्थिति खराब
  2. एक पलंग पर दो से तीन बच्चों का उपचार किया जा रहा है
  3. पीडियाट्रिक पीआइसीयू, एचडीयू में पैर रखने की भी जगह नहीं हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जेएएच के बाल एवं शिशु रोग विभाग की स्थिति बदतर होती जा रही है। यहां स्वजन अपने बच्चों को बेहतर उपचार मिलने की आस में आ रहे हैं मगर वार्ड से लेकर पीआइसीयू तक में भर्ती होने वाले मासूमों को पलंग तक नसीब नहीं हो रहे हैं।

एक पलंग पर दो से तीन बच्चों का उपचार किया जा रहा है। यहां पलंग किनारे लगे ग्लूकोस चढ़ाने के स्टैंड पर चार से पांच ग्लूकोस की बाटल व आइवी सेट लगे हुए हैं। कौन सी बाटल से किस बच्चे तक दवा पहुंचाकर ट्रीटमेंट किया जा रहा है यह पहचान पाना मुश्किल है।

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पीडियाट्रिक पीआइसीयू, एचडीयू में पैर रखने की भी जगह नहीं हैं। यहां बेड बढ़ाकर 38 करने के बाद भी हालात बेकाबू हैं। वार्डों में नजारा और भी चिंताजनक है। बावजूद इसके प्रबंधन व्यवस्था बेहतर करने के नाम पर लोड अधिक होने की बात कहकर बचता नजर आ रहा है।

जबकि जगह की कमी के कारण बच्चों को उनकी माताएं गोद में लेकर इलाज करा रही हैं। मासूम व उनके स्वजन को तो असुविधा हो ही रही है। साथ ही उपचार कर रहे नर्सिंग स्टाफ को भी कई बार गफलत का सामना करना पड़ता है। स्वजनों का कहना है कि पलंग नहीं दे सकते तो कम से कम स्टैंड तो अलग दे दो। अंदर वार्ड में इतनी घुटन है कि कोई खड़ा तक नहीं रह सकता। जगह की कमी के कारण बच्चों को उनकी माताएं गोद में लेकर इलाज करा रही हैं।

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संक्रमण का अंदेशा हर पल

एक ही पलंग पर अलग-अलग बीमारी से ग्रसित बच्चों का उपचार चल रहा है। किसी अन्य की बीमारी किसी अन्य को लगने का अंदेशा होने के साथ ही संक्रमण फैलने की आशंका भी है। पीआइसीयू में करीब 80 से अधिक बच्चे उपचाररत हैं। चिकित्सक का कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इससे अस्पताल में व्यवस्था गड़बड़ा गई है। शिशु सर्दी, खांसी व जुकाम के साथ निमोनिया की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि वार्ड फुल हो गए हैं।

इसलिए बढ़ रही है बच्चों की संख्या

सर्दी बढ़ने के साथ ही वायरल जनित बीमारियों के साथ-साथ डेंगू तेजी से फैल रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिखाई दे रहा है। इस वजह से शासकीय और निजी अस्पतालों में बच्चे अधिक भर्ती हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को सर्दी से बचा कर रखें। उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं और सुबह-शाम घर से बाहर न निकलने दें। बच्चे को खांसी, जुकाम, बुखार होने पर नजदीकी चिकित्सक से जांच अवश्य करवाएं।

बच्चों के आईसीयू का प्रोटोकाल और मौजूदा स्थिति

  • वेंटीलेटर वाले प्रत्येक बेड पर एक नर्स होना चाहिए
  • सामान्य दो बेड पर एक नर्स की ड्यूटी होती है।
  • इस तरह पीआइसीयू के 38 बेड पर एक शिफ्ट में सामान्य तौर पर ही 19 नर्स चाहिए

बाल रोग विभाग का किया था निरीक्षण

आज ही बाल रोग विभाग का निरीक्षण किया था। वहां बच्चों की संख्या अधिक थी। एक पलंग पर दो से तीन बच्चों को भर्ती किया गया था। पलंग और जगह की कमी को लेकर विभाग प्रमुख से चर्चा कर इकाई के विस्तार के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा जाएगा। जिससे बच्चों को बेहतर इलाज मिल सके।

डा. सुधीर सक्सेना, अधीक्षक, जेएएच

इकाई का कर रहे हैं विस्तार

इस तरह की समस्या से बच्चों व स्वजन को राहत दिलाने के लिए इकाई का विस्तार किया जा रहा है। हाल ही में एचडीयू वार्ड तैयार किया गया। इसके बावजूद बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समस्या के समाधान को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा।

डा. आरकेएस धाकड़, अधिष्ठाता, जीआरएमसी