भोपाल की पहचान वीआईपी रोड की हवेली को असामाजिक लोग बना रहे हैं, नगर निगम मौन

कई शहर अपने शहर को सुंदर बनाने के लिए रात दिन एक कर रहे हैं, वहीं एक तरफ हमारा शहर भोपाल है, इस प्रदेश की राजधानी भी है, इसके बावजूद यहां एक दिन भव्य घटनाएँ सामने आती रहती हैं। भोपाल आने वाला हर स्पेशल एयरपी रोड अवश्य जाएं। अब कुछ असामाजिक तत्व इसकी प्रकृति को भी बनाने पर तुले गए हैं। ज़िम्मेदारी भी अपनी जिम्मेदारी से भाग ले रही है।

द्वारा पंकज श्रीवास्तव

प्रकाशित तिथि: सोम, 18 नवंबर 2024 11:58:37 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 18 नवंबर 2024 12:08:00 अपराह्न (IST)

भोपाल की पहचान वीआईपी रोड की हवेली को असामाजिक लोग बना रहे हैं, नगर निगम मौन
सड़क किनारे लगी नकली कलाकृति बनाई गई है।

पर प्रकाश डाला गया

  1. कर्बला पंप हाउस सड़क किनारे लगी लोहे की नकली तोरी
  2. कर्बला पंप हाउस के पास ही एक झुग्गी बस्ती भी है।
  3. इस लोहे की रेलिंग को बनाने के लिए इसे तोड़ दिया गया है।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। वीआइपी रोड स्थित करबला पंप हाउस के किनारे लगी लोहे की जाली को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है। इसका सड़क किनारे का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। खास बात यह है कि इस सड़क पर वीआइपी यात्रा की जा रही है, लेकिन बात यह है कि यह नकली तोड़ी इसकी सूचना नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है। जबकि यह सड़क बहुत पुरानी है। आज तक इस सड़क पर नहीं हुई ऐसी कोई घटना।

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यह पहला अवसर है जब रोड किनारे लगी नकली का निर्माण हुआ। कर्बला पंप हाउस के पास एक झुग्गी बस्ती है। बताया जा रहा है कि लोगों ने इस आयरन की रेलिंग को बनाने के लिए इसे तोड़ दिया है। इस संबंध में जलकार्य प्रभारी उदित गर्ग का कहना है कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जबकि वीआइपी रोड पर निगम द्वारा साइंटिस्टों के स्मारक स्थित हैं। इसके बावजूद कच्चे सड़क किनारे लगी जाली को तोड़ दिया गया।

आकर्षण का केंद्र वीआईपी रोड पर रहता है

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रोड के रास्ते इंदौर रोड से भोपाल के दर्शकों के लिए वीआईपी रोड से यात्रा करना सबसे सुखद रहता है। इसके अलावा भोपाल में आने वाले लोग या फिल्म के लिए भी रोड आकर्षण का केंद्र रहता है। इस पांच किमी सड़क में एक तरफ बड़े तालाब की लहरें अपनी तरफ खींचती हैं तो दूसरी तरफ पुराने शहर की विरासत और धरोहर अपनी तरफ खिंचती हैं। देखने को तो बस दस मिनट का रास्ता है, लेकिन मूवी देखने का समय भी कम पड़ जाता है। राजाभोज प्रतिमा के सामने सदैव भीड़ रहती है। दूर-दूर से लोग यहां फोटो खिंचवाने आते हैं और यहां की यादें अपने साथ ले जाते हैं। रात में रोड का नजारा शानदार दिखता है।

नगर निगम और जिला प्रशासन और पारंपरिक वास्तुकला की वास्तुकला

जिस स्थान से शहर की पहचान जुड़ी हो उसके प्रति नगर निगम के ऐसे नमूने कई साझा प्रश्न करते हैं। जिम्मेदारों को यह भी नहीं पता कि यह रस्ट कब बन गया और लोके नकली कब और कैसे निकला है। वहीं प्रशासन जिला ने इस ओर भी ध्यान नहीं दिया है। रही कसर स्थानीय जनप्रतिनिधि ने भी इस गंभीर मामले को संज्ञान में नहीं लिया है, वे अपने स्तर पर कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं।