कोरबा में पाठा गांव में आज्ञा बनने से लहलाहोई कोदो व रागी की फसल
वर्तमान में किसान एकमात्र संपत्ति में ही अपनी खेती कर रहे हैं। सिंचित रकबा में वृद्धि होने से क्षेत्र के किसान रबी में मक्का की खेती कर सकते हैं। इसके अलावा सब्जी की खेती के साथ-साथ स्थानीय लोगों का रोजगार मिल भी जाता है।
द्वारा सुरेश कुमार देवांगन
प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 12:34:38 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: मंगल, 19 नवंबर 2024 12:34:38 पूर्वाह्न (IST)

पर प्रकाश डाला गया
- मीट्स की खेती को बढ़ावा देने की पहल
- जल संसाधन को मिला है 4.13 करोड़ का कारोबार
- स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार और शिक्षा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: जल संसाधन विभाग को पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पाठा में 4.13 करोड़ की लागत से नामांकन निर्माण की लागत मिली है। विभाग ने भू-अर्जन के साथ निर्माण कार्यों के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर ली है। आगामी जून माह तक काम पूरा कर लिया जाएगा। इससे न केवल क्षेत्र के 1093 हेक्टेयर कृषि रकबा में सीना सुविधा की वृद्धि होगी, बल्कि कोदो व रागी (मिलेट्स) की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
भूदृश्य दृष्टि से टापू बसाहट पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड वाले में छिपकली का असर अधिक होता है। इस विकासखंड में बंगो बांध जैसा वृहत् परियोजना परियोजना के बाद स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका। पहाड़ी क्षेत्र का वर्षा जल वैकल्पिक बह जाता है। प्रतिबंध के लिए स्थानीय स्तर पर पहले कोई स्थान नहीं होना चाहिए। किसानों की स्थिति से लेकर स्थानीय किसान तक अब भी असहाय हैं। इन अंशों को देखते हुए शासन स्तर पर सीलम की लॉकश की जा रही है। उन्हें मूर्तिमान रूप देने के लिए सचिवालय जलसंसाधन विभाग से जा रही है। इस कड़ी में पहाड़ी इलाकों से ग्राम पथ के मैदानी भूमि का चयन किया गया है। वर्ष 2017 में निर्माण कार्य में बदलाव मिला था। भू-अर्जन की समस्या का समाधान करने में छह साल का समय लगा। इस अवधि में जमीन की कीमत में वृद्धि, लागत में भी वृद्धि हुई है।
पहाड़ी क्षेत्र होने की वजह से यहां धान के जश्न कोदो और रागी की खेती ज्यादातर किसान करते हैं। असिंचित होने के कारण अधिकतर रकबा खाली पड़ा रहता है। लाखों की लागत से तैयार करने वाले को पानी को दूर करने के लिए दस्तावेज में दो नहरों का निर्माण भी प्रस्तावित है। दांयी तट नहर की लंबाई 1140 मीटर और बायी तट नहर की लंबाई 2250 मीटर होगी। खोज में पर्वतीय क्षेत्र से बहकर आने वाली पानी का पानी संग्रहित किया गया। प्राकृतिक जल का सदुपयोग स्थानीय लोगों के अलावा मत्स्यपालन के लिए भी रोजगार मिल सकता है। ग्राम पाठा व बघोरीडांड के आसपास के मार्गदर्शन में जला वास्तुशिल्प की जाएगी। जज़बान बाहुल्य क्षेत्र में सीलन सुविधा नहीं होने के कारण स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में अब भी सुधार नहीं हो पा रहा है। सिंचित रकबा में स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार और शिक्षा से बढ़ोतरी।
वन विभाग कर रहा है मिलेट्स की संख्या
कोदो रागी को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से पिछले तीन साल से सफलता की जा रही है। वन विकास समिति के मध्य से सत्य तय जाने के बाद खुले बाजार में भी कोदो की समस्या 50 कुत्तों के बच्चे में हो रही है। खास बात यह है कि जिले के कटघोरा वन मंडल के कासनिया डिपो में कोडो कंपनी यूनिट शुरू हो गई है। तीन करोड़ की लागत से स्थापित इस इकाई से कोदो की कुट्टी से कमाई की प्रक्रिया के बाद उसे बाजार में बिक्री की जा रही है।
अनाज के दलहन-तिलहन की भी होगी खेती
जिला कृषि विभाग की माने तो पोंडिउपरोड़ा विकासखंड के कृषि क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी है। ज्यादातर किसान धान की फसल की उपज लें। निर्माण के बाद स्थानीय किसान रबी फसल के लिए विशेष रूप से चना, मटर की खेती कर पैसा। कम समय में तैयार होने वाली मक्का की खेती भी क्षेत्र में हो जाएगी।
पहाड़ी क्षेत्र में वैरायटी बाह जाने वाली वर्षा जलसंग्रह के लिए पथ संस्था का निर्माण किया गया है। निर्माण के लिए भू-अर्जन एवं निविदा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एक खोज के अनुसार, एक क्षेत्र के किसान खेती के स्थान पर रबी की भी खेती कर सकते हैं। मीट्स की खेती को भी मिलेगा बढ़ावा।
एसएलओ, कार्यपालन आर्किटेक्ट, जल संसाधन

