डीजी जेल ने बताया कि 70 कैदी पैरोल से वापस नहीं आये

कोरोना काल में कई कैदी प्रदेश की जेलों से पैरोल लेकर बाहर निकले थे। इसके बाद वे आज तक जेल से वापस नहीं आये। हाई कोर्ट ने इसे नॉमिनल में लेकर दूसरे रिटर्न को लेकर जाया जा रहा है। केस की पिछली समीक्षा 30 सितंबर 2024 को हुई थी।

द्वारा योगेश्वर शर्मा

प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 01:13:04 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 01:13:04 पूर्वाह्न (IST)

डीजी जेल ने बताया कि 70 कैदी पैरोल से वापस नहीं आये
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय

नईदुनिया न्यूज, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सोमवार को पैरोल पर कैंची की वापसी न होने को लेकर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस के डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई में डीजी जेल ने शपथ पत्र में पैरोल पर बाहर गए और बाद में वापस न आने वाले वारंट के बारे में बताया। कोर्ट ने अब इस पूरे मामले में एक बार फिर ताजा रिपोर्ट शपथ पत्र के माध्यम से देने की अनुमति नहीं दी है।

कोरोना काल में कई कैदी प्रदेश की जेलों से पैरोल लेकर बाहर निकले थे। इसके बाद वे आज तक जेल से वापस नहीं आये। हाई कोर्ट ने इसे नॉमिनल में लेकर दूसरे रिटर्न को लेकर जाया जा रहा है। केस की पिछली समीक्षा 30 सितंबर 2024 को हुई थी। कोर्ट ने डीजी जेल को शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी जारी करने के आदेश नीचे दिए गए थे। आज मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिंह और न्यायाधीश अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डबल बेंच मामले की सुनवाई हुई। सरकार के सचिव ने हाई कोर्ट द्वारा 30 सितंबर तक जारी आदेश के परिपालन की जानकारी दी। इसमें डीजी जेल के हाफनामे को सरकारी वकील ने पेश किया। समीक्षा के दौरान शपथ पत्र के माध्यम से दी गई जानकारी में बताया गया कि 83 कैदी पैरोल बाहर थे, जिनमें से 10 लोगों को पकड़ लिया गया था, जिनमें से तीन की मौत हो गई थी, अभी भी 70 कैदी पैरोल लेकर वापस नहीं आए हैं। इसके अलावा बताया गया कि 23 अक्टूबर 2024 को राज्य के उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने के लिए प्रदेश के सभी अछूतों के रिपोर्ट पुलिस अधीक्षकों को विशेष अभियान चलाने के लिए दैनिक आधार पर निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश डिवीजन बेंच ने अब इस पूरे मामले में अयोग्य जेल से एक बार ताजा रिपोर्ट शपथ पत्र के माध्यम से ली है। केस की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होनी है।

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एनएचएआइ के रीजनल डायरेक्टरेट हाई कोर्ट तलब

प्रदेश में खस्ताहाल सड़कों को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दो दाखिल याचिका पर एक साथ सुनवाई चल रही है। खस्ताहाल सप्ताहांत के कारण हो रही साए को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने स्टूडियो का अध्ययन किया। सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से पेशी के जवाब में लेकर उच्च न्यायालय ने पूछा कि कितने आकलन किए गए और कितने बाकी हैं। खराब सड़कों के कारण हो रही खरीदारी को रोकने के लिए क्या करें उपाय। एनएचएएआई के रिजनल निदेशक को शपथ पत्र के साथ जानकारी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिलासपुर के एक कट्टर ने सबसे पहले बिलासपुर नगर निगम की खस्ताहाल प्लाजा को स्थापित करने और हो रही सप्लाइ पर रोक लगाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अंतिम आवेदन पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने स्वनामधन्य स्थित प्रदेशभर की सड़कों की स्थिति को लेकर पीआइएल के रूप में रजिस्टर्ड करने के निर्देश जनरल को दिए थे। साथ ही दोनों अभिलेखों को एक साथ सम्मिलित कर साथ-साथ श्रवण की व्यवस्था बनाई गई। सोमवार को पीआइएल की सुनवाई के दौरान एनएचएआइ पेश्स रिस्पॉन्स को लेकर डिवीजन बेंच ने एलओबीओएलएम और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। बता दें कि डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के चार जिलों को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों की पेशी रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया था। कोर्ट कमिश्नरों ने प्रदेशभर की सड़कों का निरीक्षण करने के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की थी। साथ ही ब्लैक स्पैट को लेकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट बनाई थी। आदिवासियों की स्थिति को लेकर कोर्ट कमिश्नरों ने पूरी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है। ब्लैक स्पैट में जाने वाले एकॉलेजिक काम को लेकर सुझाव भी नीचे दिए गए हैं। इसके अलावा खराब सड़कों के कारण हो रही दुर्घटनाओं और लोगों की मौत का भी जिक्र है।

मुख्य न्यायाधीश ने पूछा,फंड का सदुपयोग होगा या फिर मूर्खता

निरीक्षण के दौरान विधि महाधिवक्ता कार्यालय के अधिकारियों के अलावा बैस्ट जनरल के ने डिवीजन बेंच को जानकारी दी थी कि राज्य शासन ने फंड जारी किया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश राकेश सिन्हा ने मजबूत इरादों वाली पूछताछ की थी कि क्या समर्थकों का समर्थन किया जाएगा या फिर सही काम किया जाएगा।