पुलिस डिपो के बीच प्रशासन ने गोबर भूमि पर निशानदेही की

बिलासपुर-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो साल बाद शुरू होने वाले मार्ग पर जुराली गांव के दो किमी मार्ग पर भी विवाद नहीं हो सका। प्रशासन ने शेष बचे दो किलोमीटर में सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।

द्वारा प्रदीप बरमैया

प्रकाशित तिथि: सोम, 18 नवंबर 2024 01:13:25 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: सोम, 18 नवंबर 2024 01:13:25 पूर्वाह्न (IST)

पुलिस डिपो के बीच प्रशासन ने गोबर भूमि पर निशानदेही की

पर प्रकाश डाला गया

  1. बिलासपुर-अंबिकापुर एनएच 130 के शेष दोकम् निर्माण कार्य विवाद
  2. किसानों ने कहा- पहले सही वैज्ञानिक दो, फिर जमीन दोगे
  3. प्रशासन एवं प्रभावित- सामने

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा : बिलासपुर-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो साल बाद शुरू होने वाले जुराली गांव के दो किमी मार्ग का विवाद भी सुलझ नहीं पाया है। प्रशासन ने शेष बचे दो किलोमीटर में सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है। काफी संख्या में पुलिस बल ने गांव में छह साल पहले गोलियों से भूनकर निशानदेही की थी। साथ में ही रोलर लैंड का सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। सुरक्षा का दावा जुराली से पुलिस विभाग में किया गया था।

राष्ट्रीय राजमार्ग 130 (किलोमीटर 53.300 से.किलोमीटर 92.600) के अंतर्गत कुल 27 ग्राम प्रभावित भूमि का फोर-लेन अधिग्रहण किया गया है। 26 ग्रामों की भूमि रकबा 85994 वर्ग मीटर एवं निचली भूमि रकबा 19350 वर्ग मीटर) के अंतर्गत लगभग दो जिलों में रकबा 19350 वर्ग मीटर है। जाने के कारण सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका। कटरा के भूत चकचवा पर्वत जुराली से लेकर कापूबहरा तक सड़क के लिए विरोध प्रदर्शन की वजह से अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच को नहीं मिल पाएगा। अब इस मार्ग को पूरा किया जा चुका है। इसलिए प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी। रविवार को अमला, एनएच के अधिकारी पुलिस बल के साथ ग्राम जुराली क्षेत्र। किसी भी तरह का विरोध न हो, इसलिए पूरे गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इस बीच पेट्रोल पंप, प्रशासन और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही, एनएच के अधिकारियों ने जमीन की खुदाई कर सीमांकन का काम पूरा किया। मोटर पर मार्किंग करने के लिए एनएच द्वारा प्रत्येक 500 मीटर की दूरी पर पाइप लैंड का बोर्ड भी लगाया गया। आने वाले दिनों में इस शेष निर्माण कार्य को भी पूरा कर लिया जाएगा, ऐसा दावा है। इसमें उल्लेख किया गया है कि प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा तीन ई में निहित प्रोविडेंस के तहत पुरस्कार प्रदान किया गया है। आवश्यक दस्तावेज जमा करें। एनएच को धारा तीन डी की उपधारा (2) के अधीन केंद्रीय सरकार में निहित भूमि पर कब्ज़ा करने की कार्रवाई की गई।

दुकान नहीं मिला पर उखाड़ी गई सड़क

इस घटना को लेकर आ रहा है रिवॉल्वर। उनका कहना है कि छह साल पहले जमीन खाली कराने के बाद भी अभी तक जमीन की मरम्मत नहीं हुई है। ग्रामीण, भूमि का मठ के अनुसार मांग कर रहे हैं। ग्राम्य शत्रुघन लाल पटेल ने बताया कि वार्ड 12 जुराली में गरीब भूमि के आश्रम के लिए कोरबा से लेकर रायपुर, बिलासपुर तक की दौड़ लगाई गई लेकिन राहत नहीं मिली है। सही प्रमाणन आधार पर जमीन दी जाएगी। ग्रामीण चंद्रभान सिंह ने बताया कि जबरन खेत में सड़क बनाना चाह रहे हैं, ग्राम ज़ुरैली और कापूबहरा में दोनों जगह की जमीन का स्मारक नहीं मिला है। उनके नाम प्रकाशन से छूट दी गई है। मिट्टी दे देंगे, फिर उस पर सड़क या खेती करें। हम किसान हैं, वैज्ञानिक नहीं मिल रहे हैं सड़क पर शव रख देंगे।

कोर्ट रीच पर मुकदमा चला

इस मार्ग के लिए लगभग 112 किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों ने लेक कोर्ट तक पहुंच की मांग को पूरा किया। जुराली के किसान इरशाद काजी का भी कहना है कि उनकी जमीन का समझौता नहीं हुआ है, जबकि एनएच का दावा है कि उनका फैसला जमीन पर आधारित होगा। इरशाद काजी ने कहा कि किसानों ने केंद्रीय परिवहन मंत्री से भी मुलाकात की, तब उन्होंने कहा कि अगर शासन के समर्थकों से किसान सहमत नहीं हैं तो पुनः आरंभ करने का कार्यक्रम आर्बिट मिशन में जा कर स्थापित करें। जो भी राशि होगी, प्रशासन के प्रतिवेदन किसानों को राशि दे देगा।

वर्तमान में कटघोरा शहर के अंदर से गुजर रहे वाहन

एनएच नहीं बनने के कारण सेपुर मोहन-सुतरा के पास से छोटे-बड़े सभी प्रकार के वाहन कटघोरा शहर के अंदर प्रवेश करते थे और बस खड़े होकर अंबिकापुर की ओर जाते थे। इससे संबंधित वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ा, साथ ही शहरवासियों को भी रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ा। एनएच ग्राम जुराली में सड़क निर्माण का कार्य पूर्ण से होना चाहिए। इसके साथ ही बिलासपुर-अंबिकापुर के मध्य बर्चस्व वाले भारी समाज को कटघोरा शहर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। इससे कटघोरा शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होने के साथ ही डुगर्टन की भी उम्मीद कम होगी। इसके अतिरिक्त डिज़ाइन के लिए न केवल 10 किमी से अधिक की दूरी कम होगी बल्कि डेडलाइन में लगने वाले अतिरिक्त समय की बचत भी होगी।